Sunday, 1 September 2019



अतिथी वोट भव..
दुश्मनों को अपने ही घर में बुलानेवाले
अपने शहीदों को हम हैं भूलानेवाले
भाई से भाई को लड़ाने वाले
हम हैं बरबादियों का जश्न मनाने वाले

G.D.P. = घुसपैठिया डेवलपमेंट प्रोग्राम जो १००% से ज्यादा है
(घुसपैठिया विकास योजना)
देश की जीडीपी (GDP) जो ५% से कम है.

छःलाख से ज्यादा कश्मीरी पंडित घाटी से बाहर कर ३० सालों के बाद उनकी नई पीढी अपने बाप दादाओं की संस्कृति व जगहों से वंचित हो कर मूल स्थान को लगभग भूलते जा रही है
जबकि बर्मा के एक लाख से ज्यादा रोहिग्या मुसल्बान हजारों किलोमीटर दूर से कश्मीर में धारा ३७० व ३५ (A) होने के बावजूद उन्हें स्थान देकर विस्थापित हो गए है सभी सरकारों को संज्ञान होने के बावजूद आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है

EditTag ५ साल पुरानी सार्थक पोस्ट – Repost
1 photos • Updated 5 years ago

अतिथी वोट भव.., आज भी देश के सत्ताधारी घुसपैठीयों को हमारे देश मे, 600 रूपये मे घुसाकर...? देश में आज दस करोड़ से ज्यादा घुसपैठीयें हैं.. जो १००% मतदान कर अपनी पहचान को भारत की नागरिकता से पुख्ता करते हैं, घुसपैठीयों को वोट बैंक का सम्मान देकर ,विशेष सुविधा से लैस कर रहें है ..दुनिया में सिर्फ भारत ही एक एकलौता देश है...जो उनके लिए आधार कार्डे से सत्ता में भागीदारी देकर देश की संस्कृति व अखंडता से खिलवाड़ हो रहा है.

आज ये घुसपैठीये देश की धारा बिगाड़ने की सामर्थ्य रखते है ... इस वेबसाईट की यह, ३ नवम्बर २०१३ की पोस्ट है ... हमारे देश मे तीन प्रकार की घुसपैठ है

1. सीमा पार से घुसपैठ – 10 करोड से ज्यादा देश मे 30% से ज्यादा की विकास दर है (G.D.P.-घुसपैठीया डेवलपमेट प्रोग्राम – 30% से ज्यादा)

2.देश मे घूस पैठ रिश्वत की पैठ देश मे 300% से ज्यादा की विकास दर है और सरकार, घरेलू विकास दर 5% भी नही पहुँचने पर चितित है.

3. इस घरेलू विकास दर को बढाने के लिये सरकार विदेशी धन माफियाओ की घुसपैठ करा रही है , वे सरकार के मिलीभगत से, झूठा विकास दिखाकर, जनता को भरमाकर, लूटेरो के साथ अपनी भगीदारी कर, सत्ता धारी अपने खजाने भर रहे है. इनकी पूजी 300-3000 गुना से ज्यादा बढ रही है और जनता अपने आपको लूटते हुए देख रही है.

क्या आप कल्पना कर सकते है ?, कि चीन कोइ घुसपैठ सहन कर सकता है., वहां तो सीमा पर अनजान व्यक्ति को देखते ही गोलियों से भून दिया जाता है.. इसका उदाहरण चीन है, जहाँ एक दम्पति सिर्फ एक संतान पैदा कर सकता है, 6-7 महिने पहले मैने एक खबर पढी थी , सुदूर गाव मे एक महिला को 8 महिने का दूसरा गर्भ था, जब सरकार को पता चला तो उसने, उसका पेट फाड कर संतान को मार डाला और महिला को जेल मे डाल दिया.

हमारे देश का सच: I.S.I. और आतंकवादियों की फसल हमारी सरकारों द्वारा ही लहलहारी है बिहार, बंगाल, असम और झारखण्ड के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक ग्रेटर बंगलादेश बनाने की साजिस रची जा रही है सीमा के बिभिन्न रास्तो से घुसपैठ बेधडक जारी है कोई पूछने वाला नहीं, दूसरी तरफ बिहार सरकार जिस अलीगढ मु.वि.बि. ने देश बिभाजन की नीव रखी थी, उसकी ब्रांच मुस्लिम बहुल जहां घुसपैठियों का बोल-बाला है वही पर जमीन का एलाटमेंट किया गया है.

पूर्व में राष्ट्रवादियो ने इसके विरोध में जब आन्दोलन चलाया तो उन्हें सांप्रदायिक करार दे दिया गया,—– झारखण्ड के पाकुड़ जिले के छः (छह) रास्ते से बंगलादेशी मुस्लिमो का घुसपैठ बदस्तूर जारी है, साहिबगंज और गोड्डा के भी कुछ हिस्से इनके प्रभाव में है, इस रास्ते पशु, कोयला, पत्थर, मादक पदार्थ लकड़ी, हथियार इत्यादि की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है, देह ब्यापार भी इसका एक हिस्सा है .

घुसपैठ की वजह से सीमावर्ती क्षेत्रो में जनसँख्या असंतुलन की स्थित उत्पन्न हो गयी है, घुसपैठिये राज्य की अर्थ ब्यवस्था भी प्रभावित कर रहे है, भारत के दम पर जिस बंगलादेश का निर्माण हुआ दुर्भाग्य से वही हमारे देश की आन्तरिक सुरक्षा में सेध लगा रहा है, सीमावर्ती क्षेत्रो के जरिये लाखो की संख्या में घुसपैठ जारी है सूत्रों के अनुसार बिहार, बंगाल, असम और झारखण्ड के कुछ क्षेत्रो को मिलाकर ग्रेटर बंगलादेश बनाने की नियत से इन घुस- पैठियों ने रिक्सा ठेला, मजदूरी के विविध क्षेत्रो, कृषि, गृह निर्माण, ईट भट्ठा, लघु- उद्द्योग, पर बहुत हद तक कब्ज़ा जमा लिया है.

चोरी, अपहरण, महिलाओ पर अत्याचार, लव जेहाद तस्करी व अन्य घटनाओ के साथ-साथ आतंकी संगठनों को हथियार की आपूर्ति के अलावा भारतीय अर्थ ब्यवस्था को कमजोर करने के लिए जाली नोटों के कारोबार तक में इनकी संलग्नता उजागर हो रही है.

एक आकलन के मुताबिक सीमावर्ती क्षेत्रो झारखण्ड, बिहार, बंगाल मिलाकर प्रति वर्ष लगभग ६-७ लाख घुसपैठिये देश की सीमा में प्रवेश कर रहे है, भाषाई समानता के कारण ये आसानी से अपने ठिकाने बनाने में सफल हो जाते है. चुनाव तक को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाले इन घुसपैठियों को परोक्ष रूप से राजनैतिक दलों का समर्थन हासिल हो जाता है,

मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड और अब यूआईडी कार्ड से लैस ये घुसपैठिये राज्य के कई हिस्सों में अब बहुसंख्यक हो चुके है, झारखण्ड के पकुदिया, महेशपुर, और सीमावर्ती इलाको में साहबगंज, राजमहल, बारहख , कोडाल पोखर, लाल्बथानी, गुमानी नदी उस पर कई गाव और निकटवर्ती इलाके गाव के दियारा क्षेत्रो में घुसपैठियो की मौजूदगी हो चुकी है. साहिबगंज के तत्कालीन उपायुक्त सुभाष शर्मा ने २००५-०६ में १२ से १४ हज़ार लोगो को चिन्हित किया था कई अधिकारी इस जुल्म में जेल की हवा भी खा चुके है. भारत सरकार भी कुछ इसी दिशा में बढ़ रही है अभी-अभी सितम्बर २०११ में एक समझौते के तहत बिना किसी संसद के निर्णय के ही हजारो एकड़ जमीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बंगलादेश को दे दिया, समझ में नहीं आता की पुरे देश में सन्नाटा क्यों छाया हुआ है जैसे कुछ हुआ ही नहीं, तथा कथित अपने को राष्ट्रबादी दल कहने वाली बीजेपी भी चुप है.

अभी तक किसी भी बड़े नेता या आडवानी की रथयात्रा में भी इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हो रही, क्या हम सोनिया (सरकार) व विपक्ष के चंगुल में बिलकुल फंस चुके है ? कि हमारे ही ब्यक्ति को कुर्सी पर बैठा कर हमारे देश को नष्ट करने का प्रयत्न किया जा रह है.

भारत में नया बांग्ला देश गढ़ रहे हैं घुसपैठिए बंगाल में एक फीलगुड कहावत है, ए पार बांग्ला, ओ पार बांग्ला. आम जनता की बात छोड़िए, मुख्यमंत्री एवं राज्य के दूसरे बड़े नेताओं को यह कहावत उचरते सुना जाता रहा है. संकेत सा़फ है, ओ पार बांग्ला के निवासी भी अपने बंधु हैं. भाषा एक है, संस्कृति एक है, फिर घुसपैठ को लेकर चिल्ल-पों काहे की. राज्य में भाजपा के अलावा कोई भी दूसरी पार्टी इस मुद्दे को नहीं उठाती.
असम में असम गण परिषद जो आरोप कांग्रेस की सरकार पर लगाती है, वही आरोप बंगाल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पर लगता रहा है कि वोट बैंक मज़बूत करने के लिए इन्हें बड़े पैमाने पर बसाया गया है. आंकड़े सा़फ-सा़फ सच बयां करते हैं. राज्य के सीमावर्ती ज़िलों में तो बांग्लादेशियों का बहुमत है और भारतीय नागरिक अल्पमत में आ गए हैं.
राज्य में सांस्कृतिक एकता सिर चढ़कर बोलती है अभी हाल मे 2012 के विधानसभा चुनाव मे जीत के बाद, ममता बनर्जी ने बंगला देशी मूल के मुस्लिमो को मंत्री बनाते हुए कहा , क्या हुआ ? उंनकी हमारी भाषा एक है, इस वोट बैक के व सत्ता के चक्कर मे, अब राष्ट्रवाद द्सरी ओर पीछे छूट जाता है. और ममता बनर्जी ने यहा तक कह दिया के पशिचम बंगाल का नाम बंग प्रदेश रखा जाये,

याद रहे शेख मुजीबर रहमान को बंग बन्धु के नाम से उपाधित किया गया था, युपीए -2 के चुनाव प्रचार के समय पी चिदंबरम ने खुले आम कह् दिया था, अब मै समझता हू, कि देश मे रह रहे , बंगला देशीओ को भारतीय नागरीकता दे देनी चाहिए दक्षिण दिनाजपुर के हिली गांव में भारत-बांग्लादेश सीमा पर कुछ दीवारें बनाई गई हैं, कोई नहीं जानता कि इन्हें किसने बनाया है, पर यह समझने में मुश्किल नहीं है कि यह तस्करों के गिरोह की करतूत है. वहां सुबह से शाम तक तस्करी और घुसपैठ जारी रहती है. घुसपैठिए ज़्यादा से ज़्यादा गर्भवती महिलाओं को सीमा पार कराते हैं और उन्हें किसी भारतीय अस्पताल में प्रसव कराकर उसे जन्मजात भारतीय नागरिकता दिलवा देते हैं. इस काम में दलाल और उनके भारतीय रिश्तेदार भी मदद करते हैं.

2006 में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में ऑपरेशन क्लीन चलाया था. 23 फरवरी 2006 तक अभियान चला और 13 लाख नाम काटे गए. हालांकि चुनाव आयोग पूरी तरह संतुष्ट नहीं था और उसने केजे राव की अगुवाई में मतदाता सूची की समीक्षा के लिए अपनी टीम भेजी. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के तत्कालीन राज्य सचिव अनिल विश्वास ने कहा था, उन्हें सैकड़ों पर्यवेक्षक भेजने दीजिए, अब कोई भी क़दम हमें जीतने से नहीं रोक सकता. इस बयान से अंदाज़ा लगाया गया कि माकपा को अपने समर्पित वोट बैंक पर कितना भरोसा रहा है. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि वाममोर्चा के सत्ता में आने के समय से ही मुस्लिम घुसपैठियों को वोटर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई. उस समय ममता बनर्जी ने कहा था कि राज्य में दो करोड़ बोगस वोटर हैं. विभिन्न संस्थाओं एवं मीडिया के मोटे अनुमान के मुताबिक़, भारत में डेढ़ से दो करोड़ घुसपैठिए बस गए हैं और बंगाल के एक बड़े हिस्से पर इनका क़ब्ज़ा है. अब ममता भी चुप हैं, क्योंकि उन्हें भी २०१४ में बंगाल की कुर्सी दिख रही है.





एक  सितम्बर ..., राज के सितम अब बनें देश के वर , अब बनकर बन्दर, थोप रहें हैं नए क़ानून के बन्दर बाँट से.., रोड नियम से अपनी कमजोरी छिपाने से बनाएं सरकारी स्वांग से अपनी तिजोरी भरने का काम....!!!!!!!!!!!! 

१.क़ानून के तूने तोड़ी बत्ती पीली..
अब यह है २० हजार की सरकारी थाली...

२. मेरे चेहरे में लाली .., क्यों डरता है खाली पीली... 
दे, दे.., मेरी २ हजार रूपये की सरकारी बोली ..
अब मैं कर दूंगा.., सरकारी झोली खाली..

३. अब भंग करने के बाद RTO का नया रूप, बना रिश्वत ट्रांस्जिक्सन ऑफिस ..., लगा रहा है, देश को ..., भ्रष्टाचार के इंजेक्शन...,

४. गड़करीजी अब होंगे सरकारी मेहमान, मालामाल.., बढ़ जाएगा रिश्वत का जाल ...,

५. सरकारी लकड़बघहों की बहार , जीवन में होगा चमत्कार ..,

६. सरकारी गड्ढे अब बने ..., भ्रष्टाचार के अड्डे.., बनी जनता के गले की हड्डी.., क्योंकि सरकारी कर्मचारी है फिसड्डी...

७. देश में सरकारी गड्ढे बनें सरकारी गद्दी के स्तंभ.., क्योंकि इस भ्रष्टाचार में है दम खंभ ...

८ गड़करीजी..., अब तो सरकारी गद्दीकरी बनकर चलाओ..., स्कूटर बिना हेलमेट के (HELL-नरक , MET –में मिलाना)..क्योंकि आप बैठें हैं सत्ता के स्वर्ग में... 
============

१. सरकारी गड्डे..., बने जम्पदार गद्दे, से.., SPONGE के स्पंजी से रीड की हड्डी से SPONDYLOSIS .. से भ्रष्टाचार का ANALYSIS .., जनता के जीवन के LOSS से (हानी से)..,नीजी नर्सिंग होम हुए मालामाल ..., जनता बेहाल..

२. ट्रैफिक के प्रदूषण से फेफड़े की बीमारी से ..., केकड़े (कैंसर) के जीवन में परिवर्तन... .

३. लोगों के समय की बर्बादी.. बनी , राष्ट्र की बर्बादी ,

४. टायर कंपनी का बढ़े व्यापार.., मुनाफ़ा जोरदार...,

५. गाड़ी के पुर्जे बनाने वालों के बहार..., इंसानी पुर्जे बने, दूसरे दर्जे से.., बेहाल...

६. पेट्रोल से सत्ताखोरों के PET-ROLE के इस भ्रष्ट्राचार से DIESEL (DIL- JAL) के इस दिल जले खेल से जनता घायल.., विदेशी मुद्रा से देश का घाटा.. देश को चुना लगाकर.. सत्ताखोरों अपना सफेदीपन चमकाओ....

७. हर टोल व चुंगी नाका.., सरकारी कर्मचारी बजा रहें है.., देश की पुंगी..., इस खुल्लम खुल्ला के खेल से.., महंगाई से, जनता की खुल रही लूंगी...



८. दोस्तों इस खेल में, देश की हानि को आंका जाय तो चुंगी.., टोल.., रिश्वत..., रोड़ निर्माण घोटालों से..., देश के इस रोड़े से.., वार्षिक, २० लाख करोड़ रूपये से कहीं अधिक धन, सरकारी कर्मचारियों की थालियों में, भेंट चढ़ जाता है... 

९. हमारी तुम्हारी जान बचाने के धोके से रिश्वत के झोके से अब होगा हिन्दुस्तान आबाद ...!!!!

१०. सत्ता के नशेड़ी लोगों को इतनी राजस्व की आमदानी होगी कि हमारी GDP के मूल्य को भी करेगी मात...!!!!, यही है देश की बात बेबाक..!!!

Thursday, 29 August 2019


जी हाँ .., क्रिकेट के भगवान् की राज्यसभा में अनुपस्थिती से..., पूरी पगार.., क्योंकि हमारा संविधान है दिलदार..., दागी बागी की लोबी से लोभी भी हैं..., इसके दावेदार....
पिछले दरवाजे (राज्य सभा) के नेता , अभिनेता, खिलाड़ी से धन बल के मसीहा भी बने सदाबहार..., रिश्वत से राजनीती के सफर , रिश्ता भी है..., अभी बरकरार...,



महान फक्कड़ समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया ने कांग्रेस से लोहा लेते कहा था , राज्य सभा देश के संविधान का भार है..., इसे भंग किया जाय..,

पहले दिन..., अपनी अनुपस्थिती के इस विवाद पर सचिन तेंदुलकर,खामोश..., दूसरे दिन बड़े भाई के ऑपरेशन का बहाना..., तीसरे दिन बेबाक कहना..., “ मैं विज्ञापनों व अन्य अनुबंधों की वजह से राज्यसभा नहीं आ सका”..., लेकिन भविष्य में कब आऊँगा इस बारे में कुछ नहीं कहा ...
हाल ही मैं सचिन तेंदुलकर का , दिल्ली के विज्ञान भवन में आगमन .., लेकिन राज्यसभा से हुआ उनका मोह भंग...

आज से २० साल पहिले एक सीनीयर भारोत्तोलन की महिला खिलाड़ी ने कहा था, क्रिकेट की वजह से सचिन को जल्द ही अर्जुन पुरूस्कार मिला , मैं, तो वर्षों से देशी- विदेशी गोल्ड मेडल लेते आई हूं ..., मुझे तो पुरुस्कार के लिए, खेल मंत्रालय में मंत्रणा चल रही है..., दूसरे खेलों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय पुरूस्कार देना, मतलब खिलाड़ी पर परोपकार करना...

याद रहे क्रिकेट के कप्तान महेंद्र सिंग धोनी , अपने शुरूवाती खेल जीवन में.., जो फ़ुटबाल में अपना जीवन सवारने के लिए ,५० रूपये कमाने के लिए कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करते थे..,

८ साल पहिले भारत सरकार ने क्रिकेट में महेंद्र सिंग धोनी व हरभजन सिंग को पद्मश्री से सम्मानित किया तो ,वे विज्ञापन एजेंसी में, शूटिंग से, धन की लालसा से , राष्ट्रपति भवन में पुरुस्कार समारोह में नहीं गए .., बाद में झारखण्ड सरकार ने इनके इस कृत्य का बचाव कर, राजभवन में बुलाकर पुरूस्कार दिया 

आज देश में क्रिकेट ने अन्य खेलों के वजूद को खा लिया है... अन्य खेलों के देश में हजारों खेल रत्न जो अन्तराष्ट्रीय मंचों पर गोल्ड मैडल जीत चुके हैं..., आज वे दुर्गती भरा जीवन जी रहें/रहीं हैं.., कोई मंनरेगा में मजदूरी, कोइ सब्जी बेचकर...,कोई भूखमरी से ..., और देश की प्रतिभा ख़त्म हो रही है...,

राख के तले चिंगारी (गरीबों की प्रतिभा) को तो सरकार ने , राख पर भ्रष्टाचार का पानी डालकर .., बुझा दिया है...
दूसरी बड़ी खबर..., बॉडी बिल्डर खामकर, सरकारी बाबूओं की चमक बड़ा-कर , भ्रष्टाचार के मलखंभ से अब दसवी बार , दस नम्बरी के दंश से भ्रष्टाचार के मिस्टर इंडिया के खिताब से नवाजा जा चुका है...,

तीसरी खबर, सरकारी श्री की पद्मता से सैफ अली भी दबंगी दिखाकर , मल खंभ के खेल से, संविधान से सुशोभित है..
याद रहे.., सैफ अली के पिता , क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी ,दुर्लभ जाती के हिरन ह्त्या के आरोप में, अग्रिम जमानत से क़ानून को अमानत बनाकर अल्लाह को प्यारे हो गये .., वे ही नहीं इस तरह के लाखों अमीर सफेद्पोसों ने क़ानून को प्यास बनाकर अपनी सेहत बढ़ाई है...,

क्या अल्लाह को प्यारे इस तरह के लोगों को.., अल्लाह भी प्यार देगा...???, यह सवाल हमारे देश के संविधान के क़ानून की अनबूझ पहेली है...!!!!!!!,

((((वोट बैंक के भगवानों ने सत्तापरिवर्तन (१९४७) को आजाद भारत कहकर, क्रिकेट के दीवानों को वोट बैंक से भरमाने के लिए क्रिकेट के बिकाऊ/दुकानदार को भारत रत्न का सम्मान से सत्कार व मेजर ध्यानचंद को दुत्कार, व गुलाम भारत के खेल के भगवान, ध्यानचंद,जिन्होंने विश्व को नक़्शे में भारत का ध्यान दिलाकर.., हिटलर ने भी जर्मन के फील्ड मार्शल की बोली लगाई.., राष्ट्रवाद को कोई खरीद नहीं सकता है.., यह सिद्ध करने वाले ध्यानचंद.., के पुतले की धूल साफ़ करने का कांग्रेसीयों को ध्यान तक नहीं आया.. ध्यानचंद आज तक बेखबर व सचिन को तो लोकतंत्र के मंदिर का भगवान् बना दिया ))))


जरूर पढ़े, कैसे... राष्ट्र का खेल दिवस या खिल्ली दिवस
ध्यानचंद का जन्म दिवस...!!!,
दुनिया जिसकी कायल वह देश में सम्मान के नहीं क़ाबिल सत्ता के लुटेरों ने भारत रत्न ध्यान चंद से चुराकर सचिन तेंदुलकर को दे दिया 



वोट बैंक के जादूगरों ने (ध्यान)से
हॉकी के जादूगर का भारत रत्नका पुरूस्कार ,(चंद ) दिनों में देश के भ्रष्टाचारीयों ने जादू से चुराकर सचिन तेंन्दुड़कर को दे दिया...

सचिन एक सेल्समैन , ध्यानचंद एक ईमानदार के साथ... ईनामदार राष्ट्रवादी खिलाड़ी. हिटलर ने भी उन्हें अपने से हिट मानकर, अपने दर्श की टीम से खेलने पर जर्मनी सेना में फील्ड मार्शल के ओहदे को ध्यानचंद ने ठुकरा दिया , आज सोने की चैन सचिन को .भष्टाचार के खाल मंत्रालय ने को भारत रत्न और ध्यानचंद की प्रतिभा को प्रतिमा बना... बनी बदरंग के साथ राष्ट्रीय खेल पर कलंक .....

क्रिकेट (भ्रष्टाचार) को राष्ट्रीय धर्म व सचिन को उसका भगवान् कहकर, देश के २५ लाख करोड़ से कही ज्यादा के काले धन को फिक्स कर , सफ़ेद धन में परिवर्तित कर , विदेशों में चला गया है... यह, खेल अब राष्ट्रवाद नहीं... भ्रष्टवाद की आड़ में खेल कर .....दर्शको के समय व पैसे की लूट का खेल खेला जा रहा ...

याद रहे आज किसी भी विज्ञापन के लिए ... जो उत्पादक कंपनिया खिलाडियों को १ करोड़ रूपये देती है तो वह जनता से १०० करोड़ रूपये लूटती है....,और विज्ञापनों से सचिन व अन्य खिलाडियों ने देश व दुनिया की जनता को भारी चूना लगाया है.... याद रहे सचिन से बड़े भारत रत्न के दावेदार”, शतरंज के महा....महारथी विश्वनाथ आनंद है, वे विज्ञापनों में लगभग नहीं के बराबर आते है...वे भारत सरकार के रवैये, से उदासीन है... और तो और मीडिया की करतूत... जो १०० नम्बर के ऊपर की रैंकिग की सानिया मिर्जा को जो तवज्जुब देती है वह विश्व के १ नम्बर के महारथी विश्वनाथ आनंद को नहीं ...याद रहे प्रथम बार वाईल्ड कार्ड के जरिये जब विम्वेल्डन के महिला सिंगल में सानिया मिर्जा को प्रवेश मिला तो... उसकी प्रतिद्वंदी सेरेना विलियम्स ने कहा , मैंने उसका आज तक नाम नहीं सुना है, और सानिया मिर्जा को पहले राउंड में बाहर/चलता कर दिया....
..
सचिन के अलविदा टेस्ट में ९०% टिकट बड़ी हस्तियों को दे दिया गया, जो बाद में ३ हजार रूपये के टिकट २० हजार रूपये से ज्यादा कीमतों में कालाबाजार में बिक रहे थे... सचिन के शतक पर ५ हजार करोड़ का सटटा हुआ था , शतक न जमाने पर क्रिकेट के पंडित कह रहे थे, भारत को पारी घोषित करनी चाहिए थी ताकि उन्हें दुबारा शतक बनाने का मौक़ा मिलता ...क्या यह टेस्ट मैच देश के लिए खेला जा रहा था, या सचिन को माफियाओं की अपने सोने की चैन बनाने के लिए.....
आज तक किसी भी भारत रत्न से अलंकृत हस्तियों ने राष्ट्रीय संदेशोके अलावा किसी नीजी कम्पनी के विज्ञापनों से धन नहीं कमाया है ...
याद रहे... १९८३ के विश्वकप के विजेता खिलाड़ियों के ईनाम के लिए बी.सी.सी.आई. के पास पैसे नहीं थे ...तब लता मंगेशकर ने एक प्रोग्राम कर, उससे अर्जीत आय से प्रत्येक खिलाड़ी को २ लाख रूपये ईनाम के तौर पर दिये, तब तक क्रिकेट में राष्ट्रवाद की भावना थी, आज भी जनता में उस खेल की एक-एक क्षण याद है जब ....??????, खेल मंत्रालय ने तो मेजर ध्यानचंद के नाम पर मुहर लगाई थी ,
लेकिन ऐसी क्या ख़ास घोषणा हुई, जैसे...अजमल कसाब की फांसी की खबर प्रधानमंत्री तक को भी नहीं दी गयी थी....???, खेल मंत्रालय ने भ्रष्टाचार के खाल का मंत्रालय से देश को चौका दिया....?????, जो ध्यानचंद को मिलनेवाला भारत रत्नका सम्मान मास्टर ब्लास्टर को दे दिया गया ...... सचिन को खेलते देखने राहुल गाँधी मैदान मे उपस्थित थे. व मुम्बई से दिल्ली वापिस जाकर अपनी माँ , सोनिया से बात की... क्या आप जानते है कि सचिन को भारत रत्नसे नवाजे जाने की घोषणा एक दिन के भीतर आनन फानन में राहुल गांधी के पहल पर कर दी गई
एक तो सचिन को सांसद के पिछले दरवाजे से (राज्यसभा) कांग्रेस का सांसद बनाकर , व चुनावी प्रचार में हांमी भरने से , सचिन के प्रशंसको का हालिया चुनावी वोट हथियाने का अस्त्र बनाया...
एक बेबाक धावक मिल्खा सिंग को भी सचिन को भारत रत्न मिलाने पर खेल मंत्रालय व सरकार को लताडा था .
आईये जाने ध्यान चंद को.....
१९७९ में ,अपनी म्रूत्यु के दो महीने पहले ध्यानचंद ने कहा था ...मेरी मौत की खबर से , दुनिया के लोगों में रोना होगा , लेकिन भारत के लोग मेरे लिए एक आंसू भी नहीं बहायेगा...

Friday, 23 August 2019




१.    चेतो मोदी सरकार फ़्रांस की प्यासी धरती को  दो..,  वीर सावरकर के चमत्कार से सत्कार.., बंद करो गांधी के नाम की “मक्खनबाजी” से देश के तुकडे कर सत्ता परिवर्तन को आजादी कहने वालों की छुपी कहानी की बखानी..,  


२.     8 जुलाई 2010, को वीर सावरकरजी मार्सेल्स द्वीप की ऐतिहासिक छलांग के पसीने से, 100 वर्षों पूरे होने के उपलक्ष्य में फ़्रांस सरकार, अपने खर्च पर, अपनी भूमि पर मूर्ती का निर्माण कर , सरकारी समारोह से वीर सावरकरजी को अन्तराष्ट्रीय रूप से गौरान्वीत कर, विश्व की युवा पीढी को राष्ट्रवाद से यौवान्वित का सन्देश देना चाहती थी .., लेकिन कांग्रेस के लूटेरों ने फ़्रांस सरकार के इस प्रकल्प पर पानी फेर दिया,




३.   मोदीजी, अप्रैल २०१५ में आप फ़्रांस में थे ..,वीर सावरकर के बारे में मौन थे अब भी राफेल सौदे के बावजूद २३ अगस्त २०१९ के मौन से क्या अभिव्यक्ति जताना चाहते हो..  अभी भी एक अहम् वक्त है फ्रांस के G-७ देशों के सम्मेलन में  लगाओ दहाड़, बने.., मार्सेल्स द्वीप में बने वीर सावरकरजी का स्मारकऔर ८ जुलाई २०२० को वीर सावरकरजी की ११०  वी पूण्य स्मृती को इसे कार्यान्वित .कर उनका माल्यार्पण का मार्ग प्रशस्त कर विश्व को इस किर्ती का अभिमान हो ..


४ .  8 जुलाई 2010.., देश के इतिहास का सबसे बड़ा काला दिन, जागो मोदी सरकार, फ़्रांस ने तो श्यामजी वर्मा की अस्थियाँ ७० साल तक सजोई थी, लेकिन सावरकर के पराक्रम की याद व आस्था आज १०९ सालों बाद भी सजोई रखी है.

५.  आप तो श्यामजी वर्मा की अस्थियों का विसर्जन से गुजरात में इनका स्मारक बनाकर गौरान्वित हो...


६ .  वीर सावरकर व होमी जहांगीर भाभा राष्ट्रवाद के एक   सिक्के के दो पहलू थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने २३ अगस्त को फ्रांस में अपने वक्तव्य से ठीक पहले एक स्मारक का उद्धाटन किया. ये वो स्मारक है जो

 १९६६ में भारत के परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा की माँ ब्लां पर्वत में हवाई दुर्घटना में मौत हो गई थी लेकिन मोदीजी ,,,!!!! आप, वीर सावरकर की मार्सेल्स द्वीप में विश्व की सबसे बड़ी छलांग अंगरेजों के बन्दूक की गोली की बौछार के बावजूद अपने दिल-बल की किर्ती को छुपाने के छल का खेल मत खेलो