Thursday, 28 May 2020

वीर सावरकर ने कहा था, पहले हमारी सीमाओं की सुरक्षा के लिए, हमारी सेनायें उन्नत्त व मजबूत होनी चाहिए, ताकि कोई हमारे से आँख उठाकर बात न करे..., १९४७ में सावरकर ने कहा था, हिन्दुस्तान को अणु बम बनाना ही चाहिए, इतना ही नहीं हाइड्रोजन व ऑक्सीजन का ध्वम बम भी बनाना चाहिए... राष्ट्र का सैन्यीकरण व सेना का हिन्दुकरण , आज इसी विचारधारा से इसराईल ने अपने को सुरक्षित रखा है.. इसी का संज्ञान लेते हुये , हमारी सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए, आज इसी नीती से सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों से प्रधानमंत्री बैठक कर, देश की सुरक्षा के लिए उपकरणों की आवश्यकता से निदान ..., व मोदीजी ने इसरो को नाभकीय क्रांती में खुली छूट दे कर कहा है.. आप आगे बढ़ो.. मैं आपको इस प्रकल्प में धन की कमी नहीं होने दूंगा. वही लूली लंगडी चल रही हत्यार निर्माण के डी.आर.डी .ओ. को अब चलना सिखा दिया है.., जल सेना को नए जलपोतों के निर्माण का जज्बा फूँका है,,



नरेन्द्र मोदीजी और वीर सावरकरजी में समानतायें..., वीर सावरकर को जिसने नही जाना..?, उसने हिन्दुस्थान को नही पहचाना?



 विशुद्ध रूप से वीर ही नहीं परमवीर.., अतुल्य सावरकर, नरेन्द्र मोदीजी के ६ साल के शासन पूरे .., अब भी वीर सावरकर के विचार से अधूरे .., क्या मोदीजी.., वीर सावरकर के दफन इतिहास को जनता को दर्शन समारोह बनाकर गौरव सप्ताह गौरव पखवाड़ा मनाएंगे..., या पिछ्वाड़े से.., गए वर्षों की तरह एक छोटे से १० मिनट के भाषण से समाप्त करेंगे...!!! ========================

१. दोनों के पिता का नाम दामोदर, एक २०वी सदी के व दूसरे २१वी सदी के दमदार व्यकित्व... नाम विनायक .., वीर सावरकर तो बिना सेना के बावजूद लड़कर, देश के नायकबने . नाम नरेन्द्र .., अपने बल पर प्रधानमंत्री बन कर नर व इन्द्र का संगम. सावरकर..., भारतमाता को संवारने में अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पीत कर दिया मोदी..., अब, भ्रष्टाचार से सत्ता के मोदकों को खत्म करने का जज्बा

२. वीर सावरकरजी व नरेन्द्र मोदीजी ने एक कच्ची उम्र में ही, लगभग १५-१७ साल की उम्र को .., देश सेवा के लिए, अपने को समर्पित कर दिया.



३. अखंड भारत के शिल्पकार सावरकरजी के मंसूबे को देशद्रोहियों ने देश को तोड़कर, खंडित भारत से, देश के २१ लाख बेगुनाह हिन्दुस्तानियों की ह्त्या कर, महात्मा, बापू, चाचा .. से, यमदूत बनकर शांती के मसीहा से, जनता को मशगूल बनाकर.., सत्ता मेवा है , इसकी जय है, (जो इस  वेबस्थल का स्लोगन है), से ६० वर्षों तक राज किया (लालबहादुर शास्त्री के कार्यकाल को छोड़कर) वही लोकसभा चुनाव में अपने दम पर नरेन्द्र मोदीजी ने सावरकरजी के राष्ट्रवाद की एक लौ जगाकर ..., भारतमाता की कसम खाई है... मैं देश नहीं झुकने दूंगा , मैं देश नहीं मिटने दूंगा.., हे भारत माँ तेरा वैभव अमर रखूंगा ..., इसी राष्ट्रवाद की शक्ती से भारतमाता की भक्ती से वे प्रधानमंत्री बने .. यही शपथ, वीर सावरकर ने भवानी माता से अपने १६ वें साल में ली थी .., और इसे सार्थक किया था 


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४. वीर सावरकर ने कहा था, पहले हमारी सीमाओं की सुरक्षा के लिए, हमारी सेनायें उन्नत्त व मजबूत होनी चाहिए, ताकि कोई हमारे से आँख उठाकर बात न करे..., १९४७ में सावरकर ने कहा था, हिन्दुस्तान को अणु बम बनाना ही चाहिए, इतना ही नहीं हाइड्रोजन व ऑक्सीजन का ध्वम बम भी बनाना चाहिए... राष्ट्र का सैन्यीकरण व सेना का हिन्दुकरण , आज इसी विचारधारा से इसराईल ने अपने को सुरक्षित रखा है.. इसी का संज्ञान लेते हुये , हमारी सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए, आज इसी नीती से सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों से प्रधानमंत्री बैठक कर, देश की सुरक्षा के लिए उपकरणों की आवश्यकता से निदान ..., व मोदीजी ने इसरो को नाभकीय क्रांती में खुली छूट दे कर कहा है.. आप आगे बढ़ो.. मैं आपको इस प्रकल्प में धन की कमी नहीं होने दूंगा. वही लूली लंगडी चल रही हत्यार निर्माण के डी.आर.डी .ओ. को अब चलना सिखा दिया है.., जल सेना को नए जलपोतों के निर्माण का जज्बा फूँका है,,



५. सावरकर, मुस्लिम लीग की कट्टरता से देश को चेताते रहते थे, बलपूर्वक धर्म परिवर्तन अर्थात राष्ट्र परिवर्तन..जो, आज ईराक सीरिया में इसकी भयावहता दिखाई दे रही है.. वही , 2003 में गुजरात में सत्ता में आते ही नरेन्द्र मोदी सरकार ने गुजरात विधानसभा में "गुजरात धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2003" पारित कर मतांतरण करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाया था।


६. वीर सावरकरजी के नाम से अंग्रेजों का न डूबने वाला सूर्य का साम्राज्य थर्राता था... वहीं मोदीजी के प्रधानमंत्री पद की घोषणा से थर्राते हुए, दुश्मन व लूटेरे देशों ने मीडिया व अन्य संशाधनों से एड़ी चोटी का जोर लगाने के बाद भी सफलता नहीं पायी.., और हाथ मलते हुए मायूस हो गयें है...

७. ब्रिटिश अखबार इंग्लॅण्ड में क्रांतीकारियों की आवाज व हिन्दुस्तानी समाचार जानने के लिए वीर सावरकर से संपर्क करती थी जबकि उस समय नरम दल पैसे देकर अपनी खबर छापते थे,, वही देश की विदेशी टुकड़ों में पालनेवाली मीडिया भी पेड़ मीडिया बनकर , नरेन्द्र मोदी को नर भक्षी के रूप में प्रसारित कर.., अब उनकों भी अक्कल आने लगी है १८ सालों से नरेन्द्र मोदीजी को देश का कसाई व विदेशी इशारों से, देश के समाचार चैनलों के विदेश में बैठे देशी व विदेशी मालिक, बदनाम करने के लिए पेट भरी मीडिया .., मालामाल होकर भी नरेन्द्र मोदीजी से परास्त हो गयी.., वही मोदी पेट भरी मीडिया को अपने समाचार के बारे में फटकने नहीं देते थे... और पेट भरी मीडिया को बार-बार चेतावनी देते थे..., निष्पक्ष बनों.. देश को गुमराह मत करो...देश की छवि मत बिगाडों

८.वीर सावरकरजी की तरह ही नरेन्द्र मोदीजी अपने भाषणों में शमा बाँध देते है.., कब घंटे निकल जाते है...,श्रोताओं को पता भी नहीं चलता

९. याद रहे.., अपने तरूण ब्रह्मचर्य जीवन में विदेशों में वीर सावरकर, दमदार व्यक्तित्व , निर्भीक जीवन..,एक तेजस्वी वक्ता के राष्ट्रवादी भाषणों से दुनिया कायल थी, देशी व विदेशी गोरी चमड़ी वाली लड़किया तो दीवानी होकर वीर सावरकरजी से “I LOVE YOU” कहती थी.., तब वीर सावरकरजी कहते थे मैं तो सिर्फ भारतमाता से प्रेम करता हूँ..., और शादी के बाद अपनी बीबी से प्रेम करूंगा वही लोकसभा चुनावों में पेट भरी मीडिया ने मोदीजी के तूफानी भाषणों से कही उनके कैमरे उड़ न जाए, इसी झांसे से मोदीजी के शादी व ब्रह्मचर्य जीवन से देश वासियों को भटकाने की कोशिश से, कशिश निकालने का खेल खेला..हाथ कुछ न आया बाबाजी का ठुल्लू
९.नरेन्द्र मोदीजी ने अपने दुश्मन व मनमुटावी देशों को अपनी कूटनीती से साथ लेकर दुनिया को अचम्भे में डाल दिया है...

१०. वही वीर सावरकरजी.., स्वतंत्रता के लिए लड़ों के उद्घोष से, विश्व के गुलाम देशों , तुर्की,रूस,इटली,आयरलैंड,इजिप्त फ़्रांस के क्रांतीकारियों में एक आजादी का जज्बा भर दुनिया को अचंभित कर दिया !!!!!!!!! . वही मोदीजी भी स्वतंत्र देशों को कहते हैं..., “सबका साथ, सबका विकास ...

११.सावरकर स्वर से देश के लिए अदम्य थे.., उनकी तुलना , चाणक्य से ही की जा सकती है..., जिसने भारतमाता की बेदिया बेड़ियां तोड़ने के लिए ही जन्म लिया था उनके स्वरों में एक मुख्य स्वर थे.., जब तक देश जातिवाद, भाषावाद, अस्पर्श्यिता की बेड़ियों में जकड़ा है.., तब तक देश एक गुलामी से दूसरी गुलामी में बंधा रहेगा..., और हिंदुत्व का पतन के साथ देश विखंडन के कगार पर जाएगा ... सावरकर के अनुसार हिन्दू समाज सात बेड़ियों में जकड़ा हुआ था।।

 १. स्पर्शबंदी: निम्न जातियों का स्पर्श तक निषेध, अस्पृश्यता 

२. रोटीबंदी: निम्न जातियों के साथ खानपान निषेध 

३. बेटीबंदी: खास जातियों के संग विवाह संबंध निषेध 

४. व्यवसायबंदी: कुछ निश्चित व्यवसाय निषेध 

५. सिंधुबंदी: सागरपार यात्रा, व्यवसाय निषेध 

६. वेदोक्तबंदी: वेद के कर्मकाण्डों का एक वर्ग को निषेध

 ७. शुद्धिबंदी: किसी को वापस हिन्दूकरण पर निषेध १२. ऐसी उनकी ४० से ज्यादा भविष्यवाणीयां, जिनकी हमने अवहेलना की है..., वीर सावरकर का इस देश पर महान ऋण है। वे अधिकांश क्रान्तिकारियों के लिये प्रेरणा के स्रोत थे। आज भी वह हर सच्चे भारतीय के लिये प्रेरणा के स्रोत हैं !!!!!

A. क्या.., अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी .., श्री..श्री.. वीर..., वीर.., परमवीर सावरकर के इतिश्री किये इतिहास को.. भारत के गौरवशाली इतिहास के अनुसरण से भारतमाता के गौरव से देश को भव्यशाली बनायेंगें (२८ मई को वीर सावरकर २०२० सन  के जन्म दिवस पर ...

B. क्या मोदीजी.., वीर सावरकर के दफन इतिहास को जनता को दर्शन समारोह बनाकर गौरव सप्ताह गौरव पखवाड़ा मनाएंगे..., या पिछ्वाड़े से गए वर्ष की तरह एक छोटे से १० मिनट के भाषण से समाप्त करेंगे...!!!

C. मोदीजी ने तो... प्रधानमंत्री के रूप में सरकारी खर्च से मोदीजी ने अपने बुलेटी जिगर से AROUND THE WORLD IN 360 DAYS WITH 360 DEGREES से दुनिया में धाक मचा दी है..., , लेकिन सावरकर के अतुल्य राष्ट्रवादी बल से “ONE MAN ARMY” से, वे तो विश्व के मानचित्र में छा गए थे .

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D. नरेन्द्र मोदी भी अपने आत्मबल से प्रधानमंत्री बनकर, विपक्षीयों को, जो, भ्रष्टाचार के पंछी बनें थे.., उन्हें पेड़ से उड़ाकर, एक नया इतिहास से देश के प्रधानमंत्री बने.. वही गुण सावरकर में थे.., लेकिन वीर सावरकर की ख्याती को, कांग्रेस दुर्भावना से जनता को गुमराह करती रहे.., इसके बावजूद उन्होंने अपना आत्मबल न खोते हुए .., अबाध गति से भारतमाता के गौरव बढाने में को अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया था 

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Sunday, 8 March 2020

नारी दिवस ..,मर्दानी ..., अब भरवाओं.., मर्दों से पानी... राजनीती से समाज ने तुम्हारी पवित्रता को पतितता से, बेड रूम (BED ROOM-शयनयान) की वस्तु बनाकर, भष्टाचार की ऊंची उड़ान भरी है और देश का बेड-रूप बना दिया है... . नारी तुम सब पर भारी..., अब अपने मर्दों (सरपंच से नेता) से कहों..., अब बेड रूम में तुम्हारे प्रपंच का खेल नहीं चलेगा..., भ्रष्टाचार के प्रपंच की पतितता से अब देश में नारी की कुरूपता का व्यव साय नहीं चलेगा आओं.., अपने मर्दों से कहों.., राजनीती की बातें BED-ROOM में नहीं, घर के DRAWING –रूम (बैठक कमरे) में हो..., ताकि, मैं देश की एक नई तस्वीर बना सकूं... अब तक तो.., देश के मर्द सत्ता के मद में देश का मधु पी रहें थे ..... आओं..., मर्दों से कहो..., देश की महिलाओं को जगाकर कहो.., अब, हम तुम्हारी बैसाखी नहीं..., बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं..., अब हमारे संस्कारों की सम्मानता से.., हम देश के हर नागरिकों को समान प्यार से, उनके जीवन की प्रेरणा को और उज्जवलित करेंगें...


नारी दिवस ..,मर्दानी ..., अब भरवाओं.., मर्दों से पानी...
राजनीती से समाज ने तुम्हारी पवित्रता को पतितता से, बेड रूम (BED ROOM-शयनयान) की वस्तु बनाकर, भष्टाचार की ऊंची उड़ान भरी है और देश का बेड-रूप बना दिया है...


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नारी तुम सब पर भारी..., अब अपने मर्दों (सरपंच से नेता) से कहों..., अब बेड रूम में तुम्हारे प्रपंच का खेल नहीं चलेगा..., भ्रष्टाचार के प्रपंच की पतितता से अब देश में नारी की कुरूपता का व्यव साय नहीं चलेगा

आओं.., अपने मर्दों से कहों.., राजनीती की बातें BED-ROOM में नहीं, घर के DRAWING –रूम (बैठक कमरे) में हो..., ताकि, मैं देश की एक नई तस्वीर बना सकूं...




अब तक तो.., देश के मर्द सत्ता के मद में देश का मधु पी रहें थे .....
आओं..., मर्दों से कहो..., देश की महिलाओं को जगाकर कहो.., अब, हम तुम्हारी बैसाखी नहीं..., बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं..., अब हमारे संस्कारों की सम्मानता से.., हम देश के हर नागरिकों को समान प्यार से, उनके जीवन की प्रेरणा को और उज्जवलित करेंगें...


नारी..., तेरा प्यार दिल के आँसुओ से भरा रहता है, तुम्हारा दिल तो वात्सलय से 24 घंटे धडकता.. है... हर दु:ख पहुचाने वाले पति से बच्चे हर सख्श तक को आप माफ कर देती हो.. तकि आप की आँसू से वे अपने गलती का अहसास समझ कर प्रायश्चित (सुधर सके) कर सके,
आप तो माँ की रूप में , सौ बार अपने आँसुओ से मौका देती

है....माँ.., तेरे आँसु सागर से भी गहरे है. लेकिन तेरे सागर के आँसु तो लोगो को जीवन मे कैसे तैरना है,वह सिखाती है...आज तक तेरे आँसु के सागर कोई भी डूबा नही है...क्यो कि इसमे वात्सलय का नमक है...
आपके खून में ही तो देश का वात्सल्य , अभिमान व देश की हरियाली छीपी है..., तुम आरक्षण की वस्तु नहीं देश के संरक्षण की धारा हो...
हमारे समाज के पिस्सुओं ने देश की बच्चियों से नारी को पतितता से वेश्यावृती के धन से अब बलात्कार की हुंकार भर कह रहें हैं..., युवाओं का यह है अधिकार.., है...

नारी.., समाज के पिस्सुओं ने देहव्यापार में धकेले ढकेले कर..., तुम्हारी पतितता में भी पवित्रता है..,
नारी.., इंसानों में सर्वोत्तम तुम ही और केवल तुम ही हो...
वेश्या पतिता नहीं होती, पतन को रोकती है /
पतित जन की गन्दगी , अपने ह्रदय में सोखती है/
जो विषैलापन लिए हैं घूमते नरपशु जगत में ,
उसे वातावरण में वह फैलने से रोकती है /

यही तो गंगा रही कर , पापियों के पाप धोती ,
वह सहस्रों वर्ष से , बस बह रही है कलुष ढोती,
शास्त्र कहते हैं कि गंगा मोक्षप्रद है, पावनी है ,
किसलिए फिर और कैसे वेश्या ही पतित होती ?

मानता हूँ , वेश्या निज तन गमन का मूल्य लेती ,
किन्तु सोचो कौन सा व्यापार उनका ,कौन खेती ?
और यह भी , कौन सी उनकी भला मजबूरियां हैं ,
विवश यदि होती न, तो तन बेचती क्यों दंश लेती ?

मानता यह भी कि वेश्यावृत्ति , पापाचार है यह ,
किन्तु रोटी है ये उनकी , पेट हित व्यापार है यह ,
देह सुख लेते जो उनसे, वही उनको कोसते भी,
और फिर दुत्कार सामाजिक भी , अत्याचार है यह /
गौर से देखो , बनाते कौन उनको वेश्याएं ,
और वे हैं कौन, जो इस वृत्ति को खुद पोषते हैं ?
पतित तो वे हैं , जो रातों के अंधेरों में वहां जा -
देह सुख भी भोगते हैं , और फिर खुद कोसते हैं /

Wednesday, 26 February 2020

२६ फरवरी..., वीर परमवीर सावरकर की पुण्य तिथी पर सत्कार, साकार हुई वीर परमवीर सावरकर की उक्ती “शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती है” , विश्व में दुर्बल बनकर देश का इतिहास नहीं संवारा जा सकता है अब पकिस्तान प्रहार पर प्रहार.., बनी मोदी की दुधारी तलवार देश में विरोधियों का चीत्कार, कोलाहल.., कहें मोदी नहीं है चित्रकार .., अब मोदी कहें.., इस कोलाहल से बनाऊँ इन्हें कोल्हू का बैल से राजनीती में ध्वस्त करूं इनके विचारों के चित्र का अस्तित्व








२६ फरवरी..., वीर परमवीर सावरकर की पुण्य तिथी पर सत्कार, पुलवामा के कायर आक्रमण का बदला  आज ही के दिन एक साल पहिले बालाकोट में ६०० से अधिक आतंकवादियों को जहन्नुम का रास्ता दिखाया 
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साकार हुई वीर परमवीर  सावरकर की उक्ती शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती है” , विश्व में दुर्बल बनकर देश का इतिहास नहीं संवारा जा सकता है  
अब पकिस्तान प्रहार पर प्रहार..,
बनी मोदी की दुधारी तलवार
देश में विरोधियों का चीत्कारकोलाहल..कहें मोदी नहीं है चित्रकार ..


अब मोदी कहें.., इस कोलाहल से बनाऊँ इन्हें कोल्हू का बैल से राजनीती में ध्वस्त करूं इनके विचारों के चित्र का अस्तित्व

राफेल की धार पहुंची सीमा पार ,
अब नहीं होने दूंगा देश का बंटाधार 
..Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.


Description
आओंपार्टी नहीं देश का पार्ट बने, “मैं देश के लिए बना हूँ””, देश की माटी बिकने नहीं दूंगा , “राष्ट्रवाद की खाद” से भारतमाता के वैभव सेहम देश को गौरव से भव्यशाली बनाएं

अतिथी देव भव: (डोनाल्ड ट्रम्प) के स्वागत दर्शन में.., अतिथी वोट भव: का आक्रमण से दुनिया को चेताने का खुला खेल.., रोक सको तो रोको.., ट्रम्प सरकार को इसकी एक झलक दिखाकर ,मोदी सरकार को खुली चुनौती अब देश के विरोधी पार्टियों के गठबंधन व विदेशी वोट बैंक का देश में भण्डारण अब एक नए रण से रोहिग्या बांगलादेशी व ISI का संगठन सक्रिय ढंग से देश में नए प्रयोग कर रहा है .




अतिथी देव भव: (डोनाल्ड ट्रम्प) के स्वागत दर्शन में..,   अतिथी वोट भव: का आक्रमण से दुनिया को चेताने का खुला खेल.., रोक सको तो रोको..,  ट्रम्प सरकार को इसकी एक झलक दिखाकर ,मोदी सरकार को खुली चुनौती अब देश के विरोधी पार्टियों के गठबंधन व विदेशी वोट बैंक का देश में  भण्डारण अब एक नए रण से रोहिग्या बांगलादेशी व ISI का संगठन सक्रिय ढंग से देश में नए प्रयोग कर रहा है . 


 शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती है  अब नरेन्द्र मोदी भी देश की ऊर्जा भरकर सुपर पावर ट्रम्प से दबंग बन गए हैं  उन्होंने बता दिया है कि देश के आत्मसम्मान से झुकना एक बेईमान राजनेता की तरह नहीं हैं 


 देश में सैकड़ों धमाकों व आतंकवाद से धमाकों का कोई धर्म नहीं होता है की गूँज से राजनेता जश्न मना रहे थे ...
बाटला आतंकवादी कांड में सोनिया गांधी आंसू छलका कर रात भर रोई. व ऑस्ट्रेलिया में एक मुस्लिम को आतंकवाद गतिविधि में गिरफ्तार होने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रात भर नहीं सोये.


जबकि हिन्दू, भगवा आतंकवादखतरनाक , और इसका राजनैतिकरण कर विश्व में प्रचार से देश को नीचा दिखाने के प्रयास में कांग्रेस सरकार अग्रणी थी. विकीलीक्स को भी इसका खुलासा करना पड़ा की एक अवार्ड वापसी गैंग की तरह राजनैतिक बुद्धीजीवियों की भारत तेरे टुकड़े होंगें की तरह की सुनियोजित प्रचार था.

इन राजनेताओं ने भगवा आतकवाद के प्रचार का जिम्मा ATS मुख्या हेमंत करकरे के कन्धों पर दे रखा था. वे भी मीडिया व अखबारों में अपनी PUBLICITY से गदगद होकर .., राजनेताओं से प्रेरित होकर एक कदम और बढ़कर,अपनी प

वीर सावरकर की उक्ती शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती है” , विश्व में दुर्बल बनकर देश का इतिहास नहीं संवारा जा सकता है .इसका उदहारण किम जोंग व ट्रम्प की तीसरी मुलाक़ात USA में नहीं उत्तरी कोरिया में हुई जो इतिहास बन गया कि कैसे USA समझौते के लिए मान  मनोव्वल के लिए उतावला है. 

 पकिस्तान दुनिया में अपना ईमान खो चुका है, अब इमरान खान, जो पकिस्तान, अमेरिका के ३३ बिलियन डॉलर डकार कर अपने देश के आतंकवादी संगठनों को मालामाल करने का खेल खेल रहा है पाकिस्तानी रुपया गर्त में चला गया है अमेरिकन डॉलर के मुकाबले अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है



जी हाँ .., वीर सावरकर की ४० से अधिक भविष्यवाणियां सार्थक हुई है ..,१९४७ में देश आजाद होने पर वीर सावरकर ने आवाहन किया की देश को सुपर पॉवर बनाने के लिए भारत को हाइड्रोजन बम के साथ ध्वनि बम भी बनाना चाहिए


१९४५ में विश्वपटल पर कोरिया को खंडित कर दक्षिण कोरिया पर अमेरिका व उत्तर कोरिया पर रूस का अधिकार हुआ, दोनों कोरिया अपने अपने शुभचिंतकों पर आश्रित व केवल शतरंजी मोहरे बनाकर आपस में लड़ाने का खेल खेल रहे थे .


दक्षिण कोरिया तो संपन्न था , उत्तर कोरिया की अर्थव्यस्था कमजोर होने के बावजूद उसने अपनी सीमा व देश की सुरक्षा व बदला लेने की भावनाओं से परमाणु तकनीकी चोरी छुपे खरीद कर किम जोंग के कार्यकाल में हाइड्रोजन बम का परिक्षण कर दुनिया को अचंभित कर सुपर पावर देशों में दहशत पैदा कर दी की कैसे एक छोटा देश दुनिया को बर्बाद कर सकता है..

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खासकर इसके निशाने पर अमेरिका है , इसे जानकार अमेरिका के होश फाक्ता / उड़ गए ..


और जानकार कि इसके परदे के पीछे चीन की महत्वपूर्ण भूमिका है.

दक्षिण कोरिया का हाथ थामने के लिए ट्रम्प ने सिंगापूर में एक निस्पक्ष्य जगह सिंगापूर में किम जोंग से मुलाक़ात की ताकि वह अपने परमाणु हथियार की बलि दे.. लेकिन किम जोंग ने अमेरिका को टरका दिया लेकिन कोई नए परमाणु हथियार का परिक्षण नहीं किया और अमेरिका सरकार को (अंध) विश्वास में लेकर गुमराह किया

अब अमेरिका सरकार को अपने तले जमीन सरकते देख , वियतनाम में ट्रम्प सरकार ने किम जोंग को उकसाया की यदि आप परमाणु हथियार को छोड़ दे तो आप को विश्व में एक नंबर की शक्ती बनाने का विश्वास अमेरिका देगा ..अब देखना है की अमेरीकी सरकार इस जाल में किम जोंग को फंसाकर अपना हित साधने में सफल होती है क्या !!!!!


इस लेख का निचोड़ यही है की दुनिया को झुकाने के लिए राष्ट्रवाद ही देश की आत्मा है जिसे गीता में कहा गया कि इसको दुनिया की कोई ताकद भेद नहीं सकती है.

साभार

About
Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.
Description
आओं, पार्टी नहीं देश का पार्ट बने, “मैं देश के लिए बना हूँ””, देश की माटी बिकने नहीं दूंगा , “राष्ट्रवाद की खादसे भारतमाता के वैभव से, हम देश को गौरव से भव्यशाली बनाएं

Friday, 14 February 2020

१४ फरवरी देश को भारतमाता के प्रेम वात्सल्य को बचाने का का बलिदान दिवस...., व पुलवामा के शहीदों का भारतमाता के रक्षा में अपना जीवन अर्पण करने वालों को समर्पित दिवस के रूप से देश में याद रख कर देश स्वाभिमान से ही गर्वित होगा भारत मां के लिए चाहत, देश के तीन बेटों की जिंदगी, की कुर्बानी का फरमान आज सुनाया गया, १९४७ के बाद ऐसे ही नाथूराम गोडसे व अन्य साथियों की तरह से इनके चहरे पर कोई शिकन नहीं थी



कृपया लंबा लेख लम्बी  सांस् लेकर जरूर पढ़े..

१४ फरवरी देश को भारतमाता के प्रेम वात्सल्य को बचाने का का बलिदान दिवस...., व पुलवामा के शहीदों का भारतमाता के रक्षा में अपना जीवन अर्पण करने वालों को समर्पित दिवस के रूप से देश में याद रख कर  देश स्वाभिमान से ही गर्वित होगा

 भारत मां के लिए चाहत, देश के तीन बेटों की जिंदगी, की कुर्बानी का फरमान आज सुनाया गया, १९४७ के बाद ऐसे ही नाथूराम गोडसे व अन्य साथियों की तरह से इनके चहरे पर कोई शिकन नहीं थी

देश पर अपनी जान न्यौछावर कर देने वाले शहीद-ए-आजम, भारतमाता के भगत (भगत सिंह), अंग्रेजों के राज के गुरू का गुमान तोड़ने वाले (राज गुरू) व भारतमाता को गुलामी की बेड़ी से मुक्त कराने में अपना सुख त्यागने वाले (सुखदेव) ने अपनी जान से ज्यादा तवज्जो भारत मां के प्रति अपने प्रेम को दी थी।

वहीं अंगेजों के सेफ्टी वाल बने कांग्रेसीयों का दल अय्याशी व ब्रह्मचर्य के प्रयोग से देशवासियों को गुमराह कर रहा था...,



VALENTINE DAY बनाम WELL-IN-TIME , आज देश, पाश्चात्य संस्कृति के कुआँ में गिरने / गिराने व आज का युवा वर्ग तो प्रभात के ब्रम्ह मुहर्त में उठकर, फेसबुक, ध्वनी यन्त्र में प्रेम मंत्र से अपना व सह्पाठीनीयों के साथ पाठन करता है...

१५ अगस्त के प्रभात फेरिया का, इन प्रेमी फोबियाओं की वजह से आज, आलस दिवस के साथ विश्राम दिवस से देश के विश्वास का श्वास खोता जा रहा है....
१९६२ में भारतमाता के टुकडे करने वाले जवाहर लाल नेहरू ने तो लता मंगेशकर से ऐ मेरे वतन के लोंगों , ज़रा आँख में भर लो पानी के गीत से अपनी कमजोरी छुपा ली थी ...

आज इन तीन शहीदों के फांसी के फरमान के बावजूद , आँखों से पानी नहीं निकले थे..., उनहोंने तो भारतमाता की गोद में सोने में अपना सौभाग्य समझा......

आज का युवा वर्ग पाश्चात्य संस्कृति में मदहोश होकर, मानवाधिकार संगठन भी ढाल बनकर, इनकी हिमायत कर देश को गर्त में डाल रहा है...,
यह मोतीलाल नेहरू का योग या संयोग, कहा जाए, जो १४ फरवरी के ठीक ९ महीने बाद, १४ नवम्बर को जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...!!!!,

याद रहे..., मोतीलाल नेहरू राजा-महाराजाओं के विवादों के वकालत से अपने बेशुमार आय से, अधिक व्यय-भिचार से हिंदु संस्कृति को भ्रष्ट करने की वजह से काश्मीरी हिन्दुओं ने उन्हें अपने समाज से निकाल फेंका था...
और इसी क्रिया को उनके पुत्र जवाहरलाल नेहरू ने बरकरार रखते हुए..,सत्तालोलुप बनकर, सत्ता परिवर्तन (१९४७) के बाद कहा था


नेहरु का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य था... जवाहर लाल नेहरु, बहुत बार कहा करते थे कि ..., “मैं जन्म के संयोग से हिन्दू हूँ, संस्कृति से मुसलमान और शिक्षा से अंग्रेज हूँ.उन्हें हिन्दुओ की भावना की रत्ती भर भी परवाह नहीं होती थी,जिनके वोटो के बल पर उन्होंने सत्ता प्राप्त की थी.

वही हाल, एक तरफ तो पंडित नेहरु के नाती, राजीव गाँधी का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य दिया.., राजीव गांधी ने हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री होते हुए भी सन्डे टाइम लन्दन को एक साक्षात्कार में नि:संकोच कहा की मेरे नाना जवाहरलाल नेहरु एक नास्तिक (एग्नास्टिक) थे. मेरे पिता पारसी (गैर हिंदू) थे, मेरी पत्नी इसाई है, और मैं किसी धर्म में विश्वास नहीं करता.


क्या..??, एक अय्याश व्यक्ती के नाम बाल-दिवसमनाना उचित है..,
देश का बाल दिवस तो हिन्दू संस्कृति के अनुसार गुड़ी पाडवाके दिन , नूतन दिवस में, नई किरणों से बाल निर्माणके साथ राष्ट्र निर्माणकी अलख से, हो, तो..., देश एक नए उजाले की ओर अग्रसर होगा.., और देश के २०० सालों की गुलामी से उपजी.., ७३सालों की अंग्रेजीयत की बीमारी दूर होगी...


देश के धनाड्य वर्गों के, अंग्रेजी संस्कृति का बखान करने वालों को, यह देश का १२५ वां WELL-IN-TIME और CHILDREN DAY- CHILD-MOTHER, RUN DAY के अनुयायिओं को समर्पित...




बाल दिवस या भूखमरी से बालकों का, बलि दिवस... देश में सालाना ३ करोड़ बालकों की.., कुपोषण ईलाज के अभाव से सरकारी योजनाओं को भोजनायें बनाकर, मृत्यु ...


यूरोपीय देशों में अवैध रूप से रोपे गए बच्चे.., उनकी सरकार गोद ले लेती हैं..., व उनके लालन-पानन की व्यवस्था की जिम्मेदारी सुचारू रूप से चलाती है...
लेकिन मेरे देश में गरीबी रेखा व उसके नीचे वैध बच्चे,जो बुढ़ापे में सहारा होते हैं.. , माफियाओं द्वारा चुराकर, भीख मांगने व वेश्या वृति व्यवसाय में धकेल दिए जातें हैं...,

देश में पुलिस के नाक के तले , निठारी काण्ड से बच्चे, , मानव भक्षियों के शिकार होकर, पुलीस थाने के सामने नालों में फेंक दियें जाते है...


सत्ताखोर व पुलिस भी इसे माफियाओं का आम खेल मानकर.., रिश्वत की रूई से अपने, आँख- कान बंद कर लेते है..., गरीबी लोग रोते बिलखते इन अपने मासूम बच्चों की तड़फ से अपनी नारकीय जिन्दगी गुजार देतें है...,


सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लताड़ लगाते हुए, पूछा..., देश के करोड़ों.., लापता मासूम बच्चों के बारे में क्या कारवाई की है...


याद रहे.., अन्ना आन्दोलन के चरम सीमा में पहुँचने के पहिले, जब उन्होंने रामलीला मैदान में रैली के लिए अनुमति मानी, तो मनमोहन सरकार ने उन्हें इस रैली की जगह, जयप्रकाश नारायण पार्क में रैली की अनुमती दी.., वह भी शर्तों से.. कि रैली में ५००० से ज्यादा की भीड़ नहीं होगी, व ५० से ज्यादा कारों व स्कूटर की पार्किंग नहीं दी जायेगी.., जैसे यह अन्ना का शादी समारोह हो..


उसी समय यूरोपीय देशों में नारी का पुरूषों से, समाधिकार की आवाज में , महिलाओं ने तर्क के साथ कहा कि यदि पुरूष बिना ऊपरी वस्त्र के सडकों पर चल सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं ...,


इसी विरोध में, उन्होंने ऊपरी वस्त्र खोलकर सडकों में SLEDGE –SHOW का प्रदशन प्रदर्शन किया ..., तब हमारे देश की INDIAN व अंग्रेजी से पेट भरने वाली धनाढ्य महिलाओं ने इस आन्दोलन के समर्थन में गुहार लगाई तो, देश का महिला अधिकार आयोग भी इस की मुखालत करते आगे आया तो.., उनके मनानुसार उन्हें , जंतर मंतर से संसद भवन तक SLEDGE –SHOW की अनुमती मिली ...,


अभी तो, खुले रास्ते में चुम्बन दिनमना कर इंडियन वर्ग अपने को अभिमानीत कह, गर्व मना रहा है...,


विदेशी धन , विदेशी संस्कृति के निवाले..., को देश की जनता पर थोपने का अधिकार...


क्या यह अंग्रेजी आवरण के छुपे खेल में भारतीय संस्कृति पर पर प्रहार नहीं है...!!!!

यह मोतीलाल नेहरू का योग या संयोग, कहा जाए, जो १४ फरवरी के ठीक ९ महीने बाद, १४ नवम्बर को जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...!!!!,

याद रहे..., मोतीलाल नेहरू राजा-महाराजाओं के विवादों के वकालत से अपने बेशुमार आय से, अधिक व्यय-भिचार से हिंदु संस्कृति को भ्रष्ट करने की वजह से काश्मीरी हिन्दुओं ने उन्हें अपने समाज से निकाल फेंका था...

और इसी क्रिया को उनके पुत्र जवाहरलाल नेहरू ने बरकरार रखते हुए..,सत्तालोलुप बनकर, सत्ता परिवर्तन (१९४७) के बाद कहा था

नेहरु का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य था... जवाहर लाल नेहरु, बहुत बार कहा करते थे कि ..., “मैं जन्म के संयोग से हिन्दू हूँ, संस्कृति से मुसलमान और शिक्षा से अंग्रेज हूँ.उन्हें हिन्दुओ की भावना की रत्ती भर भी परवाह नहीं होती थी,जिनके वोटो के बल पर उन्होंने सत्ता प्राप्त की थी.

वही हाल, एक तरफ तो पंडित नेहरु के नाती, राजीव गाँधी का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य दिया.., राजीव गांधी ने हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री होते हुए भी सन्डे टाइम लन्दन को एक साक्षात्कार में नि:संकोच कहा की मेरे नाना जवाहरलाल नेहरु एक नास्तिक (एग्नास्टिक) थे. मेरे पिता पारसी (गैर हिंदू) थे, मेरी पत्नी इसाई है, और मैं किसी धर्म में विश्वास नहीं करता.

क्या..??, एक अय्याश व्यक्ती के नाम बाल-दिवसमनाना उचित है..,

देश का बाल दिवस तो हिन्दू संस्कृति के अनुसार गुड़ी पाडवाके दिन , नूतन दिवस में, नई किरणों से बाल निर्माणके साथ राष्ट्र निर्माणकी अलख से, हो, तो..., देश एक नए उजाले की ओर अग्रसर होगा.., और देश के २०० सालों की गुलामी से उपजी.., ७३ सालों की अंग्रेजीयत की बीमारी दूर होगी...

देश के धनाड्य वर्गों के, अंग्रेजी संस्कृति का बखान करने वालों को, यह देश का १३०वां WELL-IN-TIME और CHILDREN DAY- CHILD-MOTHER, RUN DAY के अनुयायिओं को समर्पित...

बाल दिवस या भूखमरी से बालकों का, बलि दिवस... देश में सालाना ३ करोड़ बालकों की.., कुपोषण ईलाज के अभाव से सरकारी योजनाओं को भोजनायें बनाकर, मृत्यु ...

यूरोपीय देशों में अवैध रूप से रोपे गए बच्चे.., उनकी सरकार गोद ले लेती हैं..., व उनके लालन-पानन की व्यवस्था की जिम्मेदारी सुचारू रूप से चलाती है...

लेकिन मेरे देश में गरीबी रेखा व उसके नीचे वैध बच्चे,जो बुढ़ापे में सहारा होते हैं.. , माफियाओं द्वारा चुराकर, भीख मांगने व वेश्या वृति व्यवसाय में धकेल दिए जातें हैं...,

देश में पुलिस के नाक के तले , निठारी काण्ड से बच्चे, , मानव भक्षियों के शिकार होकर, पुलीस थाने के सामने नालों में फेंक दियें जाते है...

सत्ताखोर व पुलिस भी इसे माफियाओं का आम खेल मानकर.., रिश्वत की रूई से अपने, आँख- कान बंद कर लेते है..., गरीबी लोग रोते बिलखते इन अपने मासूम बच्चों की तड़फ से अपनी नारकीय जिन्दगी गुजार देतें है...,

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लताड़ लगाते हुए, पूछा..., देश के करोड़ों.., लापता मासूम बच्चों के बारे में क्या कारवाई की है..
.

याद रहे.., अन्ना आन्दोलन के चरम सीमा में पहुँचने के पहिले, जब उन्होंने रामलीला मैदान में रैली के लिए अनुमति मानी, तो मनमोहन सरकार ने उन्हें इस रैली की जगह, जयप्रकाश नारायण पार्क में रैली की अनुमती दी.., वह भी शर्तों से.. कि रैली में ५००० से ज्यादा की भीड़ नहीं होगी, व ५० से ज्यादा कारों व स्कूटर की पार्किंग नहीं दी जायेगी.., जैसे यह अन्ना का यह शादी समारोह हो..

उसी समय यूरोपीय देशों में नारी का पुरूषों से, समाधिकार की आवाज में , महिलाओं ने तर्क के साथ कहा कि यदि पुरूष बिना ऊपरी वस्त्र के सडकों पर चल सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं ...,

इसी विरोध में, उन्होंने ऊपरी वस्त्र खोलकर सडकों में SLEDGE –SHOW का प्रदशन प्रदर्शन किया ..., तब हमारे देश की INDIAN व अंग्रेजी से पेट भरने वाली धनाढ्य महिलाओं ने इस आन्दोलन के समर्थन में गुहार लगाई तो, देश का महिला अधिकार आयोग भी इस की मुखालत करते आगे आया तो.., उनके मनानुसार उन्हें , जंतर मंतर से संसद भवन तक SLEDGE –SHOW की अनुमती मिली ...,

अभी तो, खुले रास्ते में चुम्बन दिनमना कर इंडियन वर्ग अपने को अभिमानीत कह, गर्व मना रहा है...,

विदेशी धन , विदेशी संस्कृति के निवाले..., को देश की जनता पर थोपने का अधिकार...

क्या यह अंग्रेजी आवरण के छुपे खेल में भारतीय संस्कृति पर पर प्रहार नहीं है...!!!!


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Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.

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आओं, पार्टी नहीं देश का पार्ट बने, “मैं देश के लिए बना हूँ””, देश की माटी बिकने नहीं दूंगा , “राष्ट्रवाद की खादसे भारतमाता के वैभव से, हम देश को गौरव से भव्यशाली बनाएं#