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Sunday, 1 April 2018

दोस्तों..!!!!!, डूबते देश की कहानी...., वंशवाद और माफियावाद की खाद से, खा गई स्विस बैंक..., हमारी हरियाली का राष्ट्रवाद... के दी बर्बाद हमारे संविधान के बंद कर दिए कान... काले मन वाले बने उजियाले तन... लुच्चे टुच्चे , उच्चके बने संविधान की शान वोट बैंक की दीक्षा की महिमा से जाते-जाते अपने कर्मों से.. जनता के ताबूत हर गल्ली मुह्ह्ल्ले में पुतले बनाकर... अब निकले साबूत


हम हो रहे, बर्बाद हर दिन..., धार्मिक नहीं धर्म को ही तलवार से हलाक कर रहें हैं .., देशवासियों आप और हम ५ साल के रोते हुए चेहरें हैं , लोकतंत्र के मोहरें हो.., डूबते देश की यह मुहर है..,


सोनार बंगाल में बांग्लादेशी लोहारों (घुसपैठियों ) के प्रहार से. व जातिवाद के बिहार के बहार में धर्मवाद के तलवार से देश की दशा व दिशा बिगड़ रही है. देश को तोड़कर चुनावी साजिश से देश वासियों में रंजिश फैलाकर व जनता के सर फुटव्वल से बाजी जीतने के नेताओं की होड़ है..,


इसी धर्मवाद की लड़ाइयों में घुसपैठियों व आतंकवादियों के लिए यह सुगम वादी के साथ-साथ धन, धनाधन से देश के माफियाओं का विदेश में धन भेजने व पलायन से देश का क़ानून ७० सालों से हाथ मलता रहा है..
A राजा से L मोदी – N मोदी व Z – जेड ,झटपट माफिया मीडिया भी इस खेल को खेलने व दिखाने की आड़ में, देश की Z श्रेणी की क़ानून व व्यवस्था का संविधान को धत्ता दिखाते. देश का माल उड़ा ले गए..,




January 9, 2016 • फेस बुक व वेब स्थल की पुरानी पोस्ट
हम हो रहे,,बर्बाद हर दिन..., गुरुदासपुर व पठानकोट के आतंकवादी हमलों से हम अब भी नहीं चेते..,पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे अब्दुल कलाम तो देश के मदिर में हुडदंग व गुरूदासपुर हमले से आहत होकर इस देश को अलविदा कह गए..., आज की ताजा घटनाओं से तो कब्र में उनकी माटी भी उनके आंसू लबालब होकर गीली हो गई है


देशवासियों तुम, हम तो ५ साल के लिए देश के रोते हुए चेहरें है...इनके मोहरें हैं ..., राष्ट्रवाद पर वोटबैंकवाद हावी है..., सत्ता का इनका भविष्य भावी है....
पहले मालदा में वोट बैंक का माल अदा होगा और अब पूर्णिया में इस खेल की पुरिया से सत्ताखोरों की टन और बढ़ते जायेगी ...


आजम खान के उतारू प्रदेश के बयान से कि वाले R.S.S. वाले शादी नहीं करतें हैं .., क्योकि वे सम लैंगिक हैं, की कि प्रतिक्रया के बयान से देश बर्बाद होकर माफिया-सत्ता खोरों के वोट बैंक के गठबंधन से देश की गांठ बनकर देश को बांध कर आतंकवादियों के सुगम रास्ता देकर.. देश को १९४७ के तुष्टीकरण से घुसपैठियों से आगे और खंडित करने का नया खेल खेला जा रहा है...


हर चुनाव में जनता को चुन-चुन कर मारा जा जा रहा है , हर धर्म के वासी का जीवन तो १९४७ के पहले से भी बदतर होते जा रहा है...,


वोट बैंक से...., धर्मगुरूओं के सत्ताखोरों की मिलीभगत से महलों से फतवा, आदेश जारी होता है... और गरीबों की झोपडिया जलती है...


१९४७ के सत्ता परिवर्तन की इतिहास देखे तो , हर चुनाव वंशवाद के दंशवाद में जातिवाद,भाषावाद,धर्मवाद ,अलगाव वाद का घोल मिला कर , घुसपैठीयों के चांदी के वर्क से सजाकर..., सत्ताखोर मिठाईया खा रहें है...


जजशाही,नौकरशाही,माफियाशाही सत्ताशाही के मजबूत जंजीरों के जोड़ से से आम आदमी जकड़ा हुआ है,,,


हम हो रहे बरबाद , हर दिन हर अफीम वाले नारों के साथ. नेताओ का जनता के नाम आधुनिक नारा-लडों और कहों, मेरा धर्म तुम्हारे धर्म से बडा और वोट बैंक हमारा...


May 10, 2014 फेस बुक व वेब स्थल की पुरानी पोस्ट
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दोस्तों..!!!!!, डूबते देश की कहानी...., वंशवाद और माफियावाद की खाद से, खा गई स्विस बैंक..., हमारी हरियाली का राष्ट्रवाद... के दी बर्बाद
हमारे संविधान के बंद कर दिए कान...
काले मन वाले बने उजियाले तन...
लुच्चे टुच्चे , उच्चके बने संविधान की शान
वोट बैंक की दीक्षा की महिमा से
जाते-जाते अपने कर्मों से.. जनता के ताबूत
हर गल्ली मुह्ह्ल्ले में पुतले बनाकर... अब निकले साबूत


गरीबी हटाओं , आराम हराम है, मेरा भारत महान
माफियाओं के मन की मुस्कान बनी भारत निर्माणसे बनी एक नयी जान
जनता लहूलुहान
योजनाओं को भोजनाएं बनाकर कर रहें बखान
आ कर दंश देने वाले आदर्श नेताओंकी अब बन गई गर्व की पहचान”....


सीमा पर दुश्मन घात लगाये बैठे है... और हरामखोर, सत्ताखोरों ने , सीमाओं को खुला छोड़कर ,जवानों के हाथ बांधकर , जवानों के सर कटाकर देश की अस्मिता को ताक पर रखकर, अब दलाली के इस खेल से, इतने मुस्टंडे हो गए है कि ... भ्रष्टाचारियों के कल्याण को...भारत निर्माण के नारों से देशवासियों को भरमा रहें है....
हे हरामखोर, सत्ताखोरों, तुमने तो, जवानों के आंसू से ही देश को डूबा दिया है....,क्या अभी भी शर्म बाकी है ..???


इटली के अदालत में पत्र पेश, सोनिया के करीबियों का खेल.., अब सी.बी.आई करेगी पत्र की जांच ...बोफोर्स के ६० करोड़ के घोटाले में ४०० करोड खर्च कर क्वात्रोची ..बना...??????.


Question-Expert-Tea, से सी.बी.आई. को चाय पानी पीला कर, अब कर रहा है कब्र में मौज , अब मिलेगा सी.बी.आई को नया मनी मून पैकेज , इसे कहते है, VVIP.... Very Variety Intelligent Politics,
चैन से जीना है तो ...जाग जाओ देश्वासियो..???
घुट-घुट के जीना है तो, समस्यायें देखकर आँखे बन्द कर लो यारों..???


दोस्तों जागो... मार्मिक स्तिथी है...डूबते देश को बचाओ,,, अब पानी सर से ऊपर जा रहा है... आओ प्रतिज्ञा करे देश के जवानों व किसानो की माटी बिकने नहीं देंगे... देश में किसी भी घुसपैठीये को वोट बैंक नहीं बनने देंगें


मैंने एक नया ग्रुप बनाया है - .....
धरती लुटी, जल लुटा, पाताल लुटा, और लुटा आकाश.... अब और मत बनाओ, आम हिन्दुस्थानियों को जिंदा लाश.....


बाबूजी यहाँ सब कुछ बिकता है, लेकिन लूट मे तो हर माल मुफ्त मिलता है ...
अब आम आदमीयों पर लगाओ, टैक्स , और भोगों सत्ता का सेक्स ( लूट और शोषण से अय्याशी का जलवा)


जागो देशवासियों हम राष्ट्रवाद की धारा मे आकर.., डूबते देश को बचायें ॥ सीमा पार दुश्मन भी चाह रहे है हम आपसी लड़ाई से कमजोर हो जाये ताकि हमे सफलता आसानी से प्राप्त हो...


Friday, 23 March 2018

कहते है, राख तले चिंगारी ही आग का बीज होती है , जो बुझी आग को प्रज्ज्वलित कर सकती है..., ऐसे ही देश के विभिन्न छेत्रों की करोड़ों प्रतिभाए दम घुट कर मर रही हैं.., और जुगाड़ पद्धती स अपना जीवन यापन कर रही है.., विदेशी भी इनकी प्रतिभाओं से अचंभित होकर, इनकी जुगाड़ पद्धती को अपना पेटेंट बना रही है.., यदि इन करोड़ों प्रतिभाओं को सम्मान दिया जाए तो ये, ही.., देश में बुझे राष्ट्रवाद को ज्वलंतशील बना सकती है..,


१ .भगत सिंग के भक्त द्वारा .., यह कलाकृती.., मुम्बई के फूटपाथ के, गरीबी रेखा के झोपड़े में रहने वाले युवक की है.., जो गरीबी की वजह से स्कूल छोड़ देते है.., लेकिन जीवन में उनमें,जज्बे से हुन्नर अपने आप निर्माण होता है.., फुटपाथ ही उसकी जीवन के सृजन की कलाकृति व जीने का आनंद है.., कभी रंग बिरंगे चोक / चाँक से तो कभी , रंगोली के पावडर पर अपनी कलाकृति १ से डेढ़ घंटे में बना कर , राह चलते राहगीर, इस युवक को १ से २ रूपये का सिक्का देकर,  वह युवक अपनी जीवन याचिका का निर्वाह करता है...

२ .बरसात के मौसम में तो इसकी मेहनत चंद घंटों में ही धुल जाती है.. , तब भी अपनी मेहनत धुलने का अफ़सोस नहीं करते हैं..., वह मौसम देखकर फिर से नये विषयों पर एक नयी कलाकृति का निर्माण करता है 

३. .देश के प्रधानमंत्री से छुटमैय्य नेताओं ने, २३ मार्च को, ८७  साल बाद, जोर शोर से इन तीनों बलिदानियों की पूण्य तिथी मनाई, लेकिन इस युवक ने अपने जीवन के सजीव रंगों में इस कलाकृति में ऐसी जान फूंखी है.., जैसे लगता है कि ये क्रांतीकारी इसके दिल में बसा है...,जैसे यह कलाकृति सजीव होकर अभी बोल उठेगी..

४. कहते है, राख तले चिंगारी ही आग का बीज होती है , जो बुझी आग को प्रज्ज्वलित कर सकती है..., ऐसे ही देश के विभिन्न छेत्रों की करोड़ों प्रतिभाए दम घुट कर मर रही हैं.., और जुगाड़ पद्धती स अपना जीवन यापन कर रही है.., विदेशी भी इनकी प्रतिभाओं से अचंभित होकर, इनकी जुगाड़ पद्धती को अपना पेटेंट बना रही है.., यदि इन करोड़ों प्रतिभाओं को सम्मान दिया जाए तो ये, ही.., देश में बुझे राष्ट्रवाद को ज्वलंतशील बना सकती है..


५. ७१  सालों से गरीबी उत्थान के लिए लाखों योजनाए बन चुकी हैं..., जो माफियाओं की भोजनाएं बनकर इनके हक़ की कमाई, देशी विदेशी बैंकों व आलीशान भवनों के निर्माण से कैद है..., दोस्तों ७१ सालों  के सत्तापरिवर्तन की यह मार्मिल तस्वीर है..

७. 
७१  सालों से ही.., गरीबों के देशी हाथों की शक्ती को काटकर / छीनकर .., विदेशी हाथों से, भारत निर्माण से अच्छे दिनों का देशवासी इन्तजार कर रहें है... 

अगर सरदार भगत सिह को तुम कब्र से उठाओं तो तुम उसे दुखी पाओगे, क्योंकि जिस आजादी के लिए बेचारे ने जान गवाई , वह आजादी दो कौड़ी की साबित हुई , तुम शहीदों को उठाओं कब्रों से और “पूछों”. क्या इसी आजादी के लिए तुम मरे थे , इतने प्रसन्न हुए थे ...??, इन राजनीतिज्ञों के हाथ में ताकत देने के लिए तुमने कुरबानी दी थी ..?????, तो भगत सिह छाती पीट-पीट कर रोयेगा कि हमें क्या पता था , जिंदगी का..., गांधी तो ज़िंदा थे – आजादी आई और आजादी आने के बाद गांधी छाती पीटने लगे थे , गांधी बार-बार कहते थे मेरी कोई सुनता नहीं , मैं खोटा सिक्का हो गया हूँ , मेरा कोई चलन नही है गांधी दुखी है, गांधी सोचते थे : एक सौ पच्चीस साल जीऊंगा , लेकिन आजादी के नौ महीने बाद उन्होंने कहा अब मेरी एक सौ पच्चीस साल जीने की कोइ इच्छा नहीं है , यह बड़ी हैरानी की बात है , शहीदों की चिताओं पर भले मेले भर रहे हों , लेकिन शहीदों के चिताओं के भीतर आंसू बह रहें हैं.


बोलू: अरे देखू.., आज, तू क्या देख रहा है,, {Repost मार्च २३, २०१५}   ( https://www.facebook.com/BapuKeTinaBandaraAbaBanaGayeHaiMastaKalandara/ )

देखू : आज देश के नेता तीन शहीदों का बलिदान दिवस... ८४ सालों के बाद जोर शोर से मना रहें है,,

बोलू: लेकिन इन्हें तो आज तक देश के क्रान्तीकरियों को शहीद का दर्जा नहीं मिला.., इनके घर तो जर्जर अवस्था में हैं..और आज के सत्ताखोरों के स्वतंत्रता सेनानी के तमगे से इन क्रांतीकारियों की जमीनें हड़प कर उनका अस्तित्व समाप्त कर रहें हैं..

सूनू: हाँ आज की वर्तमान सरकारें भी इनकी ह्त्या के रहस्य की फाईलों को गुप्त रख, कह रहीं है..जनता को राज बताने पर विदेशी ताकतों से हमारे सम्बन्ध खराब होने से विदेशी सहायता न मिलने से देश की अर्थ व्यवस्था.., चौपट हो जायेगी 

बोलू: हाँ..., यही ६८ सालों से सभी सरकारों की व्यथा है.. 

देखू: हाँ, मैं देख रहा हूँ, जहां खुदीराम बोस का मुजफ्‌फरपुर के बर्निंगघाट पर अंतिम संस्कार किया गया था लेकिन उस स्थल पर शौचालय बना दिया गया है. इसी तरह किंग्सफोर्ड को जिस स्थल पर बम मारा गया था उस स्थल पर मुर्गा काटने और बेचने का धंधा हो रहा है.

बोलू :यह शहीदों के प्रति घोर अपमान और अपराध है? देश के स्वाभिमान का घोर अपमान है...

अगर सरदार भगत सिह को तुम कब्र से उठाओं तो तुम उसे दुखी पाओगे, क्योंकि जिस आजादी के लिए बेचारे ने जान गवाई , वह आजादी दो कौड़ी की साबित हुई , तुम शहीदों को उठाओं कब्रों से और पूछों”. क्या इसी आजादी के लिए तुम मरे थे , इतने प्रसन्न हुए थे ...??, इन राजनीतिज्ञों के हाथ में ताकत देने के लिए तुमने कुरबानी दी थी ..?????, तो भगत सिह छाती पीट-पीट कर रोयेगा कि हमें क्या पता था , जिंदगी का..., गांधी तो ज़िंदा थे आजादी आई और आजादी आने के बाद गांधी छाती पीटने लगे थे , गांधी बार-बार कहते थे मेरी कोई सुनता नहीं , मैं खोटा सिक्का हो गया हूँ , मेरा कोई चलन नही है गांधी दुखी है, गांधी सोचते थे : एक सौ पच्चीस साल जीऊंगा , लेकिन आजादी के नौ महीने बाद उन्होंने कहा अब मेरी एक सौ पच्चीस साल जीने की कोइ इच्छा नहीं है , यह बड़ी हैरानी की बात है , शहीदों की चिताओं पर भले मेले भर रहे हों , लेकिन शहीदों के चिताओं के भीतर आंसू बह रहें हैं.

सूनू: बात तूने पते की कही है,,,, जनता भी यही कह रही है,,,

बोलू: देश के शहीदो के अपमान से बने , गाँधी के नाम से, नेता, अपनी नंगई से बनें बेईमान, सत्ता को सट्टा के नाम से देश को भ्रष्टाचार से खोखला कर दिया, आज भी हमारे क्रंतिकारी शहीद भगतसिग, सुभाषचन्द्र बोस , चन्द्रशेखर से वीर सावरकर को भी देश्द्रोहीयों की काली सूची मे है...आज शहीदो के चिताओ पर राजनेता अपनी भ्रष्टाचार की, रोटी सेंककर, अपने को शहीदों से महान बनाने की हौड मे है.. देश का शहद चाटकर , आज देश के गली , मुहल्ले ,नगर , शहर, शिक्षा व अन्य संस्थानों पर ऐसे करोड़ों नाम हैं...,जिसे अपने नाम कर लिए है...??

देखू: हाँ.., ३० साल बाद, नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इस स्वाभिमान को जगाने, उनके स्मारक में जाकर जोशीला भाषण मैंने सूना 

देखू: हाँ , सवेरे से प्रधानमंत्री की दौड़ में होड़ लगाने के लिए, सभी पार्टियों के छुटभैये नेता श्रेय ले रहे थे..., जैसे हममें ही.. सरदार भगत सिंग का ही खून दौड़ रहा है..., और तो और श्रदांजली देते समय अन्ना हजारे के आंसू छलक गए थे..

बोलू: लेकिन अन्ना हजारे तो गांधी वादी नेता है...., और गांधी ने तो अहिसा के भ्रामक प्रचार से देश के लोगों को गुलाम मानकर, जलियांवाला बाग़ के भीषण हत्याकांड निर्दोष लोगों की ह्त्या के प्रतिकार न करने से ही, जबकि लाला लाजपत राय की इस प्रतिरोध में मौत होने से..., क्रांतीकारियों में इस शासन को उखाड़ फेंकने का जूनून पैदा हो गया, 

सूनू: हाँ गांधीजी को तो अंग्रेजों से जलपान मिल रहा था.., इसलिए जलियांवाला बाग़ के भीषण हत्याकांड का विरोध नहीं किया था.., उन्होंने तो इन क्रांतीकारियों के कार्य की निंदा कर, अंग्रेजों को एक नया शक्तिबल देकर देशवासियों का दमन करने का पुख्ता इंतजाम कर दिया था,

बोलू: हां.., वे तो.., अंग्रेजों के सेफ्टी वाल के लिए अंग्रेजों के सुरक्षा कवच बने.., जब भी क्रांतीकारियों का आन्दोलन, ज्वलंत होने लगता था.., तब गांधीजी से अहिंसा की बारिश करवाकर.., उनके मंसूबों पर पानी फेर देते थे,

देखू: हाँ.., अब तो मैं देख रहा हूं ..., सेना की जमीन भी हड़प कर, सत्ता की बंदरबांट से आदर्श महलों व घोटालों के मकडजाल से जनता इसमें फंस कर ६८ सालों से उसका खून चूसा जा रहा है.., हमारी गांधी के स्वराज के पुतले की स्वराजका ढिंढोरा पीटकर, विदेशी हाथ, विदेशी, विदेशी साथ विदेशी संस्कार से देश में बेतहासा लूट पर छूट मिल रही है..

बोलू: देश के क्रांतीकारी तो खाते पीते घर के थे, उन्हें सत्ता का लोभ नहीं.., भारतमाता की गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराना था.., और इसे राष्ट्रीय धर्म मानकर देश के लिए कुर्बानी से देश के उज्जवल भविष्य की कामना की अपेक्षाओं को, ६८ सालों से सत्ताखोरों ने देश को विदेशी कर्ज से देश को डुबो दिया है...

सूनू: अभी नेता तो भगत सिंग व अन्य क्रांतीकारियों से अपनी सत्ता की पुरी तल कर, जनता में जोश भरने का खेल, खेल रहे हैं..
देखू : देश की हालत देखकर मैं तो गंभीर हो गया हूँ, मेरे रोये खड़े हो गए हैं.., अब देश का क्या होगा .

बोलू: देश गर्त में जाएगा, जब तक देशवासी में.., यह सोच रहेगी कि.., भगत सिंग मेरे पडोस में पैदा हो..., यदि देशवासी.., “सोच बदले तो देश बदलेगा...,” “राष्ट्रवाद.., राष्ट्रवाद..., राष्ट्रवाद..,” सावरकर, सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद व अनन्य क्रांतीकारी जैसों से ...
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'१८५७ का स्वतंत्रता संग्राम' यह वीर सावरकर की पुस्तक मेरे द्वारा छपाई से, पढ़कर.. देश को राष्ट्रवाद से स्फूर्तीमान बनाये..
भगतसिंगजी.., देश को, आजाद करने के गुर बताता हूं ..
आजाद हिन्द फ़ौजकी यह, “भावी रणनीती अपनाओ..
चंद्रशेखरजी.., देश के चाँद को, शिखर पर पहुँचाकर.. चांदनी रोशनी फैलाकर, देश को आजादी से दिव्यमान बनाओं .. 


www.meradeshdoooba.com (a mirror of india) स्थापना २६ दिसम्बर २०११. कृपया वेबसाइट की ६८७  प्रवाष्ठियों की यात्रा करें व E MAIL द्वारा नई पोस्ट के लिए SUBSCRIBE करें - भ्रष्टाचारीयों के महाकुंभ की महान डायरी


पंगा लेने की पुरानी आदतों से कचरावाल अपंग बनकर, अब विरोधियों पर अपमान से “थूक –कर” अब चाटकर कह रहा है , यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी “चूक “ ., मेरे कार्यकता इस करतूत से गये मेरे से “छूट”..



अन्ना आन्दोलन (२०११) की पैदाइश.., केजरीवाल अपने को ही कह रहा है.., अन्ना का बाप.., अब २०१८ के २३मार्च से आ-मरण अनशन में लोकपाल बिल पर नयी घोषणा अब इस आन्दोलन में केजरीवाल जैसे कचरावाल की पैदाइश  नहीं होगी.., न ही केजरीवाल जैसे कचरावाल को इस आन्दोलन में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी.

अन्ना की इस लोकपाल की मांग व किसानों की डिमांड के सिले-सिले में कचारावाल द्वारा लोकपाल के नाम से फाडे  कपड़ों ..... , को सिलने, अब आमरण  की हुंकार के नाम पर रामलीला मैदान में २०११ की लाखों  की भीड़ की तुलना में अबकी बार सिर्फ ५ हजार की मुट्ठी भर भीड़..

अब  तक, अन्ना का  प्रधानमंत्री को २२ पत्र..., प्रधानमंत्री के २३  वें पत्र में लोकपाल बिल पर विपक्ष को चर्चा पर बुलाने से सभी दल हक्का बक्का..,  

अन्ना का गन्ना चूसकर अब बिल्ली वाल .., गिरगिट वाल को भी मात देकर कह रहा है..., अपने को दिल्ली का बाप
अब इस गन्ने के रस की ऊर्जा मात्र ३३  महीने में गिरगिटी वाल की भूमिका से प्रधानमंत्री पद की आकांक्षा से गंवा दी है.., अब जनता में अपनी प्रतिभा संतरी की भी नहीं रह गई ..,
पंगा लेने की पुरानी आदतों से  कचरावाल अपंग बनकर, अब विरोधियों पर अपमान से “थूक –कर”  अब चाटकर कह रहा है , यह मेरे  जीवन की सबसे बड़ी  “चूक “ .,  मेरे कार्यकता इस करतूत से  गये  मेरे  से “छूट”..

योगेन्द्र यादव, शशी भूषण से पार्टी संयोजकों को सत्ता के दूध से मक्खी की तरह से निकालने का दंभ का दम निकल गया है
सेना के SURGICAL STRIKE के संशय से प्रमाण मांगने वाले अब सरजी के सर पर राजौरी गर्दन गार्डन से MCD चुनाव से ऐसा STRIKE हुआ है कि अब अक्कल ठिकाने आकर अपनी अवकाद दिखा दिला दी है .., क्या अब भी अपना बडबड़ीवाल से, जनता के थपेड़े से.., अब अपने लाल गाल सहलाते रहेंगें ...!!

२७ महीने में फर्जी कानूनी डिग्री वाले मंत्री .., खटिया में महिलाओं का कामासन से राशन कार्ड का काम करवा कर, पार्टी का नाम रोशन .., महिला मार्शल से CCTV की सौगात दिलवाने के झांसे की पोल खुल गई है..., दिल्ली से लूट की तसल्ली अब भी पूरी नहीं हुई है.

राजोरी – “राज जारीगार्डन के सीना जोरी से, भ्रष्टाचार के खाद से दिल्ली की सत्ता से केजरीवाल के गर्दन से गार्डन के फूल पहिले ही सूख गए थे ...,

अब केजरीवाल के साथी सही पकड़े हैंसे MCD- Maha Corruption Development के अपने महा करप्शन डेवलपमेंट से. MCD चुनाव ने उनको अपनी अवकाद दिखा दी है.., शिंगलू कमिटी के खुलासे के बावजूद जली रस्सी का दम दिखाकर अब EVM मशीन को धोखेबाज कहकर, प्रधानमंत्री को दुर्योधन व चुनाव आयोग को धृतराष्ट कहकर.., अब गिरगिटवाल ने इस चुनावी मोर्चे के परिणाम के बाद अपने आँखों के साथ मुंह पर भी पट्टी गिरगिटवाल बाँध ली है...

चुनाव परिणाम के बाद अन्ना के लताड़ से गिरगिटवाल ने तो अपने कानों को भी पट्टी से बंद कर दिया है

अब अपने ६६ सीटों की गरिमा को लुटाकर ..,आप , बाप , खाप पार्टी से भ्रष्टाचार को पचाकर MCD चुनाव जीतने में का सपना चकानाचूर हो गया है ..., क्या वे अब भी शर्म हया त्याग कर सत्ता के मोती चूर के लड्डू खाते रहेंगें.., 
अन्ना के आँखों में दर्द के आंसू .., फिर भी कचरा वाल अपने को कह रहें हैं धांसू ..,

कुमार विश्वास की हुंकार अब आप , बाप , खाप पार्टी से जनता में अविश्वास की लहर.., अब और मत करों, जनता की गाढ़ी कमाई को डकार ..., अब झूठे फ़साने की खांसी से फंसी है पार्टी मझधार, MCD चुनाव से अब हो गया पार्टी का बंटाधार.


विधान सभा के ६६  सीटों की जीत से, इंद्र-सभा का सिर्फ मेरा योग.., अब तुम्हारी शांती व याद को भंग से, भरूं अपने जीवन में रंग 
हाय..,शिंगलू कमेटी ने.., बहा दिया, मेरा बचा खुचा, विधान सभा से MCD के खाचे वाला जीवन..

Wednesday, 21 March 2018

शाकाहार कोई शक नही । उत्तम रोग मुक्त पोष्टिक भोजन से शरीर ही नही विचार भी ह्रष्टपुष्ट रहता है.., पहलवान संजय सिंह को गोल्डन बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा 3 श्रेणियों में सर्टिफिकेट..., उत्तर - दक्षिण, पूरब – पश्चिम.., विश्व के कोने – कोने के सरपट्टा में २६८२ V/s संजय सिंग के ४२९५ प्रतुत्तर के कीर्तीमान से देश सिरमौर.., और दुनिया को जता दिया की गौ माता के सत्कार से ही इस भारत मात्रभूमि का चमत्कार ही एकमेव मूल मंत्र.., हिदुत्व की जननी से बहुमुखी गुणों की खान से सनातन धर्म की जान .. गाय इस ब्रम्हांड की २४ घंटों की प्राण वायु उत्सर्जन से बहुजन समाज की रख रखाव की प्राण है..., दोस्तों डूबते देश को ही नहीं ..., इस डूबते विश्व को बचाना है.., तो गाय को बचाना है.., गाय मानव का भोजन नहीं.., गाय का गुणों प्रयोजन से रूबरू होकर .., विश्व शांती से विश्व गुरू का सन्देश देना ही होगा .., https://www.facebook.com/jaygoumata/?hc_ref=ARR4hhyPpkYjOhI8rqMnmkbyj35iSfRF5q3zQBeFOXf066KiTkvp7QT2XDzG1WL1xHY&hc_location=group

शाकाहार कोई शक नही । उत्तम रोग मुक्त पोष्टिक भोजन से शरीर ही नही विचार भी ह्रष्टपुष्ट रहता है..,
पहलवान संजय सिंह को गोल्डन बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा 3 श्रेणियों में सर्टिफिकेट प्रदान करते #Golden_Book_of_World_Records के अधिकारी..
1 #World_Record 1 घंटे में गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर #Carlton_Williams के 2682 के रिकॉर्ड को तोड़कर नया कीर्तिमान 4295 का नया रिकॉर्ड।
2 #World_Record सबसे तेजी से नया विश्व रिकॉर्ड 2 घंटे 50 मिनट में 10101

3 #World_Record भारतीय सरपट्टा #push_up 1 घण्टे में 1200

4 #World_Record भारतीय सरपट्टा बिना रुके 1 घंटे 16 मिनट में 1501

5.     https://www.facebook.com/jaygoumata/?hc_ref=ARR4hhyPpkYjOhI8rqMnmkbyj35iSfRF5q3zQBeFOXf066KiTkvp7QT2XDzG1WL1xHY&hc_location=group


उत्तर - दक्षिण, पूरब – पश्चिम..,   विश्व के कोने – कोने  के सरपट्टा में २६८२ V/s  संजय सिंग के ४२९५  प्रतुत्तर के  कीर्तीमान से देश सिरमौर.., और दुनिया को जता दिया की गौ माता के सत्कार से  ही इस भारत मात्रभूमि का चमत्कार ही एकमेव मूल मंत्र.., हिदुत्व की जननी से बहुमुखी गुणों की खान से सनातन धर्म की जान ..

गाय इस ब्रम्हांड की २४ घंटों की प्राण वायु उत्सर्जन से बहुजन समाज की रख रखाव की प्राण है...,  
दोस्तों डूबते देश को ही नहीं ..., इस डूबते विश्व को बचाना है.., तो गाय को बचाना है.., गाय मानव का भोजन नहीं.., गाय का गुणों प्रयोजन से रूबरू होकर .., विश्व शांती से विश्व गुरू का सन्देश देना ही होगा .., 


देश रहेगा आभारी..,  जब हर धर्म का नागरिक +ve गौ सेवा से रक्षण कर रहेगा तत्पर.., देश रहेगा विश्व  में सबसे उप्पर.., देश को धन, सुख - शांती मिलेगी छप्पर फाड़ कर...

Sunday, 11 March 2018

दावोस में नरेन्द्र मोदी के साथ अधिकृत चित्र खीचाकर , नए साल में देश का माल खीचकर यह बता दिया कि देश का चौकीदार तो मेरे लिए दिलदार है व मैं माफियाओं में १९-२० नहीं.., पूरा ४२० हूँ, अब मझे पकड़ने के लिए.., ख्वाब नहीं देश में खाख ढूँढ़ते रहों.., , अब बैंक के अधिकारियों का “अधिकार” छीनकर.., धन के बोरे का धन खीचकर,बैंक के कर्मचारियों से अधिकारियों को भूसा /भूषा खिलाकर.., देश की वित्तीय वेश भूषा के कपड़े लेकर ..,देश की गरीबी में चार चाँद लगाकर.., बता दिया की कैसे सरकारी तंत्र को कौड़िया देकर, देश को खरीदकर लूटा जा सकता है.., देशवासी भी सकते है.., की/कि देश का SYSTEM., इतने सस्ते में कैसे सड़ कर बिक गया...!!!!



माल्या माल ले गया, किसान जान दे गया..,
(मुंबई में १२ मार्च २०१८ को ४० हजार किसानों का महाराष्ट के विधान सभा में धावा .., भ्रष्टाचार के दावानल को समाप्त करने का संकल्प का अब बना एक प्रकल्प)
नीरव मोदी तो कांच को हीरा कहकर देश को बेचकर चंपत से देश को चपत.., दावोस में नरेन्द्र मोदी के साथ अधिकृत चित्र खीचाकर , नए साल में देश का माल खीचकर यह बता दिया कि देश का चौकीदार तो मेरे लिए दिलदार है व मैं माफियाओं में १९-२० नहीं.., पूरा ४२० हूँ, अब मझे पकड़ने के लिए.., ख्वाब नहीं देश में खाख ढूँढ़ते रहों..,
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अब बैंक के अधिकारियों का अधिकारछीनकर.., धन के बोरे का धन खीचकर,बैंक के कर्मचारियों से अधिकारियों को भूसा /भूषा खिलाकर.., देश की वित्तीय वेश भूषा के कपड़े लेकर ..,देश की गरीबी में चार चाँद लगाकर.., बता दिया की कैसे सरकारी तंत्र को कौड़िया देकर, देश को खरीदकर लूटा जा सकता है.., देशवासी भी सकते है.., की/कि देश का SYSTEM., इतने सस्ते में कैसे सड़ कर बिक गया...!!!!
दाल से माफिया खा गए किसानों का माल.., बनें देश के लाल.., गाल हो गए है लाल .., देशवासी बदहाल..,
दोस्तों..
१. किसान कैसा इंसान, हैवान.., शोषण का विधान , कहते हैं ८४ लाख योनी के बाद मानव जन्म मिलता है.., देश का कलंक है कि इस देश में धरती पुत्र व देश के अन्नदाता के रूप में जन्म लेने वाला सत्ता परिवर्तन से आजादी का झांसा देकर .., ७० सालों से किसान आत्महत्या कर रहा है .
फेस बुक व वेबस्थल की पुरानी पोस्ट - June 15, 2016
जरूर पढ़ें.., जरूर पढ़ें.., मुझे गर्व होगा 100 रूपया किलो टमाटर खाने मे .. यदि किसानो को इसमे 80 रूपये मिले.
१ ,  अच्छे दिनों का शतक ..,जनता सकते में ..., महंगाई की पिच पर सरकार के नो बाल (कोई करवाई ने करने से) माफियाओं के टमाटर का २० रूपये से १०० रूपये का ताबडतोब शतक..., माफियाओं के गाल हो गए है लाल.., अब माफिया, जनता के पसीने के तालब में मेढक बनकर, बुलंद आवाज से कर रहें हैं .., टर्र टर्र ...

२. कोल्ड स्टोरेज न होने से किसान का जीवन ठंडा.., हर फसल उसके जीवन में दंड के डंडे से घायल है..., माफिया कोल्ड स्टोरेज से एक नई ज्वाला से देशवासियों के जीवन को जला रहा है ...

३. राज्य व केंद्र सरकारों का एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप से माफिया किसानों के हर फसल से भ्रष्टाचार से प्रत्यारोप से जीं में बहार,,, अब तो करे ललकार..., रोक सके तो रोको...

४. प्रधानमंत्री मोदी ने भी सही कहा है कि इस देश में जन्म लेने वाला .., गरीबी के पश्चाताप को श्राप मानकर अपनी जिन्दगी गुजार देता है..,

५. देश की भयावह स्तिथी , अभी UNO की रिपोर्ट आयी है..., ताजा आंकड़ों से आज भी मेरा देश, इसमें नंबर १ से शीर्ष तालिका में है , यह राष्ट्र का कलंक है कि १९४७ में सत्ता परिवर्तन के समय.., हमारे देश को कृषी प्रधान देश कहा जाता था.., 90% लोग कृषी छेत्र से जुड़े थे .., देश की अर्थ व्यवस्था में ६६% हिस्सा कृषी व्यवसाय से था .

६. देश के आराम से हरामी बनकर, विदेशी भाषा हाथ, साथ विचार के अय्याशों ने किसानों का हल छीनकर, पशुओं के क़त्ल खाने खोलकर..., पशुधन के काटकर विदेशी मुद्रा कमाने का खेल से किसानों के हाथ काटकर, अमेरिका से सूअरों के न खाने वाले गेंहू को देशवासियों को खिलाते रहे.. पंजाब के किसानों की विशाल शक्ती से अब गेहूं की vishal विशाल पैदावार के बावजूद.., उचित मूल्य न मिलने पर.., अब लाचार...

७. १९४७ में देश 30 करोड़ की आबादी में 120 करोड़ का पशुधन था .., देशवासी ताजे दूध की नदियों से ऋष्ट पुष्ट था ...एक नए आजादी के भ्रम से राष्ट्रवादी जज्बे से एक नए सवेरे का इन्तजार कर रहा था , लेकिन राजनीती से जनता को अशिक्षित रख .., चुनावी अफीमी नारों से सुलाते रहे...
दोस्तों.., डूबते देश की कहानी है.., मेरा देश सो रहा है,,, गरीब भूख से रो रहा है..,
वेबस्थल व फेस बुक की २०१३ की .. की मुन्ना मोहन की कांग्रेस सरकार के दरम्यान कि पुरानी पोस्ट

जरूर पढ़ें.., मुझे गर्व होगा 100 रूपया किलो टमाटर खाने मे .. यदि किसानो को इसमे 80 रूपये मिले... किसान रूपये मे कमाता है.. बिचौलिया... बीच का तैलिया (माफिया) उसे डाँलर मे बेचता है... किसान धरती का पूजक , प्रकृति का संरक्षक, मिट्टी से फसल की भनक व वतन की खुशबू, देशवासियों को निवाला खिलाने वाला,,देश का अन्नदाता किसान भगवान् है..., जब, हम दिन मे तीन बार भोजन ग्रहण करते है...तब हमे किसानो की याद नही आती है.... जब देश का भगवान मेहननत करने के बावजूद आत्महत्या करता है..(याद रहे.. 1947 से आज तक 20 लाख से कही बहुत ज्यादा.. किसानो की हत्या व उन्हे विकास के नाम से जमीन छीन ली गई ह...) देशवासीयों मे कोई प्रतिक्रिया नही होती है..

देश के बीच के तौलियों द्वारा अकाल में उनके भूखे जानवरों, व परियोजनाओं के नाम से कौड़ी के दाम में खरीदकर.., उनसे भारी भरकम मुनाफे के खेल में, आज २००० किसान परिवार, प्रतिदिन अपना पैतृक कृषी का व्यवसाय छोड़ना पड़ रहा है...,

किसान बनने के लिए.., कई पुश्ते चले जाती है, इस देश के क़ानून की बिंडवना है कि कोई माफिया यदि वह १ करोड़ की कृषी भूमी खरीदता है तो उसे किसान का दर्जा मिलता है.., वह आज के भ्रष्टाचार के माहौल से, विभिन्न योजनाओं से ऋण लेकर, बैंक व देश को चुना लगा रहा है...

आज जनता भी ६७ सालों से किसानों का दर्द न समझने से, खुद छुपे रूप से दर्द से पीड़ित , ऊँचे भाव में किसानों का उत्पाद खरीद कर माफिया भी मूंछों पर ताव दे रहें हैं...

इलाज:::::
इन माफियाओं का बीच का तौलिया जनता जरूर खोल सकती है..आज मोहल्ले के हर घर में औसतन एक युवक बेरोजगार बैठा है.., यदि मुहल्ला प्रण कर ले कि हम किसानों को पैतृक कृषी का व्यवसाय छोड़ने व आत्महत्या करने की मजबूरी से प्राण देनें की मजबूरी के निवारण का संकल्प ले.., तो देश की जनता के साथ किसान भी सुखी रहेगा, आज जनता में यदि राष्ट्रवादी धारा से, किसानों के फसल को, देश के मुहल्लों व शहर की जरूरत से फसल एकमुश्त खरीद ले.., व अधिकतम खरीद के लिए मुहल्ले के लोग ५०० रूपये प्रति परिवार के संग्रह से खुले मैदान में ताड़पत्री व बॉस के बम्बू से खाद्यान के भण्डार का जुगाड़ आसानी से होने के साथ घर बैठे बेरोजगार युवकों को आसानी से १० हजार रूपये की आमदनी के साथ देश का मोहल्ला से किसान सुखी रहेगा, सब्जियों को तो घर के मोहल्ले एक दुसरे को सहयोग करे, तो फ्रीज में रख कर, जो माफिया कोल्ड स्टोरेज में रखने का बहाना बनाकर व कृत्रीम तेजी का इन्तजार कर, जनता को लूटने का ख्वाब ख़त्म हो जाएगा
याद रहें.., पिछले कार्यकाल मे अमेरिका के राष्ट्रपति जाँर्ज बुश ने देश के माफियाओ का समर्थन करते हुए कहा था.. इंडियन लोग ज्यादा खाते है.. इसलिए दुनिया मे खाद्यान के भाव बढ रहे है... जबकि हमारे देश मे 70% जनता तो,भुखमरी की शिकार है..वह देशी शराब सस्ती होने से अपने व बच्चो को भी शराब पिलाकर सुला देती है.. आज हमारी क्षमता है , किसानो व जवान (सेना) का सम्मान किया जाय तो....?????????????, हिन्दुस्थान का किसान पूरी दुनिया को खिला सकता है..व जवान के सामने पुरी दुनिया झुक जायेगी...
अभी मै आपको एक साल पहिले की घटना का उल्लेख करना चाहता हूँ.. पुणे (महाराष्ट्र) से दूर 250 कि.मी. दूर नारायण गाँव मे टमाटर का भाव माफियाओ ने 40 पैसे किलो लगाई तो... किसानो ने मीडिया को बुलाकर.. वह टमाटर सडको पर फेंक दिये...क्योकि सब्जी मंडी मे टमाटर पहुचाने का खर्च 80 पैसे से कही ज्यादा आता था... जबकि वही टमाटर... पुणे की मंडी मे 6 रूपये किलो व मुंबई मे 12 रूपये किलो बिक रहा था.. अभी हाल ही मे नारायण गाँव व दूसरी घटना मध्यप्रदेश मे घटी... धनिया की एक मुठ की किमत 10 पैसे .. जबकि वही धनिया की एक मुठ.. मुँबई मे 10 रूपये प्रति मुठ बिक रही थी..
आज माफिया, मीडिया वर्ग से तालमेल से कह रहे है.. मंडी मे सब्जी की आवक कम होने से भाव बढे है...,यह संदेश जनता को संदेह पैदा कर, उसे भांती से मजबूरन खरीदना पड़ता है..., यह माफियाओ का अर्थशास्त्र है...जो हमारे पुराने प्रधानमंत्री व्यर्थे/अनर्थेशास्त्री प्रधानमंत्री का भी है.. जो बार बार कहते है कि विकास करना है तो जनता को भी इसका भार महगाँई के रूप मे उठाना पडेगा...
मेरे प्रिय
तम दोस्तो अब तो जागो... देश तो डूब रहा है... लेकिन इतनी गहराई तक न डूबे की जनता को भी डूबते देश को उपर खीचने की भी ताकत न रहे.
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मुझे घर बैठे लाईक नही... मुहल्ले मे हाथ खडा कर समर्थन मे शेयर नही.. देश के शेरो मे अपना खून डालकर एक नयी दहाड के रूप मे प्रतिक्रिया (काँमेंट्स) चाहिए... इस खेल वालो का तेल कैसे निकाले..इसका जज्बे से संकल्प ले... , 24 घंटे मे जो माफियाओ की खुमारी (नशा/मस्ती)...जो जनता को महँगाई की बिमारी लगाकर वह हताश हो गया है.. इसकी गोली, हमारी राष्ट्रवाद की बोली ही.. इनकी (माफियाओ की) झोली खाली कर सकती है...