Tuesday, 26 January 2016

“न जात पर न पात पर , मुहर लगाओ राष्ट्रवाद पर..,” नहीं तो.., यह, हमारे गणतंत्र दिवस/स्वतंत्रता दिवस व संविधान के प्रति बेईमानी है..... दोस्तों....बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है. संविधान में जितने क़ानून है, उससे ज्यादा छोटे मोटे घोटालों की गिनती करें तो वे कहीं ज्यादा है..., हमारे घोटाले तो संविधान से भी महान है ... अशोक स्तंभ बना... 90% देशवासियों के लिए शोक स्तंभ, 9% भार- रत तलुवे चाटुओं, अंग्रेजी संस्कृति को माननेवालों के लिए बना शौक स्तंभ, , 1% लोग, जो अपने को अंग्रेजों की औलादें समझने वालों के लिये बना , लूट भ्रष्टाचार के माफियाओं के शौक के साथ मौज मस्ती का आलम का स्तंभ..., जो आज की मीडिया को, अपनी जुठी रोटी देकर, पेट भरी मीडिया बनाकर, अपना प्रचार कर, अपने को देश का कर्णधार कहलवा रही हैं , और देश की खान, खदान, इमान, सत्ताधारियों की आड मे बेचकर , खरबपति से कही ज्यादा अमीर बनकर अपने को अर्थव्यवस्था का स्तंभ कहकर.... देश मे दंभ भर रहे है…..????? देश की संस्कृति के साथ, भाषा का लोप , इन भ्रष्टाचारी माफियाओं के लिए लूट का आगे का सरल लोभ है, ताकि देशवासियों अग्रेजी भाषा से अपनी गुलामी को सलाम करें ... आज 110 करोड जनता भी, 70 सालों से सत्ताधारियो के आस मे बैठी है कि उनके विकास द्वारा ही, देश का कल्याण होगा, देशवासियों अब यहा भ्रम छोडो ... राष्ट्रवाद की धारा मे आकर ही. हम 5 सालों मे 50 साल आगे बढेंगे... . विदेशी कर्ज से, देश के मर्ज को दूर करने का झॉसा देकर, इन सत्ताधारियो ने, देश मे महंगाई से गरीबी का कैंसर फैला दिया है हेनरी क्लिग्टन ने अपने विदेश मंत्री के कार्यकाल मे कहा था……, हम इलेक्ट्रोनिक व अन्य वस्तुये , चीन, ताईवान, कोरिया से खरीदते है, लेकिन हम दिमाग ”हिंदुस्थानियों’ का खरीदतें है... , हमारा ज्ञान, विज्ञान, विश्व के अमीर देशों मे पलायन कर, विदेशियों को उन्न्त बना रहा है क्योकि, देश मे हमारी प्रतिभाओं को सम्मान नही मिलता है..?? , नोबल पुरूस्कार विजेता चंद्रशेखर वेंकट रमन ने कहा था, कि “विदेशी वस्तुओं का आयात मतलब, हम अपनी मुर्खता खरीदतें है” , इसी का चीन ने अनुसरण कर विदेशी आयातित सामानों को और उन्न्त बनाकर, विदेशों मे बेचकर वह भारी सख्या मे विदेशी मुद्रा भंडार से लबालब है, ( ध्यान रहे... चीन हमारे से भारी मात्रा मे कच्चा लोहा आयात करता है ,व हमारे देश मे कुशल करीगरों द्वारा बनायी जाने वाली, वस्तुओं का, आधी किमत मे निर्यात कर, बेरोजगारी फैला रहा है) 1947 मे “सता परिवर्तन” को “आजादी का झॉसा देकर”, सभी, नये सत्ताधारियों ने, आज तक हमें, अलगाववाद, जातिवाद, भाषावाद की जंजीरों से बांधकर...., अफीमी नारों के चादर से, हमें सुला रखा है... आओ कसम खाये..., हम देश की माटी (खान खदान, इमान) बिकने नही देंगे.... नेताओं की आस से, आज देशवासी हताश है , आओं... देश के कैसर शब्द को सेंसर कर (प्रतिबंधित कर) 100 करोड से ज्यादा लोगों के मुठठी बल से, 24 घंटे योगदान कर... हम सब सनातनी खून से (जो, हर धर्म का जो खून है), देश के दहाड्ते शेर बनकर, एक सुनहरा हिंदुस्थान बनाये, वंदेमातरम (मातृभूमि की सेवा) व राष्ट्रवाद (पितृसेवा - मेहनत) से, एक वैभवशाली , गौरवतम, भव्य महानतम देश बनाये...


न जात पर न पात पर , मुहर लगाओ राष्ट्रवाद पर..,” नहीं तो.., यह, हमारे गणतंत्र दिवस/स्वतंत्रता दिवस व संविधान के प्रति बेईमानी है..... दोस्तों....बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है. संविधान में जितने क़ानून है, उससे ज्यादा छोटे मोटे घोटालों की गिनती करें तो वे कहीं ज्यादा है..., हमारे घोटाले तो संविधान से भी महान है ... 

अशोक स्तंभ बना... 90% देशवासियों के लिए शोक स्तंभ, 9% भार- रत तलुवे चाटुओं, अंग्रेजी संस्कृति को माननेवालों के लिए बना शौक स्तंभ, , 1% लोग, जो अपने को अंग्रेजों की औलादें समझने वालों के लिये बना , लूट भ्रष्टाचार के माफियाओं के शौक के साथ मौज मस्ती का आलम का स्तंभ..., जो आज की मीडिया को, अपनी जुठी रोटी देकर, पेट भरी मीडिया बनाकर, अपना प्रचार कर, अपने को देश का कर्णधार कहलवा रही हैं , और देश की खान , खदान, इमान, सत्ताधारियों की आड मे बेचकर , खरबपति से कही ज्यादा अमीर बनकर अपने को अर्थव्यवस्था का स्तंभ कहकर.... देश मे दंभ भर रहे है…..????? 

देश की संस्कृति  के साथ, भाषा का लोप , इन भ्रष्टाचारी माफियाओं के लिए लूट का आगे का सरल लोभ है, ताकि देशवासियों अग्रेजी भाषा से अपनी गुलामी को सलाम करें ... आज 110 करोड जनता भी, 70  सालों से सत्ताधारियो के आस मे बैठी है कि उनके विकास द्वारा ही, देश का कल्याण होगा, देशवासियों अब यहा भ्रम छोडो ... राष्ट्रवाद की धारा मे आकर ही. हम 5 सालों मे 50 साल आगे बढेंगे... .

विदेशी कर्ज से, देश के मर्ज को दूर करने का झॉसा देकर, इन सत्ताधारियो ने, देश मे महंगाई से गरीबी का कैंसर फैला दिया है

हेनरी क्लिग्टन ने अपने विदेश मंत्री के कार्यकाल मे कहा था……, हम इलेक्ट्रोनिक व अन्य वस्तुये , चीन, ताईवान, कोरिया से खरीदते है, लेकिन हम दिमाग हिंदुस्थानियोंका खरीदतें है... , हमारा ज्ञान, विज्ञान, विश्व के अमीर देशों मे पलायन कर, विदेशियों को उन्न्त बना रहा है क्योकि, देश मे हमारी प्रतिभाओं को सम्मान नही मिलता है..?? , 

नोबल पुरूस्कार विजेता चंद्रशेखर वेंकट रमन ने कहा था, कि विदेशी वस्तुओं का आयात मतलब, हम अपनी मुर्खता खरीदतें है” , इसी का चीन ने अनुसरण कर विदेशी आयातित सामानों को और उन्न्त बनाकर, विदेशों मे बेचकर वह भारी सख्या मे विदेशी मुद्रा भंडार से लबालब है, ( ध्यान रहे... चीन हमारे से भारी मात्रा मे कच्चा लोहा आयात करता है ,व हमारे देश मे कुशल करीगरों द्वारा बनायी जाने वाली, वस्तुओं का, आधी किमत मे निर्यात कर, बेरोजगारी फैला रहा है) 

1947
मे सता परिवर्तनको आजादी का झॉसा देकर”, सभी, नये सत्ताधारियों ने, आज तक हमें, अलगाववाद, जातिवाद, भाषावाद की जंजीरों से बांधकर...., अफीमी नारों के चादर से, हमें सुला रखा है... आओ कसम खाये..., हम देश की माटी (खान खदान, इमान) बिकने नही देंगे.... 

नेताओं की आस से, आज देशवासी हताश है , आओं... देश के कैसर शब्द को सेंसर कर (प्रतिबंधित कर) 100 करोड से ज्यादा लोगों के मुठठी बल से, 24 घंटे योगदान कर... हम सब सनातनी खून से (जो, हर धर्म का जो खून है), देश के दहाड्ते शेर बनकर, एक सुनहरा हिंदुस्थान बनाये, वंदेमातरम (मातृभूमि की सेवा) व राष्ट्रवाद (पितृसेवा - मेहनत) से, एक वैभवशाली , गौरवतम, भव्य महानतम देश बनाये... 

Saturday, 23 January 2016

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की फाइल के दफ़न राज से..., क्या...!!!, अब गांधी की गंदी राजनीती व जवाहर के जहर का राज खुलेगा...


नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की फाइल के  दफ़न राज से...,
क्या...!!!, अब गांधी की गंदी राजनीती व जवाहर के जहर का राज खुलेगा...

क्या युवकों में सुभाष चन्द्र बोस अंग्रेजों के इंडियन सिविल सर्विस की में शिक्षा में ४ था स्थान पाने  व  धनाड्य परिवार होने के बावजूद देश के राष्ट्रवादी विचारों से अंग्रेजों के तलवे चटाने के बजाय, हिन्दुस्तान को   गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के लिए , अपना जीवन आज के सत्ताखोरों ने गुमनामी में इअख रख देश का असली गौरवशाली अतीत जानकार एक नए राष्ट्रवाद का संचार होगा...

क्या आज के ज्यादातर IAS , IPS अधिकारी, नौकरशाही .., अपने विवेक से काम न लेकर  मंत्री के तलुवे चाटकर..,अब भी देश को डूबोते रहेंगें   

१९३८ में कांग्रेसियों द्वारा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस  को अध्यक्ष चुनने पर गांधी ने कहा था यह सीतारामैय्या की हार नहीं, मेरी हार है.., और अड़ंगे डालकर उनसे १९३९ इस्तीफा ले लिया  



१. एक तो नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आजाद हिंद फौज से  २०० किलों, सोना चोरी .., ऊपर से भारतरत्न से अपने को महामंडित कर सीना जोरी ..., आज इतिहास में अपने अय्याशी, सत्य के प्रयोग से आजादी की एक झूंठे महिमा से चाचा , महात्मा के कर्मों को, आज तक देश की पीढी को बताया गया कि आजादी बिना खडग ढाल के मिली है..., एक झूठे नारे से राष्ट्रवादकी खाल निकाल कर, आज तक देश को गरीबी, भूखमरी व विदेशी हाथों द्वारा देशवाशियों को लहूलुहान कर दिया है..., आज इन पुतलों की आड़ में शहर से देश लाखों संस्थान अपने नाम कर, आज तक, देशवासियों को आजादी के भ्रम में रखा गया है... (२६ फरवरी २०१६ को  ..., वीर सावरकर की पुण्य  तिथी  दिवस पर )

२. नेताजीसुभाषचंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के लिए जो 200 किलो सोना और कैश जुटाया था, उसे उनके लापता होने के बाद लूट लिया गया था. तत्कालीन नेहरू सरकार को भी इसकी जानकारी थी. लेकिन उसका पता लगाने की कोशिश नहीं की गई. बल्कि उनके घर की जासूसी कर.., अपनी सत्ता को और मजबूत बनाया 

एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इसके मुताबिक सरकार नहीं चाहती थी कि इस जांच के बहाने नेताजी और आजाद हिंद फौज की यादें ताजा हों. इसके बाद कांग्रेस फिर निशाने पर गई है.

रिपोर्ट आने के बाद नेताजी के परिवार ने मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है, ‘देशवासियों ने आजादी के लिए अपने जेवर और कैश दान किए थे. यह देश की संपत्ति थी और इसकी जांच होनी चाहिए कि इसे किसने लूटा।उधर, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, ‘यह उस वक्त की बात है, जब विश्व युद्ध चल रहा था। ऐसे में खजाने को सुरक्षित रखना या उसके चोरी होने पर सबूत जुटाना आसान काम नहीं था। 

३. वीर सावरकर के चेले. शहीद भगतसिंग ने तो अपनी जवानी देश के लिए कुर्बान कर दी.., लेकिन क्रांती के महायोद्धा ने अपने पूरी जवानी..., भारत माता की बेड़ियां को तोड़ने में खपा दी..,

४. सत्ता परिवर्तन के बाद वीर सावरकरका वर्चस्व ख़त्म करने के लिए, नाथूराम ह्त्या का आरोप लगाकर वीर सावेकर को लाला किला में कैदकर सावरकर को ताबूत में आख़री किल ठोकने का प्रयास किया.., उसमें भी सफलता के बजाय जजकी लताड़ मिली. 

५. नेहरु ने लियाकत समझौता का नाटक खेला , जब विभाजन के समय कांग्रेस सरकार ने बार बार आश्वासन दिया था कि वह पाकिस्तान में पीछे रह जाने वाले हिंदुओं के मानव अधिकारों के रक्षा के लिए उचित कदम उठाएगी परन्तु वह अपने इस गंभीर वचनबद्धता को नहीं निभा पाई. तानाशाह नेहरु ने पूर्वी पकिस्तान के हिंदुओं और बौद्धों का भाग्य निर्माण निर्णय अप्रैल ८ १९५० को नेहरु लियाकत समझौते के द्वारा कर दिया उसके अनुसार को बंगाली हिंदू शरणार्थी धर्मांध मुसलमानों के क्रूर अत्याचारों से बचने के लिए भारत में भाग कर आये थे, बलात वापिस पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली मुसलमान कसाई हत्यारों के पंजो में सौप दिए गए

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६. लियाकत अली के तुष्टिकरण के विरोध कने के लिए लिए वीर सावरकर गिरफ्तार कर लिया, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को पंडित नेहरु द्वारा दिल्ली आमंत्रित किया गया तो छद्म धर्मनिरपेक्षतावादी कृतघ्न हिन्दुस्थान सरकार ने नेहरु के सिंहासन के तले ,स्वातंत्र वीर सावरकर को ४ अप्रैल १९५० के दिन सुरक्षात्मक नजरबंदी क़ानून के अन्दर गिरफ्तार कर लिया और बेलगाँव जिला कारावास में कैद कर दिया.पंडित नेहरु की जिन्होंने यह कुकृत्य लियाकत अली खान की मक्खनबाजी के लिए किया, लगभग समस्त भारतीय समाचार पत्रो ने इसकी तीव्र निंदा की. लेकिन नेहरू के कांग्रेसी अंध भक्तों ने कोई प्रतिक्रया नहीं की 

७. १९५४ में वीर सावरकरने खुले आम चेतावनी दी कि चीन हमसे युद्ध करेगा.., और हमारी सेनाओ को मजबूत बनाओ.., लेकिन जवाहरलाल नेहेरू ने युद्ध कारखानों में हथियार बनाने के बजाय.., चूड़ी बनाने का उद्योग शुरू किया.., भारतमाता का अंग भंग करने से पहिले ही आराम हरामके सत्ता की भांग के नारे से भारत रत्नका स्वाधिकार प्राप्त कर लिया.. 

८. वीर सावरकर की भविश्यवाणी सत्य होने पर, चीन से युद्ध में मिली हार से नेहरू बौखालागाए थे और वीर सावरकरको अपने आवास में कैद कर..., उनकी चिट्ठीयों की जांच की जाती थी कि कही एक सुराग बनाकर, इस युद्ध का दोष वीर सावरकर पर मढ़ दिया जाए...., इसमें भी नेहरू को सफलता नहीं मिली ..

१०. नेहरू ने गांधी की पाकिस्तान को ५५ करोड़ रूपये के उपहार की गंदी राजनीति से भी आगे बढ़कर , गांधी को महात्मा व बापू बनाकर , अपनी १.शांति,२ पंचशील, ३. अनाक्रमण ४. निष्पक्षता की भ्रामिक नीति...., ५. हिन्दुओ का धर्मान्तरण, ६.तुष्टीकरण ७. विदेशी भाषा के शतरंगी चाल के शतरंज को बनाया सत्ता के ढाल से हिन्दुस्थान के रंज का सप्तरंगी इन्द्रधनुष के निशाने, से देश के काश्मीर के टुकडे व चीन को दिया उपहार से हुआ, भारत रत्न का सत्कार 

११. एक विडबन्ना , जो बांग्लादेश के तीन-बीघासमर्पण कर दिया, जब 
१९५८ के नेहरु-नून पैक्ट (समझौते) के अनुसार अंगारपोटा और दाहग्राम क्षेत्र का १७ वर्ग मिल क्षेत्रफल जो चारो ओर से भारत से घिरा था ,हिन्दुस्थान को दिया जाने वाला था .हिन्दुस्थान की कांग्रेसी सरकार ने उस समय क्षेत्र की मांग करने के स्थान पर १९५२ में अंगारपोटा तथा दाहग्राम के शासन प्रबंध और नियंत्रण के लिए बांग्लादेश को ३ बीघा क्षेत्र ९९९ वर्ष के पट्टे पर दे दिया.

१२. लेकिन, अब तो वोट बैंक के तुष्टीकरण की भी कांग्रेस ने सभी हदें पार कर दी , जब केरल में लघु पाकिस्तान, मुस्लिम लीग की मांग पर केरल की कम्युनिस्ट सरकार ने तीन जिलो, त्रिचूर पालघाट और कालीकट को कांट छांट कर एक नया मुस्लिम बहुल जिला मालापुरम बना दिया .इस प्रकार केरल में एक लघु पाकिस्तान बन गया. केंद्रीय सरकार ने केरल सरकार के विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाया..
दोस्तों..., अब अपनी राय बताए..., क्या देश का असली देशद्रोही कौन था...क्रांतीकारी या सत्ता के अय्यासकार.., जिन्होंने देश के शिल्पकार कह.., देश की नीव व शिल्प को तोड़ने का कार्य किया है..

Friday, 22 January 2016

आज तक हमारे 90% देश्वासियो को यह पता नही है, सुभाष चन्द्र बोस, चद्रशेखर आजाद व सरदार भगत सिंग मे क्राति का जन्म वीर सावरकर द्वारा हुआ..?




वीर सावरकर ने समुंद्री विशाल सागर में कूद लगाकर डूबते भारत के गर्व से भारतमाता का सिर ऊंचा कर गुलामी की बेड़ियों के जकड़न की दास्तान को अवगत कराकर विश्व में तहलका मचाकर अंग्रेजों के रोंगटें खड़े कर दिए थे
यह कार्टून सागर का राजावीर सावरकर के प्रबल समर्थक श्री बालासाहेब ठाकरे  व स्वर कोकिला लता मंगेशकर को समर्पित ....

UPA-१ व २  के व अपने को महाराष्ट्र के शिल्पकार कहने वाले शरद पवार ने अपनी पार्टी का नाम राष्ट्रवादी रखकर इस महान राष्ट्रवादी वीर..,वीर..., परमवीर सावरकर को समुन्द्र में डूबा कर देश के राष्ट्रवाद को तिलांजली देकर देश को कर्ज के  पतन व किसान आत्महत्या को प्रोत्साहित   दिया
दोस्तों बड़े दुःख के साथ लिखना  पढ़ रहा है कि मुम्बई के  वीरे  सावरकर संस्था का प्रतिनीधि मंडल ने हाल ही में केन्द्रीय मन्त्री व नरेन्द्र मोदी के चाहते नितिन गडकरी से मिलकर मांग की थी कि मुंबई का BOMBAY PORT TRUST (BPT) का नाम २६ फरवरी २०१६ को वीर सावरकर के नाम से अलंकृत किया जाए.., इस सुझाव पर प्रतिनीधि मंडल को  हड़का कर कहा यह संभव नहीं है ..    
(२६ फरवरी २०१६ को वीरवीर ही नहीं परमवीर सावरकर का चित्र उनकी ५० वी पूण्य तिथी पर देश के नोटों पर मुद्रित कर वीर सावरकर के सहित्य व जीवन की किर्ती से देश की नई पढ़ी परिचित हो जाये तो देश में एक राष्ट्रवादी क्रांती की शुरूवात हो जायेगी...देश में लाखों ए.पी.जे अब्दुल कलाम पैदा होंगें.- भाग 4 
क्या आज भी सावरकर देशद्रोहियों की प्रथम कतार में हैं...,)
याद रहे... इस वर्ली सी लिंक का मंगलवार, 30 जून, 2009 को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी इसका उदघाटन किया .
इसके तुरन्त बादमहाराष्ट्र केमहाघोटाले के अन्वेषक व किसान ह्त्या के प्रेरक ्रिकेट मंत्री शरद पवार ने इसका अनुमोदन राजीव गांधी के नाम कर इस सेतु का नाम रखवा कर एक विश्व के क्रांती जनकएक अतुल्य राष्ट्रवादीसागर के राजावीर सावरकर जैसे मराठी मानुष की एक छद्म राष्ट्रवादी की खाल पहिने दूसरे मराठी मानुष ने समुन्द्र में फेंक दिया ..और यह हमारे देश का सबसे बड़ा काला दिन” साबित हुआ... 
इसके प्रबल विरोध करते हुए श्री बालासाहेब ठाकरे ने इन सत्ताखोरों को कड़ी फटकार लगाई...एह समुद्र सम्राट का घोर अपमान की सजा तुम्हें जरूर मिलेगीवह आज सार्थक हो गई है... 
आज भी स्वर साम्राज्ञी कोकिला भारतरत्न लता मगेशकर भी गला फाडकर चिल्ला रही हैवीर सावरकर को कोइ सम्मान नही मिला हैउनके वीरता की इस देश मे दुर्गति हुई है ………..
जाने सावरकर के छोटे से इतिहास के बारे में...
अब इस दुनिया ऐसा वीर सावरकर दुबारा पैदा नही होगादेश के इतिहास को अन्धेर मे रखकर यो कहे देश के इतिहास को दफन कर दिया है….?????????
गांधी की गंदी राजनीती सेशांती बनी वोट बैंक की क्रांती..राष्ट्रवाद को बताया राष्ट्र की भ्रान्ती… देश को खंडित करने की बनी नीती ……, 
वीर सावरकर को जिसने नही पहचाना उसने हिन्दुस्थान को नही पहचाना? 
१. सावरकर जो वीर ही नही परमवीर थेइस धरती पर चाणक्य के बाद दुरदर्शी क्रातिकारी वीर सावरकर ही थे ,जिनकी दहाड् से अग्रजो का साम्राज्य हिल उठता थामै तो उन्हे देश के क्रांति का चाणक्य मानता हूँ,? उनकी भूमिका अग्रेजो के समय वीर शिवाजी महाराज व सत्ता परिवर्तने के बाद वीर महाराणा प्रताप की थीआज तक हमारे 90% देश्वासियो को यह पता नही हैसुभाष चन्द्र बोसचद्रशेखर आजाद व सरदार भगत सिंग मे क्राति का जन्म वीर सावरकर द्वारा हुआ..?

२. यह वीर सावरकर की ही देंन है कि अमृतसर व कलकत्ता पकिस्तान में जाने से बच गया जो सिद्धपुरूष हुए, भविष्य दर्शन सिद्दी उनमे थी , जो सावरकर द्वारा कही है 40 से अधिक भविष्यवाणी आज सार्थक हुई है देश में राष्ट्रवाद की बर्बादी को देखकर उन्होंने नेहरू को चुनौती देते हुए कहा मैं सत्तालोलुप नहीं हूं, मुझे दो साल का शासन दो, मैं हिन्दुस्थान को गौरवशाली बनाऊंगा ..

३. आजाद हिद फौज का जन्म वीर सावरकर की प्रेरणा द्वारा ही हुआ, सुभाष चन्द्र बोस उनसे आशीर्वाद लेने गये थे कि मेरी मजिल को सफलता मिले? याद रहे 1947 मे आजाद हिद फौज की अहम भूमिका थी ?

४. चन्द्रशेखर वेकट रमण को वर्ष 1930 मे जब नोबल पुरस्कार मिला. जब, वे मंच पर पुरस्कार ग्रहण करने पर गये तो, तो उन्होने कहा मुझे बढा दु:ख है कि यह पुरस्कार एक गुलाम देश के नागरिक को मिल रहा है, मुझे गर्व होता यदि मै आजाद देश का नागरिक होता. उनके विचार सुनकर चन्द्रशेखर वेकट रमण जब वीर सावरकर को बैगलोर में मिले , तब चन्द्रशेखर वेकट रमण से 3-4 घटे राष्ट्रवाद के बारे मे विस्तार से चर्चा कि तो उन्होने वीर सावरकर के बारे मे कहा यह देश का अनमोल हिरा जिसके चमक के सामने कोहिनूर हीरा भी फीका है?”. याद रहें, महान भौतिकशास्त्री वैज्ञानिक चन्द्रशेखर वेकट रमण को 1954 मे भारत रत्न मिला था

५. जब वीर सावरकर के अंडमान जेल मे अमानवीय अत्याचार के वजह से जेलर बारी को काला पानी से ब्रिटिश के राजधानी मे तबादला कर दिया था.. . (याद रहे, जेलर बारी ने अंग्रेज प्रशासकों को बताया था कि वीर सावरकर को प्रताडना व कडी सजा के बावजूद वे टस से मस होने वालो मे से नही है, वह फौलादी दिल वाला इंसान है और उनके {वीर सावरकर} जेल के कार्यकालमे 90% से ज्यादा कैदी साक्षर हो गये हैं, – इनमे से 60% से ज्यादा मुसलिम कैदी थे
अंडमान जेल में कडी ठंड मे , वीर सावरकर को कंबल नही दिया जाता था ताकि ठंड से वे ठिठुर ठिठुर कर मर जाये, इस दंड का भी तोड, वीर सावरकर ने निकाल लिया, वे रात भर शरीर गर्म रखने के लिये दंड-बैठक करते थे, और इसके बाद, उन्हें और उनके जेल के साथियों को,सवेरे से शाम तक कोल्हू के बैल की तरह से तेल निकालना पडता था. जबकि आज तिहाड जेल के सफेद पोश नकाब वाले राजनैतिकों व माफियाओं को, हीटर व वेटर, स्वेटर, पख़े अखबार इत्यादि की एशों-आराम की सुविधा है

६. वीर सावरकर को अडमान जेल की यातना देने/सहन करने के बाद उनके चेले सुभाष चन्द्र बोस ने कहा , वीर सावरकरजी आप गाँधी जी के कांग्रेस मे शामिल हो जाओ, मै देश की क्राति की बागडोर सभाँलूगा, वीर सावरकर ने उन्हे लताडते हुए कहा मेरे सिद्दांत को त्यागकर मै अग्रेजो की पीछे की चाटता तो मै गाँधी से बहुत आगे होता था,
यदि गाँधी, मेरे सिद्दांतों को मानेगे, तो मै गाधी के पीछे चलकर उनको राष्ट्रवाद की रूकावट मे मार्ग दर्शन कराऊँगा? तु मेरी फिक्र नही करना मै तो देश के लिये, अपनी मौत की कफन साथ मे लेकर फिरता हूँ?

७. वीर सावरकर व उनके परिवार का जन्म ही मातृभूमि की स्वाधीनता हेतु ही हुआ था , अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होने जो संघर्ष किया , उनके बदले मे उन्होने मान. यश, पद या देश से कोई अपेक्षा नही की. लेकिन सच तो यही है उनके अनुपम त्याग के बदले मे पराधीन सरकार व सत्त लोलूप जो आजादी को एक झाँसा बनाकर ,जनता को स्वाधीनता की लोलूप सरकारो ने भी उन्हे शारीरिक व मानसिक यंत्रणाए ही दी…????

८. क्रांतिकार्य, अस्पृश्यता निवारण , देशभक्त , स्वाभिमान , धर्मसुधारक, लिपी शुद्धी, धर्मांतरित लोगो का शुद्धीकरण, सप्त बंधन तोडने, स्वदेशी व्रत, विदेशी कपडों की होली , शुरूवात मे यह सब कार्य समाज मे विष के समान प्रतीत होती थी,लेकिन यह सब बाद मे समाज मे अमृत समान प्रतीत हुआ उन्होने कहा , ये सब कार्य, समाज को दोषपूर्ण लगे तो भी मै,उन्हे नही छोडूगा/ कारण सभी कार्य शुरूवात मे दोषपूर्ण होते है, इसलिए उन्होनें मिलने के लिए, कर्म, क्रांतीकर्म, अस्पृश्योद्वार का कर्य, अंतिम समय तक नही छोडा.

९. महात्मा गाँधी का कहना था-शांति- शांति-शांति
जबकि वीर सावरकर का नारा था -क्रांति-करांति-क्रांति|
लेकिन अफ़सोस आज हम उस मुकाम पर खड़े है जहाँ से इतिहास हमें चुनोती दे रहा है| आज कि पीढी वीर सावरकर के बारे मैं कुछ ज्यादा नहीं जानती है क्योंकि धर्मनिरपेक्षता का रोना रोने वालो ने देश मैं क्रांति का उदघोष करने वालो से अन्याय किया, उनका पूरा इतिहास सामने ही नहीं आने दिया| लाल रंग में रंगे बिके हुए इतिहासकारों ने क्रांतिकारिओं के इतिहास को विकृत किया | पाठ्य पुस्तकों से उनके जीवन सम्बन्धी लेख हटाये गए|

१०. वीर सावरकर एक महान राष्ट्रवादी थे| भारतीय स्वंत्रता संग्राम मैं उनकी भूमिका अतुलनीय है| वीर सावरकर भारत के पहले क्रान्तिकारी थे जिन्होंने विदेशी धरती से भारत कि स्वाधीनता के लिए शंखनाद किया| वो पहले स्वाधीनता सेनानी थे जिन्होंने भारत कि पूर्ण स्वतंत्रता कि मांग की| वो पहले भारतीय थे जिनकी पुस्तके प्रकाशित होने से पहले ही जब्त कर ली गई और वो पहले छात्र थे जिनकी डिग्री ब्रिटिश सरकार ने वापिस ले ली थी| वस्तुत: वह भारतीय स्वाधीनता संग्राम के अमर सेनानी, क्रांतिकारिओं के प्रेरणास्त्रोत, अद्वितीय लेखक, राष्ट्रवाद के प्रवर्तक थे, जिन्होंने अखंड हिंदुस्तान के निर्माण का संकल्प लिया|

११. उनका सारा जीवन हिंदुत्व को समर्पित था| उन्होंने अपनी पुस्तक हिंदुत्वमैं हिन्दू कोण है की परिभाषा मैं यह श्लोक लिखा
आसिंधू सिन्धुपर्यन्तास्य भारतभूमिका |
पितृभू: पुन्याभूश्चैवा स वै हिन्दूरीति स्मृत:|| ”
जिसका अर्थ है कि भारत भूमि के तीनो ओर के सिन्धुओं से लेकर हिमालय के शिखर से जहाँ से सिन्धु नदी निकलती है, वहां तक कि भूमि हिंदुस्तान है एवं जिनके पूर्वज इसी भूमि पर पैदा हुए है ओर जिनकी पुण्य भूमि यही है, वोही हिन्दू है| ” सावरकर का हिन्दू धर्मं से नहीं एक व्यवस्था, आस्था, निष्ठा, त्याग का परिचायक है, जो सामाजिक समरसता को बढ़ने मैं अग्रसर हो|

वह तो फिरंगियों की चाल से उद्वेलित थे, जो कि हिंदुस्तान मैं अपनी सत्ता को कायम रखने की लिए साम्प्रदायिकता को बढावा दे रहे थे| 

१२. अंग्रेजो द्वारा देश के किसानों मजदूरों पर जुल्म ढहाने वाले उनके कतई बर्दाश्त नहीं थे| उन्होंने हिंदुत्व के नाम पर देश को संगठित करने का प्रयत्न किया| वीर सावरकर के क्रन्तिकारी विचारो और राष्ट्रवादी चिंतन से अंग्रेजो की नींद हराम हो गई थी और भयभीत अंग्रेजी सत्ता ने उन्हें कालापानी की सजा दी ताकि भारतीय जनता इनसे प्रभावित होकर अंग्रेजी सत्ता को न उखाड़ फैंके| वीर सावरकर ने अपनी निष्ठां और आत्मसम्मान पर कभी भी आंच नहीं आने दी| मदन लाल ढींगरा ने १ जुलाई ,१९०९ को कर्जन वायले की हत्या कर दी तब इंडिया हॉउस मैं इस हत्या की निंदा करने के लिए एक सभा हुई जिसमें सर आगा खान ने कहा की यह सभा सर्वसम्मति से इस हत्या की निंदा करती है| इतने मैं वीर सावरकर ने निर्भय होकर कहा केवल मुझे छोड़कर”|
१३. १९२४ में कांग्रेस के प्रसिद्द नेता मौलाना मोहम्मद अली ने भी वीर सावरकर से भेट की. उन्होंने वीर सावरकर को देश भक्ति, त्याग, भावना आदि की मुक्त कंठ से प्रशंसा की किन्तु शुद्धि आन्दोलन का विरोध किया. इस पर सावरकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा पहले मुल्ला मौलवियों द्वारा हिन्दुओ को मुसलमान बनाने से रोका जाए, इसके बाद शुद्धि आन्दोलन को रोकने पर विचार किया जायेगा | कांग्रेस के खिलाफ आन्दोलन के भी वीर सावरकर ने विरोध में विचार व्यक्त किये इससे मौलाना मोहम्मद अली रुष्ट हो गये और अनायास ही उनके मुह से निकल गया यदि मुसलमानों के सुझाव न माने गये, तो उनके विश्व में अनेक देश है, वे वहां चले जाने के लिए विवश हो जायेंगे|

१४. एक राष्ट्रीय स्तर के नेता के मुंह से ऐसी बातें सुनकर सावरकर ने स्पष्ट शब्दों में उत्तर दिया आप पूर्ण:तया स्वतंत्र है, फ्रंटियर मेल प्रतिदिन भारत से बाहर जाती है, आप प्रतीक्षा क्यों करते हैं ? बोरिया बिस्तर लेकर तुरंत भारत से विदा हो जाइये.
मौलाना को आशा भी नहीं थी की उन्हें ऐसा उत्तर मिलेगा.खीझ कर उन्होंने कहा आप मुझसे बहुत बौने है अत: मैं आपको दबोच सकता हू
सावरकर भी तुरंत ही बोल पड़े मैं आपकी चुनौती स्वीकार करता हूं , किन्तु आप यह नहीं जानते कि शिवाजी महाराज अफज़ल खान के समक्ष्य , बहुत बौने थे परन्तु उस नाटे कद वाले मराठा ने कद्दावर पठान का पेट फाड़ डाला था”, यह सुनकर मौलाना को अपना सा मुंह लेकर जाना पढ़ा |

१५. याद रहे……,कांग्रेस अध्यक्ष कट्टर मौलाना मुहम्मद अली गौहर ,जो एक कट्टर धर्मांध मुसलमान थे, आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े थे, जो, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, वरन कहना चाहिये गांधीजी द्वारा मनोनीत किये गये, ये वही थे जिन्होंने कांग्रेस के अध्यक्षीय मंच से अनुसूचित जातियों को हिन्दू तथा मुसलमानों के बीच बराबर बाँट देने की धर्मांध मांग रखी थी. ये वही थे जिन्होंने गांधी को महात्मा कहने से इनकार कर दिया था और खुल्लमखुल्ला घोषणा की थी की एक व्यभिचारी और गिरा हुआ मुसलमान भी मिस्टर गाँधी से बेहतर है!ये वही थे जिन्होंने गांधीजी को खिलाफत आन्दोलन में भाग लेने को मजबूर किया था. यही मौलाना था, जिन्होंने बड़े घमंड के साथ कहा था की जिस दिन वे गांधीजी को मुसलमान बना लेंगे, वह दिन उनकी जिंदगी का सबसे सुनहरा दिन होगा. ऐसे धर्मांध मौलाना को गांधीजी ने, न केवल महान, प्रगतिशील, देशभक्त, राष्ट्रीय और खरा सोना कह कर प्रशंसा की थी वरन कांग्रेस के अध्यक्ष पद की ऊंचाइयो तक ऊपर उठाया था.


१६. महात्मा गाँधी भी मार्च १९२७ में वीर सावरकर से मिलने रत्नागिरी गए इन दोनों महापुरूषों की विचारधाराओं में आमूल परिवर्तन होते हुए भी गांधी ने सावरकर के ज्ञान देशभक्ति आदि गुणों के प्रशंसक थे| गांधी ने वीर सावरकर के शुद्धि आन्दोलन की आलोचना करनी प्रारंभ कर दी. इस पर वीर सावरकर निर्भिक स्वर में बोले मुसलमानों ने भारत में एक हाथ में कुरआन तथा दुसरे हाथ में तलवार लेकर हिंदुओं का बल पूर्वक धर्म परिवर्तन किया. ऐसी स्थिति में उन हिन्दुओ को उनके धर्म के महत्व से अवगत करा कर पुन: अपने धर्म में वापिस लाना एक राष्ट्रीय कार्य है|
इसके साथ ही उन्होंने गांधीजी को सावधान किया कि मुस्लिम लीग के नेता वास्तव में भारत को एक मुस्लिम राष्ट्र के रूप में बदलना चाहते है|

१७. ऐलम ऑक्टेवियन हुय्म नामक अवकाश-प्राप्त अंग्रेज पदाधिकारी ने भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड डफरिन की प्रेरणा से २८ डिसेम्बर १८८५ को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की. इस प्रकार कांग्रेस अपनी प्रारंभिक अवस्था में एक अंग्रेज-प्रेरित और अंग्रेजियत के दीवाने ऐसे भारतीयों की संस्था थी, जो महत्वाकांक्षी ,सत्ता-लोलुप और पदों के लिए आतुर थे.ब्रिटिश साम्राज्यवाद के मोहरे तथा कठपुतली थे| इसे प्रमाण पूरक सावरकर ने सिध्ध किया |

१८. भारत के क्रांतिकारी युवक सावरकर के १८५७ के स्वातंत्र्य समर से अत्यधिक प्रभावित थे.इस ग्रन्थ को क्रांतिकारियों की गीता कहा जाने लगा था. शहीद भगत सिंह ने इस ग्रन्थ को गुप्त रूप से प्रकाशित करा कर क्रांतिकारियों को दिया था, वह वीर सावरकर से अत्यंत प्रभावित थे. १९२८ में वह गुप्त रूप में रत्नागिरी जाकर सावरकर से मिले. वस्तुत: तह इस ग्रन्थ को प्रकाशित करने की आज्ञा उन्होंने इसी भेट में ले ली थी, दोनों वीरो के बीच मातृभूमि की स्वत्रंता के विषय में दीर्घ विचार विमश हुआ. उपरोक्त व्यक्तियों के अतिरिक्त क्रांतिकारी शहीद सुखदेव क्रांतिकारी वासुदेव गोगटे, डा. आंबेडकर,पटवर्धन, सेनापति बापट, क्रांतिकारी वी वी एस अय्यर स एयर,नानी गोपाल, प्रसिद्द इतिहासकार गोविन्द सरदेसाई मराठी ज्ञानकोष के रचिता डा. केलकर,डा. पटवर्धन ,सामाजिक नेता युसूफ मेयर अली,नेपाली गोरका सभा के अध्यक्ष ठाकुर चन्दन सिंह आदि अनेक व्यक्ति वीर सावरकर से मिले और उनसे विचार विमर्श किया. वीर सावरकर एवं विचारों से वे बहुत प्रभावित हुवे 

१९. इस देश की स्वाधीनता के लिए वीर सावरकर का योगदान उन समस्त राजनेताओ की तुलना में हजारों गुना ज्यादा था. जो भारत की स्वतंत्रता के बाद यहाँ की शासन सत्ता में भागीदार बने या इनके सिद्धांतो को मानने वाले थे किन्तु यह एक खेद जनक आश्चर्य का विषय रहा है की हमारे अधिकांश इतिहासकारों ने वीर सावरकर के कार्यो का न्यायसंगत मूल्याङ्कन नहीं किया है. उस परम राष्ट्रभक्त अदम्य उत्साही तथा अखंड भारत के उपासक को स्वाधीन भारत की सरकार ने यह सम्मान नहीं दिया जिसके वह सर्वतः अधिकारी थे किन्तु इससे वीर सावरकर के उस गौरवशाली ऐतिहासिक स्थान में कोई कमी नहीं आती. कोरे आदर्श नेता चाहे वीर सावरकर की कितनी ही आलोचना करे फिर भी वह आज करोडो भारतीयों के आदर्श है और भविष्य में भी रहेंगे,