Friday, 15 November 2019

मोदीजी तुस्सी ग्रेट हो.., पकिस्तान के पुलवामा हमले के बाद प्रतिशोध कैसे लिया जाता है यह बालाकोट में सर्जिकल हमला कर आतंकी कैम्पों को धराशाही कर, दुश्मन ने इस हमले को विश्व मंच में  शिकायत करना खुद को शर्मिन्दा समझकर चुपचाप रहना ही बेहतर समझना पड़ा ..







ब्रिकस 
२०१९ से G20 देशों से विश्व के विभिन्न मंचों से मोदीजी  आपकी आतंकियों के प्रति हुंकार से अमेरिका ने भी बगदादी को मारने का बीड़ा उठाकर एक सफल अभियान किया · 

मोदीजी तुस्सी ग्रेट हो.., BRICS नही विश्व के आतकवादियों की BRICKS को तोड़ना जरूरी है.., २०१४ से आपकी नीती काम आई, समय के साथ राजनीती से कूटनीती से विश्व को कैसे पांवों तले रौदा जा सकता है .., सुपरपावर को समय से पावर से पावडर बनाकर.., उन्हें ही उनके पावडर लगाकर एक कृत्रिम चहरे को चमकार , उनके सत्कार से देश की रक्षा का चमत्कार हो सकता है .., भले भी चीन आज आपकी आतंकवाद विरोधी नीती से गर्दन झुकाकर सहमती न देकर अपना दाँव खेल रहा है.., लेकिन इस  दिन के अब दूरी ख़त्म होकर...,  आपके ५ साल के शासनकाल के बाद भी दुश्मन  घुटने टेकते हुए मिला ...



July 19, 2014 की पुरानी सार्थक पोस्ट


जरूर पढ़े..,मोदीजी तुस्सी ग्रेट हो.., भले ही फ़ुटबाल में हमारा नम्बर १५० देशों के बाद है.., पिछले १० सालों में हम आतंकवाद को रोकने में फिसड्डी देशों में शामिल हों.., आतंकवादी हमारे यहाँ कबड्डी के कबाड़े का खेल खेलकर, वापस चलें जाते है..


लेकिन नयें नवेले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ब्राजील के ब्रिक देशों के समूह में गोल मारकर, अपने स्वाभिमानी गर्जना से सात समुंदरी देशों के सुप्रीमों से विश्व के देशों में हमारी ताकत की झलक दिखा कर, दुनिया में हलचल मचाकर, महाबली देशों के, लूट के खेल बंद होने की आहट से आहत होने से खलबली मची है...

भले ही मानसूनी बादलों की देश भर में गर्जना नहीं हुई है...,लेकिन मोदीजी की गर्जना से विदेशी ताकतों की पेंट पैंट गीली हो गयी है..,अभी दो दिन पहले लद्दाख में हमने चीनी सेना की घुसपैठ को नाकाम कर दिया है...

पिछले १० सालों में हमारे प्रधानमंत्री से राजनयिकों ने, जो वार्ता के बहाने पिकनिक- पर्यटन (PICNIC) मनाने गए थे..., और देशवासियों में (PANIC) दहशत से आतंकवादियों को सत्कार से चिकन बिरयानी खिलाकर मीडिया व विदेशी ताकतों से वाहवाही पाते रहे...


देशवासियों के अच्छे दिन तो आने वाले हैं लेकिन विदेशी ताकतों के बुरे दिन आ गए हैं...




Deshdoooba Community
21 March 2014 की पोस्ट के अंश यह है कांग्रेस के घोटाले का महापुरूष , चाटुकार, सोनिया गांधी को भारतमाता कहने वाले खुर्शीद सलमान के कांग्रेस के मीठे प्रवचन ... जो सोनिया को भ्रष्टाचार से अपनी सता को सलामत मान (सलमान) कर खुशी की ईद (खुर्शीद) मना रहा है... अभी मनाओं जश्न... ६० दिन से भी कम का समय है.... कौन भ्रष्टाचार से नपुंसक बनता है ... जनता अपनी वोट की जादुई छड़ी से जबाब देगी , जो तुम बार बार कह कर ..कहे..कहे.. लगाकर जनता का उपहास करते थे ... तुम्हारे पुतले प्रधानमंत्री ने तो १५ अगस्त को लाल किले से जनता का उपहास उड़ाते हुए , कहा था हमारे पास जादुई छडी नहीं है .. कि महंगाई दूर हो जायेगी , असल में आपने यह जादुई छड़ी देश व विदेश के माफियाओं कों .., जनता को मारने के लिए दे दी है... अब जनता इसका हिसाब मांगेगी

वाह रे विकलांग , मना खुशी का आलम ,
क्या अब चीन जाकर क्या देश को और भी विकलांग बनायेगा..??? देश के विकलांगो की लूट मे छूट की वीरता से धन कमाकर ... तू विदेश मंत्री बना... अब चीनी दुश्मनों को...???, अब तो लूट मे छूट की वार्ता मे चीन जा रहा है...??? यह पब्लिक है सब जानती है, अंदर कितना खाया है..?? बाहर कितना विकास का दिखावा है... और देश का कितना भट्टा बिठाया है... दोस्तों क्या ये भ्रष्टाचार के विकास के नाम पर आम आदमी का नाश...??? या मेरा देश डूबा..???

Deshdoooba Community
February 5, 2014 की पोस्ट के अंश
देश के, चीन से हाल ही के गुप्त समझौते से...????, चीन से लौटे विदेश मंत्री विकलांग खुर्शीद सलमानजो देश के विकलांगो की लूट मे छूट की वीरता से विदेश मंत्री बनाने देश की अस्मिता को ताक में रखकर चीन की भव्यता को देखकर , चीनी सरकार को अपना बाप मानकर बयान दिया …., “...यदि मुझे चीन की नागरिकता मिले तो, मैं चीन में ही रहना पसंद करूंगा मैं चीन के विकास से बहुत ही प्रभावित हुआ हूँ ....

अब सोनिया गांधी को भारतमाता कहकर …, अब , “खुशी का आलमबनकर, जवानों को घटिया खाने के घोटाले बनें..., भ्रष्टाचारियों के मयखाने से...., विदेशीयों के लिए तोहफे खानों का उपहार से अब, ये कर रहा है दुश्मनों का उपकार ..!!!

जागो देशवासियों , डूबते देश को बचाओ... वह दिन दूर नहीं... कहीं हम दूसरी बेड़ी में न जकड़ जाएँ....?????, दोस्तों क्या ये भ्रष्टाचार के विकास के नाम पर भारत निर्माणके नारे से आम आदमी का विनाश…??? यामेरा देश डूबा..???


Thursday, 14 November 2019

सुप्रीम कोर्ट की अब पक्की मुहर , रफाल पर अब कोई नहीं बबाल, विपक्षी पार्टियों के अब पंख क़तर गए हैं ..., अब हुई वीर परमवीर सावरकर की उक्ती साकार “शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती है” , विश्व में दुर्बल बनकर देश का इतिहास नहीं संवारा जा सकता है..




सुप्रीम कोर्ट की अब पक्की मुहर , रफाल पर अब कोई नहीं बबाल, विपक्षी पार्टियों के अब पंख क़तर गए हैं ..., अब हुई वीर परमवीर सावरकर की उक्ती साकार शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती है” , विश्व में दुर्बल बनकर देश का इतिहास नहीं संवारा जा सकता है..



अब पकिस्तान पर  प्रहार पर प्रहार..,बनी मोदी की दुधारी तलवार
देश में विरोधियों का चीत्कार, कोलाहल.., कहें मोदी नहीं हैं  देश के चित्रकार ..,

अब मोदी कहें.., इस कोलाहल से बनाऊँ इन्हें कोल्हू का बैल से राजनीती में ध्वस्त करूं इनके विचारों के चित्र का अस्तित्व
राफेल / मिराज २००० की धार पहुंची सीमा पार ,
अब नहीं होने दूंगा देश का बंटाधार




यह मोतीलाल नेहरू का योग या संयोग, कहा जाए, जो १४ फरवरी VALENTINE DAY के ठीक ९ महीने बाद, १४ नवम्बर को जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...!!!!, देश की अय्याशी को बाल दिवस से संजोया गया




यह मोतीलाल नेहरू का योग या संयोग, कहा जाए, जो १४ फरवरी VALENTINE DAY के ठीक ९ महीने बाद, १४ नवम्बर को जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...!!!!,  देश की अय्याशी को बाल दिवस से संजोया गया 

याद रहे..., मोतीलाल नेहरू राजा-महाराजाओं के विवादों के वकालत से अपने बेशुमार आय से, अधिक व्यय-भिचार से हिंदु संस्कृति को भ्रष्ट करने की वजह से काश्मीरी हिन्दुओं ने उन्हें अपने समाज से निकाल फेंका था...

और इसी क्रिया को उनके पुत्र जवाहरलाल नेहरू ने बरकरार रखते हुए..,सत्तालोलुप बनकर, सत्ता परिवर्तन (१९४७) के बाद कहा था

नेहरु का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य था... जवाहर लाल नेहरु, बहुत बार कहा करते थे कि ..., “मैं जन्म के संयोग से हिन्दू हूँ, संस्कृति से मुसलमान और शिक्षा से अंग्रेज हूँ.उन्हें हिन्दुओ की भावना की रत्ती भर भी परवाह नहीं होती थी,जिनके वोटो के बल पर उन्होंने सत्ता प्राप्त की थी.

वही हाल, एक तरफ तो पंडित नेहरु के नाती, राजीव गाँधी का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य दिया.., राजीव गांधी ने हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री होते हुए भी सन्डे टाइम लन्दन को एक साक्षात्कार में नि:संकोच कहा की मेरे नाना जवाहरलाल नेहरु एक नास्तिक (एग्नास्टिक) थे. मेरे पिता पारसी (गैर हिंदू) थे, मेरी पत्नी इसाई है, और मैं किसी धर्म में विश्वास नहीं करता.

क्या..??, एक अय्याश व्यक्ती के नाम बाल-दिवसमनाना उचित है..,

देश का बाल दिवस तो हिन्दू संस्कृति के अनुसार गुड़ी पाडवाके दिन , नूतन दिवस में, नई किरणों से बाल निर्माणके साथ राष्ट्र निर्माणकी अलख से, हो, तो..., देश एक नए उजाले की ओर अग्रसर होगा.., और देश के २०० सालों की गुलामी से उपजी.., ६८ सालों की अंग्रेजीयत की बीमारी दूर होगी...

देश के धनाड्य वर्गों के, अंग्रेजी संस्कृति का बखान करने वालों को, यह देश का १३०वां WELL-IN-TIME और CHILDREN DAY- CHILD-MOTHER, RUN DAY के अनुयायिओं को समर्पित...

बाल दिवस या भूखमरी से बालकों का, बलि दिवस... देश में सालाना ३ करोड़ बालकों की.., कुपोषण ईलाज के अभाव से सरकारी योजनाओं को भोजनायें बनाकर, मृत्यु ...

यूरोपीय देशों में अवैध रूप से रोपे गए बच्चे.., उनकी सरकार गोद ले लेती हैं..., व उनके लालन-पानन की व्यवस्था की जिम्मेदारी सुचारू रूप से चलाती है...
लेकिन मेरे देश में गरीबी रेखा व उसके नीचे वैध बच्चे,जो बुढ़ापे में सहारा होते हैं.. , माफियाओं द्वारा चुराकर, भीख मांगने व वेश्या वृति व्यवसाय में धकेल दिए जातें हैं...,
देश में पुलिस के नाक के तले , निठारी काण्ड से बच्चे, , मानव भक्षियों के शिकार होकर, पुलीस थाने के सामने नालों में फेंक दियें जाते है...

सत्ताखोर व पुलिस भी इसे माफियाओं का आम खेल मानकर.., रिश्वत की रूई से अपने, आँख- कान बंद कर लेते है..., गरीबी लोग रोते बिलखते इन अपने मासूम बच्चों की तड़फ से अपनी नारकीय जिन्दगी गुजार देतें है...,

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लताड़ लगाते हुए, पूछा..., देश के करोड़ों.., लापता मासूम बच्चों के बारे में क्या कारवाई की है...

याद रहे.., अन्ना आन्दोलन के चरम सीमा में पहुँचने के पहिले, जब उन्होंने रामलीला मैदान में रैली के लिए अनुमति मानी, तो मनमोहन सरकार ने उन्हें इस रैली की जगह, जयप्रकाश नारायण पार्क में रैली की अनुमती दी.., वह भी शर्तों से.. कि रैली में ५००० से ज्यादा की भीड़ नहीं होगी, व ५० से ज्यादा कारों व स्कूटर की पार्किंग नहीं दी जायेगी.., जैसे यह अन्ना का यह शादी समारोह हो..

उसी समय यूरोपीय देशों में नारी का पुरूषों से, समाधिकार की आवाज में , महिलाओं ने तर्क के साथ कहा कि यदि पुरूष बिना ऊपरी वस्त्र के सडकों पर चल सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं ...,

इसी विरोध में, उन्होंने ऊपरी वस्त्र खोलकर सडकों में SLEDGE –SHOW का प्रदशन प्रदर्शन किया ..., तब हमारे देश की INDIAN व अंग्रेजी से पेट भरने वाली धनाढ्य महिलाओं ने इस आन्दोलन के समर्थन में गुहार लगाई तो, देश का महिला अधिकार आयोग भी इस की मुखालत करते आगे आया तो.., उनके मनानुसार उन्हें , जंतर मंतर से संसद भवन तक SLEDGE –SHOW की अनुमती मिली ...,

अभी तो, खुले रास्ते में चुम्बन दिनमना कर इंडियन वर्ग अपने को अभिमानीत कह, गर्व मना रहा है...,

विदेशी धन , विदेशी संस्कृति के निवाले..., को देश की जनता पर थोपने का अधिकार...

क्या यह अंग्रेजी आवरण के छुपे खेल में भारतीय संस्कृति पर पर प्रहार नहीं है...!!!!

Sunday, 1 September 2019



अतिथी वोट भव..
दुश्मनों को अपने ही घर में बुलानेवाले
अपने शहीदों को हम हैं भूलानेवाले
भाई से भाई को लड़ाने वाले
हम हैं बरबादियों का जश्न मनाने वाले

G.D.P. = घुसपैठिया डेवलपमेंट प्रोग्राम जो १००% से ज्यादा है
(घुसपैठिया विकास योजना)
देश की जीडीपी (GDP) जो ५% से कम है.

छःलाख से ज्यादा कश्मीरी पंडित घाटी से बाहर कर ३० सालों के बाद उनकी नई पीढी अपने बाप दादाओं की संस्कृति व जगहों से वंचित हो कर मूल स्थान को लगभग भूलते जा रही है
जबकि बर्मा के एक लाख से ज्यादा रोहिग्या मुसल्बान हजारों किलोमीटर दूर से कश्मीर में धारा ३७० व ३५ (A) होने के बावजूद उन्हें स्थान देकर विस्थापित हो गए है सभी सरकारों को संज्ञान होने के बावजूद आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है

EditTag ५ साल पुरानी सार्थक पोस्ट – Repost
1 photos • Updated 5 years ago

अतिथी वोट भव.., आज भी देश के सत्ताधारी घुसपैठीयों को हमारे देश मे, 600 रूपये मे घुसाकर...? देश में आज दस करोड़ से ज्यादा घुसपैठीयें हैं.. जो १००% मतदान कर अपनी पहचान को भारत की नागरिकता से पुख्ता करते हैं, घुसपैठीयों को वोट बैंक का सम्मान देकर ,विशेष सुविधा से लैस कर रहें है ..दुनिया में सिर्फ भारत ही एक एकलौता देश है...जो उनके लिए आधार कार्डे से सत्ता में भागीदारी देकर देश की संस्कृति व अखंडता से खिलवाड़ हो रहा है.

आज ये घुसपैठीये देश की धारा बिगाड़ने की सामर्थ्य रखते है ... इस वेबसाईट की यह, ३ नवम्बर २०१३ की पोस्ट है ... हमारे देश मे तीन प्रकार की घुसपैठ है

1. सीमा पार से घुसपैठ – 10 करोड से ज्यादा देश मे 30% से ज्यादा की विकास दर है (G.D.P.-घुसपैठीया डेवलपमेट प्रोग्राम – 30% से ज्यादा)

2.देश मे घूस पैठ रिश्वत की पैठ देश मे 300% से ज्यादा की विकास दर है और सरकार, घरेलू विकास दर 5% भी नही पहुँचने पर चितित है.

3. इस घरेलू विकास दर को बढाने के लिये सरकार विदेशी धन माफियाओ की घुसपैठ करा रही है , वे सरकार के मिलीभगत से, झूठा विकास दिखाकर, जनता को भरमाकर, लूटेरो के साथ अपनी भगीदारी कर, सत्ता धारी अपने खजाने भर रहे है. इनकी पूजी 300-3000 गुना से ज्यादा बढ रही है और जनता अपने आपको लूटते हुए देख रही है.

क्या आप कल्पना कर सकते है ?, कि चीन कोइ घुसपैठ सहन कर सकता है., वहां तो सीमा पर अनजान व्यक्ति को देखते ही गोलियों से भून दिया जाता है.. इसका उदाहरण चीन है, जहाँ एक दम्पति सिर्फ एक संतान पैदा कर सकता है, 6-7 महिने पहले मैने एक खबर पढी थी , सुदूर गाव मे एक महिला को 8 महिने का दूसरा गर्भ था, जब सरकार को पता चला तो उसने, उसका पेट फाड कर संतान को मार डाला और महिला को जेल मे डाल दिया.

हमारे देश का सच: I.S.I. और आतंकवादियों की फसल हमारी सरकारों द्वारा ही लहलहारी है बिहार, बंगाल, असम और झारखण्ड के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक ग्रेटर बंगलादेश बनाने की साजिस रची जा रही है सीमा के बिभिन्न रास्तो से घुसपैठ बेधडक जारी है कोई पूछने वाला नहीं, दूसरी तरफ बिहार सरकार जिस अलीगढ मु.वि.बि. ने देश बिभाजन की नीव रखी थी, उसकी ब्रांच मुस्लिम बहुल जहां घुसपैठियों का बोल-बाला है वही पर जमीन का एलाटमेंट किया गया है.

पूर्व में राष्ट्रवादियो ने इसके विरोध में जब आन्दोलन चलाया तो उन्हें सांप्रदायिक करार दे दिया गया,—– झारखण्ड के पाकुड़ जिले के छः (छह) रास्ते से बंगलादेशी मुस्लिमो का घुसपैठ बदस्तूर जारी है, साहिबगंज और गोड्डा के भी कुछ हिस्से इनके प्रभाव में है, इस रास्ते पशु, कोयला, पत्थर, मादक पदार्थ लकड़ी, हथियार इत्यादि की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है, देह ब्यापार भी इसका एक हिस्सा है .

घुसपैठ की वजह से सीमावर्ती क्षेत्रो में जनसँख्या असंतुलन की स्थित उत्पन्न हो गयी है, घुसपैठिये राज्य की अर्थ ब्यवस्था भी प्रभावित कर रहे है, भारत के दम पर जिस बंगलादेश का निर्माण हुआ दुर्भाग्य से वही हमारे देश की आन्तरिक सुरक्षा में सेध लगा रहा है, सीमावर्ती क्षेत्रो के जरिये लाखो की संख्या में घुसपैठ जारी है सूत्रों के अनुसार बिहार, बंगाल, असम और झारखण्ड के कुछ क्षेत्रो को मिलाकर ग्रेटर बंगलादेश बनाने की नियत से इन घुस- पैठियों ने रिक्सा ठेला, मजदूरी के विविध क्षेत्रो, कृषि, गृह निर्माण, ईट भट्ठा, लघु- उद्द्योग, पर बहुत हद तक कब्ज़ा जमा लिया है.

चोरी, अपहरण, महिलाओ पर अत्याचार, लव जेहाद तस्करी व अन्य घटनाओ के साथ-साथ आतंकी संगठनों को हथियार की आपूर्ति के अलावा भारतीय अर्थ ब्यवस्था को कमजोर करने के लिए जाली नोटों के कारोबार तक में इनकी संलग्नता उजागर हो रही है.

एक आकलन के मुताबिक सीमावर्ती क्षेत्रो झारखण्ड, बिहार, बंगाल मिलाकर प्रति वर्ष लगभग ६-७ लाख घुसपैठिये देश की सीमा में प्रवेश कर रहे है, भाषाई समानता के कारण ये आसानी से अपने ठिकाने बनाने में सफल हो जाते है. चुनाव तक को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाले इन घुसपैठियों को परोक्ष रूप से राजनैतिक दलों का समर्थन हासिल हो जाता है,

मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड और अब यूआईडी कार्ड से लैस ये घुसपैठिये राज्य के कई हिस्सों में अब बहुसंख्यक हो चुके है, झारखण्ड के पकुदिया, महेशपुर, और सीमावर्ती इलाको में साहबगंज, राजमहल, बारहख , कोडाल पोखर, लाल्बथानी, गुमानी नदी उस पर कई गाव और निकटवर्ती इलाके गाव के दियारा क्षेत्रो में घुसपैठियो की मौजूदगी हो चुकी है. साहिबगंज के तत्कालीन उपायुक्त सुभाष शर्मा ने २००५-०६ में १२ से १४ हज़ार लोगो को चिन्हित किया था कई अधिकारी इस जुल्म में जेल की हवा भी खा चुके है. भारत सरकार भी कुछ इसी दिशा में बढ़ रही है अभी-अभी सितम्बर २०११ में एक समझौते के तहत बिना किसी संसद के निर्णय के ही हजारो एकड़ जमीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बंगलादेश को दे दिया, समझ में नहीं आता की पुरे देश में सन्नाटा क्यों छाया हुआ है जैसे कुछ हुआ ही नहीं, तथा कथित अपने को राष्ट्रबादी दल कहने वाली बीजेपी भी चुप है.

अभी तक किसी भी बड़े नेता या आडवानी की रथयात्रा में भी इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हो रही, क्या हम सोनिया (सरकार) व विपक्ष के चंगुल में बिलकुल फंस चुके है ? कि हमारे ही ब्यक्ति को कुर्सी पर बैठा कर हमारे देश को नष्ट करने का प्रयत्न किया जा रह है.

भारत में नया बांग्ला देश गढ़ रहे हैं घुसपैठिए बंगाल में एक फीलगुड कहावत है, ए पार बांग्ला, ओ पार बांग्ला. आम जनता की बात छोड़िए, मुख्यमंत्री एवं राज्य के दूसरे बड़े नेताओं को यह कहावत उचरते सुना जाता रहा है. संकेत सा़फ है, ओ पार बांग्ला के निवासी भी अपने बंधु हैं. भाषा एक है, संस्कृति एक है, फिर घुसपैठ को लेकर चिल्ल-पों काहे की. राज्य में भाजपा के अलावा कोई भी दूसरी पार्टी इस मुद्दे को नहीं उठाती.
असम में असम गण परिषद जो आरोप कांग्रेस की सरकार पर लगाती है, वही आरोप बंगाल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी पर लगता रहा है कि वोट बैंक मज़बूत करने के लिए इन्हें बड़े पैमाने पर बसाया गया है. आंकड़े सा़फ-सा़फ सच बयां करते हैं. राज्य के सीमावर्ती ज़िलों में तो बांग्लादेशियों का बहुमत है और भारतीय नागरिक अल्पमत में आ गए हैं.
राज्य में सांस्कृतिक एकता सिर चढ़कर बोलती है अभी हाल मे 2012 के विधानसभा चुनाव मे जीत के बाद, ममता बनर्जी ने बंगला देशी मूल के मुस्लिमो को मंत्री बनाते हुए कहा , क्या हुआ ? उंनकी हमारी भाषा एक है, इस वोट बैक के व सत्ता के चक्कर मे, अब राष्ट्रवाद द्सरी ओर पीछे छूट जाता है. और ममता बनर्जी ने यहा तक कह दिया के पशिचम बंगाल का नाम बंग प्रदेश रखा जाये,

याद रहे शेख मुजीबर रहमान को बंग बन्धु के नाम से उपाधित किया गया था, युपीए -2 के चुनाव प्रचार के समय पी चिदंबरम ने खुले आम कह् दिया था, अब मै समझता हू, कि देश मे रह रहे , बंगला देशीओ को भारतीय नागरीकता दे देनी चाहिए दक्षिण दिनाजपुर के हिली गांव में भारत-बांग्लादेश सीमा पर कुछ दीवारें बनाई गई हैं, कोई नहीं जानता कि इन्हें किसने बनाया है, पर यह समझने में मुश्किल नहीं है कि यह तस्करों के गिरोह की करतूत है. वहां सुबह से शाम तक तस्करी और घुसपैठ जारी रहती है. घुसपैठिए ज़्यादा से ज़्यादा गर्भवती महिलाओं को सीमा पार कराते हैं और उन्हें किसी भारतीय अस्पताल में प्रसव कराकर उसे जन्मजात भारतीय नागरिकता दिलवा देते हैं. इस काम में दलाल और उनके भारतीय रिश्तेदार भी मदद करते हैं.

2006 में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में ऑपरेशन क्लीन चलाया था. 23 फरवरी 2006 तक अभियान चला और 13 लाख नाम काटे गए. हालांकि चुनाव आयोग पूरी तरह संतुष्ट नहीं था और उसने केजे राव की अगुवाई में मतदाता सूची की समीक्षा के लिए अपनी टीम भेजी. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के तत्कालीन राज्य सचिव अनिल विश्वास ने कहा था, उन्हें सैकड़ों पर्यवेक्षक भेजने दीजिए, अब कोई भी क़दम हमें जीतने से नहीं रोक सकता. इस बयान से अंदाज़ा लगाया गया कि माकपा को अपने समर्पित वोट बैंक पर कितना भरोसा रहा है. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि वाममोर्चा के सत्ता में आने के समय से ही मुस्लिम घुसपैठियों को वोटर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई. उस समय ममता बनर्जी ने कहा था कि राज्य में दो करोड़ बोगस वोटर हैं. विभिन्न संस्थाओं एवं मीडिया के मोटे अनुमान के मुताबिक़, भारत में डेढ़ से दो करोड़ घुसपैठिए बस गए हैं और बंगाल के एक बड़े हिस्से पर इनका क़ब्ज़ा है. अब ममता भी चुप हैं, क्योंकि उन्हें भी २०१४ में बंगाल की कुर्सी दिख रही है.





एक  सितम्बर ..., राज के सितम अब बनें देश के वर , अब बनकर बन्दर, थोप रहें हैं नए क़ानून के बन्दर बाँट से.., रोड नियम से अपनी कमजोरी छिपाने से बनाएं सरकारी स्वांग से अपनी तिजोरी भरने का काम....!!!!!!!!!!!! 

१.क़ानून के तूने तोड़ी बत्ती पीली..
अब यह है २० हजार की सरकारी थाली...

२. मेरे चेहरे में लाली .., क्यों डरता है खाली पीली... 
दे, दे.., मेरी २ हजार रूपये की सरकारी बोली ..
अब मैं कर दूंगा.., सरकारी झोली खाली..

३. अब भंग करने के बाद RTO का नया रूप, बना रिश्वत ट्रांस्जिक्सन ऑफिस ..., लगा रहा है, देश को ..., भ्रष्टाचार के इंजेक्शन...,

४. गड़करीजी अब होंगे सरकारी मेहमान, मालामाल.., बढ़ जाएगा रिश्वत का जाल ...,

५. सरकारी लकड़बघहों की बहार , जीवन में होगा चमत्कार ..,

६. सरकारी गड्ढे अब बने ..., भ्रष्टाचार के अड्डे.., बनी जनता के गले की हड्डी.., क्योंकि सरकारी कर्मचारी है फिसड्डी...

७. देश में सरकारी गड्ढे बनें सरकारी गद्दी के स्तंभ.., क्योंकि इस भ्रष्टाचार में है दम खंभ ...

८ गड़करीजी..., अब तो सरकारी गद्दीकरी बनकर चलाओ..., स्कूटर बिना हेलमेट के (HELL-नरक , MET –में मिलाना)..क्योंकि आप बैठें हैं सत्ता के स्वर्ग में... 
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१. सरकारी गड्डे..., बने जम्पदार गद्दे, से.., SPONGE के स्पंजी से रीड की हड्डी से SPONDYLOSIS .. से भ्रष्टाचार का ANALYSIS .., जनता के जीवन के LOSS से (हानी से)..,नीजी नर्सिंग होम हुए मालामाल ..., जनता बेहाल..

२. ट्रैफिक के प्रदूषण से फेफड़े की बीमारी से ..., केकड़े (कैंसर) के जीवन में परिवर्तन... .

३. लोगों के समय की बर्बादी.. बनी , राष्ट्र की बर्बादी ,

४. टायर कंपनी का बढ़े व्यापार.., मुनाफ़ा जोरदार...,

५. गाड़ी के पुर्जे बनाने वालों के बहार..., इंसानी पुर्जे बने, दूसरे दर्जे से.., बेहाल...

६. पेट्रोल से सत्ताखोरों के PET-ROLE के इस भ्रष्ट्राचार से DIESEL (DIL- JAL) के इस दिल जले खेल से जनता घायल.., विदेशी मुद्रा से देश का घाटा.. देश को चुना लगाकर.. सत्ताखोरों अपना सफेदीपन चमकाओ....

७. हर टोल व चुंगी नाका.., सरकारी कर्मचारी बजा रहें है.., देश की पुंगी..., इस खुल्लम खुल्ला के खेल से.., महंगाई से, जनता की खुल रही लूंगी...



८. दोस्तों इस खेल में, देश की हानि को आंका जाय तो चुंगी.., टोल.., रिश्वत..., रोड़ निर्माण घोटालों से..., देश के इस रोड़े से.., वार्षिक, २० लाख करोड़ रूपये से कहीं अधिक धन, सरकारी कर्मचारियों की थालियों में, भेंट चढ़ जाता है... 

९. हमारी तुम्हारी जान बचाने के धोके से रिश्वत के झोके से अब होगा हिन्दुस्तान आबाद ...!!!!

१०. सत्ता के नशेड़ी लोगों को इतनी राजस्व की आमदानी होगी कि हमारी GDP के मूल्य को भी करेगी मात...!!!!, यही है देश की बात बेबाक..!!!

Thursday, 29 August 2019


जी हाँ .., क्रिकेट के भगवान् की राज्यसभा में अनुपस्थिती से..., पूरी पगार.., क्योंकि हमारा संविधान है दिलदार..., दागी बागी की लोबी से लोभी भी हैं..., इसके दावेदार....
पिछले दरवाजे (राज्य सभा) के नेता , अभिनेता, खिलाड़ी से धन बल के मसीहा भी बने सदाबहार..., रिश्वत से राजनीती के सफर , रिश्ता भी है..., अभी बरकरार...,



महान फक्कड़ समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया ने कांग्रेस से लोहा लेते कहा था , राज्य सभा देश के संविधान का भार है..., इसे भंग किया जाय..,

पहले दिन..., अपनी अनुपस्थिती के इस विवाद पर सचिन तेंदुलकर,खामोश..., दूसरे दिन बड़े भाई के ऑपरेशन का बहाना..., तीसरे दिन बेबाक कहना..., “ मैं विज्ञापनों व अन्य अनुबंधों की वजह से राज्यसभा नहीं आ सका”..., लेकिन भविष्य में कब आऊँगा इस बारे में कुछ नहीं कहा ...
हाल ही मैं सचिन तेंदुलकर का , दिल्ली के विज्ञान भवन में आगमन .., लेकिन राज्यसभा से हुआ उनका मोह भंग...

आज से २० साल पहिले एक सीनीयर भारोत्तोलन की महिला खिलाड़ी ने कहा था, क्रिकेट की वजह से सचिन को जल्द ही अर्जुन पुरूस्कार मिला , मैं, तो वर्षों से देशी- विदेशी गोल्ड मेडल लेते आई हूं ..., मुझे तो पुरुस्कार के लिए, खेल मंत्रालय में मंत्रणा चल रही है..., दूसरे खेलों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय पुरूस्कार देना, मतलब खिलाड़ी पर परोपकार करना...

याद रहे क्रिकेट के कप्तान महेंद्र सिंग धोनी , अपने शुरूवाती खेल जीवन में.., जो फ़ुटबाल में अपना जीवन सवारने के लिए ,५० रूपये कमाने के लिए कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करते थे..,

८ साल पहिले भारत सरकार ने क्रिकेट में महेंद्र सिंग धोनी व हरभजन सिंग को पद्मश्री से सम्मानित किया तो ,वे विज्ञापन एजेंसी में, शूटिंग से, धन की लालसा से , राष्ट्रपति भवन में पुरुस्कार समारोह में नहीं गए .., बाद में झारखण्ड सरकार ने इनके इस कृत्य का बचाव कर, राजभवन में बुलाकर पुरूस्कार दिया 

आज देश में क्रिकेट ने अन्य खेलों के वजूद को खा लिया है... अन्य खेलों के देश में हजारों खेल रत्न जो अन्तराष्ट्रीय मंचों पर गोल्ड मैडल जीत चुके हैं..., आज वे दुर्गती भरा जीवन जी रहें/रहीं हैं.., कोई मंनरेगा में मजदूरी, कोइ सब्जी बेचकर...,कोई भूखमरी से ..., और देश की प्रतिभा ख़त्म हो रही है...,

राख के तले चिंगारी (गरीबों की प्रतिभा) को तो सरकार ने , राख पर भ्रष्टाचार का पानी डालकर .., बुझा दिया है...
दूसरी बड़ी खबर..., बॉडी बिल्डर खामकर, सरकारी बाबूओं की चमक बड़ा-कर , भ्रष्टाचार के मलखंभ से अब दसवी बार , दस नम्बरी के दंश से भ्रष्टाचार के मिस्टर इंडिया के खिताब से नवाजा जा चुका है...,

तीसरी खबर, सरकारी श्री की पद्मता से सैफ अली भी दबंगी दिखाकर , मल खंभ के खेल से, संविधान से सुशोभित है..
याद रहे.., सैफ अली के पिता , क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी ,दुर्लभ जाती के हिरन ह्त्या के आरोप में, अग्रिम जमानत से क़ानून को अमानत बनाकर अल्लाह को प्यारे हो गये .., वे ही नहीं इस तरह के लाखों अमीर सफेद्पोसों ने क़ानून को प्यास बनाकर अपनी सेहत बढ़ाई है...,

क्या अल्लाह को प्यारे इस तरह के लोगों को.., अल्लाह भी प्यार देगा...???, यह सवाल हमारे देश के संविधान के क़ानून की अनबूझ पहेली है...!!!!!!!,

((((वोट बैंक के भगवानों ने सत्तापरिवर्तन (१९४७) को आजाद भारत कहकर, क्रिकेट के दीवानों को वोट बैंक से भरमाने के लिए क्रिकेट के बिकाऊ/दुकानदार को भारत रत्न का सम्मान से सत्कार व मेजर ध्यानचंद को दुत्कार, व गुलाम भारत के खेल के भगवान, ध्यानचंद,जिन्होंने विश्व को नक़्शे में भारत का ध्यान दिलाकर.., हिटलर ने भी जर्मन के फील्ड मार्शल की बोली लगाई.., राष्ट्रवाद को कोई खरीद नहीं सकता है.., यह सिद्ध करने वाले ध्यानचंद.., के पुतले की धूल साफ़ करने का कांग्रेसीयों को ध्यान तक नहीं आया.. ध्यानचंद आज तक बेखबर व सचिन को तो लोकतंत्र के मंदिर का भगवान् बना दिया ))))