Monday, 17 November 2014



नथूराम गोडसे की पुण्य तिथी पर..,
नथूराम गोडसे, एक राष्ट्रवादी योद्धा, जिसने अपने प्राणों की आहुती से ..., गांधी को , देश के साथ खिलवाड़ से.., देश के टुकड़े करने के बाद भी, देश की तुष्टी करण की नीती से, देश को असहाय बनाने के बाद, आगे के खेल से, देश को पंगु बनाने का, अंजाम न दे सके , इस ह्त्या का उद्देश्य बताया, 

याद रहे, नथूराम गोड़से ने स्वंय अपना मुकदमा लड़ते हुए , गांधी की ह्त्या करने के १५० कारण गिनाये थे...,तब अदालत में बैठे दर्शकों की आँखे, आंसू लबालब भरकर, जमीन में गिरकर नाथूराम गोड़से को सलाम कर रही थी ...
१. गांधी ह्त्या के पहिले नथूराम गोडसे ने गांधी को प्रणाम किया, बाद में गोली मारी.

२. नथूराम ने अदालत में कहा , मैंने गांधी को गोली मारने में इतनी सावधानी से, इतने, पास से गोली मारी ताकि उनके बगल में दो युवतियां, जो हमेशा उनके साथ रहती थी.., उन्हें गोली के छर्रे लगने से, मैं बदनाम न हो जाऊं (याद रहे, गांधी उन युवतियों के साथ नग्न सोकर, ब्रह्मचर्य /सत्य के प्रयोग में इस्तेमाल करते थे)

३. नथूराम ने कहा, ह्त्या के समय गांधी के मुख से “आह” की आवाज निकली, “हे राम” शब्द नहीं ...,
जिसे कांग्रेस ने हेराल्ड अखबार के प्रचार से “हे राम” शब्द से देशवासियों को भरमाया..

न्यायाधीश खोसला ने, अपने सेवा निर्वत्ती के बाद कहा था , यदि मुझे न्याय के लिए स्वतंत्र विचार दिया जाता तो मैं, नथूराम गोड़से को निर्दोषी मानता , मैं तो कानून का गुलाम था, इसलिए मुझे नाथूराम गोड़से व उसके अन्य साथियों को मृत्यु दंड सुनाना पड़ा

नथूराम गोड़से व उनके साथी, ‘भारतमाता की गोद में’ सोने के लिए इतने आतुर थे कि उन्होंने उच्च न्यायालय में अपनी सजा को चुनौती नहीं दी और न ही क्षमा याचना की अपील राष्ट्रपति से की ...

यह शांती का दूत..????, कपूत निकला.., याद रहे, इस अनशन की खाल में बापू ने .., दो विश्व युध्ह में २ लाख हिंदुस्थानी सैनिकों की अकारण बलि देकर, जो कुत्ते की मौत मारे गए थे .. व १९४७ में देश का अंग भंग कर ५ लाख हिन्दुस्थानियो की बलि लेकर..., इस अहिसा के परदे में खूनी खेल खेलकर, आज तक शांती दूत का चेहरा दिखाया है...

गाँधी वध के पश्चात जब सावरकर जी को न्यायलय ने सम्मान बरी किया तो जज का, वीर सावरकर के लिए यह
वक्तव्य था ..., “सावरकर ने अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया, लेकिन ऐसे तुच्छ कार्य में उन्हें घसीटना बहुत ही निंदनीय है, इस बात की जांच की जानी चाहिए की ऐसे महान व्यक्ति का नाम इस कार्य में क्यों घसीटा गया”
जबकि स्वयं नथूराम गोडसे ने गाँधी वध में सावरकरजी की संलिप्तता को सिरे से नकार दिया,

धर्मनिरपेक्षता के झूठे आडम्बर में फंसे तथाकथित सेकुलर उस दिन सूर्य के सामान जुगनू से प्रतीत हो रहे थे, जो की सूर्य को अपनी मद्दम रौशनी दिखा कर उसे निचा दिखाने की कोशिश कर रहे है,

वीर सावरकर के क्रातिकारी के जज्बे को सलाम करने के के लिए, 13 मार्च 1910 मे जहाज से कूदकर,पानी मे अंग्रज सैनिको की पीछे से गोली गोलियो की बौछर का सामना करते हुए , फ्रांस के मार्सेल तट पर पहुँचे, इस साहसिक घटना को जीवित कर , प्रेरित करने के लिए, घटना की 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य मे एक भव्य स्मारक बनाने के लिए भारत सरकार को सूचित किया , और भारत सरकार ने वीर सावरकर को देश्द्रोही कहकर आपत्ति उठाने से वह प्रकल्प बंद करवा दिया..

दोस्तों अब गांधी जयंती के आयोजन में झूठे दिखावे के आचरण से, देश को, सरकारी अवकाश व विज्ञापनों व अन्य खर्चों से १० हजार करोड़ का चूना लगाने वाला है...

गांधी की गंदी राजनीती व जवाहर लाल नेहरू के जहर से देश ६८ साल के सत्ता परिवर्तन के शासन में कंगाल हो गया है..., आज सभी पार्टीयाँ विदेशों में विदेशी हाथ माँगने जा रहें हैं...

सत्ता तो मद से भरी.., मदारियों का समूह १९४७ से सत्ता परिवर्तन को आजादी के झांसे से बन्दर बांट से देश को लूट रहा है...
राजधर्म तो जातिवाद, भाषावाद,अलगाववाद, धर्मवाद व घुसपैठीयों से राजनीती में गहरी पैठ से जनता को गरीबी से तडफा-तड़फा कर..., हलाल कर ..., आज अपने को देश का लाल बनाकर., २ अक्टूबर से १४ नवम्बर से सालों - साल तक इनके पुतले..,बिना नहलाए पूजे जा रहें है...और तो और ६८ सालों से देश में गरीबी की वजह से गांधी का चष्मा चुरा लिया जाता है..., २ अक्टूबर तक सत्ताखोर बदहवासी में रहता है... 

Sunday, 16 November 2014


पुलिस ने भी संविधान के ४० चोर बनकर, ४० बच्चों को बिनाजांच. बिना कारवाई कर, सम्मान पूर्वक छोड दिया, एक छोटी खबर, देश के भविष्य की बड़ी हानी.., क्योंकि संविधान को मान रहें हैं.., अपनी मनमानी...,

देश का क़ानून, (कान+ऊन)..कान में ऊन डालकर, देश के धनाड्य वर्गों के धन के, अफीमी अड्डों के माफिया (माफ़-किया) का क़ानून लागू होता है.., पुलिसिया कार्यवाही होने पर, धनाड्य, राजनैतिक माफियाओं द्वारा, पुलिस की वर्दी उतर जाती है..., इससे बेहतर है कि सिस्टम के साथ चलकर.., देश के स्तम्भ बनकर..., राष्ट्रीय पुरूस्कार जीतो...
मुम्बई की कुछ ख़ास घटनाए.., फिर भी पुलिसों की नौकरी में बहाली और बाद में उन्नती....

१. पुलिस की गाडी में नशे का सामान ठिकाने पर पहुंचाने का साधन...
२. नारकोटिस दिवस पर , २०० लडके-लड़कियों की रेव पार्टी में, नारकोटिस विभाग के.., महाराष्ट्र के पुलिस अध्यक्ष की देख - रेख में स्वंय ड्रग की आपूर्ती में पकड़े जाकर बहाल हो जाना
३. पुलिस द्वारा अंडर वर्ल्ड माफियाओं के पार्टियों में शराब के सेवन से डांस... सस्पेंड होकर,एक नये तोहफे की , नयी पेंट से बहाली
४. अम्बुलेस में हत्यार से शराब का व्यापार...
५. शराब व देह अड्डे का संरक्षण ...,
६. अवैध निर्माण की भागीदारी में एक दिन में २०० से ज्यादा लोगों की मौत से बने..., देश के यमदूत ..ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं...

बाल दिवस- जब..,लड़कियो के जेब में हो कंडोम, तो देश के साथ शिक्षा भी हो गयी कंडम (रद्दी माल, आवारा बच्चा, लावारिस बच्चा, अपव्ययी.....)

दोस्तों शिक्षा से संस्कृति का पतन कर , सत्ताखोर व माफिया... भ्रष्टाचार की पतंगे उड़ा कर मजा कर रहे है.. शिक्षक तो गुरू घंटाल बनकर शिक्षा का पंडाल (कोचिंग क्लास) से मुन्ना भाई की फौजों से रिश्वत लेकर , M.B.A. (महा भ्रष्ट्र अस्सोसियेषन ) व M.B.B.S (महान भारत भ्रष्टतम सेवा) से महान शिक्षा पुत्रों को डिग्रीयां बांट रहा है ......

आज का धनाढय वर्ग का स्कूली बच्चा अपने झोले में..., अपने इन्डियन माँ,बापों की शराब की बोतल व बन्दूक से.... झगड़ने पर, अपने सहपाठी की हत्या कर देता है.....
शिक्षक द्वारा पिटाई करने पर माँ,बाप से मानव अधिकार आयोग भी, एक महाअभियोग लगाकर, शिक्षक की रोजी रोटी छीन लेता है....

४ साल पहिले कर्नाटक में बीजेपी के सरकार के समय...., पब में अश्लील नृत्य करने वाले जोड़ो पर श्री राम सेना द्वारा कार्यवाही करने पर मानव अधिकार ने भी इस कार्यवाही का विरोध किया , तथा कांग्रेसी प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने भी समर्थन करते हुए कहा यह लोकतंत्र की आजादी है... और अब तो यह कह रही है , लडकियों को कैसे कपड़े पहनने है .... किससे सम्बन्ध बनाने है, वह उनका नीजी मामला है .....
याद रहे.....???????,
मुम्बई में पुलिस कमिश्नर ढोबले ने, वीडियो ग्राफी कर सैकडॉ बीयर बारों व पब में, अश्लील नृत्य करने वाली बार बला व पब में कोकीन व अन्य मादक पदार्थों का सेवन करते युवक युवतियों को पकड़ा और जगह पर पीटाई भी की , व गिरफ्तार कर उनके मूत्र व खून के नमूने में जांच पकड़ी , लेकिन इस कार्यवाही की सजा अमीरों के औलादों को न मिलकर , कमिश्नर के अधिकार को छीनकर, उनका तबादला कर दिया गया.....;

आज युवा अमीर वर्गों के बच्चे कोकीन व अन्य नशे में लिप्त है, पुलिस द्वारा पकडे जाने पर. उनके धन के नशेणी माँ -बाप कहते है , हमारे बच्चे तो मासूम है…यह कहकर क़ानून को चुनौती देकर , देश को चूना लगा रहे है …अब आप ही समझिये...???, इनके माँ बाप को धन का कितना नशा है कि ... वे क़ानून को भी खरीद लेते है ....

ये है चाचा नेहरू के अंग्रेजी संस्कृति के जन्म दिन पर अग्रेजी संस्कारों वाले लडके लडकियों की खबरें, “यह बलात्कार नहीं.. अंग्रेजी संस्कृति का प्रबल सत्कार...” मानवाधिकार संस्था का अधिक अधिकार के नाम से उज्जवल है सरकार, फेस बुक, फन बुक बनकर, कोबरा नाग की तरह अपने फन से हिन्दुस्तानी संस्कृति और इंटरनेट लडके लडकियों को आपस में व्यभिचार से आपस में कनेक्ट कर रहा है विष का विशेष प्याला पिला रहा है 


Saturday, 15 November 2014



बाल दिवस- जब..,लड़कियो के जेब में हो कंडोम, तो देश के साथ शिक्षा भी हो गयी कंडम (रद्दी माल, आवारा बच्चा, लावारिस बच्चा, अपव्ययी.....)

ये है चाचा नेहरू के अंग्रेजी संस्कृति के जन्म दिन पर अग्रेजी संस्कारों वाले लडके लडकियों की खबरें, “यह बलात्कार नहीं.. अंग्रेजी संस्कृति का प्रबल सत्कार...” मानवाधिकार संस्था का अधिक अधिकार के नाम से उज्जवल है सरकार, फेस बुक, फन बुक बनकर, कोबरा नाग की तरह अपने फन से हिन्दुस्तानी संस्कृति और इंटरनेट लडके लडकियों को आपस में व्यभिचार से आपस में कनेक्ट कर रहा है विष का विशेष प्याला पिला रहा है

दोस्तों शिक्षा से संस्कृति का पतन कर , सत्ताखोर व माफिया... भ्रष्टाचार की पतंगे उड़ा कर मजा कर रहे है.. शिक्षक तो गुरू घंटाल बनकर शिक्षा का पंडाल (कोचिंग क्लास) से मुन्ना भाई की फौजों से रिश्वत लेकर , M.B.A. (महा भ्रष्ट्र अस्सोसियेषन ) व M.B.B.S (महान भारत भ्रष्टतम सेवा) से महान शिक्षा पुत्रों को डिग्रीयां बांट रहा है ......

आज का धनाढय वर्ग का स्कूली बच्चा अपने झोले में..., अपने इन्डियन माँ,बापों की शराब की बोतल व बन्दूक से.... झगड़ने पर उसकी हत्या कर देता है.....शिक्षक द्वारा पिटाई करने पर माँ,बाप से मानव अधिकार आयोग भी, एक महाअभियोग लगाकर, शिक्षक की रोजी रोटी छीन लेता है....

४ साल पहिले कर्नाटक में बीजेपी के सरकार के समय...., पब में अश्लील नृत्य करने वाले जोड़ो पर श्री राम सेना द्वारा कार्यवाही करने पर मानव अधिकार ने भी इस कार्यवाही का विरोध किया , तथा कांग्रेसी प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने भी समर्थन करते हुए कहा यह लोकतंत्र की आजादी है... और अब तो यह कह रही है , लडकियों को कैसे कपड़े पहनने है .... किससे सम्बन्ध बनाने है, वह उनका नीजी मामला है .....
याद रहे.....???????, मुम्बई में पुलिस कमिश्नर ढोबले ने वीडियो ग्राफी कर सैकडॉ बीयर बारों व पब में, अश्लील नृत्य करने वाली बार बला व पब में कोकीन व अन्य मादक पदार्थों का सेवन करते युवक युवतियों को पकड़ा और जगह पर पीटाई भी की , व गिरफ्तार कर उनके मूत्र व खून के नमूने में जांच पकड़ी , लेकिन इस कार्यवाही की सजा अमीरों के औलादों को न मिलकर , कमिश्नर के अधिकार को छीनकर, उनका तबादला कर दिया गया.....; आज युवा अमीर वर्गों के बच्चे कोकीन व अन्य नशे में लिप्त है, पुलिस द्वारा पकडे जाने पर. उनके धन के नशेणी माँ -बाप कहते है , हमारे बच्चे तो मासूम है…यह कहकर क़ानून को चुनौती देकर , देश को चूना लगा रहे है …अब आप ही समझिये...???, इनके माँ बाप को धन का कितना नशा है कि ... वे क़ानून को भी खरीद लेते है .... 


Friday, 14 November 2014

बाल-दिवस... या भूखमरी से बालकों का, बलि दिवस... देश में सालाना ३ करोड़ बालकों की.., कुपोषण ईलाज के अभाव से सरकारी योजनाओं को भोजनायें बनाकर, मृत्यु ...


क्या..??, एक अय्याश व्यक्ती के नाम “बाल-दिवस” मनाना उचित है.., देश का बाल दिवस तो हिन्दू संस्कृति के अनुसार “गुड़ी पाडवा” के दिन , नूतन दिवस में, नई किरणों से “बाल निर्माण” के साथ “राष्ट्र निर्माण” की अलख से, हो, तो..., देश एक नए उजाले की ओर अग्रसर होगा.., और देश के २०० सालों की गुलामी से उपजी.., ६८ सालों की अंग्रेजीयत की बीमारी दूर होगी... 
देश के धनाड्य वर्गों के, अंग्रेजी संस्कृति का बखान करने वालों को, यह देश का १२५ वां WELL-IN-TIME और CHILDREN DAY- CHILD-MOTHER, RUN DAY के अनुयायिओं को समर्पित...

बाल-दिवस... या भूखमरी से बालकों का, बलि दिवस... देश में सालाना ३ करोड़ बालकों की.., कुपोषण ईलाज के अभाव से सरकारी योजनाओं को भोजनायें बनाकर, मृत्यु ...

यूरोपीय देशों में अवैध रूप से रोपे गए बच्चे.., उनकी सरकार गोद ले लेती हैं..., व उनके लालन-पानन की व्यवस्था की जिम्मेदारी सुचारू रूप से चलाती है...
लेकिन मेरे देश में गरीबी रेखा व उसके नीचे वैध बच्चे , माफियाओं द्वारा चुराकर, भीख मांगने व वेश्या वृति व्यवसाय में धकेल दिए जातें हैं..., देश में पुलिस के नाक के तले , निठारी काण्ड से बच्चे, , मानव भक्षियों के शिकार होकर, पुलोस थाने के सामने नालों में फेंक दियें जाते है...

सत्ताखोर व पुलिस भी इसे माफियाओं का आम खेल मानकर, रिश्वत की रूई से अपने, आँख- कान बंद कर लेते है..., गरीबी लोग रोते –बिलखते इन अपने मासूम बच्चों की तड़फ से अपनी नारकीय जिन्दगी गुजार देतें है...,

अभी २ दिन पाहिले ही, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लताड़ लगाते हुए, पूछा..., देश के करोड़ों.., लापता मासूम बच्चों के बारे में क्या कारवाई की है...

याद रहे.., अन्ना आन्दोलन के चरम सीमा में पहुँचने के पहिले, जब उन्होंने रामलीला मैदान में रैली के लिए अनुमति मानी, तो मनमोहन सरकार ने उन्हें इस रैली की जगह, जयप्रकाश नारायण पार्क में रैली की अनुमती दी.., वह भी शर्तों से.. कि रैली में ५००० से ज्यादा की भीड़ नहीं होगी, व ५० से ज्यादा कारों व स्कूटर की पार्किंग नहीं दी जायेगी.., जैसे यह अन्ना का शादी समारोह हो..

उसी समय यूरोपीय देशों में नारी का पुरूषों से, समाधिकार की आवाज में , महिलाओं ने तर्क के साथ कहा कि यदि पुरूष बिना ऊपरी वस्त्र के सडकों पर चल सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं ...,

इसी विरोध में, उन्होंने ऊपरी वस्त्र खोलकर सडकों में SLEDGE –SHOW का प्रदशन प्रदर्शन किया ..., तब हमारे देश की INDIAN व अंग्रेजी से पेट भरने वाली धनाढ्य महिलाओं ने इस आन्दोलन के समर्थन में गुहार लगाई तो, देश का महिला अधिकार आयोग भी इस की मुखालत करते आगे आया तो.., उनके मनानुसार उन्हें , जंतर मंतर से संसद भवन तक SLEDGE –SHOW की अनुमती मिली ...,

अभी तो, खुले रास्ते में “चुम्बन दिन” मना कर इंडियन वर्ग अपने को अभिमानीत कह, गर्व मना रहा है...,

विदेशी धन , विदेशी संस्कृति के निवाले..., को देश की जनता पर थोपने का अधिकार...

क्या यह अंग्रेजी आवरण के छुपे खेल में भारतीय संस्कृति पर पर प्रहार नहीं है...!!!!

यह मोतीलाल नेहरू का योग या संयोग, कहा जाए, जो १४ फरवरी के ठीक ९ महीने बाद, १४ नवम्बर को जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...!!!!,

यह मोतीलाल नेहरू का योग या संयोग, कहा जाए, जो १४ फरवरी के ठीक ९ महीने बाद, १४ नवम्बर को जवाहरलाल नेहरू को जन्म दिया...!!!!, 
याद रहे..., मोतीलाल नेहरू राजा-महाराजाओं के विवादों के वकालत से अपने बेशुमार आय से, अधिक व्यय-भिचार से हिंदु संस्कृति को भ्रष्ट करने की वजह से काश्मीरी हिन्दुओं ने उन्हें अपने समाज से निकाल फेंका था...
और इसी क्रिया को उनके पुत्र जवाहरलाल नेहरू ने बरकरार रखते हुए..,सत्तालोलुप बनकर, सत्ता परिवर्तन (१९४७) के बाद कहा था

नेहरु का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य था... जवाहर लाल नेहरु, बहुत बार कहा करते थे कि ..., “मैं जन्म के संयोग से हिन्दू हूँ, संस्कृति से मुसलमान और शिक्षा से अंग्रेज हूँ.” उन्हें हिन्दुओ की भावना की रत्ती भर भी परवाह नहीं होती थी,जिनके वोटो के बल पर उन्होंने सत्ता प्राप्त की थी.

वही हाल, एक तरफ तो पंडित नेहरु के नाती, राजीव गाँधी का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य दिया.., राजीव गांधी ने हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री होते हुए भी सन्डे टाइम लन्दन को एक साक्षात्कार में नि:संकोच कहा की ‘मेरे नाना जवाहरलाल नेहरु एक नास्तिक (एग्नास्टिक) थे. मेरे पिता पारसी (गैर हिंदू) थे, मेरी पत्नी इसाई है, और मैं किसी धर्म में विश्वास नहीं करता.’

क्या..??, एक अय्याश व्यक्ती के नाम “बाल-दिवस” मनाना उचित है..,
देश का बाल दिवस तो हिन्दू संस्कृति के अनुसार “गुड़ी पाडवा” के दिन , नूतन दिवस में, नई किरणों से “बाल निर्माण” के साथ “राष्ट्र निर्माण” की अलख से, हो, तो..., देश एक नए उजाले की ओर अग्रसर होगा.., और देश के २०० सालों की गुलामी से उपजी.., ६८ सालों की अंग्रेजीयत की बीमारी दूर होगी...

देश के धनाड्य वर्गों के, अंग्रेजी संस्कृति का बखान करने वालों को, यह देश का १२५ वां WELL-IN-TIME और CHILDREN DAY- CHILD-MOTHER, RUN DAY के अनुयायिओं को समर्पित...

बाल दिवस या भूखमरी से बालकों का, बलि दिवस... देश में सालाना ३ करोड़ बालकों की.., कुपोषण ईलाज के अभाव से सरकारी योजनाओं को भोजनायें बनाकर, मृत्यु ...

यूरोपीय देशों में अवैध रूप से रोपे गए बच्चे.., उनकी सरकार गोद ले लेती हैं..., व उनके लालन-पानन की व्यवस्था की जिम्मेदारी सुचारू रूप से चलाती है...
लेकिन मेरे देश में गरीबी रेखा व उसके नीचे वैध बच्चे,जो बुढ़ापे में सहारा होते हैं.. , माफियाओं द्वारा चुराकर, भीख मांगने व वेश्या वृति व्यवसाय में धकेल दिए जातें हैं...,
देश में पुलिस के नाक के तले , निठारी काण्ड से बच्चे, , मानव भक्षियों के शिकार होकर, पुलीस थाने के सामने नालों में फेंक दियें जाते है...

सत्ताखोर व पुलिस भी इसे माफियाओं का आम खेल मानकर.., रिश्वत की रूई से अपने, आँख- कान बंद कर लेते है..., गरीबी लोग रोते –बिलखते इन अपने मासूम बच्चों की तड़फ से अपनी नारकीय जिन्दगी गुजार देतें है...,

अभी २ दिन पाहिले ही, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लताड़ लगाते हुए, पूछा..., देश के करोड़ों.., लापता मासूम बच्चों के बारे में क्या कारवाई की है...

याद रहे.., अन्ना आन्दोलन के चरम सीमा में पहुँचने के पहिले, जब उन्होंने रामलीला मैदान में रैली के लिए अनुमति मानी, तो मनमोहन सरकार ने उन्हें इस रैली की जगह, जयप्रकाश नारायण पार्क में रैली की अनुमती दी.., वह भी शर्तों से.. कि रैली में ५००० से ज्यादा की भीड़ नहीं होगी, व ५० से ज्यादा कारों व स्कूटर की पार्किंग नहीं दी जायेगी.., जैसे यह अन्ना का शादी समारोह हो..

उसी समय यूरोपीय देशों में नारी का पुरूषों से, समाधिकार की आवाज में , महिलाओं ने तर्क के साथ कहा कि यदि पुरूष बिना ऊपरी वस्त्र के सडकों पर चल सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं ...,

इसी विरोध में, उन्होंने ऊपरी वस्त्र खोलकर सडकों में SLEDGE –SHOW का प्रदशन प्रदर्शन किया ..., तब हमारे देश की INDIAN व अंग्रेजी से पेट भरने वाली धनाढ्य महिलाओं ने इस आन्दोलन के समर्थन में गुहार लगाई तो, देश का महिला अधिकार आयोग भी इस की मुखालत करते आगे आया तो.., उनके मनानुसार उन्हें , जंतर मंतर से संसद भवन तक SLEDGE –SHOW की अनुमती मिली ...,

अभी तो, खुले रास्ते में “चुम्बन दिन” मना कर इंडियन वर्ग अपने को अभिमानीत कह, गर्व मना रहा है...,

विदेशी धन , विदेशी संस्कृति के निवाले..., को देश की जनता पर थोपने का अधिकार...

क्या यह अंग्रेजी आवरण के छुपे खेल में भारतीय संस्कृति पर पर प्रहार नहीं है...!!!!

Sunday, 2 November 2014



बाल-दिवस... या भूखमरी से बलि दिवस... देश में सालाना ३ करोड़ बालकों की.., कुपोषण से मृत्यु ...

उफ्फ.. 'कंडोम' का पैसा भी खा गयी यूपीए की मनमोहन सरकार, एडस (aids-सहायता) भी भ्रष्टाचारियों के लिए एक सहायकता का सार्थक बन कर घोटालों की बलि चढ़ गया और प्रधान मंत्री ने भी इस कंडोम घोटाले की निंदा (condemn) करते हुए अपना पल्ला झाड लिया.

दोस्तों .., हर घोटाले से लेकर आतंकवादी, भुखमरी व किसान आत्महत्या से जवान हत्या तक सिर्फ निंदा (condemn) का मलहम लगाकर देश का ईलाज किया जा रहा है...????,

बाल दिवस से बचने के लिए..,
अभी ३ दिन पाहिले..., छत्तीसगढ़ की ताजा घटना में.., कंडोम के बदते भाव व बदतर गुणवत्ता.., से बचने के लिए गरीब महिलाओं ने नसबंदी का रूख अपनाया, छत्तीसगढ़ सरकार ने उनकी बलि लेकर ... भष्टाचार के ६ X ६= ३६, ६ छक्के लगाकर..., भष्टाचार के नकली इंजेक्शन के एक्शन से ३६ X २ =७२ महिलाओं की अर्ध-बलि लेकर..., देश के माफिया सत्ताखोरों के गठजोड़ से, भ्रष्टाचार के favorate से flowrate के प्रवाह से favicol का मजबूत गठजोड़ से UNO (सयुक्त राष्ट्र महासंघ) भी भौचक्का रह गया है कि भारत में यह चक्का कितनी तेजी से दौड़ रहा है...
UNO ने तो भारत सरकार से इस बारे में..., रिपोर्ट भी माँगी है...

आज, प्रधान पति, सत्ता पति, उद्योग पति, पति उद्योग, घुसपैठीये ये पंचशील (गुण) इस देश को डूबाने के हत्यार हैं..

सरकार ने एड्स जैसे भयानक संक्रमित रोग की रोकथाम के लिए देश भर में 22 हजार कॉन्डम वेंडिंग मशीनों लगाने के लिए 21 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन इनमें से 10 हजार मशीनें गायब हैं और करीब 1,100 मशीनें काम नहीं कर रही हैं।

यह घोटाला २१ करोड़ का जरूर है... लेकिन इस घोटाले की आड़ में जो जनसख्या बेतहासा बढ़ी है, उसकी भयावहता देखें तो राष्ट्र की जिम्मेदारी की खर्च की राशी, अगले २० साल में १०० गुना बढ़कर २१ लाख करोड़ तक हो जाएगा...

देश के डूबने का कारण “पति उद्योग” , “उद्योग पति” , वोट बैंक की आड़ में “घुसपैठीयों का योग” ...
आज सीमा पार से ६०० रूपये प्रति व्यक्ति की औसत दर से “घुसपैठीयों” का आयात हो रहा है , जबकि देश में प्रति व्यक्ती पर ६० हजार का कर्ज है,,, यदि यह खेल बेरोकटोक चलता रहे तो...., अब आने वाले पांच सालों में यह कर्ज राशी प्रति व्यक्ती पर १ लाख से भी ज्यादा हो जायेगी.

कहते हैं , ब्याज, मूल धन को खा जाता है..., हमारी सरकार विश्व बैंक व विदेशों से कर्ज लेकर , योजनाओं को भोजनाए बनाकर एक सुनियोजित ढंग से माफियाओं के डकार कर उनकी बड़ी बढ़ी तोंद को “भारत निर्माण “ के नारों से जनता को भरमा रही है..., और देश कर्ज के गर्त में डूब रहा है ..


हिंदुत्व का शेर.., अब बेनकाब...,
सत्ता के छोले में , छोड़ा अपना चोला ,
चचेरे भाइयों के चांदी के चम्मच, के चेहरे की आपसी खन-खन से अनबन..
बी.जे.पी से लड़ने बनाया अपना मन ...
विपक्षी भी गिद्ध दृष्टी से, शिकारी बन...,
सत्ता की कुर्सी को जोड़कर बना रहें थे अपना मन ..

देश में हुद – हुद का तूफ़ान..,
विरोधी करें फरमान.. ,
मोदी क्यों संभाले हैं.., हमारे लिए तीर कमान..,
क्यों नहीं सीमा पर खडें हो रहें..., निशाना तान...
देश के गद्दीदार कहें..,उन्हें गद्दार..,
मोदी ने अब कर दिया उनका नशा उतार,
मोदी की दहाड़ .., दुश्मनो को पछाड़ ..,
दुश्मन व विदेशी ताकतें अब गए उड़..

मोदी की ललकार..,.
जातिवाद, भाषावाद, धर्मवाद,अलगाववाद,घुसपैठीयों के वोट बैंक पर कहर...
जातिवाद, भाषावाद, धर्मवाद,अलगाववाद,घुसपैठीयों के वोट बैंक के राज को लगी ठोकर..,
इसे कहते है मोदी लहर..

अब बी.जे.पी. की सत्ता के एक नई पत्ती.,
बुझा दी विपक्षीयों की बत्ती..
अब लगा रहें हैं अपनी “मृत्य कुर्सीयों” पर अगरबत्ती...
सत्ता के उद्भव के के खेल में लगी ठोकर..,