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Sunday, 13 May 2018

मित्रों..., वंदेमातरम तो अंतराष्ट्रीय गीत है, इसमे भूमि की प्रशंसा की गई है, और माँ की उपाधि दी गई है, भूमि की जितनी मेहनत करो तो उतनी ही ज्यादा उपजाऊ होकर , देश की पैदावार बढा कर , सुजलाम , सुफलाम बनाया जा सकता है, यह प्रकृति की अनुशंसा है, न कि विशेष धर्म का प्रतिक है, 1857 की क्रांति के समय यही एक मंत्र था, जिसने देशभक्ति के जस्बे से हर धर्म के लोगों मे एक नई उर्जा का संचार किया था. आनंद मठ फिल्म मे वंदेमातरम के गाने से अंग्रेजो के होश उडा दिये थे...

मातृ दिवस - Mother/s  (M-Other/s), Mom is different than other/s on Universe. Our day is blessed because of her/s  Mercy (दया, करूणा) and Love (वात्सल्य).. हमारा हर दिन..,  मां के आशीर्वाद रूपी सागरमयी तरंगों से जीवन में एक नया रंग है.. 



देश्वासिओ..,  जागो भारतमाता.... तुम्हे पुकार रही है..........?????
माँ, तेरा प्यार दिल के आँसुओ से भरा रहता है, तुम्हारा दिल तो वात्सलय से 24 घंटे धडकता.. है... हर दु:ख पहुचाने वाले पति से बच्चे हर सख्श तक को आप माफ कर देती हो.. तकि आप की आँसू से वे अपने गलती का अहसास समझ कर प्रायश्चित (सुधर सके) कर सके, माँ , आप तो, सौ बार अपने आँसुओ से मौका देती है....माँ तेरे आँसु सागर से भी गहरे है. लेकिन तेरे सागर के आँसु तो लोगो को जीवन मे कैसे तैरना है, वह सिखाती है...आज तक तेरे आँसु के सागर कोई भी डूबा नही है...क्यो कि इसमे वात्सलय का नमक है...



हे माँ , तेरा वैभव अमर रहे.......
हर नेता को यह संदेश दे, ताकि देश का नागरिक सुजलाम सुफलाम से अपना जीवन सँवारे, शीतलाम से जीवन जी सके.... देशवाशीयों का हर दिन तेरी प्रेरणा का रहे...माँ, तेरी वात्सलय ,ममता, स्नेह , करूणा के सागर के भंडार के सामने हर चीज फीकी है.....तेरा कर्ज तो हम तुम्हारे फर्ज का पालन कर ही चुका सकते है..??? माँ तुझे शत.. शत.. प्रणाम

हे माँ, इन आदमखोर नेताओ ने अलगाववाद , भाषावाद, धर्मवाद से लोगो को मच्छर बनाकर , तुम्हे डस रहे है, और विदेशी घुसपैठीओ के विषैले मच्छर के लिए वोट बैक की पृष्ट्भूमि मे देश की भूमि के टुकडे करने के ताक मै है.... और विदेशी विकास के जहर से तुम्हे दंश कर जनता को भरमा रहे है.... माँ इन देश्वासियो को समझाओ ... वंदेमातरम का अर्थे क्या है.... 

मित्रों..., वंदेमातरम तो अंतराष्ट्रीय गीत है, इसमे भूमि की प्रशंसा की गई है, और माँ की उपाधि दी गई है, भूमि की जितनी मेहनत करो तो उतनी ही ज्यादा उपजाऊ होकर , देश की पैदावार बढा कर , सुजलाम , सुफलाम बनाया जा सकता है, यह प्रकृति की अनुशंसा है, न कि विशेष धर्म का प्रतिक है, 1857 की क्रांति के समय यही एक मंत्र था, जिसने देशभक्ति के जस्बे से हर धर्म के लोगों मे एक नई उर्जा का संचार किया था.

आनंद मठ फिल्म मे वंदेमातरम के गाने से अंग्रेजो के होश उडा दिये थे...

गाँधी द्वारा कट्टर पंथी मुस्लिम लीग के इस विरोध के सामने घुटने टेकने पर इसकी परिभाषा बदल कर , मुस्लिम लोगों को दिग्भ्रमित किया, और वोट बैंक के चक्कर मे हर सरकार ने इसे , प्रोसाहित कर देशप्रेम की भावना खत्म कर, देश को खंडित करने का षडयंत्र रचा जा रहा है...???, 

जन - गण - मन तो हमारी गुलामी के समय के राजा जाँर्ज पंचम के आगमन की स्तुति मे अनुशंसा (चमचगिरी) करने के लिए , रविद्रनाथ टैगोर ने लिखा , जिन्हे अंग्रेजों के शासनकाल मे साहित्य का नोबल पुरस्कार भी मिला
इस वेबस्थल का मुख्य उद्धेश्य है...

Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.....
www.meradeshdoooba.com (a mirror of india) स्थापना २६ दिसम्बर २०११
- भ्रष्टाचारीयों के महाकुंभ की महान-डायरी

Friday, 11 May 2018

यह व्यंग है, देश का गहरा रंग है, नेताओ के रहने का ढंग है, भेड़िये की खाल अब तो जीवन की ढाल है...???? कर्नाटक यह शब्द , भ्रष्टाचार का कर-नाटक सिद्ध हुआ है.........???सिद्धारमैया ने लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा से अल्पसंख्यक बनाकर व कर्नाटक का अलग झंडा बनाने की जिद्द से लोकतंत्र को देश का टूट तंत्र का तोड़ न होने से अब बी.जे.पी ने येदुरप्पा को भ्रष्टाचार की खाल को भुलाकर अपनी कर्नाटक में एक जीवन नैय्या पार कराने की यह विधानसभा चुनाव अब लोक सभा चुनाव की पृष्ठभूमि की आखरी कोशिश जारी है



२०१३ के येदुरप्पा ने बी.जे.पी के घर का भेदिया के भ्रष्टाचार से भेड़िया के खाल से बी.जे.पी. के मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार का ही शिकार कर .., अब २०१८ में बी.जे.पी ने येदुरप्पा को घर का मुखिया बनाकर लिगायत वोटों का अपनी धारदार दांतों से शिकार कर कर्नाटक का लूट तंत्र को लोकतंत्र का मंत्र दिया है..


सिद्धारमैया ने लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा से अल्पसंख्यक बनाकर व कर्नाटक का अलग झंडा बनाने की जिद्द से लोकतंत्र को देश का टूट तंत्र का तोड़ न होने से अब बी.जे.पी ने येदुरप्पा को भ्रष्टाचार की खाल को भुलाकर अपनी कर्नाटक में एक जीवन नैय्या पार कराने की यह विधानसभा चुनाव अब लोक सभा चुनाव की पृष्ठभूमि की आखरी कोशिश जारी है 


May 29, 2013
की फेसबुक व वेबस्थल की पुरानी पोस्ट

यह व्यंग है, देश का गहरा रंग है, नेताओ के रहने का ढंग है, भेड़िये की खाल अब तो जीवन की ढाल है...????

कर्नाटक यह शब्द , भ्रष्टाचार का कर-नाटक सिद्ध हुआ है.........???

यह नाटक, 1947 से शुरु हुआ, जो सत्ता परिवर्तन के रूप मे हुई थी... और जनता को देश की झूठी आजादी के नाम पर ,, हर राज्य के मंत्री वोट अलगाववाद, जातिवाद, धर्मेवादव घुसपैठ से वोट बैक बनाकर, सिर्फे जनता को बताते रहे कि मै सत्तारूढ पार्टी मे, बेहद इमानदार हूँ, और इमानदारी की आड मे भेड का चोला पहनकर (सिर्फ प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री को छोड कर) भ्रष्टाचार के दाँतो से आदमखोर बन गये.

भारतीय जनता पार्टी के शासन काल मे प्रधानमंत्री की आड मे प्रमोद महाजन ने दूर संचार घोटाले मे भेड़िये का चोला पहनकर 1 हजार करोड से ज्यादा का घोटाला कर दिया ... जिसे काँग्रेस पार्टी मे उत्प्रेरक का काम किया, छोटे शिकारी के भ्रष्टाचार की विद्या जान जाने से २ लाख करोड का 2G घोटाला कर दिया.. और इसके आविष्कारी स्वर्गीय प्रमोद महाजन के चित्र मे बासी माला डालते हुए कहा , ये हमारे गुरू है, पहले उनके भ्रष्टाचार के चाल चरित्र की छान बीन करो , बाद मे हमारी, हमने तो संवेधानिक पद्दति से ही निविदाये मंगवाई है...,

याद रहे इस शिकार मे भ्रष्टाचार की पुरियाँ तलने मे मुख्य भूमिका नीरा राडिया को बुलाया गया था... वही हाल भारतीय जनता पार्टी के कर्नाटक मे येदिरूप्पा ने भ्रष्टाचार का हाहाकार मचाया था... भारतीय जनता पार्टी भी दाँवा कर रही थी, केन्द्र सरकार के पैने दाँत से की तुलना मे येदिरूप्पा के तो अभी दुध के दाँत निकले है.. बोल कर अपनी सत्ता खोने के डर से प्रोत्साहित करते रही.

रिटायर्ड न्याय मूर्ति हेगडे की जाँच के बाद भी, भारतीय जनता पार्टी , येदिरूप्पा के दाँत पैने करने में लगी थी, जब पानी नाक के नीचे बहने लगा तो आनन फानन मे जगदीश शेट्टार को यह खाल सौंप दी गयी , तब तक पानी सर के ऊपर बहकर , भारतीय जनता पार्टी की सत्ता भी बह गई.

वही हाल 2G के बदनाम मंत्री ए.राजा, डी.एम.के. भेडिये की वजह सरकार को अपनी सत्ता बचाने के लिए, ममता बनर्जी को रेल मंत्री की खाल पहनानी पडी, असल मे ममता बनर्जी की नजर, पशिच्म बंगाल के मुख्यमंत्री पद की थी, बंगाल की मोटी खाल मिलने से , उसने वह खाल, दिनेश त्रिवेदी को पहना दी, अपनी दो खालो की वजह से वह चिट फंड घोटालो का शिकार करने के बाद , पशिच्म बंगाल के घाटे मे होने के दाँवे से केन्द्र सरकार से विशाल वित्त सहायता माँगने लगी, वित्त सहायता न मिलने से दिनेश त्रिवेदी को रेल किराय बढाने के बहाने खाल निकाल दी, और पवन बंसल ने वह खाल पहंकर एक विशाल घोटाले मे बदल दिया..

ममता बनर्जी ने साल मे 12 रसोईगैस के सिलेडरों की धमकी की वजह से समर्थन वापस ले लिया, मुलायम सिग़ ने भी सी.बी.आई , के काटने के डर से अपनी खाल देकर, यु.पी की मजबूत खाल से पुत्र व पिता आनंदित है...

Tuesday, 1 May 2018

गांधी की गंदी राजनीती , जवाहर के जहर व जिन्ना के जिन से खंडित व खूनी ह्त्या इस तिकड़ी जोड़ी से जनता के घावों से हमें घायल देश मिला...

PL.Must Read; AMU के छात्र संघ भवन में जिन्ना का चित्र


जवाहर के जहर, जीना जिन्हा जिन्ना के जिन व गांधी की गंदी राजनीती व तुष्टी की नीती से ही देश के तुकडे हुए ..
१. सूअर का गोश्त व सुरा का सेवन करने वाला जिन्ना को , इस्लाम का पाक मसीहा मानकर, इस बंटवारे को पाक कहकर पाकिस्तान राष्ट्र का कायदे आजम बना ...
२. गाय के गोश्त का भक्षण करने वाले व सुर सुरा-सुन्दरी
के कायल नेहरू को पंडितकह, हिन्दुस्तान की कमान से, खंडित भारत के हार से, अंग भंग से आज भी इंडियन इतिहास में भारत रत्न के सम्मान व गली मुहल्लों के नाम व पुतलों से मान दिया है .
३. ब्रह्मचर्य के प्रयोग से राष्ट्र को शर्मिन्दगी व
अहिसां व तुष्टीकरण की आड़ में एक खूनी कटारसे देश को खंडित कर, सत्ता परिवर्तन से आजादी का ढोल पीट कर इसे बिना खडग - बिना ढालकहकर , संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए राष्ट्रपिता उर्फ़ बापूकी उपाधी दे दी.
४. अखंड भारत के प्रधानमंत्री के प्रबल दांवेदार सरदार पटेल को रेस से बाहर कर जिन्ना व नेहरू इस दौड़ में थे , व गांधी अंग्रेजों के मकड़जाल की एक मकड़ी बन अधिकृत एक रेफरी / निर्देशी पंच बने थे.
५. जिन्ना की धरती पकड़ जिद्द से अखंड भारत की अकड़
से प्रधानमंत्री बनने की महत्वकांक्षा को मनाने के लिए गांधी ने मुंबई के मालाबार हिल के बंगले जिन्ना हाउसके १९ फेरे लगाए थे , हर बार गांधी को जलील होना पड़ा था

६. गांधी की गंदी राजनीती , जवाहर के जहर व जिन्ना के जिन से खंडित व खूनी ह्त्या इस तिकड़ी जोड़ी से जनता के घावों से हमें घायल देश मिला...

७. दोस्तों...!!!, सत्ता परिवर्तन के बाद विदेशी हाथ, विदेशी साथ, विदेशी विचार विदेशी संस्कार से जातिवाद भाषावाद,अलगाव वाद के मलहम से व आरक्षण के धागों से वोट बैंक पट्टी से यह घाव ७० सालों बाद भी भरा नहीं है ...,
विश्वगुरू व वेदों के सानी , ज्ञानी और देश की वैभवता के लोप से आज भी देशवासी एक अंधेरी सुरंग में हिचकोले खाते चल रहा है.

काश हमने वीर परमवीर सावरकर की ४० से अधिक सार्थक भविष्यवानियों की ओर ध्यान दिया होता ..., अब भी समय है यदि हम जागें व जंग जीतें ..,
एक कविता बलवीर सिंह रंग की है जो इसराइल की विचारधारा है
ओ विप्लव के थके साथियों विजय मिली विश्राम न समझो..,
उदित प्रभात हुआ फिर भी छाई चारों ओर उदासी
ऊपर मेघ भरे बैठे हैं किंतु धरा प्यासी की प्यासी
जब तक सुख के स्वप्न अधूरे
पूरा अपना काम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो
पद-लोलुपता और त्याग का एकाकार नहीं होने का
दो नावों पर पग धरने से सागर पार नहीं होने का
युगारंभ के प्रथम चरण की
गतिविधि को परिणाम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो
तुमने वज्र प्रहार किया था पराधीनता की छाती पर
देखो आँच न आने पाए जन जन की सौंपी थाती पर
समर शेष है सजग देश है
सचमुच युद्ध विराम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

इस्लाम को सलाम , हिन्दुओं को गुलाम के तत्व से गौ ह्त्या का विरोध व अपने को हिन्दू धर्म में पैदा होने व खानपान में मुस्लिम व संस्कृति से इसाई के स्वांग से अपने को शान्ति दूत कह...!!!,

१९४७ में सत्ता परिवर्तन में एडविना बेंटन के साथ जिन्ना व नेहरू के समान शारीरिक संबध से.., प्यार के नशे के फोटो को एडविना बेंटन ने जनता में सार्वजनिक करने के धौस से .., नेहरू व जिन्ना के राजनैतिक जीवन की ह्त्या होने के भय से .., देश के बंटवारे के धार से देश के बंटवारे की तलवार से केक (cake) की तरह काट कर सत्ता परिवर्तन को आजादी शब्द से भरमाकर, हिन्दू बहुल क्षेत्र पाकिस्तान को सौंप कर..., नेहरू ने १४ नवम्बर, एडविना बेंटन ने २८ नवम्बर व जिन्ना के जन्म दिन २५ दिसम्बर के क्रिसमस को अपना नया राजनैतिक जन्म दिन १५ अगस्त को ही मना लिया था ...,
गांधी के सत्य व ब्रह्मचर्य के खेल के राज से सेक्स के खेल की चाबी भी एडविना बेंटन के पास थी.., यूं कहें आजादी का झांसा एक BLACK-MAIL EXPRESS से ७० सालों से आज तक एक काला दिवस ही साबित हो रहा है..., देश कर्ज के गर्त में आज भी डूब रहा है
१९४७ में भारतमाता के अंग भंग से लहू लूहान से घायल हिन्दुस्तान के पांवों में अंगरेजी संस्कृति की पायल डाल कर विदेशी हाथ , साथ , विचार , संस्कार से अपने को स्वंय भू , देश का चाचा घोषित कर बाल दिवसव भारत रत्न से नवाजा...,
इस खेल का पर्दाफ़ाश.., जब चीन ने नेहरू को यों कहे देशवासियों को थप्पड़ मारकर देश के टुकड़े कर , हड़प कर, नेहरू की छद्म भूमिका /स्वांग की पोल खोल कर रख दी ..
दोस्तों बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है की एक अय्याश ..., व्यभिचारी के जन्म को बाल दिवस के रूप में आज भी मनाया जाता है..., इतिहास को घोर अँधेरे में रख कर
...

यदि हिन्दू कैलेंडर के नव वर्ष के प्रथम दिवस को बाल दिवस के रूप मनाया जाय तो देश की तस्वीर, प्रगति शील पथ से एक नए सूरज की किरण से अलग ही होगी
..
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Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.....www.meradeshdoooba.com (a mirror of india) स्थापना २६ दिसम्बर २०११ कृपया वेबसाइट की ६८३ प्रवाष्ठियों की यात्रा करें व E MAIL द्वारा नई पोस्ट के लिए SUBSCRIBE करें - भ्रष्टाचारीयों के महाकुंभ की महान-डायरी

Sunday, 1 April 2018

दोस्तों..!!!!!, डूबते देश की कहानी...., वंशवाद और माफियावाद की खाद से, खा गई स्विस बैंक..., हमारी हरियाली का राष्ट्रवाद... के दी बर्बाद हमारे संविधान के बंद कर दिए कान... काले मन वाले बने उजियाले तन... लुच्चे टुच्चे , उच्चके बने संविधान की शान वोट बैंक की दीक्षा की महिमा से जाते-जाते अपने कर्मों से.. जनता के ताबूत हर गल्ली मुह्ह्ल्ले में पुतले बनाकर... अब निकले साबूत


हम हो रहे, बर्बाद हर दिन..., धार्मिक नहीं धर्म को ही तलवार से हलाक कर रहें हैं .., देशवासियों आप और हम ५ साल के रोते हुए चेहरें हैं , लोकतंत्र के मोहरें हो.., डूबते देश की यह मुहर है..,


सोनार बंगाल में बांग्लादेशी लोहारों (घुसपैठियों ) के प्रहार से. व जातिवाद के बिहार के बहार में धर्मवाद के तलवार से देश की दशा व दिशा बिगड़ रही है. देश को तोड़कर चुनावी साजिश से देश वासियों में रंजिश फैलाकर व जनता के सर फुटव्वल से बाजी जीतने के नेताओं की होड़ है..,


इसी धर्मवाद की लड़ाइयों में घुसपैठियों व आतंकवादियों के लिए यह सुगम वादी के साथ-साथ धन, धनाधन से देश के माफियाओं का विदेश में धन भेजने व पलायन से देश का क़ानून ७० सालों से हाथ मलता रहा है..
A राजा से L मोदी – N मोदी व Z – जेड ,झटपट माफिया मीडिया भी इस खेल को खेलने व दिखाने की आड़ में, देश की Z श्रेणी की क़ानून व व्यवस्था का संविधान को धत्ता दिखाते. देश का माल उड़ा ले गए..,




January 9, 2016 • फेस बुक व वेब स्थल की पुरानी पोस्ट
हम हो रहे,,बर्बाद हर दिन..., गुरुदासपुर व पठानकोट के आतंकवादी हमलों से हम अब भी नहीं चेते..,पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे अब्दुल कलाम तो देश के मदिर में हुडदंग व गुरूदासपुर हमले से आहत होकर इस देश को अलविदा कह गए..., आज की ताजा घटनाओं से तो कब्र में उनकी माटी भी उनके आंसू लबालब होकर गीली हो गई है


देशवासियों तुम, हम तो ५ साल के लिए देश के रोते हुए चेहरें है...इनके मोहरें हैं ..., राष्ट्रवाद पर वोटबैंकवाद हावी है..., सत्ता का इनका भविष्य भावी है....
पहले मालदा में वोट बैंक का माल अदा होगा और अब पूर्णिया में इस खेल की पुरिया से सत्ताखोरों की टन और बढ़ते जायेगी ...


आजम खान के उतारू प्रदेश के बयान से कि वाले R.S.S. वाले शादी नहीं करतें हैं .., क्योकि वे सम लैंगिक हैं, की कि प्रतिक्रया के बयान से देश बर्बाद होकर माफिया-सत्ता खोरों के वोट बैंक के गठबंधन से देश की गांठ बनकर देश को बांध कर आतंकवादियों के सुगम रास्ता देकर.. देश को १९४७ के तुष्टीकरण से घुसपैठियों से आगे और खंडित करने का नया खेल खेला जा रहा है...


हर चुनाव में जनता को चुन-चुन कर मारा जा जा रहा है , हर धर्म के वासी का जीवन तो १९४७ के पहले से भी बदतर होते जा रहा है...,


वोट बैंक से...., धर्मगुरूओं के सत्ताखोरों की मिलीभगत से महलों से फतवा, आदेश जारी होता है... और गरीबों की झोपडिया जलती है...


१९४७ के सत्ता परिवर्तन की इतिहास देखे तो , हर चुनाव वंशवाद के दंशवाद में जातिवाद,भाषावाद,धर्मवाद ,अलगाव वाद का घोल मिला कर , घुसपैठीयों के चांदी के वर्क से सजाकर..., सत्ताखोर मिठाईया खा रहें है...


जजशाही,नौकरशाही,माफियाशाही सत्ताशाही के मजबूत जंजीरों के जोड़ से से आम आदमी जकड़ा हुआ है,,,


हम हो रहे बरबाद , हर दिन हर अफीम वाले नारों के साथ. नेताओ का जनता के नाम आधुनिक नारा-लडों और कहों, मेरा धर्म तुम्हारे धर्म से बडा और वोट बैंक हमारा...


May 10, 2014 फेस बुक व वेब स्थल की पुरानी पोस्ट
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दोस्तों..!!!!!, डूबते देश की कहानी...., वंशवाद और माफियावाद की खाद से, खा गई स्विस बैंक..., हमारी हरियाली का राष्ट्रवाद... के दी बर्बाद
हमारे संविधान के बंद कर दिए कान...
काले मन वाले बने उजियाले तन...
लुच्चे टुच्चे , उच्चके बने संविधान की शान
वोट बैंक की दीक्षा की महिमा से
जाते-जाते अपने कर्मों से.. जनता के ताबूत
हर गल्ली मुह्ह्ल्ले में पुतले बनाकर... अब निकले साबूत


गरीबी हटाओं , आराम हराम है, मेरा भारत महान
माफियाओं के मन की मुस्कान बनी भारत निर्माणसे बनी एक नयी जान
जनता लहूलुहान
योजनाओं को भोजनाएं बनाकर कर रहें बखान
आ कर दंश देने वाले आदर्श नेताओंकी अब बन गई गर्व की पहचान”....


सीमा पर दुश्मन घात लगाये बैठे है... और हरामखोर, सत्ताखोरों ने , सीमाओं को खुला छोड़कर ,जवानों के हाथ बांधकर , जवानों के सर कटाकर देश की अस्मिता को ताक पर रखकर, अब दलाली के इस खेल से, इतने मुस्टंडे हो गए है कि ... भ्रष्टाचारियों के कल्याण को...भारत निर्माण के नारों से देशवासियों को भरमा रहें है....
हे हरामखोर, सत्ताखोरों, तुमने तो, जवानों के आंसू से ही देश को डूबा दिया है....,क्या अभी भी शर्म बाकी है ..???


इटली के अदालत में पत्र पेश, सोनिया के करीबियों का खेल.., अब सी.बी.आई करेगी पत्र की जांच ...बोफोर्स के ६० करोड़ के घोटाले में ४०० करोड खर्च कर क्वात्रोची ..बना...??????.


Question-Expert-Tea, से सी.बी.आई. को चाय पानी पीला कर, अब कर रहा है कब्र में मौज , अब मिलेगा सी.बी.आई को नया मनी मून पैकेज , इसे कहते है, VVIP.... Very Variety Intelligent Politics,
चैन से जीना है तो ...जाग जाओ देश्वासियो..???
घुट-घुट के जीना है तो, समस्यायें देखकर आँखे बन्द कर लो यारों..???


दोस्तों जागो... मार्मिक स्तिथी है...डूबते देश को बचाओ,,, अब पानी सर से ऊपर जा रहा है... आओ प्रतिज्ञा करे देश के जवानों व किसानो की माटी बिकने नहीं देंगे... देश में किसी भी घुसपैठीये को वोट बैंक नहीं बनने देंगें


मैंने एक नया ग्रुप बनाया है - .....
धरती लुटी, जल लुटा, पाताल लुटा, और लुटा आकाश.... अब और मत बनाओ, आम हिन्दुस्थानियों को जिंदा लाश.....


बाबूजी यहाँ सब कुछ बिकता है, लेकिन लूट मे तो हर माल मुफ्त मिलता है ...
अब आम आदमीयों पर लगाओ, टैक्स , और भोगों सत्ता का सेक्स ( लूट और शोषण से अय्याशी का जलवा)


जागो देशवासियों हम राष्ट्रवाद की धारा मे आकर.., डूबते देश को बचायें ॥ सीमा पार दुश्मन भी चाह रहे है हम आपसी लड़ाई से कमजोर हो जाये ताकि हमे सफलता आसानी से प्राप्त हो...


Friday, 23 March 2018

कहते है, राख तले चिंगारी ही आग का बीज होती है , जो बुझी आग को प्रज्ज्वलित कर सकती है..., ऐसे ही देश के विभिन्न छेत्रों की करोड़ों प्रतिभाए दम घुट कर मर रही हैं.., और जुगाड़ पद्धती स अपना जीवन यापन कर रही है.., विदेशी भी इनकी प्रतिभाओं से अचंभित होकर, इनकी जुगाड़ पद्धती को अपना पेटेंट बना रही है.., यदि इन करोड़ों प्रतिभाओं को सम्मान दिया जाए तो ये, ही.., देश में बुझे राष्ट्रवाद को ज्वलंतशील बना सकती है..,


१ .भगत सिंग के भक्त द्वारा .., यह कलाकृती.., मुम्बई के फूटपाथ के, गरीबी रेखा के झोपड़े में रहने वाले युवक की है.., जो गरीबी की वजह से स्कूल छोड़ देते है.., लेकिन जीवन में उनमें,जज्बे से हुन्नर अपने आप निर्माण होता है.., फुटपाथ ही उसकी जीवन के सृजन की कलाकृति व जीने का आनंद है.., कभी रंग बिरंगे चोक / चाँक से तो कभी , रंगोली के पावडर पर अपनी कलाकृति १ से डेढ़ घंटे में बना कर , राह चलते राहगीर, इस युवक को १ से २ रूपये का सिक्का देकर,  वह युवक अपनी जीवन याचिका का निर्वाह करता है...

२ .बरसात के मौसम में तो इसकी मेहनत चंद घंटों में ही धुल जाती है.. , तब भी अपनी मेहनत धुलने का अफ़सोस नहीं करते हैं..., वह मौसम देखकर फिर से नये विषयों पर एक नयी कलाकृति का निर्माण करता है 

३. .देश के प्रधानमंत्री से छुटमैय्य नेताओं ने, २३ मार्च को, ८७  साल बाद, जोर शोर से इन तीनों बलिदानियों की पूण्य तिथी मनाई, लेकिन इस युवक ने अपने जीवन के सजीव रंगों में इस कलाकृति में ऐसी जान फूंखी है.., जैसे लगता है कि ये क्रांतीकारी इसके दिल में बसा है...,जैसे यह कलाकृति सजीव होकर अभी बोल उठेगी..

४. कहते है, राख तले चिंगारी ही आग का बीज होती है , जो बुझी आग को प्रज्ज्वलित कर सकती है..., ऐसे ही देश के विभिन्न छेत्रों की करोड़ों प्रतिभाए दम घुट कर मर रही हैं.., और जुगाड़ पद्धती स अपना जीवन यापन कर रही है.., विदेशी भी इनकी प्रतिभाओं से अचंभित होकर, इनकी जुगाड़ पद्धती को अपना पेटेंट बना रही है.., यदि इन करोड़ों प्रतिभाओं को सम्मान दिया जाए तो ये, ही.., देश में बुझे राष्ट्रवाद को ज्वलंतशील बना सकती है..


५. ७१  सालों से गरीबी उत्थान के लिए लाखों योजनाए बन चुकी हैं..., जो माफियाओं की भोजनाएं बनकर इनके हक़ की कमाई, देशी विदेशी बैंकों व आलीशान भवनों के निर्माण से कैद है..., दोस्तों ७१ सालों  के सत्तापरिवर्तन की यह मार्मिल तस्वीर है..

७. 
७१  सालों से ही.., गरीबों के देशी हाथों की शक्ती को काटकर / छीनकर .., विदेशी हाथों से, भारत निर्माण से अच्छे दिनों का देशवासी इन्तजार कर रहें है... 

अगर सरदार भगत सिह को तुम कब्र से उठाओं तो तुम उसे दुखी पाओगे, क्योंकि जिस आजादी के लिए बेचारे ने जान गवाई , वह आजादी दो कौड़ी की साबित हुई , तुम शहीदों को उठाओं कब्रों से और “पूछों”. क्या इसी आजादी के लिए तुम मरे थे , इतने प्रसन्न हुए थे ...??, इन राजनीतिज्ञों के हाथ में ताकत देने के लिए तुमने कुरबानी दी थी ..?????, तो भगत सिह छाती पीट-पीट कर रोयेगा कि हमें क्या पता था , जिंदगी का..., गांधी तो ज़िंदा थे – आजादी आई और आजादी आने के बाद गांधी छाती पीटने लगे थे , गांधी बार-बार कहते थे मेरी कोई सुनता नहीं , मैं खोटा सिक्का हो गया हूँ , मेरा कोई चलन नही है गांधी दुखी है, गांधी सोचते थे : एक सौ पच्चीस साल जीऊंगा , लेकिन आजादी के नौ महीने बाद उन्होंने कहा अब मेरी एक सौ पच्चीस साल जीने की कोइ इच्छा नहीं है , यह बड़ी हैरानी की बात है , शहीदों की चिताओं पर भले मेले भर रहे हों , लेकिन शहीदों के चिताओं के भीतर आंसू बह रहें हैं.


बोलू: अरे देखू.., आज, तू क्या देख रहा है,, {Repost मार्च २३, २०१५}   ( https://www.facebook.com/BapuKeTinaBandaraAbaBanaGayeHaiMastaKalandara/ )

देखू : आज देश के नेता तीन शहीदों का बलिदान दिवस... ८४ सालों के बाद जोर शोर से मना रहें है,,

बोलू: लेकिन इन्हें तो आज तक देश के क्रान्तीकरियों को शहीद का दर्जा नहीं मिला.., इनके घर तो जर्जर अवस्था में हैं..और आज के सत्ताखोरों के स्वतंत्रता सेनानी के तमगे से इन क्रांतीकारियों की जमीनें हड़प कर उनका अस्तित्व समाप्त कर रहें हैं..

सूनू: हाँ आज की वर्तमान सरकारें भी इनकी ह्त्या के रहस्य की फाईलों को गुप्त रख, कह रहीं है..जनता को राज बताने पर विदेशी ताकतों से हमारे सम्बन्ध खराब होने से विदेशी सहायता न मिलने से देश की अर्थ व्यवस्था.., चौपट हो जायेगी 

बोलू: हाँ..., यही ६८ सालों से सभी सरकारों की व्यथा है.. 

देखू: हाँ, मैं देख रहा हूँ, जहां खुदीराम बोस का मुजफ्‌फरपुर के बर्निंगघाट पर अंतिम संस्कार किया गया था लेकिन उस स्थल पर शौचालय बना दिया गया है. इसी तरह किंग्सफोर्ड को जिस स्थल पर बम मारा गया था उस स्थल पर मुर्गा काटने और बेचने का धंधा हो रहा है.

बोलू :यह शहीदों के प्रति घोर अपमान और अपराध है? देश के स्वाभिमान का घोर अपमान है...

अगर सरदार भगत सिह को तुम कब्र से उठाओं तो तुम उसे दुखी पाओगे, क्योंकि जिस आजादी के लिए बेचारे ने जान गवाई , वह आजादी दो कौड़ी की साबित हुई , तुम शहीदों को उठाओं कब्रों से और पूछों”. क्या इसी आजादी के लिए तुम मरे थे , इतने प्रसन्न हुए थे ...??, इन राजनीतिज्ञों के हाथ में ताकत देने के लिए तुमने कुरबानी दी थी ..?????, तो भगत सिह छाती पीट-पीट कर रोयेगा कि हमें क्या पता था , जिंदगी का..., गांधी तो ज़िंदा थे आजादी आई और आजादी आने के बाद गांधी छाती पीटने लगे थे , गांधी बार-बार कहते थे मेरी कोई सुनता नहीं , मैं खोटा सिक्का हो गया हूँ , मेरा कोई चलन नही है गांधी दुखी है, गांधी सोचते थे : एक सौ पच्चीस साल जीऊंगा , लेकिन आजादी के नौ महीने बाद उन्होंने कहा अब मेरी एक सौ पच्चीस साल जीने की कोइ इच्छा नहीं है , यह बड़ी हैरानी की बात है , शहीदों की चिताओं पर भले मेले भर रहे हों , लेकिन शहीदों के चिताओं के भीतर आंसू बह रहें हैं.

सूनू: बात तूने पते की कही है,,,, जनता भी यही कह रही है,,,

बोलू: देश के शहीदो के अपमान से बने , गाँधी के नाम से, नेता, अपनी नंगई से बनें बेईमान, सत्ता को सट्टा के नाम से देश को भ्रष्टाचार से खोखला कर दिया, आज भी हमारे क्रंतिकारी शहीद भगतसिग, सुभाषचन्द्र बोस , चन्द्रशेखर से वीर सावरकर को भी देश्द्रोहीयों की काली सूची मे है...आज शहीदो के चिताओ पर राजनेता अपनी भ्रष्टाचार की, रोटी सेंककर, अपने को शहीदों से महान बनाने की हौड मे है.. देश का शहद चाटकर , आज देश के गली , मुहल्ले ,नगर , शहर, शिक्षा व अन्य संस्थानों पर ऐसे करोड़ों नाम हैं...,जिसे अपने नाम कर लिए है...??

देखू: हाँ.., ३० साल बाद, नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इस स्वाभिमान को जगाने, उनके स्मारक में जाकर जोशीला भाषण मैंने सूना 

देखू: हाँ , सवेरे से प्रधानमंत्री की दौड़ में होड़ लगाने के लिए, सभी पार्टियों के छुटभैये नेता श्रेय ले रहे थे..., जैसे हममें ही.. सरदार भगत सिंग का ही खून दौड़ रहा है..., और तो और श्रदांजली देते समय अन्ना हजारे के आंसू छलक गए थे..

बोलू: लेकिन अन्ना हजारे तो गांधी वादी नेता है...., और गांधी ने तो अहिसा के भ्रामक प्रचार से देश के लोगों को गुलाम मानकर, जलियांवाला बाग़ के भीषण हत्याकांड निर्दोष लोगों की ह्त्या के प्रतिकार न करने से ही, जबकि लाला लाजपत राय की इस प्रतिरोध में मौत होने से..., क्रांतीकारियों में इस शासन को उखाड़ फेंकने का जूनून पैदा हो गया, 

सूनू: हाँ गांधीजी को तो अंग्रेजों से जलपान मिल रहा था.., इसलिए जलियांवाला बाग़ के भीषण हत्याकांड का विरोध नहीं किया था.., उन्होंने तो इन क्रांतीकारियों के कार्य की निंदा कर, अंग्रेजों को एक नया शक्तिबल देकर देशवासियों का दमन करने का पुख्ता इंतजाम कर दिया था,

बोलू: हां.., वे तो.., अंग्रेजों के सेफ्टी वाल के लिए अंग्रेजों के सुरक्षा कवच बने.., जब भी क्रांतीकारियों का आन्दोलन, ज्वलंत होने लगता था.., तब गांधीजी से अहिंसा की बारिश करवाकर.., उनके मंसूबों पर पानी फेर देते थे,

देखू: हाँ.., अब तो मैं देख रहा हूं ..., सेना की जमीन भी हड़प कर, सत्ता की बंदरबांट से आदर्श महलों व घोटालों के मकडजाल से जनता इसमें फंस कर ६८ सालों से उसका खून चूसा जा रहा है.., हमारी गांधी के स्वराज के पुतले की स्वराजका ढिंढोरा पीटकर, विदेशी हाथ, विदेशी, विदेशी साथ विदेशी संस्कार से देश में बेतहासा लूट पर छूट मिल रही है..

बोलू: देश के क्रांतीकारी तो खाते पीते घर के थे, उन्हें सत्ता का लोभ नहीं.., भारतमाता की गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराना था.., और इसे राष्ट्रीय धर्म मानकर देश के लिए कुर्बानी से देश के उज्जवल भविष्य की कामना की अपेक्षाओं को, ६८ सालों से सत्ताखोरों ने देश को विदेशी कर्ज से देश को डुबो दिया है...

सूनू: अभी नेता तो भगत सिंग व अन्य क्रांतीकारियों से अपनी सत्ता की पुरी तल कर, जनता में जोश भरने का खेल, खेल रहे हैं..
देखू : देश की हालत देखकर मैं तो गंभीर हो गया हूँ, मेरे रोये खड़े हो गए हैं.., अब देश का क्या होगा .

बोलू: देश गर्त में जाएगा, जब तक देशवासी में.., यह सोच रहेगी कि.., भगत सिंग मेरे पडोस में पैदा हो..., यदि देशवासी.., “सोच बदले तो देश बदलेगा...,” “राष्ट्रवाद.., राष्ट्रवाद..., राष्ट्रवाद..,” सावरकर, सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद व अनन्य क्रांतीकारी जैसों से ...
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'१८५७ का स्वतंत्रता संग्राम' यह वीर सावरकर की पुस्तक मेरे द्वारा छपाई से, पढ़कर.. देश को राष्ट्रवाद से स्फूर्तीमान बनाये..
भगतसिंगजी.., देश को, आजाद करने के गुर बताता हूं ..
आजाद हिन्द फ़ौजकी यह, “भावी रणनीती अपनाओ..
चंद्रशेखरजी.., देश के चाँद को, शिखर पर पहुँचाकर.. चांदनी रोशनी फैलाकर, देश को आजादी से दिव्यमान बनाओं .. 


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