Tuesday, 10 March 2015



चेतो.., मोदी सरकार.., अब कश्मीर को शेख अब्दुल्ला युग की सरकार मत बनाओं.., मैं लाल बहादुर शास्त्री बोल रहा हूँ , (आओं खेले स्वदेशी रंग .., लालबहादुर शास्त्री  और वीर सावरकर के विचारों के संग- भाग-२
)
१.       मोदीजी आपने तो ५६ इंच का सीना दिखाकर, चुनाव जीता.., जबकि मेरे शरीर की लम्बाई भी ५६ इंच नहीं थी..., आप तो चाय बेचकर.., अपने जीवन की गरीबी दिखाकर,  प्रधानमंत्री बने.., मेरी गरीबी को तो, मैं हिन्दुस्तान की गरीबी से  देखता था.., मेरे पास तो चाय पीने के भी पैसे नहीं थे.., और प्रधानमंत्री बनने के बाद मेरा एक ध्येय था.., देश के गरीबों में विदेशी खून के बजाय, “जय जवान-जय किसान” के स्वाभिमानी देशी खून से देश में श्वेत क्रांती से, दूध की नदियाँ बहाकर देशवासियों को रिष्ट – पुष्ट बनाकर.., जवानों व किसानों के जज्बे से हमारा देश अंतर्राष्टीय पटल पर छा  गया ...
२.       मुझे तो पकिस्तान के चंगेज खान..,  जनरल अयूब खान ने, हमारे देश में आक्रमण करते हुए   कहा था..,  यह चार फूट कद का , बच्चे की तरह दिखने व बच्चे की आवाज वाला, प्रधानमंत्री क्या यह लड़ाई लड़ पाएगा..., तब इस युद्ध की चुनौती स्वीकारते हुए मैंने कहा “मेरी काया की लम्बाई से उसकी नींव, जमीन में कई गुना गहरी है”  
३.       मोदीजी आप तो अपना ५६ इंच का सीना कह कर दंभ भरते हो..., मैंने जब से मैंने, होश संभाला. मैं तो हर देशवासियों में “५६ इंच का दिल” देखता था.., और इस दिल में २०० सालों से , विदेशी खून का विष डाला दिखता है..., सत्ता परिवर्तन के बाद में भी इसी खून के खेल से, देश के टुकड़े कर, विदेशी खून में संविधान से जातिवाद, भाषावाद, धर्मवाद का खून डालकर, आज भी राष्ट्र इसी खून से त्रस्त है.., और यह देशवासियों के दिमाग में इतने  गहन रूप से भर दिया कि आज भी  विदेशी भाषा.., आचार .., विचार.. के बिना  देशवासी रोटी नहीं  खा सकता है..
४.       प्रधानमंत्री बनने के बाद, देश की नेहरू की गन्दगी दूर किए बिना.., देश में राष्ट्रवादी धारा का प्रवाह नहीं होगा यह मेरा प्रबल मत था.., शेख अब्दुल्ला द्वारा “द्विराष्ट्रवाद के नेहरू खेल” का मुझे अच्छी तरह  आभान था.., इसलिए,शेख अब्दुल्ला की शेखी मैंने उनको गद्दी से उतारकर.., कांग्रेसी SNAKE को SHAKE कर उन्हें भी अपनी हड्डियों की श्रंखला के टूटने का भीषण आभाष हो गया था ..,  आज जो धारा ३७० की आड़ में जो खून का तांडव खेला जा रहा है.., उसके निदान के प्रयास के पहिले ही ताशकंद में मेरी ह्त्या कर, देशी ताकतों ने विदेशी हाथों से मेरे देश के स्वर्णीम युग का स्वप्न छीन लिया.      
५.       मोदीजी मेरा जीवन की शुरुवात तो गरीबी से हुई.., और मेरी ह्त्या तो सत्ता में भ्रष्टाचार निकालने व देश को उन्नत से ५० करोड़  देशवासियों के मुट्ठी बल को स्वर्णिम युग से देदिव्यमान करने के लिए सत्त्तालोलूप्तों ने  देश की प्रतिभाओं की जागृत होने के खौफ से..., माफिया जो, विदेशी हाथ, विदेशी साथ, विदेशी भाषा, विदेशी विचार से देश को २०० साल लूटने के खेल के बाद भी एक समानांतर गुलामी का जाल बुन रहें थे..., इसकी बू.., मुझे जवाहरलाल नेहरू के काल से ही आ रही थी
६.       मैंने तो अपने जीवन के ध्येय को .., इमानदारी से राष्ट्र की सेवा को समर्पीत कर .., मैंने इमानदारी के जूनून से ही पार्टी के व सरकार पदों में काम किया.., मेरे जीवन में, नेहरू काल में लाखों कार्यकर्ताओं. राजनेताओं ने.., गांधीवाद की आड़ में साधुवादी बनकर, देश को लूटा.., इस माहौल को देखकर भी मैंने उनकी छाया से जीवन में छांव लेने की कल्पना तक नहीं की थी.   
७.       मुझे, मेरे जीवन में जितने भी पद मिले उसे मैंने भारतमाता का गौरव बढ़ाने के लिए समर्पित रहा, मैं बहुत गहनता से जुटा रहा.., कई बार नेहरू की नौकरशाही की लुंज-पुंजता से, वे भ्रष्टाचार से पूंजी बना गए..., इसका दुःख मुझे बहुत होता था.., क्योंकि उस वृक्ष के (जड़ का) राजा देश के  प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे..., मैंने कठोर मेहनत के बावजूद, असफलताओं  के लिये कभी अफ़सोस नहीं किया, और राजीनामा देता रहा
८.       इसका लाभ, मेरे प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लिया.., मुझे तो वे मोहरा बनाकर अपनी सत्ता चमकाते रहें.. और देशवासियों को मेरे राजीनामा से राजी कर .., शांती के मसीहा बनकर, नोबल पुरूस्कार जीतने के फेर में सेना को नो-बल कर दिया था
९.       हमारे आयुद्ध कारखाने में, हथियार बनाने के बजाय चूड़ी का कारखाना लगाकर दुश्मनों को देश में “आकर -युद्ध” की प्रेरणा से  देशवासियों को चूड़ी पहनाने का जामा/खेल खेल रहे थे...,
१०.   नेहरू की मृत्यू के बाद मैं तो प्रधानमंत्री पद का काबिल भी  नहीं था.., दिग्गजों के आपसी बंदरबांट की लड़ाई मे, मुझे प्रधानमंत्री पद दिया गया .., तब मुझे लगा,  “अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे.., अब इन नेताओं राजनैतिक जीवन को रेगिस्तान की मरूस्थली बनाओं..
११.   मैं कायल था तो सिर्फ और सिर्फ, वीर सावरकरजी  की विचारधारा से, जिन्होंने १९५४ में नेहरू को चेताया था कि चीन हम पर आक्रमण करने वाला है..., देश की सुरक्षा के लिए अणुबम के साथ हाइड्रोजन बम बनाने  व स्कूलों में सैनिक शिक्षा अनिवार्य कने का मंत्र दिया था.., उलट १९६२ में चीन द्वारा एकतरफा जीत से नेहरू, वीर  सावरकर से बौखालागाये थे..इस चेतावनी का अनुसरण न करने की अपनी गलती छुपाने के बजाय, उनहें उनके  घर “सावरकर सदन” में नजरबन्द कर दिया और उनके पत्रों की भी जांच शुरू कर दी.. अंत में थल सेना के जनरल करिअप्पा ने अपना पद त्यागते हुए खा था.., यदि हमने वीर सावरकर की बात मानी होती तो चीन आक्रमण के बारे में भी नहीं सोचता था. इस राष्ट्रवादी की आर्थिक परिस्तिथी व उनके अतुल्य देशभक्ति से प्रेरित होकर,  मैंने पेंशन के रूप में आर्थिक सहायता प्रदान करने से मेरे पार्टी में खलबली मच गई थी
१२.   मेरे इर्द गिर्द सत्ताखोरों की फ़ौज.., इसी भ्रम मे थी कि मैं पाकिस्तान से युद्ध हार जाऊंगा.., और मैं जल्द ही इस्तीफा दे दूंगा.., मेरी राष्ट्रवादी विचारधारा से पकिस्तान तो बह गया था, और मेरे दिग्गज साथियों को अपना  राजनैतिक जीवन, बहने का खतरा मंढरा रहा था...
१३.   माफियाओं की दूकान बंद हो रही थी..., मैंने कभी नेहरू के, गांधी - नेहरू द्वारा समृद्ध टाटा बिड़ला बजाज के मिजाज को देखकर उनके तलुवे नहीं चाटे, मुझे तो ५० करोड़ गरीबों के तलुओ की मजबूती का इतना अभिमान व विश्वास  था कि देश की कटेंली/ कटींली राह में, चलकर भी उनके तलुओं को काँटों की चुभन नहीं होगी..., मुझे कांग्रेस से भारी उद्योग न लगाने का भारी विरोध करने पर कहना पड़ा, जैसे नेहरू को गांधी के विचार पसंद नहीं थे उसी तरह, मुझे गांधी के स्वदेशी विचारसे लघु व ग्रामीण उद्योग से गरीबों को अमीरी रेखा तक पहुँचाना है.., देश का तन-मन धन गरीबों के उत्थान से ही, मजबूत भारत का निर्माण होगा   
१४.   मुझे तो कांग्रेस सरकार ने १९ महीने ही दिए और देश के स्वर्णीम काल के भविष्य देख पाने के पहिले ही..., मेरी ह्त्या कर दी.., मेरी कांग्रेसी पार्टी ही नहीं विश्व को भी भयानक डर था कि मेरा दृण निश्चय था .., देश, विदेशी हाथ, विदेशी बात, विदेशी साथ, विदेशी विचार, विदेशी संस्कार के लगाम का पूर्ण सफाया करने का संकल्प..., जो चंद वर्ष में मेरे कार्यकाल में ही पूरा कामयाब होना था , और देश की खान खदान, ईमान देशी-विदेशी माफियाओं हाथों से निकलने का डर ही मेरे ह्त्या का कारण बना .
१५.    आज ४९ सालों बाद मैं भी.., रूस के ताशकंद में बंद कमरे में रात में १ बजे दूध पीने के बाद में विदेशी रसोईये का धोखे से जहर पिलाने के बाद की घुटन. को.., आज मेरे, देशवासियों में महसूस कर रहा हूँ, फर्क इतना है कि मैं घुटन से मारा गया, और देशवासी घूट घूट के जी रहा है.. कैसे विदेशी हाथ वाले, देशी उद्योगपतियों की आड़ में देश में माफियाराज से देश को गर्त में डालकर आज प्रति व्यक्ती ५० हजार रूपये का कर्ज करने व जवानों व किसानों का पसीना विदेशी बैंकों में कैद कर रखा है 
१६.   चेतो मोदी सरकार.., राष्ट्र तो देशवासिओं के १२५ करोड़ मुठ्ठी बल से उन्नत होगा, विदेशी धन से देश की अवनीती होगी, इस नीती से महंगाई के जूते से जनता की दुर्गती होगी..
कर लो राजनेताओं को मुठ्ठी मेंके माफियाओं के नारों ने देश को कर्ज से डूबाकर, उजाड़ दिया है. किसानों की भूमि छीनकर,, उसे विकासके बहाने देश का बेगानाबना दिया है.., किसान आज कैसा इंसान बन गया है.., आत्महत्या ही उसका धर्म बन गया है ....

मेरी जीवन की गाथा तो बहुत लम्बी है.... चतो मोदी जी यह देश सावरकर की धारा से ही आगे बढेगा 


Sunday, 8 March 2015



महिला दिवस - देश की दो तस्वीरों से, हिला देश ,

१.       पहली.., भांड मीडिया ने जेल में बलात्कारी को जज बनाकर उसके बयान को प्रस्तुती स्वरुप बनाकर, निर्भयता के TRP से मालामाल.., पहले तो हमारे देश को नागों की पूजा व दूध पिलाने वाला “पाषण युग का देश” बताकार.. हमें गयी गुज़री कौम से “नवाजते” रहे.., और हमारे सत्यजीत रे से अन्य  फिल्म निर्माताओं ने इस आग में घी डालकर अपने व्यक्तीत्व को चमकाकर, इसे “जय हो” फिल्म से अंतराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त की.., ऑसकर फिल्म की रेस में दौड़ते रहे.

२.       दूसरी..., देश को दीमक की तरह खोखला करने वाली हमारी क़ानून शाही द्वारा देश के बलात्कार व अन्य गिरफ्तार अपराधियों का जेल में सत्कार, नागालैंड के दीमापुर निवासियों ने कोबरा नाग बनकर..., लुंज पुंज क़ानून, जो जनता को ढेंगा दिखा रहें थे इन दीमकों को चट- कर देश में मीडिया-माफिया-मानवाधिकार..., जो इस “मावा” के खेल पर  पर ६८ सालों से अपना अधिकार मानता था.., उसे जनता ने “देश का धिक्कार” बना कर,  धुल चटाकर.., एक नारा दे दिया है..., फैसले में फासला मत बढ़ाओ , जनता पर जुल्म मत ढहाओ.., सावधान...!!!, अब जनता आ रही है.. न्याय की रस्सी लेकर...   
     महिला दिवस.,.नारी..,तुम्हारे लिए क्या मिला, दिवस.., तुम  तो अभी भी हो बेबस...  


३.       मर्दानी ..., अब भरवाओं.., मर्दों से पानी...
राजनीती से समाज ने तुम्हारी पवित्रता को पतितता से, बेड रूम (BED ROOM-शयनयान) की वस्तु बनाकर, भष्टाचार की ऊंची उड़ान भरी है और देश का बेड-रूप बना दिया है....
नारी तुम सब पर भारी..., अब अपने मर्दों (सरपंच से नेता) से कहों..., अब बेड रूम में तुम्हारे प्रपंच का खेल नहीं चलेगा..., भ्रष्टाचार के प्रपंच की पतितता से अब देश में नारी की कुरूपता का व्यव साय नहीं चलेगा 
४.       आओं.., अपने मर्दों से कहों.., राजनीती की बातें BED-ROOM में नहीं, घर के DRAWING –रूम (बैठक कमरे) में हो..., ताकि, मैं देश की एक नई तस्वीर बना सकूं...
अब तक तो.., देश के मर्द सत्ता के मद में देश का मधु पी रहें थे .....
५.       आओं..., मर्दों से कहो..., देश की महिलाओं को जगाकर कहो.., अब, हम तुम्हारी बैसाखी नहीं..., बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं..., अब हमारे संस्कारों की सम्मानता से.., हम देश के हर नागरिकों को समान प्यार से, उनके जीवन की प्रेरणा को और उज्जवलित करेंगें... 

नारी..., तेरा प्यार दिल के आँसुओ से भरा रहता है, तुम्हारा दिल तो वात्सलय से 24 घंटे धडकता.. है... हर दु:ख पहुचाने वाले पति से बच्चे हर सख्श तक को आप माफ कर देती हो.. तकि आप की आँसू से वे अपने गलती का अहसास समझ कर प्रायश्चित (सुधर सके) कर सके, 


६.       आप तो माँ की रूप में , सौ बार अपने आँसुओ से मौका देती है....माँ.., तेरे आँसु सागर से भी गहरे है. लेकिन तेरे सागर के आँसु तो लोगो को जीवन मे कैसे तैरना है,वह सिखाती है...आज तक तेरे आँसु के सागर कोई भी डूबा नही है...क्यो कि इसमे वात्सलय का नमक है...

आपके खून में ही तो देश का वात्सल्य , अभिमान व देश की हरियाली छीपी है..., तुम आरक्षण की वस्तु नहीं देश के संरक्षण की धारा हो...


हमारे समाज के पिस्सुओं ने, देश की बच्चियों से नारी को पतितता से वेश्यावृती के धन से अब बलात्कार की हुंकार भर कह रहें हैं..., युवाओं का यह है अधिकार.., है... 

नारी.., समाज के पिस्सुओं ने देहव्यापार में धकेले ढकेले कर..., तुम्हारी पतितता में भी पवित्रता है.., 
नारी.., इंसानों में सर्वोत्तम तुम ही और केवल तुम ही हो... 
वेश्या पतिता नहीं होती, पतन को रोकती है .
पतित जन की गन्दगी , अपने ह्रदय में सोखती है/
जो विषैलापन लिए हैं घूमते नरपशु जगत में ,
उसे वातावरण में वह फैलने से रोकती है.

यही तो गंगा रही कर , पापियों के पाप धोती ,
वह सहस्रों वर्ष से , बस बह रही है कलुष ढोती,
शास्त्र कहते हैं कि गंगा मोक्षप्रद है, पावनी है ,
किसलिए फिर और कैसे वेश्या ही पतित होती ?

मानता हूँ , वेश्या निज तन गमन का मूल्य लेती ,
किन्तु सोचो कौन सा व्यापार उनका ,कौन खेती ?
और यह भी , कौन सी उनकी भला मजबूरियां हैं ,
विवश यदि होती न, तो तन बेचती क्यों दंश लेती ?

मानता यह भी कि वेश्यावृत्ति , पापाचार है यह ,
किन्तु रोटी है ये उनकी , पेट हित व्यापार है यह ,
देह सुख लेते जो उनसे, वही उनको कोसते भी,
और फिर दुत्कार सामाजिक भी , अत्याचार है यह,
गौर से देखो , बनाते कौन उनको वेश्याएं ,
और वे हैं कौन, जो इस वृत्ति को खुद पोषते हैं ?
पतित तो वे हैं , जो रातों के अंधेरों में वहां जा -
देह सुख भी भोगते हैं , और फिर खुद कोसते हैं .

Friday, 6 March 2015

अभी हम फिरंगियों के २०० वर्षों की गुलामी से आजाद हुए हैं, क्या हम फिर से आर्थिक गुलामी से देश के इतिहास में कैद होने जाएगें


मैं लाल बहादुर शास्त्री बोल रहा हूँ , (आओं खेले स्वदेशी होली.., लालबहादुर शाश्त्री और वीर सावरकर के विचारों के संग)  
१.चेतो मोदी सरकार.., राष्ट्र तो देशवासिओं के १२५ करोड़ मुठ्ठी बल से उन्नत होगा, विदेशी धन से देश की अवनीती होगी, इस नीती से महंगाई के जूते से जनता की दुर्गती होगी..
“कर लो राजनेताओं को मुठ्ठी में” के माफियाओं के नारों ने देश को कर्ज से डूबाकर, उजाड़ दिया है. किसानों की भूमि छीनकर,, उसे “विकास” के बहाने देश का “बेगाना” बना दिया है..,  किसान आज कैसा इंसान बन गया है.., आत्महत्या ही उसका धर्म बन गया है .

आप तो, TIME पत्रिका में देशी-विदेशी समर्थन से छाये..., मेरी टाइम पत्रिका में चित्र  विदेशीयों शक्तियों द्वारा मेरे देश का लोहा मानने से छपा , मेरा  चित्र तो देश के किसानों व जवानों के जज्बे की सलामी स्वरुप छपा.., और उसके बाद, एक सुनियोजित TIMING में मेरी जान भी ले ली   

२. आज माफिया वर्ग, जनता की नींद कैद कर. धन के बिस्तर में सोया हुआ है, इन एक एक लोगों के गरीबों  से चुराई गई नींद के नोटों को वापस लाने से करोड़ों लोगों को सुख चैन मिलेगा.., मोदीजी...,  बच्चा घर में और ढिंढोरा दुनिया में...,  गरीबों के कटोरे में निवाला नहीं.., इस देशी BLACK मनी को BACK मनी से देश का उद्धार से विदेशी उधार भी वापस होगा. MAKE–IN-INDIA  के देशी धन से ही राष्ट्र बल मजबूत होगा.., विदेशी माफिया के बैंक के बीज के अवशेष अभी भी हमारे देश में ही हैं...

३. मुझे तो कांग्रेस सरकार ने १९ महीने ही दिए और देश के स्वर्णीम काल के भविष्य देख पाने के पहिले ही..., मेरी ह्त्या कर दी.., मेरी कांग्रेसी पार्टी  ही नहीं  विश्व को भी भयानक डर था कि मेरा दृण निश्चय था ..,  देश, विदेशी हाथ, विदेशी बात, विदेशी साथ, विदेशी विचार, विदेशी संस्कार के  लगाम का पूर्ण  सफाया  करने  का संकल्प..., जो चंद वर्ष में मेरे कार्यकाल में ही  पूरा कामयाब होना था ,  और देश की खान खदान,ईमान देशी-विदेशी माफियाओं  हाथों से निकलने का डर ही मेरे ह्त्या का कारण बना .

४. आज ४९ सालों बाद मैं भी.., रूस के ताशकंद में बंद कमरे में रात में १ बजे दूध पीने के बाद में विदेशी रसोईये का धोखे से जहर पिलाने के बाद की घुटन. को.., आज मेरे, देशवासियों में महसूस कर रहा हूँ, फर्क इतना है कि मैं घुटन से मारा गया, और देशवासी घूट –घूट के जी रहा है..  कैसे विदेशी हाथ वाले, देशी उद्योगपतियों की आड़ में देश में माफियाराज से देश को गर्त में डालकर आज प्रति व्यक्ती ५० हजार रूपये  का कर्ज करने व जवानों व किसानों का पसीना विदेशी बैंकों में कैद कर रखा है
मोदीजी..,  आपके तो ९ महीने की सरकार में, आश्वासन से गरीब अब भी घुटन की श्वास में जी रहा है.


५. देश की भूखमरी को जो नेहरू के कार्यकाल में, अमेरिका का सड़ा गेहूं जो सूअर भी नहीं खाते थे, हम हिन्दुस्तानियों को वह निवाला दिया जाता था.., वह,मैंने वह बंद कर, सम्पूर्ण देशवासी एक दिन भूखे (उपवास) रखेंगे व देश का अनाज बचायेंगे.., इस पर अमल करने के के लिए मैंने परिवार  के १०  से ज्यादा लोगों द्वारा उपवास रखकर, इस देश के दर्द का अहसास करवाकर देशवासियों को आव्हाहन किया था.., और पूरे देश ने सोमवार के दिन मेरा आदेश मानकर गर्वित थे
मैंने  प्रथम संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि मेरी शीर्ष प्राथमिकता खाद्यान्न मूल्यों को बढ़ने से रोकना है और ऐसा करने में मैं  सफल भी रहा, मेरे क्रियाकलाप सैद्धान्तिक न होकर पूर्णत: व्यावहारिक और जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का था .

६. जागो..!!!,  मोदी सरकार, मेरे पास तो देश के किसानों के १५०  करोड़ का पशु धन था, जो आज भी  किसानों का “सोना का बिस्कुट” है, इसे, मान धन मानकर, सम्मान देकर.., देश कृषी सोने से, श्वेत क्रांती से गौरान्वित हुआ था, अब आप भी पिछली सरकारों की तरह कत्लखानों को रियायत देकर, देश के लूटेरों से, विदेशी धन की प्यास से किसानों के हाथ कट जाने से..., आत्महत्या को मजबूर कर रहें हैं...आज देश के ३० करोड़ पशु  धन से, देश के ३ करोड़ नवजात शिशु, प्रतिवर्ष  कुपोषण का शिकार होकर, देश भूखमरी के पाषण युग में जा रहा है.  

७. मैं तो देश की आत्मा में किसान, देह में जवान व मस्तिस्क में  विज्ञान की विचारधारा से स्वर्णीम हिन्दुस्तान की राह पर चल रहा था.. मैं नहीं चाहता था देश को उद्योपति जनता को लूट कर, राजनीती में माफिया उद्योग का निर्माण हो, इसलिए मैंने बढे उद्योग के जगह लघु उद्योग से समृद्ध कर, जवानों व किसानों में समृद्धी  का मंत्र देकर हमारे जय जवान जय किसानों ने देश में हरित क्रांती के साथ श्वेत क्रांती से देश में दूध के नदियाँ व जवानों ने अपने राष्ट्रवादी खून से दुश्मनों के सामने हमारे दोयम दर्जों के हथियार होने के बावजूद, हमारे जवानों के हाथों में देश के जज्बे के निर्माण से हमने पकिस्तान को धूल चटाई थी

८. देश की  २० करोड़ लुंजपुंज नौकरशाही को जगाओ.., पेंशन के लालच / ललक में देश को टेंशन में डालने वाले सरकारी कर्मचारियों को, राष्ट्रवादी जज्बे से जगाओ..,  देश की खान खदान नीजी हाथों में देने से पहिले, आप जो ६५% आबादी युवा होने का दंभ भर रहे हो, देश के गरीब, अनपढ़ लोगों को मजदूरी देकर, रोजगार समृद्ध भारत से देश के माफिया उद्योंगों के हाथ काटो..

९. मैंने कभी नेहरू के, गांधी - नेहरू द्वारा समृद्ध टाटा बिड़ला बजाज के मिजाज को देखकर उनके तलुवे नहीं चाटे, मुझे  तो ५० करोड़ गरीबों के तलुओ की मजबूती का इतना अभिमान था कि देश की कटेंली/ कटींली   राह में चलकर भी उनके तलुओं को काँटों की चुभन नहीं होगी..., मुझे भारी कांग्रेस से भारी उद्योग न लगाने का भारी  विरोध करने पर कहना पड़ा, जैसे नेहरू को गांधी के विचार पसंद नहीं थे उसी तरह, मुझे गांधी के “स्वदेशी विचार” से लघु व ग्रामीण उद्योग से गरीबों को अमीरी रेखा तक पहुँचाना है.., देश का तन-मन धन गरीबों के उत्थान से ही, मजबूत भारत का निर्माण होगा  

१० . मेरा कांग्रेसीयों ने संसद में घोर विरोध किया था, मेरी विचारधारा कांग्रेस को पसंद नहीं थी.. वे हमेशा दवाब डालते थे कि विदेशी कर्ज लेकर देश को उन्न्त बनाओ .., मेरे  सिद्धांतो के अनुरूप मैंने कट्टर उदगार दिया..,, “ अभी हम फिरंगियों के २०० वर्षों की गुलामी से आजाद हुए हैं, क्या हम फिर से आर्थिक गुलामी से देश के इतिहास में कैद होने जाएगें


११.. मुझे देश के गरीबों के बल पर पूरा विश्वास था कि इस देश का सृजन उन्हीके ५० करोड़ हाथों से ही सकता है, गरीबों के बल का मैंने आत्मविश्वास बढाया था व उन्हें सम्मान देकर देश का अभिमान जगाया.., हमारा राष्ट्र, स्वाभिमान की अलख से विश्व के मानचित्र में छा गया था.., मैं चाहता था कि विश्व भी हिन्दुस्तान की विचार धारा की छांव का अहसास कर, अनुसरण, आनंद ले.  

१२. मेरे लिए प्रधानमंत्री पद तो घर के प्रधान जैसा ही था, इस पर गर्वीत नहीं था इसलिए मैंने प्रधानमंत्री आवास लेने से मना कर, “किराये के घर” में सगून से देश में भी “गरीबों के गुणों” से देश में एक उद्भव की आस से, एक उदाहरण से जज्बा फूक दिया था ..., नेहरू के दिन के २५ हजार के खर्च से देश को लूट्वाने के इस खेल को कही कांग्रेसी.., इसे रस्स्सी बनाकर देश को जकड न लें.., इसलिए मैं मासिक ३०० रूपये  सरकारी तनख्वाह से अपना हरा  भरा परिवार भी गरीबी की खुसहाली में कंधे से कन्धा मिलाकर आनन्दित था. मेरे मंत्री से लेकर मंत्रयालय के कर्मचारी, मेरे इस “मजदूर” मंत्र से के साथ मजबूत कार्यशैली का हिस्सा बने..,    

१३ . मोदीजी.., आप तो सुखी है... पुत्र न होने से,पुत्रवाद, वंशवाद का दंश नही है, मोरारजी देसाई को तो उनके पुत्र ने बदनाम किया.. नेहरू की छाया में छुटभय्ये नेताओं ने वंशवाद से गरीबों के बाग़ को नारों के सब्ज्वाद के जहरीले स्वाद से  उजाड़ दिया है...
मेरे परिवार में ६ पुत्र थे ज्येष्ठ पुत्र को हिन्दुजा समूह ने इंजिनियर पद का नियुक्ती पत्र दिया तो मैने अपने पुत्र से एक ही बात की “आप, इस पद पर जाओ जरूर, लेकिन इस बात की भनक लगाने नहीं देना कि मैं प्रधानमंत्री की पुत्र हूँ”, लगभग ६ महीने बाद, उस उद्योगसमूह को पता लगाने पर उन्होंने मेरे पुत्र को DIRECTOR (निदेशक) पद की नियुक्ती देने लगे, तब मुझे लगा कि माफिया उद्योग पनप न पाए...,, इसलिए मैंने खुले शब्दों में कहा “यदि मेरा पुत्र इस पद के काबिल है तो इसे नियुक्त करें, लेकिन इस देश के प्रधानमंत्री से इसके लाभ की अपेक्षा न करें”

१४ .पाकिस्तान से युद्ध जीतने के बाद मैं मुम्बई के आजाद मैदान में भाषण के दौरान महाराष्ट्र के कांग्रेसियों ने मेरा उपहास उड़ाया कि यह ४ फुट का लड़का जैसा व्यक्ती क्या देश चलाएगा, मुझे कांग्रेस पार्टी के भीतराघात का आभाष हो चुका है, मेरे साथ रक्षामंत्री यशवंत राव चव्हाण के रूस दौरे में, मेरे मौत के राज को हृदयाघात की घोषणा से देशवासियों के आँखों में धुल झोकने का काम किया
१५   मेरे हत्या  के बाद भी, सभी सरकारों ने, नेहरू की नीती से “आराम हराम”  के अफीमी नारों को जीवंत रख.., इसमें अपने नए नारों का मिश्रण डालकर,  भ्रष्टाचार को संजीवनी बनाकर, उद्योग जगत में माफिया मिश्रण से आज “गरीबों का जीना हराम” कर दिया है.., आज देश की खान खदान, ईमान व तरंग बेचकर.., देशवासियों की उमंगों को हर लिया है..., माफियाओं को  सप्तरंगी बना दिया है... 19 महिने के मेरे प्रधानमंत्री  कार्यकाल में नेहरू द्वारा किया गया भ्रष्टाचार का शौच साफ कर दिया था…., नेहरू के चमचे नेताओ की अय्याशी खत्म कर, उन्हे आम नेता बना दिया था ताशकंद जाने से पहिले मैंने मेरे  भ्रष्टाचारी मंत्री कृष्णामाचारी का इस्तीफा लेकर , कांग्रेसीयों में खलबली मचा दी थी

१६. मेरे अजीज..., समर्थक...,  वीर सावरकर ने  ताशकंद जाने से पहले मुझे  चेताया और कहा शास्त्रीजी हम जीते हुए राष्ट्र है , रूस के प्रधानमंत्री  को हमारे देश मे बुलाओ, यदि आप ताशकंद जाओगे तो वापस नही आओगे.. और हमारे द्वारा जीता भाग भी लुटा आओगे.. काश उनकी बात मानी होती..,

१७.  ९ जनवरी १९६६ की रात.., .मौत के एक दिन पहिले, मैंने ताशकंद से अपनी पत्नी ललिता शास्त्री को फोन कर कहा मैं हिन्दुस्तान आना चाहता हूँ, यहां, मुझ पर हस्ताक्षर करने के लिए दवाब डाल रहें है..., मुझे यहां घुटन हो रही है..., क्योंकि मुझे वीर सावरकर की भविष्यवाणी सार्थक होनी नजर आ रही थी  
देश के सत्ता की राजनयिक फौजे बार-बार,  मुझसे कह रही थी..., भले हम युद्ध जीत गये हैं, यदि आप हस्ताक्षर नहीं करोगे तो आगे अन्तराष्ट्रीय बिरादरी एकजुट होकर देश की आर्थिक स्तिथी बिगाड़ देगी...

मेरी जीवन संगीनी ललिता शास्त्री जो हमेशा मेरे साथ रहती थी, उन्हें ताशकंत न ले जाने का मलाल है, यदि वह मेरे साथ रहती तो बंद कमरे में मेरी हत्या नहीं होती... जीते जी उसने भी सभी सरकारों से गला फाड़-फाड़ कर गुहार लगाई थी कि मेरी ह्त्या की जांच हो.., सभी सत्तावादियों ने भ्रष्टवादियों के सुख की अनुभूती से इस मामले को दबा दिया


१८. मोदीजी.., ३ साल पहिले, गांधी की खून से सनी मिट्टी लाठी व चश्मा इंग्लैंड में ८० लाख में नीलम हुई थी बाद में कमल मुरारका ने विदेशी नीलामी को खरीद कर लाने पर, भारत सरकार ने उस पर कस्टम ड्यूटी लगाई, मोदीजी..,  आपका, जैकेट ४.३ करोड़ में उद्योग जगत ने खरीद कर, आपको गांधी से ज्यादा महामंडित किया है.., मेरे धोती कुर्ता का राज तो आज भी रूस के ताशकंद में छुपा है, मेरे मौत के समय पहना हुआ धोती कुर्ता तो रूस ने हड़प लिया है.., मेरी मौत का राज जनता को सार्वजनिक करो..., आज के आधुनिक विज्ञान में मेरे धोती कुर्ता की फोरंसिक जांच कर, देशवासियों को बताओ..CONFIDENTIAL कहकर OFFICIAL जानकारी छुपाकर, जनता को गुमराह मत करो...अपना पल्लू झाड़कर, जनता को पिछली सरकारों की तरह लल्लू बनाने का खेल मत खेलों ...

कैलाश तिवारी, meradeshdoooba डॉट com से, कृपया वेबसाइट की ३५० पोस्ट की यात्रा करें

Wednesday, 4 March 2015



१. निर्भया कांड की TRP से मीडिया मालामाल, अब बलात्कारी मुकेश के इंटरव्यू की डाक्यूमेंट्री बना कर, डाकू के खेल से अपनी अपनी गिद्ध मानसिकता के पर्दाफाश होने का नहीं मलाल..., फिर से खेल में, हो रहे मालामाल...
२. इसे मधुरस बनाकर, अखबारों में छपा.. वहीं चैनलों पर इसी मुध्हों को लेकर बहस का दौर जारी है..., राज्य सभा में जया बच्चन व अन्य लोगों का हंगामा... राज्य सभा के समय की बर्बादी , राजनाथ सिंह की सफाई भी काम न आई
३. लोकतंत्र में अभिव्यक्ती की स्वतंत्रता नागरिकों का मूलभूत अधिकार है परन्तु इस अधिकार की लक्ष्मण रेखा है ! अभिव्यक्ती की स्वतंत्रता के नाम पर किसी के बेडरूम में घुसाने की स्वतंत्रता मीडिया की भी नहीं है ...
४. वर्तमान दौड़ की व्यवसायिक होड़ का माहौल है , लेकिन नैतिकता , संस्कृति , रीती रिवाज , सामाजिक मर्यादा के पलने व संरक्षण की जिम्मेदारी धन लोलुपता से अब गिद्ध मानसिकता से हदें तोड़ती हुई, रस लेकर रिपोर्टिंग कर, अपने सामाजिक सरोकार और मर्यादा की लक्ष्मण रेखा को भी रौदती दिख रही है...
५. पत्रकारिता व्यवसाय हो कर भी पूरी तरह व्यवसाय नहीं है, क्योंकि उस पर समाज को रास्ता दिखाने की जिम्मेदारी है, जिसकी अपनी लक्ष्मण रेखा, मर्यादा दिखाने की जिम्मेदारी भी है.., जिसकी अपनी लक्ष्मण रेखा मर्यादा और नीजी धर्म भी है!,
६. सवाल यह है कि एक बहशी दरिन्दों को बलात्कार को जस्टीफ़ाइड करने का मौक़ा देकर, उस क्रूर दंभ को लोगों के सामने परोश कर क्या मीडिया अपनी लक्ष्मण रेखा को ही नहीं रौंद रही है...!!!!?????
७. क्या मीडिया पर गिद्ध की मानसिकता सवार हो गई है????, इस यक्ष प्रश्न का जवाब भी मीडिया को देना होगा हालांकि मामला गर्म होने के बाद दिल्ली पुलिस ने दरिन्दे मुकेश के खिलाफ एफआ र दर्ज की है और तिहाड़ जेल प्रशासन ने बी,बी,सी, को नोटिस जारी किया है ,परंतू तिहाड़ जेल में बी.बी.सी. प्रतिनीधी दरिन्दे तक पहुंचा कैसे इसका जवाब भी तिहाड़ जेल प्रशासन को देना भारी पड़ सकता है....
८. जुलाई २०१३ में गृह मंत्रालय की अनुमति को उस समय के गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने अनुमति का खंडन कर, अपने को भले महामंडित किया हो. लेकिन इस परदे के पीछे मीडिया का भेड़िया खेल का भेद छुपा है...!!!!
२६/११ के आतंकी हमले व कसाब के TRP हिसाब में मीडिया मालामाल, फूहड़ विज्ञापनों व समाचारों से लूट तंत्र के भागीदारों की दलाली से चमकाएं अपने गालों की लाली... 

Tuesday, 3 March 2015



१. दुनिया में.., हमारे देश में, विशाल संशाधनों के प्रचुर मात्रा व मानव शक्ति उपलब्ध होने के बावजूद, हमारी राष्ट्रनीती नहीं,, सत्तानीती की भूख नीती ने पिछले ६८ सालों से देशवासियों का निवाला छीन लिया है.., प्रजातंत्र का कुरूप चहरे से.., सत्तातंत्र से लूट के खेल से आज मेरा देश भुखमरी के तालिका में टॉप पर है...
२. विदेशी धन के आमंत्रण से देशी नीती को शिकंजों में दबाकर, एक स्वप्न दिखाकर,६८ सालों से देशवासी, सुबह उठकर एक नए सूरज का इन्तजार कर रहा है...,लेकिन उसे आज भी धुंध दिखाई देती है... वह जागकर धुंध में अपना भविष्य को ढूंढ रहा है...अपनी ऊर्जा गंवाते रहता है...
३. आराम हराम है, गरीबी हटाओ, इंडिया शाइनिंग भारत निर्माण, अच्छे दिन के नारों से देश की जनता आज भी इस अफीमों से बेहोश है..
४. सफल राजनेता वह होता है, जो लोगों द्वारा सीढ़ी पकड़कर ऊपर पहुँचाने के बाद,वह ऊंचाई से सीढ़ी गिरा देता है ताकि कोई दूसरा नेता उस ऊंचाई पर न पहुँच सके
५. अडोल्फ़ हिटलर ने जीते जी अपने कंधो पर हाथ रखने की कोशिश करने वालों की ह्त्या हर दी..., उसे हमेशा संशय रहता था कि कंधे पर हाथ रखने वाला, कभी भी गला दबोच सकता है..., यही कारण था जब हिटलर को अंतिम सास गिनने का अहसास हुआ तो उसने अपनी प्रेमिका के साथ शादी कर उसने प्रेमिका के कंधे से आलिंगन कर,पहिले प्रेमिका की हत्या कर आत्महत्या की ....
६. यही राज केजरीवाल के मुख्य मंत्री बनने के बाद की है. वे आम आदमी पार्टी के सर्वो सर्वा बनकर, अपने मफलर व साउंड बॉक्स को छोड़ना नहीं चाहते..., यदि किसी के गले में फिट कर ले तो मुख्यमंत्री पद से हाथ धोना पड़ सकता है..., साथ में दूसरे मित्रों द्वारा गला भी दबोचा जा सकता है..,
७. अभी बिहार के मुख्यमंत्री नीतेश कुमार द्वारा नकली आत्म-समर्पण के दिखावे में महादलित मांझी को मुख्यमंत्री का पद सौपने के बाद, मांझी, अपने पर पड़े भारी देखकर, नीतीश कुमार के होश उड़ गए थे, काफी कशमकश के बाद मुख्यमंत्री बनने के बाद नौटंकीवाल के भाषा में कहीं प्राण निकल न जाएं इसलिए प्रण कर कहा, जैसे केजरीवाल की गलती को दिल्लीवासियों ने माफ़ किया ऐसे ही बिहारवासियों मुझे माफ़ कर लेना ..,, इस प्रायश्चित की घटना देखकर ..,
८. अभी केजरीवाल...,राजयोग की शिक्षा के लिए बीमारी का बहाना बनाकर, प्राकृतिक चिकित्सा की आड़ में अपने राजनैतिक गुर सीखने के लिए १० दिन बंगलूरू जाकर, नयी शिक्षा की शुरू करने के अध्याय का खेल मन बना रहें हैं...
केजरीवाल को अपने सत्ता का सुख देखकर..., पिछली गलती देखकर, अब कही पिछले दरवाजे से साथी कुर्सी के खम्भे काटकर, उन्हें जमीन पर न पटक दें इस भय से वे पार्टी के सभी खम्भे से पैर लम्बे बनाकर..., ऊंची राजनैतिक छलांग के लिए बेताब है...
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योगेन्द्र, अब तेरी गेंद से पहिले , मेरी “मफलरी खांसी की फूक” ही जनता को बेवकूफ बनाकर, मेरी सत्ता की भूख मिटायेगी...
मेरा मफलरी SOUND BOX बना सत्ता का योग व शांती का मंत्र , अब मैं बना पार्टी का संयोजक से भोगक.. “भक्षक...!!!”
मैं, उपराज्यपाल नजीबजंग, इस अजीब जंग से, तेरे नवाब के जंग जीतने की “घोषणा” स्वीकारता हूं..
मेरी पार्टी के अंगों, MULTI ORGAN FAILURE से “किरण बेदी” की “बलि” मत लो. 

Monday, 2 March 2015



जाने.., सफल बजट् के बारे मे चाणक्य ने कहा था.
जैसे बरसात के पहले बादल समुद्र से अपार मात्रा मे पानी खीचता है , नदी व छोटो श्रोतों से उंनकी क्षमता के अनुसार पानी खीचता है,
लकिन जब बादल बरसता है ,तो वह पृथ्वी मे सबको समान प्रकार से बरसाता है, भेदभाव नही करता है. सुखी जमीन जिसने उसे पानी नही दिया, उसे भी बिना भेदभाव के उस भुमी को भी संचित कर हर क्षेत्र मे हरियाली फैला देता है.
यदि बाढ का प्रकोप फैलाता है तो वह यह नही देखता है कि यह अमीरो की बस्ती है या गरीबों की?
स्कूल मे मैने एक चुटकुला पढा था, शिक्षक , छात्रो से से पूछता है, बच्चो, बताओ बरसात होने के बाद बिजली क्यो चमकती है, बच्चा कहता, मास्टरजी, बादल देखना चाहता है कि कोइ खेत सूखा तो नही रह गया है?
अ. एक अतुल्य अर्थशास्त्री चाणक्य का बयान V/s मोदी के ज्येष्ठ केटली अरूण जेटली का उद्योगपतियों के पत्तीयों का बखान..., देशवासिओं का अपमान...कहना , कॉर्पोरेट CORPORATE के लिए CARPET बिछाना है.., मध्यमवर्गीयों अपने मध्य को (कच्छा) संभालने की जवाबदारी तुम्हारी है.., हममें.., अब सत्ता की खुमारी है.
आ. इ . मुझे ब्रिटेन की महारानी की जनता को दिया उदगार याद आता है, जब जनता भूखी थी, तब उसने खिल्ली उड़ाते हुए कहा था.... तुम्हे ब्रेड खाने नहीं मिलता है तो केक खाओ...
इ. चमड़े के जूते सस्ते...!!!, यदि इसके बदले चमड़े के भीतर पेट को तो रोटी दी जा सकती है , महंगाई को आमंत्रण देने की यह गलती ठीक की जा सकती है ! जनता का पैसा जनता को लौटाया जा सकता है.
ई. .बड़े गरज रहे थे सूखे बादल कि ‘देश का खजाना गरीबों के लिए है’, देश का खजाना तो बैंक के कर्मचारियों के १५% बढ़ाने के लिए वह भी २०१२ से यानी बीच का हजारों करोड़ का डिफ़रेंस अलग, अब नौकरशाहों को फायदा... अगले साल,नया वेतन आयोग लागू होने से सरकारी कर्मचारी होंगे मालामाल ..., अब लोकल बाँडीज को छोडिए , कहां , भ्रष्टाचार नहीं है...???, लेकिन भ्रष्टाचार भी, वेतन भी और सरकारी कृपा का ‘प्रसाद’ भी !!!,
मोदी सरकार करों विचार, करो निदान, निम्न लोगो के निम्न विचार....,
१.क्रूड आयल के ६० डॉलर सस्ता होने पर भी, बचा पैसा देश देश को नहीं दिया...,
वी कैन चेंज यानी खराब बजट बनाएंगे
२. रोटी.कपड़ा मकान से मनोरंजन ता अब महंगे १२.३६% से १४% तमाम सर्विसेज महंगे , आम बजट में अच्छे दिन का वायदा ख़राब दिनों में बदला
३. किसानों के लिए नाबार्ड को २.५ लाख करोड़ रूपये देकर बड़े किसानों-जमींदारों को फायदा, भ्रष्टाचार के नाग को दूध पिलाया है
४. मनरेगा जिसे “भ्रष्टाचार का घर” कहा, उसे ३४६०० करोड़ रूपये, ५००० करोड़ रूपये बढ़ने का वायदा क्यों ?, भ्रष्टाचार स्वीकार है, नौकरशाही खूब “परसेंटेज” खाए, दोनों हाथों से लूटो,
५. गरीब जनता के पास सरकारी बांड्स में पैसे लगाने के लिए धन कहां हैं,, जो लगाकर दो पैसे बचेंगें, सोने के बिस्किट कहां हैं अमीरों की तरह , जो बैंक में रखेगा और ब्याज की आस करेगा ..., उसे तो जीना मुश्किल हो गया है
६. इनकम टैक्स छूट में २.५ लाख तक ही, जैसा का तैसा , यानी कांग्रेसी या यूपीए के ‘बजट’ पर ही मुहर !, इसे ५ लाख तक करना अपेक्षित था
७. सभी चींजों को महँगा करने का अर्थ ‘मेक इन नहीं, फेक इन इंडिया’ बाजार को धूम कैसे मिलेगा ! जनविरोधी –व्यापारी विरोधी बजट
८. अगले साल तक GST या गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू करने का वायदा क्यों ?, इसी बजट से लागू क्यों नही ?
९. भूमि अधिग्रहण विधेयक बिल पर सरकार “मौन” क्यों ?
१०. अमीरों पर टैक्स का दिखावा , १ करोड़ पर टैक्स , वेल्थ टैक्स माफ़ कर , अमीरों की हेल्थ बढ़ाने का खेल
११. हमारे देश में ‘सृजन’ करके अमीर बनें कितने हैं..!!!, अधिकतर जनता को लूट कर, बैंकों से धोखा घड़ी कर और दूसरों की जेब व पेटों को काटकर ही अमीर बनें हैं,
१२. आखिर ऐसा बजट बनाने की जरूरत क्या थी ?, सिर्फ नौकरशाही को खुश करने से क्या मिलेगा, इस देश में प्यून – पटवारी - बाबू से लेकर अफसर या ‘साहब’ तक सबको वेतन कितना भी हो, बिना काली कमाई के चैन नहीं आता ! खाना नहीं पचता !
मोदीजी आपकेनुसार प्रगतिशील, परदर्शी बजट है , इससे सरकार व नौकरशाह दोनों की प्रगति स्पष्ट है..,
आप ऐसा बजट का कारण तो बताते..., बाकी तो देश त्रस्त है, और त्रस्त रहेगा