Sunday, 10 February 2019

देश.., आरक्षण के कछुवा चाल के छल से, घोंगा बनकर पोंगा हो गया.., विश्व के घोंघा देश राष्ट्रवादी शक्ति से विश्व में सर्वोपरी बनने के रेस में दौड़ लगा रहें है


अब २०१९ के गुजर आन्दोलन में ५% आरक्षण के छांव तले....,   कितने हजार करोड़ों का नुकसान  होगा..., यह समय ही बतलायेगा  

कृपया जरूर पढ़े.., June 1, 2015 के फेसबुक व वेबस्थल की सार्थक पोस्ट
१. गुजर आन्दोलन..., आरक्षण से राष्ट्र का भक्षण..,यह राष्ट्र का विकास दिवस नहीं ...,पतन दिवस बनते जा रहा है...,


२. रेलवे, छाती पीट रही थी.., हमें हुआ १५० करोड़ से अधिक का नुकसान.., 326 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा.., गुजर दिखा रहें थे अपनी शान..,


३. आज देश के रेल के टिकट, २ महीने पहिले.., आरक्षित किये यात्रियों के टिकट.तो आरक्षण की तलवारसे बलि हो गए..,


४. दलालों से गर्दुल्लो ने on –line से, यात्रियों से ५०० - १५०० रूपये डकार लिए.., रेलवे स्टेशन पर यात्री पहुँचने पर अपने को ठगा महसूस कर, घर से किराये द्वारा स्टेशन में अपना भारी बोझ से आने जाने का, किराया देकर,,, इस आन्दोलन से अपना माथा पीटने लगा.., कुछ लोगों ने आशंकित होकर २ दिन पहिले, टिकट रद्द करवाये ताकि अपने २ महीने की मेहनत पर कहीं सरकार, टिकट की २५% रकम से उनकी जेब न काट लें .


५. जब राजस्था्न हाई कोर्ट ने राज्ये के मुख्य सचिव और डीजीपी को कड़ी फटकार लगाई और आम लोगों को होने वाली परेशानी का उल्लेकख कर इन्हें खदेड़ने का आदेश दिया.., किया. तो उल्ट सरकार ने इस आरक्षण को मान्यता देकर.., देश के प्रतिभाओं को अँधेरे में डालकर .., एक भयावह भविष्य में ढकेल दिया


६. दोस्तों रेल्वे का तो १५० करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ.., लेकिन देशवासियों के समय की हानी के मुआवजे का लेखा -जोखा देखा जाय तो यह, १५०० करोड़ से अधिक का है.., इसके लिए सरकार ने कोई हामी नहीं भरी..,


७. लोगों के यात्राओं से हताशा व नए बजट के सर्विस टैक्स व दलालों के, पुन: भोज के जोश, से, यात्री हताश व अपने भाग्य पर रो रहा है.. मेरे उमंग की तरंग, देश की पटरी के शासकों के पंटरों की बलि चढ़ गई है...


८. याद रहें २०१० में, इस आन्दोलन ने ४ महीने के विकराल रूप ले ..., देश की अर्थव्यस्था को चूर करने में अहम् भूमिका निभाई थी.., जब उत्तरी भाग के बिजली संयंत्रो को, रेलवे ढुलाई से कोयला न मिलने से, बंद होने की कगार से, देश को २५ हजार करोड़ से कई गुना ज्यादा नुकसान हुआ...,और देसवासियो के ४ महीने से ज्यादा तक महरूम रहे


९. यह राष्ट्र का विकास दिवस नहीं ...,पतन दिवस बनते जा रहा है...,
कहीं शिक्षा घोटाला, -अभी का ताजा शिक्षा व्यापार का मध्य प्रदेश सरकार के संस्कार से व्यापम घोटाला, जो धनाढ्य व मंत्री , नौकरशाही वर्ग के पास मुन्ना भाई M.B.B.S. (महान भारत भ्रष्टतम सेवा) का लाईसेंस ( LIE –SENSE –झूठ का यंत्र ) व शहरी दलितों के दल-हित के वोट बैंक के नाम से क्रीमी लेयर से , सत्ता की माखन हांडी में अधिकार..., व देश के सुदूर इलाकों के गरीबों /दलितों का बहिष्कार


१०. यह राष्ट्र का शर्म है कि मध्य प्रदेश सरकार के कार्यकाल में व्यापम घोटालामें शामिल राज्यपाल जो संविधान के मसीहा बने हैं. इस घोटाले ने राज्यपाल के पुत्र की आत्महत्या व ४० से ज्यादा लोगों की ह्त्या होने के बाद भी मध्य प्रदेश सरकार के GOVERNOR , आज भी गर्व-कर देश के संविधान को सुशोभित कर रहें हैं.
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११. आज इसी आड़ में ...???, देश का हर दिन ..., प्रतिभा का भक्षक दिवस है , आरक्षण से राष्ट्र का भक्षण हो रहा है, कंहा गई... गुरुकुल की परंपरा, जब गुरु की शिक्षा से, विधार्थी के कुल परिवार का उद्धार होता था ...??? , आज का शिक्षण, घर बार बेचकर , बेरोजगारी से एक उधार करण की नीति है..
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१२. आज शिक्षा व्यवस्था मे सुपर 30 वाले, गुरु कहां गायब हो गए है...????, बिहार के आनन्द कुमार, जो दिन मे पढ़ते थे, और घर चलाने के लिए, शाम को माँ के बनाए पापड़ बेचते थे... यह राजनेताओ को एक झापड़ /थप्पड़ है और सिद्ध कर दिया कि, दलित के नाम पर वोट बैक के नाम पर दल-हित से ज्यादा नेताओ का स्वहित ज्यादा है .
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१३. आनन्द कुमार, जिन्होने ने हर धर्म जाती की प्रत्तिभा को निखार कर दुनिया मे हलचल कर दी है, आज जापान जैसा देश उनके पढ़ाने की कला से प्रभावित हो कर, एक पुस्तक प्रकाशित कर , उनका अनुसरण कर रहा है, आनंद ने कहा है आज के छात्र , शिक्षा को खरीद कर, पैसे की चमक मे..., मृगतृष्णा की तरह भाग रहे है... आज 1000 छात्रो मे 5 छात्र ही शिक्षक बनते है. , जिसके वजह से अकुशल शिक्षकों के, आधा अधूरा ज्ञान से , बैलगाड़ी की तरह, देश की प्रतिभा चल रही है.


१४. और ऊपर से आरक्षण का तड़का , इस झांसे मे देश भटका ...याद रहे संविधान मे पहली बार दलित व पिछड़े जाती को 22.5% आरक्षण... 10 सालो के लिए उपलब्ध कराया गया था , बाद मे 33% और आज तो इसे दल-हित (दलित) मानकर , और आज यह 49% तक पहूंच गया है.


१५. यह तो सुप्रीम कोर्ट का अहसान माने कि उन्होने धर्मो के नाम पर आरक्षण को खारिज कर दिया है , नही तो आज, यह 100% आरक्षण भी कम होता , देश मे आरक्षण के नाम पर हजारों नये विद्धालाय, महाविद्धालाय बनाने पड़ते, दोस्तों...??? यह वोट बैंक के असुरों का, यह राष्ट्र का भक्षण है


१६. आनन्द, आज, आप... और... केवल आप ही ... देश के पतिभाओ के लिए एक सुपर आनन्द हो .... आनन्द कुमार की प्रसिद्धि सुपर-३० की अद्वितीय सफलता के लिए है.


१७. वर्ष २००९ में पूर्व जापानी ब्यूटी क्वीन और अभिनेत्री नोरिका फूजिवारा ने सुपर 30 इंस्टीट्यूट पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई थी. इसी वर्ष नेशनल जियोग्राफिक चैनल द्वारा भी आनंद कुमार के सुपर ३० का सफल संचालन एवं नेतृत्व पर डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाई गई थी.


१८. समाज के गरीब तबके के बच्चों को आईआईटी जेईई की प्रवेश परीक्षा के लिए मुफ्त तैयारी कराने वाले गणितज्ञ आनंद कुमार को प्रसिद्ध यूरोपीय पत्रिका फोकस ने असाधारण लोगों की सूची में शुमार किया है। पत्रिका के आलेख में लिजा दे क्यूकेलियर ने लिखा है कि आनंद असली जुझारू नायक की तरह हैं, जो माफिया की धमकी के बावजूद गरीब बच्चों को ज्ञान दे रहे हैं। उन्होंने 330 बच्चों को अपने मार्गदर्शन में आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में सफलता दिलाई है। लोकप्रिय विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इतिहास, स्वास्थ्य और सामाजिक विषयों पर रोचक और ज्ञानवर्धक आलेख प्रकाशित करने वाली इतालवी पत्रिका ने अपने एक लेख में आनंद को असाधारण प्रतिभाओं में शुमार किया है.---------------



म्मम्मम्मम
आरक्षण की आग., देश रहा है.., हांफ..., महंगाई निकाल रही है जनता का भाप.., आरक्षण के मसीहा, इस दंश के पाप से, अपने को कह रहें हैं, देश का बाप.., आप ..बाप.., पाप..खाप .., पार्टियों के श्राप से देश लहुलूहान.., फिर भी सत्ताखोरों के अपने अच्छे दिनोंके झांसे से मेरा देश महान”..., प्रतिभाओं के कच्छे पहिनने के दिन आ रहें हैं..,

१. छुवा-छुत/आरक्षण को कछुवा बनाकर संविधान की आड़ से हमारे सत्ताखोरों ने १० सालों के 22.५% प्रायोगिक तौर के परप्रयोजन से , इन कछुओं की मोटी खालों को अपना ढाल बनाकर सुरक्षता पूवर्क वोट बैंक से खरगोशी प्रतिभाओं की खाल निकालकर लहूलुहान कर संविधान का गुण गान कर, पंगु बनाकर, देश को विदेशी हाथ विदेशी साथ विदेशी विचार विदेशी संस्कार से देश को कछुआ चाल से चलाकर, विदेशी कर्ज को मर्ज मानकर , देश को गर्त में डालकर, अब भी गर्वित हैं.

२. अब आरक्षण की तलवार से प्रतिभा के भक्षण की , एक नई धार से, नेताओं के वोट बैंक की दांत की चमक के पैने पन की तस्वीर से, आज देश ऊंचाई को छूने की बजाय बौनाहोते जा रहा है..,

३. अब पटेल आरक्षण की आग पुरे देश में पेटने की तैयारी .., क्या..??, सरकार घुटने टेक देगी.., या देश गुर्जर आन्दोलन की तरह सुलगते, गुजरे जमाने में रहेगा.., सत्ताखोरों की रोटी सेकते रहेगा.., देशवासी अब सकते में है..!!!

४. दोस्तों सत्ता परिवर्तन को आजादी कह.., देश को अशिक्षा से अंधापन कर .., अंग्रेजों के संविधान का अनुसरण कर ०.१% अंग्रेजी बाबुओं की औलादें जो विलायती शिक्षा से अंग्रेजों के संविधान में आस्था की प्रतिज्ञा से खाओ अंग्रेजी , पियों अंग्रेजी सोओ अंग्रेजी , जागो अंग्रेजी, थोपो अंग्रेजी ने विदेशी भाषा से गोरे अंग्रेजों के काले बादल की गुलामी को प्रतीक बनाकर, इस बादल से काले धन की बरसात से मालामाल हो गयें और आम हिन्दुस्तानी अवसाद से बेहाल हो गया है.

५. राख तले चिंगारी के प्रतिभा में पानी फेर कर शिक्षा को कीचड़ बनाकर, देश बदबूदार हो गया है
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६. सत्ता का एक फंडा है, देश में सत्ताखोरों का एक गोरख़ धंधा है ..,५०% आरक्षण से देश की आधी प्रतिभा गायब, और व्यापम के इस नए प्रकार के तड़के से इस आग में हजारों प्रकार के घोटालों के उत्प्रेरकों देश के ऊतक 30-४०% शिक्षा, अकर्मण्य छात्रों को पिछले दरवाजे से प्रवेश.., जो बचे शेष १०-२०% प्रतिभावान छात्र वे देश के इस मकड़जाल से, अपने अगली पीढी का भविष्य संवारने विदेशों में पलायन कर, अपनी प्रतिभा से विश्व को गौरान्वीत कर रहें हैं
.
७. १९४७ में विश्व के 100 से अधिक देश हमसे पिछड़े थे..,लेकिन अपनी मजबूत इच्छा बल से बिना आरक्षण के, घोंघा चाल से एक दृण मंजिल पाने से, उन्नत देशों की कतार में शामिल हो गयें है..

८. देश के खरगोश आज आरक्षण के जहर से, बेहोश होकर मर रहें हैं., देश का मर्ज, आरक्षण व कर्ज से नहीं, देश के १२५ करोड़ जनता को सम्मान व प्रतिभा के आंकलन से, आगे बढ़ने से ही.., देश आगे बढेगा


1.      1.      आरक्षण .., यह डूबते देश की कहानी है.., कहते है चु.XXXXXX..या..., चला गया, औलाद छोड़ गया ... १९४७ की नीती से मीडिया.., माफिया..सत्ताखोरों ने इस देश की सत्ता को मेवा मानकर.., बंदरबाट से , महलों से अपनी मंजिल बड़ा रहें हैं 

2. ब्रिटिशों ने सत्ता परिवर्तन की शर्त पर.., कांग्रेस को आरक्षणसे सत्ता दी, देश के प्रतिभाशाली क्रांतीकारियों को देशद्रोहीयों की काली सूची में डाल दिया.., सुभाष चन्द्र बोस की जिदा या मरी लाश लाने का भी सौदा कर गये.
3.
आजादी के झांसे से जनता को भरमाया गाया..., देश का वासी राष्ट्रवादी बनकर एक नए सांस से देश आराम हरामके नारे से देश को गर्वित कर समर्पित भाव से सेवा के लिए तत्पर था
4.
लेकिन,सत्ता के अय्याशों ने साईकिल घोटाले के आयाम से देश के जवानों की साईकिल चाल के कदम को भी बाँध दिया.., देश में नए,शिक्षा के संस्थानों बनाने के बजाय , दिल्ली में पांच सितारा होटल बनाकर, देश की शान बढ़ाने के दावे के दांव से अपनी सत्ता को जातिवाद के आरक्षण को हार की लड़ीबनाकर १० वर्षों तक आरक्षण का जाल फेंका ...
5.
आज इसे संवैधानिक हक़ बनाकर ५०% आरक्षण से सत्ता में साड्डा हक़ कह कर ., वोट की चोट से देश आहत है...
6.
अच्छे दिन की पहले से मौजूद मध्य प्रदेश सरकार ने, शिक्षा का व्यापारीकरण कर कर्णता से व्यापम घोटालोंसे M.P.गजब है.., के विज्ञापनों से, प्रदेश की प्रतिभाओं को गायब कर दिया
7.
यह राष्ट्रीय शर्म है कि मध्य प्रदेश सरकार के कार्यकाल में व्यापम घोटालामें शामिल..मुख्यमंत्री व उनके पिल्लू ने देश की मिट्टी पलीद कर दी है..., राज्यपाल राम नरेश यादवजो संविधान के मसीहा बने हैं. इस घोटाले ने राज्यपाल के पुत्र की आत्महत्या व ४० से ज्यादा लोगों की ह्त्या होने के बाद भी मध्य प्रदेश सरकार के GOVERNOR , आज भी गर्व-कर देश के संविधान को सुशोभित कर रहें हैं..
8.
राजस्थानसरकार ने भी गुजर आरक्षण के सहमती से अपनी शान बढाने का, इस का दानव बनकर,मानवता का दांव किया है..
9.
महाराष्ट्र में ६ लाख फर्जी छात्रों के नाम से सत्ता के दर्जी .., बेशर्म.., बनकर देश की नई तस्वीर के कपड़े बनाने वालों ने, आज की उभरती प्रतिभाओं .., यों कहें, प्रतिबन्ध लगाकर नंगा कर दिया है..
10.
देश में निम्न / उच्च शिक्षा संस्था का खेल ५०% आरक्षण , ४०% धन बल से काले दानदाताओं के बच्चों को प्राथमिकता , १०% से भी कम देश के प्रतिभाशाली छात्र जिन्हें बिना धन के प्रवेश मिलता है..,वह देश के बेरंग शिक्षा व्यवसाय से लड़ने में असमर्थ पाकर विदेश में पलायन कर, विश्व के देशों को उन्नत बना रहा है...
दोस्तों डूबते देश को डूबाने वालों की लम्बी कहानी है..., सत्ताखोरों को, इन्ही माफिया तंत्र ने कसीदे पढ़कर.., उन्हें मसीहा कहा है...,
डूबते देश में, इन मसीहाओं को, माफियाओं के समूह कसाई बनकर, बेवफाई से देश को लूटकर डूबा दिया है ..,
देश में घोटालों की बहार..., बहारों फूल बरसाओं के नारों से.., विदेशी मह्बूब आया है, से .., मेरा भारत महान , शायनिंग , भारत निर्माण से अच्छे दिनों से अच्छी तारीफके अफीमी नारों से देश वासियों को ६६ सालों तक सुला कर रखा है... (१९ महीने के जय जवान जय किसान के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नारे को छोड़कर)
इस फेस बुक व वेबस्थल का स्लोगन है Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.

देश.., आरक्षण के कछुवा चाल के छल से, घोंगा बनकर पोंगा हो गया.., विश्व के घोंघा देश राष्ट्रवादी शक्ति से विश्व में सर्वोपरी बनने के रेस में दौड़ लगा रहें है.




Wednesday, 30 January 2019

देश के तीन तिकड़म बाज...., गांधी , जवाहर व जिन्ना के .. “गांधी की गंदी राजनीती, जवाहर के जहर व जिन्ना के जिन्न “ इन तीन भेडियों ने शेर की खाल में अय्याशी का चोला पहनकर “सत्ता परिवर्तन” से जनता को “आजादी” कहकर जातिवाद, भाषावाद की कुल्हाड़ी से देश को खण्डित कर ५ लाख से अधिक नर मुंडों की बलि लेकर,जमाकर अपने को बापू,चाचा व कायदे-आजम की उपाधी लेकर, १९४७ से आज तक इनकी विचारधारा से भारतमाता लहू लूहान है


हे राम V/s राम रहीम”, यह इस युग में गांधी की ब्रह्मचर्य व्रत के पीछे छुपी नारी शोषण के प्रयोग की बाबा राम रहीम बाबा की पुनरावृति है. 
गांधी को तो मीडिया अमर कर गयी , बाबा को TRP के चक्कर में मीडिया निगल गई. 

दोस्तों.., सीमा पर हमारे सेना के ८ जवानों के शहीदी की कोई खबर नहीं , क्योंकि इस खबर में TRP की शहद नहीं थी .मीडिया ने बाबा राम रहीम के भक्तों से, धार्मिक उन्माद की खबर को जंगल की आग से भी तेजी से भड़काई 

देश के तीन तिकड़म बाज...., गांधी , जवाहर व जिन्ना के .. गांधी की गंदी राजनीती, जवाहर के जहर व जिन्ना के जिन्न इन तीन भेडियों ने शेर की खाल में अय्याशी का चोला पहनकर सत्ता परिवर्तनसे जनता को आजादीकहकर जातिवाद, भाषावाद की कुल्हाड़ी से देश को खण्डित कर ५ लाख से अधिक नर मुंडों की बलि लेकर,जमाकर अपने को बापू,चाचा व कायदे-आजम की उपाधी लेकर, १९४७ से आज तक इनकी विचारधारा से भारतमाता लहू लूहान है 

१९४७ तक हमारी शिक्षा दर यदि २५% भी होती तो जनता इनका हिसाब कर देती .., पानी सर से ऊपर बहने से पहिले नथूराम गोड़से ने गांधी की ह्त्या करने के बाद , इस मकसद के १५० से अधिक कारण बताये थे .., और यूं कहें , अंग्रेजों द्वारा थोपी गई तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसे सत्ताखोरों की आजादीकह, कही जनता हमारी आजादी छीन न ले व गुलाम जनता को सच्ची आजादीमिलने के भय से नथूराम गोड़से के कारणों को अति प्रतिबंधित कर दिया . जिन कारणों से ये तीनों तिकड़म अपने को आज भी हस्तियाँ मानकर , अपने हस्त रेखाओं पर हंस कर कह रही हैं, देखों हम अपने खंडित देशों में ७१ सालों बाद इस रहस्य से नोटों , सिक्कों, गली-मुहल्लों के नाम व पुतलों से विराजमान हैं.

१४ अगस्त २०१७ की फेस बुक व वेबस्थल की पुरानी पोस्ट 

GOD-SE, GOD-SAYS, GOD-SAID (देश की अखंडता का दिवस १५ अगस्त.. या ३० जनवरी ...???..!!!.)

नथूराम गोड्से (GOD-SE, GOD-SAYS, GOD-SAID) जिन्होंने राष्ट्रवाद की आत्मा की आवाज से जजों को गांधी की गंदी राजनीती के १५० से अधिक कीचड़ का उदाहरण देते हुए इसमें छद्म अहिसावाद के आड़ में लाखों हिन्दुस्थानियों का बलिदान, विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा धर्म परिवर्तन को उनका साहस कहना, यौन शोषण व बलात्कारियों को क्षमा का विशेष अधिकार कहकर, देश में जातिवाद को आबाद रखने के खेल से देश की संप्रभुता को ख़तरे की चिरम सीमा पर पहुंचाने के खेल , खेलने प्रयास में सफल होने से पहिले ही इस नासूर को मारने के लिए गांधी को मारना अति महत्वपूर्ण हो गया था ..

नथूराम गोडसे, एक राष्ट्रवादी योद्धा, जिसने अपने प्राणों की आहुती से ..., गांधी को , देश के साथ खिलवाड़ से.., देश के टुकड़े करने के बाद भी, देश की तुष्टी करण की नीती से, देश को असहाय बनाने के बाद, आगे के खेल से, देश को पंगु बनाने का, अंजाम न दे सके , इस ह्त्या का उद्देश्य बताया,
याद रहे, नथूराम गोड़से ने स्वंय अपना मुकदमा लड़ते हुए , गांधी की ह्त्या करने के १५० कारण गिनाये थे...,तब अदालत में बैठे दर्शकों की आँखे, आंसू लबालब भरकर, जमीन में गिरकर नाथूराम गोड़से को सलाम कर रही थी ...
१. गांधी ह्त्या के पहिले नथूराम गोडसे ने गांधी को प्रणाम किया, बाद में गोली मारी.

२. नथूराम ने अदालत में कहा , मैंने गांधी को गोली मारने में इतनी सावधानी से, इतने, पास से गोली मारी ताकि उनके बगल में दो युवतियां, जो हमेशा उनके साथ रहती थी.., उन्हें गोली के छर्रे लगने से, मैं बदनाम न हो जाऊं (याद रहे, गांधी उन युवतियों के साथ नग्न सोकर, ब्रह्मचर्य /सत्य के प्रयोग में इस्तेमाल करते थे)

३. नथूराम ने कहा, ह्त्या के समय गांधी के मुख से आहकी आवाज निकली, “हे रामशब्द नहीं ...,
जिसे कांग्रेस ने हेराल्ड अखबार के प्रचार से हे रामशब्द से देशवासियों को भरमाया..

न्यायाधीश खोसला ने, अपने सेवा निर्वत्ती के बाद कहा था , यदि मुझे न्याय के लिए स्वतंत्र विचार दिया जाता तो मैं, नथूराम गोड़से को निर्दोषी मानता , मैं तो कानून का गुलाम था, इसलिए मुझे नाथूराम गोड़से व उसके अन्य साथियों को मृत्यु दंड सुनाना पड़ा
नथूराम गोड़से व उनके साथी, ‘भारतमाता की गोद मेंसोने के लिए इतने आतुर थे कि उन्होंने उच्च न्यायालय में अपनी सजा को चुनौती नहीं दी और न ही क्षमा याचना की अपील राष्ट्रपति से की ...

यह शांती का दूत..????, कपूत निकला.., याद रहे, इस अनशन की खाल में बापू ने .., दो विश्व युध्ह में २ लाख हिंदुस्थानी सैनिकों की अकारण बलि देकर, जो कुत्ते की मौत मारे गए थे .. व १९४७ में देश का अंग भंग कर ५ लाख हिन्दुस्थानियो की बलि लेकर..., इस अहिसा के परदे में खूनी खेल खेलकर, आज तक शांती दूत का चेहरा दिखाया है...

गाँधी वध के पश्चात जब सावरकर जी को न्यायलय ने सम्मान बरी किया तो जज का, वीर सावरकर के लिए यह
वक्तव्य था ...,

सावरकर ने अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया, लेकिन ऐसे तुच्छ कार्य में उन्हें घसीटना बहुत ही निंदनीय है, इस बात की जांच की जानी चाहिए की ऐसे महान व्यक्ति का नाम इस कार्य में क्यों घसीटा गया
जबकि स्वयं नथूराम गोडसे ने गाँधी वध में सावरकरजी की संलिप्तता को सिरे से नकार दिया,

धर्मनिरपेक्षता के झूठे आडम्बर में फंसे तथाकथित सेकुलर उस दिन सूर्य के सामान जुगनू से प्रतीत हो रहे थे, जो की सूर्य को अपनी मद्दम रौशनी दिखा कर उसे निचा दिखाने की कोशिश कर रहे है,

वीर सावरकर के क्रातिकारी के जज्बे को सलाम करने के के लिए, 13 मार्च 1910 मे जहाज से कूदकर,पानी मे अंग्रज सैनिको की पीछे से गोली गोलियो की बौछर का सामना करते हुए , फ्रांस के मार्सेल तट पर पहुँचे, इस साहसिक घटना को जीवित कर , प्रेरित करने के लिए, घटना की 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य मे एक भव्य स्मारक बनाने के लिए भारत सरकार को सूचित किया , और भारत सरकार ने वीर सावरकर को देश्द्रोही कहकर आपत्ति उठाने से वह प्रकल्प बंद करवा दिया..

दोस्तों अब गांधी जयंती के आयोजन में झूठे दिखावे के आचरण से, देश को, सरकारी अवकाश व विज्ञापनों व अन्य खर्चों से १० हजार करोड़ का चूना लगाने वाला है...
गांधी की गंदी राजनीती व जवाहर लाल नेहरू के जहर से देश ६८ साल के सत्ता परिवर्तन के शासन में कंगाल हो गया है..., आज सभी पार्टीयाँ विदेशों में विदेशी हाथ माँगने जा रहें हैं...

सत्ता तो मद से भरी.., मदारियों का समूह १९४७ से सत्ता परिवर्तन को आजादी के झांसे से बन्दर बांट से देश को लूट रहा है...
६७२ राजधर्म तो जातिवाद, भाषावाद,अलगाववाद, धर्मवाद व घुसपैठीयों से राजनीती में गहरी पैठ से जनता को गरीबी से तडफा-तड़फा कर..., हलाल कर ..., आज अपने को देश का लाल बनाकर., २ अक्टूबर से १४ नवम्बर से सालों - साल तक इनके पुतले..,बिना नहलाए पूजे जा रहें है...और तो और ७० सालों से देश में गरीबी की वजह से गांधी का चष्मा चुरा लिया जाता है..., २ अक्टूबर तक सत्ताखोर बदहवासी में रहता है...



ooooo
नथूराम गोडसे, एक राष्ट्रवादी योद्धा, जिसने अपने प्राणों की आहुती से ..., गांधी को , देश के साथ खिलवाड़ से.., देश के टुकड़े करने के बाद भी, देश की तुष्टी करण की नीती से, देश को असहाय बनाने के बाद, आगे के खेल से, देश को पंगु बनाने का, अंजाम न दे सके , इस ह्त्या का उद्देश्य बताया,

याद रहे, नथूराम गोड़से ने स्वंय अपना मुकदमा लड़ते हुए , गांधी की ह्त्या करने के १५० कारण गिनाये थे...,तब अदालत में बैठे दर्
शकों की आँखे, आंसू लबालब भरकर, जमीन में गिरकर नाथूराम गोड़से को सलाम कर रही थी ...
१. गांधी ह्त्या के पहिले नथूराम गोडसे ने गांधी को प्रणाम किया, बाद में गोली मारी.

२. नथूराम ने अदालत में कहा , मैंने गांधी को गोली मारने में इतनी सावधानी से, इतने, पास से गोली मारी ताकि उनके बगल में दो युवतियां, जो हमेशा उनके साथ रहती थी.., उन्हें गोली के छर्रे लगने से, मैं बदनाम न हो जाऊं (याद रहे, गांधी उन युवतियों के साथ नग्न सोकर, ब्रह्मचर्य /सत्य के प्रयोग में इस्तेमाल करते थे)

३. नथूराम ने कहा, ह्त्या के समय गांधी के मुख से आहकी आवाज निकली, “हे रामशब्द नहीं ...
जिसे कांग्रेस ने हेराल्ड अखबार के प्रचार से हे रामशब्द से देशवासियों को भरमाया.. 

न्यायाधीश खोसला ने, अपने सेवा निर्वत्ती के बाद कहा था , यदि मुझे न्याय के लिए स्वतंत्र विचार दिया जाता तो मैं, नथूराम गोड़से को निर्दोषी मानता , मैं तो कानून का गुलाम था, इसलिए मुझे नाथूराम गोड़से व उसके अन्य साथियों को मृत्यु दंड सुनाना पड़ा 

नथूराम गोड़से व उनके साथी, ‘भारतमाता की गोद मेंसोने के लिए इतने आतुर थे कि उन्होंने उच्च न्यायालय में अपनी सजा को चुनौती नहीं दी और न ही क्षमा याचना की अपील राष्ट्रपति से की ...

यह शांती का दूत..????, कपूत निकला.., याद रहे, इस अनशन की खाल में बापू ने .., दो विश्व युध्ह में २ लाख हिंदुस्थानी सैनिकों की अकारण बलि देकर, जो कुत्ते की मौत मारे गए थे .. व १९४७ में देश का अंग भंग कर ५ लाख हिन्दुस्थानियो की बलि लेकर..., इस अहिसा के परदे में खूनी खेल खेलकर, आज तक शांती दूत का चेहरा दिखाया है...

गाँधी वध के पश्चात जब सावरकर जी को न्यायलय ने सम्मान बरी किया तो जज का, वीर सावरकर के लिए यह
वक्तव्य था ..., “सावरकर ने अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया, लेकिन ऐसे तुच्छ कार्य में उन्हें घसीटना बहुत ही निंदनीय है, इस बात की जांच की जानी चाहिए की ऐसे महान व्यक्ति का नाम इस कार्य में क्यों घसीटा गया

जबकि स्वयं नथूराम गोडसे ने गाँधी वध में सावरकरजी की संलिप्तता को सिरे से नकार दिया,

धर्मनिरपेक्षता के झूठे आडम्बर में फंसे तथाकथित सेकुलर उस दिन सूर्य के सामान जुगनू से प्रतीत हो रहे थे, जो की सूर्य को अपनी मद्दम रौशनी दिखा कर उसे निचा दिखाने की कोशिश कर रहे है,

वीर सावरकर के क्रातिकारी के जज्बे को सलाम करने के के लिए, 13 मार्च 1910 मे जहाज से कूदकर,पानी मे अंग्रज सैनिको की पीछे से गोली गोलियो की बौछर का सामना करते हुए , फ्रांस के मार्सेल तट पर पहुँचे, इस साहसिक घटना को जीवित कर , प्रेरित करने के लिए, घटना की 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य मे एक भव्य स्मारक बनाने के लिए भारत सरकार को सूचित किया , और भारत सरकार ने वीर सावरकर को देश्द्रोही कहकर आपत्ति उठाने से वह प्रकल्प बंद करवा दिया.. 

दोस्तों अब गांधी जयंती के आयोजन में झूठे दिखावे के आचरण से, देश को, सरकारी अवकाश व विज्ञापनों व अन्य खर्चों से १० हजार करोड़ का चूना लगाने वाला है...

गांधी की गंदी राजनीती व जवाहर लाल नेहरू के जहर से देश ६८ साल के सत्ता परिवर्तन के शासन में कंगाल हो गया है..., आज सभी पार्टीयाँ विदेशों में विदेशी हाथ माँगने जा रहें हैं...

सत्ता तो मद से भरी.., मदारियों का समूह १९४७ से सत्ता परिवर्तन को आजादी के झांसे से बन्दर बांट से देश को लूट रहा है...

राजधर्म तो जातिवाद, भाषावाद,अलगाववाद, धर्मवाद व घुसपैठीयों से राजनीती में गहरी पैठ से जनता को गरीबी से तडफा-तड़फा कर..., हलाल कर ..., आज अपने को देश का लाल बनाकर., २ अक्टूबर से १४ नवम्बर से सालों - साल तक इनके पुतले..,बिना नहलाए पूजे जा रहें है...और तो और ७० सालों से देश में गरीबी की वजह से गांधी का चष्मा चुरा लिया जाता है..., २ अक्टूबर तक सत्ताखोर बदहवासी में रहता है...
 


यह, मेरे द्वारा बनाया गया .... रेखा चित्र... शहीद भगत सिग, के जन्म दिन को समर्पित है, उनके गुरु परमवीर सावरकर व सावरकर के गुरू लोकमान्य तिलक व लाल- बाल- पाल के देश के अतुल्य योगदान के लिए , निस्वार्थ सेवा .... इन राष्ट्रवाद के प्रेरकों को, कोटि कोटी प्रणाम .... जिन्हें आज देश के इतिहास में, दफ़न कर दिया है , और दिग्भ्रमित इतिहास पढ़ा कर , गाँधी के गंदी राजनीतिक की तुष्टीकरण से, राष्ट्र के टुकड़े करने के ....और सत्ता के हस्तांतरण (TRANSFER OF POWER) से, देशवासियों को आजादी का झाँसा देकर, उनके विचारों की प्रशंसा, की आड़ में, असंवेधानिक रूप से , महात्मा और राष्ट्रपिता से अलंकृत कर, जनता को बरगलाया गया है....?????, हद तो तब हो गई..... जब १९९० के दशक में नोटों पर, उनका चित्र छापकर (जो कि , हिन्दुस्तान के संविधान की अवहेलना है ), आज भारतीय रिजर्व बैंक (R.B.I.) को देखकर, गांधी भी... भ्रष्टाचार की आँधी से, रोता बापू ऑफ इंडिया (R.B.I.) बनकर , अपने सिद्धांतो का प्रायश्चित करना चाह रहे है...,, कहना चाह रहे है ..... मेरी मार्केटिग (MARKRTING = MAR+KAT+KING) कर, जनता की भ्रष्टाचार से मार काट कर, देश के किंग (राजा) मत बनों
kkkkkk

Thursday, 24 January 2019

The Accidental Prime Minister (पुस्तक में प्रधानमंत्री सोनिया गांधी की बंधुवा मजदूर बनाकर देश की १४० करोड़ आबादी को धोखा देने के खुलासा पर यह फिल्म बनी है) V/s वीर सावरकर द्वारा 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम,शोध व प्रमाण सहित अपने हाथों से इंग्लॅण्ड में लिखी , इस किताब का नाम जाने बिना कभी न डूबने वाले ब्रिटिश साम्राज्य थर्रा गया था, व प्रकाशन के पूर्व ही इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था ..., यही किताब थी जिसने देश में क्रांतिकारिता को जन्म दिया ..क्या इस पर भी फिल्म बनाकर देश में राष्ट्रवाद की लहर फैलाएगी...!!!


 The Accidental Prime Minister (पुस्तक में प्रधानमंत्री सोनिया गांधी की बंधुवा मजदूर बनाकर देश की १४० करोड़ आबादी को धोखा देने के खुलासा पर यह फिल्म बनी है)  V/s वीर सावरकर द्वारा 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम,शोध व प्रमाण सहित अपने हाथों से इंग्लॅण्ड में लिखी , इस किताब का नाम जाने बिना कभी न डूबने वाले ब्रिटिश साम्राज्य थर्रा गया था, व प्रकाशन के पूर्व ही इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था ...,

यही किताब थी जिसने देश में क्रांतिकारिता को जन्म दिया ..क्या इस पर भी फिल्म बनाकर देश में राष्ट्रवाद की लहर फैलाएगी...!!!

August 26, 2014 के फेस बुक व वेबस्थल की पोस्ट


 किताबे तो कितने नेताओं ने लिखवाई और अपना हित साधकर देश की सत्ता में काबिज ही नहीं अपने को इतिहास में अमर करने का दांव खेलने का प्रपंच छोड़ गए...,

देश का गौरवशाली अतीत का असली इतिहास छुपाकर, हमें बुजदिल कौम व शांती, अहिंसा के झांसे से देश के टुकड़े कराकर.., “बापू...” “महात्मा...”, “आराम हराम है..”, “गरीबी हटाओं”, “मेरा भारत महानके नारे देने वालों के नाम देश में लाखों, संस्थान,सड़क से गलियारों के नाम से राष्ट्रवाद को धीमे जहर से मारने के खेल से, अपने अमरत्व को मजबूत बनाने का खेल देश में बदस्तूर जारी है... 

लेकिन.. वीर सावरकर.....,
एक महान नायक, जिनके बारे में कितना ही लिखा जाय कम है.. जिनके अनेक रूप, विद्वान,तत्व चिन्तक,क्रांतीकारक, लेखक, महाकवि,सर्वोत्तम वक्ता,पत्रकार, धर्मशील, नीतीमान,पंडित मुनि,इतिहास संशोधक, राष्ट्रीत्व के दर्शनकार,प्रवचनकार,अस्पृश्यता निवारक शुद्धीकरण के प्रणेता, समाज सुधारक , विज्ञान निष्ठा सिखाने वाले,भाषा शुद्धी करने वाले पीपी सुधारक,संस्कृत भाषा प्रभु,बहुभाषिक, हिंदुसंघटक,राष्ट्री काल दर्शक के प्रणेता , कथाकार,आचार्य,तत्वज्ञ महाजन, स्तिथप्रज्ञ, इतिहास समीक्षक , धर्म सुधारक,विवेकशील नेता, महानात्मा ,अलौकिक दृष्टा... व कई गुणों से सपन्न ने पांडुलिपी की तरह.. 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम,शोध व प्रमाण सहित अपने हाथों से इंग्लॅण्ड में लिखी , इस किताब का नाम जाने बिना कभी न डूबने वाले ब्रिटिश साम्राज्य थर्रा गया था, व प्रकाशन के पूर्व ही इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था ...,

यही किताब थी जिसने देश में क्रांतिकारिता को जन्म दिया.

वीर सावरकर की किताब 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पढने के लिए दी, भगत सिंह इस किताब से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने इस किताब के बाकी संस्करण भी छापने के लिए सहायता प्रदान की, जून 1924 में भगत सिंह वीर सावरकर से येरवडा जेल में मिले और क्रांति की पहली गुरुशिक्षा ग्रहण की, यही से भगत सिंह के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया, उन्होंने सावरकर जी के कहने पर आजाद जी से मुलाकात की और उनके दल में शामिल हुए| बाद में वे अपने दल के प्रमुख क्रान्तिकारियों के प्रतिनिधि भी बने। उनके दल के प्रमुख क्रान्तिकारियों में चन्द्रशेखर आजाद, भगवतीचरण व्होरा,सुखदेव सुखदेव, राजगुरु इत्यादि थे।

सत्ता परिवर्तन के बाद किताब तो नेताओं ने लिखवाई , और अपना हित साधने के लिए नेशनल हेराल्डअखबार में कांग्रेसीयों ने अपनी स्तुती से जनता को बेवकूफ बनाकर राज किया..,”कौमी एकताहिन्दी के अखबार ने तो पहले ही दम तोड़ दिया था, अब नेशनल हेराल्ड जो कांग्रेस की सम्पत्ती थी , नीजी  सम्पत्ती बताकर इसे डकारने का खेल चल रहा है..

आज देश के भ्रष्टाचार के युग में किताबें लिखवाकर.., अपनी स्तुती से, अपनी कमजोरी को छुपाकर नेता लोगों ने भारी रकम कमाई है...

नटवर सिंग जो कांग्रेस में भ्रष्टाचार का हिस्सा थे अपने पुत्र के कल्याण के आरोप से वे गद्धी न छोडने से वे कांग्रेस की गड्डी (गाड़ी) से गड्ढे में फेंक दिए गए ..

अब प्रतिशोध में किताबी वार शुरू हो गया है..., इन्डियन वर्ग भी इस खेल व प्रकाशन की किताब खरीद कर..., किताब लिखवाने वालों को मालामाल कर देगा...
संजय बारू की किताब में लिखा है..., प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी को सोनियाजीके नाम से संबोधित करते थे, जबकि सोनिया गांधी प्रधानमंत्री को सिर्फ मनमोहनकहती थी.., और प्रधानमंत्री को किस तरह काठ का पुतला समझकर... शीर्ष नेताओं ने देश पर १० सालों से, अपनी दबंगई से राज किया ... 

याद रहे.. भारतीय जनता पार्टी के हनुमान, जसवंत सिंग , जिन्हें किताब छपवाने के आरोप से पार्टी से उनकी शक्ती छीन ली गयी थी .. अब पार्टी से निष्कासित होकर.., जड़ी बूटी न मिलाने से अभी हाल ही मैं जमीन पर गिरकर मूर्छीत हो गए थे...


Sunday, 13 January 2019

अखबारों के लेखों को झुठलाकर चुनौती देते हुए .., इंग्लैंड में “१८५७.., एक स्वतन्त्रता संग्राम” को सच बतलाकर, ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती देकर, ५०वी जयंती का जज्बे पूर्वक आयोजन करने वाले एकमात्र वीर सावरकर ,वीर सावरकर ने विश्व के क्रांतीकारियों को सन्देश दिया की गुलामी देश ही नहीं मानव जाती पर कलंक है. इसका निदान किये बिना मानव अंधा से उसका जीवन अन्धकारमय है ..


अखबारों के लेखों को झुठलाकर चुनौती देते हुए .., इंग्लैंड में १८५७.., एक स्वतन्त्रता संग्रामको सच बतलाकर, ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती देकर, ५०वी जयंती का जज्बे पूर्वक आयोजन करने वाले एकमात्र वीर सावरकर .



इंग्लैंड में हिन्दुस्तान के सभी धर्मों (हिंदु,मुस्लिम,सिख,ईसाई) को एकजुट कर दशहरा समारोह करने पर, गांधी द्वारा आश्चर्य व्यक्त कर , इस कार्य का अभिनन्दन करने वाले मोहनदास करम चंद गांधी द्वारा सराहना 



वीर सावरकर ने विश्व के क्रांतीकारियों को सन्देश दिया की गुलामी देश ही नहीं मानव जाती पर कलंक है. इसका निदान किये बिना मानव अंधा से उसका जीवन अन्धकारमय  है .

इंग्लैंड में, सिक्खों का इतिहास लिखने वाले वीर सावरकर.... . सावरकर पहले हिन्दु , जिनका सम्मान स्वर्ण मंदिर गुरुद्वारा प्रबंधक समिती ने किया, और तब के अध्यक्ष मास्टर तारा सिंग ने उन्हें चांदी के मुठ की तलवार भेट की



सिक्खों के लोहड़ी त्योंहार के दिन.., गुरु गोविन्द सिंग जयंती के सावरकर के कार्यों की लहर...,

१. दुश्मन के घर (इंग्लैंड) में, गुरु गोविन्द सिंग.... का महोत्सव मनाने वाले..,


२, दुश्मन के घर (इंग्लैंड) में, छत्रपति शिवाजी महाराज की जयन्ती .... का महोत्सव  व जश्न मनाने वाले..,




३. इंग्लैंड में, सिक्खों का इतिहास लिखने वाले वीर सावरकर....

४. सावरकर पहले हिन्दु , जिनका सम्मान स्वर्ण मंदिर गुरुद्वारा प्रबंधक समिती ने किया, और तब के अध्यक्ष मास्टर तारा सिंग ने उन्हें चांदी के मुठ की तलवार भेट की 


Friday, 11 January 2019

चाय पर चर्चा के दौरान अपने घर में लालबहादुर शास्त्री ने मनोज कुमार से कहा , न तो मैं जवान दीखता हूँ , न ही किसान .., अब हमने अपने शत्रु पकिस्तान को अपने जवानों व किसानों के जज्बें से हराया..., मनोज जी आप ऐसे फिल्म बनाओ कि राष्ट्रवाद का उफान जनता में बढ़ता रहे ताकि हमारी ताकत से कोई बुरी नजर न रखे .


चाय पर चर्चा के दौरान अपने घर में लालबहादुर शास्त्री ने मनोज कुमार से कहा , न तो मैं जवान दीखता हूँ , न ही किसान .., अब हमने अपने शत्रु पकिस्तान को अपने जवानों व किसानों के जज्बें से हराया..., मनोज जी आप ऐसे फिल्म बनाओ कि राष्ट्रवाद का उफान जनता में बढ़ता रहे ताकि हमारी ताकत से कोई बुरी नजर न रखे .


इसके पश्चात...,  दिल्ली से मुंबई की २४ घंटे की पश्चिम एक्सप्रेस ट्रेन यात्रा के दौरान मनोज कुमार ने इस फिल्म “उपकार” के पुरे संवाद लिख लिए .


और  इस फिल्म को रिलीज़ के पहिले, व  लाल बहादुर शास्त्री की देशी – विदेशी माफियाओं द्वारा ह्त्या के बाद अश्रु पूर्ण श्रधान्जली देते हुए कहा “जिस प्रधानमन्त्री के लिए मैंने यह फिल्म बनायी वह बन्दा इसे देख नहीं पाया व मेरा यह सपना अधूरा रह गया”

ललिता शास्त्री भी लालबहादुर शास्त्री के मृत नीले शरीर को देखकर, जहर की आशंका के पुख्ता सबूत के लिए  शव विच्छेदन की मांग करती रही जिसे राजनेताओं ने ख़ारिज कर दिया

साभार :
www.meradeshdoooba.com (a mirror of india) स्थापना २६ दिसम्बर २०११ इस लिंक पर click कर   
कृपया वेबसाइट की 700 से अधिक  प्रवाष्ठियों की यात्रा करें व E MAIL द्वारा नई पोस्ट के लिए SUBSCRIBE करें - भ्रष्टाचारीयों के महाकुंभ की महान-डायरी (Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.)

११ जनवरी, आज एक महान फ़कीर प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ५३ वी पुण्य तिथी (ह्त्या दिवस ) पर अश्रुपूर्वक प्रणाम..,जय –जवान किसान का सलाम.., अपने १८ महीनों के कार्यकाल में देश में अकाल व विदेशी आक्रमण के काल के गाल में निगलने वाले अजगरों को अपने फौलादी जिगर से परास्त कर दिया था . युद्द में पाकिस्तानी के पठान कोट के पठानों की कोट उतार कर दुश्मनों ने घुटने टेक दिए थे

११ जनवरी, आज एक महान फ़कीर प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ५३ वी पुण्य तिथी (ह्त्या दिवस ) पर अश्रुपूर्वक प्रणाम..,जय जवान किसान का सलाम..,

अपने १८ महीनों के कार्यकाल में देश में अकाल व विदेशी आक्रमण के काल के गाल में निगलने वाले अजगरों को अपने फौलादी जिगर से परास्त कर दिया था . युद्द में पाकिस्तानी के पठान कोट के पठानों की कोट उतार कर दुश्मनों ने घुटने टेक दिए थे 

१९६५ की लड़ाई की जीत की ५३ वीं  वर्ष गांठ में, मीडिया ने TRP की दौड़ में इसे जोर शोर से दिखाया जबकि शास्त्री के योगदान को नगण्य माना..,

आज उनकी ५३ वी पूण्य तिथी में देश में सन्नाटा ही नहीं, कांग्रेस व अन्य नेताओं में मुर्दानगी है.
 
आज उनकी मृत्यु के ५३  साल बाद भी.., देश, विदेशी आक्रमण के घावों से घायल होकर.., हम, अपने घायल होने का सबूत देकर, विश्व से गुहार लगा रहें है .

एक ५० इन्च की काया व ५६/२ =२८ इंच के सीने वाले प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने कहा था हम शांति के पक्षधर है .., यदि किसी ने देश की तरफ बुरी निगाह डाली तो उसकी आँखें फोड़ दी जायेगी...


गरीबी अभिशाप नहीं होती है..इसे उन्होंने प्रमाणित किया था , वे इतने गरीब थे कि उनके पास चाय पीने के भी पैसे नहीं थे .., देश के कुओं के पानी का स्वाद व देश की माटी की खुशबू के महक ही उनके सफलता की सीढ़ी थी 

काश.., मोदीजे, यदि आज नोटों पर लालबहादुर शास्त्री का चित्र छापते तो नयी पीढी उनके आदर्शों से अभिभूत होकर देश को एक नई दिशा के ओर अग्रसर होती .

.
यदि २ अक्टूबर को उनके अतुल्यनीय साहस की प्रेरणा व आने वाले सालों में हम यह दिवस लाल बहादुर शास्त्री, की जयन्ती के रूप में मनाएं तो देश के युवकों में लाल बहादुर शास्त्री के कार्यों से प्रेरित होकर, राष्ट्रवाद के खून का संचार से, जो काम गांधी व नेहरू न कर सके, हम जल्द ही विश्व गुरू व सर्वोपरि हो जायेंगे..., दोस्तों आप अपनी राय दें..

(गांधी व कांग्रेस की २०० भयंकर भूले , Deshdoooba Community या वेबसाईट पर कृपया गौर से पढ़े ) 
१.लाल बहादुर शास्त्री ने अपने १८ महीने के शासन काल में नेहरू के १७ साल के कार्यकाल की गन्दगी साफ़ कर दी थी..
२.गांधी की गंदी राजनीती व जवाहर लाल नेहरू के जहर से देश ७२  साल के सत्ता परिवर्तन के शासन में कंगाल हो गया है...

३.शास्त्री जी के अल्प काल में, देश में राष्ट्रवादी भावना से जनता को ओत प्रोत कर, श्वेत क्रांती के साथ हरित क्रांती का जन्म हुआ, उनका आव्हान था शहर वालों, घर के आस पास जितनी भी खाली जमीन है उसमें अन्न उगाओ.., उनकी सादगी से जनता कायल थी , लेकिन कांग्रेसी घायल थे, उनकी अय्याशी पर रोक लगने से, भ्रष्टाचार ख़त्म कर उन्हें मजदूर बना दिया था 

४. उन्होंने, पूरे देश को उन्होंने आव्हान किया की सोमवार को एक दिन का उपवास रखे , इसके पहिले उन्होंने कहा जब मेरा परिवार उपवास में सक्षम होगा तो ही मैं राष्ट्र को आव्हान करूंगा..
५. दक्षिण भारत जो हिन्दी विरोधी था उन्होंने भी इसका तहे दिल से अपनाया, व देश भर मे होटल बंद रहते थी,

नेहरू के दिन के २५ हजार के खर्च की जगह प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री महीने में मात्र ३०० रूपये में सरकारी वेतन से घर चलाते थे 
उनकी जिदंगी एक अति सादगी व प्रधानमंमंत्री के रूप में सडक किनारे, रहने वाले एक गरीब जैसी थी
प्रधानमंत्री होने के बावजूद वे किराए के घर में रहते हुए उनकी रूस (मास्को) में ह्त्या हुई थी 

, लाल बहादुर शास्त्री हमेशा कहते थे सत्ता का स्वाद मत चखों..,देश की गरीबी के लिए काम करो, सत्ता के मद से अपने संस्कार मत बिगाड़ो, इसलिए उनके ६ बच्चे होने के बावजूद वंशवाद की परम्परा को तोड़ते ही अपन बच्चों को राजनीती में कदम रखने नहीं दिया, यहाँ तक की अपने बच्चो को सरकारी कार में बैठने नहीं देते थे..,

घर से प्रधानमंत्री दफ्तर में पहुँचाने के बाद सरकारी कार छोड़ देते थे, वे अन्य मंत्रियों से कहते थे आप इसका उपयोग करें 

८.. आजादी के आन्दोलन में अंग्रेज जब भी, कांग्रेसी नेता गिरफ्तार होते थे तो उन्हें जेल में विशेष खाना जैसे हलवा पुरी मिलती थी ..., लाल बहादुर शास्त्री वे खाना अन्य कैदियों में बाँट देते थे , कहते ऐसे मालपुआ भोजन से मैं बीमार पड़ जाऊंगा, और अन्य कैदीयों को बांटकर, वे भी खुश रहते थे...
३.जब उन्होंने रेल दुर्घटना की वजह से इस्तीफा दिया.., अगले दिन सरकारी घर खाली करने के पहले वे रात भर, बिना बिजली के रहे ..., कहा, मेरा पद चला गया है .., मैं सरकारी बिजली खर्च नहीं करूंगा ..

९.. प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके घर में कूलर लगा देखकर, उस कूलर को यह कहते ही वापस कर दिया कि मेरे बच्चों को इसकी आदत नहीं डालनी है

..
१०... १९५२ से कांग्रेस के चुनाव चिन्हमें दो बैलों की जोड़ीसे, जवाहरलाल नेहरू ने चुनावी नारा आराम हराम हैके अपने अय्याशी पन को छिपाकर जीता , सत्ता में आते ही इन दो बैलों को सत्ता की विदेशी शराब पीला कर बेहोशी में रखा.... और बिना किसान के, देश की उपजाऊ जमीन को बंजर बनाकर , देश में भूखमरी पैदाकर, विदेशी अनाज से देशवासियों का लालन पालन किया, हमें ऐसा घटिया/सड़ा अनाज खिलाने को मजबूर किया गया, जो कि अमेरिका के सूअर भी नहीं खाते थे ... हमारे सेना के जवानों के हाथों में बन्दूक थमाने की बजाय शांती का गुलाबी फूलथमा दिया .... और हिन्दी चीनी , भाई-भाईके नारे में उसकी महक डालने से, नोबल पुरूस्कार जीतने की महत्वकांक्षा में सेना को नो बल कर दिया... हमारे से दो साल बाद, आजाद हुए चीनने अपनी ताकत बढाते हुए .... मौके की ताक में हमारे देश ४६ हजार वर्ग किलोमीटर पर कब्जा कर , नेहरू को थप्पड़ मार कर , नेहरू का नारा हिन्दी चीनी , खाई खाईमे बदल दिया और नेहरू का शांतीके नारें की देशवासियों के सामने पोल खोल दी 

११. जवाहर लाल नेहरू की मौत के बाद . प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इन दो बैलों का किसान बनकर ,अपने सवा चार फीट की काया को, राष्ट्रवादी बल से , इन अपाहिज हुए जवानों व किसानों में एक नया आत्मबल डाल कर , “जय जवान जय किसानके नारा को १९ महीने में सार्थक बना दिया. लेकिन...., देश के कांग्रेसी तो वंशवाद से भयभीत थे ... लेकिन उससे कहीं ज्यादा भयभीत विदेशी ताकतें थी, उन्हें अहसास हो चुका था {यदि हमारा देश दो साल और राष्ट्रवादी प्रवाहसे चलेगा तो हम हिन्दुस्तान आत्मनिर्भर बन जाएगा, और कोई ताकत उस पर राज नहीं कर सकेंगी} इसलिए , देश के लालको सुनोयोजित षड़यंत्र से मारकर, उन्हें दूध में जहर दे कर नीलीकाया में उनके पार्थीव शरीर को लाया गया , हमारे देशी कांग्रेसी ताकतों ने भी इसे हृद्याधात से प्राकृतिक मौत से, बिना पोस्टमार्टम के, डर से... कही पोस्टमार्टम करने पर , देशी व विदेशी ताकतों का पोस्टमार्टम न हो जाए ... आनन फानन में प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का शव दाह कर दिया , उनकी पत्नी अंत तक गुहार लगाती रही , मेरे पति की हत्या की जांच हो...

१२. ये वही काग्रेसी थे, जिन्होने लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद , उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उनके किराए के घर मे घुसकर धावा बोला, तब उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने अपनी अलमारी खोलकर कांग्रेसीयो को दिखाते हुए कहा , देखो?, ये मेरा काला धन है, ये हमारी सपत्ति है, कांग्रेसीयो ने छान बीन की तो उसमे , लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर कुछ कागज मिले , उन कांग्रेसीयों को लगा कि इसमे लाल बहादुर शास्त्री के अचल व काले धन की संपत्ति के दस्तावेज हैं.
जब कांग्रेसीयो ने दस्तावेजों को खंगाला तो वह बैक के कर्ज के पेपर निकले, जो लाल बहादुर शास्त्री ने, प्रधानमंत्री के कार्यकाल मे, अपनी नीजी कार, बैक के कर्ज से खरीदी थी, और कर्ज अदायगी मे असमर्थ होने पर, बाद मे वह कार बैक को लौटा दी थी. तो वे उन सभी काग्रेसीयों के चेहरे उतर गये और् उनके घर से खाली-हाथ मलते लौटे.

१३.उसी तरह लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद, प्रधानमंत्री बनने के बाद, इंदिरा गाधी भी उनके किराए के घर गई, और उनका घर देखकर, अपना नाक सिकुडते हुए कहा.. छी:मिडल क्लास फैमिली” ( “छी:मध्यम दर्जे का परिवार”)

१४.यह वही देश का लाल था , जिन्होने अपना जीवन देश को सर्मपित कर दिया था , और उस देश के लाल का मृत शरीर , विदेश से नीले रंग (मृत शरीर का नीला रंग, दर्शाता है कि शरीर मे विष का अंश है) मे आया, तो न कोई जाँच न कोई, न कोई पोस्ट मार्टम (शव विच्छेदन), आनन फानन मे अंतिम क्रिया कर दी गई,.ताकि मौत का रहस्य दब जायें?.

किसी ने अय्याशी की 
किसी ने तानाशाही की 
किसी ने वतन लूटा 
किसी ने कफ़न लूटा 
किसी ने देशवासियों को घोटाले की फ़ौज से मौज कर.., घोंट दिया

प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्रीजी आपकी ५०वी पुण्य तिथि का पुण्य देश पर है, हमारा प्रणाम , आपने शास्त्र के शास्त्र से जीत का मंत्र दिया , आज के सत्ताखोरों ने तुम्हारे आदर्शों को भूलाकर भ्रष्टाचार से देश को डूबों दिया 

देशी विदेशी शक्तियों ने जय जवान जय किसान के रखवाले की ह्त्या कर , देश की हरियाली ख़त्म कर दी...