Friday, 11 January 2019

१. ताशकंद जाने से पहले वीर सावरकर ने लालबहादुर शास्त्री को चेताया और कहा “शास्त्रीजी हम जीते हुए राष्ट्र है , रूस के प्रधान्मत्री को हमारे देश मे बुलाओ, यदि आप ताशकंद जाओगे तो वापस नही आओगे.. और हमारे द्वारा जीता भाग भी लुटा आओगे.. उनकी यह भविष्यवाणी सच हुई, २. ९ जनवरी १९६६ की रात लालबहादुर शास्त्री ने ताशकंद से अपनी पत्नी ललिता शास्त्री को फोन कर कहा “मैं हिन्दुस्तान आना चाहता हूँ, यहां, मुझ पर हस्ताक्षर करने के लिए दवाब डाल रहें है..., मुझे यहां घुटन हो रही है... देश के सत्ता की राजनयिक फौजे बार-बार, शास्त्रीजी से कह रही थी..., भले हम युद्ध जीत गये हैं, यदि आप हस्ताक्षर नहीं करोगे तो आगे अन्तराष्ट्रीय बिरादरी एकजुट होकर देश की आर्थिक स्तिथी बिगाड़ देगी...



१. ताशकंद जाने से पहले वीर सावरकर ने लालबहादुर शास्त्री को चेताया और कहा शास्त्रीजी हम जीते हुए राष्ट्र है , रूस के प्रधान्मत्री को हमारे देश मे बुलाओ, यदि आप ताशकंद जाओगे तो वापस नही आओगे.. और हमारे द्वारा जीता भाग भी लुटा आओगे..
उनकी यह भविष्यवाणी सच हुई,

२. ९ जनवरी १९६६ की रात लालबहादुर शास्त्री ने ताशकंद से अपनी पत्नी ललिता शास्त्री को फोन कर कहा मैं हिन्दुस्तान आना चाहता हूँ, यहां, मुझ पर हस्ताक्षर करने के लिए दवाब डाल रहें है..., मुझे यहां घुटन हो रही है...
देश के सत्ता की राजनयिक फौजे बार-बार, शास्त्रीजी से कह रही थी..., भले हम युद्ध जीत गये हैं, यदि आप हस्ताक्षर नहीं करोगे तो आगे अन्तराष्ट्रीय बिरादरी एकजुट होकर देश की आर्थिक स्तिथी बिगाड़ देगी...

३. इसके बाद उनके कड़े मंसूबे, हमारे देश के सत्ता की राजनयिक फौजे तोड़ने में कामयाब हो गयी.., १० जनवरी १९६६ के शाम ४.३० बजे , शास्त्रीजी ने जीती हुई जमीन वापस लौटाने व शांती समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, उनके पुत्र अनिल शास्त्री को कहा गया ..., वे देश के प्रधानमंत्री हैं, उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें विशेष आवास में अकेले में सुरक्षित रखना होगा 
प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के ताशकंद समझौते के बाद ८ घंटे के बाद , ११ जनवरी तड़के १ बजे,पाकिस्तानी रसोईये द्वारा रात को दूध पीने के बाद उनकी मौत हो गई, मौत के समय उनके कमरे मे टेलिफोन नही था, जबकि, उनके बगल के कमरे के राजनयिकों के कमरों मे टेलिफोन था, उनकी मौत की पुष्टी होने पर राजनयिकों की फौज दिल्ली मे फोन लगा कर चर्चा कर रहे थे कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा ?

४. अंत तक ललिता शास्त्री गुहार लगाती रही, मेरे पति की मौत की जाँच हो, आज तक सभी सरकारों द्वारा, कोइ कारवाई नही हुई?, 

५. इस रहस्य को जानने के लिये, आर.टी.आई. कार्यकर्ता अनुज धर ने एडी चोटी का जोर लगाने के बाद, सरकार की तरफ से जवाब मिला कि यदि हम इस बात का खुलासा करेगें तो हमारे संबध दूसरे देशों से खराब हो जायेगें ?

६. और एक राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री बेमौत, मौत् का शिकार हो गया., और…..? अपने परिवार के पीछे छोड गया……, सिर्फ और सिर्फ……?????, कर्ज का बोझ?

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७. देश का एक लाल, लाल बहादुर शास्त्री, जब प्रधानमंत्री बने, तब देश मे विकट परिस्थीतिया थी, देश भुखमरी के कगार मे पहुँच रहा था, सीमा पर दुशमनो की तोपें आग उगलने की तैयारी मे थी. जिन्होने जय जवान जय किसानके नारे से दुश्मनों को सबक सीखाकर देश मे हरित क्रति के साथ-साथ श्वेत क्रांति की, प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 19 महिने के प्रधानमंत्री के कार्यकाल की कामयाबी से नेहरू द्वारा किया गया भ्रष्टाचार का शौच साफ कर दिया था…., नेहरू के चमचे नेताओ की अय्याशी खत्म कर, उन्हे आम नेता बना दिया था…???

८. देश की जनता उनकी कायल थी, उनके आवाहन को जनता, सर आँखो मे रखकर , उन्हें देश का भाग्य विधाता मानती थी,

९. उनकी साफ सुथरी छवि के कारण ही उन्हें 1964 में देश का प्रधानमन्त्री बनाया गया। उन्होंने अपने प्रथम संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उनकी शीर्ष प्राथमिकता खाद्यान्न मूल्यों को बढ़ने से रोकना है और वे ऐसा करने में सफल भी रहे। उनके क्रियाकलाप सैद्धान्तिक न होकर पूर्णत: व्यावहारिक और जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप थे।

१०. निष्पक्ष रूप से यदि देखा जाये तो शास्त्रीजी का शासन काल बेहद कठिन रहा। पूँजीपति देश पर हावी होना चाहते थे और दुश्मन देश हम पर आक्रमण करने की फिराक में थे। 

1965 में अचानक पाकिस्तान ने भारत पर सायं 7.30 बजे हवाई हमला कर दिया। परम्परानुसार राष्ट्रपति ने आपात बैठक बुला ली जिसमें तीनों रक्षा अंगों के प्रमुख व मन्त्रिमण्डल के सदस्य शामिल थे। संयोग से प्रधानमन्त्री उस बैठक में कुछ देर से पहुँचे। उनके आते ही विचार-विमर्श प्रारम्भ हुआ। तीनों प्रमुखों ने उनसे सारी वस्तुस्थिति समझाते हुए पूछा: "सर! क्या हुक्म है?" शास्त्रीजी ने एक वाक्य में तत्काल उत्तर दिया: "आप देश की रक्षा कीजिये और मुझे बताइये कि हमें क्या करना है?"

११. शास्त्रीजी ने इस युद्ध में नेहरू के मुकाबले राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया और जय जवान-जय किसान का नारा दिया। इससे भारत की जनता का मनोबल बढ़ा और सारा देश एकजुट हो गया। इसकी कल्पना पाकिस्तान ने कभी सपने में भी नहीं की थी.

१२. लाल बहादुर शास्त्री के आगे प्रधानमंत्री पद पर रहना, दुनिया के देशों को इतना डर नही था.., जितना इंडियन काग्रेसीयों को, वे इस डर को पचा नही पा रहे थे, उन्हे डर था कि राजनीती अब नेताओ की मजदूरी हो जायेगी, सादगी की वजह से उनकी अगली पीढी भी मजदूर बनना पसंद नही करेगी, और वंशवाद खत्म हो जायेगा. और उन्होने इंदिरा गाधी को ब्रिटेन मे भारत का उच्चायुक्त बनाने का संकेत दे दिया था.

१३. आखिरकार रूस और अमरिका की मिलीभगत से शास्त्रीजी पर जोर डाला गया। उन्हें एक सोची समझी साजिश के तहत रूस बुलवाया गया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया, हमेशा उनके साथ जाने वाली उनकी पत्नी ललिता शास्त्री को बहला फुसलाकर इस बात के लिये मनाया गया कि वे शास्त्रीजी के साथ रूस की राजधानी ताशकन्द न जायें और वे भी मान गयीं, अपनी इस भूल का श्रीमती ललिता शास्त्री को मृत्युपर्यन्त पछतावा रहा. 

१४. जब समझौता वार्ता चली तो शास्त्रीजी की एक ही जिद थी कि उन्हें बाकी सब शर्तें मंजूर हैं परन्तु जीती हुई जमीन पाकिस्तान को लौटाना हरगिज़ मंजूर नहीं. काफी जद्दोजहेद के बाद शास्त्रीजी पर अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बनाकर ताशकन्द समझौते के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करा लिये गये.
उन्होंने यह कहते हुए हस्ताक्षर किये थे कि वे हस्ताक्षर जरूर कर रहे हैं पर यह जमीन कोई दूसरा प्रधान मन्त्री ही लौटायेगा, वे नहीं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब ख़ान के साथ युद्धविराम के समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घण्टे बाद 11 जनवरी 1966 की रात में ही उनकी मृत्यु हो गयी। यह आज तक रहस्य बना हुआ है कि क्या वाकई शास्त्रीजी की मौत हृदयाघात के कारण हुई थी? कई लोग उनकी मौत की वजह जहर को ही मानते हैं.

१५. प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के ताशकंद समझौते के बाद , रात को दूध पीने के बाद उनकी मौत हो गइ, मौत के समय उनके कमरे मे टेलिफोन नही था, जबकि, उनके बगल के कमरे के राजनयिकों के कमरों मे टेलिफोन था, उनकी मौत की पुष्टी होने पर राजनयिकों की फौज दिल्ली मे फोन लगा कर चर्चा कर रहे थे कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा ?

यही हाल वीर सावरकर के जीवन के साथ भी, लालबहादुर शास्त्री के मौत के सदमे के बाद,वीर सावरकर बिमार होते गये ,
उन्होने कहा अब देश गर्त मे चला गया, अब मुझे इस देश मे जीना नही हैवीर सावरकर ने दवा लेने से इंकार कर दिया, एक बार डाक्टर ने उन्हे चाय मे दवा मिला कर दी, तो वीर सावरकर को पता चलने पर उन्होने चाय पीना भी बंद कर दिया , और एक राष्ट्र का महानायक इच्छा मृत्यु (कहे तो आत्महत्या) से चला गया.
वीर सावरकर की यह भविष्यवाणी भी सही निकली ……?????

शास्त्रीजी को उनकी सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिये आज भी पूरा भारत श्रद्धापूर्वक याद करता है
.आओ शास्त्रीजी, ताशकंद में तुम्हारी विजय पताका को ताश के महल के पत्तों की तरह ढ़हा कर, तुम्हारा काम तमाम करता हूं... 

मेरे पति का शरीर जहर से नीला पड़ गया है.., इनके शव-विच्छेदन से जांच की जाए...

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Tuesday, 1 January 2019

वीर सावरकर को जिसने नही पहचाना ? उसने हिन्दुस्थान को नही जाना?



वीर सावरकर को जिसने नही पहचाना ? उसने हिन्दुस्थान को नही जाना?

मोदी के प्रधानमंत्री पद पर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के आजादी के ७५ वें वर्ष की याद में भले ही अंडमान जेल की यात्रा की हो ...??? लेकिन आज भी अंडमान जेल की ईंटें, चीख चीख वीर सावरकर को दी गई यातनाओं को बयां करती हैं .
जंहा सभी कैदियों को ३० पौंड पा उंड नारियल व सरसों के तेल को कोल्हू के बैल की तरह पेरना पड़ता था जो वीर सावरकर को दी गई १० अधिक वर्षो की यातनाओं की दास्तान हैं  .

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जलियावाला बाग़ हत्याकांड से लेकर भगतसिंग की फांसी का समर्थन व १९४७ में देश के तुकडे कर सत्ता परिवर्तन के आजादी कहकर कर कहकर प्रधानमंत्री नेहरू ने स्वंभू को भारत रत्न व इंदिरा गांधी ने खालिस्तान आन्दोलन को हवा देकर व राजीव गांधी ने सिख हत्याकांड से सहानुभूति खेलकर भारत रत्न व गांधी नेहरू परिवार को अपनी बपौती बनाकर गली मोहल्लों के नाम व पुतलों से सडकों को पाट दिया .....

इन भारत रत्नों ने १९४७ के पहिले देश की आजादी में खलल डालकर , अंग्रेजों के पिछलगू व सुरक्षा वाल्व बनकर अंग्रेजों को हिन्दुस्तानी आन्दोलन से तनाव मुक्त रखकर १९४७ तक उन्मुक्त राज करने का अवसर दिया. व जेल में VIP का दर्जा पाकर, बिना डंडा खाए हलवा पुरी खाने वाला जीवन बिताया और आज तक उनकी पीढी स्वतंत्रता सेनानी के नाम से बिना टेंशन से पेंशन डकार रही हैं.



 वीर सावरकर को जिसने नही पहचाना ? उसने हिन्दुस्थान को नही जाना

१. आज भी अंडमान जेल की ईंटें, चीख चीख वीर सावरकर को दी गई यातनाओं को बयां करती हैं ..

२. उन्हें ऐसी कोठारी में रखा गया जहाँ से कैदियों को फांसी की सजा देने का दृश्य स्पष्ट दिखाई देता था .., ताकि वीर सावरकर की रूह काप कर वे क्षमा की गुहार लगाए.., अंडमान जेल में कडी ठंड मे , वीर सावरकर को कंबल नही दिया जाता था ताकि ठंड से वे ठिठुर ठिठुर कर मर जाये, इस दंड का भी तोड, वीर सावरकर ने निकाल लिया, वे रात भर शरीर गर्म रखने के लिये दंड-बैठक करते थे, और इसके बाद, उन्हें और उनके जेल के साथियों को,सवेरे से शाम तक कोल्हू के बैल की तरह से तेल निकालना पडता था. जबकि आज तिहाड जेल के सफेद पोश नकाब वाले राजनैतिकों व माफियाओं को, हीटर व वेटर, स्वेटर, पख़े अखबार इत्यादि की एशों-आराम की सुविधा है

३. मेरी गुहार...., क्या इस कोहीनूर हीरे के चमक से कही गुना ज्यादा..., ५६ गुणों से ज्यादा.., परमवीर सावरकर, जिन्होंने राष्ट्रवाद की बलि देंने से इनकार कर, अंग्रेजों के तलवे चाटने के खेल को ठुकराकर सत्ता के ५६ भोग को नकार दिया...

४. अब तो, मोदी सरकार तो उन्हें भारतरत्न के सम्मान को भूल चुकी है..., क्या...!!!, २८ मई २०१७ को, उनकी १३४ वी जन्म तिथी को राष्ट्रीय प्रेरणा दिवस से बाबा साहेब आंबेडकर की तरह शौर्य दिवस पखवाड़ा के रूप में मनायेगी....

५. सावरकर जो वीर ही नही परमवीर थे, इस धरती पर चाणक्य के बाद दुरदर्शी क्रातिकारी वीर सावरकर ही थे ,जिनकी दहाड् से अग्रजो का साम्राज्य हिल उठता था, मै तो उन्हे देश के क्रांति का चाणक्य मानता हूँ,? उनकी भूमिका अग्रेजो के समय वीर शिवाजी महाराज व सत्ता परिवर्तने के बाद वीर महाराणा प्रताप की थी? आज तक हमारे देश्वासियो को यह पता नही है, सुभाष चन्द्र बोस, चद्रशेखर आजाद व सरदार भगत सिंग मे क्राति का जन्म वीर सावरकर द्वारा हुआ?

६. यह वीर सावरकर की ही देंन है कि अमृतसर व कलकत्ता पकिस्तान में जाने से बच गया जो सिद्धपुरूष हुए, भविष्य दर्शन सिद्दी उनमे थी , जो सावरकर द्वारा कही है 40 से अधिक भविष्यवाणी आज सार्थक हुई है देश में राष्ट्रवाद की बर्बादी को देखकर उन्होंने नेहरू को चुनौती देते हुए कहा ... मैं सत्तालोलुप नहीं हूं, मुझे दो साल का शासन दो, मैं हिन्दुस्थान को गौरवशाली बनाऊंगा ..

७. आजाद हिद फौज का जन्म वीर सावरकर की प्रेरणा द्वारा ही हुआ, सुभाष चन्द्र बोस उनसे आशीर्वाद लेने गये थे कि मेरी मजिल को सफलता मिले? याद रहे 1947 मे आजाद हिद फौज की अहम भूमिका थी ?

८. चन्द्रशेखर वेकट रमण को वर्ष 1930 मे जब नोबल पुरस्कार मिला. जब, वे मंच पर पुरस्कार ग्रहण करने पर गये तो, तो उन्होने कहा मुझे बढा दु:ख है कि यह पुरस्कार एक गुलाम देश के नागरिक को मिल रहा है, मुझे गर्व होता यदि मै आजाद देश का नागरिक होता. उनके विचार सुनकर चन्द्रशेखर वेकट रमण जब वीर सावरकर को बैगलोर में मिले , तब चन्द्रशेखर वेकट रमण से 3-4 घटे राष्ट्रवाद के बारे मे विस्तार से चर्चा कि तो उन्होने वीर सावरकर के बारे मे कहा यह देश का अनमोल हिरा जिसके चमक के सामने कोहिनूर हीरा भी फीका है?”. 

याद रहें, महान भौतिकशास्त्री वैज्ञानिक चन्द्रशेखर वेकट रमण को 1954 मे भारत रत्न मिला था

९. जब वीर सावरकर के अंडमान जेल मे अमानवीय अत्याचार के वजह से जेलर बारी को काला पानी से ब्रिटिश के राजधानी मे तबादला कर दिया था.. . (याद रहे, जेलर बारी ने अंग्रेज प्रशासकों को बताया था कि वीर सावरकर को प्रताडना व कड़ी सजा के बावजूद वे टस से मस होने वालो मे से नही है, वह फौलादी दिल वाला इंसान है और उनके {वीर सावरकर} जेल के कार्यकालमे 90% से ज्यादा कैदी साक्षर हो गये हैं, – इनमे से 60% से ज्यादा मुसलिम कैदी थे

१०.अंडमान जेल में कडी ठंड मे , वीर सावरकर को कंबल नही दिया जाता था ताकि ठंड से वे ठिठुर ठिठुर कर मर जाये, इस दंड का भी तोड, वीर सावरकर ने निकाल लिया, वे रात भर शरीर गर्म रखने के लिये दंड-बैठक करते थे, और इसके बाद, उन्हें और उनके जेल के साथियों को,सवेरे से शाम तक कोल्हू के बैल की तरह से तेल निकालना पडता था. जबकि आज तिहाड जेल के सफेद पोश नकाब वाले राजनैतिकों व माफियाओं को, हीटर व वेटर, स्वेटर, पख़े अखबार इत्यादि की एशों-आराम की सुविधा है

१० वीर सावरकर को अडमान जेल की यातना देने/सहन करने के बाद उनके चेले सुभाष चन्द्र बोस ने कहा , वीर सावरकरजी आप गाँधी जी के कांग्रेस मे शामिल हो जाओ, मै देश की क्राति की बागडोर सभाँलूगा, वीर सावरकर ने उन्हे लताडते हुए कहा मेरे सिद्दांत को त्यागकर मै अग्रेजो की पीछे की चाटता तो मै गाँधी से बहुत आगे होता था,
यदि गाँधी, मेरे सिद्दांओ को मानेगे, तो मै गाधी के पीछे चलकर उनको राष्ट्रवाद की रूकावट मे मार्ग दर्शन कराऊँगा? तु मेरी फिक्र नही करना मै तो देश के लिये, अपनी मौत की कफन साथ मे लेकर फिरता हूँ?

११. वीर सावरकर व उनके परिवार का जन्म ही मातृभूमि की स्वाधीनता हेतु ही हुआ था , अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होने जो संघर्ष किया , उनके बदले मे उन्होने मान. यश, पद या देश से कोई अपेक्षा नही की. लेकिन सच तो यही है उनके अनुपम त्याग के बदले मे पराधीन सरकार व सत्त लोलूप जो आजादी को एक झाँसा बनाकर ,जनता को स्वाधीनता की लोलूप सरकारो ने भी उन्हे शारीरिक व मानसिक यंत्रणाए ही दी...???? 

१२. क्रांतिकार्य, अस्पृश्यता निवारण , देशोरेम, स्वाभिमान , धर्मसुधारक,लिपी शुद्धी, धर्मांतरित लोगो का शुद्धीकरण, सप्त बंधन तोडने, स्वदेशी व्रत, विदेशी कपडों की होली , शुरूवात मे यह सब कार्य समाज मे विष के समान प्रतीत होती थी,लेकिन यह सब बाद मे समाज मे अमृत समान प्रतीत हुआ उन्होने कहा , ये सब कार्य, समाज को दोषपूर्ण लगे तो भी मै,उन्हे नही छोडूगा/ कारण सभी कार्य शुरूवात मे दोषपूर्ण होते है, इसलिए उन्होनें मिलने के लिए, कर्म, क्रांतीकर्म, अस्पृश्योद्वार का कर्य, अंतिम समय तक नही छोडा. 

१३. ताशकंद जाने से पहले वीर सावरकर ने लालबहादुर शास्त्री को चेताया और कहा शास्त्रीजी हम जीते हुए राष्ट्र है , रूस के प्रधान्मत्री को हमारे देश मे बुलाओ, यदि आप ताशकंद जाओगे तो वापस नही आओगे
उनकी यह भविष्यवाणी सच हुई,

१४. यही हाल वीर सावरकर के जीवन के साथ भी, लालबहादुर शास्त्री के मौत के सदमे के बाद,वीर सावरकर बिमार होते गये ,

उन्होने कहा अब देश गर्त मे चला गया, अब मुझे इस देश मे जीना नही हैवीर सावरकर ने दवा लेने से इंकार कर दिया, एक बार डाक्टर ने उन्हे चाय मे दवा मिला कर दी, तो वीर सावरकर को पता चलने पर उन्होने चाय पीना भी बंद कर दिया , और एक राष्ट्र का महानायक इच्छा मृत्यु (कहे तो आत्महत्या) से चला गया.
वीर सावरकर की यह भविष्यवाणी भी सही निकली ……?????

१५. आज का श्लोगन बन गया है…..
सच्चे का मुँह काला ..????
भ्रष्टाचार का बोलबाला……..

१६. वीर सावरकर ने अपने मौत के पहने कहा कहा मेरी मौत पर कोई हडताल व देश के किसी नगर, शहर मे बंद का आयोजन नही होगा और जो मेरे जिदगी की 5000रू अमानत है, वह जो हिन्दू , मुस्लिम बने, उनके पुन: हिन्दु धर्म मे आने पर यह धन उनके शुध्हीकरण मे उपयोग मे लाना?

१७. आज भी स्वर साम्राज्ञी कोकिला , भारतरत्न लता मगेशकर भी गला फाडकर चिल्ला रही है, वीर सावरकर को कोइ सम्मान नही मिला है, उनके वीरता की इस देश मे दुर्गति हुई है ………..

१८. अब इस दुनिया ऐसा वीर सावरकर दुबारा पैदा नही होगा? देश के इतिहास को अन्धेर मे रखकर यो कहे देश के इतिहास को दफन कर दिया है….?????????

Monday, 19 November 2018

इस लोकतंत्र में आप और हम वोट बैंक के मोहरे हैं.., ५साल के रोते हुए चेहरे हैं.. राममनोहर लोहिया ने सही कहा था ...,जिंदा कौमे ५ साल का इन्तजार नहीं करती है...दोस्तों.., इस सुधार के पीछे देश का सबसे बड़ा जहर “अशिक्षा” है.., जिसकी वजह से जनता गरीब होते जा रही है.., खोखले वादों के अफीमी नारों का शिकार हो जाती है.., और वोट बैंक की राजनीती करने वाले अपने को देश का मसीहा कहकर काले धन से अमीरतम बनकर अपने को अप्रतिम कहकर सत्ता को जातिवाद, भाषावाद,धर्मवाद व घुसपैठीयों के कोड़े से जनता को पीटकर,अधमरा कर, महंगाई बढ़ा कर कर्ज के गर्त से देश को डूबा रहें है.




सामाजिक सुधार , राजनैतिक सुधार यह देश की सुरक्षा के ढाल - तलवार है.. – वीर सावरकर

राजनैतिक सुधार पहिले की सामाजिक सुधार पहिले इस पर लोकमान्य तिलक व गोपाल गणेश आगरकर (सामाजिक सुधारक) के बीच  विचार मतभेद होने से खटास व  प्रतिद्वंदिता उत्पन्न हो गई थी जिसका समाधान वीर सावरकर ने दोनों पहलूँ को एक दूसरे का पूरक  बताते हुए कहा  समाज की सुरक्षा से राष्ट्र को उन्नत बनाने के लिए तलवार (आक्रमण) व ढाल (बचाव) के समायोजन जरूरी है 

अब, इस २० वीं सदी के चाणक्य. वीर सावरकर की विचारधारा के अनुसरण किये बिना अब २१ वीं शताब्दी मैं भारत का विश्वगुरू बनाने का सपना एक ढकोसला है
आज सीमा पार के घुसपैठ की मूठ से सामाजिक सुधार के नाम से वोट बैंक की दुधारी तलवार से राष्ट्र (भारत) तेरे तुकडे होंगें के नारों की गूँज है..

हर चुनाव में जनता को चुन चुन कर इस दुधारी तलवार से घाव किया जा रहा है ..., कही जातिवाद , धर्म् वाद , अलगाववाद  व आरक्षण की चमक से लोकतंत्र को मारने की धमक है’’  

सामाजिक सुधार , राजनैतिक सुधार को दरकिनार कर , हर दल ..., इसका हल निकालने में अपने को मसीहा कह कर जनटा को दल-दल में  धंसाने के खेल में माहिर हैं..

१९४७ से “सत्ता परिवर्तन” को “सम्पूर्ण आजादी” कहकर , जनता को भरमाकर..., आराम हराम हैं , गरीबी हटाओं , मेरा भरा महान , इंडिया शाईनिंग , भारत निर्माण से अच्छे  दिन के नारों से ... चुनावी मौसम में  मेढकों की टर्र –टर्र से वादों की बरसात से , सत्ता पर काबिज होने की बात यह पुरानी बात है.

 दोस्तों..इस सुधार के पीछे देश का सबसे बड़ा जहर “अशिक्षा” है..जिसकी वजह से जनता गरीब होते जा रही है..खोखले वादों के अफीमी नारों का शिकार हो जाती है..और वोट बैंक की राजनीती करने वाले अपने को देश का मसीहा कहकर काले धन से अमीरतम बनकर अपने को अप्रतिम कहकर सत्ता को जातिवादभाषावाद,धर्मवाद व घुसपैठीयों के कोड़े से जनता को पीटकर,अधमरा करमहंगाई बढ़ा कर कर्ज के गर्त से देश को डूबा रहें है.

इस लोकतंत्र में आप और हम वोट बैंक के मोहरे हैं..५साल के रोते हुए चेहरे हैं.. राममनोहर लोहिया ने सही कहा था ...,जिंदा कौमे ५ साल का इन्तजार नहीं करती है...

Sunday, 28 October 2018

YES I CAN..., YES MODI DID IT…, मोदीजी तुस्सी ग्रेट हो.., C.M से P.M के सफ़र में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में नरेन्द्र मोदी ने ३१ अक्टूबर २०१३ को सरदार पटेल की मूर्ति के शिलान्यास से उद्घाटन का सफ़र देश के प्रधानमंत्री के रूप में ३१ अक्टूबर २०१८ को विश्व के सबसे ऊंची मूर्ती का उद्घाटन से १८२ मीटर जिसने वर्तमान चीन के स्प्रिंग टेम्पल बुद्ध १५२ मीटर व मायाम्नार म्यांमार की १२० मीटर व जापान की तीसरी ऊंची ११६ मीटर की मूर्तियों को मात देनी की तैयारी है.




YES I CAN..., YES MODI DID IT…,  
मोदीजी तुस्सी ग्रेट हो.., C.M से P.M के सफ़र में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में नरेन्द्र मोदी ने ३१ अक्टूबर २०१३ को सरदार पटेल की मूर्ति के शिलान्यास से उद्घाटन का सफ़र देश के प्रधानमंत्री के रूप में ३१ अक्टूबर २०१८ को विश्व के सबसे ऊंची मूर्ती का उद्घाटन से   १८२ मीटर जिसने वर्तमान चीन के स्प्रिंग टेम्पल बुद्ध १५२ मीटर व मायाम्नार म्यांमार की १२० मीटर व जापान की तीसरी ऊंची ११६ मीटर की मूर्तियों को मात देनी की तैयारी है.

इस कार्य में आधुनिक तकनीकी से इस मूर्ती को देखने वाले सैलानियों से इसमें खर्च ३००० करोड़ रूपये भी चंद सालों में प्राप्त हो कर.., सच में मोदीजी ने देश को विश्व इतिहास के मानचित्र में लाकर दिखा दिया की ५६२ देशी रियाशतों को शास्वत रूप से एकजूट कर देश में मिलाकर, देश को एकजुट रखने वाले एक और केवल एक ही सरदार पटेल ही इस देश का गौरव थे .., गौरव हैं.., गौरव रहेंगे..

एकता की इस मूर्ती “स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी” जो राष्ट्रीय गौरव व एकता का प्रतीक है , और इस मूर्ती में तकनीती के निर्माण से भारत के शिल्पकारों / इंजीनियरिंग / परियोजनाओं प्रबंधन क्षमताओं  के कौशल का सम्मान व लोहा विश्व को मानना पड़ा.
  

याद रहे नेहरू से पूर्व प्रधानमंत्रियो तक की शिलान्यास की योजनाओं से देश के धन का सत्यानाश ही हुआ है, आज भी बहुत सी योजनायें देश के  धन को डकार कर सुरसा की तरह मूंह फैलाकर और धन की गुहार से मरणासन्न स्थिति में है.., जो देश की लुंज पुंज नौकरशाही से मफियाशाही के गठ जोड़ का मजबूत बंधन बना हुआ है  

वेबस्थल व फेसबुक की July 7, 2014 की पुरानी पोस्ट 

र्स्स्सी जल गई बल नहीं गया..., कभी आरक्षण के भक्षण से,कभी शिवाजी की प्रतिमा के झांसे से प्रदेश जीतने का हौवा खडा कर. महाभ्रष्ट प्रदेश के काले कौवों के संगठित दलों की कविता है....

पहले मिलाप व आलाप की..., यह देश के ६७ सालों की राजनीती से भ्रष्टाचार की ROCK-NITI, चट्टानी नीती के प्रतिस्पर्धा से देश को लूटने की कहानी है...

इस आड़ में सभी थाली के चट्टे ..., बट्टे , देश के पट्टे (खान खदान,ईमान ) बेचकर , देश की साख को बट्टा लगाने की कसाईपना की कोई कसर नहीं छोड़ रहें है...,

क्योंकि इनके ऊपर क़ानून का नहीं असर.., तो क्यों न रहें.., ये अग्रसर...

अब आदर्श मंजिला महाघोटालों के अपने आदर्शों से छत्रपति शिवाजी महाराज की दुनिया में सबसे ऊंची मूर्ती १ हजार करोड़ रूपये से अधिक खर्च कर बनायेंगे.. क्योंकि नरेंद मोदी ने ६ माह पहले इस तरह की घोषणा की थी कि 

मैं,गुजरात में, देश के जवानों व किसानों की माटी के लोहे से एफिल टावर से ऊंची व मजबूत सरदार पटेल की मूर्ती बनवाऊंगा .

दोस्तों.., इस छत्रपति शिवाजी के पुतले के पीछे २१ शताब्दी के महा भ्रष्टाचार का पुतला छुपा है...

देश के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की पुस्तक भारत एक खोज से..., साईकिल घोटाले की खोज हुई थी,

प्रधानमंत्री ने तो डॉक्टर बनकर ..., नेहरू की पुस्तक को पढ़ाकर व अनुसंधान करवाकर, इसे अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार की नयी नयी खोजों में परिवर्त्तीत कर अपने विधार्थीयों को देश की अर्थी बनाने की कल्पनाएं दी ...

इस २१वी सदी के महाभ्रष्ट पुतले ने शिवाजी के विचारों को क्षीर्ण कर दिया है..

आज महाराष्ट्र देश का महाभ्रष्ट राज्य की सूची में अव्वल है......, नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में सरदार पटेलके पुतले बनाने की क्या घोषणा कर दी ..

महाराष्ट्र के आदर्श भ्रष्टाचारी नेता , भ्रष्टाचार के तिल में समाते.., तिलमिलाये गए, और अब भ्रष्टाचार को आपस में गले लगाकर, ताल और ताली ठोककर , अपने गालों की लाली से, भारत निर्माण के नारों से नारों से अब पुतले निर्माण के आड़ में , मराठा आरक्षण के पराठे से ७२% की सीमा लांघ दी है..., इनका वश चले तो ये १००% की आरक्षण नीती से देश को बर्बादी में झोंकने में भी कसर नहीं रखेंगें 

 

Wednesday, 10 October 2018

याद रहे.., जून 1971 में, मुजफ्फरपुर बिहार में नक्सलियों की धमकी में जयप्रकाश नारायण Top Hitlist में थे. वे जानते थे नक्सलवाद का उभार व विकास की जड़ गरीबी और बेरोजगारी के अलावा सरकार द्वारा उत्पीड़न है ,इस समस्या के निदान के लिए प्यार और सहानुभूति के साथ उनकी पीड़ा व अनुभूति से ही सशस्त्र नक्सलवाद का खात्मा किया जा सकता है , वह कई महीनों के लिए Musahari ब्लॉक में रहे थे और नक्सलियों की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयोग किया. इसके अलावा जयप्रकाश चंबल घाटी में डकैतों का आत्मसमर्पण प्राप्त करने में वे एक प्रमुख व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व किया था.


11 October  V/s 2 October..,  अहिंसा के छद्म भेष में बापू को चमकाकर हर पार्टी ने ७२ सालों  तक मलाई  खाई है.., लेकिन ११ अक्टूबर के जन्मदाता जयप्रकाश नारायण जो सरकार व मंत्रीमंडल  मंडल का कभी हिस्सा नहीं रहे
इसके बावजूद इस नायक ने समाज वाद को रूबरू क्रांति में परिवर्तित कर सबका विकास सबका साथ के दांवों के नारों से आज की राजनीती चमकाने को आयना दिखा दिया है कि  “जनता ही सत्ता की मालिक है..”, सिंहासन खाली करो जनता आती है के राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिनकर उद्घोष से..,  जयप्रकाश नारायण ने देश से जातिवाद का सफाया कर , नै पीढी को एकत्रित कर देश में लूट तंत्र से राजनीति करने वालों को सबक सिखाया था..   

जयप्रकाश नारायण से सम्पूर्ण क्रांती के उद्घोष से २५ जून १९७५ को देश के संविधान को व्यवधान मानकर आपातकाल से इंदिरा गांधी ने स्वंय विधान के दरवाजे में बंद कर दिया ..

याद रहे.., जून 1971 में, मुजफ्फरपुर बिहार में नक्सलियों की धमकी में जयप्रकाश नारायण Top Hitlist में थे. वे जानते थे नक्सलवाद का उभार व विकास की जड़ गरीबी और बेरोजगारी के अलावा सरकार द्वारा उत्पीड़न है ,इस समस्या के निदान के लिए प्यार और सहानुभूति के साथ उनकी पीड़ा व अनुभूति से ही सशस्त्र नक्सलवाद का खात्मा किया जा सकता है , वह कई महीनों के लिए Musahari ब्लॉक में रहे थे और नक्सलियों की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयोग किया. इसके अलावा जयप्रकाश चंबल घाटी में डकैतों का आत्मसमर्पण प्राप्त करने में वे एक प्रमुख व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व किया था.
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जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण भारत उदय के १००० से अधिक डाकुओं के आत्म समर्पण करने के बाद .., लोकतंत्र से रखवालों के नाम से १० हजार से अधिक लोग जेल जाने की आड़ में आज एक खिचड़ी खाकर..., सत्ता को अपना अधिकार मानकर, अब लोकतंत्र को लूट तंत्र का हथियार बनाकर.., अब १९४७ के बाद की नयी पीढी के स्वतन्त्रता सेनानी की नयी पंक्ति कह सम्मान का अभिमान मान रही है.

हमारे राजनेताओं से हर समस्या सुलझाई नही बल्कि सुलगाई गयी है .., सुकमा बीजापुर गढ़चिरोली व देश के अन्य इलाकों में नक्सलवाद व राजनेताओं से खान खदान नभ जलाकाश ईमान को बेचने का एक गठबंधन का संघठन के सुनियोजन खेल है.

जयप्रकाश नारायण व राम मनोहर लोहिया की औलादें बनी जल्लादें .., चारा घोटालों से A-Z घोटालों की सूची लम्बी है .., देश घोटालों से बौना होते जा रहा है....


वेबस्थल की पुरानी WEDNESDAY, 16 SEPTEMBER 2015 की पोस्ट

इस लोकतंत्र में आप और हम वोट बैंक के मोहरे हैं.., ५साल के रोते हुए चेहरे हैं.. राममनोहर लोहिया ने सही कहा था ..., जिंदा कौमे ५ साल का इन्तजार नहीं करती है.

1. बिहार में ७२ सालों से जातिवाद की बहार है.., घोटालों की बयार है.., अफीमी नारों के आस से विकास का निकाश..,नीतीश की जातिवाद की कोशिश से अब भी बिहार कोशों मील दूर है..,

2. लालू जैसे लाल से लाखों नेता अपने को माई का लाल कहकर, भ्रष्टाचार के कटार से वोट बैंक के इंक (INK) से गरीबों के हाथ बदरंग है.., यही सत्ता का रंग है .., बिहार के साथ, देश में जातिवाद, भाषावाद, धर्मवाद, अलगाववाद से तिरंगा बदरंग है.

3. जहां.., बिहार में. शिक्षा से तक्षशिला की शीला से देश,विश्वगुरू कहलाता था.., आज जातिवाद की विष शीला से बिहार..,बीमार प्रदेश बन गया है.

4. अफीमी नारों व विदेश के कर्ज की हवा से तिरगा फड़फड़ाकर विकासके नाम से जनता को भरमाया जा रहा है..

5. अब मोदी के अच्छे दिनोंके द्वन्द का एक नए रंग से..,आपस में सीटों की लड़ाई है.., राजनीती दबंगता से जनता दबते जा रही है ...,

6. अब यह चुनावी तलवार से सत्ता के म्यानों की लड़ाई है..

7. महंगाई के भार से, जवानों के जवानी के कंधे थकते जा रहें हैं .., माफिया, इस गोरखधंधे से चंगे होते जा रहें है.., इनकी ५ साल के बच्चे राणा सांगा की औलादे लगती है .., और गरीब का पांच साल का बच्चा ५० साल का लगता है...

8. दिवंगत महान व्यंगकार लेखक श्री हरीशंकर परसाई के १० हजार से अधिक राजनितिक लेख आज भी जीवंत हैं. १९६० के दशक में.., उन्होंने बिहार के बारे में लिखा था, श्रीकृष्ण भगवान् मुझे मिले थे. उन्होंने, कहा मैं बिहार में चुनाव लडूंगा और लोगो को कहूँगा में श्रीकृष्ण भगवान् हूं , मैं आसानी से जीत जाऊंगा .., तब मैंने उनसे कहा आप जब तक यह नहीं कहोगे मैं श्रीकृष्ण यादवहूँ , तब तक आप चुनाव नहीं जीत सकोगे. भगवान् और मेरी शर्त लगी भगवान् श्री कृष्णा के विरोध में यादव नाम का उम्मीदवार खड़ा था और वह जीत गया और भगवान् श्री कृष्ण हार गए

9. जयप्रकाश नारायण ने तो कहा था, देश में सबसे अधिक खनिज होने के बावजूद बिहार गरीब क्यों.???, इस जीत का रहस्य तो..., खनिज से ज्यादा बिहार में नेताओं के लिए जातिवाद,धर्मवाद के उत्प्रेरक खनिज से.., बिहार भ्रष्टाचार के बहार से गाय भैसों व अन्य जानवरों के चारे से, मुस्लिम यादव के भाई- चारे नारे के आड़ में, २५ सालों तक चारे को डकारकर, प्रदेश के गरीबों को बहाकर.., एकछत्र राज्य करते रहे...,

10. दोस्तों.., देश का सबसे बड़ा जहर अशिक्षाहै.., जिसकी वजह से जनता गरीब होते जा रही है.., खोखले वादों के अफीमी नारों का शिकार हो जाती है.., और वोट बैंक की राजनीती करने वाले अपने को देश का मसीहा कहकर काले धन से अमीरतम बनकर अपने को अप्रतिम कहकर सत्ता को जातिवाद, भाषावाद,धर्मवाद व घुसपैठीयों के कोड़े से जनता को पीटकर,अधमरा कर, महंगाई बढ़ा कर कर्ज के गर्त से देश को डूबा रहें है.

11. इस लोकतंत्र में आप और हम वोट बैंक के मोहरे हैं.., ५साल के रोते हुए चेहरे हैं.. राममनोहर लोहिया ने सही कहा था ...,जिंदा कौमे ५ साल का इन्तजार नहीं करती है.

पिछली सरकार तो, ऐसी ख़बरों के सम्मान से सत्ता का अभिमान की से माल-माल होकर, खुले आम संविधान को चुनौती देकर लताड़ लगा रहें थी , हम संविधान के ५ साल के रक्षक है..., जनता ने हमें चुना है.., ऐसा कहकर देश को चुना लगा रहें थे.., अब यह रणनीती हमें ले डूबेगी..


महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री व शरद पवार के भतीजे ने एक लाख करोड़ का सिचाई घोटाला कर..., ताल ठोककर, महाराष्ट्र की जनता का उपहास कर कहा.., इस सूखे छेत्र में मेरे पेशाब करने से यदि बाढ़ आती है, तो..., मैं पेशाब करता हूँ .., खाद्यान घोटाले से १० लाख से अधिक से किसान आत्महत्या व इस योजना से धन डकारने की योजना को मीडिया से शरद पवार भी एक सामान्य घटना मान रही है...

पिछले महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में , राज ठाकरे के भाषावाद के युध्ह में मराठी माणूस (आदमी) अपनी ही कुलहाड़ी से अपाहिज हो गया है, इस भाषावाद के जहर से.., कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी केसत्ता पर काब्ज होने के बाद..., सुपर पावर के शरद पवार के नेतृत्व में महाराष्ट्र से देश तक में घोटाले की बौछार हो गयी.., मोहल्ले के नेता तो इस फव्वारे के पानी पीने से मला-माल हो गए. बाल ठाकरे भी बार-बार पुकार कर रहें थे बेटा आ अब लौट आओ , मेरी बोतल में शराब डालकर, सत्ता का नशा मत करों, नशा उतरने के बाद तुमको अपनी अवकाद मालूम पड़ेगी.., क्योंकि ४० साल पहले मैंने भी यह शराब पी थी, और ३० साल तक मेरी अवकाद नगरपालिका चुनाव जीतने तक ही थी ..., और भतीजे के इस रवैये से मरते समय तक उनकी आत्मा तड़फती रही .., और लोकसभा चुनाव में राज ठाकरे को जनता ने इतने जोर से पटका कि अब आनेवाले विधानसभा चुनाव से हाय-तौबा कर ली है... हे, हुडदंग., हुडदंग.., हुडदंग..., से धर्मवाद के जंग से वोट बैंक के सौदागर दंग और हडकंप ,

पिछले चुनाव में भाषावाद के जंग से सत्ता का रंग.., महाराष्ट्र में मोदी के विरोधी नेताओं को, लोकसभा चुनाव में, मोदी के चोट से जो घाव हो गए है..., अब इस घाव में असदुद्दीन ओवैसी की हरी मिर्च लगने के हडकंप से सतारूढ़ पार्टी को रोड में आने का खौफ सता रहा है..

Tuesday, 2 October 2018

नेहरू के १८ वर्षों के अय्याशी के सोच के शौच को मात्र १८ महीने में साफ़ कर व पाकिस्तान को धूल चटाकर ...., विश्व ने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को अब्राहम लिंकन के समक्ष खडा कर हिन्दुस्तान का लोहा माना कि देश की शक्ती "जवानों व किसानों" के बल से ही बढ़ती है ना की/कि विदेश से कर्ज लेकर ..., ब्याज देकर नेताओं की अय्याशी से जनता को ब्याज से प्याज के तरह आंसू निकाल कर, जो आज के परिपेक्ष्य में लोक तंत्र को लूट तंत्र का खेल खेला जा रहा है ..., इसे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने समाप्त कर दिया था इसी का तोड़ ..., “जय जवान –जय किसान “के नारे से निकल कर सभी भ्रष्ट नेता मजबूर होकर मजदूर हो गए थे ....



यह गांधी जयन्ती नहीं.., लाला बहादुर शास्त्री के जन्म दिवस से , जवानों में वीर रस से किसानों की क्रांती की गाथा है.., 



व देश के," जय जवान जय किसान" के प्रणेता से देश को एक नई लहर देने वाले : २अक्टूबर के जन्मदाता, १८ महीनों के शासन में देश के सही मानों में भाग्य विधाता की भूमिका के सफल प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के दिन को गांधी जयन्ती नहीं देश का "शौर्य दिवस" के रूप में स्कूल में नव विद्यार्थियो को यह पढ़ाया जाय...कि कैसे एक निम्न वर्ग के प्रधानमंत्री ने निम्न श्रेणी को अपना जीवन व आदर्श मानकर, सभी सरकारी सुविधा का अपने परिवार के लिए त्याग कर .., मेरे घर से मेरी देश की तस्वीर से ही देश में राष्ट्रवाद की लकीर खीची जा सकती है... यह सिद्ध किया


नेहरू के १८ वर्षों के अय्याशी के सोच के शौच को मात्र १८ महीने में साफ़ कर व पाकिस्तान को धूल चटाकर ...., विश्व ने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को अब्राहम लिंकन के समक्ष खडा कर हिन्दुस्तान का लोहा माना कि देश की शक्ती "जवानों व किसानों" के बल से ही बढ़ती है ना की/कि विदेश से कर्ज लेकर ..., ब्याज देकर नेताओं की अय्याशी से जनता को ब्याज से प्याज के तरह आंसू निकाल कर, जो आज के परिपेक्ष्य में लोक तंत्र को लूट तंत्र का खेल खेला जा रहा है ..., इसे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने समाप्त कर दिया था
इसी का तोड़ ..., “जय जवान जय किसान के नारे से निकल कर सभी भ्रष्ट नेता मजबूर होकर मजदूर हो गए थे ....

दोस्तों एक कटु सच्चाई ...!!!!, देशी राजनैतिक कलमुहों ने विदेशी ताकतों के साथ मिलकर इस महान अद्वितीय ७० साल के सत्ता परिवर्तन के इतिहास में जो आज भी सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री हैं.., की ह्त्या कर ..., “राजनैतिक कलमुहोंने देश का कल अन्धकारमय बना दिया,,

२ अक्टूबर के जन्मदाता, १८ महीनों के शासन में देश के सही मानों में भाग्य विधाता की भूमिका के सफल प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के दिन को गांधी जयन्ती नहीं देश का "शौर्य दिवस" के रूप में स्कूल में नव विद्यार्थियो को यह पढ़ाया जाय.. तो देश की फसल लह-लहराकर  तस्वीर बदल जायेगी

Monday, 1 October 2018

स्वच्छ भारत स्वचालित का नारा तब तक बेईमानी साबित होगी जब तक हिन्दुस्तान से जातिवाद साम्प्रयवाद का सूपड़ा साफ़ नहीं होगा.., बापू के चाल व चरित्र के चित्र के ढाल से देश का राजनैतिक चरित्र गर्त में जा रहा है..



२ अक्टूबर ...!!!!, बापू की जातिवाद के सिद्धांत को कायम कर , साम्प्रयवाद की छांव में, देश के तुकडे कर, १० लाख से अधिक हिन्दुस्तानियों की ह्त्या करवाकर, अहिंसावाद के छद्म बटवृक्ष में वह तो चन्दन की पेड़ में सांप की तरह लिपटा एक विषैला जहर समाज में फैला कर, वह बापू जिसकी नाथूराम गोडसे ने भले  ह्त्या कर देश को मुक्ती दिला दी थी.

लेकिन आज भी ७२ सालों बाद सत्ता परिवर्तन को आजादी कह, देश जातिवाद के कुरूप रूप से वोट बैंक में परिवर्तित.., व आरक्षण के ताले से देश की  तरक्की  बंद हो चुकी है.., देश की प्रतिभा विदेशों  में पलायन कर रही है...

स्वच्छ भारत स्वचालित का नारा तब तक  बेईमानी साबित होगी जब तक हिन्दुस्तान से जातिवाद साम्प्रयवाद का सूपड़ा साफ़ नहीं होगा.., बापू के चाल व चरित्र के चित्र के ढाल से देश का राजनैतिक चरित्र गर्त में जा रहा है..