Monday, 16 June 2014



भारतीय संदर्भ में बुल्के कहते थे ‘संस्कृत महारानी, हिंदी बहूरानी और अंग्रेजी नौकरानी है.’

फादर कामिल बुल्के का जन्म एक सितम्बर, 1909 को बेल्जियम में हुआ था। प्रारम्भिक शिक्षा अपने गाँव से ही पूरी करने के बाद 1930 में उन्होंने लुवेन विश्वविद्यालय से अभियन्ता की परीक्षा उत्तीर्ण की। इस दौरान उनका सम्पर्क कैथोलिक ईसाइयों के जेसुइट पन्थ से हुआ। उन्होंने वहाँ से धार्मिक शिक्षा प्राप्त की। पादरी बनकर 1935 में वे संस्था के आदेशानुसार ईसाइयत के प्रचार-प्रसार के लिए अध्यापक बनकर भारत आ गये।
जन्म व मृत्यु : १ सितंबर १९०९, बेल्जियम के पश्चिमी फ्लैंडर्स स्टेट के रम्सकपैले गांव में. व देहान्त 17 अगस्त, 1982 को दिल्ली में हुआ।
शिक्षा: यूरोप के यूवेन विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग पास की. १९३० में सन्यासी बनने का निर्णय लिया.
भारत: नवंबर १९३५ में भारत, बंबई पहुंचे। वहां से रांची आ गए। गुमला जिले के इग्नासियुस स्कूल में गणित के अध्यापक बने। वहीं पर हिंदी, ब्रज व अवधी सीखी. १९३८ में, सीतागढ/हजारीबाग में पंडित बदरीदत्त शास्त्री से हिंदी और संस्कृत सीखा। १९४० में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से विशारद की परीक्षा पास की। १९४१ में पुरोहिताभिषेक हुआ, फादर बन गए. १९४५ कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिंदी व संस्कृत में बीए पास किया। १९४७ में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए किया।[1]
रामकथा: १९४९ में डी. फिल उपाधि के लिये इलाहाबाद में ही उनके शोध रामकथा : उत्पत्ति और विकास को स्वीकृति मिली. १९५० में पुनः रांची आ गए। संत जेवियर्स महाविद्यालय में हिंदी व संस्कृत का विभागाध्यक्ष बनाया गया।
सन् 1950 ई. में ही बुल्के ने भारत की नागरिकता ग्रहण की. इसी वर्ष वे बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् की कार्यकारिणी के सदस्य नियुक्त हुये. सन् 1972 ई. से 1977 ई. तक भारत सरकार की केन्द्रीय हिन्दी समिति के सदस्य बने रहे. वर्ष 1973 ई. में उन्हें बेल्जियम की रॉयल अकादमी का सदस्य बनाया गया.
सर्वप्रथम उन्होंने दार्जिलिंग और फिर बिहार के अति पिछड़े क्षेत्र गुमला में अध्यापन किया। इस दौरान उन्हें भारतीय धर्म, संस्कृति, भाषा तथा दर्शन का अध्ययन करने का अवसर मिला। इससे उनके जीवन में भारी परिवर्तन हुआ। अंग्रेजों द्वारा भारत पर किया जा रहा शासन उनकी आँखों में चुभने लगा।

निर्धन और अशिक्षित हिन्दुओं को छल-बल और लालच से ईसाई बनाने का काम भी उन्हें निरर्थक लगा। अतः उन्होंने सदा के लिए भारत को ही अपनी कर्मभूमि बनाने का निश्चय कर लिया। उन्होंने बेल्जियम की नागरिकता छोड़ दी और पूरी तरह भारतीय बनकर स्वतन्त्रता के आन्दोलन में कूद पड़े।

यद्यपि वे फ्रेंच, अंग्रेजी, फ्लेमिश, आइरिश आदि अनेक भाषाओं के विद्वान थे; पर उन्होंने भारत से जुड़ने के लिए हिन्दी को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। वे राँची में विज्ञान पढ़ाते थे; पर इसके साथ उन्होंने हिन्दी का अध्ययन प्रारम्भ कर दिया। उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए. की डिग्री ली। इस दौरान उनका गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य से विस्तृत परिचय हुआ। फिर तो तुलसीदास उनके सबसे प्रिय कवि हो गये।

अब वे तुलसी साहित्य पर शोध करने लगे। 1949 में उन्हें ‘रामकथा: उद्भव और विकास’ विषय पर पी-एच.डी की उपाधि मिली। इसके बाद वे राँची के सेण्ट जेवियर कालिज में हिन्दी के विभागाध्यक्ष हो गये। तुलसी साहित्य पर गहन अध्ययन के कारण उन्हें पूरे देश से व्याख्यानों के लिए निमन्त्रण मिलने लगे। उनका नाम फादर की जगह बाबा कामिल बुल्के प्रसिद्ध हो गया।

श्री बुल्के का अनुवाद कार्य भी काफी व्यापक है। इनमें न्यू टेस्टामेण्ट,पर्वत प्रवचन, सन्त लुकस का सुसमाचार, प्रेरित चरित आदि ईसाई धर्म पुस्तकें प्रमुख हैं। अपनी पुस्तक ‘दि सेवियर’ तथा विश्वप्रसिद्ध फ्रे॰च नाटक ‘दि ब्लूबर्ड’ का नीलपक्षी के नाम से उन्होंने अनुवाद किया। हिन्दी तथा अंग्रेजी में उन्होंने 29 पुस्तक, 60 शोध निबन्ध तथा 100 से अधिक लघु निबन्ध लिखे। उनका हिन्दी-अंग्रेजी शब्दकोश आज भी एक मानक ग्रन्थ माना जाता है। 1974 में भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया।
दरअसल एक विदेशी होने के बावजूद बुल्के ने हिन्दी की सम्मान वृद्धि,इसके विकास,प्रचार-प्रसार और शोध के लिये गहन कार्य कर हिन्दीके उत्थान का जो मार्ग प्रशस्त किया,और हिन्दी को विश्वभाषा के रूप में प्रतिष्ठादिलाने की जो कोशिशें कीं,वह हम भारतीयों के लिये प्रेरणा के साथ-साथ शर्म का विषय भी है. शर्म का विषय इसलिये क्योंकि एक विदेशी होने के बावजूद हिन्दी के लिये उन्होंने जो किया,हम एक भारतीय और एक हिन्दी भाषी होने के बावजूद उसका कुछ अंश भी नहीं कर पाये. इस शर्म को मिटाने के लिये हमारी ओर से और अधिक दृढ-प्रतिज्ञ और एकनिष्ठ होकर हिन्दी हित में कार्य किये जाने की जरूरत थी जो कि वर्तमान माहौल में फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है. हिन्दी जगत के लिये यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. इससे उबरकर हिन्दी के उत्थान के लिये हमें फादर बुल्के के पद-चिन्हों पर चलने की जरूरत होगी.

Friday, 13 June 2014



१८५० का दशक, जेम्स वाट द्वारा भाप की शक्ति पहचानकर इंग्लैंड में औधोगिक क्रांती का उद्भव हुआ , २१वी सदी, भारत… भ्रष्टाचार से, भांप की क्रान्ति में, विश्व में नंबर एक पर है … सत्ताखोर, योजनाओं को भांप कर एक एक नई क्रांति कर रहे है , नोबल पुरूस्कार तो कुछ नहीं … वे तो बाहुबल पुरूस्कार से अलंकृत है दोस्तों…. यह काँमन वेल्थ नही , हाई हेल्थ का “आधार” बना घोटाला है , इसे विदेशी कंपनियों को ठेका देकर देशकी सुरक्षा में सेंध लगाने का सुनहरा अवसर भी दे दिया है...!!!
जागों दोस्तों, आप इसी तरह देख कर आँख बंद रखेंगे तो वह दिन दूर नहीं , जब देश के मूल नागरिक को घुसपैठीयों का दर्जा मिले ,
टी.एन. शेषन ने ९० के दशक में फर्जी मतदान रोकने के लिए मतदाता/वोटर कार्ड की शुरूवाटी लाकर , मतदान में पारदर्शीता लाने की शुरूवात की थी , सभी पार्टीयों ने इसका विरोध किया था, बाद में टी.एन. शेषन पर लगाम लगाने के लिए , सब पार्टीयों की सहमति से दो गुर्गे नियुक्त किये, ताकि ऊन गुर्गो की भी सहमति बने, उसके बावजूद वे डटे रहे , सेवानृवित होने पर उन्होंने कहा था सत्ताधारियो पर लगाम लगाना कितना कठिन है… यह मैंने जाना है,सभी पार्टीया फर्जी मतदान चाहती है
आज आधार कार्ड घोटाला , काँमन वेल्थ घोटाले से भी बड़ा है, करोडो जाली आधार कार्ड , बांग्लादेशी घुसपैठीयों को बांटे गए है, सरकार द्वारा आधार कार्ड की लागत , मूल कीमत से कही गुना ज्यादा कीमत में बनवाये गए है, बहुत सारे मामले प्रकाश में आये है की एक-एक व्यक्ति के पास एक से ज्यादा , व फर्जी आधार कार्ड का मकडजाल फैला हुआ है , बिना जांच के एजेंट द्वारा रकम वसूल कर बनायें गए है… जागों दोस्तों, आप इसी तरह देख कर आँख बंद रखेंगे तो वह दिन दूर नहीं , जब देश के मूल नागरिक को घुसपैठीयों का दर्जा मिले

Monday, 9 June 2014



उत्तर प्रदेश, बना उतारू प्रदेश , बलात्कार में बना चढ़ाऊ प्रदेश, से पेड़ में लटकाऊ प्रदेश, गंगा की गन्दगी का प्रदेश, गर्मी से बिजली का करंट मारने का प्रदेश..., जातिवाद , भाषावाद, अलगाववाद से खड़ा कर सत्ता चलाने का खड़ाऊ प्रदेश .., हर दिन घोटाले का प्रदेश ..
बडबोले नेताओं के बेलगाम जुबान का प्रदेश ... 
और..., क्या- क्या लिखू..., कलम की स्याही भी मुझसे कहती है..., ऐसे शब्दों से तो.., मैं भी शर्मींदा हूँ..., अब तो बस करो...

बलात्कार की देश मे परिभाषा है , BAL – AT – CAR
क्या, आपने कभी, 8 X फिल्म देखी है … तो यह देश की 8 X फिल्म देखिए.. 4X + 4X = 8 X
अब यू.पी . में बना , बल (BAL) से –LATKAAR से पुलिस का सत्कार मंत्री के वोट बैंक का चमत्कार
जहाँ, हर साल देश की 10 लाख से अधिक मासूम गरीब नाबालिक से भी कच्ची उम्र के बच्चियाँ चुराकर वेश्यावृती व्यापार मे ढकेल दी जाती है, जहाँ मासूम गरीब नाबालिकों की सिसकियाँ “पुलिस के नाक के तले” निठारी कांड मे भून कर हवसी के पेट मे चली जाती है, और उनके कंकाल पुलिस के सामने नाले मे फेंक दिए जाते हैं…???
आदिवासो इलाकों मे लाखों, बिन ब्याही माँ की फरियाद न होने से वे वेश्यावृति व्यवसाय मे ढ्केल दी जाती है, शहरों मे नारी सुधार गृह के नाम पर, नारी व्यापार केंद्र बनाकर, देह नारी शोषण के लिए सत्ताधारियों व उनके मोहरों को परोस दी जाती है
जब बलात्कार के शिकार परिजन, पुलिस थाने जाते है, तो फरियादी को अपराधी की तरह प्रताडित कर भगा दिया जाता है , जहाँ देश के रखवाले, दलालों से मोटी रकम ऐठकर अपनी तोंद बडा रहे है…. ?? क्या ये भ्रष्टाचार के रखवाले , या कानून के मतवाले….????? क्या अब, नौकरसाहों के भ्रष्टाचार की बाढ , आम आदमी के खेत (जीवन) को डूबा रही है….. ??? या मेरा देश डूबा…???

Sunday, 8 June 2014



हमें आगे बढ़ना है तो…. चीन से सिखना पड़ेगा 
एक साल पुरानी पोस्ट ..इन्द्रधनुष के तो सात रंग होते है, आज मोहल्ले, शहर से देश तक लाखों रंग रूप के भ्रष्टाचारी धनुष तानकर जनता को लूट रहें है , हर योजना में तारीख पर तारीख से देश लूट रहा है और जनता भी न्याय में तारीख पर तारीख से उजड़ रही है, भ्रष्टाचारी तो …. तारीख को, तारीफ़ समझकर अपने हौसले बुलंद कर रहा है
यह ११ कि.मी का सेतु (ब्रिज), आज तक १०० से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है, बीच में ३ बार सेतु के हिस्से ढह चुके थे , २ साल की योजना में, ६ साल लगाने के बाद , जुलाई २०१३ की तारीख दी गई थी , अभी भी कार्य ३०% अधूरा, न इस योजना का कोइ रखवाला है, जनता भी अपने को असहाय समझ कर चुप बैठी है , यह मेट्रो जैसे पढ़े लिखे नागरिको का है… तो दूर दराज के लोग तो सरकार के लिए गाजर मूली है ….उनकी तो जुबान चुप करा दी जाती है…???.
दूसरी योजना, मुंबई की मोनो रेल्वे की हे , जो समय के साथ भी, दुगनी लागत से ज्यादा लगा चुका है, कई बार मजदूरों की बलि लेकर ढह चुका, सेतु… कही मौत का हेतु न बन जाए , इसलिए इसका ६ महीनों से परिक्षण चल रहा है , वह अब अपने अंतिम चरण में है
वही हाल, देश का गर्व माने जाने वाले….. वर्ली समुन्द्र सेतु योजना का था, ३७५ करोड़ की योजना जो ४ साल में साल में पूरी होनी थी, वह १५ सालों में १८०० करोडी की लागत लग गई
चीन का चिंगदाओ-हाइवान समुद्र सेतु – इस पुल को बनने में मात्र चार वर्षों का समय लगा, यह सेतु 30 जून 2011 को खोला गया इस सेतु की लम्बाई ४२.५ किमी है जो इसे विश्व का सबसे लम्बा समुद्री सेतु बनता है और इसके निर्माण में कुल १०,००० लोग लगे हुए थे। इस पुल का डिज़ाइन शान्दोंग गाओसू समूह ने बनाया था और इस पुल पर कुल ४,५०,००० टन इस्पात और २३ लाख घन मीटर कांक्रीट का उपयोग किया गया,अब चीन अपनी योजना भावी योजना से यूरोप तक मार्ग बनाकर बुलेट ट्रैन का खाका तैयार कर रहा है? दूनिया को अचम्भित कर दिया , हमें आगे बढ़ना है तो…. चीन से सिखना पड़ेगा.

Saturday, 7 June 2014



गुजरात के चील ने कैसे दबोचा ,दिल्ली के सल्तनत को..



गुजरात के चील ने कैसे दबोचा ,दिल्ली के सल्तनत को..., जो बेख़ौफ़ होकर, जातिवाद,भाषावाद,अलगाववाद,आतंकवाद की छांव से जनता को सता कर सत्ता का आनंद ले रहे थे...,
मोदी को विकास पुरूष के बजाय कांग्रेस ने उन्हें मौत का सौदागर कहकर..., अपने को सत्ता के दांवेदार मानकर , इस जाल में फंसाने के लिए पेट भरी मीडिया का सहारा लिया ...लेकिन मोदी अपने कर्मबल से पिछले विधानसभा चुनाव में विकास के चील बनकर ,विपक्षीयों को उनके जाल में फंसा कर ,गुजरात के मुख्य मंत्री बनकर उभरे
गुजरात चुनाव में विदेशी ताकतों ने मोदी की जीत को रोकने , अपने अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक भेजे, मीडिया को राडिया (RADIA=RA+N=DIA) बनाकर विरोधी प्रचार में उकसाया गया था , अमेरिका व पाकिस्तान तो कांग्रेस से ज्यादा चिंतित था, याद रहे..., जीत के तुरंत बाद, गुजरात में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए , मीडिया को लताड़ते हुए कहा था अब पेट भरी मीडिया के पेट भरने के बाद भी नींद नहीं आयेगी...क्योकि देशी व विदेशी ताकतों की लोरी व थपकी अब बंद हो गई है...
मोदी अब बने..., विरोधियों व आतंकवादियों की जड़ खोदी...,
राजनीति के कर्मों की कब्र, अलगाववाद, भाषावाद , आतंकवाद , घुसपैठीयों के सत्कार से वोट बैक को बैंन होने से विरोधी व मीडिया करें मोदी के राष्ट्रवादी होने पर प्रहार
देश को जाति - धर्म से तोड़ने का खेल अब होगा बेकार...
विदेशी ताकतों का नहीं रहेगा कोई सरोकार ...
मोदी के सुनामी में डूबने से करें विरोधी व मीडिया ..भेडिया वार...
इस सुनामी को बेईमानी कहकर, करें प्रचार
देश के सभी मुद्दे गायब हैं ... मोदी को देखकर विरोधी “मंद बुद्धी” से , मोदी को रोकने व मीडिया अब अपनी बची खुची रोटियाँ सेकनें में लगा है....
दोस्तों..., गुजरात चुनाव में विदेशी ताकतों ने मोदी की जीत को रोकने , अपने अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक भेजे, मीडिया को राडिया (RADIA=RA+N=DIA) बनाकर विरोधी प्रचार में उकसाया गया था , अमेरिका व पाकिस्तान तो कांग्रेस से ज्यादा चिंतित था, याद रहे..., जीत के तुरंत बाद, गुजरात में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए , मीडिया को लताड़ते हुए कहा था अब पेट भरी मीडिया के पेट भरने के बाद भी नींद नहीं आयेगी...क्योकि देशी व विदेशी ताकतों की लोरी व थपकी अब बंद हो गई है... 


न मैं खाता हूं , न खाने देता हूँ..., राष्ट्रवाद के गीत गाता हूं , अब मेरे मंत्रियों में भी भ्रष्टाचार के भाई- भतीजावाज के जन्त्रीयों की खोज कर दबोचने की ताकत रखता हू , 
मेरी आसमानी गगन की उड़ान में.., जमीन पर भ्रष्टाचारी चीटियों से अलगाववादी, घुसपैठीयों पर भी नजर रखता हू ...,
१०० दिन की नजर से.., अब मन मौजी मंत्री पर हर दिन नजर व खबर रखता हूं , सत्ता जनता को न सताए इसका गुमान रखता हूं .., 
फाईलो, को फैला कर , भ्रष्टाचार के थैला बनाकर , देश को मैला बनाने वाले अधिकारी को,,. धिक्कारी बनाकर , राष्ट्र का प्रहरी बनकर , देश को हरा-भरा कर.., गरीबों की मेहनत को सम्मान देकर उनका जीवन उन्नत करने का जज्बा रखता हूं मैं ....
मैं भारतमाता के वैभव को भव्यशाली बनाकर, देश को गौरवशाली से विश्वगुरू के नए युग की शुरूवात का संकल्प लेकर, अपने ध्येय को पूरा करने का माद्दा रखता हूँ....
मिडिया… पेट भरकर , पेड मिडिया से.., देश का 420 वा नही देश का चौथा स्तंभ बनो….. पेट भरकर , एक कुत्ते के पिल्ले को कुचलने के बयान से, देश के विशेष सम्प्रदाय से जोड कर , वोट बैंक की आड मे, चुनाव तक धर्मवाद का सुअरपना मत फैलाओ …????
इस देश में पत्रकार , पुत्रकार बनने से पहले पतन कार बन गये. .. नौकरसाही अपने सुख के लिए. , देश का इमान बेचते चले गये. …. न्यायसाही के हाथ काँपते – काँपते , अब कलम की स्याही सूख गई.. .. और इस स्याही के सूखने से देश मे , भ्रष्टाचार की बाढ आई ..?? अब इस व्यवस्था को ठीक करने का बीड़ा उठाता हूँ, मैं..

Monday, 2 June 2014



मोदी ने अपने साथियों से कह दिया है..., अब भाई – भतीजावाज के चालबाज, व लालबत्ती के दिखावाबाज , मेरे मंत्रीमंडल में नहीं टिकेंगे ..., सत्ता को मोदक समझनेवाले..????.,
मोदीवाद जो राष्ट्रवाद का पर्याय बन चुका है ... अब देश की समस्याओं को निपटाने के लिए राष्ट्रवादी रथ के घोड़ों को १८ घंटे दौड़ना पडेगा, कही ये घोड़े देश का चना न खा जाए, इनकी निगरानी के लिए एक निगरानी दल भी लगा दिया है ताकि उनकारथ कमल की सुन्दरता आड़ से राजनीती के कीचड़ में न धंस जाये...
मोदी की चाय की केतली से जेटली व इरानी की प्यास भी बुझ गई है....
सुषमा स्वराज के लिए तो...., मन्त्री पद सुराज है..., मनचाहा पद न मिलने से सुस्वर में कह रही थी ..., मैं पद नहीं सम्भालूँगी

अब प्रश्न यह है कि ..., ये चार घोड़े १०० दिनों में मोदी रथ को कितना दौडाते है...., यदि half में हांफने लगे तो इनके बदले २७२+ घोड़ों से भी बदली हो सकती है....
मोदीजी, जय जवान .., जय किसान .., जय विज्ञान ..., के राष्ट्रवादी विचारों के दृढ निश्चय से आये है..., उनकी कामना करे..., उनकी सफलता के साथ , देश व देश वासीयों को भी सफलता मिले
मोदीजी ने १२ सालों में एक भी छुट्टी नहीं ली, वही
सरकारी विभाग में तो छुट्टीयों के अम्बार के साथ , कर्मचारियों के कछूआ चाल से काम करने व , जम्हाई लेकर अपने को देश का जमाई समझकर, भ्रष्टाचार की नई-नई केचुली पहनकर अपना जीवन चमका रहें है..., इस देश में में तो चपरासी भी चप –चप कर करोड़ों की दौलत के साथ पकड़े गए हैं.. ,, तो ऊपर वालों के साम्राज्य की आप कल्पना कर सकते ... आम जनता भी सकते में है...,
आज तक,सभी पार्टियों के अधिकांश मंत्री से संत्रीयों ने विदेशी दौरों व फर्जी चिकित्सा से आनन्द लिया , यदिदेश के १७ करोड़ सरकारी नौकरशाही /कर्मचारी, पहल कर, यह सोचें कि .., मैंने राष्ट्र को क्या दिया , तो देश की गरीबी अपने आप दूर हो जायेगी
इस अय्याशी की लत आज देश के अधिकांश से ज्यादा नेताओं को नेहरू काल से उद् भव होकर , इसकी कुरूपता वंशवाद से धनबल,माफियाबल में परिवर्तीत होकर , लोकतंत्र जनता के लिए लाठी तंत्र , लूट तंत्र, धर्मतंत्र , अलगाव तंत्र की आड़ में देश को आज तक हर सरकार ने देश को पीछे सरकाकर , जनता का आम जीवन १९४७ के पहले से भी बदतर कर दिया है...,
हर साख पर लुटेरा है, पेड़ में पत्ते से ज्यादा भ्रष्टाचार के दीमक ...जातिवाद, भाषावाद, अलगाववाद के दिमाग से पेड़ (देश) को खोखला बना रहें है,
आओ..., राष्ट्रवाद को जीवन की धारा बनाये..... , और हम सब ...नदियों के रूप मे मिलकर, देश को, सुख - संपन्न्ता व वैभव का एक महासागर बनायें ....
फेस बुक की September 18, 2013 पोस्ट
राष्ट्रवाद.... सत्य का बडा भाई है... जो नागरिक राष्ट्रवादी है, वो देशवासियों को अपना परिवार मानता है, देश को पिता और भारत माता (जन्म भूमि) को अपनी माता. इसी कारण वह, लूट्वाद, जातिवाद, भाषावाद, अलगाववाद को अपना दुश्मन व वोट बैंक को... , देश के चोट बैंक का पत्थर मानता है, वह भ्रष्ट नेताओं के अफीमी नारो से....., देश को डूबाने से वारे-न्यारे की भनक लगाकर उसका मुकाबला कर उसका निदान करता है.
सत्य मेव जयते…., अब बना , सत्ता मेवा जयते ....????, सत्ता एक मेवा है, इसकी जय है (जो, मेरे वेबस्थल का स्लोगन है...), और , इसी की आड मे सत्यम शिवम सुंदरम.... सत्ता एक मेवा है (सत्यम), जो भ्रष्टाचार के त्रिशूल से (शिवम है), और “ भारत निर्माण” के मेक अप से देश की सुंदरता के बखान से (सुंदरम है ),
एक ओटो रिक्शा के पीछे लिखा था सत्य परेशान होता है... लेकिन पराजित नही होता..??. आज के माहौल मे सत्य इतना परेशान होता है कि असत्य के हमले से आत्महत्या कर लेता है., (किसान आत्महत्या/ भूखमरी योजनाओं को, सत्ताखोरों के डकारने से, गरीबी से मौत )....
(आज के कानून की परिभाषा = कान+ऊन = कान मे ऊन = गरीबों के न्याय मे, कानून बहरा है, और भ्रष्ट अमीरों व माफियाओं के लिए कानून ... सेहरा बनकर, उनके गलत कृत्यों को सरताज कहकर, उन्हे, एक – एक , नये - नये ताज पहना रहा है….????) यही, आज का कानून, जो... गरीबों की गुहार सुनने के बजाय, कान मे ऊन डाल कर, तारीख पर तारीख देकर उसे प्रताडित करते रह्ता है. भ्रष्ट सत्ताखोरो, नौकरशाहों व माफियाओ के डर से जजशाही भी, कही अपना निवाला ना छिन जाये, इसलिए इनके चरण दास बन कर..... सत्य की परेशानी को और बढावा दे रही है. मेरे वेब स्थल का दूसरा स्लोगन है मेरा संविधान महान.... यहा हर माफिया पहलवान.... क्योंकि.... कानून से ज्यादा, आज पैसा है, बलवान... तो, क्यों ना डूबे हिंदुस्थान... भ्रष्टाचारी बने राजा... तो, क्यों ना बजे देश का बैंड बाजा....? और हर योजनायें, भोजनाये बन के खाजा , तो भी नही होगा बाल बॉका ...
–दोस्तो... जिस देश मे राष्ट्रवाद नही है, वहां, कर्ज की महामारी है, सत्ता खोरो मे लूट की खुमारी है, जनता के शोषण से राष्ट्र को बीमारी है... यही डूबते देश की कहानी है, राष्ट्रवाद की पुकार से ही.. हो , राष्ट्र की ललकार...???? हर दहाड़ , दुश्मनों के लिए बने पहाड़