मैं मुंबई नगरपालिका की चौथी कक्षा के मेरे शिक्षक को ,अभी भी याद करता हूँ, और धोंडू नाम के चपरासी को जो सन १९७० के बाद आज भी मेरे लिए जीवंत व प्रेरणा के स्रोत है...
मेरे नगरपालिका में एक ही शिक्षक जो सभी विषय पढ़ाते थे , गुरू बनकर.., एक विषय पढ़ाने के लिए १ घंटे से ३ घंटे लेते थे , जब तक उन्हें विश्वास नहीं होता था कि सब बच्चे सीख गए है....
उनका रोज का नियम था , मेंज पर दैनिक अखबार , और पढ़ाते समय ..., बीच –बीच में देश की ताजा खबर हमें सुनाते थे..., और भ्रष्टाचार की खबर सुनकर एकदम भावुक होकर द्रवित हो जाते थे ..., कहते थे अभी देश की आबादी ५० करोड़ है..., देश में भ्रष्टाचार की बहार है..., बढ़ती जनसँख्या एक बड़ी दुविधा है...,और कहते थे...,
बिहार में एक पुल का ठेका फंला-फंला मंत्री ने ५ लाख रूपये (आज के ५० करोड़ रूपये) में लिया और अपने नीचे के मंत्री को ३ लाख रूपये में वह ठेका सौप दिया और बैठे-बैठे २ लाख रूपये कमा गया , नीचे वाले मंत्री ने वह ठेका अपने नीचे के विभाग के मंत्री को १ लाख रूपये देकर वह भी २ लाख रूपये कमा गया .., अब बचे हुए १ लाख में क्या ख़ाक पुल बनेगा ..., उसे तो १ लाख रूपये के निर्माण में भी , आपसी दलाली से.. गिरना ही पडेगा ...,
वह हम सब छात्रों से कहता था ..., देश की चिंता करो...कम से कम सुबह या दोपहर में अखबार के मोटे अक्षरों में लिखे समाचार तो पढों...
तब मैं , सोचता था यह शिक्षक पगला गया है.., हमारे शिक्षा छेत्र के बाहर के विषय को, हम पर क्यों थोप रहा है...
आज उसकी वाणी एक दम सार्थक हो रही है..., और हमारा धोंडू नाम का चपरासी, जिसके मुंह में गुस्सा व दिल में प्यार रहता था , नगरपालिका का कच्चा दूध न पीने से, हम मेंज के नीचे छिपने पर, वह हमारी कमीज खीचकर कहता था ..., यदि ये, भरी बोतले वापस नगरपालिका में जायेंगी तो उसे विद्यार्थी की अनुपस्थिती मानकर शिक्षक पर कारवाई की जायेंगी..
आज मुम्बई में ही नहीं देश में माफियाओं की साठगांठ से जहरीला दूध पीकर, व दोपहर के भोजन में जहरीला खाना खिलने से लाखों बच्चों के मौत हो चुकी है...इसके बावजूद भी सत्त्ताखोरों का दिल नहीं पसीजा है....
काश १९७० के स्वच्छ भ्रष्टाचार मुक्त नगरपालिका ..,साफ़ सुथरा वातावरण, हर देशवासी भले अमीर नहीं था , मेहनती था लेकिन संतोषी था ..., गलत काम करने पर उसकी आत्मा लताड कर कहती थी तुम देश के लिए बनें हो..., देश को बनाओं...
मैं , आज भी भगवान् से कहता हूं , हे भगवान् मुझे ला दे, वह वातावरण .., मैं ही नहीं, हर देशवासी सुखी रहेगा
,किताबे तो कितने नेताओं ने लिखवाई और अपना हित साधकर देश की सत्ता में काबिज ही नहीं अपने को इतिहास में अमर करने का दांव खेलने का प्रपंच छोड़ गए..., देश का गौरवशाली अतीत का असली इतिहास छुपाकर, हमें बुजदिल कौम व शांती, अहिंसा के झांसे से देश के टुकड़े कराकर.., “बापू...” “महात्मा...”, “आराम हराम है..”, “गरीबी हटाओं”, “मेरा भारत महान” के नारे देने वालों के नाम देश में लाखों, संस्थान,सड़क से गलियारों के नाम से राष्ट्रवाद को धीमे जहर से मारने के खेल से, अपने अमरत्व को मजबूत बनाने का खेल देश में बदस्तूर जारी है...
लेकिन.. वीर सावरकर.....,
एक महान नायक, जिनके बारे में कितना ही लिखा जाय कम है.. जिनके अनेक रूप, विद्वान,तत्व चिन्तक,क्रांतीकारक, लेखक, महाकवि,सर्वोत्तम वक्ता,पत्रकार, धर्मशील, नीतीमान,पंडित मुनि,इतिहास संशोधक, राष्ट्रीत्व के दर्शनकार,प्रवचनकार,अस्पृश्यता निवारक शुद्धीकरण के प्रणेता, समाज सुधारक , विज्ञान निष्ठा सिखाने वाले,भाषा शुद्धी करने वाले पीपी सुधारक,संस्कृत भाषा प्रभु,बहुभाषिक, हिंदुसंघटक,राष्ट्री काल दर्शक के प्रणेता , कथाकार,आचार्य,तत्वज्ञ महाजन, स्तिथप्रज्ञ, इतिहास समीक्षक , धर्म सुधारक,विवेकशील नेता, महानात्मा ,अलौकिक दृष्टा... व कई गुणों से सपन्न ने पांडुलिपी की तरह.. 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम,शोध व प्रमाण सहित अपने हाथों से इंग्लॅण्ड में लिखी , इस किताब का नाम जाने बिना कभी न डूबने वाले ब्रिटिश साम्राज्य थर्रा गया था, व प्रकाशन के पूर्व ही इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था ...,
यही किताब थी जिसने देश में क्रांतिकारिता को जन्म दिया
वीर सावरकर की किताब 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पढने के लिए दी, भगत सिंह इस किताब से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने इस किताब के बाकी संस्करण भी छापने के लिए सहायता प्रदान की, जून 1924 में भगत सिंह वीर सावरकर से येरवडा जेल में मिले और क्रांति की पहली गुरुशिक्षा ग्रहण की, यही से भगत सिंह के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया, उन्होंने सावरकर जी के कहने पर आजाद जी से मुलाकात की और उनके दल में शामिल हुए| बाद में वे अपने दल के प्रमुख क्रान्तिकारियों के प्रतिनिधि भी बने। उनके दल के प्रमुख क्रान्तिकारियों में चन्द्रशेखर आजाद, भगवतीचरण व्होरा,सुखदेव सुखदेव, राजगुरु इत्यादि थे।
सत्ता परिवर्तन के बाद किताब तो नेताओं ने लिखवाई , और अपना हित साधने के लिए “नेशनल हेराल्ड” अखबार में कांग्रेसीयों ने अपनी स्तुती से जनता को बेवकूफ बनाकर राज किया..,”कौमी एकता” हिन्दी के अखबार ने तो पहले ही दम तोड़ दिया था, अब नेशनल हेराल्ड जो कांग्रेस की सम्पत्ती थी , नीजी सम्पत्ते सम्पत्ती बताकर इसे डकारने का खेल चल रहा है..
आज देश के भ्रष्टाचार के युग में किताबें लिखवाकर.., अपनी स्तुती से, अपनी कमजोरी को छुपाकर नेता लोगों ने भारी रकम कमाई है...,
नटवर सिंग जो कांग्रेस में भ्रष्टाचार का हिस्सा थे अपने पुत्र के कल्याण के आरोप से वे गद्धी न छोडने से वे कांग्रेस की गड्डी (गाड़ी) से गड्ढे में फेंक दिए गए ..
अब प्रतिशोध में किताबी वार शुरू हो गया है..., इन्डियन वर्ग भी इस खेल व प्रकाशन की किताब खरीद कर..., किताब लिखवाने वालों को मालामाल कर देगा...
संजय बारू की किताब में लिखा है..., प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी को “सोनियाजी” के नाम से संबोधित करते थे, जबकि सोनिया गांधी प्रधानमंत्री को सिर्फ “मनमोहन” कहती थी.., और प्रधानमंत्री को किस तरह काठ का पुतला समझकर... शीर्ष नेताओं ने देश पर १० सालों से, अपनी दबंगई से राज किया ...
याद रहे.. भारतीय जनता पार्टी के हनुमान, जसवंत सिंग , जिन्हें किताब छपवाने के आरोप से पार्टी से उनकी शक्ती छीन ली गयी थी .. अब पार्टी से निष्कासित होकर.., जड़ी बूटी न मिलाने से अभी हाल ही मैं जमीन पर गिरकर मूर्छीत हो गए थे...
CORRUPTION- क़र अप सन (अपने बेटे को उपर उठाओ) और उसके लिए बाप को (कर अप शरम) – बेशर्म बनो
कृपया इस नए ग्रुप से जुड़े – आपका स्वागत है CORRUPTION-(KAR UP SON – KAR UP SHARAM) बेटे को उपर उठाने के लिए बेशर्म बनhttps://www.facebook.com/groups/371786942979873/
CORRUPTION के वजह से बेटा पेंशन नही, बल्कि PAIN SON है
जीवन मे बेटा संस्कार – SONS CAR होता है, माँ, बाप प्रफुल्लित (खुश) होते है, बेटा चिराग बन कर पैदा हुआ है, परिवार का नाम रोशन करेगा. और हमारी बूढी अवस्था मे हमारे जीवन का पॆंशन बनेगा,
माँ, बाप, SONS CAR मे चाकलेट व पीजा ( बच्चो कि शराब – जो की संस्कार को एक शराब का नशा पिलाना है) व FAST FOOD का पेट्रोल डाल कर बच्चे को तेज दौडाकर खुश होते है ,
यदि आप नई कार खरीदते है , तो उत्पादक / निर्माता द्वारा चेतावनी लिखी होती है कि प्रथम 25000 कि.मी. तक 60 कि.मी. के ऊपर गाडी न चलाये. अन्यथा इंजन खराब हो जायेगा.
माँ, बाप SONS CAR मे चाकलेट व पीजा का पेट्रोल डाल कर बच्चे के नवजीवन की जिद को 100 कि.मी. से तेज दौडाकर खुश होते है, वह अपने को बच्चे को राणा सांगा की औलाद समझने लगते है, व परिणाम स्वरूप 8-10 साल मे बेटे के जीवन का इंजन खराब हो जाता है,
8-10 साल के बाद चाकलेट व पीजा का पेट्रोल डाल कर भी SONS CAR 20 कि.मी की रफ्तार भी पकड नही पाता है, और 15-16 साल मे माँ, बाप SONS CAR को धक्का लगा कर दौडाते है, उसमे असली पेट्रोल डालने पर भी SONS CAR दौड नही पाती है ,
क्योकि उसका इंजन (चरित्र) खराब हो जाता है . धक्का मारते मारते माँ, बाप अपने जीवन के पूँजी उसमे गँवा देते है,
अंत मे बेटा जिसे वे पेशन समझते है वह जीवन के अभिशाप के रूप मे PAIN – SON बनकर माँ, बाप को बुढापे मे कुडे के डब्बे मे फेंक देते है
वही आज हमारा समाज लडकी पैदा होने पर मातम मनाता है, लडकी पैदा होने कि खबर से भ्रूण हत्या करवाता है
आज के समाज मे लडकी (DAUGHTER) सर्वश्रेष्ठ है, वह बुढापे का अकाल दूर करती है , वह DROUGHT-HER है , अकाल हरने वाली है, क्यो कि उसे मातृत्व, ममता व वात्सल्य का आभास व अनुभव है, वह माँ बाप को अपने जीवन का अंग समझती है.
वही देश के गरीब हिन्दुस्तानी जो गरीबी रेखा के आस पास जीवन यापन कर रहे है, वे तनाव जिसे अंग्रेजी मे TENSION कहते है व एक-एक ईमानदार गरीब कुँवारा युवक जो बिना आरक्षण के बैशाखी से उपर उठने की कोशिश करता है, उसे उसके जीवन मे TENSION शब्द TEN- SONS...बन गया है , जैसे उसे 10 बच्चे का परिवार पालना है, वह जीवन मे संघर्ष करते रहता है और उसकी प्रतिभा खो जाती है, वह देश की गुमनामी मे खो जाता है .
यदि भ्रष्टाचारी का बेटा, येन केन सफल भी हो जाता है , तो वह बाप के पदचिन्हों को हाथी का पाँव बनाकर हाथी की तरह , देश के गरीबों को उजाडकर धन डकारने मे व्यस्त रहता है..??? इसकी आधुनिक मिसाल है आज की राजनीति का वंशवाद ...???? जिससे देश मे लूट हो रही है
मर्दानी ..., अब भरवाओं.., मर्दों से पानी...
राजनीती से समाज ने तुम्हारी पवित्रता को पतितता से, बेड रूम (BED ROOM-शयनयान) की वस्तु बनाकर, भष्टाचार की ऊंची उड़ान भरी है और देश का बेड-रूप बना दिया है....
नारी तुम सब पर भारी..., अब अपने मर्दों (सरपंच से नेता) से कहों..., अब बेड रूम में तुम्हारे प्रपंच का खेल नहीं चलेगा..., भ्रष्टाचार के प्रपंच की पतितता से अब देश में नारी की कुरूपता का व्यव साय नहीं चलेगा
आओं.., अपने मर्दों से कहों.., राजनीती की बातें BED-ROOM में नहीं, घर के DRAWING –रूम (बैठक कमरे) में हो..., ताकि, मैं देश की एक नई तस्वीर बना सकूं...
अब तक तो.., देश के मर्द सत्ता के मद में देश का मधु पी रहें थे .....
आओं..., मर्दों से कहो..., देश की महिलाओं को जगाकर कहो.., अब, हम तुम्हारी बैसाखी नहीं..., बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं..., अब हमारे संस्कारों की सम्मानता से.., हम देश के हर नागरिकों को समान प्यार से, उनके जीवन की प्रेरणा को और उज्जवलित करेंगें...
नारी..., तेरा प्यार दिल के आँसुओ से भरा रहता है, तुम्हारा दिल तो वात्सलय से 24 घंटे धडकता.. है... हर दु:ख पहुचाने वाले पति से बच्चे हर सख्श तक को आप माफ कर देती हो.. तकि आप की आँसू से वे अपने गलती का अहसास समझ कर प्रायश्चित (सुधर सके) कर सके,
आप तो माँ की रूप में , सौ बार अपने आँसुओ से मौका देती है....माँ.., तेरे आँसु सागर से भी गहरे है. लेकिन तेरे सागर के आँसु तो लोगो को जीवन मे कैसे तैरना है,वह सिखाती है...आज तक तेरे आँसु के सागर कोई भी डूबा नही है...क्यो कि इसमे वात्सलय का नमक है...
आपके खून में ही तो देश का वात्सल्य , अभिमान व देश की हरियाली छीपी है..., तुम आरक्षण की वस्तु नहीं देश के संरक्षण की धारा हो...
हमारे समाज के पिस्सुओं ने देश की बच्चियों से नारी को पतितता से वेश्यावृती के धन से अब बलात्कार की हुंकार भर कह रहें हैं..., युवाओं का यह है अधिकार.., है...
नारी.., समाज के पिस्सुओं ने देहव्यापार में धकेले ढकेले कर..., तुम्हारी पतितता में भी पवित्रता है..,
नारी.., इंसानों में सर्वोत्तम तुम ही और केवल तुम ही हो...
वेश्या पतिता नहीं होती, पतन को रोकती है /
पतित जन की गन्दगी , अपने ह्रदय में सोखती है/
जो विषैलापन लिए हैं घूमते नरपशु जगत में ,
उसे वातावरण में वह फैलने से रोकती है /
यही तो गंगा रही कर , पापियों के पाप धोती ,
वह सहस्रों वर्ष से , बस बह रही है कलुष ढोती,
शास्त्र कहते हैं कि गंगा मोक्षप्रद है, पावनी है ,
किसलिए फिर और कैसे वेश्या ही पतित होती ?
मानता हूँ , वेश्या निज तन गमन का मूल्य लेती ,
किन्तु सोचो कौन सा व्यापार उनका ,कौन खेती ?
और यह भी , कौन सी उनकी भला मजबूरियां हैं ,
विवश यदि होती न, तो तन बेचती क्यों दंश लेती ?
मानता यह भी कि वेश्यावृत्ति , पापाचार है यह ,
किन्तु रोटी है ये उनकी , पेट हित व्यापार है यह ,
देह सुख लेते जो उनसे, वही उनको कोसते भी,
और फिर दुत्कार सामाजिक भी , अत्याचार है यह /
गौर से देखो , बनाते कौन उनको वेश्याएं ,
और वे हैं कौन, जो इस वृत्ति को खुद पोषते हैं ?
पतित तो वे हैं , जो रातों के अंधेरों में वहां जा -
देह सुख भी भोगते हैं , और फिर खुद कोसते हैं /
बेटा बोल रहा है ...नो उल्लू बनाविंग..., पिताजी कह रहें है..., जनता को और उल्लू बनाविंग....,
दोस्तो.., क्या आप मीडियाओ के.. कौन भारत चुसियाओ से अपना मनोरंजन, कर….????, ( Posted on 17 July 2013. वेबसाईट की पोस्ट) केबल टी.वी. वालो को प्रतिमाह 350 से हजार रूपये देकर अपना समय बरबाद कर, प्रतिमा (पुतले) की तरह देख कर ,अपना जीवन प्रतिमाओ की तरह बनाना चाहते है.. या राष्ट्रवादी विचारधाओ से ज़ुडना चाहते हो…ताकि हम दुनिया मे सर्वश्रेष्ट से भी 100 गुना श्रेष्ट बने..?? तो, पढे,, यह आलेख..
KBC-कौन भारत चूसिया ...पहले ABC (AMITABH BACHAAN COPRORATION LTD) से अकूत दौलत से CORPORATE SON से CARPET की जिन्दगी जीने के ख्वाब के चक्कर में १९९६ में MISS WORLD की प्रतियोगिता के आयोजन के प्रायोजक बनकर ABC कंपनी लॉक (बंद) हो गई , और अमिताभ बच्चन की A –Z की कमाई इसमें लूटकर , अमिताभ बच्चन दिवालिया हो गए, बैंक के अधिकारी जलसा बंगले में उगाही के लिए चक्कर पर चक्कर मारते हुए , अमिताभ बच्चन का जीवन जल-सा हो गया था...,
तब मुकद्दर का सिकंदर में, "आज मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बॅंक बॅलेन्स है तुम्हारे पास क्या है...? कहने वाले , और शशी कपूर ने कहा था, मेरे पास माँ है" ..., तब की ऐसी स्तीथी हो गयी थी.., वे मुकद्दर से छुछुंदर बन गए थे.., अमिताभ बच्चन के पास माँ तो जरूर है ..., कहने लगे मेरे पास पैसे नहीं है...
इस कार्यक्रम में १०-१२ लोग , जो ऊंगली में गिने जाने वाले करोडपति बन जरूर बन गए , लकिन अमिताभ बच्चन एक श्रृंखला में १०० करोड़ से ज्यादा लेकर अरबपति जरूर बन गएँ हैं..., इस चमक से बेटे को फिल्मों में चमक भी मिली..., यह एक बड़ा संयोग और जैकपोट ही कहा जाय.., जब अमिताभ बच्चन दिवालिया थे ..., तब , एश्वर्या राय जो १९९४ की विश्व सुन्दरी रह कर करोडपति बन गयी थी .., ११९७ में एक फिल्मों में पदार्पण करने के बाद व सन २००० में सबसे ज्यादा धन कमाने वाली अभिनेत्री बन गई थी... सन २००० में...,अमिताभ बच्चन करोडपती बनने का दांव खेल रहे थे..., और इस कार्यक्रम से २० अप्रैल २००७ को, अमिताभ बच्चन को अरबपत्नी बहू मिली...
1985 की बात है छिदवाडा से 50 कि,मी, दूर एक ढाबे मे, भोजन के बाद हम दस बारह मित्र , आपस मे बात कर रहे थे , इतने मे एक मित्र जो सामने के डाक घर से अपने परिवार के हाल जानने के , बम्बई फोन कर वापस लौटा तो, उसने कहा .. बम्बई के मित्रो, आपके लिए खुशखबरी लाया हूँ… कल से बम्बई मे दूरदर्शन के मेट्रो चैनल प्रयोगात्मक रूप से एक घंटे के लिए चालू हो गया है…
हमसे एक मित्र ने उसे टोकते हुए कहा, अब लोगो के समय की बरबादी का खेल शुरू हो गया है.. लोग टी.वी. से चिपके रहेगे, सब मित्रो ने उसका उपहास उडाया.. लेकिन मैने उसका समर्थन करते हुए कहा.. यह मित्र सही है.
आज एक परिवार, साल भर मे केबल टी.वी.से प्रति साल 1500 से 12हजार रूपये बरबाद कर, 90% फूहड कार्यक्रम देखकर , अपना समय, धन देकर, बरबाद करता है..???,
उदाहरण है..एक धारावाहिक ..क्योकि? सास भी कभी बहू थी , इस कार्यक्रम की महिलाए इतनी दिवानी हो गई .. कि माँ भी बच्चो को दूध पिलाना भूल जाती थी..बडे बच्चो को को माँ कहती थी… बेटा, यह धारावाहिक खत्म होने के बाद ही तुम्हारे लिए खाना बनाऊगी..यह धारावाहिक, इतना लम्बा चला कि बहू, सास बन गई..?? और सास, नानी , दादी बनकर, उनकी कद्र कम होने से , उनके चिल्लम चिल्ली से धारावाहिक की टी.आर.पी कम हो जाने की वजह से यह धारावाहिक बन्द करना पडा,
आईए जानिये कुछ और सच्चाई..???
1. कौन बनगा करोड्पति धारावाहिक से, करोडो रूपये की कमाई तो मोबाईल फोन के काँल से ही, हो जाती है…बाकी लूट.., विज्ञापनो से कमाई जाती है.. समय व्यतित करने के लिए, प्रतियोगी का घर का पता..शौक… इत्यादि पूछने के बाद पूरे एक घंटे के धारावाहिक मे मुश्किल से 25 सवाल पूछे जाते है…? सवाल गलत होने पर कहा जाता है ,,लाँक किया ..एक बार वापस सोच लो…का संकेत देकर कही धारावाहिक की गरीमा खत्म न हो जाए… घिसपिट कर 10 हजार से 10 लाख तक की रकम जीतने तक.. व कार्यक्रम को 1 घंटे तक खीचा जाता है.. यह धारावाहिक ब्रिटेन मे चलने टी.वी. शो की नकल है, जहाँ प्रतियोगी को सवाल के जवाब मे सिर्फ,, 1 मिनट का समय मिलता है…इसी की देखा देखी मे गोविन्दा ने छप्पर फाड के.. व शाहरूख खान के क्या आप पाचवी पास से तेज है… भी प्रायोजित हो चुके है…? और इसके निदेशक प्यार मे पाँचवी क्लास मे फेल होने से…उनके शरीर के सौ से ज्यादा टुकडे कर देने से, यह धारावाहिक बन्द हो गया..
2. इसी तरह से पहचान कौन..??? इसकी लूट की शुरूवात, सबसे पहले.. इंडिया टी,वी, ने की दो प्रसिद्ध चेहरो को मिलाकर .. एक चेहरे बनाकर .. पहचानने होते है…. पहचान, ये दो चेहरे कौन..??? इस पर 50 हजार का इनाम रख कर, दर्शकों को उकसाया जाता है, जनता,जब लालच मे आकर 6 अंको का नम्बर दबाती है… तो सामन से जवाब आता है..??? , आप {लूटने की} कतार मे हो..जब उनका मोबाईल का बैलेस खत्म हो जाता है.. तो उन्हे आश्चर्य होता है कि मेरे 100-400 रूपये कैसे लूट गये है…क्योकि इसकी काँल रेट 10 रूपय् /मिनट है..असली सच्चाई तो यह है कि कार्यक्रम पहने से बनाकर , मीडिया के लूटेरे जानबूझकर गलत जवाब देकर..अंत मे कार्यक्रम समाप्त होने से कुछ मिनट पहले सही जवाब देकर,रकम आपस मे बाँट लेते है.. दूरसंचार विभाग भी इस लूट की कमाई मे अपना हिस्सा गड्प लेता है..
2 वही.., रात को 12 बजे के बाद जवानो के जोश के लिए पलंग तोड गोली का विज्ञापने आता है, इस विज्ञापन के झाँसे मे आज तक किसी की पलंग तो नही टूटी है…लकिन..हाँ जरूर.. लोगो के पलंग के साथ घर बार भी बिक गया है…
3.एक है…?? मुनीरखान जो टी.वी.मे विज्ञापन जगत का भेडिया खान साबित हुआ..जो दुनिया की हर नालाज बीमारी को , 100 ग्राम शहद् के शीशी को 16 हजार रूपये मे बेचकर कर निदान का दाँवा करता था.. टी.वी. की पूर्व प्रसिद्ध आयोजिका तब्बसुम , अपनी जीविका को चमकाने के लिए. गिरगिट की तरह अपना चेहरा व आँखो की पुतलीओ को नये-नये ढंग से बदल कर कहती थी, नास्त्रोदामस की भविष्यवाणि आज सार्थक हुई है जिन्होने कहा था- दुनिया मे एक ऐसा व्यक्ति, चिकिस्ता जगत मे पैदा होगा ..एक साधारण व्यक्ति, कम पढा, जो न डाँक्टर होगा, लेकिन वैज्ञानिक बनेगा.. और चिकिस्ता जगत मे दुनिया को हर बीमारी से मुक्ति से क्रांति ला देगा… और उसकी तुलना भेडिया खान से कर कहती ..इस दुनिया मे यह वही वैज्ञानिक है.. जो पहले गैरेज मे, मेकेनिक से, कम्पाउंडर बन कर है.. जो धरती पर चमत्कारित व्यक्ति है जो ये दवा ले आए है…?? याद रहे 2002 मे इनके पास से आबकारी विभाग को भेडिया खान से 50करोड से भी ज्यादा की सम्पत्ती बरामद की थी , बाद मे मामला रफा दफा कर दिया गया..??? 2010 मे इनकी आय 1करोड रूपये प्रति घंटा होने से, हर वाहिनी पर उनका 30 मिनट का विज्ञापन आता था,, सभी वाहिनियो का खर्च तो उनके विज्ञापन से वसूल हो जाता था..और टी.आर.पी से आय तो उनके लिए एक अतिरिक्त बोनस था..
लाखो घरो के उजडने के बाद , पुलिस छापे मे , उनके घर व दुकान मे करोडो रूपये बरामद हुए, मुनीर खान तो लापता हो गये.. 3 महिने बाद 13 मई 2010 मे, पुलिस द्वारा पकडे जाने पर , पुलिस पर रिश्वत लेने का आरोप लगाने लगे…जेल जाते समय अपने बेटो को फोन करते हुए कहा ,, बेटे.. मेरे सर मे दर्द हो रहा है..तुम क्रोसिन (दर्द निवारक दवा) ले आना…
वही तब्बसुम टो.वी पर घडयाली आँसू बहाकार, अपना छुडाने के लिए , अदालत मे याचिका दायर कर कह रही थी..?? यह इतना बडा भेडिया था ..इसमे लाखो लोगो की जिंदगी उजाडी है.. इसकी मुझे भनक तक नही लगी… और इसकी जालसाजी से… मुझे विज्ञापन का मेहताना भी नही मिला..?? आज मुनीर खान जेल से आजाद हो गये है…?? फिर से एक नया खेल होगा… दोस्तो मेरे वेब्स्थल का स्लोगन है… मेरा सविधान महान … क्योकि यहाँ हर माफिया पहलवान.
15 अगस्त को लाल किले से लाल –पीले होकर.., प्रधानमंत्री ने कृष्ण के भूमिका में अपने गोपियों को लताड़ते हुए कहा , देश की माखन हांडी में गरीबों की मेहनत का माखन है..., उसे मत चुराओ.., “मैं न तो खाता हूँ , न खाने देता देता हूँ...”अपने पार्टी के मंत्री, सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों, व चुनावी कार्यकर्ताओं , जो इस हांडी को भ्रष्टाचार की मंडी बनाकर, अर्जुन बन कर , माखन को मछली की आँख समझकर पिछले ६७ सालों से इस हांडी में छेद कर , अपने हिस्से जुगाड़ कर रहें थे..,
लाल किले से दहाड़ते हुए.., देश के सरकारी तंत्र को लताड़ते हुए कहा.., मेंरा क्या..??, (माखन में हिस्सा)..., तो मैं क्यों करूं... (हिस्सा नहीं मिला तो ),.??? ...”, इस भावना के तीर से देश को बर्बाद मत करों ..
यदि देश के २० करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी , यह सोचे कि “मैंने देश को अपने कर्मफल, परिश्रम से देश को क्या दिया...??? , मैं देश को और कितना दे सकता हूँ..,”
और अपने अर्जुनों को चेताया कि यदि, आप १२...१३..१४...१५ घंटे काम करें... , तो आज जो देश ६७ सालों के बूढ़ेपन में चला गया है..., उसकी उम्र घटकर, देश के जवानों की उम्र से , देश एक नए स्फूर्ती से जवान हिन्दुस्तान बनकर, .., विश्वगुरू की प्रतिभा से निखार ला सकता है..,
दोस्तों ..., मोदीजी को तो पिछले दस सालों के, कांग्रेस के राज की फूटी हुई, माखन हांडी मिली है...,
जमीन में गिरा हुआ माखन से अब किण्वन fermentation, खमीर yeast, की खुमारी से देश के हर गली , मुहल्ले, शहर से देश मैं , भ्रष्टाचार के मच्छर पैदा हो गए हैं , जो मरेलिया (नेता द्वारा फैला हुआ वायरस) नाम के विषाणु से पिछले १० सालों में ५ लाल से अधिक किसानों व नवजात शिशु से जवान तक काल के गाल समा गएँ हैं...
इसीलिए प्रधानमंत्री ने इसकी शुरूवात अपने कार्यालय से की है..., सफाई से..., ताकि “मरेलिया” के इस वायरस से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय से सफाया हो...,
पिछले १० साल के इस१०० लाख करोड़ से ज्यादा देशी मुद्रा के महाघोटालों के बावजूद, आज भी जनता में संवेदना कायम है, कि मंदबुद्धी मोहन बेहद इमानदार है..., उन्हें तो प्रधानमंत्री पद का इनाम इसीलिए मिला था, मंदबुद्धी मोहन भी देशवासियों से कह रहें हैं कि मैंने माखन नहीं खायो..., मेरे हाथ में कांग्रेस ने भारत निर्माण का एक छुपा हतौडा दे दिया था ..,
आज तक, इस हांडी को फोड़ने वाले हाथ का दोषी कौन है..., हमारा कानून भी संशयित है..,
“आम आदमी” के नारों के हाथों से, सामंतवादी जहर से, पंजावाद के बल से, भ्रष्टाचार के दल-दल से, “देश लुट चुका है,” अब तो देश का माखन, माफियाओं ने विदेशी हांडीयों (बैंक) में सुरक्षित रखा है..., अब प्रश्न यह उठता है कि यह हांडीयां देश में आ पायेगी...!!!!!
दोस्तों बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है...,
इस खेल के, बचावदार, महामुनीम प्रणव मुखर्जी को राजनेताओं की दिलदारी से वित्तमंत्री पद से राष्ट्रपति पद की उन्नती के इनाम से महामहीम से सुशोभित कर.., देश के उच्चतम नागरिक का गर्व मिला है...,
15 अगस्त को लाल किले से लाल –पीले होकर.., प्रधानमंत्री ने कृष्ण के भूमिका में अपने गोपियों को लताड़ते हुए कहा , देश की माखन हांडी में गरीबों की मेहनत का माखन है..., उसे मत चुराओ.., “मैं न तो खाता हूँ , न खाने देता देता हूँ...”अपने पार्टी के मंत्री, सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों, व चुनावी कार्यकर्ताओं , जो इस हांडी को भ्रष्टाचार की मंडी बनाकर, अर्जुन बन कर , माखन को मछली की आँख समझकर पिछले ६७ सालों से इस हांडी में छेद कर , अपने हिस्से जुगाड़ कर रहें थे..,
लाल किले से दहाड़ते हुए.., देश के सरकारी तंत्र को लताड़ते हुए कहा.., मेंरा क्या..??, (माखन में हिस्सा)..., तो मैं क्यों करूं... (हिस्सा नहीं मिला तो ),.??? ...”, इस भावना के तीर से देश को बर्बाद मत करों ..
यदि देश के २० करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी , यह सोचे कि “मैंने देश को अपने कर्मफल, परिश्रम से देश को क्या दिया...??? , मैं देश को और कितना दे सकता हूँ..,”
और अपने अर्जुनों को चेताया कि यदि, आप १२...१३..१४...१५ घंटे काम करें... , तो आज जो देश ६७ सालों के बूढ़ेपन में चला गया है..., उसकी उम्र घटकर, देश के जवानों की उम्र से , देश एक नए स्फूर्ती से जवान हिन्दुस्तान बनकर, .., विश्वगुरू की प्रतिभा से निखार ला सकता है..,
दोस्तों ..., मोदीजी को तो पिछले दस सालों के, कांग्रेस के राज की फूटी हुई, माखन हांडी मिली है...,
जमीन में गिरा हुआ माखन से अब किण्वन fermentation, खमीर yeast, की खुमारी से देश के हर गली , मुहल्ले, शहर से देश मैं , भ्रष्टाचार के मच्छर पैदा हो गए हैं , जो मरेलिया (नेता द्वारा फैला हुआ वायरस) नाम के विषाणु से पिछले १० सालों में ५ लाल से अधिक किसानों व नवजात शिशु से जवान तक काल के गाल समा गएँ हैं...
इसीलिए प्रधानमंत्री ने इसकी शुरूवात अपने कार्यालय से की है..., सफाई से..., ताकि “मरेलिया” के इस वायरस से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय से सफाया हो...,
पिछले १० साल के इस१०० लाख करोड़ से ज्यादा देशी मुद्रा के महाघोटालों के बावजूद, आज भी जनता में संवेदना कायम है, कि मंदबुद्धी मोहन बेहद इमानदार है..., उन्हें तो प्रधानमंत्री पद का इनाम इसीलिए मिला था, मंदबुद्धी मोहन भी देशवासियों से कह रहें हैं कि मैंने माखन नहीं खायो..., मेरे हाथ में कांग्रेस ने भारत निर्माण का एक छुपा हतौडा दे दिया था ..,
आज तक, इस हांडी को फोड़ने वाले हाथ का दोषी कौन है..., हमारा कानून भी संशयित है..,
“आम आदमी” के नारों के हाथों से, सामंतवादी जहर से, पंजावाद के बल से, भ्रष्टाचार के दल-दल से, “देश लुट चुका है,” अब तो देश का माखन, माफियाओं ने विदेशी हांडीयों (बैंक) में सुरक्षित रखा है..., अब प्रश्न यह उठता है कि यह हांडीयां देश में आ पायेगी...!!!!!
दोस्तों बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है...,
इस खेल के, बचावदार, महामुनीम प्रणव मुखर्जी को राजनेताओं की दिलदारी से वित्तमंत्री पद से राष्ट्रपति पद की उन्नती के इनाम से महामहीम से सुशोभित कर.., देश के उच्चतम नागरिक का गर्व मिला है...,