Monday, 19 November 2018

इस लोकतंत्र में आप और हम वोट बैंक के मोहरे हैं.., ५साल के रोते हुए चेहरे हैं.. राममनोहर लोहिया ने सही कहा था ...,जिंदा कौमे ५ साल का इन्तजार नहीं करती है...दोस्तों.., इस सुधार के पीछे देश का सबसे बड़ा जहर “अशिक्षा” है.., जिसकी वजह से जनता गरीब होते जा रही है.., खोखले वादों के अफीमी नारों का शिकार हो जाती है.., और वोट बैंक की राजनीती करने वाले अपने को देश का मसीहा कहकर काले धन से अमीरतम बनकर अपने को अप्रतिम कहकर सत्ता को जातिवाद, भाषावाद,धर्मवाद व घुसपैठीयों के कोड़े से जनता को पीटकर,अधमरा कर, महंगाई बढ़ा कर कर्ज के गर्त से देश को डूबा रहें है.




सामाजिक सुधार , राजनैतिक सुधार यह देश की सुरक्षा के ढाल - तलवार है.. – वीर सावरकर

राजनैतिक सुधार पहिले की सामाजिक सुधार पहिले इस पर लोकमान्य तिलक व गोपाल गणेश आगरकर (सामाजिक सुधारक) के बीच  विचार मतभेद होने से खटास व  प्रतिद्वंदिता उत्पन्न हो गई थी जिसका समाधान वीर सावरकर ने दोनों पहलूँ को एक दूसरे का पूरक  बताते हुए कहा  समाज की सुरक्षा से राष्ट्र को उन्नत बनाने के लिए तलवार (आक्रमण) व ढाल (बचाव) के समायोजन जरूरी है 

अब, इस २० वीं सदी के चाणक्य. वीर सावरकर की विचारधारा के अनुसरण किये बिना अब २१ वीं शताब्दी मैं भारत का विश्वगुरू बनाने का सपना एक ढकोसला है
आज सीमा पार के घुसपैठ की मूठ से सामाजिक सुधार के नाम से वोट बैंक की दुधारी तलवार से राष्ट्र (भारत) तेरे तुकडे होंगें के नारों की गूँज है..

हर चुनाव में जनता को चुन चुन कर इस दुधारी तलवार से घाव किया जा रहा है ..., कही जातिवाद , धर्म् वाद , अलगाववाद  व आरक्षण की चमक से लोकतंत्र को मारने की धमक है’’  

सामाजिक सुधार , राजनैतिक सुधार को दरकिनार कर , हर दल ..., इसका हल निकालने में अपने को मसीहा कह कर जनटा को दल-दल में  धंसाने के खेल में माहिर हैं..

१९४७ से “सत्ता परिवर्तन” को “सम्पूर्ण आजादी” कहकर , जनता को भरमाकर..., आराम हराम हैं , गरीबी हटाओं , मेरा भरा महान , इंडिया शाईनिंग , भारत निर्माण से अच्छे  दिन के नारों से ... चुनावी मौसम में  मेढकों की टर्र –टर्र से वादों की बरसात से , सत्ता पर काबिज होने की बात यह पुरानी बात है.

 दोस्तों..इस सुधार के पीछे देश का सबसे बड़ा जहर “अशिक्षा” है..जिसकी वजह से जनता गरीब होते जा रही है..खोखले वादों के अफीमी नारों का शिकार हो जाती है..और वोट बैंक की राजनीती करने वाले अपने को देश का मसीहा कहकर काले धन से अमीरतम बनकर अपने को अप्रतिम कहकर सत्ता को जातिवादभाषावाद,धर्मवाद व घुसपैठीयों के कोड़े से जनता को पीटकर,अधमरा करमहंगाई बढ़ा कर कर्ज के गर्त से देश को डूबा रहें है.

इस लोकतंत्र में आप और हम वोट बैंक के मोहरे हैं..५साल के रोते हुए चेहरे हैं.. राममनोहर लोहिया ने सही कहा था ...,जिंदा कौमे ५ साल का इन्तजार नहीं करती है...

Sunday, 28 October 2018

YES I CAN..., YES MODI DID IT…, मोदीजी तुस्सी ग्रेट हो.., C.M से P.M के सफ़र में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में नरेन्द्र मोदी ने ३१ अक्टूबर २०१३ को सरदार पटेल की मूर्ति के शिलान्यास से उद्घाटन का सफ़र देश के प्रधानमंत्री के रूप में ३१ अक्टूबर २०१८ को विश्व के सबसे ऊंची मूर्ती का उद्घाटन से १८२ मीटर जिसने वर्तमान चीन के स्प्रिंग टेम्पल बुद्ध १५२ मीटर व मायाम्नार म्यांमार की १२० मीटर व जापान की तीसरी ऊंची ११६ मीटर की मूर्तियों को मात देनी की तैयारी है.




YES I CAN..., YES MODI DID IT…,  
मोदीजी तुस्सी ग्रेट हो.., C.M से P.M के सफ़र में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में नरेन्द्र मोदी ने ३१ अक्टूबर २०१३ को सरदार पटेल की मूर्ति के शिलान्यास से उद्घाटन का सफ़र देश के प्रधानमंत्री के रूप में ३१ अक्टूबर २०१८ को विश्व के सबसे ऊंची मूर्ती का उद्घाटन से   १८२ मीटर जिसने वर्तमान चीन के स्प्रिंग टेम्पल बुद्ध १५२ मीटर व मायाम्नार म्यांमार की १२० मीटर व जापान की तीसरी ऊंची ११६ मीटर की मूर्तियों को मात देनी की तैयारी है.

इस कार्य में आधुनिक तकनीकी से इस मूर्ती को देखने वाले सैलानियों से इसमें खर्च ३००० करोड़ रूपये भी चंद सालों में प्राप्त हो कर.., सच में मोदीजी ने देश को विश्व इतिहास के मानचित्र में लाकर दिखा दिया की ५६२ देशी रियाशतों को शास्वत रूप से एकजूट कर देश में मिलाकर, देश को एकजुट रखने वाले एक और केवल एक ही सरदार पटेल ही इस देश का गौरव थे .., गौरव हैं.., गौरव रहेंगे..

एकता की इस मूर्ती “स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी” जो राष्ट्रीय गौरव व एकता का प्रतीक है , और इस मूर्ती में तकनीती के निर्माण से भारत के शिल्पकारों / इंजीनियरिंग / परियोजनाओं प्रबंधन क्षमताओं  के कौशल का सम्मान व लोहा विश्व को मानना पड़ा.
  

याद रहे नेहरू से पूर्व प्रधानमंत्रियो तक की शिलान्यास की योजनाओं से देश के धन का सत्यानाश ही हुआ है, आज भी बहुत सी योजनायें देश के  धन को डकार कर सुरसा की तरह मूंह फैलाकर और धन की गुहार से मरणासन्न स्थिति में है.., जो देश की लुंज पुंज नौकरशाही से मफियाशाही के गठ जोड़ का मजबूत बंधन बना हुआ है  

वेबस्थल व फेसबुक की July 7, 2014 की पुरानी पोस्ट 

र्स्स्सी जल गई बल नहीं गया..., कभी आरक्षण के भक्षण से,कभी शिवाजी की प्रतिमा के झांसे से प्रदेश जीतने का हौवा खडा कर. महाभ्रष्ट प्रदेश के काले कौवों के संगठित दलों की कविता है....

पहले मिलाप व आलाप की..., यह देश के ६७ सालों की राजनीती से भ्रष्टाचार की ROCK-NITI, चट्टानी नीती के प्रतिस्पर्धा से देश को लूटने की कहानी है...

इस आड़ में सभी थाली के चट्टे ..., बट्टे , देश के पट्टे (खान खदान,ईमान ) बेचकर , देश की साख को बट्टा लगाने की कसाईपना की कोई कसर नहीं छोड़ रहें है...,

क्योंकि इनके ऊपर क़ानून का नहीं असर.., तो क्यों न रहें.., ये अग्रसर...

अब आदर्श मंजिला महाघोटालों के अपने आदर्शों से छत्रपति शिवाजी महाराज की दुनिया में सबसे ऊंची मूर्ती १ हजार करोड़ रूपये से अधिक खर्च कर बनायेंगे.. क्योंकि नरेंद मोदी ने ६ माह पहले इस तरह की घोषणा की थी कि 

मैं,गुजरात में, देश के जवानों व किसानों की माटी के लोहे से एफिल टावर से ऊंची व मजबूत सरदार पटेल की मूर्ती बनवाऊंगा .

दोस्तों.., इस छत्रपति शिवाजी के पुतले के पीछे २१ शताब्दी के महा भ्रष्टाचार का पुतला छुपा है...

देश के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की पुस्तक भारत एक खोज से..., साईकिल घोटाले की खोज हुई थी,

प्रधानमंत्री ने तो डॉक्टर बनकर ..., नेहरू की पुस्तक को पढ़ाकर व अनुसंधान करवाकर, इसे अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार की नयी नयी खोजों में परिवर्त्तीत कर अपने विधार्थीयों को देश की अर्थी बनाने की कल्पनाएं दी ...

इस २१वी सदी के महाभ्रष्ट पुतले ने शिवाजी के विचारों को क्षीर्ण कर दिया है..

आज महाराष्ट्र देश का महाभ्रष्ट राज्य की सूची में अव्वल है......, नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में सरदार पटेलके पुतले बनाने की क्या घोषणा कर दी ..

महाराष्ट्र के आदर्श भ्रष्टाचारी नेता , भ्रष्टाचार के तिल में समाते.., तिलमिलाये गए, और अब भ्रष्टाचार को आपस में गले लगाकर, ताल और ताली ठोककर , अपने गालों की लाली से, भारत निर्माण के नारों से नारों से अब पुतले निर्माण के आड़ में , मराठा आरक्षण के पराठे से ७२% की सीमा लांघ दी है..., इनका वश चले तो ये १००% की आरक्षण नीती से देश को बर्बादी में झोंकने में भी कसर नहीं रखेंगें 

 

Wednesday, 10 October 2018

याद रहे.., जून 1971 में, मुजफ्फरपुर बिहार में नक्सलियों की धमकी में जयप्रकाश नारायण Top Hitlist में थे. वे जानते थे नक्सलवाद का उभार व विकास की जड़ गरीबी और बेरोजगारी के अलावा सरकार द्वारा उत्पीड़न है ,इस समस्या के निदान के लिए प्यार और सहानुभूति के साथ उनकी पीड़ा व अनुभूति से ही सशस्त्र नक्सलवाद का खात्मा किया जा सकता है , वह कई महीनों के लिए Musahari ब्लॉक में रहे थे और नक्सलियों की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयोग किया. इसके अलावा जयप्रकाश चंबल घाटी में डकैतों का आत्मसमर्पण प्राप्त करने में वे एक प्रमुख व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व किया था.


11 October  V/s 2 October..,  अहिंसा के छद्म भेष में बापू को चमकाकर हर पार्टी ने ७२ सालों  तक मलाई  खाई है.., लेकिन ११ अक्टूबर के जन्मदाता जयप्रकाश नारायण जो सरकार व मंत्रीमंडल  मंडल का कभी हिस्सा नहीं रहे
इसके बावजूद इस नायक ने समाज वाद को रूबरू क्रांति में परिवर्तित कर सबका विकास सबका साथ के दांवों के नारों से आज की राजनीती चमकाने को आयना दिखा दिया है कि  “जनता ही सत्ता की मालिक है..”, सिंहासन खाली करो जनता आती है के राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिनकर उद्घोष से..,  जयप्रकाश नारायण ने देश से जातिवाद का सफाया कर , नै पीढी को एकत्रित कर देश में लूट तंत्र से राजनीति करने वालों को सबक सिखाया था..   

जयप्रकाश नारायण से सम्पूर्ण क्रांती के उद्घोष से २५ जून १९७५ को देश के संविधान को व्यवधान मानकर आपातकाल से इंदिरा गांधी ने स्वंय विधान के दरवाजे में बंद कर दिया ..

याद रहे.., जून 1971 में, मुजफ्फरपुर बिहार में नक्सलियों की धमकी में जयप्रकाश नारायण Top Hitlist में थे. वे जानते थे नक्सलवाद का उभार व विकास की जड़ गरीबी और बेरोजगारी के अलावा सरकार द्वारा उत्पीड़न है ,इस समस्या के निदान के लिए प्यार और सहानुभूति के साथ उनकी पीड़ा व अनुभूति से ही सशस्त्र नक्सलवाद का खात्मा किया जा सकता है , वह कई महीनों के लिए Musahari ब्लॉक में रहे थे और नक्सलियों की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयोग किया. इसके अलावा जयप्रकाश चंबल घाटी में डकैतों का आत्मसमर्पण प्राप्त करने में वे एक प्रमुख व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व किया था.
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जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण भारत उदय के १००० से अधिक डाकुओं के आत्म समर्पण करने के बाद .., लोकतंत्र से रखवालों के नाम से १० हजार से अधिक लोग जेल जाने की आड़ में आज एक खिचड़ी खाकर..., सत्ता को अपना अधिकार मानकर, अब लोकतंत्र को लूट तंत्र का हथियार बनाकर.., अब १९४७ के बाद की नयी पीढी के स्वतन्त्रता सेनानी की नयी पंक्ति कह सम्मान का अभिमान मान रही है.

हमारे राजनेताओं से हर समस्या सुलझाई नही बल्कि सुलगाई गयी है .., सुकमा बीजापुर गढ़चिरोली व देश के अन्य इलाकों में नक्सलवाद व राजनेताओं से खान खदान नभ जलाकाश ईमान को बेचने का एक गठबंधन का संघठन के सुनियोजन खेल है.

जयप्रकाश नारायण व राम मनोहर लोहिया की औलादें बनी जल्लादें .., चारा घोटालों से A-Z घोटालों की सूची लम्बी है .., देश घोटालों से बौना होते जा रहा है....


वेबस्थल की पुरानी WEDNESDAY, 16 SEPTEMBER 2015 की पोस्ट

इस लोकतंत्र में आप और हम वोट बैंक के मोहरे हैं.., ५साल के रोते हुए चेहरे हैं.. राममनोहर लोहिया ने सही कहा था ..., जिंदा कौमे ५ साल का इन्तजार नहीं करती है.

1. बिहार में ७२ सालों से जातिवाद की बहार है.., घोटालों की बयार है.., अफीमी नारों के आस से विकास का निकाश..,नीतीश की जातिवाद की कोशिश से अब भी बिहार कोशों मील दूर है..,

2. लालू जैसे लाल से लाखों नेता अपने को माई का लाल कहकर, भ्रष्टाचार के कटार से वोट बैंक के इंक (INK) से गरीबों के हाथ बदरंग है.., यही सत्ता का रंग है .., बिहार के साथ, देश में जातिवाद, भाषावाद, धर्मवाद, अलगाववाद से तिरंगा बदरंग है.

3. जहां.., बिहार में. शिक्षा से तक्षशिला की शीला से देश,विश्वगुरू कहलाता था.., आज जातिवाद की विष शीला से बिहार..,बीमार प्रदेश बन गया है.

4. अफीमी नारों व विदेश के कर्ज की हवा से तिरगा फड़फड़ाकर विकासके नाम से जनता को भरमाया जा रहा है..

5. अब मोदी के अच्छे दिनोंके द्वन्द का एक नए रंग से..,आपस में सीटों की लड़ाई है.., राजनीती दबंगता से जनता दबते जा रही है ...,

6. अब यह चुनावी तलवार से सत्ता के म्यानों की लड़ाई है..

7. महंगाई के भार से, जवानों के जवानी के कंधे थकते जा रहें हैं .., माफिया, इस गोरखधंधे से चंगे होते जा रहें है.., इनकी ५ साल के बच्चे राणा सांगा की औलादे लगती है .., और गरीब का पांच साल का बच्चा ५० साल का लगता है...

8. दिवंगत महान व्यंगकार लेखक श्री हरीशंकर परसाई के १० हजार से अधिक राजनितिक लेख आज भी जीवंत हैं. १९६० के दशक में.., उन्होंने बिहार के बारे में लिखा था, श्रीकृष्ण भगवान् मुझे मिले थे. उन्होंने, कहा मैं बिहार में चुनाव लडूंगा और लोगो को कहूँगा में श्रीकृष्ण भगवान् हूं , मैं आसानी से जीत जाऊंगा .., तब मैंने उनसे कहा आप जब तक यह नहीं कहोगे मैं श्रीकृष्ण यादवहूँ , तब तक आप चुनाव नहीं जीत सकोगे. भगवान् और मेरी शर्त लगी भगवान् श्री कृष्णा के विरोध में यादव नाम का उम्मीदवार खड़ा था और वह जीत गया और भगवान् श्री कृष्ण हार गए

9. जयप्रकाश नारायण ने तो कहा था, देश में सबसे अधिक खनिज होने के बावजूद बिहार गरीब क्यों.???, इस जीत का रहस्य तो..., खनिज से ज्यादा बिहार में नेताओं के लिए जातिवाद,धर्मवाद के उत्प्रेरक खनिज से.., बिहार भ्रष्टाचार के बहार से गाय भैसों व अन्य जानवरों के चारे से, मुस्लिम यादव के भाई- चारे नारे के आड़ में, २५ सालों तक चारे को डकारकर, प्रदेश के गरीबों को बहाकर.., एकछत्र राज्य करते रहे...,

10. दोस्तों.., देश का सबसे बड़ा जहर अशिक्षाहै.., जिसकी वजह से जनता गरीब होते जा रही है.., खोखले वादों के अफीमी नारों का शिकार हो जाती है.., और वोट बैंक की राजनीती करने वाले अपने को देश का मसीहा कहकर काले धन से अमीरतम बनकर अपने को अप्रतिम कहकर सत्ता को जातिवाद, भाषावाद,धर्मवाद व घुसपैठीयों के कोड़े से जनता को पीटकर,अधमरा कर, महंगाई बढ़ा कर कर्ज के गर्त से देश को डूबा रहें है.

11. इस लोकतंत्र में आप और हम वोट बैंक के मोहरे हैं.., ५साल के रोते हुए चेहरे हैं.. राममनोहर लोहिया ने सही कहा था ...,जिंदा कौमे ५ साल का इन्तजार नहीं करती है.

पिछली सरकार तो, ऐसी ख़बरों के सम्मान से सत्ता का अभिमान की से माल-माल होकर, खुले आम संविधान को चुनौती देकर लताड़ लगा रहें थी , हम संविधान के ५ साल के रक्षक है..., जनता ने हमें चुना है.., ऐसा कहकर देश को चुना लगा रहें थे.., अब यह रणनीती हमें ले डूबेगी..


महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री व शरद पवार के भतीजे ने एक लाख करोड़ का सिचाई घोटाला कर..., ताल ठोककर, महाराष्ट्र की जनता का उपहास कर कहा.., इस सूखे छेत्र में मेरे पेशाब करने से यदि बाढ़ आती है, तो..., मैं पेशाब करता हूँ .., खाद्यान घोटाले से १० लाख से अधिक से किसान आत्महत्या व इस योजना से धन डकारने की योजना को मीडिया से शरद पवार भी एक सामान्य घटना मान रही है...

पिछले महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में , राज ठाकरे के भाषावाद के युध्ह में मराठी माणूस (आदमी) अपनी ही कुलहाड़ी से अपाहिज हो गया है, इस भाषावाद के जहर से.., कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी केसत्ता पर काब्ज होने के बाद..., सुपर पावर के शरद पवार के नेतृत्व में महाराष्ट्र से देश तक में घोटाले की बौछार हो गयी.., मोहल्ले के नेता तो इस फव्वारे के पानी पीने से मला-माल हो गए. बाल ठाकरे भी बार-बार पुकार कर रहें थे बेटा आ अब लौट आओ , मेरी बोतल में शराब डालकर, सत्ता का नशा मत करों, नशा उतरने के बाद तुमको अपनी अवकाद मालूम पड़ेगी.., क्योंकि ४० साल पहले मैंने भी यह शराब पी थी, और ३० साल तक मेरी अवकाद नगरपालिका चुनाव जीतने तक ही थी ..., और भतीजे के इस रवैये से मरते समय तक उनकी आत्मा तड़फती रही .., और लोकसभा चुनाव में राज ठाकरे को जनता ने इतने जोर से पटका कि अब आनेवाले विधानसभा चुनाव से हाय-तौबा कर ली है... हे, हुडदंग., हुडदंग.., हुडदंग..., से धर्मवाद के जंग से वोट बैंक के सौदागर दंग और हडकंप ,

पिछले चुनाव में भाषावाद के जंग से सत्ता का रंग.., महाराष्ट्र में मोदी के विरोधी नेताओं को, लोकसभा चुनाव में, मोदी के चोट से जो घाव हो गए है..., अब इस घाव में असदुद्दीन ओवैसी की हरी मिर्च लगने के हडकंप से सतारूढ़ पार्टी को रोड में आने का खौफ सता रहा है..

Tuesday, 2 October 2018

नेहरू के १८ वर्षों के अय्याशी के सोच के शौच को मात्र १८ महीने में साफ़ कर व पाकिस्तान को धूल चटाकर ...., विश्व ने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को अब्राहम लिंकन के समक्ष खडा कर हिन्दुस्तान का लोहा माना कि देश की शक्ती "जवानों व किसानों" के बल से ही बढ़ती है ना की/कि विदेश से कर्ज लेकर ..., ब्याज देकर नेताओं की अय्याशी से जनता को ब्याज से प्याज के तरह आंसू निकाल कर, जो आज के परिपेक्ष्य में लोक तंत्र को लूट तंत्र का खेल खेला जा रहा है ..., इसे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने समाप्त कर दिया था इसी का तोड़ ..., “जय जवान –जय किसान “के नारे से निकल कर सभी भ्रष्ट नेता मजबूर होकर मजदूर हो गए थे ....



यह गांधी जयन्ती नहीं.., लाला बहादुर शास्त्री के जन्म दिवस से , जवानों में वीर रस से किसानों की क्रांती की गाथा है.., 



व देश के," जय जवान जय किसान" के प्रणेता से देश को एक नई लहर देने वाले : २अक्टूबर के जन्मदाता, १८ महीनों के शासन में देश के सही मानों में भाग्य विधाता की भूमिका के सफल प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के दिन को गांधी जयन्ती नहीं देश का "शौर्य दिवस" के रूप में स्कूल में नव विद्यार्थियो को यह पढ़ाया जाय...कि कैसे एक निम्न वर्ग के प्रधानमंत्री ने निम्न श्रेणी को अपना जीवन व आदर्श मानकर, सभी सरकारी सुविधा का अपने परिवार के लिए त्याग कर .., मेरे घर से मेरी देश की तस्वीर से ही देश में राष्ट्रवाद की लकीर खीची जा सकती है... यह सिद्ध किया


नेहरू के १८ वर्षों के अय्याशी के सोच के शौच को मात्र १८ महीने में साफ़ कर व पाकिस्तान को धूल चटाकर ...., विश्व ने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को अब्राहम लिंकन के समक्ष खडा कर हिन्दुस्तान का लोहा माना कि देश की शक्ती "जवानों व किसानों" के बल से ही बढ़ती है ना की/कि विदेश से कर्ज लेकर ..., ब्याज देकर नेताओं की अय्याशी से जनता को ब्याज से प्याज के तरह आंसू निकाल कर, जो आज के परिपेक्ष्य में लोक तंत्र को लूट तंत्र का खेल खेला जा रहा है ..., इसे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने समाप्त कर दिया था
इसी का तोड़ ..., “जय जवान जय किसान के नारे से निकल कर सभी भ्रष्ट नेता मजबूर होकर मजदूर हो गए थे ....

दोस्तों एक कटु सच्चाई ...!!!!, देशी राजनैतिक कलमुहों ने विदेशी ताकतों के साथ मिलकर इस महान अद्वितीय ७० साल के सत्ता परिवर्तन के इतिहास में जो आज भी सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री हैं.., की ह्त्या कर ..., “राजनैतिक कलमुहोंने देश का कल अन्धकारमय बना दिया,,

२ अक्टूबर के जन्मदाता, १८ महीनों के शासन में देश के सही मानों में भाग्य विधाता की भूमिका के सफल प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के दिन को गांधी जयन्ती नहीं देश का "शौर्य दिवस" के रूप में स्कूल में नव विद्यार्थियो को यह पढ़ाया जाय.. तो देश की फसल लह-लहराकर  तस्वीर बदल जायेगी

Monday, 1 October 2018

स्वच्छ भारत स्वचालित का नारा तब तक बेईमानी साबित होगी जब तक हिन्दुस्तान से जातिवाद साम्प्रयवाद का सूपड़ा साफ़ नहीं होगा.., बापू के चाल व चरित्र के चित्र के ढाल से देश का राजनैतिक चरित्र गर्त में जा रहा है..



२ अक्टूबर ...!!!!, बापू की जातिवाद के सिद्धांत को कायम कर , साम्प्रयवाद की छांव में, देश के तुकडे कर, १० लाख से अधिक हिन्दुस्तानियों की ह्त्या करवाकर, अहिंसावाद के छद्म बटवृक्ष में वह तो चन्दन की पेड़ में सांप की तरह लिपटा एक विषैला जहर समाज में फैला कर, वह बापू जिसकी नाथूराम गोडसे ने भले  ह्त्या कर देश को मुक्ती दिला दी थी.

लेकिन आज भी ७२ सालों बाद सत्ता परिवर्तन को आजादी कह, देश जातिवाद के कुरूप रूप से वोट बैंक में परिवर्तित.., व आरक्षण के ताले से देश की  तरक्की  बंद हो चुकी है.., देश की प्रतिभा विदेशों  में पलायन कर रही है...

स्वच्छ भारत स्वचालित का नारा तब तक  बेईमानी साबित होगी जब तक हिन्दुस्तान से जातिवाद साम्प्रयवाद का सूपड़ा साफ़ नहीं होगा.., बापू के चाल व चरित्र के चित्र के ढाल से देश का राजनैतिक चरित्र गर्त में जा रहा है..

Thursday, 20 September 2018

चेतो मोदी सरकार.., अब चरमोत्कर्ष (CLIMAX) से सत्ता में दुबारा CLIMB होने का समय आ गया.., मोदीजी.., आपको खोने के लिए कुछ नहीं.., अब देश शेयर,बुलियन खाद्यान बाजार व डॉलर के विदेशी हाथ,साथ,विचार संस्कार से नहीं चल सकता है,अब बचे छ: महीने के कार्यकाल में देश की गरीबी को क्षय मुक्त करने के लिए यदि आपको 542+ सीटें चाहिए...!!!!!!! तो शासन के अधिकतर भ्रष्ट माफिया-नौकशाही – जजशाही से दो -दो हाथ कर.., नोटबंदी से देश में कालाधन व विदेश भागने वालों से पंजा लड़ाकर उन्हें बता देना चाहिए की मोदी से पंगा लेने का अंजाम क्या है..,


चेतो मोदी सरकार.., अब चरमोत्कर्ष (CLIMAX) से सत्ता में दुबारा CLIMB होने का समय आ गया..,


मोदीजी.., आपको खोने के लिए कुछ नहीं.., अब देश शेयर,बुलियन खाद्यान बाजार व डॉलर के विदेशी हाथ,साथ,विचार संस्कार से नहीं चल सकता है,अब बचे छ: महीने के कार्यकाल में देश की गरीबी को क्षय मुक्त करने के लिए यदि आपको 542+ सीटें चाहिए...!!!!!!! तो शासन के अधिकतर भ्रष्ट माफिया-नौकशाही जजशाही से दो -दो हाथ कर.., नोटबंदी से देश में कालाधन व विदेश भागने वालों से पंजा लड़ाकर उन्हें बता देना चाहिए की मोदी से पंगा लेने का अंजाम क्या है..,


अगला लोकसभा कार्यकाल के सत्र से देश गद्दारों से भय, मुक्त, लूट मुक्त, अपराध मुक्त से एक नए विकास की तरफ उन्मुक्त होकर.. देश सुजलाम सुफलाम से विश्व गुरू की सफलता प्राप्त करेगा.

फेस बुक व वेबस्थल की पुरानी पोस्ट.., October 15, 2015

१.    जवाहरलाल नेहरू के कपड़ों के घने काले दाग, उस समय में देशी साबुन से साफ़ न होने की वजह से धुलाने कपडे पेरिस जाते थे.., आज माफियाओं के काले नोट धुलने हांगकांग, मॉरिसस व अन्य देशों की सफेदी के स्वच्छ इंडिया से देश विदेशी हाथों से जकडते जा रहा है.

२.   इस सफेदी की दाग धुलाने में बैंक ऑफ़ बड़ौदा.., सरपट दौड़ा ..., ६००० करोड़ रूपये के देशी कपड़ों को विदेश भेजकर, गरीबों के कपड़े उतरवाए..,


३. रियल इस्टेट , खाद्यान बाजार , शेयर बाजार व अन्य सटोरियों के बाजार में २०० लाख करोड़ से अधिक का काला धन मौजूद है..., सरकार आँखें मूदे बैठी , विदेश से काले धन लाने का हुंकार भर रही है.
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४. जब तक कालेधन को राष्ट्रीय सम्पती से राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानूनन बनाया जाय तो यह सरकार का एक डफली बजाकर , जनता को बह्काने का खेल है.
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५. देश का माफिया काले धन के पुलिंदों के गद्दे पर सोया है.., और हमारी सरकार विधव विश्व में ढिंढोरा पीट रही है.., कहावत है बच्चा पड़ोस में व ढिंढोरा शहर में .., लेकिन घर (देश) के काले माफियाओं के पास विदेश के बैंकों में जमा.., ७२ लाख करोड़ से 100 गुना से ज्यादा धन है.

६. मीडिया-माफिया-नौकरशाही-जजशाही के गठबंधन से राजशाही का महामंडन.., काले धन की बौछार से जीवन का उद्धार से देश के प्रत्येक गरीबों पर विश्व बैंक का ७५ हजार का कर्ज ...
७. जमीनी हकीकत .., भूखा नंगा हिन्दुस्तान , महलों में रहने वाले बढ़ा रहे है इंडिया की शान, अच्छे दिनों से मेरा भारत महान , अब भी इंडिया शाईनिग से फील गुड फैक्टर के फील्डिंग से गरीबों की जा रही है जान ...

८. अस्पतालों में डॉक्टर व दवाएं नही , देश में झोला छाप डॉक्टर व शिक्षकों की बहार , मुर्दों को पेंशन.., यह है राजनीती का PASSION ...

९. मीडिया की TRP के बहार है..,राधे माँ के खबर से, व इंद्रायणी मुखर्जी की खबर को TRP की लहर बनाने के खेल में इस खबर के परतों से मुंबई के पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया के नार्को टेस्ट की घोषणा से मीडिया-माफिया-नौकरशाही-जजशाही की पोल खुलने व देश विदेश में काले धन का संगठित गिरोहों के गठबंधन के डर से पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया का तबादला कर इन खबरों को पर्दाफ़ाश करने के पहिले पर्दा डाल दिया है ..

१०. बिहार के चुनाव में गौ मांस के तड़के से, अब जनता के विकास व योजनाओं के मुद्दे गायब है.., एक माह तक मीडिया के पास में TRP का चटपटा मसला है.., यों कहें देश का दिवाला है...

११. दोस्तों..., सरकार दावा करती है कि देश में 100 करोड़ मोबाईल उपभोक्ता है .., यदि देशवासी अपने मोबाईल से.., मोहल्ले से शहर, नगर की घटनाओं व समस्याओं की फोटो व विडियो खीचकर अपने २४ खबरिया चैनलों से.., २४ घंटे प्रसारित कर, , देश में राष्ट्र की ज्वलंत समस्याओं का चित्रण कर, आज की वर्तमान पेट भरी मीडिया को ललकार कर देश में जागृती की लहर पैदा कर देंगी



Thursday, 13 September 2018

क्या आप रूपये के प्राजूद प्रारूप से सहमत हैं..,रूपया के बहुरूपिया..., जोकर (जनता से महंगाई का मजाकर ),विदूषक..., अधिकतर नौकरशाहों की मिलीभगत के भ्रष्टाचार से प्रदूषक बनाकर... एक नए अमीरी की पहचान पाई है..., जब से इस चिन्ह को मान्यता मिली है, देशी विदेशी माफिया व डॉलर से रूपये को कुचलने की खुली छूट मिली है... गरीबों का पसीना अमीरों का अन्न है..,रूपये से डॉलर अब राहू बनकर, देश का अमृत पी रहा है...क्या आप रूपये के प्राजूद प्रारूप से सहमत हैं.. आज रूपया कर लो दुनिया मुट्ठी के नारों से , मुट्ठी भर अमीरों ने गरीबों को मुट्ठी से निचोड़कर ,, आज इंडिया भ्रष्टाचार का डांडिया खेल रहा है..दोस्तों क्या आप सहमत कि रूपये के चिन्ह में अंतिम छोर पर जब तक समानता का चिन्ह न हो, तब तक देश का गरीब तबका और गरीब होते जाएगा.., और देश के अमीर.., गरीबी रेखा का मूल्य कम कर ..देश का उपहास उडातें रहेंगे.... .




डॉलर ,रूपये की कॉलर खिच कर, देश त्राहिमान, फिर भी नेता कह रहा रहें हैं “मेरा देश महान” से “अच्छे दिन” आने वाले हैं..,  “मन की बात” से रेडियो व  दूरदर्शन पर नगाड़ा बजा, रूपये का स्वरुप बिगाड़ा..,

बुलेट ट्रेन की आड़ में (Bull – ate)  देश के बड़े सांड रूपये को खाकर.., डॉलर की डकार निकाल रहें हैं .. अबकी बार नए ऊंचाई में मोदी सरकार.., मनमोहन सरकार के ७० रूपये प्रति डॉलर को पार कर ७३ रूपये के नए प्रारूप में मोदी सरकार.., क्या अब काले धन वालों अपने  हुंकार से जनता को कर रहें हैं ललकार...!!!!.

बॉम्बे आईआईटी स्नातकोत्तर डी उदय कुमार द्वारा डिजाइन किया गया नया प्रतीक जो  कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था व उदय कुमार को २.५० लाख का इनाम दिया गया - यह दर्शाता है कि भारतीय मुद्रा, जो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से समर्थित है, अंत में अंतरराष्ट्रीय दृश्य पर अपनी उपस्थिति में अस्थमा के मरीज की तरह हाँफते दिख रही है.., हर हफ्ते के शुरूवात में उसे कृत्रिम ऑक्सीजन देकर महसूस कराया जा रहा है.., रूपया होगा कामयाब एक दिन ..!!!, हम हममें हैं विश्वास.., हम देते रहेंगें कृत्रिम श्वास हर दिन ..., से भरमाया जा रहा है.


 July 8, 2014 · की फेसबुक  व website की पोस्ट

क्या आप रूपये के प्राजूद प्रारूप से सहमत हैं..,रूपया के बहुरूपिया..., जोकर (जनता से महंगाई का मजाकर ),विदूषक...,

अधिकतर नौकरशाहों की मिलीभगत के भ्रष्टाचार से प्रदूषक बनाकर...
एक नए अमीरी की पहचान पाई है...,

जब से इस चिन्ह को मान्यता मिली है, देशी विदेशी माफिया व डॉलर से रूपये को कुचलने की खुली छूट मिली है...

गरीबों का पसीना अमीरों का अन्न है..,रूपये से डॉलर अब राहू बनकर, देश का अमृत पी रहा है...क्या आप रूपये के प्राजूद प्रारूप से सहमत हैं..

आज रूपया कर लो दुनिया मुट्ठी के नारों से , मुट्ठी भर अमीरों ने गरीबों को मुट्ठी से निचोड़कर ,, आज इंडिया भ्रष्टाचार का डांडिया खेल रहा है...

देश का अन्नदाता किसान आत्महत्या कर रहा है..., भार-रत , भारतीय , इन भ्रष्टाचारियों माफियाओं के भार से रत होकर, पैसे कमाने का जुगाड़ में लगा है...

इंडिया, INDIA= IN-DIG-GO , आओ देश को खोदों और चले जाऊं (जो टाटा की कार का भी नाम है) ,

और देश के धरती लाल आकाश, खान खदान ,ईमान बेचकर इनाम पा रहा है...,
अब अपने मुट्ठी बल से बलवान हो कर , “भारत निर्माणके नारों में अपनी सहभागी से देश के गरीबों को भरमा रहा है... 

दोस्तों क्या आप सहमत कि रूपये के चिन्ह में अंतिम छोर पर जब तक समानता का चिन्ह न हो, तब तक देश का गरीब तबका और गरीब होते जाएगा.., और देश के अमीर.., गरीबी रेखा का मूल्य कम कर ..देश का उपहास उडातें रहेंगे....