Thursday, 26 February 2015




१ पुण्य तिथी पर नमन .., वीर सावरकरजी का जन्म तो भारतमाता को बेड़ियों से मुक्त करने के ध्येय से अग्निपथ पर चलने के लिए ही हुआ था..,

२. उनकी इतनी अग्निपरीक्षा हुई, यदि लोहे की होती तो, पिघल जाता, मृत्यु पर्यंत उनकी चेहरे पर भारतमाता की सेवा करने व उनके नासिक के घर को जब्त करने, व सत्ता परिवर्तन (१९४७) के बाद , नेहरू द्वारा घर पर नजरबन्द रखने के बावजूद कोई शिकन नहीं थी 

३. १९५२ में, चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की , सावरकर की भाविश्यवाणी करने व १९६२ में सार्थक होने से तो ,नेहरू और बौखला गए थे...

४. लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री बनने के पश्चात् , शास्त्री द्वारा वीर सावरकर को पेंशन स्वीकार्य करने के पश्चात , कांग्रेसी, शास्त्रीजी पर बौखला गए थे 


५. १९६५ में पाकिस्तान से जीत के बाद वीर सावरकर ने कहा, शास्त्रीजी.., आप रूस मत जाओ.., हम जीते हुए राष्ट्र है, विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को हमारे देश बुलाओं , आप रूस जाओगे तो वापस नहीं आओगें और हमारे द्वारा जीता भाग भी लुटा आओगे.. उनकी यह भाविश्यवाणी भी सत्य साबित हुई 


६. यही हाल वीर सावरकर के जीवन के साथ भी, लालबहादुर शास्त्री के मौत के सदमे के बाद,वीर सावरकर बिमार होते गये ,
उन्होने कहा “अब देश गर्त मे चला गया, अब मुझे इस देश मे जीना नही है” 


७. वीर सावरकर ने दवा लेने से इंकार कर दिया, एक बार डाक्टर ने उन्हे चाय मे दवा मिला कर दी, तो वीर सावरकर को पता चलने पर उन्होने चाय पीना भी बंद कर दिया , और एक राष्ट्र का महानायक इच्छा मृत्यु (कहे तो आत्महत्या) से चला गया.


८. सावरकर ने जितना लिखा है उतना तो महात्मा ने पढ़ा भी नहीं होगा..इसमे संदेह नहीं कि सावरकर के अपेक्षा गाँधी की स्वीकार्यता बहुत अधिक थी क्योंकि वे अंग्रेजी हुकूमत के जातिवाद,धर्मवाद के समर्थन की आड़ से “महात्मा” बनना चाहते थे ...,, इसी पर वीर सावरकर के गंभीर मतभेद से , गांधी, वीर सावरकर को अपना कट्टर दुश्मन मानते थे...


९. वीर सावरकर ने अपने मौत के पहने कहा कहा मेरी मौत पर कोई हडताल व देश के किसी नगर, शहर मे बंद का आयोजन नही होगा और जो मेरे जिदगी की 5000 रू अमानत है, वह जो हिन्दू , मुस्लिम बने, उनके पुन: हिन्दु धर्म मे आने पर यह धन उनके शुध्हीकरण मे उपयोग मे लाना?


१०. आज भी स्वर साम्राज्ञी कोकिला , भारतरत्न लता मगेशकर भी गला फाडकर चिल्ला रही है, वीर सावरकर को कोइ सम्मान नही मिला है, उनके वीरता की इस देश मे दुर्गति हुई है ……….

.
११. अब इस दुनिया ऐसा वीर सावरकर दुबारा पैदा नही होगा? देश के इतिहास को अन्धेर मे रखकर यो कहे देश के इतिहास को दफन कर दिया है….?????????


देश में, जातिवाद का निर्मूलन के लिए, मृत्यू के बाद मेरा शरीर ब्राह्मण, मराठा, चमार व भंगी द्वारा कंधा देकर गाड़ी में रखकर विद्युत श्मशान में रवाना हो... - “वीर सावरकर” 

Wednesday, 25 February 2015



वाह.., ये है वीर सावरकरजी का कमाल.., जेल में ९०% कैदी साक्षर हो गएँ है, जिसमे ६०% मुस्लिम है..., यह उद्गार अंडमान जेल के जेलर बारी ने एक विदेशी पर्यवेक्षक को कहा..., 
जेलर बारी के इस उदगार से वीर सावरकरजी कके गुणों के गूंज की चर्चा इंग्लॅण्ड में, प्रशंसा का विषय रही... लेकिन, देश के इतिहासकारों ने उन्हें आज भी कट्टर हिंदु के श्रेणी में रख, मुसलबानों में खौफ फ़ैलाने का ही काम किया... 
( यह कार्टून, २६ फरवरी को वीर सावरकरजी की ४९ पुण्य तिथी को समर्पित )
१ देश के इतिहासकारों ने देश को कलंकित कर.., पत्रकार, पुकारकर बनने से पहिले धन डकार कर पतनकार से देश के गौरव का पतन कर, हमारे इतिहास को बुझ दिल कौम बताकर, विदेशी हाथ, साथ व बात को आज भी श्रेष्ठ बताकर, हमारे वतन को खोखला बना दिया...
२. इस देश की पुण्य भूमी में वीर सावरकर का अवतरण गुलाम भारत में छत्रपती शिवाजी और सत्ता परिवर्तने के बाद वीर महाराणा प्रताप के रूप में हुआ..,जिन्होंने खंडित भारत के विरोध में अपने “राष्ट्रवादी” विचारों को ज्वलंत रखने के लिए “सत्ता मोह” त्याग कर, “घास की रोटी” खाना पसंद किया जिनका ऋण देश कभी चुका नहीं सकता है...
वीर सावरकर वे प्रकांड विद्वान,कवि,लेखक,सभी धर्मों के ज्ञाता के साथ प्रख्यात इतिहासकार थे उन्हें मराठी साहित्य का कालिदास भी कहा जाता है..

३.. सावरकर जो वीर ही नही परमवीर थे, इस धरती पर चाणक्य के बाद दुरदर्शी क्रातिकारी वीर सावरकर ही थे ,जिनकी दहाड् से अग्रजो का साम्राज्य हिल उठता था, मै तो उन्हे देश के क्रांति का चाणक्य मानता हूँ,? उनकी भूमिका अग्रेजो के समय वीर शिवाजी महाराज व सत्ता परिवर्तने के बाद वीर महाराणा प्रताप की थी? आज तक हमारे देश्वासियो को यह पता नही है, सुभाष चन्द्र बोस, चद्रशेखर आजाद व सरदार भगत सिंग मे क्राति का जन्म वीर सावरकर द्वारा हुआ?
४ सोने की चिडिया कहा जाने वाला देश आज आज भ्रष्टाचारियों के हाथ की कठपुतली बंनकर रह गया है। वैसे यह देश का दुर्भाग्य ही रहा है जिसे राष्ट्रपिता पिता की झूठी उपाधि से नवाजते रहे है, उसने अहिसा के नाम पर देश के साथ छल किया, महात्मा गाधी ने अहिसा शब्द भ्रामक अर्थ कर... देश्वासियोको गुमराह किया। उन्होने शांति को हिंसा का पर्याय मानकर देशभक्त युवावो को कुंठित कर दिया । हत्यारो के समक्ष आत्मसमर्पण को उन्होने अहिसा के रूप मे महिमा-मंडित कर अपने नाम के आगे महात्मा शब्द लिखवा लिया , पर हकीकत यह है कि महात्मा गाधी ने भारत को एक “बुझदिल“ लोगो का देश बनाने का काम किया और यही उसी का नतीजा है
५. आज देश मे भ्रष्टाचार, आतकवाद सिर चढ कर बोल रहा है.. और इसी देश का श्लोग्न बन गया है “मेरा संविधान महान, यहाँ हर माफिया पहलवान “ और सत्यमेव जयते की आड़ में , सत्ताखोर , चुनाव में धर्मवाद, अलगाववाद,जातिवाद, व घुसपैठीयों के आड़ में सट्टा लगाकर चूनाव जीतने पर... भ्रष्टाचार से चूना लगाकर
दूसरा श्लोगन बन गया है ... “सत्ता एक मेवा है , उसकी जय है और सत्य आत्महत्या कर रहा है

Tuesday, 24 February 2015



एक कहानी..., जनता.., एक साधू को राजा बना देती है..., प्रशासन चौपट होते जाता है, दुश्मन अपना तम्बू लेकर उस देश में ला रही होती है, तो, कुछ साधू के वफादार दरबारी, साधू को चेताते हैं, सीमा पर हमारे सेनाओं के सर काटे जा रहे है.., विदेशी घुसपैठीये भी  हमारे देश में गहरी पैठ जमा चुके हैं.., खबर की सत्यता होने के बावजूद वह साधू बाबा, मौन मोहन बनकर कहता है.., शांती रखो.., अंत में विदेशी आक्रमणकारी, देश में कब्जा कर, साधू राजा को घेर लेती है...,

साधू राजा फिर से विदेशी राजा को कहता है..., शांती रखो.., मैं तो साधू हूं ..., मुझे सत्ता से कोई लेना देना नहीं है..., यह तो जनता मुर्ख है, जिसने मुझे राजा बनाया है..., फिर वह सत्ताव छोड़कर  अपने आश्रम में जाकर.., पहिले से अधिक, सुख वैभव चैन से रहता है...

यही कहानी मेरे देश की है... (सिर्फ लाल बहादुर शास्त्रीजी  के १९ महीने के “जय जवान - जय किसान .., देशी हाथ, साथ विचार के स्वर्णीम काल को छोड़कर)..

याद रहे लाल बहादुर शास्त्रीजी  का उपनाम “वर्मा” था लकिन जिन्दगी में इस उपनाम का नहीं उपयोंग नहीं किया , शास्त्री की उपाधि ग्रहण करने के बाद उन्होंने इस उपनाम को जोड़ा...,

शास्त्रीजी के कार्यकाल में, कांग्रेस के वंशवाद की राजनीती के साथ देश जातिवाद, अलगाववाद, भाषावाद... व  घुसपैठ की राजनीती के निर्मूलन के कगार पड़ खडा देखकर,  देशी ताकतों ने विदेशी हाथों से हाथ मिलाकर, इस देश के लाल की ह्त्या कर दी .... और भारत के स्वर्णिम भविष्य को क़त्ल  कर दिया

आज तक देश की किसी भी पार्टी ने, राष्ट्रवादी धारा से देश को नहीं चलाया..., यों कहे चलने नहीं दिया.., परिणाम स्वरुप छेत्रिय पार्टियों का कुकुरमूत्ते  की तरह से जातिवाद के रूप में जन्म  हुआ, उन्होंने भी जातिवाद को ढाल बनाकर..., समाज से देश को भ्रष्टाचार से लूटकर, एक जाति से दूसरे जाती से लड़वाकर,  अपने तलवार की धार बढ़ाई.

जब बिहार..,  राबड़ी देवी के बिहार से भ्रष्टाचार की बयार से चल सकता था ..., सोनिया गांधी के नाम से, कांग्रेस ने  देश को एक भ्रष्टाचार की मजबूत दीवार से १० साल चलाया ..., देशी विदेशी घोटालों से सीमा खुली छोड़कर, एक शमा बनाकर देश को डूबाया .


कठपुतले प्रधानमंत्री को डोर से बांधकर, कांग्रेस ने देश की, विदेशी बहू को “भारतमाता” कहकर, १० सालों की लूट की खुली छूट के मकडजाल के डोर से भारत मुक्त हुआ. क्या अब राहुल के राहू से कांग्रेस मुक्त होगी..???  कैलाश तिवारी, meradeshdoooba  डॉट com से 

Monday, 23 February 2015



चेतो मोदी सरकार.., महाराष्ट्र का मंत्रालय अब बना भ्रष्टाचार से मूत्रालय..., सत्ता की कुर्सी के फड़फडाहट से .., सभी दिग्गज नेताओ को बाजू हट, कर भाजपा के, देव के इंद्र को महाराष्ट्र की कुर्सी सौपी गई.., 
युवाओं में जोश का आपा दिखाकर.., युवा विकास का सपना दिखाकर, वोट पाकर, जनता पर चोट कर, अब मुख्य मंत्री ने भ्रष्टाचार एक सुनहरा सपना के ख्वाब में , देवेन्द्र फडनवीस ...., विपक्षीयों पर हौव्वा बनने की बजाए, फडनवीस, बीस से चार सौ बीस बनकर , भ्रष्टाचार से मंत्रालय व सचिवालय को इंद्र सभा बना रहें हैं....
महाप्रदेश की महामारी,, हफ्ते से हांफता, भ्रष्टाचार के कोड़े से लहूलूहान, पानसरे के पान में माफियाओं की सुपारी, स्वाइन फ्लू के फ्लो से भ्रष्टाचारियो के फ्लोर में चमक, यही है सत्ता का दीमक..., टोल चुंगी कर माफ़ करने के वादे..,, को पूरा न करने के विरोध करने पर माकपा के वरिष्ठ नेता की ह्त्या होने पर.., मंत्रालय की सुराग (खिड़की) से हत्यारों का सुराग देने वाले को ५ लाख रूपये के इनाम का आलाप.., अब चमका रहें है अपने सत्ता का चिराग..
१. मुख्य मंत्री की प्रशासनिक लापरवाही से न तो भ्रष्टाचार कम हुआ है और न कम होने के आसार दिखाई दे रहा है..
इसके विपरीत मुख्यमंत्री द्वारा ३८१, भ्रष्टाचारियों पर मुकदमा चला देने की अनुमति न देने से भ्रष्ट अधिकारीयों के हौसले बुलंद हो गए हैं.. भ्रष्टाचार मुक्त भारत का दावा करने वाली भाजपा की चेम्बूर की नगरसेविका राजश्री श्तीप्त श्रीपत पलांडे को एसीबी ने ५० हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा था , भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार ३८१ सरकारी बाबूओं पर मुकदमा चलाने की अनुमती की एसीबी की मांग ठुकरा दी है...
२. मुख्य मंत्री की छवि स्वछ्य स्वच्छ व ईमानदार की है , लेकिन वे अपने नागपुर प्रेम से नहीं उबर पा रहें हैं, मुख्य मंत्री नागपुर से अधिकारीयों को लूट खसोट के लिए इम्पोर्ट कर मुंबई ला रहें हैं.., इसी कड़ी में पल्लवी दराड़े को नागपुर से इम्पोर्ट कर मनपा की अतिरिक्त आयुक्त बना दिया है
३. सी वार्ड की सहायक संगीता हंसनाले का नाम अव्वल पर है क्योंकि हसनाले को मनपा की अतिरिक्त आयुक्त पल्लवी दराड़े का संरक्षण है, जो मुख्यमंत्री देवेन्द्र के सचिव प्रमोद दराड़े की पत्नी है , इसलिए उन्हें अपरोक्ष रूप से मुख्यमंत्री का संरक्षण प्राप्त है.
४. संगीता हंसनाले ने पूरे वार्ड को भ्रष्टाचार का अड्डा सरकारी बाबूओं को खुली छूट दे दी है कि कहीं से भी वसूली करो और मुझे हिस्सा दो जिसके फलस्वरूप पूरे वार्ड में जनहित के कार्य थाप पढ़ें हैं, गटरें लबालब भरें होने से मच्छर व अन्य कीटाणु भिनभिनाने से मलेरिया, स्वाइन जैसी बीमारियाँ तेजी से फ़ैल रही है...
५. संगीता हंसनाले ने वार्ड के प्यून स्तर से लेकर जेई व एई तक को मिलाकर एक पूरी चैन बना रखी है.
६. सडकों पर फेरी वालों से हफ्ता से अधिकारियों के हैसले बुलंद, जनहित के काम ठप्प कर्रकर, सिर्फ वसूली और शोषण पर ही धान दिया जा रहा है..
७. फेस बुक October 24, 2013 की पोस्ट ·
जरूर पढ़े ...., देश का मंत्रालय बना मूत्रालय, (PMO –प्रधानमंत्री कार्यालय ) बना.... पॉकेट मनी ऑफिस और देश का चोरालय....से देश को बना रहे है भ्रष्टाचार का शौचालय..????????????,
दोस्तों , सत्ता के यह मंत्र है.... भूख, फूख, फूंख ,थूक, थूककर, चाटकर ,चुनाव के पहिले.... जनता को भारत का भाग्य विधाता बताकर, चुनाव के बाद..... जनता से कहते है.... “तेरा मेरा क्या है.. नाता ??? क्योंकि भ्रष्टाचार, हमे है भाता ...” इस सिद्धांत से संविधान की दुहाई देते कहते है , हमारे सब “माफिया, अलगाववादी ,घुसपैठी, धर्मवादी, हैं ... सत्ता के लूट के भ्राता {भाई-भाई}...”
प्रधानमंत्री की, आज के फूक को उड़ाने की इतनी शक्ति है ...वे देश को भी उड़ा सकते है (आतंकवाद से – देश की सीमा पर जवानों के हाथ बांधकर, सिर कटवाकर, विदेशी धन की भीख मांगकर , देश के टुकड़े करने का गंभीर ख़तरा बना है) .
अभी सिचाई घोटाले के भ्रष्टाचार में, भ्रष्टाचार के महाभीम शरद पवार के भतीजे, जो महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार से छोटा भीम मंत्री... अजीत पवार के नाम से जो, जाने जाते है.. ने विदर्भ के सूखा पीड़ित श्रेत्र के दौरे के दौरान किसानों का उपहास उपहास उड़ाते हुए कहा था , यदि मेरे पेशाब करने से सूखा गायब होता है तो.... मै पेशाब करने के लिए तैयार हूँ.....,
महाराष्ट्र में २० लाख करोड़ के अधिक घोटालो से , जब मंत्रालय में मूत्रालय की असहनीय बदबू आने लगी तो, इसे अचानक लगी आग कहकर, जनता को भरमाकर, महाराष्ट्र के घोटाले से सभी मंत्रियों के पाप जल गए , इसमें ८० हजार करोड़ का सिचाई घोटाला , लवासा में गैर कानूनी निर्माण का २ लाख करोड़ व , गरीबों के घर देने के माफिया व सत्ताखोरों के मिली भगत के कागजाद भस्म हो गए, मंत्रालय में लगे संविधान के शेर की उभरती मूर्ती भी इस आग में झुलस गयी , यह तो नेताओं को अक्ल आयी कि, आग के दौरान तिरंगा झंडा उतार लिया
आज सत्ताखोर, जनता को अपनी पैरों की जूती समझते हुए , गरीबों के जीवन को आम जनता के नाम से, उनके जीवन को रौदते हुए, अपने शरीर में शक्ति का संचार कर , आज गली, मोहल्ले, शहर , जिले से प्रदेश व देश का मुस्टंडा नेता जनता को चुनौती देते हुए कहता है ..इस खेल में हमें .रोक सके तो रोक लो...तुम तो अनेक हों...????
जनता अपने को अकेला समझकर सोचती है कि, मै तो... घास का तिनका हूँ, ये सत्ताधारी, तो जानवरों से भी गए गुजरे , भ्रष्टाचार के विशालकाय प्राणी है, कहीं मै और मेरा परिवार को इनके पैरों तले रौदा न जाऊ , इससे वह अपने को, बचाने में लगा है.
१. *****भूख ... सत्ताखोर , पेपर पर योंजनाओं को भोजनायें, बनाकर उस पेपर को चाट कर अपनी भ्रष्टाचार की भूख मिटाता है, और जनता को पता भी नहीं चलता है
२. *****फूख ....***** पेपर चाटने के बाद सताखोर, योजनाओं के पेपर, फूख मारकर उड़ा देता है
३. *****फूंख...... सत्ताखोरों के फूक से , जब भ्रष्टाचार के चाट कर उड़े हुए पेपर जनता के पास पहुँचते है , भ्रष्टाचार को चाटने के बाद कुछ चिन्ह उन पेपरों में जनता को मिलते है , तो जनता के बवाल के पहिले ही, इस पेपर को सत्ताखोरों द्वारा फूंख / जला, दिये जाते है.
३. *****थूक ... जनता द्वारा प्रश्न उठाने पर, सत्ताखोर... जनता पर थूकते हुए कहता है – तुम्हें तो अनेक हो.... जो करना है करों , हमारे पास , नौकरशाही , जज शाही व डंडे वाले पुलिस की भारी भरकम फ़ौज है
४. *****चुनाव के पहले... वही नेता जनता पर लगे अपने थूक के दाग, जनता के घर-घर जाकर चाटता है , उनके प्रशंसित कर कहता है , आप ही देश के भाग्य विधाता हो , मुझे सत्ता में चुनकर भेजो , मै तुम्हारी हर समस्याओं का निदान कर, एक ऐसा हिंदुस्थान बनाऊगा..??? जहां गम नहीं.. खुशी के फूल लगाऊँगा, कहकर जनता की आँखों में धुल झोककर, अपने १०० पीढी के भ्रष्टाचार के बाग़ बनाता है.
५. *****चुनाव के बाद ....नेता..., नगर, जिला से शहर, प्रदेश, व देश तक का सेवक कहलवा कर ..., अपनी पद पर रहते हुये , भक्षक बन कर, वह न तो संवैधानिक भवन में उपस्थित होटा है , और न तो जनता के बीच होता है... (नगर निगम ,विधान भवन व संसद से गायब होकर).. वह तो भ्रष्टाचार के भव सागर में गोते लगाकर भ्रष्टाचार का पानी पी जाता है... अपनी १०० पीढी के लिए अय्याशी के बाग़ बनाटा है
६. *****चाणक्य ने कहा था , “राजनेता..... एक मछली की तरह है , तालाब से समुन्द्र तक की मछली मुंह तो हिलाती है, लेकिन वह कितना पानी पीती है, किसी को पता नहीं चलता है”
७.*****जनता द्वारा शोर मचाने पर वह कहता है “तेरा मेरा क्या है नाता...?? , हमें तो है... भ्रष्टाचार भाता , देशवासियों यह डूबते देश की कहानी है, यह सताखोरों की जनता के लिए एक लोरी है...??? ताकि जनता गहरी नींद में सोये रहें...जागो देशवासियों ....डूबते देश को राष्ट्रवाद की धारा से... देश को बचाओ - 

Saturday, 21 February 2015



देश के मंत्रालयों में .., जासूसों ने अपने मंत्र से बनाया जासूसालय..का एक लय !!!! 
क्या..,अब फिर से, महाराष्ट्र का मंत्रालय बना मूत्रालय, सचिवालय बना शौचालय, अब बना दलालों का अड्डा, फिर खुद रहा.., भ्रष्टाचार का गड्डा, सत्ता के इस चक्के से, आम आदमी भौचक्का...!!! 
दलालों से जनता हलाल.. शिवसेना के समर्थन हटाने की गीदड़ धमकी से शरद पवार का चेहरा लाल, नरेंद्र मोदी भी खेले एक चाल, कहे शरद पवार मेरे मित्र.., भविष्य में महाराष्ट्र की मेरे सत्ता को देंगें, प्रेम पत्र.., विकास के मुद्दे छूटे पीछे, एक दूसरे को पटखनी देने में छोड़ रहें है, पसीने,
इसी आड़ में सरकारी कर्मचारी से अधिकारियों व दलालों की बहार..,

१.आधे से ज्यादा अधिकारी चार बजे से पहले बहाना बनाकर घर भाग जातें हैं तो कुछ अन्य विभागों में जाकर गप्पे मारते हैं
२. चाय के कप और गप्पों के रंगत में रंग सचिवालय में राज्य के कोने कोने से काम करने आये आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं होती है.., लंच टाइम के बाद भी घंटों तक अधिकारी..., भोजन के बाद, आपसी भजन से गायब रहतें हैं..
३. नई सरकार आने के बाद मंत्रालय में, मंत्रियों ने.., चक्कर लगाकर अपने-अपने कार्यालय पसंद किये लेकिन फर्नीचर का कलर पसंद न आने की वजह से अधिकांश मंत्री अपने बंगले से ही काम काज चला रहें हैं
४. कई मंत्री तो सोमवार से शुक्रवार तक बाहर के कार्यक्रम में व्यस्त हैं, जिसकी वजह से प्रशासनिक अधिकारियों पर किसी का डर नहीं है.
५. मंत्रियों की लापरवाही और आपसी तालमेल न होने से आम जनता की सुनवाई नहीं हो रही है.
६. राज्य का मंत्रालय आम जनता के लिए पहेली सा बन गया है, आम आदमी से वादा कर, एकमुश्त युवाओं का वोट देने से युवाओं को एक्टिव मुख्यमंत्री देने के वादे से.., अपने को ठगा महसूस कर रह़ा है,
७. अधिकारी स्तर पर फाईलें एक टेबल से दूसरे तक जाते-जाते गायब हो जाती हैं ..,जिस व्यक्ती का काम होता है,उसका पूरा काम फाइल खोजने में ही बीत जता है..
८. सरकार ने सेवा अधिकार कानून का आदेश देने के बावजूद कार्यालय के बाहर सूचना बोर्ड का वजूद न होने से विभागों के कार्य की जानकारी नदारद है
९. विभागों के नये व पुराने मंत्रिओं के बीच बांटे जाने से,सूचना न होने से आम आदमी स्थान्तरित कार्यालय को नहीं खोज पाता है, कुल मिलाकर मंत्रालय में आने वाला एक आदमी यदि कोई विभाग ढूंढ लेता है तो उसे लगता है कि जंग जीत लिया है.
१०. पल्लवी दराडे के पति मुख्यमंत्री के सचिव है, जब से पल्लवी दराडे ने अतिरिक्त महानगर पालिका का आयुक्त का पद संभाला है, उसे अहंकार हो गया है , और जनता से संवाद बंद कर दिया है...
११. भाजपा के माधव भंडारी ने शिवसेना के परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर पेट्रोल,डीजल के भाव कम होने के बावजूद परिवहन शुल्क कम करने की मांग पर आपसी कलह से जूझ रही सरकार से जनता का भरोसा उठाता जा रहा है..
फेस बुक October 24, 2013 की पोस्ट ·
जरूर पढ़े ...., देश का मंत्रालय बना मूत्रालय, (PMO –प्रधानमंत्री कार्यालय ) बना.... पॉकेट मनी ऑफिस और देश का चोरालय....से देश को बना रहे है भ्रष्टाचार का शौचालय..????????????,
दोस्तों , सत्ता के यह मंत्र है.... भूख, फूख, फूंख ,थूक, थूककर, चाटकर ,चुनाव के पहिले.... जनता को भारत का भाग्य विधाता बताकर, चुनाव के बाद..... जनता से कहते है.... “तेरा मेरा क्या है.. नाता ??? क्योंकि भ्रष्टाचार, हमे है भाता ...” इस सिद्धांत से संविधान की दुहाई देते कहते है , हमारे सब “माफिया, अलगाववादी ,घुसपैठी, धर्मवादी, हैं ... सत्ता के लूट के भ्राता {भाई-भाई}...”
प्रधानमंत्री की, आज के फूक को उड़ाने की इतनी शक्ति है ...वे देश को भी उड़ा सकते है (आतंकवाद से – देश की सीमा पर जवानों के हाथ बांधकर, सिर कटवाकर, विदेशी धन की भीख मांगकर , देश के टुकड़े करने का गंभीर ख़तरा बना है) .
अभी सिचाई घोटाले के भ्रष्टाचार में, भ्रष्टाचार के महाभीम शरद पवार के भतीजे, जो महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार से छोटा भीम मंत्री... अजीत पवार के नाम से जो, जाने जाते है.. ने विदर्भ के सूखा पीड़ित श्रेत्र के दौरे के दौरान किसानों का उपहास उपहास उड़ाते हुए कहा था , यदि मेरे पेशाब करने से सूखा गायब होता है तो.... मै पेशाब करने के लिए तैयार हूँ.....,
महाराष्ट्र में २० लाख करोड़ के अधिक घोटालो से , जब मंत्रालय में मूत्रालय की असहनीय बदबू आने लगी तो, इसे अचानक लगी आग कहकर, जनता को भरमाकर, महाराष्ट्र के घोटाले से सभी मंत्रियों के पाप जल गए , इसमें ८० हजार करोड़ का सिचाई घोटाला , लवासा में गैर कानूनी निर्माण का २ लाख करोड़ व , गरीबों के घर देने के माफिया व सत्ताखोरों के मिली भगत के कागजाद भस्म हो गए, मंत्रालय में लगे संविधान के शेर की उभरती मूर्ती भी इस आग में झुलस गयी , यह तो नेताओं को अक्ल आयी कि, आग के दौरान तिरंगा झंडा उतार लिया
आज सत्ताखोर, जनता को अपनी पैरों की जूती समझते हुए , गरीबों के जीवन को आम जनता के नाम से, उनके जीवन को रौदते हुए, अपने शरीर में शक्ति का संचार कर , आज गली, मोहल्ले, शहर , जिले से प्रदेश व देश का मुस्टंडा नेता जनता को चुनौती देते हुए कहता है ..इस खेल में हमें .रोक सके तो रोक लो...तुम तो अनेक हों...????
जनता अपने को अकेला समझकर सोचती है कि, मै तो... घास का तिनका हूँ, ये सत्ताधारी, तो जानवरों से भी गए गुजरे , भ्रष्टाचार के विशालकाय प्राणी है, कहीं मै और मेरा परिवार को इनके पैरों तले रौदा न जाऊ , इससे वह अपने को, बचाने में लगा है.
१. *****भूख ... सत्ताखोर , पेपर पर योंजनाओं को भोजनायें, बनाकर उस पेपर को चाट कर अपनी भ्रष्टाचार की भूख मिटाता है, और जनता को पता भी नहीं चलता है
२. *****फूख ....***** पेपर चाटने के बाद सताखोर, योजनाओं के पेपर, फूख मारकर उड़ा देता है
३. *****फूंख...... सत्ताखोरों के फूक से , जब भ्रष्टाचार के चाट कर उड़े हुए पेपर जनता के पास पहुँचते है , भ्रष्टाचार को चाटने के बाद कुछ चिन्ह उन पेपरों में जनता को मिलते है , तो जनता के बवाल के पहिले ही, इस पेपर को सत्ताखोरों द्वारा फूंख / जला, दिये जाते है.
३. *****थूक ... जनता द्वारा प्रश्न उठाने पर, सत्ताखोर... जनता पर थूकते हुए कहता है – तुम्हें तो अनेक हो.... जो करना है करों , हमारे पास , नौकरशाही , जज शाही व डंडे वाले पुलिस की भारी भरकम फ़ौज है
४. *****चुनाव के पहले... वही नेता जनता पर लगे अपने थूक के दाग, जनता के घर-घर जाकर चाटता है , उनके प्रशंसित कर कहता है , आप ही देश के भाग्य विधाता हो , मुझे सत्ता में चुनकर भेजो , मै तुम्हारी हर समस्याओं का निदान कर, एक ऐसा हिंदुस्थान बनाऊगा..??? जहां गम नहीं.. खुशी के फूल लगाऊँगा, कहकर जनता की आँखों में धुल झोककर, अपने १०० पीढी के भ्रष्टाचार के बाग़ बनाता है.
५. *****चुनाव के बाद ....नेता..., नगर, जिला से शहर, प्रदेश, व देश तक का सेवक कहलवा कर ..., अपनी पद पर रहते हुये , भक्षक बन कर, वह न तो संवैधानिक भवन में उपस्थित होटा है , और न तो जनता के बीच होता है... (नगर निगम ,विधान भवन व संसद से गायब होकर).. वह तो भ्रष्टाचार के भव सागर में गोते लगाकर भ्रष्टाचार का पानी पी जाता है... अपनी १०० पीढी के लिए अय्याशी के बाग़ बनाटा है
६. *****चाणक्य ने कहा था , “राजनेता..... एक मछली की तरह है , तालाब से समुन्द्र तक की मछली मुंह तो हिलाती है, लेकिन वह कितना पानी पीती है, किसी को पता नहीं चलता है”
७.*****जनता द्वारा शोर मचाने पर वह कहता है “तेरा मेरा क्या है नाता...?? , हमें तो है... भ्रष्टाचार भाता , देशवासियों यह डूबते देश की कहानी है, यह सताखोरों की जनता के लिए एक लोरी है...??? ताकि जनता गहरी नींद में सोये रहें...जागो देशवासियों ....डूबते देश को राष्ट्रवाद की धारा से... देश को बचाओ 

Thursday, 19 February 2015



छत्रपती शिवाजी के जन्म दिन पर विशेष....,
१.       इस देश की पुण्य भूमी में वीर सावरकर का अवतरण गुलाम भारत में  छत्रपती शिवाजी और सत्ता परिवर्तने के बाद वीर महाराणा प्रताप के रूप में हुआ..,जिन्होंने खंडित भारत के विरोध में अपने “राष्ट्रवादी” विचारों को ज्वलंत रखने के लिए “सत्ता मोह” त्याग कर, “घास की रोटी” खाना पसंद किया   जिनका  ऋण देश कभी चुका नहीं सकता है...
२.       सावरकर जो वीर ही नही परमवीर थे, इस धरती पर चाणक्य के बाद दुरदर्शी क्रातिकारी वीर सावरकर ही थे ,जिनकी दहाड् से अग्रजो का साम्राज्य हिल उठता था, मै तो उन्हे देश के क्रांति का चाणक्य मानता हूँ,? उनकी भूमिका अग्रेजो के समय वीर शिवाजी महाराज व सत्ता परिवर्तने के बाद वीर महाराणा प्रताप की थी? आज तक हमारे देश्वासियो को यह पता नही है, सुभाष चन्द्र बोस, चद्रशेखर आजाद व सरदार भगत सिंग मे क्राति का जन्म वीर सावरकर द्वारा हुआ?
३.       गांधी ने शिवाजी आदि को पथभ्रष्ट देशभक्तकहा, गांधी ने कट्टर मुसलमानों के तुष्टिकरण के लिए भारत के राष्ट्रीय वीरों वीरो- महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी और गुरु गोविन्द सिंह को पथभ्रष्ट देशभक्तकहा.
४.       वीर सावरकर वे प्रकांड विद्वान,कवि,लेखक,सभी धर्मों के ज्ञाता के साथ प्रख्यात इतिहासकार थे उन्हें मराठी साहित्य का कालिदास भी कहा जाता है... उनके पास राष्ट्रवाद  के ५६ गुण थे, यदि वे राजयोग पाने के लिए गांधी की तरह पिछलग्गू कभी नहीं बने.
५.       वीर सावरकर ने अंडमान जेल में दो जन्म के कारावास की सजा को “भारतमाता की, गुलामी की बेड़िया” तोड़ने के लिए अपने जीवन को धन्य माना

६.       .महात्मा गाँधी का कहना था-शांति- शांति-शांति
जबकि वीर सावरकर का नारा था -क्रांति-करांति-क्रांति|
लेकिन अफ़सोस आज हम उस मुकाम पर खड़े है जहाँ से इतिहास हमें चुनोती दे रहा है| आज कि पीढी वीर सावरकर के बारे मैं कुछ ज्यादा नहीं जानती है क्योंकि धर्मनिरपेक्षता का रोना रोने वालो ने देश मैं क्रांति का उदघोष करने वालो से अन्याय किया, उनका पूरा इतिहास सामने ही नहीं आने दिया| लाल रंग मैं रंगे बिके हुए इतिहासकारों ने क्रांतिकारिओं के इतिहास को विकृत किया | पाठ्य पुस्तकों से उनके जीवन सम्बन्धी लेख हटाये गए|
७.       एक मात्र वीर सावरकर ही.... 
ज़्यादातर लोग भारत की आज़ादी को लेकर भ्रमित दिखाई देते हैं. चाटुकार संस्कृति के पोषक इतिहासकारों ने सच्चाई पर पूरी तरह से पर्दा डाल रखा है. दरअसल गाँधी और नेहरू नाम के छद्मावरण ने आज़ादी के असली हीरो को उनका वाजिब सम्मान मिलने से दूर रखा . गाँधी के वजह से भारत को 20 वर्ष पहले मिलने वाली आज़ादी 20 वर्ष बाद मिली. अगर भारत इनके आंदोलनों के वजह से आज़ाद हुआ, तो अफ्रिका और दक्षिण अमेरिका के वे छोटे-छोटे देश कैसे आज़ाद हुए, वहाँ कोई गाँधी-नेहरू नही था, जो भूख हड़ताल या आंदोलन कर रहा हो. सच्चाई यही है की दूसरे विश्वयुध के बाद इंग्लैंड की ताक़त इतनी क्षीण हो गई थी की वह अपने साम्राज्य के छोटे-छोटे देशों को भी काबू मे रख पाने में असमर्थ हो गया था, फिर भारत जैसे विशाल देश को अपने कब्ज़े मे रखना उसके वश की बात नहीं थी.
८.       अगर आज़ादी में किसी का योगदान है, तो वह उन वीरों का है, जिन्होने, भारत माता के लिए लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले उन शहीदों का है, जिसने अपनी ज़ान दाव पर लगाके अँग्रेज़ों के दिमाग़ में ख़ौफ़ पैदा किया. उन्होंने ये सोंचने पर मज़बूर किया कि क़दम-क़दम पर उन्हें इस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. हर मोड़ पर उनका सामना सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ान और नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे क्रांतिकारीओं से होने वाला. हमें उनका एहसानमंद होना चाहिए जिन्होंने माँ-बाप, पत्नी, भाई बंधु और तमाम सुख-सुविधायों का त्याग करके हँसते-हँसते देश के लिए अपने प्राणों की बलि दे दी. लेकिन यहाँ कहानी बिल्कुल उल्टा है, हम गला फाड़-फाड़ के उनकी जयजयकार करते हैं, जिन्होंने सत्ता सुख पाने के लिए देश का बंदर-बाँट कर दिया. यह देश गाँधी-नेहरू या जिन्ना के पिता की जागीर नहीं थी... जिसको इन लोगों ने तीन टुकड़ों मे बाँट दिया.
९.       भगतसिंह को फाँसी दी तब कहां थे.., गाँधी ,क्या फाँसी देना अहिंसा नही है? क्यों..?, आवज़ नही उठायी ? क्यों..?, भारत के सैनिक दूसरे विश्वयुद्ध मे ब्रिटन के कारण मारें हाय क्या ये हिंसा नही थी? क्यू नेताजी की आजाद हिंद फौज के सैनिको को हमारे ही सैनिको ने मार डाला ?क्या वो हिंसा नही थी ,उधम सिंह जेसे देशभक्त को जलियावाले बाग के जननरसंहार का ऑर्डर देने वाले को मार डालने की वजह से आपने गाँधी-नेहरू ने आतंकवादी बताया.. क्या ये सही है
बिल्कुल सही 1914 मे भारत स्वतंत्र हो जाता अगर लोकमान्य तिलक की बात मानकर कांग्रेस काम करती आज़ादी के बदले पहले विश्वयुद्ध मे मतदान का प्रस्ताव तिलकजी ने रखा था और वही सही था..., आप तो 20 साल की बात कर रहे है हमे 40 साल पहले आज़ादी मिल जाती.
१०.   हमने केवल कुछ पुतलों को, चौराहों पर खड़ा किया,
और कुछ लोगों को केवल, तसवीरों में जड़ा दिया।।
हमें आजादी मिलते ही सब, अपने मद में फूल गए,
शास्त्री, वीर, सुभाष, विनायक, सावरकर को भूल गए।
कयोंकि इनके नामों में कुछ, वोट नहीं मिल सकते थे,
इनको याद दिलाने से, सिंहासन हिल सकते थे।।
हमने मोल नहीं पहचाना, राजगुरू कीफाँसी का,
हमने ऋण नहीं चुकाया, अब तक रानी झाँसी का।
बिस्मिल जी की बहन मर गई, जूठे कप धोते-धोते,
और यहाँ दुर्गा भाभी ने, दिन काटे रोते-रोते।।
अब भी समय नहीं बीता है, भूलों पर पछताने का,
भारत माता के मंदिर में, अपने शीष झुकाने का।
जिस दिन बलिदानी चरणों पर, अपने ताज धरोगे तुम,
उस दिन सौ करोड़ लोगों के, दिल पर राज करोगे तुम।।


११ महात्मा गाँधी का कहना था-शांति- शांति-शांति
जबकि वीर सावरकर का नारा था -क्रांति-करांति-क्रांति|

लेकिन अफ़सोस आज हम उस मुकाम पर खड़े है जहाँ से इतिहास हमें चुनोती दे रहा है| आज कि पीढी वीर सावरकर के बारे मैं कुछ ज्यादा नहीं जानती है क्योंकि धर्मनिरपेक्षता का रोना रोने वालो ने देश मैं क्रांति का उदघोष करने वालो से अन्याय किया, उनका पूरा इतिहास सामने ही नहीं आने दिया| लाल रंग मैं रंगे बिके हुए इतिहासकारों ने क्रांतिकारिओं के इतिहास को विकृत किया | पाठ्य पुस्तकों से उनके जीवन सम्बन्धी लेख हटाये गए|
वीर सावरकर एक महान राष्ट्रवादी थे| भारतीय स्वंत्रता संग्राम मैं उनकी भूमिका अतुलनीय है| वीर सावरकर भारत के पहले क्रन्तिकारी थे जिन्होंने विदेशी धरती से भारत कि स्वाधीनता के लिए शंखनाद किया| वो पहले स्वाधीनता सेनानी थे जिन्होंने भारत कि पूर्ण स्वतंत्रता कि मांग की| वो पहले भारतीय थे जिनकी पुस्तके प्रकाशित होने से पहले ही जब्त कर ली गई और वो पहले छात्र थे जिनकी डिग्री ब्रिटिश सरकार ने वापिस ले ली थी| वस्तुत: वह भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी, क्रांतिकारिओं के प्रेरणास्त्रोत, 
अद्वितीय लेखक, राष्ट्रवाद के प्रवर्तक थे, जिन्होंने अखंड हिंदुस्तान के निर्माण का संकल्प लिया|
उनका सारा जीवन हिंदुत्व को समर्पित था| उन्होंने अपनी पुस्तक 'हिंदुत्व' मैं हिन्दू कोण है की परिभाषा मैं यह श्लोक लिखा--

१२.. १९२४ में कांग्रेस के प्रसिद्द नेता मौलाना मोहम्मद अली ने भी वीर सावरकर से भेट की. उन्होंने वीर सावरकर को देश भक्ति, त्याग, भावना आदि की मुक्त कंठ से प्रशंसा की किन्तु शुद्धि आन्दोलन का विरोध किया. इस पर सावरकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा पहले मुल्ला मौलवियों द्वारा हिन्दुओ को मुसलमान बनाने से रोका जाए, इसके बाद शुद्धि आन्दोलन को रोकने पर विचार किया जायेगा. कांग्रेस के खिलाफ आन्दोलन के भी वीर सावरकर ने विरोध में विचार व्यक्त किये इससे मौलाना मोहम्मद अली रुष्ट हो गये और अनायास ही उनके मुह से निकल गया यदि मुसलमानों के सुझाव न माने गये, तो उनके विश्व में अनेक देश है, वे वहां चले जाने के लिए विवश हो जायेंगे .

१३. एक राष्ट्रीय स्तर के नेता के मुंह से ऐसी बातें सुनकर सावरकर ने स्पष्ट शब्दों में उत्तर दिया आप पूर्ण:तया स्वतंत्र है, फ्रंटियर मेल प्रतिदिन बहरत भारत से बाहर जाती है, आप प्रतीक्षा क्यों करते हैं ? बोरिया बिस्तर लेकर तुरंत भारत से विदा हो जाइये.
मौलाना को आशा भी नहीं थी की उन्हें ऐसा उत्तर मिलेगा.खीझ कर उन्होंने कहा आप मुझसे बहुत बौने है अत: मैं आपको दबोच सकता हू
सावरकर भी तुरंत ही बोल पड़े मैं आपकी चुनौती स्वीकार करता हूं , किन्तु आप यह नहीं जानते कि शिवाजी महाराज अफज़ल खान के समक्ष्य बोहोत बहुत बौने थे परन्तु उस नाटे कद वाले मराठा ने कद्दावर पठान का पेट फाड़ डाला था”, यह सुनकर मौलाना को अपना सा मुंह लेकर जाना पढ़ा. 

१४     याद रहे......,कांग्रेस अध्यक्ष कट्टर मौलाना मुहम्मद अली गौहर ,जो एक कट्टर धर्मांध मुसलमान थे, आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े थे, जो, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, वरन कहना चाहिये गांधीजी द्वारा मनोनीत किये गये, ये वही थे जिन्होंने कांग्रेस के अध्यक्षीय मंच से अनुसूचित जातियों को हिन्दू तथा मुसलमानों के बीच बराबर बाँट देने की धर्मांध मांग रखी थी. ये वही थे जिन्होंने गांधी को महात्मा कहने से इनकार कर दिया था और खुल्लमखुल्ला घोषणा की थी की एक व्यभिचारी और गिरा हुआ मुसलमान भी मिस्टर गाँधी से बेहतर है!ये वही थे जिन्होंने गांधीजी को खिलाफत आन्दोलन में भाग लेने को मजबूर किया था. यही मौलाना था, जिन्होंने बड़े घमंड के साथ कहा था की जिस दिन वे गांधीजी को मुसलमान बना लेंगे, वह दिन उनकी जिंदगी का सबसे सुनहरा दिन होगा. ऐसे धर्मांध मौलाना को गांधीजी ने, न केवल महान, प्रगतिशील, देशभक्त, राष्ट्रीय और खरा सोना कह कर प्रशंसा की थी वरन कांग्रेस के अध्यक्ष पद की ऊंचाइयो तक ऊपर उठाया था.
१५      महात्मा गाँधी भी मार्च १९२७ में वीर सावरकर से मिलने रत्नागिरी गए इन दोनों महापुरूषों की विचारधाराओं में आमूल परिवर्तन होते हुए भी गांधी ने सावरकर के ज्ञान देशभक्ति आदि गुणों के प्रशंसक थे.गांधीजी ने सावरकर के शुद्धि आन्दोलन की आलोचना करनी प्रारंभ कर दी. इस पर वीर सावरकर निर्भिक स्वर में बोले मुसलमानों ने भारत में एक हाथ में कुरआन तथा दुसरे हाथ में तलवार लेकर हिंदुओं का बल पूर्वक धर्म परिवर्तन किया. ऐसी स्थिति में उन हिन्दुओ को उनके धर्म के महत्व से अवगत करा कर पुन: अपने धर्म में वापिस लाना एक राष्ट्रीय कार्य है.
इसके साथ ही उन्होंने गांधीजी को सावधान किया कि मुस्लिम लीग के नेता वास्तव में भारत को एक मुस्लिम राष्ट्र के रूप में बदलना चाहते है. जो सत्य हुई ..
१६     ..जब तक देश जातिवाद, भाषावाद, अस्पर्श्यिता की बेड़ियों में जकड़ा है.., तब तक देश एक गुलामी से दूसरी गुलामी में बंधा रहेगा..., और हिंदुत्व का पतन के साथ देश विखंडन के कगार पर जाएगा ...
सावरकर के अनुसार हिन्दू समाज सात बेड़ियों में जकड़ा हुआ था।।
१. स्पर्शबंदी: निम्न जातियों का स्पर्श तक निषेध, अस्पृश्यता
२. रोटीबंदी: निम्न जातियों के साथ खानपान निषेध
३. बेटीबंदी: खास जातियों के संग विवाह संबंध निषेध
४. व्यवसायबंदी: कुछ निश्चित व्यवसाय निषेध
५. सिंधुबंदी: सागरपार यात्रा, व्यवसाय निषेध
६. वेदोक्तबंदी: वेद के कर्मकाण्डों का एक वर्ग को निषेध
७. शुद्धिबंदी: किसी को वापस हिन्दूकरण पर निषेध
ऐसी उनकी ४० से ज्यादा भविष्यवाणीयां, जिनकी हमने अवहेलना की है..., वीर सावरकर का इस देश पर महान ऋण है। वे अधिकांश क्रान्तिकारियों के लिये प्रेरणा के स्रोत थे। आज भी वह हर सच्चे भारतीय के लिये प्रेरणा के स्रोत हैं !!!!!
                        

अब इस दुनिया ऐसा वीर सावरकर दुबारा पैदा नही होगा? देश के इतिहास को अन्धेर मे रखकर यो कहे देश के इतिहास को दफन कर दिया है….????????? कैलाश तिवारी कृपया वेबसाईट की यात्रा करें... meradeshdoooba डॉट com से