Thursday, 12 March 2015



१. कहते हैं, जहां अपराध बढवाना हो... तो, वहां पुलिस थाना खुलवा दो..., 
अपराधों के संरक्षण में माफियाओं के गुनाहों का इल्जाम में, जनता को फसां कर उसकी गाढ़ी कमाई पर हाथ मारों, जनता को कानूनी जाल में उलझाकर घर बार उजाड़ दो...
२. आज हर देशवासी पुलिस थाने में शिकायत करने पर, वहां उसे ऐसा लगता है कि वह ही मुजरिम है..,,घंटों तक इन्तजार, पुलिस थाने में पुलिसिया व्यवहार से वह चकित रहता है ..., जनता की सेवा करने के लिए नियुक्त अधिकारी भी अपने काम का अहसान दिखाता है..
३. युवाओं में जोश का आपा दिखाकर.., युवा विकास का सपना दिखाकर, वोट पाकर, जनता पर चोट कर, अब मुख्य मंत्री ने भ्रष्टाचार एक सुनहरा सपना के ख्वाब में , देवेन्द्र फडनवीस ...., विपक्षीयों पर हौव्वा बनने की बजाए, फडनवीस, बीस से चार सौ बीस बनकर , भ्रष्टाचार से मंत्रालय व सचिवालय को इंद्र सभा बना रहें हैं....
४. महाप्रदेश की महामारी,, हफ्ते से हांफता, भ्रष्टाचार के कोड़े से लहूलूहान, पानसरे के पान में माफियाओं की सुपारी, स्वाइन फ्लू के फ्लो से भ्रष्टाचारियो के फ्लोर में चमक, यही है सत्ता का दीमक..., टोल चुंगी कर माफ़ करने के वादे..,, को पूरा न करने के विरोध करने पर माकपा के वरिष्ठ नेता की ह्त्या होने पर.., मंत्रालय की सुराख (खिड़की) से हत्यारों का सुराग देने वाले को ५ लाख रूपये के इनाम का आलाप.., अब चमका रहें है अपने सत्ता का चिराग..
५. महाराष्ट्र के देव, मुख्यमंत्री इन्द्र की इन्द्र सभा में म्याऊं – म्याऊं के बिल्ली डांस से चूहों द्वारा २२ करोड़ के नशे का व्यापार से मंत्रालय बना मूत्रालय.. सचिवालय में काम ठप्प कर, अब, शौचालय बना दिया है..
६. मुम्बई पुलिस में वाहनों में शराब की बोतल व ड्रग्स ले जाते हुए पुलिस कर्मचारियों को दबोचने के बावजूद फिर से बहाली हो जाती है..., और तो और कई पुलिस अधिकारी “ड्रग्स” बेचते भी पकड़े गए हैं
७. रेव पार्टीयाँ भी पुलिस की देखरेख में आयोजित व कई दफा पुलिस अधिकारीयों द्वारा ड्रग्स की सप्लाई की घटनाए आने के बावजूद मामला रफा दफा हो गया है...
वही एम्बुलेंस में भी जो ड्रग्स ‘वाहन” का एक सुरक्षित माध्यम है.., ..जिसका काम लोगों को मौत से बचाना है
और वे मौत का सामन ले जाती है


८. . अब, कानून पास करने से पहले यह सोचना होगा कि कानून का पालन करने वाली एजेंसियों का हश्र इस समाज में क्या है? आपकी पुलिस का अपराधीकरण ऐसा है कि थानों में क्राइम अधिक और बाहर कम है। देश का कोई कानून नहीं है, जिसका इस्तेमाल पुलिस धन उगाही के लिए न कर रही हो। अपराधियों को संरक्षण देना पुलिस का मुख्य काम हो गया है। थाने अपराधियों की मैनुफैक्चरिंग की फैक्ट्री बन गए हैं। इसका सबसे अच्छा प्रमाण यह है कि पुलिस थानों से जो गांव जितने दूर-दराज हैं, वहां कोई अपराध नहीं है। जहां लोगों ने पुलिस की शक्ल भी नहीं देखी है, वहां घर में ताले नहीं लगाने पड़ते। वहां जघन्य अपराध नहीं होते या नगण्य होते हैं। जिस शहर में जितनी पुलिस है और उसके करीब जितने गांव-बस्तियां हैं, उनमें उतना ही अपराध है। जहां भी अपराध बढ़ाना हो वहां पुलिस थाना बना दीजिए तुरंत फैक्ट्री चालू हो जाएगी। इसलिए सबसे पहले पुलिस को सुधारें उसके बाद ही कानून सुधारिए। हमारी अदालतों का भी हाल यही है। वहां ज्यादातर वकील लोगों को नोच लेते हैं। अपराधी और जज का सीधा ताल्लुक होना चाहिए। न्याय के साथ जब तक वकीलों की दलाली और मोहताजी जुड़ी रहेगी, कुछ नहीं होगा। हमारी सरकार को डेढ़ सौ साल बनाई गई अदालती प्रक्रियाओं को बदलने की गरज नहीं है। अदालतों में जन भाषा का कोई स्थान नहीं है। अंग्रेजों के स्पेलिंग मिस्टेक को ठीक करने तक की हिम्मत सरकार में नहीं है। जब आपको सत्ता परिवर्तित हिन्दुस्तान (जिसे सरकार आजाद इंडिया कह कर झूम रही है?) में प्रशासन चलाने की तहजीब ही नहीं आई तो फिर कानून पर कानून बनाते जाइए, कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसे में यह सोचना होगा कि हर मर्ज की दवा कानून पास करना नहीं है। पहले कानून के रखवालों को उस लायक बनाना होगा। हमारी पुलिस और न्यायिक संस्थाएं दोनों ही जनतंत्र की अपेक्षाओं के लायक नहीं हैं। उसमें भारी सुधार की दरकार है। उसके बाद ही कोई कानूनी बदलाव पर सोचना चाहिए
९. बिहार में भी लालू राज में, जब जनता उनसे रोड न होने की फ़रियाद करती थी तो वे मजाकिया लहजे में कहते थे ..., तुन्हारे गांव तक तो रोड, मैं कल ही बनवा दूं..., इससे तुम्हारे लोगों को एक नुकसान होगा, पुलिस की गाड़ी रोज आकर , तुम्हे तंग करेगी...,, अभी तो तुम लोग सुखी हो...,
१०. दोस्तों.., १९४७ के गुलाम हिन्दुस्थान में जनता पुलिस के अत्याचार से इतनी पीड़ित नहीं थी जितनी आज है..
गुलामी के “ब्रांड” से जनता..., सुखी इंसान से पर्यावरण का सम्मान था
११. सत्ता परिवर्तन का , इंडिया, भ्रष्टाचार. माफिया, पुलिस क़ानूनशाही के गढजोड़ से, अब जनता लूट रही है.
१२. उत्तरप्रदेश में तो एक नये आविष्कार से नेताओं के हौसले की बुलंदी से, वोट बैंक से उतारूप्रदेश, लटकाऊ प्रदेश से चढ़ाऊ प्रदेश का उदभव कर, एक नए दौर की शुरूवात की..,
मुख्यमंत्री का आदेश, प्रदेश के युवकों करों सेक्स योगा, पुलिस के जवानों जेल में भ्रष्टाचार व बलात्कार के योग से बनाओं अपनी योग्यता...