Wednesday, 26 February 2020

२६ फरवरी..., वीर परमवीर सावरकर की पुण्य तिथी पर सत्कार, साकार हुई वीर परमवीर सावरकर की उक्ती “शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती है” , विश्व में दुर्बल बनकर देश का इतिहास नहीं संवारा जा सकता है अब पकिस्तान प्रहार पर प्रहार.., बनी मोदी की दुधारी तलवार देश में विरोधियों का चीत्कार, कोलाहल.., कहें मोदी नहीं है चित्रकार .., अब मोदी कहें.., इस कोलाहल से बनाऊँ इन्हें कोल्हू का बैल से राजनीती में ध्वस्त करूं इनके विचारों के चित्र का अस्तित्व








२६ फरवरी..., वीर परमवीर सावरकर की पुण्य तिथी पर सत्कार, पुलवामा के कायर आक्रमण का बदला  आज ही के दिन एक साल पहिले बालाकोट में ६०० से अधिक आतंकवादियों को जहन्नुम का रास्ता दिखाया 
.


साकार हुई वीर परमवीर  सावरकर की उक्ती शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती है” , विश्व में दुर्बल बनकर देश का इतिहास नहीं संवारा जा सकता है  
अब पकिस्तान प्रहार पर प्रहार..,
बनी मोदी की दुधारी तलवार
देश में विरोधियों का चीत्कारकोलाहल..कहें मोदी नहीं है चित्रकार ..


अब मोदी कहें.., इस कोलाहल से बनाऊँ इन्हें कोल्हू का बैल से राजनीती में ध्वस्त करूं इनके विचारों के चित्र का अस्तित्व

राफेल की धार पहुंची सीमा पार ,
अब नहीं होने दूंगा देश का बंटाधार 
..Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.


Description
आओंपार्टी नहीं देश का पार्ट बने, “मैं देश के लिए बना हूँ””, देश की माटी बिकने नहीं दूंगा , “राष्ट्रवाद की खाद” से भारतमाता के वैभव सेहम देश को गौरव से भव्यशाली बनाएं

अतिथी देव भव: (डोनाल्ड ट्रम्प) के स्वागत दर्शन में.., अतिथी वोट भव: का आक्रमण से दुनिया को चेताने का खुला खेल.., रोक सको तो रोको.., ट्रम्प सरकार को इसकी एक झलक दिखाकर ,मोदी सरकार को खुली चुनौती अब देश के विरोधी पार्टियों के गठबंधन व विदेशी वोट बैंक का देश में भण्डारण अब एक नए रण से रोहिग्या बांगलादेशी व ISI का संगठन सक्रिय ढंग से देश में नए प्रयोग कर रहा है .




अतिथी देव भव: (डोनाल्ड ट्रम्प) के स्वागत दर्शन में..,   अतिथी वोट भव: का आक्रमण से दुनिया को चेताने का खुला खेल.., रोक सको तो रोको..,  ट्रम्प सरकार को इसकी एक झलक दिखाकर ,मोदी सरकार को खुली चुनौती अब देश के विरोधी पार्टियों के गठबंधन व विदेशी वोट बैंक का देश में  भण्डारण अब एक नए रण से रोहिग्या बांगलादेशी व ISI का संगठन सक्रिय ढंग से देश में नए प्रयोग कर रहा है . 


 शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती है  अब नरेन्द्र मोदी भी देश की ऊर्जा भरकर सुपर पावर ट्रम्प से दबंग बन गए हैं  उन्होंने बता दिया है कि देश के आत्मसम्मान से झुकना एक बेईमान राजनेता की तरह नहीं हैं 


 देश में सैकड़ों धमाकों व आतंकवाद से धमाकों का कोई धर्म नहीं होता है की गूँज से राजनेता जश्न मना रहे थे ...
बाटला आतंकवादी कांड में सोनिया गांधी आंसू छलका कर रात भर रोई. व ऑस्ट्रेलिया में एक मुस्लिम को आतंकवाद गतिविधि में गिरफ्तार होने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रात भर नहीं सोये.


जबकि हिन्दू, भगवा आतंकवादखतरनाक , और इसका राजनैतिकरण कर विश्व में प्रचार से देश को नीचा दिखाने के प्रयास में कांग्रेस सरकार अग्रणी थी. विकीलीक्स को भी इसका खुलासा करना पड़ा की एक अवार्ड वापसी गैंग की तरह राजनैतिक बुद्धीजीवियों की भारत तेरे टुकड़े होंगें की तरह की सुनियोजित प्रचार था.

इन राजनेताओं ने भगवा आतकवाद के प्रचार का जिम्मा ATS मुख्या हेमंत करकरे के कन्धों पर दे रखा था. वे भी मीडिया व अखबारों में अपनी PUBLICITY से गदगद होकर .., राजनेताओं से प्रेरित होकर एक कदम और बढ़कर,अपनी प

वीर सावरकर की उक्ती शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती है” , विश्व में दुर्बल बनकर देश का इतिहास नहीं संवारा जा सकता है .इसका उदहारण किम जोंग व ट्रम्प की तीसरी मुलाक़ात USA में नहीं उत्तरी कोरिया में हुई जो इतिहास बन गया कि कैसे USA समझौते के लिए मान  मनोव्वल के लिए उतावला है. 

 पकिस्तान दुनिया में अपना ईमान खो चुका है, अब इमरान खान, जो पकिस्तान, अमेरिका के ३३ बिलियन डॉलर डकार कर अपने देश के आतंकवादी संगठनों को मालामाल करने का खेल खेल रहा है पाकिस्तानी रुपया गर्त में चला गया है अमेरिकन डॉलर के मुकाबले अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है



जी हाँ .., वीर सावरकर की ४० से अधिक भविष्यवाणियां सार्थक हुई है ..,१९४७ में देश आजाद होने पर वीर सावरकर ने आवाहन किया की देश को सुपर पॉवर बनाने के लिए भारत को हाइड्रोजन बम के साथ ध्वनि बम भी बनाना चाहिए


१९४५ में विश्वपटल पर कोरिया को खंडित कर दक्षिण कोरिया पर अमेरिका व उत्तर कोरिया पर रूस का अधिकार हुआ, दोनों कोरिया अपने अपने शुभचिंतकों पर आश्रित व केवल शतरंजी मोहरे बनाकर आपस में लड़ाने का खेल खेल रहे थे .


दक्षिण कोरिया तो संपन्न था , उत्तर कोरिया की अर्थव्यस्था कमजोर होने के बावजूद उसने अपनी सीमा व देश की सुरक्षा व बदला लेने की भावनाओं से परमाणु तकनीकी चोरी छुपे खरीद कर किम जोंग के कार्यकाल में हाइड्रोजन बम का परिक्षण कर दुनिया को अचंभित कर सुपर पावर देशों में दहशत पैदा कर दी की कैसे एक छोटा देश दुनिया को बर्बाद कर सकता है..

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खासकर इसके निशाने पर अमेरिका है , इसे जानकार अमेरिका के होश फाक्ता / उड़ गए ..


और जानकार कि इसके परदे के पीछे चीन की महत्वपूर्ण भूमिका है.

दक्षिण कोरिया का हाथ थामने के लिए ट्रम्प ने सिंगापूर में एक निस्पक्ष्य जगह सिंगापूर में किम जोंग से मुलाक़ात की ताकि वह अपने परमाणु हथियार की बलि दे.. लेकिन किम जोंग ने अमेरिका को टरका दिया लेकिन कोई नए परमाणु हथियार का परिक्षण नहीं किया और अमेरिका सरकार को (अंध) विश्वास में लेकर गुमराह किया

अब अमेरिका सरकार को अपने तले जमीन सरकते देख , वियतनाम में ट्रम्प सरकार ने किम जोंग को उकसाया की यदि आप परमाणु हथियार को छोड़ दे तो आप को विश्व में एक नंबर की शक्ती बनाने का विश्वास अमेरिका देगा ..अब देखना है की अमेरीकी सरकार इस जाल में किम जोंग को फंसाकर अपना हित साधने में सफल होती है क्या !!!!!


इस लेख का निचोड़ यही है की दुनिया को झुकाने के लिए राष्ट्रवाद ही देश की आत्मा है जिसे गीता में कहा गया कि इसको दुनिया की कोई ताकद भेद नहीं सकती है.

साभार

About
Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.
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आओं, पार्टी नहीं देश का पार्ट बने, “मैं देश के लिए बना हूँ””, देश की माटी बिकने नहीं दूंगा , “राष्ट्रवाद की खादसे भारतमाता के वैभव से, हम देश को गौरव से भव्यशाली बनाएं

Friday, 14 February 2020

१४ फरवरी देश को भारतमाता के प्रेम वात्सल्य को बचाने का का बलिदान दिवस...., व पुलवामा के शहीदों का भारतमाता के रक्षा में अपना जीवन अर्पण करने वालों को समर्पित दिवस के रूप से देश में याद रख कर देश स्वाभिमान से ही गर्वित होगा भारत मां के लिए चाहत, देश के तीन बेटों की जिंदगी, की कुर्बानी का फरमान आज सुनाया गया, १९४७ के बाद ऐसे ही नाथूराम गोडसे व अन्य साथियों की तरह से इनके चहरे पर कोई शिकन नहीं थी



कृपया लंबा लेख लम्बी  सांस् लेकर जरूर पढ़े..

१४ फरवरी देश को भारतमाता के प्रेम वात्सल्य को बचाने का का बलिदान दिवस...., व पुलवामा के शहीदों का भारतमाता के रक्षा में अपना जीवन अर्पण करने वालों को समर्पित दिवस के रूप से देश में याद रख कर  देश स्वाभिमान से ही गर्वित होगा

 भारत मां के लिए चाहत, देश के तीन बेटों की जिंदगी, की कुर्बानी का फरमान आज सुनाया गया, १९४७ के बाद ऐसे ही नाथूराम गोडसे व अन्य साथियों की तरह से इनके चहरे पर कोई शिकन नहीं थी

देश पर अपनी जान न्यौछावर कर देने वाले शहीद-ए-आजम, भारतमाता के भगत (भगत सिंह), अंग्रेजों के राज के गुरू का गुमान तोड़ने वाले (राज गुरू) व भारतमाता को गुलामी की बेड़ी से मुक्त कराने में अपना सुख त्यागने वाले (सुखदेव) ने अपनी जान से ज्यादा तवज्जो भारत मां के प्रति अपने प्रेम को दी थी।

वहीं अंगेजों के सेफ्टी वाल बने कांग्रेसीयों का दल अय्याशी व ब्रह्मचर्य के प्रयोग से देशवासियों को गुमराह कर रहा था...,



VALENTINE DAY बनाम WELL-IN-TIME , आज देश, पाश्चात्य संस्कृति के कुआँ में गिरने / गिराने व आज का युवा वर्ग तो प्रभात के ब्रम्ह मुहर्त में उठकर, फेसबुक, ध्वनी यन्त्र में प्रेम मंत्र से अपना व सह्पाठीनीयों के साथ पाठन करता है...

१५ अगस्त के प्रभात फेरिया का, इन प्रेमी फोबियाओं की वजह से आज, आलस दिवस के साथ विश्राम दिवस से देश के विश्वास का श्वास खोता जा रहा है....
१९६२ में भारतमाता के टुकडे करने वाले जवाहर लाल नेहरू ने तो लता मंगेशकर से ऐ मेरे वतन के लोंगों , ज़रा आँख में भर लो पानी के गीत से अपनी कमजोरी छुपा ली थी ...

आज इन तीन शहीदों के फांसी के फरमान के बावजूद , आँखों से पानी नहीं निकले थे..., उनहोंने तो भारतमाता की गोद में सोने में अपना सौभाग्य समझा......

आज का युवा वर्ग पाश्चात्य संस्कृति में मदहोश होकर, मानवाधिकार संगठन भी ढाल बनकर, इनकी हिमायत कर देश को गर्त में डाल रहा है...,
यह मोतीलाल नेहरू का योग या संयोग, कहा जाए, जो १४ फरवरी के ठीक ९ महीने बाद, १४ नवम्बर को जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...!!!!,

याद रहे..., मोतीलाल नेहरू राजा-महाराजाओं के विवादों के वकालत से अपने बेशुमार आय से, अधिक व्यय-भिचार से हिंदु संस्कृति को भ्रष्ट करने की वजह से काश्मीरी हिन्दुओं ने उन्हें अपने समाज से निकाल फेंका था...
और इसी क्रिया को उनके पुत्र जवाहरलाल नेहरू ने बरकरार रखते हुए..,सत्तालोलुप बनकर, सत्ता परिवर्तन (१९४७) के बाद कहा था


नेहरु का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य था... जवाहर लाल नेहरु, बहुत बार कहा करते थे कि ..., “मैं जन्म के संयोग से हिन्दू हूँ, संस्कृति से मुसलमान और शिक्षा से अंग्रेज हूँ.उन्हें हिन्दुओ की भावना की रत्ती भर भी परवाह नहीं होती थी,जिनके वोटो के बल पर उन्होंने सत्ता प्राप्त की थी.

वही हाल, एक तरफ तो पंडित नेहरु के नाती, राजीव गाँधी का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य दिया.., राजीव गांधी ने हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री होते हुए भी सन्डे टाइम लन्दन को एक साक्षात्कार में नि:संकोच कहा की मेरे नाना जवाहरलाल नेहरु एक नास्तिक (एग्नास्टिक) थे. मेरे पिता पारसी (गैर हिंदू) थे, मेरी पत्नी इसाई है, और मैं किसी धर्म में विश्वास नहीं करता.


क्या..??, एक अय्याश व्यक्ती के नाम बाल-दिवसमनाना उचित है..,
देश का बाल दिवस तो हिन्दू संस्कृति के अनुसार गुड़ी पाडवाके दिन , नूतन दिवस में, नई किरणों से बाल निर्माणके साथ राष्ट्र निर्माणकी अलख से, हो, तो..., देश एक नए उजाले की ओर अग्रसर होगा.., और देश के २०० सालों की गुलामी से उपजी.., ७३सालों की अंग्रेजीयत की बीमारी दूर होगी...


देश के धनाड्य वर्गों के, अंग्रेजी संस्कृति का बखान करने वालों को, यह देश का १२५ वां WELL-IN-TIME और CHILDREN DAY- CHILD-MOTHER, RUN DAY के अनुयायिओं को समर्पित...




बाल दिवस या भूखमरी से बालकों का, बलि दिवस... देश में सालाना ३ करोड़ बालकों की.., कुपोषण ईलाज के अभाव से सरकारी योजनाओं को भोजनायें बनाकर, मृत्यु ...


यूरोपीय देशों में अवैध रूप से रोपे गए बच्चे.., उनकी सरकार गोद ले लेती हैं..., व उनके लालन-पानन की व्यवस्था की जिम्मेदारी सुचारू रूप से चलाती है...
लेकिन मेरे देश में गरीबी रेखा व उसके नीचे वैध बच्चे,जो बुढ़ापे में सहारा होते हैं.. , माफियाओं द्वारा चुराकर, भीख मांगने व वेश्या वृति व्यवसाय में धकेल दिए जातें हैं...,

देश में पुलिस के नाक के तले , निठारी काण्ड से बच्चे, , मानव भक्षियों के शिकार होकर, पुलीस थाने के सामने नालों में फेंक दियें जाते है...


सत्ताखोर व पुलिस भी इसे माफियाओं का आम खेल मानकर.., रिश्वत की रूई से अपने, आँख- कान बंद कर लेते है..., गरीबी लोग रोते बिलखते इन अपने मासूम बच्चों की तड़फ से अपनी नारकीय जिन्दगी गुजार देतें है...,


सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लताड़ लगाते हुए, पूछा..., देश के करोड़ों.., लापता मासूम बच्चों के बारे में क्या कारवाई की है...


याद रहे.., अन्ना आन्दोलन के चरम सीमा में पहुँचने के पहिले, जब उन्होंने रामलीला मैदान में रैली के लिए अनुमति मानी, तो मनमोहन सरकार ने उन्हें इस रैली की जगह, जयप्रकाश नारायण पार्क में रैली की अनुमती दी.., वह भी शर्तों से.. कि रैली में ५००० से ज्यादा की भीड़ नहीं होगी, व ५० से ज्यादा कारों व स्कूटर की पार्किंग नहीं दी जायेगी.., जैसे यह अन्ना का शादी समारोह हो..


उसी समय यूरोपीय देशों में नारी का पुरूषों से, समाधिकार की आवाज में , महिलाओं ने तर्क के साथ कहा कि यदि पुरूष बिना ऊपरी वस्त्र के सडकों पर चल सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं ...,


इसी विरोध में, उन्होंने ऊपरी वस्त्र खोलकर सडकों में SLEDGE –SHOW का प्रदशन प्रदर्शन किया ..., तब हमारे देश की INDIAN व अंग्रेजी से पेट भरने वाली धनाढ्य महिलाओं ने इस आन्दोलन के समर्थन में गुहार लगाई तो, देश का महिला अधिकार आयोग भी इस की मुखालत करते आगे आया तो.., उनके मनानुसार उन्हें , जंतर मंतर से संसद भवन तक SLEDGE –SHOW की अनुमती मिली ...,


अभी तो, खुले रास्ते में चुम्बन दिनमना कर इंडियन वर्ग अपने को अभिमानीत कह, गर्व मना रहा है...,


विदेशी धन , विदेशी संस्कृति के निवाले..., को देश की जनता पर थोपने का अधिकार...


क्या यह अंग्रेजी आवरण के छुपे खेल में भारतीय संस्कृति पर पर प्रहार नहीं है...!!!!

यह मोतीलाल नेहरू का योग या संयोग, कहा जाए, जो १४ फरवरी के ठीक ९ महीने बाद, १४ नवम्बर को जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...!!!!,

याद रहे..., मोतीलाल नेहरू राजा-महाराजाओं के विवादों के वकालत से अपने बेशुमार आय से, अधिक व्यय-भिचार से हिंदु संस्कृति को भ्रष्ट करने की वजह से काश्मीरी हिन्दुओं ने उन्हें अपने समाज से निकाल फेंका था...

और इसी क्रिया को उनके पुत्र जवाहरलाल नेहरू ने बरकरार रखते हुए..,सत्तालोलुप बनकर, सत्ता परिवर्तन (१९४७) के बाद कहा था

नेहरु का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य था... जवाहर लाल नेहरु, बहुत बार कहा करते थे कि ..., “मैं जन्म के संयोग से हिन्दू हूँ, संस्कृति से मुसलमान और शिक्षा से अंग्रेज हूँ.उन्हें हिन्दुओ की भावना की रत्ती भर भी परवाह नहीं होती थी,जिनके वोटो के बल पर उन्होंने सत्ता प्राप्त की थी.

वही हाल, एक तरफ तो पंडित नेहरु के नाती, राजीव गाँधी का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य दिया.., राजीव गांधी ने हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री होते हुए भी सन्डे टाइम लन्दन को एक साक्षात्कार में नि:संकोच कहा की मेरे नाना जवाहरलाल नेहरु एक नास्तिक (एग्नास्टिक) थे. मेरे पिता पारसी (गैर हिंदू) थे, मेरी पत्नी इसाई है, और मैं किसी धर्म में विश्वास नहीं करता.

क्या..??, एक अय्याश व्यक्ती के नाम बाल-दिवसमनाना उचित है..,

देश का बाल दिवस तो हिन्दू संस्कृति के अनुसार गुड़ी पाडवाके दिन , नूतन दिवस में, नई किरणों से बाल निर्माणके साथ राष्ट्र निर्माणकी अलख से, हो, तो..., देश एक नए उजाले की ओर अग्रसर होगा.., और देश के २०० सालों की गुलामी से उपजी.., ७३ सालों की अंग्रेजीयत की बीमारी दूर होगी...

देश के धनाड्य वर्गों के, अंग्रेजी संस्कृति का बखान करने वालों को, यह देश का १३०वां WELL-IN-TIME और CHILDREN DAY- CHILD-MOTHER, RUN DAY के अनुयायिओं को समर्पित...

बाल दिवस या भूखमरी से बालकों का, बलि दिवस... देश में सालाना ३ करोड़ बालकों की.., कुपोषण ईलाज के अभाव से सरकारी योजनाओं को भोजनायें बनाकर, मृत्यु ...

यूरोपीय देशों में अवैध रूप से रोपे गए बच्चे.., उनकी सरकार गोद ले लेती हैं..., व उनके लालन-पानन की व्यवस्था की जिम्मेदारी सुचारू रूप से चलाती है...

लेकिन मेरे देश में गरीबी रेखा व उसके नीचे वैध बच्चे,जो बुढ़ापे में सहारा होते हैं.. , माफियाओं द्वारा चुराकर, भीख मांगने व वेश्या वृति व्यवसाय में धकेल दिए जातें हैं...,

देश में पुलिस के नाक के तले , निठारी काण्ड से बच्चे, , मानव भक्षियों के शिकार होकर, पुलीस थाने के सामने नालों में फेंक दियें जाते है...

सत्ताखोर व पुलिस भी इसे माफियाओं का आम खेल मानकर.., रिश्वत की रूई से अपने, आँख- कान बंद कर लेते है..., गरीबी लोग रोते बिलखते इन अपने मासूम बच्चों की तड़फ से अपनी नारकीय जिन्दगी गुजार देतें है...,

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लताड़ लगाते हुए, पूछा..., देश के करोड़ों.., लापता मासूम बच्चों के बारे में क्या कारवाई की है..
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याद रहे.., अन्ना आन्दोलन के चरम सीमा में पहुँचने के पहिले, जब उन्होंने रामलीला मैदान में रैली के लिए अनुमति मानी, तो मनमोहन सरकार ने उन्हें इस रैली की जगह, जयप्रकाश नारायण पार्क में रैली की अनुमती दी.., वह भी शर्तों से.. कि रैली में ५००० से ज्यादा की भीड़ नहीं होगी, व ५० से ज्यादा कारों व स्कूटर की पार्किंग नहीं दी जायेगी.., जैसे यह अन्ना का यह शादी समारोह हो..

उसी समय यूरोपीय देशों में नारी का पुरूषों से, समाधिकार की आवाज में , महिलाओं ने तर्क के साथ कहा कि यदि पुरूष बिना ऊपरी वस्त्र के सडकों पर चल सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं ...,

इसी विरोध में, उन्होंने ऊपरी वस्त्र खोलकर सडकों में SLEDGE –SHOW का प्रदशन प्रदर्शन किया ..., तब हमारे देश की INDIAN व अंग्रेजी से पेट भरने वाली धनाढ्य महिलाओं ने इस आन्दोलन के समर्थन में गुहार लगाई तो, देश का महिला अधिकार आयोग भी इस की मुखालत करते आगे आया तो.., उनके मनानुसार उन्हें , जंतर मंतर से संसद भवन तक SLEDGE –SHOW की अनुमती मिली ...,

अभी तो, खुले रास्ते में चुम्बन दिनमना कर इंडियन वर्ग अपने को अभिमानीत कह, गर्व मना रहा है...,

विदेशी धन , विदेशी संस्कृति के निवाले..., को देश की जनता पर थोपने का अधिकार...

क्या यह अंग्रेजी आवरण के छुपे खेल में भारतीय संस्कृति पर पर प्रहार नहीं है...!!!!


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Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.

Description
आओं, पार्टी नहीं देश का पार्ट बने, “मैं देश के लिए बना हूँ””, देश की माटी बिकने नहीं दूंगा , “राष्ट्रवाद की खादसे भारतमाता के वैभव से, हम देश को गौरव से भव्यशाली बनाएं#


Friday, 7 February 2020

सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को झुठलाकर, जिसने मुसल्बानों की माली हालत काफी खस्ता व इसको उन्नत बनाने की पहल की गुजारिश की थी . लकिन शाहीन बाग़ के इस प्रायोजित आन्दोलन ने मुसल्बानों को एक प्रबुध्ह वर्ग की महिलाएं दिखाने के जलवे का खेल, प्रति ८ घंटे की शिफ्ट में ५००-७०० रुपये व मुफ्त में बिरयानी व शुद्ध पानी की बोतलों से १२० करोड़ से ज्यादा रूपये खर्च कर ५० से अधिक दिनों से यह खेल खेला जा रहा है जिसमें दुधमुन्हे बच्चों से नन्हे मुन्ने बच्चों को इस आग में झोंककर, ढाल के रूप में प्रयोग कर वोट बैंक की पूरियां तली जा रही है




सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को झुठलाकर, जिसने  मुसल्बानों की माली हालत काफी खस्ता व इसको उन्नत बनाने की पहल की गुजारिश की थी  .

लकिन शाहीन बाग़ के इस प्रायोजित आन्दोलन ने मुसल्बानों को एक प्रबुध्ह वर्ग की महिलाएं दिखाने के जलवे का खेल, प्रति ८ घंटे की शिफ्ट में ५००-७०० रुपये व मुफ्त में बिरयानी व शुद्ध पानी की बोतलों से १२० करोड़ से ज्यादा रूपये खर्च कर ५० से अधिक दिनों से यह खेल  खेला जा रहा है जिसमें दुधमुन्हे बच्चों से नन्हे मुन्ने बच्चों को इस आग में झोंककर, ढाल के रूप में प्रयोग कर वोट बैंक की पूरियां तली जा रही है.

इस छद्म खेल में देश में लोकतंत्र की कमर तोड़ने व देश को  तुकडे करने का नारा देकर एक साजिस के तहत विश्व में देश के संविधान की खिल्ली उड़ाने से विपक्ष अपने पक्ष में वोट  बैंक का येन केन प्रकारेण अपना कुत्सित प्रयास कर रहा है

अपनी कमजोरियां छुपाने के लिए ४ माह के नवजात मासूम की इस आन्दोलन में ठण्ड से ह्त्या कर उसे “शहीद” कहकर सत्ता का “शहद” बनाने के खेल से देश से खिलवाड़ कर रहा है.
याद रहें, हिन्दुस्तान के इतिहास में आज तक किसी भी आन्दोलन में महिलाओं को ढाल बनाकर आन्दोलन नहीं किया है लेकिन शाहीन बाग़ में इस बार पुरूषों ने अपनी पौरूषता खोकर अपनी नपुंसकता का प्रमाण देकर, अब तो संविधान को झूठलाया जा रहा है  


फेस बुक व वेबस्थल की २, मई , २०१४ की पुरानीpost
१ जरूर पूरा पढ़े..,नो हिन्दू नो मुस्लिम वी आर हिन्दुस्तानी फर्स्ट ..

धर्म के नाम से वोट बैंक की आड़ से हर देशवासी frustrated /निराश. विफल किया गया है...इसी वजह से देश हर साल फिसल कर ,देशी विदेशी माफियाओं की लूट से बिक कर डूबने की कगार में है...


मेरे ब्रदरहुड, व हिन्दू ,सिख ,इसाई दोस्तो, राष्ट्रवादी हिन्दु,मुस्लिम व अन्य धर्मो के लोगो को मेरा सलाम,नमस्कार, सतश्रीकाल ....



२ क्या आपको मालूम है..?? ""सारे ज़हा से अच्छा  हिन्दोस्ता हमारा,,, के कवि इकबाल भी पाकिस्तान बनाने के पक्ष मे थे...??? 1943 मे उनकी मृत्यु हुई,

राष्ट्रवादी का अर्थ की परिभाषा .... , जब मुहम्मद करीम छागला , १९७७ में जनता पार्टी मे मानव संसाधन मंत्री थे, तब उन्होने अलीगढ मुस्लिम युनीवर्सीटी मे हिंन्दु कुलपति व बनारस हिन्दु युनीवर्सीटी मे मुस्लिम कुलपति नियुक्त किया था, है...!!!, आज कोई  माई का लाल....!!!!!!!!!!!,

इस राजनिती मे इस तरह का साहस करने वाला, मुहम्मद करीम छागला जो जिन्ना का दायाँ हाथ था, पाकिस्ताने के विरोध के साथ वह जिन्ना का दुश्मन बन गया, मुहम्मद करीम छागला हमेशा मुस्लिमो से कहते थे , तुम पहले हिन्दुस्तानी हो, बाद मे मुसलबान, हिन्दुओ का खुन आप मे है, इसलिए सभी धर्मो से भाई चारा रखो, राजनेताओ की कठपुतली मत बनों...?? उन्होने बोम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहते हुए, हर धर्म के लोगों को समान निर्णय दिया, यहँ तक की जवाहरलाल नेहरू की भी भ्रष्टाचार की पैंट खोल दी थी, बिना राजनैतिक दबाव से....जय हिंद...

३ आज देश को बग्लादेशीयो ने घुसपैठ के नाम से देश को बरबाद कर दिया है, इसमे मुस्लिमो के हक के साथ हिन्दुओ का भी हक छीना है...??? यह जरूर याद रखें ...., वोट बैक के आड मे दोनो कौमे गरीब हो रही है,,,

४ यह देश का इतिहास कहता , खास कर 1947 के बाद से. दंगे राजनेताओ को भाँग देता है, वह सत्ता के नशे मे चूर रहता है, और जनता आपस मे धर्म के लडाई मे मारी जाती है,मुजफ्फरपुर से हर दंगे सत्ताखोरों के लिए वोट बैंक से सत्ता का बना मौजपुर नगर

५ आज देश आम आदमी के हाथों से चलना चाहिए, लेकिन सत्ताधारिओं की गाडी “आम आदमी” के नारो से चल रही है, आम आदमी की मेहनत को नारो मे बदलकर देश के भष्टाचारिओं की गाडी चल रही है? सत्ता के पकड के लिये सत्ताधारी एक दूसरे कि कमजोरी की पोल का फायदा उठाते हुए सत्ता मे रहकर लूट मार मे व्यस्त है?

६ आज इस देश मे देशद्रोही कौन ? आत्महत्या करने वाला गरीब अन्नदाता किसान, देश के गर्व के लिये सीमा पर सिर कटाने वाला जवान,अपने शोषण का विरोध करने वाला आम आदमी, भूमि अधिग्रहण का मोहरा बनने वाला,अनगिनत टैक्स का बोझ उठाने वाला,वायु प्रदूषण, गन्दे पानी पीने वाला...विकास के हत्यार, महँगाई से तडफनेवाला और वह शोषण का प्रतीक,गुलामो की तरह जीवन जीने वाला.......एक सरल इन्सान..?? 


आज इस देश मे देशप्रेमी कौन ? देश के संसाधनो पर अपना अधिकार समझकर, उसकी लूट कर, देश में अकूत सम्पति रखने वाले, विदेशी बैको मे काला धन रखने वाले, नकली दवायें, मिलावटी खाना,गलत इलाज,किसानो का शोषण,जनता की स्वास्थय व विकास की योजनाओ का धन डकारने वाले,कानून को झुकाने वाले, अलगाववाद, भाषावाद,जातिवाद से लडाने वाले, भ्रष्टाचार को अपना देवता मानने वाले.... आज देश के नेता व दबंग भेडियें, देश प्रेमी का चोला पहनकर देश को लूट रहे है? इसलिये मै भी इसी प्रतिरोध के लिये देशद्रोही बनकर लड रहा हूँ?

७ आज के ,माफियाओं के भ्रष्टाचार का रॉकेट का प्रक्षेपण इतना अचूक है कि, आज तक इनका एक भी रॉकेट फेल नही हुआ है....???, जबकि , श्रीहरीकोटा व देश के अन्य भागो से इसरो के रॉकेट कभी कभार फेल होते रहे है, इससे यह संदेश के साथ दर्शाता है, कि, भ्रष्टाचारी माफिया के रॉकेट, एक-एक नए प्रयोग व भ्रष्टाचार के अनुसंधान से, इसरो के रॉकेट से भी.... और उन्नत बनाकर देशवासियों की कमाई , इस रॉकेट के ईंधन मे फूंक- फूंक कर उड़ाई जा रही है
बीएसपी सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने संसद में वन्देमातरम का अपमान किया और जैसे ही राष्ट्रगीत की धुन बजी सांसद बर्क संसद भवन से उठकर बाहर निकल गये, what is YOUR opinion on this subject

८ देश के सत्ता के घोटालेबाजों को देश को लूटने से फुर्सत नही है, जब देश मे लूट मे छूट है तो अपने लूट का समय,बर्बाद कर ..., क्या..?????, वे तुम्हारी समस्या को देखेंगे..उन्हें पता है हमारे माफिया राज के सामने संविधान भी पंगु है..


- भ्रष्टाचारीयों के महाकुंभ की महान-डायरी.
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Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.
Description
आओं, पार्टी नहीं देश का पार्ट बने, “मैं देश के लिए बना हूँ””, देश की माटी बिकने नहीं दूंगा , “राष्ट्रवाद की खादसे भारतमाता के वैभव से, हम देश को गौरव से भव्यशाली बनाएं



Thursday, 30 January 2020


हे राम V/s राम रहीम”, यह इस युग में गांधी की ब्रह्मचर्य व्रत के पीछे छुपी नारी शोषण के प्रयोग की बाबा राम रहीम बाबा की पुनरावृति है.



गांधी को तो मीडिया अमर कर गयी , बाबा को TRP के चक्कर में मीडिया निगल गई.

दोस्तों.., सीमा पर हमारे सेना के जवानों के शहीदी की कोई खबर नहीं , क्योंकि इस खबर में TRP की शहद नहीं थी .मीडिया ने बाबा राम रहीम के भक्तों से, धार्मिक उन्माद की खबर को जंगल की आग से भी तेजी से भड़काई

देश के तीन तिकड़म बाज...., गांधी , जवाहर व जिन्ना के .. गांधी की गंदी राजनीती, जवाहर के जहर व जिन्ना के जिन्न इन तीन भेडियों ने शेर की खाल में अय्याशी का चोला पहनकर सत्ता परिवर्तनसे जनता को आजादीकहकर जातिवाद, भाषावाद की कुल्हाड़ी से देश को खण्डित कर ५ लाख से अधिक नर मुंडों की बलि लेकर,जमाकर अपने को बापू,चाचा व कायदे-आजम की उपाधी लेकर, १९४७ से आज तक इनकी विचारधारा से भारतमाता लहू लूहान है


१९४७ तक हमारी शिक्षा दर यदि २५% भी होती तो जनता इनका हिसाब कर देती .., पानी सर से ऊपर बहने से पहिले नथूराम गोड़से ने गांधी की ह्त्या करने के बाद , इस मकसद के १५० से अधिक कारण बताये थे .., और यूं कहें , अंग्रेजों द्वारा थोपी गई तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसे सत्ताखोरों की आजादीकह, कही जनता हमारी आजादी छीन न ले व गुलाम जनता को सच्ची आजादीमिलने के भय से नथूराम गोड़से के कारणों को अति प्रतिबंधित कर दिया . जिन कारणों से ये तीनों तिकड़म अपने को आज भी हस्तियाँ मानकर , अपने हस्त रेखाओं पर हंस कर कह रही हैं, देखों हम अपने खंडित देशों में ७१ सालों बाद इस रहस्य से नोटों , सिक्कों, गली-मुहल्लों के नाम व पुतलों से विराजमान हैं.





१४ अगस्त २०१७ की फेस बुक व वेबस्थल की पुरानी पोस्ट
GOD-SE, GOD-SAYS, GOD-SAID (देश की खंडता का दिवस १५ अगस्त.. या ३० जनवरी ...???..!!!.)
नथूराम गोड्से (GOD-SE, GOD-SAYS, GOD-SAID) जिन्होंने राष्ट्रवाद की आत्मा की आवाज से जजों को गांधी की गंदी राजनीती के १५० से अधिक कीचड़ का उदाहरण देते हुए इसमें छद्म अहिसावाद के आड़ में लाखों हिन्दुस्थानियों का बलिदान, विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा धर्म परिवर्तन को उनका साहस कहना, यौन शोषण व बलात्कारियों को क्षमा का विशेष अधिकार कहकर, देश में जातिवाद को आबाद रखने के खेल से देश की संप्रभुता को ख़तरे की चिरम सीमा पर पहुंचाने के खेल , खेलने प्रयास में सफल होने से पहिले ही इस नासूर को मारने के लिए गांधी को मारना अति महत्वपूर्ण हो गया था ..


नथूराम गोडसे, एक राष्ट्रवादी योद्धा, जिसने अपने प्राणों की आहुती से ..., गांधी को , देश के साथ खिलवाड़ से.., देश के टुकड़े करने के बाद भी, देश की तुष्टी करण की नीती से, देश को असहाय बनाने के बाद, आगे के खेल से, देश को पंगु बनाने का, अंजाम न दे सके , इस ह्त्या का उद्देश्य बताया,
याद रहे, नथूराम गोड़से ने स्वंय अपना मुकदमा लड़ते हुए , गांधी की ह्त्या करने के १५० कारण गिनाये थे...,तब अदालत में बैठे दर्शकों की आँखे, आंसू लबालब भरकर, जमीन में गिरकर नाथूराम गोड़से को सलाम कर रही थी ...

१. गांधी ह्त्या के पहिले नथूराम गोडसे ने गांधी को प्रणाम किया, बाद में गोली मारी.

२. नथूराम ने अदालत में कहा , मैंने गांधी को गोली मारने में इतनी सावधानी से, इतने, पास से गोली मारी ताकि उनके बगल में दो युवतियां, जो हमेशा उनके साथ रहती थी.., उन्हें गोली के छर्रे लगने से, मैं बदनाम न हो जाऊं (याद रहे, गांधी उन युवतियों के साथ नग्न सोकर, ब्रह्मचर्य /सत्य के प्रयोग में इस्तेमाल करते थे)

३. नथूराम ने कहा, ह्त्या के समय गांधी के मुख से आहकी आवाज निकली, “हे रामशब्द नहीं ...,
जिसे कांग्रेस ने हेराल्ड अखबार के प्रचार से हे रामशब्द से देशवासियों को भरमाया..
न्यायाधीश खोसला ने, अपने सेवा निर्वत्ती के बाद कहा था , यदि मुझे न्याय के लिए स्वतंत्र विचार दिया जाता तो मैं, नथूराम गोड़से को निर्दोषी मानता , मैं तो कानून का गुलाम था, इसलिए मुझे नाथूराम गोड़से व उसके अन्य साथियों को मृत्यु दंड सुनाना पड़ा

नथूराम गोड़से व उनके साथी, ‘भारतमाता की गोद मेंसोने के लिए इतने आतुर थे कि उन्होंने उच्च न्यायालय में अपनी सजा को चुनौती नहीं दी और न ही क्षमा याचना की अपील राष्ट्रपति से की ...



यह शांती का दूत..????, कपूत निकला.., याद रहे, इस अनशन की खाल में बापू ने .., दो विश्व युध्ह में २ लाख हिंदुस्थानी सैनिकों की अकारण बलि देकर, जो कुत्ते की मौत मारे गए थे .. व १९४७ में देश का अंग भंग कर ५ लाख हिन्दुस्थानियो की बलि लेकर..., इस अहिसा के परदे में खूनी खेल खेलकर, आज तक शांती दूत का चेहरा दिखाया है...

गाँधी वध के पश्चात जब सावरकर जी को न्यायलय ने सम्मान बरी किया तो जज का, वीर सावरकर के लिए यह
वक्तव्य था ...,

सावरकर ने अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया, लेकिन ऐसे तुच्छ कार्य में उन्हें घसीटना बहुत ही निंदनीय है, इस बात की जांच की जानी चाहिए की ऐसे महान व्यक्ति का नाम इस कार्य में क्यों घसीटा गया







जबकि स्वयं नथूराम गोडसे ने गाँधी वध में सावरकरजी की संलिप्तता को सिरे से नकार दिया,

धर्मनिरपेक्षता के झूठे आडम्बर में फंसे तथाकथित सेकुलर उस दिन सूर्य के सामान जुगनू से प्रतीत हो रहे थे, जो की सूर्य को अपनी मद्दम रौशनी दिखा कर उसे निचा दिखाने की कोशिश कर रहे है,

वीर सावरकर के क्रातिकारी के जज्बे को सलाम करने के के लिए, 13 मार्च 1910 मे जहाज से कूदकर,पानी मे अंग्रज सैनिको की पीछे से गोली गोलियो की बौछर का सामना करते हुए , फ्रांस के मार्सेल तट पर पहुँचे, इस साहसिक घटना को जीवित कर , प्रेरित करने के लिए, घटना की 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य मे एक भव्य स्मारक बनाने के लिए भारत सरकार को सूचित किया , और भारत सरकार ने वीर सावरकर को देश्द्रोही कहकर आपत्ति उठाने से वह प्रकल्प बंद करवा दिया..

दोस्तों अब गांधी जयंती के आयोजन में झूठे दिखावे के आचरण से, देश को, सरकारी अवकाश व विज्ञापनों व अन्य खर्चों से १० हजार करोड़ का चूना लगाने वाला है...

गांधी की गंदी राजनीती व जवाहर लाल नेहरू के जहर से देश ६८ साल के सत्ता परिवर्तन के शासन में कंगाल हो गया है..., आज सभी पार्टीयाँ विदेशों में विदेशी हाथ माँगने जा रहें हैं.

सत्ता तो मद से भरी.., मदारियों का समूह १९४७ से सत्ता परिवर्तन को आजादी के झांसे से बन्दर बांट से देश को लूट रहा है...
६७२ राजधर्म तो जातिवाद, भाषावाद,अलगाववाद, धर्मवाद व घुसपैठीयों से राजनीती में गहरी पैठ से जनता को गरीबी से तडफा-तड़फा कर..., हलाल कर ..., आज अपने को देश का लाल बनाकर., २ अक्टूबर से १४ नवम्बर से सालों - साल तक इनके पुतले..,बिना नहलाए पूजे जा रहें है...और तो और ७० सालों से देश में गरीबी की वजह से गांधी का चष्मा चुरा लिया जाता है..., २ अक्टूबर तक सत्ताखोर बदहवासी में रहता है..