Tuesday, 7 March 2017

“महिला दिवस” या महल में रहने वालों द्वारा “एक दिवस” से महिलाओं का गुणगान.., बखान.., या महिला को अबला कहने वाले इस दिन महिलाओं के नाम पर तबला से ढोल पीटने का खेल है ...



जरूर पढ़ें .., “महिला दिवसया महल में रहने वालों द्वारा एक दिवससे महिलाओं का गुणगान.., बखान.., या महिला को अबला कहने वाले इस दिन महिलाओं के नाम पर तबला से ढोल पीटने का खेल है ... (Repost Fb and website March 8, 2016)

इस महिला दिवस के पूर्व सुप्रीम कोर्ट की महाराष्ट्र सरकार को फटकार.., हमारी शर्तों पर खोलो महाराष्ट्र में डांस बार.., नृत्य के नृत्य कर्म से पुरूषों को बहलाने की आड़ से देश को नारी व्यापार के नाम पर डांस बार के आहारनाम के यूनियन द्वारा नारी के देह को आहार के नाम से पिछले बार ७५ हजार महिलाऐं मुक्त होकर १५ वर्षों में स्वरोजगार से स्वलाभित होकर स्वलामबित हो गई , याद रहें बियर बार के धन्ना सेठों ने महिलाओं को हुस्न का मोहरा बनाकर, शराब व डांस बार की आड़ में  लाखों युवाओं के घर बार को उजाड़ दिया था ..,


८ मार्च २०१५ की फेस बुक व वेब स्थल की पोस्ट महिला दिवस - देश की दो तस्वीरों से, हिला देश ,

१. पहली.., भांड मीडिया ने जेल में बलात्कारी को जज बनाकर उसके बयान को प्रस्तुती स्वरुप बनाकर, निर्भयता के TRP से मालामाल.., पहले तो हमारे देश को नागों की पूजा व दूध पिलाने वाला पाषण युग का देशबताकार.. हमें गयी गुज़री कौम से नवाजतेरहे.., और हमारे सत्यजीत रे से अन्य फिल्म निर्माताओं ने इस आग में घी डालकर अपने व्यक्तीत्व को चमकाकर, इसे जय होफिल्म से अंतराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त की.., ऑसकर फिल्म की रेस में दौड़ते रहे.

२. दूसरी..., देश को दीमक की तरह खोखला करने वाली हमारी क़ानून शाही द्वारा देश के बलात्कार व अन्य गिरफ्तार अपराधियों का जेल में सत्कार, नागालैंड के दीमापुर निवासियों ने कोबरा नाग बनकर..., लुंज पुंज क़ानून, जो जनता को ढेंगा दिखा रहें थे इन दीमकों को चट- कर देश में मीडिया-माफिया-मानवाधिकार..., जो इस मावाके खेल पर पर ६८ सालों से अपना अधिकार मानता था.., उसे जनता ने देश का धिक्कारबना कर, धुल चटाकर.., एक नारा दे दिया है..., फैसले में फासला मत बढ़ाओ , जनता पर जुल्म मत ढहाओ.., सावधान...!!!, अब जनता आ रही है.. न्याय की रस्सी लेकर...
महिला दिवस.,.नारी..,तुम्हारे लिए क्या मिला, दिवस.., तुम तो अभी भी हो बेबस...
मर्दानी ..., अब भरवाओं.., मर्दों से पानी...
राजनीती से समाज ने तुम्हारी पवित्रता को पतितता से, बेड रूम (BED ROOM-शयनयान) की वस्तु बनाकर, भष्टाचार की ऊंची उड़ान भरी है और देश का बेड-रूप बना दिया है....

३. नारी तुम सब पर भारी..., अब अपने मर्दों (सरपंच से नेता तक ) से कहों..., अब बेड रूम में तुम्हारे प्रपंच का खेल नहीं चलेगा..., भ्रष्टाचार के प्रपंच की पतितता से अब देश में नारी की कुरूपता का व्यव साय नहीं चलेगा

आओं.., अपने मर्दों से कहों.., राजनीती की बातें BED-ROOM में नहीं, घर के DRAWING –रूम (बैठक कमरे) में हो..., ताकि, मैं देश की एक नई तस्वीर बना सकूं...
अब तक तो.., देश के मर्द सत्ता के मद में देश का मधु पी रहें थे .....

४. आओं..., मर्दों से कहो..., देश की महिलाओं को जगाकर कहो.., अब, हम तुम्हारी बैसाखी नहीं..., बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं..., अब हमारे संस्कारों की सम्मानता से.., हम देश के हर नागरिकों को समान प्यार से, उनके जीवन की प्रेरणा को और उज्जवलित करेंगें...


५. नारी..., तेरा प्यार दिल के आँसुओ से भरा रहता है, तुम्हारा दिल तो वात्सलय से 24 घंटे धडकता.. है... हर दु:ख पहुचाने वाले पति से बच्चे हर सख्श तक को आप माफ कर देती हो.. तकि आप की आँसू से वे अपने गलती का अहसास समझ कर प्रायश्चित (सुधर सके) कर सके,

६. आप तो माँ की रूप में , सौ बार अपने आँसुओ से मौका देती है....माँ.., तेरे आँसु सागर से भी गहरे है. लेकिन तेरे सागर के आँसु तो लोगो को जीवन मे कैसे तैरना है,वह सिखाती है...आज तक तेरे आँसु के सागर कोई भी डूबा नही है...क्यो कि इसमे वात्सलय का नमक है...

आपके खून में ही तो देश का वात्सल्य , अभिमान व देश की हरियाली छिपी है..., तुम आरक्षण की वस्तु नहीं देश के संरक्षण की धारा हो...

७. हमारे समाज के पिस्सुओं ने देश की बच्चियों से नारी को पतितता से वेश्यावृती के धन से अब बलात्कार की हुंकार भर कह रहें हैं..., युवाओं का यह है अधिकार.., है...
नारी.., समाज के पिस्सुओं ने देहव्यापार में धकेले ढकेले कर..., तुम्हारी पतितता में भी पवित्रता है..,
नारी.., इंसानों में सर्वोत्तम तुम ही और केवल तुम ही हो...


वेश्या पतिता नहीं होती, पतन को रोकती है /
पतित जन की गन्दगी , अपने ह्रदय में सोखती है/
जो विषैलापन लिए हैं घूमते नरपशु जगत में ,
उसे वातावरण में वह फैलने से रोकती है

यही तो गंगा रही कर , पापियों के पाप धोती ,
वह सहस्रों वर्ष से , बस बह रही है कलुष ढोती,
शास्त्र कहते हैं कि गंगा मोक्षप्रद है, पावनी है ,
किसलिए फिर और कैसे वेश्या ही पतित होती ?

मानता हूँ , वेश्या निज तन गमन का मूल्य लेती ,
किन्तु सोचो कौन सा व्यापार उनका ,कौन खेती ?
और यह भी , कौन सी उनकी भला मजबूरियां हैं ,
विवश यदि होती न, तो तन बेचती क्यों दंश लेती ?

मानता यह भी कि वेश्यावृत्ति , पापाचार है यह ,
किन्तु रोटी है ये उनकी , पेट हित व्यापार है यह ,
देह सुख लेते जो उनसे, वही उनको कोसते भी,
और फिर दुत्कार सामाजिक भी , अत्याचार है यह /
गौर से देखो , बनाते कौन उनको वेश्याएं ,
और वे हैं कौन, जो इस वृत्ति को खुद पोषते हैं ?
पतित तो वे हैं , जो रातों के अंधेरों में वहां जा -
देह सुख भी भोगते हैं , और फिर खुद कोसते हैं . 

  

Friday, 3 March 2017

यदि JNU व DU का नाम बदलकर वीर सावरकर विश्व विद्यालय रख दिया जाय तो देश में पिछले बेंच के छात्र भी वीर सावरकर की राष्ट्रवादी विचारधारा से हर घर से देश में लाखों डॉक्टर अब्दुल कलाम पैदा होंगे.., जिन्होंने ही वीर सावरकर के सिद्धांत “शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती है” के विचारधारा से देश के मिशाईल मेन बनकर देश को एक गौरव प्रदान किया.



यदि JNU व DU का नाम बदलकर वीर सावरकर विश्व विद्यालय रख दिया जाय तो देश में पिछले बेंच के छात्र भी वीर सावरकर की राष्ट्रवादी विचारधारा से हर घर से देश में लाखों डॉक्टर अब्दुल कलाम पैदा होंगे.., जिन्होंने ही वीर सावरकर के  सिद्धांत  शक्ती ही शक्ती का सम्मान करती हैके विचारधारा से देश के मिशाईल मेन बनकर देश को एक गौरव प्रदान किया.



राष्ट्रवादी विचारधारा से देश की धरती सोना उगलने लगेगी .., चंद दिनों में देश सोने की चिड़िया से विश्व गुरू बन जाएगा.

पिछले २ सालों  से एक नए  बखेड़ों से देशद्रोह के खुले नारों से अपने को प्रबुद्ध वर्ग मानने वाले देश को अपनी विचारों की डोरी से देश को कठपुतली की तरह से देश को  ७० साल के लोकतंत्र को गुमराह किया है. आज की जजशाही भी मूड बनकर आँखें मूँद कर उनके कलम की स्याही भी सूख गई है..,

इसमें अवार्ड वापसी का तड़का डालकर बुद्धिजीवीयों के  पथ भ्रष्ट से देशवासियों को गुमराह करने की मुख्य भूमिका निभाई है
 
क्या JNU...!!!, दिवंगत राष्ट्रपति डॉक्टर अब्दुल कलाम के राष्ट्रवादी रास्ते चलेगा, या...!!!, आहिस्ते आहिस्ते इस विरोध से .., राष्ट्रवाद की नैया डूबोकर.., देश की बर्बादी करने वाले मुट्ठी भर लोगों के भेट चढ़वाने के चंदे के धंधे से , देश को चकनाचूर के अपने सपने देखने वालों को मीडिया जो उन्हें अपने कंधे पर बिठाकर, अपने शरीर की लम्बाई बढाकर.., इस विश्व गुरू देश की सोने की चिड़िया के पंख कतरकर.., इसके मांस से अपना पेट भरने के खवाब से देश के टुकड़े कर आबाद होने के भ्रम से JNU की देशद्रोही धारा को लाजवाब कहते रहेगी,,!!

कन्हैया अब दुर्योधन बन, देश को दुर्दाशन के चक्र से कौरवी सेना का नेतृत्व कर , देश के मीडिया से प्रिंट मीडिया भी गांधारी व धृतराष्ट बनकर अपनी आँखों में पट्टी बांधकर , हमारे राष्ट्र को घृणता बताकर , राष्ट्र की जनता को दिखाकर ..., अर्जुन मोदी को, अब अभिमन्यु समझकर इस चक्रव्यूह में घेरने की सोच में विश्व के सैकड़ों देशों को भीष्म पितामाह बनाकर .., इस कृत्य से आगामी चुनावों में विपक्षियों के अपने ६० सालों के शासन से गरीबों के बालों में जन्में जूं को, अब .., अपने सैलून में गरीबों को गंजा कर, ऊपर सर व नंगे पाँव से .., गरीबों को सर से पांव तक नंगा कह ...दुनिया में हमारे देश के देशद्रोह को देश का सम्मान कह.., होड़ की दौड़ से .., JNU व DU की आड़ में, नए नारों के सुरा-पान के नशे से अब मदहोश होते ही जा रहें हैं. TRP की हौड की होर्डिंग है.

अपने को पहिले से ही दिल्ली का भीष्म पितामाह कहनेवाला केजरीवाल ने तो अपनी आतंरिक रिपोर्ट बनाकर, अदालत की अवहेलना कर , JNU के इस प्रकरण को बिना कारण बताये ही क्लीन चिट देकर , सत्ता का चाट खाने में लगा है..., अभी पकिस्तान के साहित्य एकादमी उत्सव का भी निमंत्रण आया है.., केजरीवाल भी पाकिस्तान जाने के लिए अति आतुर है.., जिनके उत्तर को पाकिस्तान भी स्वयंहित से भुनाकर एक नया उत्सव मनायेगा..
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२०१४ के लोकसभा चुनाव की ANTI –MODI के पुन: प्रचार से बुरी तरह हारकर , विरोधी दल ५ साल के लिए निर्वासित होकर, अब, आगामी विधानसभा चुनावों में अब विपक्षी सियारों ने शेरी चोलों को पहनकर.., एक सुर में असुरी आवाज में BREAK –INDIA की चाल से मोदी को घेरने की चाल से चहलपहल कर जातिवाद , अलगाववाद,आतंकवाद से फुल रिचार्ज होने की तैयारी है .., अब JNU की यह बैटरी कितने दिनों में डिस्चार्ज होगी.., यह सेना के जवान, बाहरी दुश्मनों को व देशवासी, भीतरी दुश्मनों को सबक सिखायेंगे..

दोस्तों यह एक यथार्थ वेबस्थल है .., मेरा देश डूबा डॉट कॉम (One man Army) के डोमेन नाम की स्थापना २६ दिसम्बर २०११ को की गई जब देश भारत निर्माणके घोटालों के परतों में दबा था व सितम्बर २१०२ से अब तक ६०६  पोस्ट देशवासियों को राष्ट्रवाद से जगाने के लिए २५० से अधिक स्वंयनिर्मित कार्टून व १० से अधिक वीडियो एनीमेशन बनाएं है .., आज तक पैसे की चाह में इसका बाजारीकरण नहीं किया है.., इसमें सभी दलों को उनके कार्योंनुसार विरोध किया है ...

 इस वेबस्थल का उद्धेश्य देश के अच्छे दिन व माफियाओं के बुरे दिनलाने के संकल्प से ही बनाया... , जो की हर पार्टी में मौजूद है .., जब तक इसका सफाया नहीं होगा यह वेबस्थल अब तक न थका है न हारा है और न ही अपने सिद्धांतों से डिगेगा...

यह वेबस्थल जागो इंडिया की प्रसिध्ही से देश के सुबह की चाय ४२० रूपये किलों बेचने व देश का टाटा का नमक ३० रूपये बेचकर .., झूठी प्रसिद्दी से सिद्धी पाने के सिद्धांत का घोर विरोधी है .., जो दिखता है वह लिखता है.


दोस्तों.., देश का एक ही अशोक स्तंभ के वर्गाकार शेर है..., जय जवान जय किसान जय विज्ञान जिसे चलाने वाला चौथा स्तंभ राष्ट्रवादी हो तो, राष्ट्र भी बल का दंभ दुनिया की कोई भी ताकत किसी भी राष्ट्र को उन्नत बनाने से नहीं रोक सकती..