Monday, 31 July 2017

मेरा संविधान महान , यहां हर माफिया पहलवान सत्ता मेवा है , इसकी जय है , सत्य आत्महत्या कर रहा है .. “अदालत – अदा नहीं किया तो लात ..., इसी लात से गरीबों की मौत.., देश के जजशाही, नौकरशाही सत्ताशाही को रिश्वत से धन के नशे की लत “


मेरा संविधान महान , यहां हर माफिया पहलवान 

सत्ता मेवा है , इसकी जय है , सत्य आत्महत्या कर रहा है 

..
“अदालत – अदा नहीं किया तो लात ..., इसी लात से गरीबों की मौत.., देश के जजशाही, नौकरशाही सत्ताशाही को रिश्वत से धन के नशे की लत “ 

याद रहे एक साल पहिले क़ानून से अति पीड़ित व्यक्ति ने खुली चुनौती देकर मुंबई हाईकोर्ट को एक याचिका देकर पूछा था कि आपके अदालत में मुझे सुनवाई के लिए १५ मिनट खरीदने है उसकी कीमत कितनी होगी .., और अदालत ने उसे लताड़ते हुए गिरफ्तारी की धमकी के बाद याचिका वापस लेने को मजबूर किया .

वही सलमान खान की जमानत याचिका को सम्मान देते हुए देश के अदालत ने अपने इतिहास में मुंबई हाईकोर्ट रात १० बजे तक खुली रही और सलमान के अब्बा जान ने कहा मैंने अपने धन के डब्बा से २३ करोड़ रूपये खर्च कर यह सफलता पाई है 

दोस्तों , दाँतों  तले ऊंगली दबाने का सवाल नहीं है .., यह वेबस्थल www.meradeshdoooba.com का स्लोगन है .., देश के ७० सालों का राजनेताओं का भोजन है ..,

ससुर/ससुरी , भ्रष्टाचार के सु-स्वर/स्वरी व दामाद - दाम से आबाद..., 



राजनेताओ का बेटा.., बना सोने का लोटा.., बेटी बनी धन की पेटी .., जहां घोटालों की बाढ़ से देश के सब्र का बाँध भी टूट गया है .

इस देश में १९४७ से आज तक डकारे गए रकम में दांत में फंसे भोजन को भी अदालत बरामद नहीं कर सकी है..., लालू के १००० करोड़ रूपये के घोटालों एवज २५ साल बाद, ब्याज की रकम जो ४० हजार करोड़ बनती थी और इसे मात्र ५ करोड़ का दंड व चार साल की LUXURY जेल में LUX साबुन के चाँद सितारों के साबुन से साबूत, बिना सबूत नहलाई से जीवन में एक नई चमक आई है .. 

दोस्तों.., मार्मिक स्तिथी है.., पाकिस्तान जैसे तानाशाह देश ने तो पनामा लिक घोटालों में प्रधानमंत्री की गद्दी


छीन गई.., हमारे देश के २० वीं व २१ वीं सदी के नायकों /महानायकों को इन ७० सालों के घोटालों से आज तक कोई खरोच नहीं आई है क्योंकि नौकरशाही जजशाही इसमें कॉकरोच बनकर क़ानून से जनता में कर्क रोग फैला कर .., तिलचट्टे से भ्रष्टाचार के चट्टे –बट्टे बनकर देश की साख को बट्टा लगाकर देश का भत्ता डकारकर देश का भट्टा बिठा रहें हैं ..

हम बना चारा घोटाले से “राष्ट्रीय ससुरा” व हमारा दामाद शैलेन्द्र यादव ८००० करोड़ के हवाले घोटाले से पछाड़कर बना “राष्ट्रीय दामाद”.., कौन कहता है कि उस ससुरी का वाड्रा राष्ट्रीय दामाद है 




वेबस्थल व फेसबुक की ८ अप्रैल २०१६ की सार्थक पोस्ट

देश तो वहां डूबा, जहां पानी नहीं था .., बालवाड़ी के छोटे बच्चों को कविता पढ़ाई जाती है .., मछली जल की रानी है , जीवन उसका पानी है , हाथ लगाओ डर जाती है , बाहर निकालो मर जाती है..,
चाणक्य की हजारों उक्तियां १००० सालों बाद भी सार्थक है ...

“
राजनेता..... एक मछली की तरह है” , तालाब से समुन्द्र तक की मछली मुंह तो हिलाती है, लेकिन वह कितना पानी पीती है, किसी को पता नहीं चलता है”
आज की.., सत्ताखोर से नौकरशाही बड़ी मछ्ली से, जल (संसाधनों) के राजा /रानी है.., जीवन में भ्रष्टाचार से देश का पानी पीने का अधिकार से, देश में गरीबी व भुखमरी का अन्धकार है , उन्हें हाथ लागाओ तो जनता के हाथ खा जाते हैं , बाहर निकालों तो पुलिस से जज भी डर से भाग जाते हैं कि कहीं हमारी रोजी रोटी का अधिकार जीवन से न छीन लें.

देश ७० सालों से कर्ज के गर्त में डूबा है.., हम मूलधन चुकाने के बजाय ,इस धन के ब्याज को चुकाने के लिए विदेशी निवेशकों को बुलाकर कर्ज का पहाड़ बना रहें हैं ..

देश का पानी सूख चुका है.., १९४७ में देश का १ रूपया = १ डॉलर से विदेशी देशों को कड़ी टक्कर देकर, देश का सम्मान था ...,

आज तक इन सत्ताखोरों ने मछली के रूप से बहुरूपिया बनकर .., बहुत रूपया.., देशी बैंकों को चूना लगाकर , विदेशी से देशी बैंकों व देश में भी अकूत संपती संपत्ति के मालिक बन बैठें हैं..,


देश की राख तले की चिंगारी की प्रतिभा को में सत्ताखोर, आरक्षण, जातिवाद, भाषावाद , अलगाव वाद का पानी डाल कर..., झूठी योजनाओं से अपने पिए हुए पानी के बुलबुले से , आराम हराम है, गरीबी हटाओ , मेरा भारत महान से इण्डिया शाइनिंग , भारत निर्माण से अच्छे दिनों के अफीमी नारों से , अब मीडिया – माफिया – राजनेताओं के गठबंधन से देशद्रोहियों की एक नई फ़ौज बनकर देश को कीचड़ से लीचड़ बनाकर .., देश गर्त में जा रहा है...

दुश्मन देश भी कंधे से कंधा मिलाकर.., देश के भीतरीघात से लोकतंत्र से लूटतंत्र के खेल से प्रसन्न हैं .., वे मान रहें है कि हमारा देश भीतरीघात से अपने आप कमजोर हो जाए ताकि आक्रमण करने में आसानी हो ..

दोस्तों लिखने को तो बहुत-बहुत है.., यदि काले धन को राष्टीय सम्पत्ती बनाने का क़ानून व विशेष राष्टीय सुरक्षा क़ानून (रासुका) व विशेष त्तीव्र गति के बुलेट ट्रेन जैसे अदालत नहीं बनेंगें .., जनता इन काले धने के मसीहाओं के बुलेट से घायल होकर उनके आंसू बहते रहेंगे..,
आज देश कि बिंडवना.., व सच्चाई यह है कि ७० सालों में गरीबों के बहने वालों आंसुओं की ताकत, देश की नदियों के पानी से ज्यादा है..,
“
रासुका” से ही गरीबों के और आंसू नहीं बहेंगें .., कौन बनेगा करोडपति के उद्घोष से .., विदेशों में करोड़ों का धन जमा करने वालों को भी वही दंड मिलेगा जो एक सामान्य अपराधी व पाकेटमार के अनुपात में मिलता है..,

“
रासुका” के बिना गरीबों के आसूं का कोई मोल नहीं होगा ..,और “अच्छे दिनों” का नारा भी ७० वर्षो के इतिहास का अफीमी नारों का आयाम बनकर.., मीडिया-माफिया- नौकरशाही –
जजशाही- सत्ताशाही के शाही सम्पन्नता का जो देश की आबादी के ०.५ % से भी कम लोगों की वैभवता से देश को गर्त में डालने का खेल बदस्तूर जरी जारी रहकर.., देश की तस्वीर और बदसूरत होते रहेगी

१.                        कृपया जरूर पढ़ें., मेरा संविधान महान , यहाँ हर माफिया पहलवान......,
जब जज “थिरके” माफियाओं की मुरली के धुन.., नौकरशाही से फिल्मशाही भी दबंग.., तो.,क्यों न नोंचे संविधान का अंग... जब माफियाओं की नग्नता को, गरीबों के कपड़ों से पहनाए, जामा तब क्यों न लगे, कानून में जंग.., यह है .., ६९ सालों से, देश के गरीबी का इस भूखा नंगा हिन्दुस्तान का यह है. “छुपा रंग..”

२. “अदालत – अदा नहीं किया तो लात ..., इसी लात से गरीबों की मौत.., देश के जजशाही, नौकरशाही सत्ताशाही को धन के नशे की लत “
A.P.L, B.P.L….. से Z.P.L… घोटाला इनके जीवन मे है वरदान .... जज भी बनें धन से भाग्यवान 

३. आज का कानून. (कान + ऊन = क़ान मे ऊन= कानून बहरा हो गया है), अपराधी की पुस्तिका है, न्यायालय उनकी पाठशाला और जेल उसकी कार्यशाला है
इसमे अपराधी के लिये एक राहत का शब्द है जमानत...... ??????????
यह जमानत शब्द अपराधी के लिये अमानत बन गया है
इसमे एक अग्रिम जमानत भी है, जो अपराधी , अपराध करने से पहले ले लेता है और संविधान मुँह ताकता रहता है ?

४. अपराधी, जमानत के आड मे देश की अमानत (धरोहर ) बन जाता है
4 बार जमानत ------ अपराध में , प्रायमरी पास ......... ?
10 बार जमानत अपराध में, हाई स्कूल पास ................ ??
12 बार जमानत अपराध में, मिडल हाई स्कूल ..................???
15 बार जमानत.... अपराध में, स्नातक पास ............................ ????
15 से ज्यादा ........ अपराध में, डाँक्टरी पास ........................................................... ?????????????
इस विघ्यालय से एक प्रस्तित प्रमाण पत्र, जिसमे “ माफिया “ कि उपाघि मिलती है

५. आज “ माफिया “ शब्द कानून के लिये " माफ किया " है
यह शब्द संविधान को धत्ता बताकर कानून का “संरक्षित सदस्य“ बन जाता है
इनके शिक्षा व जनता को डराने व धमकाने की कला के अनुसार हर सत्ता व विपक्षी पक्ष अपने - अपने पक्षो मे शामिल कर अपनी गुणवत्ता बढाते है, और एक समय ऐसा आता है , जज ,पुलीस, नौकरशाही (आइ.ए. एस, आइ. पी एस. जिला अधिकारी...इत्यादी ) के रोजी रोटी व तबादले का अधिकार इन दागी नेताओ के हाथ आ जाता है
इनके एक टेलीफोने से प्रशासन में हडकप मच जाता है , अधिकांश प्रशासनीक अधिकारी
रोजी रोटी व तबादले बचाने के लिये भ्रष्ट नेता के चरणदास बनकर, उनके पद चिन्हो पर चलकर, लूट के भागीदार बनकर , जनता की गाडी कमाई मे डाका डाल रहे है जिससे, जनता गरीबी व भूखमरी के हालत मे जीने को मजबूर है.

६. इन के 5 साल के बच्चे राणा सागा के औलाद लगते है, और गरीबो के 5 साल के कुपोषीत बच्चे 50 साल जैसे लगते है आधे से ज्यादा तो 5-6 साल के पहिले ही मर जाते है ?

७. आज का कानून – मेरे विचार ....
इस देश न्याय पांने के लिये किसी भी व्यक्ती को, एक मकडी के जाल मे फसकर, मकडी (कानून) से लडना पडता है, इस जाल से उलझते- उलझते उसकी शारीरिक , मानसिक ताकत व घर बार बिक जा ता है, और क्या मिलता है? तारीख पर तारीख , न्याय पाने के चक्कर मे पीढिया गुजार दी जाती है...?? , घर मे कागजो के पुलीदों का ढेर , कहते है कानून मे कंकाल के अन्दर कंकाल होते है , इसमे उलझते जाते है.

८. आज न्याय की , “एक बन्दर और दो बिल्ली की कहानी गुजरे जमाने की बात हो गइ है, आज न्याय का बन्दर, अपने साथ दो बन्दर रखकर, न्याय के लिये तडफती बिल्लीयो को कहते है, न्याय के तराजू के पलडे की रोटी खत्म हो गई है, दोनो का पलडा एक समान है. जाओ, आगे न्याय चाहिए तो अपने घर बार बेच कर रोटी का जुगाड करो, “

९. यहां न्याय तो नही मिलता है, हाँ, न्याय के नाम पर गरीबी जरूर मिलती है ?

१०. इंडिया के कानून के शब्द कोश मे एक महत्वपूर्ण शब्द है प्राकृतिक न्याय ,इस शब्द के आड मे वकील बहस कर जज को झक झोर देता , जिसने, जितने ज्यादा व्याख्या (दलील) की क्षमता वह उतना बडा वकील कहलाता है,
इस प्राकृतिक न्याय ने देश ने प्राकृतिक सौन्दर्य खो दिया है, भू मफिया जमीन , व दुसरे माफिया जनता व देश को लूट रहे है.

११. आज एक मुकदमे का फैसला आने मे कम से कम 20-40 साल का समय लग जाता है , इस्का अर्थ हुआ के हम जज, पुलिस, वकीलो को बिना न्याय के वेतन दे रहे है
एक जज का कार्यकाल 2-4 साल का होता है, नया जज आने पर उसे मुकदमे का अध्धन करना पडता है, तारीख पर तारीख लगती है, जब तक वह मामले को समझने लगता है तो वह सेवांनृवितहो जाता है,

प्रेमचन्द कि कहानी मे लिखा गया है, अदालते मतलब –कागजी घोडे दौडाना, इस कागजी घोडो पर बैठकर जजो वकीलो व पुलीसौ की फौजे आनन्द उठाते हुए अपनी आजीविका के साथ फरियादी को लूट रही है,

किसी ने कहा है, “सभी कानून बेकार है अच्छे लोगो को उनकी जरूरत नही होती है और बुरे लोग उससे सुधरते नही है”,
आज के माहौल मे बुरे लोग सिर्फ सुधरते है और वे अपनी सम्पती व सत्ता का अधिकार कर देश को चला रहे है,

१२. मैकोले का कहना था कि भारत को हमेशा के लिए गुलाम बनाना है तो इसके शिक्षा तंत्र और न्याय व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करना होगा और आपने Indian Education Act पढ़ा होगा, वो भी मैकोले ने ही बनाया था और उसी मैकोले ने इस IPC की भी ड्राफ्टिंग की थी। ये बनी 1840 में और भारत में लागू हुई 1860 में। ड्राफ्टिंग करते समय मैकोले ने एक पत्र भेजा था ब्रिटिश संसद को जिसमे उसने लिखा था कि::
"मैंने भारत की न्याय व्यवस्था को आधार देने के लिए एक ऐसा कानून बना दिया है जिसके लागू होने पर भारत के किसी आदमी को न्याय नहीं मिल पायेगा। इस कानून की जटिलताएं इतनी है कि भारत का साधारण आदमी तो इसे समझ ही नहीं सकेगा और जिन भारतीयों के लिए ये कानून बनाया गया है उन्हें ही ये सबसे ज्यादा तकलीफ देगी और भारत की जो प्राचीन और परंपरागत न्याय व्यवस्था है उसे जड़मूल से समाप्त कर देगा।“ वो आगे लिखता है कि
"जब भारत के लोगों को न्याय नहीं मिलेगा तभी हमारा राज मजबूती से भारत पर स्थापित होगा।" 

१३. एक ओटो रिक्शा के पीछे के लिखा था “सत्य परेशान होता है, लेकिन पराजित नही होता”
आज के मौजुदा हलात मे सत्य इतना परेशान होता है कि पराजित नही होने से पहले आत्महत्या कर लेता है - उदाहरण किसान आत्महत्या,और मध्यम वर्ग की आम जनता, गरीबी व भूखमरी से आत्महत्या के लाखो खबरे अखबारो मे पढने अखबारों मे मिलती है.
दुनिया के जिस देश मे प्रतिशोध वाला कानून है, वहा सबसे कम अपराध होते है. हमारे संविधान से न्याय न मिलने से हजारो फरियादी अपराधी बन चुके है, और परम्परागत अपराधी करोडपती है
१४. याद रहे २ साल पहिले.., , इरान मे एक युवति के चेहरे पर एसिड फए फेकने पर उसकी दोनो आँखे चली गई, तो अदालत ने हुक्म दिया कि अप्रराधी की दोनो आँखे फोंड दी जाये उसी तरह से सऊदी अरब का भी कानून है, बचे हुए मध्य पूर्व देशो के कानून, हमारे संविधान से भी बहुत कठोर है
आज देश मे 4 करोड मामले विभिन्न अदालतो मे विचाराधीन है, हमे शुक्रगुजार होना चहिये, देश के पंचायती राज का, वहाँ के निवासी उंनके न्याय का सम्मान करते हुए, राज्य की अदालतो मे नही जाते है, उसी तरह से उन नक्सली शासीत प्रदेश का न्याय, जहाँ, जन अदालत से उन्हे न्याय मिलता है (जिंनका कानून देश के 30-40% हिस्से मे है)

१५. यदि इनके मामले देश की अदालतो मे आते, तो अदालतों मे विचाराधीन मामले 12 करोड से भी ज्यादा होते थे, मतलब, 24 करोड से भी ज्यादा से भी ज्यादा लोग, 30% देश की वयस्क आबादी न्याय के चक्कर मे अपने जीवन का समय बरबाद कर रही होती ?

१६. ये हमारी न्याय व्यवस्था अंग्रेजों के इसी IPC के आधार पर चल रही है और आजादी के 65 साल बाद हमारी न्याय व्यवस्था का हाल देखिये कि लगभग 4 करोड़ मुक़दमे अलग-अलग अदालतों में पेंडिंग हैं, उनके फैसले नहीं हो पा रहे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा लोग न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं लेकिन न्याय मिलने की दूर-दूर तक सम्भावना नजर नहीं आ रही है, कारण क्या है? कारण यही IPC है। IPC का आधार ही ऐसा है.

कहते हैं.., “शराब से समुन्द्र से ज्यादा लोगों को डूबोया है.., और हमारा देश भी भ्रष्टाचार के शराब से कानूनी को डूबा कर ..., देशवासियों को पस्त कर, त्रस्त कर, इस, एक् “अंग्रेजो के अस्त्र” से देशवासीयो को मारकर..,पीटकर..., बीमारी , तनाव व अवसाद. (DEPRESSION) से अपने दबंगी के DEEP- IMPRESSION से देश के मसीहा बनकर, छायें हैं..., दोस्तों डूबते देश की यही कहानी है 

Sunday, 30 July 2017

लालू की लालटेन अब बनी “लाल बत्ती ट्रेन” की घोंघा चाल से घोटालों के track से मिल रहा है सत्ता में JACK-POT. (कृपया ,इस पेज की अन्य पोस्ट भी देंखें) क्या,,!!!, अब लालू LALU AND SONS /SON-IN-LAW FAMILY को सत्ता से बेदखल के इस पाप से, इस JACKAL- POT (घड़े) को फोड़ने में नीतीश + मोदी कंपनी कामयाब होगी ...


का वाड्रा दामाद राष्ट्रीय दामाद है

लालू की लालटेन अब बनी “लाल बत्ती ट्रेन” की घोंघा चाल से घोटालों के track से मिल रहा है सत्ता में JACK-POT. 

क्या,,!!!, अब लालू LALU AND SONS /SON-IN-LAW FAMILY को सत्ता से बेदखल के इस पाप से, इस JACKAL- POT (घड़े) को फोड़ने में नीतीश + मोदी कंपनी कामयाब होगी ...
९० लाख में ५०० करोड़ की जमीन खरीदकर ९० लाख में मिट्टी बेचकर.., DELIGHT कंपनी से अपना वंशवाद SUPERLIGHT कर, इस घोटाले को इनकार कर ख़ारिज ( DELETE कर, अब ) लालू बने काले देह से भ्रष्टाचार के लंगूर..,

२५ साल पुराने १ हजार करोड़ के चारा = चोरी घोटालों (आज के १ लाख करोड़ के घोटाले में ५ करोड़ का जुर्माना व ४ साल चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध व जेल में रहकर हनीमून -शहदी चाँद की सजा , अंदर -बाहर आने जाने का खेल ) इसे कहते हैं मेरा संविधान महान .., यहां हर माफिया पहलवान... 

मोदी की भाजपा की बिहार विधानसभा की चुनावी हार में UP का जादू क्यों नहीं चला यह दिवंगत महान व्यंगकार ने १९६० के दशक में जातिवाद के दस्तक से कारण बताएं हैं, जो आज भी सार्थक हैं ...

दिवंगत महान व्यंगकार लेखक श्री हरीशंकर परसाई के १० हजार से अधिक राजनितिक लेख आज भी जीवंत हैं. १९६० के दशक में.., उन्होंने बिहार के बारे में लिखा था, श्रीकृष्ण भगवान् मुझे मिले थे. उन्होंने, कहा मैं बिहार में चुनाव लडूंगा और लोगो को कहूँगा में श्रीकृष्ण भगवान् हूं , मैं आसानी से जीत जाऊंगा .., तब मैंने उनसे कहा आप जब तक यह नहीं कहोगे मैं श्रीकृष्ण “यादव” हूँ , तब तक आप चुनाव नहीं जीत सकोगे. भगवान् और मेरी शर्त लगी भगवान् श्री कृष्णा के विरोध में यादव नाम का उम्मीदवार खड़ा था और वह जीत गया और भगवान् श्री कृष्ण हार गए

लालू ने २०१५ के चुनाव में मुस्लिम (M) यादव https://www.facebook.com/images/emoji.php/v9/e40/1/16/LIKE.png(Y) दलित (D) के MY DAY से बिहार में जातिवाद से बंजर में फूल खिलाया है ...
तेजस्वी को तेज अश्व व तेज के प्रताप को शौर्य बनाकर अब बिहार की मिट्टी बेचकर,भ्रष्टाचार को शिष्टाचार से अपने कदमो को और मजबूत बनाया है ...


१. जयप्रकाश नारायण का बिहार .., अब अंध प्रकाश से जातिवाद की बहार.., नर मुंडों के परायण से भ्रष्टाचार को ,अफीमी नारों के रावणों का नारायण...,नारायण...,और उसमे गौ मांस का तड़का.. 

June 20, 2014 की फेस बुक व वेबस्थल की पुरानी पोस्ट 

२. जातिवाद के नरमुंडों के समीकरण का यह खेल है.., कही दलित , मुस्लिम व यादव के झोल से इनके वोट अपने झोले में डालने की प्रतिस्पर्धा है..

३. क्या यह चुनाव जातिवाद विरूद्ध विकास की लड़ाई साबित होगी या बिहार का विकास के ताबूत पर जातिवाद की आखरी कील साबूत होगी 

४. जयप्रकाश नारायण की इंदिरा गांधी की सरकार के भ्रष्टाचार से प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार करने पर अदालत की अवमानना करने से, हुंकार के बाद.., देश में १८ महीने आपातकाल लगाए जाने में, जेल जाने वाले नेता, जयप्रकाश नारायण की अक्टूबर १९७९ में मृत्यू होने के बाद अपने को क्रांती का स्वंय –भू नेता मानकर, बिहार प्रदेश को अंध प्रकाश कर, जातिवाद के प्रकाश से चारा व अन्य घोटालों से अपनी सत्ता चमकाते रहे ..

५. नीतीश सरकार ने बिहार में आपातकाल के दौरान “मीसा” में जेल गए लोगों को, १८५७ के क्रांतीकारियों से महान बताकर पेशन की घोषणा कर दी .. 

६. जयप्रकाश नारायण ने तो कहा था, देश में सबसे अधिक खनिज होने के बावजूद बिहार गरीब क्यों.???, इस जीत का रहस्य तो..., खनिज से ज्यादा बिहार में नेताओं के लिए जातिवाद,धर्मवाद के उत्प्रेरक खनिज से.., बिहार भ्रष्टाचार के बहार से गाय भैसों व अन्य जानवरों के चारे से, मुस्लिम यादव के भाई- चारे नारे के आड़ में, २५ सालों तक चारे को डकारकर , प्रदेश के गरीबों को बहाकर.., एकछत्र राज्य करते रहे...,

७. दिवंगत महान व्यंगकार लेखक श्री हरीशंकर परसाई के १० हजार से अधिक राजनितिक लेख आज भी जीवंत हैं. १९६० के दशक में.., उन्होंने बिहार के बारे में लिखा था, श्रीकृष्ण भगवान् मुझे मिले थे. उन्होंने, कहा मैं बिहार में चुनाव लडूंगा और लोगो को कहूँगा में श्रीकृष्ण भगवान् हूं , मैं आसानी से जीत जाऊंगा .., तब मैंने उनसे कहा आप जब तक यह नहीं कहोगे मैं श्रीकृष्ण “यादव” हूँ , तब तक आप चुनाव नहीं जीत सकोगे. भगवान् और मेरी शर्त लगी भगवान् श्री कृष्णा के विरोध में यादव नाम का उम्मीदवार खड़ा था और वह जीत गया और भगवान् श्री कृष्ण हार गए

८. दोस्तों.., देश का सबसे बड़ा जहर “अशिक्षा” है.., जिसकी वजह से जनता गरीब होते जा रही है.., खोखले वादों के अफीमी नारों का शिकार हो जाती है.., और वोट बैंक की राजनीती करने वाले अपने को देश का मसीहा कहकर काले धन से अमीरतम बनकर अपने को अप्रतिम कहकर सत्ता को जातिवाद, भाषावाद,धर्मवाद व घुसपैठीयों के कोड़े से जनता को पीटकर,अधमरा कर, महंगाई बढ़ा कर कर्ज के गर्त से देश को डूबा रहें है.

11. इस लोकतंत्र में आप और हम वोट बैंक के मोहरे हैं.., ५साल के रोते हुए चेहरे हैं.. राममनोहर लोहिया ने सही कहा था ..., जिंदा कौमे ५ साल का इन्तजार नहीं करती है. 


APRIL 7, 2014 के फेसबुक की सार्थक फेस बुक पोस्ट 


लालू..., बना लूला और नितीश कुमार..., बना लंगड़ा ..,
बिहार में जातिवाद,भाषावाद,अलगाववाद के झुण्ड बढ़ते गए..,सिर्फ नेताओं के मुंड बदलते रहे.., 


अब तो इस राजनीती के मकड़जाल में , विलय से, नए विलेन बन, एक नई वायलिन के धुन की हुंकार है, जनता भी इस लचर खेल को देखकर लाचार है, अब यह चारा घोटालों की बिहार में बहार की बयार का खेल है... 
लालू..., बना लूला और नितीश कुमार..., बना लंगड़ा और अब दोनों आँख में मुस्लिम(M) यादव(Y) की पट्टी बांधकर, सत्ता के नाव में, बड़ी मुश्किल से, मांझी के नाव से, भंवर के चुंगल से निकल कर..., अब नितीश्लाल (नीतीश +लालू) की नीती से भाजपा के खून से अलग होकर, अब महादलित के खून से अपनी फजियत बचाने के लिए, क्या...???, बेचारा नीतीश कुमार अब बेनकाब होकर, लालू के खून का चारा से.., बिहार की सत्ता की आस से प्यास मिटाने का खवाब पूरा करने के मंसूबों में सफल होंगें...


AUGUST 15, 2014 के फेसबुक की सार्थक फेस बुक पोस्ट 
-मोदी लहर का असर..., लालू..., बना लूला और नितीश कुमार..., बना लंगड़ा और अब दोनों आँख में मुस्लिम(M) यादव(Y) की पट्टी बांधकर, नितीश्लाल की नीती से , MY बिहार से चुनाव जीतने का दोनों अंधे ख्वाब देख रहे हैं. 
१. कुर्सी के लिए राजनीति में कोई दुश्मन नहीं होता यह कहावत आज तक हर दल के नेता ने कहा हैं
यदि राजनीतिक में अपने दुश्मन से समझौता नहीं होता है, तो राष्ट्रनीति से समझौता किया जाता है..,.राष्ट्रवाद को डुबो कर, वोट बैंक को सत्ता की नाव से जीवन की नैया बना कर, हर नेता, हर दिन अखबारो में सुर्खिया बना कर उन्नत होते जा रहा है.., और इस आड़ में देश की सूरत-सीरत-सेहत ६७ सालो से सूख गई है...


२. अभी इस दो-मुंहा नितीश्लाल के मिलन समारोह में २ दिन पहले भारी भीड़ जमाने के जुगाड़ का दावा करने के लिए मीडिया को बुलाया गया..., सिर्फ १५०० लोगों की भीड़ ने नितीश्लाल के चेहरे की हवाई उड़ा दी.., और भीड़ के बीच नीतीश कुमार को भावी मुख्यमंत्री घोषित करने पर अभी से सर फुटव्वल शुरू हो गयी है...


३. जयप्रकाश नारायण ने तो कहा था, देश में सबसे अधिक खनिज होने के बावजूद बिहार गरीब क्यों.???, इस जीत का रहस्य तो..., खनिज से ज्यादा बिहार में नेताओं के लिए जातिवाद,धर्मवाद के उत्प्रेरक खनिज से.., बिहार भ्रष्टाचार के बहार से गाय भैसों व अन्य जानवरों के चारे से, मुस्लिम यादव के भाई चारे नारे के आड़ २५ सालों तक चारे को डकारकर , प्रदेश के गरीबों को बहाकर.., एकछत्र राज्य करते रहे...,


४. दिवंगत महान व्यंगकार लेखक श्री हरीशंकर परसाई के १० हजार से अधिक राजनितिक लेख आज भी जीवंत हैं. १९६० के दशक में.., उन्होंने बिहार के बारे में लिखा था, श्रीकृष्ण भगवान् मुझे मिले थे. उन्होंने, कहा मैं बिहार में चुनाव लडूंगा और लोगो को कहूँगा में श्रीकृष्ण भगवान् हूं , मैं आसानी से जीत जाऊंगा .., तब मैंने उनसे कहा आप जब तक यह नहीं कहोगे मैं श्रीकृष्ण “यादव” हूँ , तब तक आप चुनाव नहीं जीत सकोगे. भगवान् और मेरी शर्त लगी भगवान् श्री कृष्णा के विरोध में यादव नाम का उम्मीदवार खड़ा था और वह जीत गया और भगवान् श्री कृष्ण हार गए.


५. फ़कीर प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री को छोड़कर, जिन्होने “जय जवान जय किसान” की लकीर से देश की एक नई राष्ट्रवादी तकदरी लिखी थी , उनकी ह्त्या कर, देश की राष्ट्रवाद की लकीर/ राष्ट्र-धन को वोट बैंक में परिवर्तित कर इसे गरीबी हटाओ के इमारत से “मेरा भारत महान” से “भारत निर्माण” के महलों में रहकर एक छत्र राज किया..., 


६. नेहरू के एक मुंहा वंशवाद ने वोट बैंक की राजनीती से इस देश में गरीबी को बढाकर विदेशी हाथों के कर्ज से मर्ज का अधिकार देकर डॉलर ने रूपये को सठीया दिया, मेरा भारत महान से, माफियाओं की नयी पीढी के पौधों का निर्माण को “भारत निर्माण” का नारा दे दिया, बीच-बीच में विरोधी दलों को जो सत्ता प्राप्त हुई, तो बहुमुखा सत्ताखोरों ने अपनी वंश के साम्राज्य को जमाने के राज के ख्वाब से देश को लूटा...


७. “आराम हराम” के नारे की आड़ में नेहरू ने धर्मवाद,जातिवाद, भाषावाद के गद्दे से ऐय्याशी का जीवन जीया. गरीबी हटाओ के आड़ में इंदिरा गाँधी ने आपातकाल लगाकर, बनाया संविधान हटाओ और राज करो. 
अगले चुनाव में “न जात पर न पात पर इंदिराजी की बात पर मुहर लगाओ हाथ पर...,” जनता ने तो इस राष्ट्रवादी नारा समझकर..., इंदिरा गांधी को जीता तो दिया लेकिन जात पात की राजनीति से.., सत्ता की इस मधुमख्खी ने हर फूलो (गरीबो) को डंक मारकर, सत्ता का शहद पी लिया तो - सत्ता जाने के डर से इंदिरा गाँधी ने आतंकवादियों के हाथ में मुहर मारकर , हाथ से हाथ मिला दिया ताकि वह बाहुबल से सत्ता पर मजबूती से काबिज हो.


८. इंदिरा गाँधी के शासन में गृहमंत्री रहे, ज्ञानी जैलसिंह ने इंदिरा के आदेश पर खालिस्तान (खाली स्थान) के आतंकवादियों से कहा तुम अपनी सेना बनाओ..., इस आवाज़ के टेप आज भी हमारे ख़ुफ़िया विभाग (“रॉ – RAW”) के पास जीवंत हैं.., .देश की बिंडवना थी कि ज्ञानी जैलसिंह सर्वोच्च पद्द के महामहीम बने जो आतंकवाद के महामुहीम के नेता .., राष्ट्रपति बन बैठे और इंदिरा गाँधी के इस अंधसमर्थक ने, राजीव गाँधी जिन्हें देश का ज्ञान तक नहीं था को प्रधानमन्त्री बना दिया. 


९. राजीव गाँधी ने देश को बीसवी सदी में ले जाने के झांसे से “मेरा भारत महान” के नारे को “मेरा देश का माफिया महान” के कर्मो को सार्थक कर दिया. बोफोर्स घोटाले के श्रेय लेने से पहले वी पी सिंह ने इंदिरा की अग्नि चिता में जब इंदिरा समर्थक नारे लगा रहे थे..., “जब तक सूरज चाँद रहेगा.., इंदिरा तेरा नाम रहेगा..” तब शमशान भूमि में इस राजीव के चाटुकार ने, झांसे में यह कहा कि है मैं नया नारा देता हूँ “जब तक इंदिरा तेरा नाम रहेगा.. सूरज चाँद रहेगा..” और वे राजीव गाँधी के दुसरे श्रेणी के नेताओं में सर्वोच्च रहे.


१०. राजीव गांधी के राजनीति में पकड़ कमजोर ख़तम होने पर वी पी सिंह ने अपने को मिस्टर क्लीन बनाकर बोफोर्स घोटाले को उजागर करने के अपने ईमानदार छवि से अपने को राजीव गाँधी से ज्यादा क्लीन दिखा कर भा जा पा के सहयोग से प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने अपनी सत्ता २५ सालो तक सुरक्षित रखने के लिए दलित कार्ड खेला और बोफोर्स घोटाला कूड़े में दान कर मसीहा बनने के चक्कर में प्रधानमंत्री पद से हाथ धो बैठे....


दोस्तों लिखने को तो १०० से अधिक पेज हैं लेकिन फेसबुक पर,लम्बा लेख पढने वाले और लाईक करने वाले बहुत कम हैं

Thursday, 27 July 2017

देश के शिक्षक तुम्हे सलाम..., देश में जितने राष्ट्रपति बने .. वे राजनीतीज्ञों की कृपा से देश के सर्वोच पद पर बैठे ...और देश के महामहिम पद से निर्वित होकर.., सरकारी सुविधा भोगते हुए , जीवन की लीला समाप्त कर गुमनामी में खो गए...


कलाम.., कल की आम, कली (नन्ही पीढी), व हर हिन्दुस्तानी को, तुम्हारे २री पुण्य तिथि का है अभिमान..,
तुम्हारी राष्ट्रवादी प्रेरणा से हिन्दुस्तानी कायल..., धर्मवादी घायल...,

तुम्हारे कलम की राष्ट्रवादी धार , हिन्दुस्तानीयों को रखता है सदाबहार...,

आपकी आयु के हर दिन को प्रेरणा मानकर , देशवासियों को आपके कर्मों का है गुमान व आपको सलाम ..

देशवासिओं की आपकी आयु के. हर दिन, एक नए दीप से देश के नवजवानों की आयु को , आपके “दीप की लौ” से एक नई रोशनी के मार्गदर्शन का प्रणाम .

देश के शिक्षक तुम्हे सलाम..., देश में जितने राष्ट्रपति बने .. वे राजनीतीज्ञों की कृपा से देश के सर्वोच पद पर बैठे ...और देश के महामहिम पद से निर्वित होकर.., सरकारी सुविधा भोगते हुए , जीवन की लीला समाप्त कर गुमनामी में खो गए...

डॉक्टर अब्दुल कलाम के राष्ट्रपति पद ग्रहण करते समय केवल २ सूट केश राष्ट्रपति भवन में ले गए थे तथा जो  सेवानिर्वित के बाद भी सिर्फ वही  २ सूटकेश अपने घर ले गये. 
याद रहे, पिछली राष्ट्रपति प्रतिभा  तो २० ट्रकों में देश के सम्मान में दी गए उपहार भी अपनी माल-मत्ता समझ कर अपने घर ले गयी थी ..., बाद में बेशर्मी से उन्हें वह पुरूस्कार ९ ट्रक भरें लौटाना पड़ा .., और पेंशन व अन्य सुविधाओं से ऐश कर रही है..

अभी चंद दिन पहिले सेवानिर्वित हुए  राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जो रक्षा व अन्य घोटाले में सम्मलित है... क्या वे अब निर्वित होने के बाद, क्या ...!!!!,  अब्दुल कलाम के जीवन का अनुसरण करेंगे.

एक निर्वादित , बिना राजनेताओ की बैसाखी की याचना से “महामहीम” बने अब्दुल कलाम , अपनी कलम की ताकत व आवाज से, 
सेवानिर्वित जीवन के बाद भी आवाम को जागृत कर रहें थे ... और  देश भर के स्कूल में छोटे-छोटे बच्चों के बीच जाकर .., बच्चों में भी स्फूर्ती आती थी ..., कि क्या बात है ..हमारे पूर्व राष्ट्रपति हमारा उत्साह बढ़ाने के लिए , हमारे साथ घुल मिल कर बात कर रहें है... 
आज भी  कलाम साहब का यह कर्म ..., आने वाले कल के बच्चों को नया हिन्दुस्तान के नवनिर्माण की “शिला” का आधार बना रही है...

सेवानिर्वित के बाद भी अब्दुल कलाम अपने अनुभव..., जूनून .., दृण संकल्प का सन्देश शिक्षक बन कर, गाँव शहर में दे रहें थे ...., इसमें उनकी  देश भक्ति व राष्ट्र सर्वपरी की भावना कूट -कूट कर भरी थी ...,

दोस्तों, याद रहें .. प्रधानमंत्री मनमोहन के कार्यकाल में अब्दुल कलाम को धमकी मिली थी आपके इस दौरे का राजकीय खर्च जो करींब दिन के ४० हजार रूपये है, भारत गरीब देश होने से यह खर्च वहां नहीं कर सकता है.... इसे बंद करो...


जबकि सच्चाई यह है कि , देश के जल-थल- नभ आकाश से कोयला चोर जो अरबों खरबों की लूट के बावजूद, उन्हें  देश की अर्थ व्यवस्था के शिल्पकार के रूप में सम्मानित किया गया है...

Friday, 21 July 2017

बेबाक पोस्ट.., भिंडरावाले जी टाइगर फ़ोर्स ऑफ़ खालिस्तान बनाओ– ज्ञानी जैल सिंह के उदगार, जिसके टेप खुफिया एजेंसी RAW के पास आज भी हैं , जैसे के राष्ट्रपति बनाने के बाद ऑपरेशन ब्लू स्टार से इंदिरा के देश का राजीव के साथ TWIKNKLE STAR से BIG STAR बनाए रखने ३ जून १९८४ का सपना था जो इंदिरा गांधी की ह्त्या से ३१ ओक्टोबर १९८४ को वह ख्वाब टूट गया और इस पर अपनी प्रतिक्रया व्यक्त कर पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसी देसाई ने बेबाकी से कहा “इंदिरा गांधी अपने कर्मों से मारी गई है”


बेबाक पोस्ट.., भिंडरावाले जी टाइगर फ़ोर्स ऑफ़ खालिस्तान बनाओ– ज्ञानी जैल सिंह के उदगार, जिसके टेप खुफिया एजेंसी RAW के पास आज भी  हैं , जैसे के राष्ट्रपति बनाने के बाद ऑपरेशन ब्लू स्टार से इंदिरा के देश का राजीव के साथ TWIKNKLE STAR से BIG STAR बनाए रखने ३ जून १९८४ का सपना था जो इंदिरा गांधी की  ह्त्या से ३१ ओक्टोबर १९८४ को वह   ख्वाब टूट गया और इस पर अपनी प्रतिक्रया व्यक्त कर  पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसी देसाई ने बेबाकी से कहा
“इंदिरा गांधी अपने कर्मों से मारी गई है”

हाँ, इस मौत के बाद TWIKNKLE STAR के इस समूह का दूसरा प्यादा राजीव गांधी , सहानुभूति की जनता की अनुभूति से ४१४ लोकसभा की सीटें जीतकर एक ऐसा BIG STAR बना कि आज तक इस स्टार का रिकॉर्ड मोदी सरकार भी नहीं तोड़ पाई है

प्रतिभा पाटिल जो इंदिरा गाँधी के घर  काम वाली बाई थी, झाडू पोछा से चूल्हा चोखा, करती थी जिसे राजस्थान के पंचायत और वक्फ राज्यमंत्री अमीन खां खुले आम कह दिया देश की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल किसी जमाने में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के घर में रसोई संभालती थीं। इसी वफादारी के नतीजे में सोनिया गांधी ने उन्हें राष्ट्रपति बना दिया।' और तो और , इसके बाद ,एक.. से.. एक..,  इस काम वाली बाई ने राजैतिक संरक्षण से अरबों का महाराष्ट्र में को –ऑप  बैंकों का घोटाला कर , राष्ट्रपति बनने से सेवानिर्वित होने तक राष्ट्रपति के पुरूस्कारों से भरे २० ट्रक पूना शहर में अपने घर व सेना की जमीन पर घर बनाने से बवालों से जुड़ी रही.

 फखरुद्दीन अली अहमद जिसे लोकतंत्र का हत्यारा राष्ट्रपति कहा जाता है..,  जिनकी पृष्ठभूमि में आसाम में २५  लाख से अधिक बंगलादेशी घुसपैठियों को बसाकर कांग्रेस को धमकी और मंत्र की भाषा में कहा कि  मुस्लिम वोट बैंक की जनसंख्या तुष्टीकरण से ही कांग्रेस की सत्ता में भागीदारी बनी रहेगी .., जो कांग्रेस ने सन २०१४ तक इसी नीती से राज किया.

  राष्ट्रपति पद देश के धन की बर्बादी व राज्यसभा, एक चोर दरवाजे से अपने प्रिय व पार्टी के नेताओं की भर्ती से देश की संपदा को लूटने का खेल है,दोनों ख़त्म हों .

यदि राष्ट्रपति रबर स्टैम्प तो नगर पार्षद गुंडा क्यों..!!!,  नगर पार्षद मूल हथकंडा से लोकतंत्र के लूट तंत्र का गोरखधंदा से  गुंडा क्यों...


दोस्तों लिखने को बहुत है.., लोहिया जैसे समाजवादी की औलादें अब बनी जल्लादें.., लूट खसोट का नंगा नाच चल रहाहै.., मोदी सरकार कह रही है हम देश में सब चंगा कर देंगें..!!!.

देस की एक मार्मिक तस्वीर है.., देश के प्रथम व महामहीम व्यक्ति (राष्ट्रपति) के पास ३५० कमरों वाला घर है है जिसमें हजारों नौकर चाकरों की फ़ौज से मौज है..,

वही संक्षेप में ....!!!!, आज से ४० साल पहिले एक शख्स ने पहचाना कि हिन्दुस्तान में राजनेताओं को मुट्ठी में किये बगर देश पर आर्थिक रूप से कब्जा नहीं किया जा सकता है...., वह शख्सहै..., धीरुभाई अम्बानी जिनकी नीती पर चलकर मुकेश अम्बानी ने वक्फ बोर्ड की जमीन हड़पकर अन्तालिया जैसे १० हजार करोड़ के लागत से लोकतंत्र को लानत से गगनचुम्बी इमारत में मात्र परिवार के ४-६ लोगों के परिवार की आतिर खातिर के लिए ४०० से अधिक नौकर .., ऐश कर रहें हैं...

दोस्तों / मित्रों एक बार फिर बेबाकी से..,इस पेज पर , यह चित्र/CARTOON नहीं है..., देश का चलचित्र है..., देश को चुनाव के नाम से चुन – चुन कर भ्रष्टाचार से जनता को घुट – घुट कर धीमें जहर से मारने का खुला खेल है...,

मंत्रालय –मूत्रालय,
सचिवालय – शौचालय,
लोकसभा – लूट सभा ,
राज्य सभा – रिश्वत सभा
से देश में लाखों माल्या विजय बनकर अपने को गौरान्वित कर कह रहें हैं.., हमें भ्रष्टाचार से उकसा कर इस तंत्र को नहीं जनता के टैक्स के पैसे को डकारकर जीने का मंत्र है...,

अब तक  इंग्लैंड में  ५६ से ज्यादा विजय माल्या के रूप में भाजपा , कांग्रेस व अन्य पार्टियों के  सहयोग / सहमती से,  सुरक्षा से छिपे हैं...,CBI ने भी (C)चोर बनाया (B) इंडिया (I)के नाम से देश को कलंकित ही किया है  


 अंत में एक सवाल उठाता है .., वित्त मंत्री से राष्ट्रपति बने प्रणव मुखजी मुखर्जी  जो कांग्रेस के संयुक्त घोटालों में  ऑगस्टा वायु सेना के इटली कोर्ट में मुज्लिम हैं व देश के जल थल पाताल घोटालों के बंदरबांट के भी चहरे हैं .., क्या अब वे का प्रायश्चित करेंगें .., जैसे अब्दुल कलाम जैसे बेदाग़ मूर्ती ने अपना ज्ञान , विज्ञान से विशेष ज्ञान व अपना जीवन बल से छोटे से गांवों में  छोटे-छोटे बच्चों की उंगलियाँ छूकर उन्हें ऊंचे  उड़ान भरने की प्रेरणा दी है

Sunday, 16 July 2017

नीतीश कुमार को तो लालू ने २० माह से अपने भुजा में जकड़ कर रखने की बावजूद अपनी अकड़ पर पकड़ बना रखी है.. अब समय ही बताएगा, क्या..??, नीतीश कुमार इस जकड से मुक्त होने के लिए भा.ज.पा. के गोद में गोंद की तरह चिपक कर रहेंगें...!!!


नीतीश का बयान “मैं” इस जंगलराज में  चंदन.., लालू ने भांप लिया कि अब  सांप बनने के बजाय नाग बनकर सत्ता में रहकर अपने बहुमुखी भ्रष्टाचार की प्रतिभा से चन्दन से लिपटकर अपना जहर फैलाकर .., लकड़ी को सुखाकर.., अपने ९  बच्चों में  गुणा – भाग कर जनता को अपने पुराने नारों “जब तक समोसे में रहेगा आलू .., बिहार में रहेगा आलू..” को जीवंत कर नव पीढ़ी को जीवन भर राज करने का ख्वाब बनाओं...की नीती से नीतीश के राज को पटखनी दे सकता हूँ.

अब बिहार चुनाव में, नरेन्द्र मोदी की हनुमानी सेना के २० महीनों से घायल सेनापति अमित शाह की मिटी छवि को अमिट  बनाने के अपने बदले से,अपने पिंजरे में बंद सरकारी तोते के टोटके से सीबीआई के छापे में LALU & Sons / Daughter Family को जकड़ लिया है..

नीतीश कुमार को तो लालू ने २० माह से अपने भुजा में जकड़ कर रखने की बावजूद अपनी अकड़ पर पकड़ बना रखी है..


अब समय ही बताएगा, क्या..??, नीतीश कुमार इस जकड से मुक्त होने के लिए भा.ज.पा. के गोद में गोंद की तरह चिपक कर रहेंगें...!!!   

Sunday, 9 July 2017

योगी के किसान कर्ज माफी को अन्य प्रदेशों के विरोधियों ने आन्दोलन बनाकर सत्ता पक्ष की कुर्सियाँ हिला दी है .., आनन् फानन में सभी बचे मुख्य मंत्री घोषणायें कर अपने को योगी से महान कहने की होड़ मैं दौड़ रहें हैं ..



मुख्य मंत्री योगी के उत्तर प्रदेश के १११ दिन V/s देश के मुख्य मंत्रियों के बचे खुचे दिन ..
 
देश के सब मुख्यमंत्री योगी से सबक न लेते हुए बचे हुए दिन खुरच-खुरच कर, पक्ष - विपक्ष की राजनीती में उलझे हुए हैं .. 

योगी के किसान कर्ज माफी को अन्य प्रदेशों के विरोधियों ने आन्दोलन बनाकर सत्ता पक्ष की कुर्सियाँ हिला दी है .., आनन् फानन में सभी बचे मुख्य मंत्री घोषणायें कर अपने को योगी से महान कहने की होड़ मैं दौड़ रहें हैं ..

यू.पी में योगी २४ घंटे चौकन्ने .., माफिया के हौसले पस्त.., फिर भी हल्की फुल्की करतूत .., फिलहाल योगी ने माफियाओं की तूती बंद कर दी है..