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Wednesday, 6 December 2017

बाबरी मस्जिद मुद्दे पर.... प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने मुस्लिम नेताओं को बुलवाकर स्पष्ट शब्दों में समझाया , देखो.?, आप लोग की संख्या कम है.., मेरे पास पुलिस बल भी नहीं है , इसमें गरीब लोग मारे जायेगे , मै आपकी पसंद के अनुसार, जगह चुनकर, आपको मस्जिद बनवाकर दूंगा .. , मुसलिम नेता भी मान गये थे , तब वहाँ के सुरक्षा दल के एक सिपाही ने यह खबर केन्द्रीय मंत्री शरद पवार से कही , शरद पवार ने राजीव गांधी को भड़काया , यदि यह मुद्दा सुलझ गया तो...???? साम्प्रदायिकता का खेल हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा , और उसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की कुर्सी खिसक गई .... और भारतीय जनता पार्टी ने राम रथ को सत्ता का रथ बनाया ,


बाबरी मस्जिद – और राष्ट्रवाद, धर्मवाद का शिकार हो गया ...,
बजरंग दल के नेता विनोद कटियार ने कहा , U.P  में मुस्लिम घर वापसी (हिन्दू धर्म अपनाने ) को तैयार हो गए थे व मस्जिद के मुद्दे के प्रति उनकी उदासीनता ही थी व  पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के सुझाव से सहमत होकर अलग थलग पड़े मुस्लिमों में बाबरी मस्जिद का निर्माण विवादित भूमि से अलग दूर किसी जगह में मस्जिद निर्माण की मंजूरी थी.
1984 में भाजपा को भयंकर हार का सामना करना पड़ा था, 543 लोकसभा सीटों में से वह सिर्फ 2 पर विजयी रही थी। जबकि इंदिरा गांधी की हत्या की सहानूभूति लहर पर सवार होने के कारण कांग्रेस ने 401 सीटें जीती थीं। 1984 में भाजपा का मत-प्रतिशत 7.4 था,
राजीव गांधी द्वारा अपदस्थ करने के बाद व पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के इस्तीफे के बाद धर्मवाद से वोट बैंक ख़त्म करने के इस फार्मूला का आधार किसी भी पार्टी को मंजूर नहीं था , भारत के संविधान का वोट बैंक से समाधान ही हर पार्टी का हेतु था ...., परिणाम स्वरुप बीजेपी को छोड़ हर पार्टी ने मुस्लिमों में हिन्दुओं के छद्म आतंकवाद का खफ़ खौफ दिखाकर देश  में बंगलादेशी घुसपैठियों व रोहिंग्या मुसलबानों की भारी घुसपैठ से हिन्दू V/s मुस्लिमों के वोट बैंक को प्रेरित कर ..., ISI के एजेंट को भी शह देकर , २६/११ के मुंबई हमले से अन्य  सैकड़ों दंगों को उत्प्रेरक बना कर भाजपा की विरोधी पार्टियों के गठबंधन बनाके कांग्रेस ने २००४ से २०१४ अबाध व निरंकुश राज किया   लेकिन साल 2014 में अभूतपूर्व सफलता हासिल करते हुए भाजपा ने 335 सीटें हासिल की उस वक्त उनका मत प्रतिशत 30 से ऊपर है। असम में पहली बार भाजपा की सरकार के आसार, सर्वे में मिली पूर्ण बहुमत
वेब स्थल की पुरानी पोस्ट October 12, 2013 

कृपया पूरा पढ़े ..बाबरी मस्जिद / राम मंदिर के खेल का सच.......

१९८४ में राजीव गांधी, अपने नाना जवाहरलाल नेहरू के ३५० सीटों से कहीं ज्यादा सीटे जीती , सिक्खों की ह्त्या को...??? सिक्खों के दंगे कहकर और अपनी माँ के अस्थी कलश को देश भर में घुमवाकर ४०० से ज्यादा सीट झटक कर मिस्टर क्लीन उपाधी से नवाजे गए , देश की जनता को एक बड़ी आस थी , यह प्रधानमंत्री, हमारे देश को २१ वी शताब्दी में ले जाएगा, और उन्होंने जनता को भरमाने के लिए यह नारा भी दिया , लेकिन चंडाल चौकड़ी के घेरे में व उनके पहरे से वे दिशाहीन हो गए , विपक्षी दल की संख्या कम होने से , वह औंधे मुह गिरा हुआ था ...

तब नारायण दत्त तिवारी को साथ लेकर राजीव गांधीने बाबरी मस्जिद को राम मंदिर के शक्ल देने के रूप में ताला खोला , हिन्दुओ के वोट बैंक में डाका डाल कर डकारने के चक्कर में हिंदुओं के मसीहा कहलवाने का खेल खेला..., मिस्टर क्लीन ने इसी आड़ में, अपने इटली के रिश्तेदारों को अमीर बनाने के खेल में बोफोर्स घोटाले में, सत्ता से हाथ धो बैठे ....तब वी.पी . सिंग ने पार्टी से बगावत कर , इसका खुलासा करने के लिए मिस्टर क्लीन की कमीज पहन कर घोषणा की..... मेरा पहला मुद्दा होगा... बोफोर्स घोटाले में देश के भीतरी व विदेशी दलालों से दलाली की रकम वापस लाना.....,और भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से सरकार बना ली , जब वे प्रधानमंत्री बनें तो ... बोफोर्स घोटाला तो कूड़ेदान में चला गया , उन्होंने अपनी सत्ता १० सालों तक सुरक्षित रखने के मकसद से दलित वोट बैंक का, आरक्षण का पत्ता फेक कर... आम्बेडकर जयन्ती को राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा कर , मंडल कमीशन की रिपोर्ट, जो इंदिरा गांधी ने दबाकर रखी थी , वह लागू कर दी तो, इसके प्रतिरोध में अनशन की जगह (जो आज तक ऐसा आत्मदाह आन्दोलनदुनिया में कहीं भी नही हुआ है) सैकड़ो छात्रों ने आत्मदाह की कोशिश की और गौतम गोस्वामी व अन्य लोगों की मौत हुई , बाबरी मस्जिद को राम मंदिर के राजीव गांधी के मुद्दे को कमंडल कहकर भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री वी.पी . सिंग की सत्ता ११ महीने में ही पटरी से उतार ली, तब स्वय राजीव गांधी के पास बहुमत नहीं था , चंद्रशेखर के पास ३९ सांसद थे (केन्दीय मंत्री मंडल में ८४ लोगो की जगह थी चंद्रशेखर के पास ३९ सदस्य थे, उन सबकी लाटरी लग गई और वे रातों रात मंत्री बन गए ) , ...बाहर से समर्थन देकर उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया गया , और चंद्रशेखर को प्रधानमंत्री बन्ने के बाद देश की आर्थिक स्तिथी का पता चला की जो मेरा भारत महानका नारा था , उसी की आड़ में देश पर कर्ज का भार बढा है, और मजबूरी से उन्हें देश का सोना बेचना पडा
बाबरी मस्जिद मुद्दे पर.... प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने मुस्लिम नेताओं को बुलवाकर स्पष्ट शब्दों में समझाया , देखो.?, आप लोग की संख्या कम है.., मेरे पास पुलिस बल भी नहीं है , इसमें गरीब लोग मारे जायेगे , मै आपकी पसंद के अनुसार, जगह चुनकर, आपको मस्जिद बनवाकर दूंगा .. , मुसलिम नेता भी मान गये थे , तब वहाँ के सुरक्षा दल के एक सिपाही ने यह खबर केन्द्रीय मंत्री शरद पवार से कही , शरद पवार ने राजीव गांधी को भड़काया , यदि यह मुद्दा सुलझ गया तो...???? साम्प्रदायिकता का खेल हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा , और उसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की कुर्सी खिसक गई .... और भारतीय जनता पार्टी ने राम रथ को सत्ता का रथ बनाया

वही उत्तर प्रदेश मे मुस्लिमों के मसीहा बनकर, मुलायम सिह मुल्लाकी छवि बनाकर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनकर , उत्तर प्रदेश को घोटाले से , साम्प्रदायवाद व घुसपैठीयो को संरक्षण देकर... उल्टा पुल्टा प्रदेश बनाकर अब तक १ लाख करोड़ से ज्यादा के घोटालों के अंजाम देकर ,अब सी.बी.आई.का नाम सुनकर काँप उठते है...मुजफ्फरनगर को मौजपुर बनाकर, अब देश के राम बनकर बहुसंख्यक हिन्दू को एक आस्था के नाम पर, विकास का मुद्दा छोड़कर, भ्रष्टाचार की लूट में अपने पार्टी को रावण की लंका के रूप में विकसित करने का खेल खेल रहे है बाबरी मस्जिद मुद्दे पर.... प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने मुसलिम नेताओं को बुलवाकर स्पष्ट शब्दों में समझाया , देखो.?, आप लोग की संख्या कम है, मेरे पास पुलिस बल भी नहीं है , इसमें गरीब लोग मारे जायेगे , मै आपकी पसंद के अनुसार, जगह चुनकर मस्जिद बनवाऊँगा , मुसलिम नेता भी मान गये थे , तब वहा के सुरक्षा दल के सिपाई ने यह खबर केन्द्रीय मंत्री पवार से कही , शरद पवार ने राजीव गांधी को भड़काया , यदि यह मुद्दा सुलझ गया तो...???? साम्प्रदायिकता का खेल हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा , उसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की कुर्सी खिसक गई 

Sunday, 26 November 2017

२६ नवम्बर १९४९ को देश का संविधान दिवस माना गया है .., वहीं २६ नवम्बर २००८ ..., देश के इतिहास में सत्ता के गद्धीदारों की गद्दारी के रूप में जाना जाएगा ..जागो देशवासिओं.., फ़्रांस से हमें सिखना होगा.., अब राजनीती नहीं.., राष्ट्रनीती का वक्त आ गया है... कसाब का हिसाब V/s फ्रांस के पेरिस पुलिस का पौरूष


२६ नवम्बर १९४९ को देश का संविधान दिवस माना गया है .., वहीं २६ नवम्बर २००८ ..., देश के इतिहास में सत्ता के गद्धीदारों की  गद्दारी के रूप में जाना जाएगा ..

मुंबई आतंकी हमले के समय देश के सहायक पुलिस इंस्पेक्टर  तुकाराम ओंबले ने...,   आतंकवादी घटनाओं को राजनैतिक रंगा सियार से सत्ता में अपना प्रभुत्व ज़माने के राजनैतिक खेल को ख़त्म कर , राजनेताओं को उनकी  अवकाद  अपने रगों में दौड़ते खून में राष्ट्रवादी उबाल से दिखा दी थी , जब अजमल कसाब के AK -47 से दनदनाती फव्वारे की गोलियों की परवाह न करते हुए बन्दूक की नाल का जमीन की तरफ  मोड़ते  हुए अपनी जान गंवाकर इस आतंकवादी को ज़िंदा पकड़ वाने में मदद की ..., लेकिन राजनेता अपना श्रेय लेने की होड़ में...,  इस महानायक का नाम धूल में मिटा दिया था लेकिन अंततः  राष्ट्रवादी ताकतों के दवाब से  तुकाराम ओंबले अशोक चक्र से नवाजे गए.
   
जागो देशवासिओं.., फ़्रांस से हमें  सिखना होगा.., अब राजनीती नहीं.., राष्ट्रनीती का  वक्त आ गया है...

कसाब का हिसाब V/s  फ्रांस के पेरिस पुलिस का पौरूष
२६/११ के कसाब का हिसाब ..जय हो..राष्ट्रवादी मच्छरसच में तुम तो हो ज्ञान के सागर ...

१.  हमने मुम्बई आतंकी हमले  का ७२ घंटों को घाव  बनता दिखाकर दुनिया को जीवंत प्रसारण दिखाकर..सहानूभूति की गुहार लगाते रहे .., जबकि फ़्रांस ने त्वरित कारवाई कर इसे ५ घंटे में ख़त्म कर दिया.

२.  हमारी सुरक्षा एजेंसी दिल्ले से मुम्बई हवाई  जहाज से पहुँची लेकिन २४ घंटे तक ताज व ट्रिडेंट होटल में आतकवादियों से लड़ने की अनुमति नहीं मिली .

३.  वहीं नरीमन हाउस पर हमले पर इजराईल ने हमें बुजदिल कौम करारते हुए कहा यदि तुममें हौसला नहीं है तो हमारी सुरक्षा एजेंसी इसका त्वरित निदान करेगी 

४.  हमारे सत्ताखोरों ने इस प्रसारण से आतंकवादियों के आकाओं को सुलभ मार्ग दर्शन से लोगों को चुन चुन कर मारने का आदेश मिला जबकि फ़्रांस की सरकार ने इस कार्य को पूरा न होने तक इसकी सूचनाएं गुप्त रखी

५.  फ़्रांस के फूटबाल मैच के दौरान बाहर निकलकर राष्ट्रपति स्टेडियम के कंट्रोल रूम से जानकारी लेकर आगे की कारवाई का मार्गदर्शन करते रहें.., जबकि मुम्बई के कंट्रोल रूम से मुख्य मंत्री से राजनीती के संतरी ने आने की जरूरत नहीं समझी.., जबकि महाराष्ट्र के पुलिस कमिश्नर हसन गफूर .., जिन्हें कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी दी थी .., इस भयावता देखकर मार्ग दर्शन देने की बजाय  वहां से रफू चक्कर हो गए.

६.  हमने मौत के आंकड़े जोर शोरों से प्रचार कर..,मीडिया भी TRP से मालामाल हो गई वहीं  फ्रांस इसे अपनी अस्मिता पर भयावह हमला मानकर दुनिया को मौत के सही आंकड़े न बताकर  इसे  अपनी खिल्ली मानकर, इसके प्रतिशोध की तैयारी कर रहा है.

७.  दोस्तों बाटला हाउस के आतकवादियों के मुठभेड़ में देश के  लिए अपनी जिंदगी कुर्बान करने वाले अपनी नौकरी में सात बार वीरता पुरस्कार पाने वाले जांबाज शहीद इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा द्वारा २ आतंकवादियों को ढेर करने पर.., इसे फर्जी मुठभेड़ की संज्ञा देकर  कोर्ट द्वारा फटकार मिली , वही हरीश रावत द्वारा ५० लाख की नकद राशि विधवा शर्मा के घर जाकर देने पर विधवा ने फटकारते हुए यह नकद राशी लेने से इनकार करते हुए कहा मेरी पति  की शहादत पर राजनीती का शहद मत खाओं.

८.  वहीं, इशरत जहां को भी फर्जी मुठभेड़ कहने  पर अमेरिका .
के जासूस हेडली द्वारा अल कायदा का एजेंट करार देने व सुप्रीम कोर्ट द्वारा लताड़ मिलने पर देश के राजनेताओं से बुध्हिजीवियो बुद्धीजीवियों की जबान बंद हुई

भाग -२


जाने.., आतंकी कसाब को कोहिनूर हीराबना कर सत्ता चमकाने का खेल.....

१. एक आतंकवादी को “अति विशेष अतिथी” बनाकर १०० करोड़ रूपये से ज्यादा खर्च..... 

२. इंग्लैण्ड के कोहिनूर हिरे की रखवाली से जादा सुरक्षा .......

३. उम्र जानने के लिए दांतों की जांच.......

४. छीक आने पर नशेड़ी नेताओं को बुखार.......

५. गाली देने पर विशेष चिकन बिरयानी....... 

६. तबियत व सुविधा की कमी जानने के लिएमहाराष्ट्र के गृह मंत्री आर.आ. ,पाटिल व भा.ज.पा के विपक्षी नेता एकनाथ खडसे की सद्भावना मुलाक़ात....... 

७. मुम्बई के सरकारी... जे.जे अस्पताल में लाखों रूपये खर्च कर विशेष अतिथी के रूप मेंईलाज के लिए अलग कमरे का निर्माण , लेकिन कसाब का वहाँ नही हुआ पदार्पण.......

८. कसाब को कोहिनूर हीरा मानकर , अमेरिका को बाप मानकर लगाई बड़ी गुहार , पाकिस्तान द्वारा अपने देश का नागरिक न होने की कहकर... , हिन्दुस्तान को दी दुत्कार...

९. टी.आर.पी. से प्रिंट व मीडिया बना मालामाल....... 

१०. कसाब बना अन्तराष्ट्रीय चमक वाला हीरा....... 

११. आर्थर रोड जेल के कैदियों को मलाल , हमारे एक ओराप की नाही है , क़द्र ...???. और ३०० से ज्यादा हत्या करने वाला अपराधी कसाब है.... भद्र ....????????????? .......

१२. पुलिस द्वारा कसाब की शारीरिक क्षमता जांचने पर.... कसाब १० से भी ज्यादा पुलिस वालो.पर पडा भारी... पुलिस बल भी हक्का बक्का....????? ....... 

१३. सुनवाई में कसाब के लिए विशेष , मीडिया व्यवसायी कीव समाचार वाहनों की भीड़ से ट्रैफिक जाम , रोड पर चलने वाली जनता परेशान....... 

१४. आरोप पत्रों के कागजो का वजन , कसाब से दुगना ... और वकिल जजों , मीडिया की कमाई १०० गुना.......

१५. कसाब के खर्च का हिसाब... राज्य सरकार के दिवालिया होने के बाद में ... केंद्र सरकार द्वारा पैसे देने में आनाकानी....... 

१६. इतनी VVVVV.... IIIIII..... PPPPP.... अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा के सुरक्षा से... कसाब के सुरक्षा का कवच भारी.......
१७. करोड़ों के अंडा सेल में उसने देश की कितनी मुर्गी मारी ...इसका कोई हिसाब नहीं है...??????????? .......

दोस्तों यह सब देखकर, “अति विशेष अतिथी” फांसी की कतार में रहकर ....आजीवन मुर्गीया न खाता रहे ... तब....एक राष्ट्रवादी मछर को बहुत गुस्सा आ रहा था , वह देश की मुर्गीयों (खजानों) को ही न खाली कर रहे है ... व इसके आड़ मेंसत्ताधारी सत्ता के नशे की शराब सेदेश के बड़े घोटालों व सीमा पर जवानों की सुरक्षा व अन्य समस्याओं को वे मीडिया चैनलों के कोट से ढक रहे है. 

१८ इसी की आड़ में बुलेट प्रूफ से हत्यारों की खरीद में घोटाला , ऐक-४७ के ४७ से..ज्यादा बार खरीद के नाम से योजनायें बनाना...

१९केद्र सकार द्वाराहत्यार देने की बात पर राज्य सरकारों का इनकार करनाविदेशी प्रशिक्षको द्वारा कमांडों ट्रेनिग से पुलिस दल काट्रेनिग से भागना , शेष मिले हत्यारोंस्पीड बोटों व अन्य का जंग से खराब होना... 

२० महाराष्ट्र के गृहमंत्री का स्काटलैंड पुलिस से शहर की सुरक्षा के नाम से विदेशी दौरा कर , सी.सी.टी.वी.लगाने की कीमत बार बार बढाए जाने पर भी . कैमरे की योजना से जनता को बहक्लाना...

२१ कसाब के स्वागत की प्रेरणा से आतंकवादियों द्वाराधमाके से अपना कर्म के चुपचाप निकल जाना...

२२. हेमत करकरे व अन्य की मौत पर , आतंकवादी से ज्यादा आरोप... पार्टीयो के अंदरूनी आरोपों से सत्ता हांक रहे थे...


तब एक राष्ट्रवादी मच्छर , गुस्से से लाल पीला होकरदेश के महाडॉन का रक्त चूसकर , डेंगू के बीज का महादान करअपने जज्बे से कसाब का हिसाब करउसे हमेशा-हमेशा के लिए सुला दिया ...


जय हो.... मच्छरों के महाबली , आपने तो अपने डंक से.... अंडा सेल को भेदकर (जिसे सता के नशेड़ी..अभेदबुलेट प्रूफ , बम प्रूफ कहते थे)... सच में आपके बहादुरी के सामने , भारत को रत्न समझक्र लूटने वाले नेताओं का नशा उतारने की एक मशाल हो....युवाओं को प्रेरणा की एक मिशाल हो... मच्छरों में बेमिसाल हो.... देश आपका ऋण कभी नहीं चुका सकता है....तुम्हे कोटि –कोटि प्रणाम ....क्योकि इसकी भनक तो प्रधानमंत्री मौन मोहन सिंग को भी नहीं लगी....????



२६/११ के हमले के ९  साल, विदेशी कसाब बना था, सत्ताखोरों की देशी शराब, दुनिया का एक मात्र कैदी जो जीते जी जन्नत की जिंदगी जी कर, एक राष्ट्रवादी मच्छर ने, जो सत्ताखोरों के खेल में, गुस्स्से से लाल-पीला हो गया था , तब उसने प्रतिशोध में डेंगू के विषाणु से, इस सत्ता के दुलारे कसाब को, अल्ला को प्यारा किया..., सत्ताखोर इस मच्छर के खेल से भौंचके रह गए... सत्ता चमकाने के लिए, यह श्रेय अपने नाम करने के लिए, इसे, अपना धेय्य कहकर..., आनन् फानन में कसाब के फांसी की घोषणा कर दी गई...

इसी आड़ में आज १०० करोड़ के खर्च व १०० करोड़ से ज्यादा के सुरक्षा के नाम से खरीदी गई स्पीड बोट आज कबाड़ में पड़े है... क्योंकि इसमें डीजल के खर्च व पुलिस कर्मचारियों को ट्रेंनिंग के खर्च का बजट ख़त्म हो गया है...CC TV बंद होकर धुल फांक रहें हैं...

२६/११ के कसाब का हिसाब ..जय हो.., राष्ट्रवादी मच्छर, सच में तुम तो हो ज्ञान के सागर ...


५  साल पुरानी वेबस्थल व फेस बुक की पोस्ट  https://www.facebook.com/BapuKeTinaBandaraAbaBanaGayeHaiMastaKalandara/    
बापू के तीन बंदर, अब बन गये है मस्त कलन्दर  http://meradeshdoooba.com
बोलू : अरे देखू ,तु क्या देख रहा है ?

देखू : तुझे मालुम नही है, ये देश डूब रहा है, देश मे गोल माल हो रहा है

बोलू : देश डूब रहा है, अरे ये तु क्या कह रहा है?

देखू : हा, भ्रष्टाचार की भयकर बाढ आई है , सुनामी भी इसके सामने कुछ नहीं है,
सीमाओ पर दुश्मनो की लाल बत्ती लगी हुई है, और देश के सत्ताधारी लाल बत्ती गाडी के लिये आपस मे लड रहे है.

बोलू : और आगे , तू क्या देख रहा है?
देखू : देश भूखमरी के मार से मर रहा है महगाई से आम जनता त्राहि- त्राहि मचा रही है

बोलू :और क्या क्या देख रहा है?

देखू : इस जनता के त्राहि- त्राहि के पीछे, दूर एक राष्ट्रवाद का लंगूर दिख रहा है

बोलू :तो हम तीनो को देश छोड कर भागना पडेगा, तुझे तो मालुम है जब संसद भवन परिसर मे हमारे वंशज बन्दर, संसद की लूट मारी देखने के लिये जमा होती है तो हमारे सत्ताधारी, भ्रष्टाचारवाद का लंगूर किराये पर लेकर,हमारे बन्दरो को भगातें है.

देखू ,अब मुझे डर लगता है कही वह राष्ट्रवाद का लंगूर न आ जाये?

देखू : नही बोलू , वह राष्ट्रवाद का लंगूर है और बेहद भुखा है, उसका शरीर अस्ति-पिजर का ढाचा है , उसे 65 साल से उसे खाना नही मिला है. वह मरणासन्न स्थिती मे है, यदि देश की जनता उसका सम्मान करे तो वह लंगूर हमे नही भगायेगा ,वह लंगूर बेहद इमानदार है, वह लंगूर बहुजन हिताय - बहुजन सुखायके सिद्धांत का पालक है, उसके आने से देश मे खुशहाली आ जायेगी, यही नही संसद व देश के लूटेरे भी उसको देखते ही भाग जायेगे

बोलू : तो उस लंगूर को हमारे देशवाशी ठीक क्यो नही हो रहा है?

देखू : बोलू तुझे पता नही इसके पीछे बडा केमिकल लोचा है, इसमे हमारे बापू के नाम को घसीट कर, इस लंगूर को और कमजोर बनाया जा रहा है

बोलू : अरे...??? वह कैसे ...?? कैसे ....,.???

देखू : हमारे भ्रष्टाचारी नेता जनता को अलगाववाद जातीवाद, भषावाद ,धर्मवाद की शराब पीलाकर, जनता से कहते है कि तुम्हारे पालनहार केवल हम और हम ही है, और उपर से अपने को गाधी के अहिंसा के सिद्दांत की औलाद कहते है

बोलू : भ्रष्टाचार.... ??? तो क्या यह राष्ट्रवाद का लंगूर मर जायेगा ?

देखू : नही बोलू यह जनता पर निर्भर करता है, यदि जनता दो-तीन् सालो मे इस की सेहत ठीक नही करती है तो देश या तो टूट सकता है या देश की जनता, एक मुसीबत मोल ले सकती है या एक नई गुलामी के बन्धन मे , नई गुलामी के जंजीर मे फँस सकती है
बोलू :ठीक है जब तक राष्ट्रवाद का लंगूर नही जागता है, तब तक, तु मुझे देश का हाल दिखा?

भाग -2

बोलू :अब तू क्या देख रहा है ?

देखू : सींघम अभी-सेक्स कर रहा है.

बोलू :अरे, तूने तो दिल्ली की तरफ दूर्बीन लगा रखी है वहाँ सिंघम कैसे सेक्स कर सकता है? वहा कोइ जंगल भी नही है?

देखू : हाँ, सिघम कोर्ट रूम मे सेक्स कर रहा है.

बोलू : सिघम और सेक्स???? कोर्ट रूम,,??? लेकिन कोर्ट रूम मे सिहनी कैसे पहुची

देखू : अरे बोलू तुझे पता नही है , देश के जंगलो से ज्यादा जंगल राज तो दिल्ली मे है
और वह जज बनने के चक्कर मे फंस गइ है.

बोलू : तो इसका मतलब यही है क्या? सभी देश की महिला जज अपने प्रदेशो के सिंघम का शिकार हुई है.

देखू : देश की महिला जज की सच्चाइ मेरे दूर्बीन से तो पता नही चलेगी? हाँ, डी.एन.ए
टेस्ट सच्चाइ जरूर उगलेगा,

बोलू : लेकिन दिल्ली के सिंघम ने देश के संविधान की धज्जिया उडा दी है क्या संविधान उसे दंड देगा ?

देखू :इस देश मे जो संविधान का रक्षक होता है वह दंड का अधिकारी नही बल्कि वह संविधान का संरक्षित सदस्य होता है.

बोलू : हाँ, अब मुझे समझ मे आया, एक नारायण जिसकी नारी रामायण बहुत मशहूर है वह भी हैदराबाद के जंगल में सेक्स करते पकडा गया , सबसे बडा ताजुब्ब है कि, उसे दिल्ली के जंगल से, हैदराबाद के जंगल मे, संविधान की रक्षा के लिये भेजा गया था. और संविधान ने उसके इस कृत्य के लिये दंडित करने की तो बात छोडो, उसके सेक्स सीडी पर रोक लगाकर सम्मानित किया गया

देखू : अभी नारी नारायण समाचार वाहिनी मे मै साक्षात्‍कार दे रहा है । संवाददाता पूछ रहा था की क्‍या यह सही है?, नारी नारायण समाचार वाहिनी मे बेधडक कह रहा है, आपने जो मेरे चल चित्र देखे है ,मै अपने चाल - चरित्र मे उससे भी कही बहुत आगे हू., पूछो ? आगे और क्‍या पूछना है ?

बोलू : उसके कहने का मतलब यही है. कि इस क्रिया के लिए मुझे बापू द्वारा प्रेरणा मिलकर, प्रेरित हुआ हूँ । मतलब वह अपने चाल - चरित्र मे बापू का चाल चरित्र जोड रहा है?
.
बोलू :अरे सुनू,..... तू क्या क्या सुन रहा है?

सुनू : देश से इतने काँल आते है, कि एक काँल सुनता हू तो चार-पाँच आनेवाली काँले इंतजार मे रहती है
बोलू : अभी तू क्या सून रहा है यह तो बता ?

सुनू : एक जायसवाल नाम का कोइ मंत्री है, उसके मुँह मे कोयले की कालिख लगी है और वह कह रहा है , मुझे तो नई शादी व नई बीबी मे जो जोश आता है , उससे कोइ बडा सुख नही है

बोलू : यह तो नारी नारायण का भी बाप निकला है
इस वेबस्थल का मुख्य उद्धेश्य है...
Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.....
www.meradeshdoooba.com (a mirror of india) स्थापना २६ दिसम्बर २०११ कृपया वेबसाइट की ६६०  प्रवाष्ठियों की यात्रा करें व  E MAIL द्वारा नई पोस्ट के लिए SUBSCRIBE करें - भ्रष्टाचारीयों के महाकुंभ की महान-डायरी

Tuesday, 14 November 2017

१९४७ में भारतमाता के अंग भंग से लहू लूहान से घायल हिन्दुस्तान के पांवों में अंगरेजी संस्कृति की पायल डाल कर विदेशी हाथ , साथ , विचार , संस्कार से अपने को स्वंय –भू , देश का चाचा घोषित कर “बाल दिवस” व भारत रत्न से नवाजा..., इस खेल का पर्दाफ़ाश.., जब चीन ने नेहरू को यों कहे देशवासियों को थप्पड़ मारकर देश के टुकड़े कर , हड़प कर, नेहरू की छद्म भूमिका /स्वांग की पोल खोल कर रख दी ..


नेहरु का इस्लाम को सलाम , हिन्दुओं को गुलाम के तत्व से गौ ह्त्या का विरोध व अपने को हिन्दू धर्म में पैदा होने व खानपान में मुस्लिम व संस्कृति से इसाई के स्वांग से अपने को शान्ति दूत कह...!!!, १९४७ में सत्ता परिवर्तन में एडविना बेंटन के साथ जिन्ना व नेहरू के समान शारीरिक संबध से.., प्यार के नशे के फोटो को एडविना बेंटन ने जनता में सार्वजनिक करने के धौस से .., नेहरू व जिन्ना के राजनैतिक जीवन की ह्त्या होने के भय से .., देश के बंटवारे के धार से देश के बंटवारे की तलवार से केक (cake) की तरह काट कर  सत्ता परिवर्तन को आजादी शब्द से भरमाकर, हिन्दू बहुल क्षेत्र पाकिस्तान को  सौंप कर..., नेहरू ने १४ नवम्बर, एडविना बेंटन ने २८ नवम्बर व जिन्ना के जन्म दिन २५ दिसम्बर के क्रिसमस को   अपना नया राजनैतिक  जन्म दिन १५ अगस्त को ही मना लिया था ...,

गांधी के सत्य व ब्रह्मचर्य के खेल के राज से सेक्स के खेल  की चाबी भी  एडविना बेंटन के पास थी.., यूं कहें आजादी का झांसा एक BLACK-MAIL EXPRESS से ७० सालों  से आज तक एक काला दिवस ही साबित हो रहा है..., देश कर्ज के गर्त में आज भी डूब रहा है  

१९४७ में भारतमाता के अंग भंग से लहू लूहान से घायल हिन्दुस्तान के पांवों में अंगरेजी संस्कृति  की पायल  डाल कर विदेशी हाथ , साथ , विचार , संस्कार से अपने को स्वंय –भू , देश का  चाचा घोषित कर “बाल दिवस” व भारत रत्न से नवाजा...,
इस खेल का पर्दाफ़ाश..,  जब चीन ने नेहरू को  यों कहे देशवासियों को थप्पड़ मारकर देश के टुकड़े कर , हड़प कर, नेहरू की छद्म भूमिका /स्वांग की पोल खोल कर रख दी ..

दोस्तों बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है की एक अय्याश ..., व्यभिचारी के जन्म को बाल दिवस के रूप में आज भी मनाया जाता है..., इतिहास को घोर अँधेरे  में रख कर ...
यदि हिन्दू कैलेंडर के नव वर्ष के प्रथम दिवस को बाल दिवस के रूप मनाया जाय तो देश की  तस्वीर, प्रगति शील पथ से एक नए सूरज की किरण से  अलग ही होगी ..


यह मोतीलाल नेहरू का योग या संयोगकहा जाएजो १४ फरवरी के ठीक ९ महीने बाद१४ नवम्बर को जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...!!!!, 
याद रहे...मोतीलाल नेहरू राजा-महाराजाओं के विवादों के वकालत से अपने बेशुमार आय सेअधिक व्यय-भिचार से हिंदु संस्कृति को भ्रष्ट करने की वजह से काश्मीरी हिन्दुओं ने उन्हें अपने समाज से निकाल फेंका था...
और इसी क्रिया को उनके पुत्र जवाहरलाल नेहरू ने बरकरार रखते हुए..,सत्ताल
ोलुप बनकरसत्ता परिवर्तन (१९४७) के बाद कहा था 

नेहरु का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य था... जवाहर लाल नेहरुबहुत बार कहा करते थे कि ..., “मैं जन्म के संयोग से हिन्दू हूँसंस्कृति से मुसलमान और शिक्षा से अंग्रेज हूँ.” उन्हें हिन्दुओ की भावना की रत्ती भर भी परवाह नहीं होती थी,जिनके वोटो के बल पर उन्होंने सत्ता प्राप्त की थी.

वही हालएक तरफ तो पंडित नेहरु के नातीराजीव गाँधी का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य दिया..राजीव गांधी ने हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री होते हुए भी सन्डे टाइम लन्दन को एक साक्षात्कार में नि:संकोच कहा की ‘मेरे नाना जवाहरलाल नेहरु एक नास्तिक (एग्नास्टिक) थे. मेरे पिता पारसी (गैर हिंदू) थेमेरी पत्नी इसाई हैऔर मैं किसी धर्म में विश्वास नहीं करता.’ 

क्या..??, एक अय्याश व्यक्ती के नाम “बाल-दिवस” मनाना उचित है..,
देश का बाल दिवस तो हिन्दू संस्कृति के अनुसार “गुड़ी पाडवा” के दिन , नूतन दिवस मेंनई किरणों से “बाल निर्माण” के साथ “राष्ट्र निर्माण” की अलख सेहोतो...देश एक नए उजाले की ओर अग्रसर होगा..और देश के २०० सालों की गुलामी से उपजी..६८ सालों की अंग्रेजीयत की बीमारी दूर होगी... 

देश के धनाड्य वर्गों केअंग्रेजी संस्कृति का बखान करने वालों कोयह देश का १२५ वां WELL-IN-TIME और CHILDREN DAY- CHILD-MOTHER, RUN DAY के अनुयायिओं को समर्पित... 

बाल दिवस या भूखमरी से बालकों काबलि दिवस... देश में सालाना ३ करोड़ बालकों की..कुपोषण ईलाज के अभाव से सरकारी योजनाओं को भोजनायें बनाकरमृत्यु ...

यूरोपीय देशों में अवैध रूप से रोपे गए बच्चे..उनकी सरकार गोद ले लेती हैं...व उनके लालन-पानन की व्यवस्था की जिम्मेदारी सुचारू रूप से चलाती है...

लेकिन मेरे देश में गरीबी रेखा व उसके नीचे वैध बच्चे,जो बुढ़ापे में सहारा होते हैं.. , माफियाओं द्वारा चुराकरभीख मांगने व वेश्या वृति व्यवसाय में धकेल दिए जातें हैं...,
देश में पुलिस के नाक के तले , निठारी काण्ड से बच्चे, , मानव भक्षियों के शिकार होकरपुलीस थाने के सामने नालों में फेंक दियें जाते है...

सत्ताखोर व पुलिस भी इसे माफियाओं का आम खेल मानकर..रिश्वत की रूई से अपनेआँख- कान बंद कर लेते है...गरीबी लोग रोते –बिलखते इन अपने मासूम बच्चों की तड़फ से अपनी नारकीय जिन्दगी गुजार देतें है...,

अभी २ दिन पाहिले हीसुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लताड़ लगाते हुएपूछा...देश के करोड़ों..लापता मासूम बच्चों के बारे में क्या कारवाई की है...

याद रहे..अन्ना आन्दोलन के चरम सीमा में पहुँचने के पहिलेजब उन्होंने रामलीला मैदान में रैली के लिए अनुमति मानीतो मनमोहन सरकार ने उन्हें इस रैली की जगहजयप्रकाश नारायण पार्क में रैली की अनुमती दी..वह भी शर्तों से.. कि रैली में ५००० से ज्यादा की भीड़ नहीं होगीव ५० से ज्यादा कारों व स्कूटर की पार्किंग नहीं दी जायेगी..जैसे यह अन्ना का शादी समारोह हो..

उसी समय यूरोपीय देशों में नारी का पुरूषों सेसमाधिकार की आवाज में , महिलाओं ने तर्क के साथ कहा कि यदि पुरूष बिना ऊपरी वस्त्र के सडकों पर चल सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं ...

इसी विरोध मेंउन्होंने ऊपरी वस्त्र खोलकर सडकों में SLEDGE –SHOW का प्रदशन प्रदर्शन किया ...तब हमारे देश की INDIAN व अंग्रेजी से पेट भरने वाली धनाढ्य महिलाओं ने इस आन्दोलन के समर्थन में गुहार लगाई तोदेश का महिला अधिकार आयोग भी इस की मुखालत करते आगे आया तो..उनके मनानुसार उन्हें , जंतर मंतर से संसद भवन तक SLEDGE –SHOW की अनुमती मिली ...,

अभी तोखुले रास्ते में “चुम्बन दिन” मना कर इंडियन वर्ग अपने को अभिमानीत कहगर्व मना रहा है...

विदेशी धन , विदेशी संस्कृति के निवाले...को देश की जनता पर थोपने का अधिकार...

क्या यह अंग्रेजी आवरण के छुपे खेल में भारतीय संस्कृति पर पर प्रहार नहीं है...!!!!

इस वेबस्थल का मुख्य उद्धेश्य है...,
 Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.....www.meradeshdoooba.com (a mirror of india) स्थापना २६ दिसम्बर २०११ कृपया वेबसाइट की ६५७  प्रवाष्ठियों की यात्रा करें व E MAIL द्वारा नई पोस्ट के लिए SUBSCRIBE करें - भ्रष्टाचारीयों के महाकुंभ की महान-डायरी    

    

Monday, 2 October 2017

यदि २ अक्टूबर को उनके अतुल्यनीय साहस की प्रेरणा व आने वाले सालों में हम यह दिवस लाल बहादुर शास्त्री, की जयन्ती के रूप में मनाएं तो देश के युवकों में लाल बहादुर शास्त्री के कार्यों से प्रेरित होकर, राष्ट्रवाद के खून का संचार से, जो काम गांधी व नेहरू न कर सके, हम जल्द ही विश्व गुरू व सर्वोपरि हो जायेंगे..., दोस्तों आप अपनी राय दें.


यदि २ अक्टूबर को उनके अतुल्यनीय साहस की प्रेरणा व आने वाले सालों में हम यह दिवस लाल बहादुर शास्त्री, की जयन्ती के रूप में मनाएं तो देश के युवकों में लाल बहादुर शास्त्री के कार्यों से प्रेरित होकर, राष्ट्रवाद के खून का संचार से, जो काम गांधी व नेहरू न कर सके, हम जल्द ही विश्व गुरू व सर्वोपरि हो जायेंगे..., दोस्तों आप अपनी राय दें..११ जनवरी, आज एक महान फ़कीर प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ५०वी पुण्य तिथी पर अश्रुपूर्वक प्रणाम..,जय जवान किसान का सलाम..,

अपने १८ महीनों के कार्यकाल में देश में अकाल व विदेशी आक्रमण के काल के गाल में निगलने वाले अजगरों को अपने फौलादी जिगर से परास्त कर दिया था . युद्द में पाकिस्तानी के पठान कोट के पठानों की कोट उतार कर दुश्मनों ने घुटने टेक दिए थे 

१९६५ की लड़ाई की जीत की ५० वीं वर्ष गांठ में, मीडिया ने TRP की दौड़ में इसे जोर शोर से दिखाया जबकि शास्त्री के योगदान को नगण्य माना.., आज उनकी ५०वी पूण्य तिथी में देश में सन्नाटा ही नहीं, कांग्रेस व अन्य नेताओं में मुर्दानगी है 
आज उनकी मृत्यु के ५० साल बाद भी.., देश, विदेशी आक्रमण के घावों से घायल होकर.., हम, अपने घायल होने का सबूत देकर, विश्व से गुहार लगा रहें है .

एक ५० इन्च की काया व ५६/२ =२८ इंच के सीने वाले प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने कहा था हम शांति के पक्षधर है .., यदि किसी ने देश की तरफ बुरी निगाह डाली तो उसकी आँखें फोड़ दी जायेगी...

गरीबी अभिशाप नहीं होती है..इसे उन्होंने प्रमाणित किया था , वे इतने गरीब थे कि उनके पास चाय पीने के भी पैसे नहीं थे .., देश के कुओं के पानी का स्वाद व देश की माटी की खुशबू के महक ही उनके सफलता की सीढ़ी थी 


काश.., मोदीजे, यदि आज नोटों पर लालबहादुर शास्त्री का चित्र छापते तो नयी पीढी उनके आदर्शों से अभिभूत होकर देश को एक नई दिशा के ओर अग्रसर होती .

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(गांधी व कांग्रेस की २०० भयंकर भूले , Deshdoooba Community या वेबसाईट पर कृपया गौर से पढ़े ) 
१.लाल बहादुर शास्त्री ने अपने १८ महीने के शासन काल में नेहरू के १७ साल के कार्यकाल की गन्दगी साफ़ कर दी थी..
२.गांधी की गंदी राजनीती व जवाहर लाल नेहरू के जहर से देश ६८ साल के सत्ता परिवर्तन के शासन में कंगाल हो गया है...

३.शास्त्री जी के अल्प काल में, देश में राष्ट्रवादी भावना से जनता को ओत प्रोत कर, श्वेत क्रांती के साथ हरित क्रांती का जन्म हुआ, उनका आव्हान था शहर वालों, घर के आस पास जितनी भी खाली जमीन है उसमें अन्न उगाओ.., उनकी सादगी से जनता कायल थी , लेकिन कांग्रेसी घायल थे, उनकी अय्याशी पर रोक लगने से, भ्रष्टाचार ख़त्म कर उन्हें मजदूर बना दिया था 

४. उन्होंने, पूरे देश को उन्होंने आव्हान किया की सोमवार को एक दिन का उपवास रखे , इसके पहिले उन्होंने कहा जब मेरा परिवार उपवास में सक्षम होगा तो ही मैं राष्ट्र को आव्हान करूंगा..
५. दक्षिण भारत जो हिन्दी विरोधी था उन्होंने भी इसका तहे दिल से अपनाया, व देश भर मे होटल बंद रहते थी,

नेहरू के दिन के २५ हजार के खर्च की जगह प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री महीने में मात्र ३०० रूपये में सरकारी वेतन से घर चलाते थे 
उनकी जिदंगी एक अति सादगी व प्रधानमंमंत्री के रूप में सडक किनारे, रहने वाले एक गरीब जैसी थी
प्रधानमंत्री होने के बावजूद वे किराए के घर में रहते हुए उनकी रूस (मास्को) में ह्त्या हुई थी 
, लाल बहादुर शास्त्री हमेशा कहते थे सत्ता का स्वाद मत चखों..,देश की गरीबी के लिए काम करो, सत्ता के मद से अपने संस्कार मत बिगाड़ो, इसलिए उनके ६ बच्चे होने के बावजूद वंशवाद की परम्परा को तोड़ते ही अपन बच्चों को राजनीती में कदम रखने नहीं दिया, यहाँ तक की अपने बच्चो को सरकारी कार में बैठने नहीं देते थे..,

घर से प्रधानमंत्री दफ्तर में पहुँचाने के बाद सरकारी कार छोड़ देते थे, वे अन्य मंत्रियों से कहते थे आप इसका उपयोग करें 

८.. आजादी के आन्दोलन में अंग्रेज जब भी, कांग्रेसी नेता गिरफ्तार होते थे तो उन्हें जेल में विशेष खाना जैसे हलवा पुरी मिलती थी ..., लाल बहादुर शास्त्री वे खाना अन्य कैदियों में बाँट देते थे , कहते ऐसे मालपुआ भोजन से मैं बीमार पड़ जाऊंगा, और अन्य कैदीयों को बांटकर, वे भी खुश रहते थे...
३.जब उन्होंने रेल दुर्घटना की वजह से इस्तीफा दिया.., अगले दिन सरकारी घर खाली करने के पहले वे रात भर, बिना बिजली के रहे ..., कहा, मेरा पद चला गया है .., मैं सरकारी बिजली खर्च नहीं करूंगा ..
९.. प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके घर में कूलर लगा देखकर, उस कूलर को यह कहते ही वापस कर दिया कि मेरे बच्चों को इसकी आदत नहीं डालनी है

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१०... १९५२ से कांग्रेस के चुनाव चिन्हमें दो बैलों की जोड़ीसे, जवाहरलाल नेहरू ने चुनावी नारा आराम हराम हैके अपने अय्याशी पन को छिपाकर जीता , सत्ता में आते ही इन दो बैलों को सत्ता की विदेशी शराब पीला कर बेहोशी में रखा.... और बिना किसान के, देश की उपजाऊ जमीन को बंजर बनाकर , देश में भूखमरी पैदाकर, विदेशी अनाज से देशवासियों का लालन पालन किया, हमें ऐसा घटिया/सड़ा अनाज खिलाने को मजबूर किया गया, जो कि अमेरिका के सूअर भी नहीं खाते थे ... हमारे सेना के जवानों के हाथों में बन्दूक थमाने की बजाय शांती का गुलाबी फूलथमा दिया .... और हिन्दी चीनी , भाई-भाईके नारे में उसकी महक डालने से, नोबल पुरूस्कार जीतने की महत्वकांक्षा में सेना को नो बल कर दिया... हमारे से दो साल बाद, आजाद हुए चीनने अपनी ताकत बढाते हुए .... मौके की ताक में हमारे देश ४६ हजार वर्ग किलोमीटर पर कब्जा कर , नेहरू को थप्पड़ मार कर , नेहरू का नारा हिन्दी चीनी , खाई खाईमे बदल दिया और नेहरू का शांतीके नारें की देशवासियों के सामने पोल खोल दी 

११. जवाहर लाल नेहरू की मौत के बाद . प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इन दो बैलों का किसान बनकर ,अपने सवा चार फीट की काया को, राष्ट्रवादी बल से , इन अपाहिज हुए जवानों व किसानों में एक नया आत्मबल डाल कर , “जय जवान जय किसानके नारा को १९ महीने में सार्थक बना दिया. लेकिन...., देश के कांग्रेसी तो वंशवाद से भयभीत थे ... लेकिन उससे कहीं ज्यादा भयभीत विदेशी ताकतें थी, उन्हें अहसास हो चुका था {यदि हमारा देश दो साल और राष्ट्रवादी प्रवाहसे चलेगा तो हम हिन्दुस्तान आत्मनिर्भर बन जाएगा, और कोई ताकत उस पर राज नहीं कर सकेंगी} इसलिए , देश के लालको सुनोयोजित षड़यंत्र से मारकर, उन्हें दूध में जहर दे कर नीलीकाया में उनके पार्थीव शरीर को लाया गया , हमारे देशी कांग्रेसी ताकतों ने भी इसे हृद्याधात से प्राकृतिक मौत से, बिना पोस्टमार्टम के, डर से... कही पोस्टमार्टम करने पर , देशी व विदेशी ताकतों का पोस्टमार्टम न हो जाए ... आनन फानन में प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का शव दाह कर दिया , उनकी पत्नी अंत तक गुहार लगाती रही , मेरे पति की हत्या की जांच हो...

१२. ये वही काग्रेसी थे, जिन्होने लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद , उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उनके किराए के घर मे घुसकर धावा बोला, तब उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने अपनी अलमारी खोलकर कांग्रेसीयो को दिखाते हुए कहा , देखो?, ये मेरा काला धन है, ये हमारी सपत्ति है, कांग्रेसीयो ने छान बीन की तो उसमे , लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर कुछ कागज मिले , उन कांग्रेसीयों को लगा कि इसमे लाल बहादुर शास्त्री के अचल व काले धन की संपत्ति के दस्तावेज हैं.
जब कांग्रेसीयो ने दस्तावेजों को खंगाला तो वह बैक के कर्ज के पेपर निकले, जो लाल बहादुर शास्त्री ने, प्रधानमंत्री के कार्यकाल मे, अपनी नीजी कार, बैक के कर्ज से खरीदी थी, और कर्ज अदायगी मे असमर्थ होने पर, बाद मे वह कार बैक को लौटा दी थी. तो वे उन सभी काग्रेसीयों के चेहरे उतर गये और् उनके घर से खाली-हाथ मलते लौटे.

१३.उसी तरह लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद, प्रधानमंत्री बनने के बाद, इंदिरा गाधी भी उनके किराए के घर गई, और उनका घर देखकर, अपना नाक सिकुडते हुए कहा.. छी:मिडल क्लास फैमिली” ( “छी:मध्यम दर्जे का परिवार”)
१४.यह वही देश का लाल था , जिन्होने अपना जीवन देश को सर्मपित कर दिया था , और उस देश के लाल का मृत शरीर , विदेश से नीले रंग (मृत शरीर का नीला रंग, दर्शाता है कि शरीर मे विष का अंश है) मे आया, तो न कोई जाँच न कोई, न कोई पोस्ट मार्टम (शव विच्छेदन), आनन फानन मे अंतिम क्रिया कर दी गई,.ताकि मौत का रहस्य दब जायें?.

किसी ने अय्याशी की 
किसी ने तानाशाही की 
किसी ने वतन लूटा 
किसी ने कफ़न लूटा 
किसी ने देशवासियों को घोटाले की फ़ौज से मौज कर.., घोंट दिया

प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्रीजी आपकी ५०वी पुण्य तिथि का पुण्य देश पर है, हमारा प्रणाम , आपने शास्त्र के शास्त्र से जीत का मंत्र दिया , आज के सत्ताखोरों ने तुम्हारे आदर्शों को भूलाकर भ्रष्टाचार से देश को डूबों दिया 

देशी विदेशी शक्तियों ने जय जवान जय किसान के रखवाले की ह्त्या कर , देश की हरियाली ख़त्म कर दी... 

Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold..... भ्रष्टाचारीयों के महाकुंभ की महान-डायरी

नेहरू के १८ वर्षों के अय्याशी के सोच के शौच को मात्र १८ महीने में साफ़ कर व पाकिस्तान को धूल चटाकर ...., विश्व ने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को अब्राहम लिंकन के समक्ष खडा कर हिन्दुस्तान का लोहा माना कि देश की शक्ती "जवानों व किसानों" के बल से ही बढ़ती है ना की/कि विदेश से कर्ज लेकर ..., ब्याज देकर नेताओं की अय्याशी से जनता को ब्याज से प्याज के तरह आंसू निकाल कर, जो आज के परिपेक्ष्य में लोक तंत्र को लूट तंत्र का खेल खेला जा रहा है ..., इसे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने समाप्त कर दिया था


देश के २अक्टूबर के जन्मदाता, १८ महीनों के शासन में देश के सही मानों में भाग्य विधाता की भूमिका के सफल प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के दिन को गांधी जयन्ती नहीं देश का "शौर्य दिवस" के रूप में स्कूल में नव विद्यार्थियो को यह पढ़ाया जाय...कि कैसे एक निम्न वर्ग के प्रधानमंत्री ने निम्न श्रेणी को अपना जीवन व आदर्श मानकर, सभी सरकारी सुविधा का अपने परिवार के लिए त्याग कर .., मेरे घर से मेरी देश कीतस्वीर से ही देश में राष्ट्रवाद की लकीर खीची जा सकती है... यह सिद्ध किया



नेहरू के १८ वर्षों के अय्याशी के सोच के शौच को मात्र १८ महीने में साफ़ कर व पाकिस्तान को धूल चटाकर ...., विश्व ने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को अब्राहम लिंकन के समक्ष खडा कर हिन्दुस्तान का लोहा माना कि देश की शक्ती "जवानों व किसानों" के बल से ही बढ़ती है ना की/कि विदेश से कर्ज लेकर ..., ब्याज देकर नेताओं की अय्याशी से जनता को ब्याज से प्याज के तरह आंसू निकाल कर, जो आज के परिपेक्ष्य में लोक तंत्र को लूट तंत्र का खेल खेला जा रहा है ..., इसे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने समाप्त कर दिया था

इसी का तोड़ ..., “जय जवान जय किसान के नारे से निकल कर सभी भ्रष्ट नेता मजबूर होकर मजदूर हो गए थे ....

दोस्तों एक कटु सच्चाई ...!!!!, देशी राजनैतिक कलमुहों ने विदेशी ताकतों के साथ मिलकर इस महान अद्वितीय ७० साल के सत्ता परिवर्तन के इतिहास में जो आज भी सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री हैं.., की ह्त्या कर ..., “राजनैतिक कलमुहोंने देश का कल अन्धकारमय बना दिया.