Sunday, 18 August 2019

१८ अगस्त १९४५, सुभाष चंद्र बोस की ७४ वीं पुण्य तिथी को  “अपहरण दिवस” या “गुमनाम दिवस” या इस  क्रांति के मसीहा को एक मृत्यु के नाम से  बलि का बकरा बना कर हिन्दुस्तान के इतिहास को झुठलाया गया है  



कब उठेगा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत के  रहस्य से पर्दा?
काश नरेन्द्र मोदी कम से कम ७ रेस कोर्स का नाम .., जो प्रधानमंत्री पद के घोड़े का व्यापार (HORSE TRADING ) से ही विख्यात है....
यदि इस मार्ग का नाम वीर सावरकर / सरदार भगत सिंग / सुभाष चन्द्र बोस के नाम से रखा जाता तो देश में इंकलाब आ जाता ..., नई पीढी को देश की आजादी के नीव रखने वाले वीर सावरकर जैसे फ़कीर से प्रेरणा मिलती.., जिनके भगुर को अंग्रेजों द्वारा जब्त घर को वीर सावरकर के जीते जी भी नेहरू ने नहीं दिया .




इस सन्दर्भ जब उनसे पूछा गया कि आप अपने जब्त घर के लिए सरकार से क्यों नहीं लड़ते हो.., तो वीर सावरकर ने जवाब दिया की भले ही हमें खंडित भारत मिला है .., ऊंची हिमालय की चोटिया.., विशाल खंडित, भारतमाता के शरीर को खंडित का तांडव से.., उसके सामने मेरा छोटा घर की मांग करना तुच्छ है....





याद रहें सुभाष चन्द्र बोस जी की प्रतिभा का आंकलन वीर सावरकर ने पहिले ही कर लिया था जब बंगाल में सुभाष चन्द्र बोस जी ने ब्रिटिश सरकार के पुतलों को तोड़ने की सार्वजनिक घोषणा की तो इस कार्य को रोकने की हिदायत दी कि इस कार्य से सबूत के साथ, आप जिन्दगी भर जेल में कैद रहोगे.... ब्रिटिशों के पुतले तोड़ने का कार्य शुरू मत करों...







१. देश के इस अमीर घराने के तेजस्वी युवक को राष्ट्र के प्रती जूनून को वीर सावरकर ने यह कहकर राष्ट्रीय राजनीती में आने के लिए प्ररित प्रेरित किया , वे नहीं चाहते थे कि सुभाष चन्द्र बोस बंगाल तक ही सिमटे रहें... नेताजी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई। तत्पश्चात् उनकी शिक्षा कलकत्ता के प्रेज़िडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई, और बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (इण्डियन सिविल सर्विस) की तैयारी के लिए उनके माता-पिता ने बोस को इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय भेज दिया। अँग्रेज़ी शासन काल में भारतीयों के लिए सिविल सर्विस में जाना बहुत कठिन था किंतु उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया। 

२. वीर सावरकर की पुस्तक १८५७ एक स्वतंत्रता संग्रामपढ़ कर ऐसे भी सुभाष चन्द्र बोस की रगों में खून बढ़ गया था..

३. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस तो वीर सावरकर को अपना गुरू मानते थे , वे पूना में उनके घर जाकर भावी योजनाओं के बारे में चर्चा करते थे.

४. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को सावरकर ने हिटलर से मिलकर, देश को आजाद कराने में सहयोग की वार्ता करने को कहा 

५. हिटलर के सन्देश से कि हिन्दुस्तान को आजाद कराना मेरे बांये हाथ का खेल है,” बशर्ते हिन्दुस्तान पर जर्मनी का अधिकार रहेगा, हिटलर के इस सन्देश को सावरकर के कहने पर सुभाष चन्द्र बोस ने नकार दिया 

६. अपने पढाई के दौरान एक बार कॉलेज के प्रिंसिपल ने उन्हें, BLOODY INDIAN कहा तो उनके दिल में ब्रिटिश सरकार को उखाड़ फेंकने का जूनून पैदा हो गया.

७. रंगून (बर्मा) मैं , लाखों की संख्या में नए रंगरूट, आजाद हिन्द फ़ौज में भर्ती के लिए आये थे.., तब उन्होंने एक स्वर में कहा, जो मेरी सेना में देश के लिए मरना चाहता है, उनके लिए मेरी सेना के दरवाजे खुलें हैं, और जिसे मंजूर हैं हाथ ऊपर करें, तब सभी हिन्दू ,मुस्लिम व अन्य धर्मों के रंगरूटों ने हाथ उठाते हुए , सेना में शामिल हुए 

८. तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा, मुझे इतना खून चाहिए कि ब्रिटिश सरकार को मैं  डूबोकर मार दूं..

९. राष्ट्रीय राजनीती में आने से पाहिले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को हिन्दी नहीं आती थी, तब उन्के शिक्षक जगदीश नारायण तिवारी ने धाराप्रवाह हिन्दी सिखाकर, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जनसभाओं में हिन्दी मैं ही संबोधन कर एक नया जोश भर दिया था

१०. और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, कहते थे, हिन्दी ही एक भाषा है, जो देश के विभिन्न राज्यों को अपनी भाषा की इर्ष्या को तोड़कर एक कड़ी में पिरो सकती है,

११. अब कुछ पढ़े.., भाजपा का U TURN...., राजनाथ सिंह ने चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया था कि अगर नेता जी की मौत से जुड़े कागजातों को सार्वजनिक किया जाता है तो यह ज्यादा अच्छा होगा। लेकिन ऐसा लगता है कि पीएमओ राजनाथ की इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता। पीएमओ ने आरटीआई के सेक्शन 8 (2) का हवाला दिया है। सेक्शन 8(2) के मुताबिक कोई भी जानकारी जो ऑफिशल सीक्रिट ऐक्ट,1923 के तहत आती है, उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। हालांकि अथॉरिटी को यह हक है कि वह इन डॉक्युमेंट्स को सार्वजनिक कर सकती है, अगर उसे लगता है कि इससे लोगों के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

१२. बीजेपी ने एक बार फिर यू-टर्न लिया। जब बीजेपी सत्ता में नहीं थी तब सुभाष चंद्र बोस की मौत की गुत्थी सरकार से सार्वजनिक करने की मांग करती थी। अब बीजेपी सत्ता में आई तो इससे मुकर गई। नेताजी के रहस्यात्मक तरीके से गायब होने की करीब 39 क्लासिफाइड फाइल बीजेपी ने सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। इससे पहले जब मनमोहन सिंह की सरकार थी तब बीजेपी के सीनियर नेता इन फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग करते थे।

जनवरी में लोकसभा चुनावी कैंपेन के दौरान राजनाथ सिंह ने नेताजी के जन्मस्थान कटक में उनके 117वीं जयंती के मौके पर यूपीए सरकार से इनकी मौत से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि देश के नागरिकों को अपने स्वतंत्रता सेनानी की मौत के बारे में जानने का हक है। जब राजनाथ सिंह “केंद्रीय गृह मंत्री” थे । सिंह ने दावा किया था कि दस्तावेजों के सार्वजनिक करने में व्यापक जनहित जुड़ा है। लेकिन मोदी सरकार का पीएमओ इससे सहमत नहीं दिखाई देता जो कि उसके जवाब से झलकता है।

प्रधानमंत्री ऑफिस ने इस मसले पर दाखिल आरटीआई के जवाब में कहा है कि नेताजी की मौत से जुड़ी 41 फाइलें हैं, जिनमें से दो अनक्लासिफाइड फाइलें हैं। जवाब में मोदी सरकार ने कहा कि हम इन फाइलों को सार्वजनिक नहीं कर सकते। सरकार ने कहा कि हम इस मसले पर पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की पोजिशन जारी रखेंगे। पीएमओ ने कहा, 'इन फाइलों को सार्वजनिक करने से विदेशी संबंधो पर असर पड़ेगा। इन फाइलों को हमें आरटीआई सेक्शन 8(1)(ए) और सेक्शन 8(2) के तहत सार्वजनिक करने से छूट मिलती है।

इस वेबस्थल का मुख्य उद्धेश्य है...,
यह वेबस्थल जो दिखता है वह लिखता है.., जागो इंडियाके अफीमी नारों से देश बेचनेवालों से निदान करने का एक और एक ही संकल्प से कहना चाहता है ...
Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold..... (आओं, पार्टी नहीं देश का पार्ट बने, “मैं देश के लिए बना हूँ””, देश की माटी बिकने नहीं दूंगा , “राष्ट्रवाद की खादसे भारतमाता के वैभव से, हम देश को गौरव से भव्यशाली बनाएं}

Thursday, 15 August 2019





मोदी है तो विश्व हमारे साथ है वरना मुन्ना मोहन के १० साल के कार्यकाल तक देश बर्बादी के कगार पर था कश्मीर एक दिल्ली के पुतले के साथ सांठ गाँठ से  अलगाववादी कठपुतलियों के साथ देश के जवानों के सर काटकर परोसे जा रहें थे .


मोदी सरकार ने धारा 370 और 35(A) को निरस्त से लाल बहादुर शास्त्री / श्यामाप्रसाद मुख़र्जी के स्वप्न को साकार कर उनके बलिदान को निखार दिया है जय जवान जय किसान के साथ देश का स्वाभिमान से देशवासी जागृत हो गया है.चलो राष्ट्रवाद की ओर की गूँज से ही देश बनेगा महान
वन्देमातरम की दहाड़ से ही , हमारा देश सुजलाम सुफलाम से विश्व के सर्वोत्तम से श्रेष्ठतम बनेगा 


देश के इतिहास में लाल किले का एक शेर , विरोधियों का सूपड़ा साफ़ करने बाद...,छठवी बार बिना पट्टे (जंजीर) की विदेशी इशारों की लगाम तोड़ कर दहाड़ा .., और विश्व के देश..., अभी मोदी द्वारा, भविष्य में अपने पिछड़ने का पहाड़ा समझकर अभी से चिंतित हो गए हैं ..., ७३  सालों की तुष्टीकरण की नीती से देश के सुस्तीकरण से देश के बूढ़ेपन को विदेशी बैसाखी देने वालों को चेताया.., अभी भी हममें राष्ट्रवाद का खून मौजूद है..., और हमारे में इतनी शक्ती है कि वोट बैंक की आड़ से , देश में हुआ अन्धकार, अब हमारे देशवासी, विश्वगुरू की ऊर्जा से,एक नया उजाला देकर, वन्देमातरम की दहाड़ से, हमारा देश सुजलाम सुफलाम से ही विश्व में सर्वोत्तम से श्रेष्ठतम बनेगा


Friday, 9 August 2019





वीर सावरकर ने ९ अगस्त १९४२ के आन्दोलन को.., कांग्रेस की चाटुकारिता को देख कर भविष्यवाणी कर दी थी..., यह भारत छोडोआन्दोलन नहीं भारत तोड़ोके खेल का आन्दोलन है.
अखंड भारत के इतिहास का घातक व काला दिवस, की ७७वी बरसी

आज मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर को देश को मिलाने के लिए ७३ सालों का इन्तजार करना पड़ा                

मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर को देश में विलय / मिलाने के लिए ७३ सालों का इन्तजार करना पड़ा

१ जय-जय वीर सावरकर.., पढ़े इतिहास के कब्र में दफ़न , अनकही सच्चाई... जिन्होंने अंग्रेजों के काटों को काटने के बाद,  ४० से अधिक कांटो की उगने  के बारे में भविष्यवाणी की थी

२. आज इसी काँटों की वजह से शेर दिल देशवासी खून से लहूलुहान है..., राष्ट्रवाद के प्रति उसका खून सूख गया ..., इसी वजह से सत्ता-नौकरशाही-माफिया-मीडिया-कॉर्पोरेट इस देश की सुखी धरती में कारपेट के सुखी जीवन से  गरीबों का निवाला छीनकर अपना पेट भर रहें हैं..

,  वीर सावरकर ने १९४२ के आन्दोलन को.., कांग्रेस की चाटुकारिता को देख कर भविष्यवाणी कर दी थी..., यह भारत छोडोआन्दोलन नहीं भारत तोड़ोके खेल का आन्दोलन है..

४  देश के विभाजन से पहले मुस्लिम लीग की नापाक योजनाओं के खिलाफ हिन्दुस्तान के मुसलबानों को जमीनी स्तर पर एक रूप से एक जुट करने वाले अल्लाह बख्श  अज्ञात व्यक्ती नहीं थे..

५.  वे १९४२ के भारत छोड़ों आन्दोलन के दौरान इत्तेहाद पार्टी (एकता पार्टी) के नेता के रूप में वहां के प्रधानमंत्री बनें , इस पार्टी ने सिंध में मुस्लिम लीग को पैर जमाने नहीं दिया


६.  अल्लाह बख्श  और उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ नहीं थी लेकिन जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने ब्रिटिश संसद में अपने भाषण में भारत छोड़ोंआन्दोलन पर अपमान जनक टिप्पणी की तो अल्लाह बख्श   ने विरोध ब्रिटिश सरकार की सभी उपाधियां लौटा दी.

७.  ब्रिटिश शासन उनके विरोध को पचा नहीं पाया और गवर्नर सर ह्युग डाव ने १० अक्टूबर १९४२ में उन्हें बर्खास्त कर दिया..., अखंड हिंदुस्तान की आजादी के लिए एक मुसलबान  का यह महान त्याग इतिहास के  अंधेरे में दबा दिया



८. मुस्लिम लीग को इस महान योद्धा को ख़त्म करना जरूरी हो गया था क्योंकि वे पकिस्तान के विरोध में भारत भर में आम मुसलमानों को वे एकजुट करने में सफल हो रहे थे.

९. इसके अलावा एक  धर्म निरपेक्षता वादी नेता और पकिस्तान के निर्माण के विरोधी के रूप में सिंध में बेहद लोकप्रिय थे और पकिस्तान के गठन में बड़ा रोड़ा थे क्योंकि सिंध के बिना पश्चिमी क्षेत्र में इस्लामी राष्ट्र का गठन हो ही  नहीं सकता था.

१०.  १४ मई १९४३ में अल्लाह बख्श की ह्त्या, मुस्लिम लीग के भाड़े के हत्यारों द्वारा कर दी गई..

११.  यह सर्व विदित तथ्य है कि १९४२ में अल्लाह बख्श  सरकार की बर्खास्ती और १९४३ में उनकी ह्त्या ने मुस्लिम लीग के प्रवेश का रास्ता साफ़ कर दिया था की राजनैतिक व शारीरिक ह्त्या और उनकी सांप्रदायिक विरोधी राजनीती को चोट पहुँचाने में ब्रिटिश शासकों और मुस्लिम लीग की सैंड   सांठ गांठ से हिन्दुस्थान को खंडित करने का रास्ता साफ़ से सफल हो गया


१२ .  वीर सावरकर ने अल्लाह बख्श  की बर्खास्ती से .., इस राष्ट्रवादी के जज्बे की भूरी-भूरी प्रशंसा की   व उनकी ह्त्या का विरोध कर एक सच्चा हिन्दुस्थानीका बलिदान , कह सम्मान दिया.., जबकि कांग्रेस के नेहरू व गांधी मुंह में पट्टी बांधकर.., अहिंसा का जाप जपते रहे...  

Monday, 5 August 2019




मोदी सरकार ने धारा 370 और 35(A) को निरस्त से  लाल बहादुर शास्त्री / श्यामाप्रसाद मुख़र्जी  के स्वप्न को साकार / पूरा कर दिया है ..., जय जवान जय किसान के साथ देश का स्वाभिमान से देशवासी जागृत हो गया है. 



याद रहे..,  प्रधानमंत्री बनने के बाद, लाल बहादुर शास्त्री का प्रबल मत था..,  कि देश से  नेहरू की गन्दगी दूर किए बिना.., देश में राष्ट्रवादी धारा का प्रवाह नहीं होगा यह उनका शेख अब्दुल्ला द्वारा द्विराष्ट्रवाद के नेहरू खेलका  लाल बहादुर शास्त्री को  अच्छी तरह आभान था.., इसलिए,शेख अब्दुल्ला की शेखी उनको गद्दी से उतारकर.., कांग्रेसी SNAKE को SHAKE कर  भी अपनी हड्डियों की श्रंखला के टूटने का भीषण आभाष हो गया था .., आज जो धारा ३७० की आड़ में जो खून का तांडव खेला जा रहा है.., उसके निदान के प्रयास के पहिले ही ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री  ह्त्या कर, देशी ताकतों ने विदेशी हाथों से मेरे देश का स्वर्णीम युग का स्वप्न छीन लिया. 




                         १९४७  में सत्ता परिवर्तन को आजादी का झांसा देकर, गांधी की गंदी राजनीती व जवाहर के जहर से यूं कहें  देश में एक दीमक के रूप में चौपट राजा जवाहर लाल नेहरू के हाथ लग गयी, स्वंयभू देश का गुरू मानने वाले इस मोहनदास करमचंद गांधी ने अहिंसा के छद्म संत  ने २१ लाख हिन्दुस्तानियों की बलि लेकर, व  पाकिस्तान को ५५ करोड़ रूपये देकर देश को चपत लगाने के इस प्रतिशोध से नाथूराम गोडसे ने गांधी की ह्त्या की , जो जवाहरलाल नेहरू के लिए JACKPOT लग गया था और उन्होंने अपनी की कमजोरी छुपाने के लिए व सत्ता में अच्छी तरह काबिज होने के लिए नाथूराम द्वारा गांधी  हत्याकांड का ऐसा प्रचार किया कि गांधी के बिना देश अनाथ हो गया है..!!! और देशवासियों को ऐसा भरमाया कि  गांधी के  सिद्धांतों की भरपाई अब केवल और केवल नेहरू ही कर सकता है जिसने बोतल के जिन से कश्मीर समस्या को जन्म दिया

 अब वह ७० साल से बड़ा होकर, पकिस्तान को अपना मित्र कहकर हिन्दुस्तान को धारा 370 व 35 (A) के नाम से  धौस दे रहा है जिसका मोदी सरकार ने निदान कर इस मुद्दे को हमेशा के लिए हटा लिया है

Wednesday, 31 July 2019



तीन तलाक के बाद हलाला से मुस्लिम महिलाओं की जिन्दगी जीते जी हो गयी थी हलाक . अब क़ानून से नहीं होगा मजाक से  छेड़ छाडी करने से पड़ेगी क़ानून की छड़ी
अब लोकतंत्र होगा सार्थक से विश्वगुरू , 



यदि एक देश, एक खून, एक जूनून, एक क़ानून...
जय जवान , जय किसान, जय विज्ञान..पैदा होंगे हर घर में कलाम.., देश को वोट बैंक की राजनीती नहीं राष्ट्रवाद की रणनीती चाहिए....  


क्या मोदी करेंगे देश के, वोट बैंक के लुटेरों का संहार..,जो बने गरीबों के माल से मालामाल.., इतना धन की ७३  सालों से इसे महामंत्र बनाकर, देश के गरीबों को  लहूलूहान कर देश के लहू को देश ही नहीं विदेशों में गुप्त रूप से रखकर, देश की सीमाओं को खोलकर विदेशी घुसपैठ से गरीबी को वोट बैंक की तिजोरी बनाकर.., इस मंगलराज देश को जंगलराज बनाकर अब भी राज कर रहें हैं..


अब नई पीढी तो मीडिया-माफिया- सत्तातंत्र के तांत्रिको से भारत तेरी बर्बादी से टुकड़े होंगें से  लूटतंत्र को लोकतंत्र का नारा कह.., दुनिया में ढिंढोरा कर विदेशी मीडिया से अपनी बानगी से बागी बनकर ..,

अब तो हमारे दुश्मनों की विश्व में तारीफ करते नहीं थकते..


देश की सीमा पर कांग्रेस के १० साल के शासन काल में जवानों के हाथ पाँव बांधकर.., हथियारों के घोटालों का निर्माण कर भारत निर्माणसे हम भीरू कायरों देश की जमात में शामिल थे..


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ६३  महीनों  में देश के सुरक्षा के शस्त्रों से लैस कर कूटनीती से सीमा ही नहीं दुनिया अचंभित है.., जवानों को खुले प्रहार का आदेश देकर एक बार फिर से लाल बहादुर शास्त्री के जय जवान का खून प्रवाहित हो गया है..,


अब विपक्षी दल इसे भी सरकार पर  वोट बैंक से जवानों की खून की दलाली का आरोप लगाकर.., अपनी गुर्दुल्ली नीती से देश को नीचा दिखाने की होड़ से पकिस्तान मीडिया में हमारे देश में एक नया  वोट बैंक बनाने के लिए TRP में नंबर १ के कुर्ता फाड़कर दौड़ लगा रहें हैं 


Monday, 29 July 2019




१९४७ से पहिले देश मैं बाघों की संख्या ५० हजार से अधिक थी.., अन्तर्राष्ट्रीय बाघ दिवस में देश में २००६  में बाघों की संख्या १४११ से बढ़कर २०१९ में देश में २९५० से अधिक बाघ होने का हम दंभ भर रहें हैं

अशोक स्तंभ बना... 90% देशवासियों के लिए शोक स्तंभक्योंकि ९०% बाघों की ह्त्या सुनोजियत तरीकों से राजनैतिक शिकारियों की शह पर हुई है , जो 9% भार- रत तलुवे चाटुओंअंग्रेजी संस्कृति को माननेवालों के लिए बना शिकार का शौक स्तंभ, , 1% लोगजो अपने को अंग्रेजों की औलादें समझने वालों के लिये बना यह देश  लूट भ्रष्टाचार के माफियाओं के शौक के साथ मौज मस्ती का आलम का स्तंभ...जो आज की मीडिया कोअपनी जुठी रोटी देकरपेट भरी मीडिया बनाकरअपना प्रचार करअपने को देश का कर्णधार कहलवा रही हैं , और देश की खानखदानइमानसत्ताधारियों की आड मे बेचकर , खरबपति से कही ज्यादा अमीर बनकर अपने को अर्थव्यवस्था का स्तंभ कहकर.... देश मे दंभ भर रहे है…..????? 

न जात पर न पात पर , मुहर लगाओ राष्ट्रवाद पर..,” नहीं तो..यहहमारे गणतंत्र दिवस/स्वतंत्रता दिवस व संविधान के प्रति बेईमानी है..... दोस्तों....बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है. संविधान में जितने क़ानून हैउससे ज्यादा छोटे मोटे घोटालों की गिनती करें तो वे कहीं ज्यादा है...हमारे घोटाले तो संविधान से भी महान है ... 

देश की संस्कृति के साथभाषा का लोप , इन भ्रष्टाचारी माफियाओं के लिए लूट का आगे का सरल लोभ हैताकि देशवासियों अग्रेजी भाषा से अपनी गुलामी को सलाम करें ... 
आज १३० करोड जनता भी, ७३सालों से सत्ताधारियो के आस मे बैठी है कि उनके विकास द्वारा हीदेश का कल्याण होगादेशवासियों अब यहा भ्रम छोडो ... राष्ट्रवाद की धारा मे आकर ही. हम 5 सालों मे 50 साल आगे बढेंगे... .

विदेशी कर्ज से
देश के मर्ज को दूर करने का झॉसा देकरइन सत्ताधारियो नेदेश मे महंगाई से गरीबी का कैंसर फैला दिया है

हेनरी क्लिग्टन ने अपने विदेश मंत्री के कार्यकाल मे कहा था……, हम इलेक्ट्रोनिक व अन्य वस्तुये , चीनताईवानकोरिया से खरीदते हैलेकिन हम दिमाग ”हिंदुस्थानियों’ का खरीदतें है... , हमारा ज्ञानविज्ञानविश्व के अमीर देशों मे पलायन करविदेशियों को उन्न्त बना रहा है क्योकिदेश मे हमारी प्रतिभाओं को सम्मान नही मिलता है..?? , 

नोबल पुरूस्कार विजेता चंद्रशेखर वेंकट रमन ने कहा थाकि “विदेशी वस्तुओं का आयात मतलबहम अपनी मुर्खता खरीदतें है” , इसी का चीन ने अनुसरण कर विदेशी आयातित सामानों को और उन्न्त बनाकरविदेशों मे बेचकर वह भारी सख्या मे विदेशी मुद्रा भंडार से लबालब है, ( ध्यान रहे... चीन हमारे से भारी मात्रा मे कच्चा लोहा आयात करता है ,व हमारे देश मे कुशल करीगरों द्वारा बनायी जाने वालीवस्तुओं काआधी किमत मे निर्यात करबेरोजगारी फैला रहा है) 

1947 मे “सता परिवर्तन” को “आजादी का झॉसा देकर”, सभीनये सत्ताधारियों नेआज तक हमेंअलगाववादजातिवादभाषावाद की जंजीरों से बांधकर....अफीमी नारों के चादर सेहमें सुला रखा है... आओ कसम खाये...हम देश की माटी (खान खदानइमान) बिकने नही देंगे..
..
नेताओं की आस सेआज देशवासी हताश है , आओं... देश के कैसर शब्द को सेंसर कर (प्रतिबंधित कर) 100 करोड से ज्यादा लोगों के मुठठी बल से, 24 घंटे योगदान कर... हम सब सनातनी खून से (जोहर धर्म का जो खून है)देश के दहाड्ते शेर बनकरएक सुनहरा हिंदुस्थान बनायेवंदेमातरम (मातृभूमि की सेवा) व राष्ट्रवाद (पितृसेवा - मेहनत) सेएक वैभवशाली , गौरवतमभव्य महानतम देश बनाये.







दोस्तों.., हमारे देश की भव्यता को देखे ... दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा उपजाऊ जमीन, नदियों का जाल, दुनिया का सबसे तेज दिमाग , लोहे व अन्य खदानों का भण्डार ...लेकिन हमारे सत्त्ताखोरों ने राष्ट्रवाद को दरकिनार कर हमें धर्मनिरपेक्ष के झांसे से साम्प्रयवाद के छुपे रंग से वोट बैंक की आड़ में घुसपैठीयों के वोट बैंक से देश के तिरंगे को बदरंग कर दिया है 

आओ.,पार्टी नहीं देश का पार्ट बने, “मैं देश के लिए बना हूँ, देश की माटी बिकने नहीं दूंगा, “राष्ट्रवाद की खादसे भारतमाता के वैभव से देश को भव्यशाली बनाएं
याद रहे , अमेरिका की विदेश मंत्री हेनरी क्लिंगटन ने अपने कार्यकाल में कहा था हम टी,वी. व इलक्ट्रोनिक व अन्य वस्तुयें चीन, ताईवान,कोरिया, वियतनाम से खरीदते है, लेकिन हम तेजस्वी दिमाग हिन्दुस्तान से खरीदते हैं

आज हमारे देश के वैज्ञानिकों को सम्मान न मिलने से , वे विश्व में अपना लोहा मनवाकर, संपन्न देशों को गौरान्वित कर रहें हैं 

हर साख पर लुटेरा है, पेड़ में पत्ते से ज्यादा भ्रष्टाचार के दीमक ...जातिवाद, भाषावाद, अलगाववाद के दिमाग से पेड़ (देश) को खोखला बना रहें है,
आओ..., राष्ट्रवाद को जीवन की धारा बनाये..... , और हम सब ...नदियों के रूप मे मिलकर, देश को, सुख - संपन्न्ता व वैभव का एक महासागर बनायें .... 

सत्य मेव जयते…., अब बना , सत्ता मेवा जयते ....????, सत्ता एक मेवा है, इसकी जय है (जो, मेरे वेबस्थल का स्लोगन है...), और , इसी की आड मे सत्यम शिवम सुंदरम.... सत्ता एक मेवा है (सत्यम), जो भ्रष्टाचार के त्रिशूल से (शिवम है), और भारत निर्माणके मेक अप से देश की सुंदरता के बखान से (सुंदरम है ),


एक ओटो रिक्शा के पीछे लिखा था सत्य परेशान होता है... लेकिन पराजित नही होता..??. आज के माहौल मे सत्य इतना परेशान होता है कि असत्य के हमले से आत्महत्या कर लेता है., (किसान आत्महत्या/ भूखमरी योजनाओं को, सत्ताखोरों के डकारने से, गरीबी से मौत )....

(आज के कानून की परिभाषा = कान+ऊन = कान मे ऊन = गरीबों के न्याय मे, कानून बहरा है, और भ्रष्ट अमीरों व माफियाओं के लिए कानून ... सेहरा बनकर, उनके गलत कृत्यों को सरताज कहकर, उन्हे, एक एक , नये - नये ताज पहना रहा है….????) यही, आज का कानून, जो... गरीबों की गुहार सुनने के बजाय, कान मे ऊन डाल कर, तारीख पर तारीख देकर उसे प्रताडित करते रह्ता है. भ्रष्ट सत्ताखोरो, नौकरशाहों व माफियाओ के डर से जजशाही भी, कही अपना निवाला ना छिन जाये, इसलिए इनके चरण दास बन कर..... सत्य की परेशानी को और बढावा दे रही है.

इस  वेब स्थल का दूसरा स्लोगन है मेरा संविधान महान.... यहा हर माफिया पहलवान.... क्योंकि.... कानून से ज्यादा, आज पैसा है, बलवान... तो, क्यों ना डूबे हिंदुस्थान... भ्रष्टाचारी बने राजा... तो, क्यों ना बजे देश का बैंड बाजा....? और हर योजनायें, भोजनाये बन के खाजा , तो भी नही होगा बाल बॉका ... 

दोस्तो... जिस देश मे राष्ट्रवाद नही है, वहां, कर्ज की महामारी है, सत्ता खोरो मे लूट की खुमारी है, जनता के शोषण से राष्ट्र को बीमारी है... यही डूबते देश की कहानी है, राष्ट्रवाद की पुकार से ही.. हो , राष्ट्र की ललकार...???? हर दहाड़ , दुश्मनों के लिए बने पहाड़.