Friday, 10 October 2014



हमारे धैर्य की परीक्षा लेने वालों को तुरंत रिजेक्ट (REJECT) का रिजल्ट दे दिया जाएगा ..
मोदी की दहाड़ , अब नहीं है पहले जैसी सोयी हुए सरकारें..
अब दिल्ली का दिल नहीं है ...,आतंकवादियों,घुसपैठीयों व दुश्मनी निगाह वाले देशों का...
चुनावी वार में , विरोधी पक्षों का चुनावी पुरी तलने का ख़त्म हो गया तेल..,इसलिए आपस में बढ़ा रहें मेल... 
कांग्रेस राज में जवानों के हाथ बांधकर,गर्दन कटवाकर.., सत्ताखोरों में लूट के छूट का नंगा खेल के शवाब में, आगे १०० सालों के सत्ता का ख्वाब था. मोदी की दहाड़.., जवानों बनों दुश्मनों के पहाड़ , करों पछाड़, विरोधी चुनावी मुर्गे अब करें, कूक्डू कू.., अकडू दल बन गए, अक्कड़ –बक्कड़ बंबे भौं, भौं, भौं.. करते हुए वोट बैंक की भूख से हताश..
मोदी का जवाब, नवाब शरीफ का तोड़ा,काश्मीर लूटने का ख्वाब ..क्योंकि हमारे जवान हैं, लाजवाब...,


याद रहे.., यदि १९४७ से आज तक के विदेशी हिन्दुस्तानीयों के धन की, पसीने से, दान स्वरुप मिली राशी का हिसाब लगाये तो यह १०० लाख करोड़ रूपये से कहीं ज्यादा है..., 
यदि विदेशीयों का यह धन, हमारे देश में नहीं आता तो आज डॉलर की कीमत १०० रूपये के पार होती.., यों कहे, विदेशी प्रवासी देश का बेड़ा पार करने के जूनून से देश में धन भेज रहें है...,वही हमारे सत्ताखोर, एक सुनियोजित योजना से.., इसे डकार कर देश डूबाने में लगें है...
खास कर खाड़ी देशों के गरीब मजदूर वर्ग , शोषित से .., उसके शोषण की आवाज भी भारतीय दूतावासों द्वारा दबा देने से.., वे आधा भोजन खा कर, धन बचाकर , हमारे देश में भेजने के बावजूद, हम आज भी कंगाल देशों की जमात में शामिल है...
यह धन आज माफियाओं ने डकार कर, देशी,विदेशी बैंकों में जकड जकड़ रखा, और कर्ज के मर्ज से देश को चलाने के लिए सत्ताखोर लूटेरा,विदेशों में भीख का कटोरा लेकर घूम रहें हैं.. भारत निर्माण से अन्य योजनाओं के नाम से देश को भरमा रहा है...

आज रूपये को सठिया कर देश में लूटेरे सेठिया बन गए , आराम हराम के नारे के जन्म से गरीबी हटाओं , मेरा भारत महान, इंडिया शाईनिंग , भारत निर्माण से नार्रों..., से बतिया कर ..., अफीमी नारों से ६७ साल से जनता को बहोशी से सुला रखा है....

इसकी आड़ में जातिवाद, भाषावाद, अलगाववाद,धर्मवाद की खाद से डॉलर का पोषण कर , जनता का शोषण किया जा रहा हैं ...
याद रहे..., १९४७ में हमारा १ रूपया = १ डॉलर था , प्रवासी भारतीय जो न के बराबर थे व डॉलर की देश में आवक शून्य थी
नेहरू के दिन का खर्चा २५ हजार रूपये व देशवासियों का २ आना से भी कम हे., इसे चुनौती देने वाले राम मनोहर लोहिया ने इस खेल को ., आराम हराम के नारों से, शांती, विदेशी संस्कृति व घोटालों से देश की नमक हलाली के खेल के खिलाफ आजीवन लड़ते रहें.., उनकी मृत्यू के बाद, उनके समाजवादी चेले ..,उनकी, औलादें भी जल्लादें बनी ...,आज भी इस खेल में बदस्तूर जारी हैं..,हर वाद का चोला ओढ़ कर..,हर पार्टी ने लूट्वाद के ढंके /छुपे चहरे से .., आज रूपये को सठिया कर देश में लूटेरे सेठिया बन गए है 

Tuesday, 7 October 2014



नरेन्द्र मोदी ने दिखा दिया है..., ५ साल तक सत्ता का मेवा खाकर, देश की समस्याओं में आँख मूँद कर सोने वाले.., चुनावी बरसात, में वादों की बरसात करने वालों के अब दिन लद गयें हैं...,अब जनता भी अपने विवेक से इनका हिसाब लेकर..., जवाब दे रही है ,
राहुल गांधी बने कांग्रेस के राहु ...जहां भी चुनाए प्रचार में कदम रखा ..., पार्टी का भट्टा बिठाया.., वंशवाद के नाम से पुरखों की संवेदना बनी वेदना, 
वे,देश के प्रलय काल में विदेशों में जश्न मना रहें थे , और कांग्रेस की भारतमाता सोनिया गांधी भी देश के मुद्दों पर चुप थी ...अब जनता ने सत्ता पलटकर इसका जवाब दे दिया

Monday, 6 October 2014



महाराष्ट्र बना घोटालों का प्रदेश के ताज से.., देश को बनाया.., मरा राष्ट्र..,

लोकतंत्र को लूट तंत्र के खेल से..,
जनता हैरान , परेशान.., 
सभी दलों के प्रधान मान चुके हैं अपने को मुख्यमंत्री का मान , लोकतंत्र की कुर्सी के चार पाये से चौपाये के भेष से चल रहा है, कुर्सी खीचने का खेल... (MUSICAL CHAIR... को MUSCULAR POWER से खीचने का खेल...)
वंशवाद, भाई – भाई के खेल में लोकतंत्र के झांसे से जनता का जीवन बना खाई – खाई....,
हर दल राजनैतिक जंग की लड़ाई में.., अपने पूर्ण बल के लड़ाई से लगा है..., भविष्य के सत्ता के, खाने की मलाई ...,

बंद.., बंद.., बंद.., 
BANNED-BANNED-BANNED, सरकारी बैंक की छुट्टी से बैन 
WHOLE DAYS of week , देश बना WEAK, कभी सरकारी कर्मचारियों की मांग..., वेतन बढ़ाओ .., और काम के घंटे कम करों… 

कहते हैं पीने वाले को पीने का बहाना चाहिए, देश में छुट्टियो का भी यही हाल है 
१ लाख से कम पारसी , ०.३% जैन ,२% का सिख समुदाय के नाम से .., से छुट्टियों की बहार
आजादी का झांसा बना ...आ जल्दी –जल्दी आराम करें ...
इसके आड़ में एक छूपा नशीला नारा “ आराम हरम है”, जिसने की शुरूवात के अय्याशी से भ्रष्टाचार.., दी एक सौगात

1. याद रहे देश के पूर्व प्रधानमंत्री जिनका जन्म २८ फरवरी (लिप ईयर) को आता है..., वे अपनी मृत्यु के १०० साल की उम्र पूरी करने से दस माह पूर्व (February 29, 1896, Valsad
2. Died: April 10, 1995, New Delhi) एक नई लीपी लिखकर चले गए...,उनकी मृत्यू पर २ दिन का राष्ट्रीय अवकाश, तथा बीच में ३ दिन त्त्यौहार व महापुरषों के जन्म दिन आने से देश भर में ५ दिन बैंक बंद थे , तब देश में जनता द्वारा खलबली मचाने के बाद ..., देश के इतिहास में उस समय रविवार को विशेष रूप से जनता की बदहाली देखकर बैंक खुले..
3. बापू क्या है तेरे देश का योग...,सरकारी कर्मचारी कर रहें हैं, छुट्टियो का भोग,
4. तेरी जयन्ती के नाम से ..., अहिंसा दिवस से , आपके जीवन के पोषक ..., बकरियों के भोग से समाप्त हो रहा है सात दिनों का देश का रोग
5. २१वी सदी का तुम्हारे लिए है.., एक पैगाम.., राष्ट्र अभी भी है छुट्टियों का गुलाम...
6. ऐसे भी चंगू – मंगू नेताओं के भ्रष्टाचार से देश बना नंगू इसीलिए आज भी है ७५% हिन्दुस्तानी भूखा नंगू
7. गरीबों की छाती पर मूंग दलकर .., डाल –डाल , पात – पात से भ्रष्टाचारी कर रहे ललकार
8. बापू तेरे ‘पू’ से देश बीमार.., अहिंसा के बलात्कार से देश लाचार 

Thursday, 2 October 2014



यदि २ अक्टूबर व आने वाले सालों में हम यह दिवस लाल बहादुर शास्त्री, की जयन्ती के रूप में मनाएं तो देश के युवकों में लाल बहादुर शास्त्री के कार्यों से प्रेरित होकर, राष्ट्रवाद के खून का संचार से, जो काम गांधी न कर सके हम जल्द ही विश्व गुरू व सर्वोपरि हो जायेंगे..., दोस्तों आप अपनी राय दें..


१.लाल बहादुर शास्त्री ने अपने १९ महीने के शासन काल में नेहरू के १७ साल के कार्यकाल की गन्दगी साफ़ कर दी थी..
२.गांधी की गंदी राजनीती व जवाहर लाल नेहरू के जहर से देश ६८ साल के सत्ता परिवर्तन के शासन में कंगाल हो गया है...

३.देश में राष्ट्रवादी भावना से जनता को ओत प्रोत कर, श्वेत क्रांती के साथ हरित क्रांती का जन्म हुआ, उनका आव्हान था शहर वालों, घर के आस पास जितनी भी खाली जमीन है उसमें अन्न उगाओ.., उनकी सादगी से जनता कायल थी , लेकिन कांग्रेसी घायल थे, उनकी अय्याशी पर रोक लगने से, भ्रष्टाचार ख़त्म कर उन्हें मजदूर बना दिया था
४. पूरे देश को उन्होंने आव्हान किया की सोमवार को एक दिन का उपवास रखे , इसके पहिले उन्होंने कहा जब मेरा परिवार उपवास में सक्षम होगा तो ही मैं राष्ट्र को आव्हान करूंगा..
५. दक्षिण भारत जो हिन्दी विरोधी था उन्होंने भी इसका तहे दिल से अपनाया, व देश भर मे होटल बंद रहते थी,
नेहरू के दिन के २५ हजार के खर्च की जगह प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री महीने में मात्र ३०० रूपये में सरकारी वेतन से घर चलाते थे
उनकी जिदंगी एक अतिसाद्गीय व प्रधानमंमंत्री के रूप में सडक किनारे, रहने वाले एक गरीब जैसी थी ,
प्रधानमंत्री होने के बावजूद वे किराए के घर में रहते हुए उनकी रूस (मास्को) में ह्त्या हुई थी जाने कुछ पल उनके जीवन के...
७, लाल बहादुर शास्त्री हमेशा कहते थे सत्ता का स्वाद मत चखों..,देश की गरीबी के लिए काम करो, सत्ता के मद से अपने संस्कार मत बिगाड़ो, इसलिए उनके ६ बच्चे होने के बावजूद किसी वंशवाद की परम्परा को तोड़ते ही अपन बच्चों को राजनीती में कदम रखने नहीं दिया, यहाँ तक की अपने बच्चो को सरकारी कार में बैठने नहीं देते थे..,
घर से प्रधानमंत्री दफ्तर में पहुँचाने के बाद सरकारी कार छोड़ देते थे, वे अन्य मंत्रियों से कहते थे आप इसका उपयोग करें

८.. आजादी के आन्दोलन में अंग्रेज जब भी, कांग्रेसी नेता गिरफ्तार होते थे तो उन्हें जेल में विशेष खाना जैसे हलवा पुरी मिलती थी ..., लाल बहादुर शास्त्री वे खाना अन्य कैदियों में बाँट देते थे , कहते ऐसे मालपुआ भोजन से मैं बीमार पड़ जाऊंगा, और अन्य कैदीयों को बांटकर, वे भी खुश रहते थे...
३.जब उन्होंने रेल दुर्घटना की वजह से इस्तीफा दिया.., अगले दिन सरकारी घर खाली करने के पहले वे बिना बिजली के रहे ..., कहा, मेरा पद चला गया है .., मैं सरकारी बिजली खर्च नहीं करूंगा ..
९.. प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके घर में जब उन्होंने देखा तो उस कूलर को यह कहते ही वापस कर दिया कि इसकी आदत मुझे नहीं डालनी है..जब उनके शासन काल देश की
१०... १९५२ से कांग्रेस के “चुनाव चिन्ह” में “दो बैलों की जोड़ी” से, जवाहरलाल नेहरू ने चुनावी नारा “आराम हराम है” के अपने अय्याशी पन को छिपाकर जीता , सत्ता में आते ही इन दो बैलों को सत्ता की विदेशी शराब पीला कर बेहोशी में रखा.... और बिना किसान के, देश की उपजाऊ जमीन को बंजर बनाकर , देश में भूखमरी पैदाकर, विदेशी अनाज से देशवासियों का लालन पालन किया, हमें ऐसा घटिया/सड़ा अनाज खिलाने को मजबूर किया गया, जो कि अमेरिका के सूअर भी नहीं खाते थे ... हमारे सेना के जवानों के हाथों में बन्दूक थमाने की बजाय “शांती का गुलाबी फूल” थमा दिया .... और “हिन्दी –चीनी , भाई-भाई” के नारे में उसकी महक डालने से, नोबल पुरूस्कार जीतने की महत्वकांक्षा में सेना को नो बल कर दिया... हमारे से दो साल बाद, आजाद हुए “चीन” ने अपनी ताकत बढाते हुए .... मौके की ताक में हमारे देश ४६ हजार वर्ग किलोमीटर पर कब्जा कर , नेहरू को थप्पड़ मार कर , नेहरू का नारा “हिन्दी –चीनी , खाई –खाई” मे बदल दिया और नेहरू का “शांती” के नारें की देशवासियों के सामने पोल खोल दी
११. जवाहर लाल नेहरू की मौत के बाद . प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इन दो बैलों का किसान बनकर ,अपने साढ़े चार फीट की काया को, राष्ट्रवादी बल से , इन अपाहिज हुए जवानों व किसानों में एक नया आत्मबल डाल कर , “जय जवान – जय किसान” के नारा को १९ महीने में सार्थक बना दिया. लेकिन...., देश के कांग्रेसी तो वंशवाद से भयभीत थे ... लेकिन उससे कहीं ज्यादा भयभीत विदेशी ताकतें थी, उन्हें अहसास हो चुका था {यदि हमारा देश दो साल और “राष्ट्रवादी प्रवाह” से चलेगा तो हम हिन्दुस्तान आत्मनिर्भर बन जाएगा, और कोई ताकत उस पर राज नहीं कर सकेंगी} इसलिए , देश के “लाल” को सुनोयोजित षड़यंत्र से मारकर, उन्हें दूध में जहर दे कर “नीली” काया में उनके पार्थीव शरीर को लाया गया , हमारे देशी कांग्रेसी ताकतों ने भी इसे हृद्याधात से प्राकृतिक मौत से, बिना पोस्टमार्टम के, डर से... कही पोस्टमार्टम करने पर , देशी व विदेशी ताकतों का पोस्टमार्टम न हो जाए ... आनन – फानन में प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का शव दाह कर दिया , उनकी पत्नी अंत तक गुहार लगाती रही , मेरे पति की हत्या की जांच हो...
१२. ये वही काग्रेसी थे, जिन्होने लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद , उन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उनके किराए के घर मे घुसकर धावा बोला, तब उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने अपनी अलमारी खोलकर कांग्रेसीयो को दिखाते हुए कहा , देखो?, ये मेरा काला धन है, ये हमारी सपत्ति है, कांग्रेसीयो ने छान बीन की तो उसमे , लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर कुछ कागज मिले , उन कांग्रेसीयों को लगा कि इसमे लाल बहादुर शास्त्री के अचल व काले धन की संपत्ति के दस्तावेज हैं.
जब कांग्रेसीयो ने दस्तावेजों को खंगाला तो वह बैक के कर्ज के पेपर निकले, जो लाल बहादुर शास्त्री ने, प्रधानमंत्री के कार्यकाल मे, अपनी नीजी कार, बैक के कर्ज से खरीदी थी, और कर्ज अदायगी मे असमर्थ होने पर, बाद मे वह कार बैक को लौटा दी थी. तो वे उन सभी काग्रेसीयों के चेहरे उतर गये और् उनके घर से खाली-हाथ मलते लौटे.
१३.उसी तरह लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद, प्रधानमंत्री बनने के बाद, इंदिरा गाधी भी उनके किराए के घर गई, और उनका घर देखकर, अपना नाक सिकुडते हुए कहा.. “छी:… मिडल क्लास फैमिली” ( “छी:…मध्यम दर्जे का परिवार”)
१४.यह वही देश का लाल था , जिन्होने अपना जीवन देश को सर्मपित कर दिया था , और उस देश के लाल का मृत शरीर , विदेश से नीले रंग (मृत शरीर का नीला रंग, दर्शाता है कि शरीर मे विष का अंश है) मे आया, तो न कोई जाँच न कोई, न कोई पोस्ट मार्टम (शव विच्छेदन), आनन फानन मे अंतिम क्रिया कर दी गई,.ताकि मौत का रहस्य दब जायें?.
किसी ने अय्याशी की
किसी ने तानाशाही की
किसी ने वतन लूटा
किसी ने कफ़न लूटा
किसी ने देशवासियों को घोटाले से घोंट दिया
किसी ने जय-जवान, जय किसान के रखवाले की ह्त्या कर, देश की हरियाली ख़त्म कर दी 


अब महिला मानवाधिकार आयोग भी , मैला –धिक्कार आयोग बनकर फूले नहीं शमा रहा ..जजशाही भी नहीं शर्मा रही है.., घूस खोर शाही के लिए चूस खोर बनकर इस मुद्दे पर आबाद है...क्योंकि देश का संविधान , पश्चिम माफियाओं के गिरफ्त में है...

सत्यमेव जयते का अर्थ से देश की अनर्थाता कर,
सत्ता, मेवा, जयते – सत्ता एक मेवा है, इसकी जय है (सत्यम) (जो, मेरे वेबस्थल का स्लोगन है...), जब भ्रष्टाचार के त्रिशूल से (शिवम है), और भारत निर्माण के मेक अप से देश की सुंदरता का बखान हो रहा है (सुंदरम है ), – दोस्तो... यही डूबते देश की कहानी है, यह देश की, लूट – पानी है...., सत्य की खाल से, माफियाओ की ढाल बनी है , यह देश के बरबादी की मनमानी है .
१९४७ से सत्यमेव जयते से तो नेता .., अब अभिनेता भी उल्लू बनाविंग , करोड़ों रूपये कमाकर TRP बढ़ाविंग, मोदी का प्रखर विरोध कर, प्रधानमंत्री बनने के बाद, अपनी TRP की सी.डी. सौपिंग, इसी आड़ में “नग्न मेव जयते” की जय हो से, विदेशी संस्कृति चोरी कर देश पर थोपिंग व जनता को भरमाविंग

इनकी नग्नता में मीडिया भी भागीदार बनकर, इसकी पीछे की गन्दगी चाटकर , मीडिया भी पेट भरी बन गई है , P.K की देखा देखी में.., क्या अब आमीर खान भी अपनी फिल्म “पीपली लाइव” की तरह गांवों में जाकर,क्या इस पीके फिल्म की पब्लिसिटी के लिए , ट्रांसिस्टर लेकर नग्न होकर जायेंगे/ घूमते नजर आयेंगे.....,
आमिर खान अपनी 'पीके' के हाल में रिलीज हुए पोस्टर में जिस तरह न्यूमड नजर आए थे ठीक उसी तर्ज पर बॉलीवुड निर्देशक कांति शाह ने 'ओके' नाम की अपनी फिल्म का एक पोस्टजर रिलीज किया है। इसमें फिल्म की अभिनेत्री न्यूड नजर आ रही हैं और उनके गले में सिर्फ एक कैमरा लटका हुआ है. 'पीके' के पोस्टर में आमिर खान ने अपने शरीर के निचले हिस्से को एक ट्रांजिस्टर से ढंक रखा था जबकि 'ओके' के पोस्टार में हिरोइन का प्राइवेट पार्ट कैमरे से ढंका है.
'ओके' का पोस्टर....., 'ओके' के पोस्टर में फिल्म की अभिनेत्री पूनम रॉय एक रेलवे ट्रैक पर खड़ी हैं, ठीक उसी तरह जैसे आमिर खान 'पीके' के पोस्टर में दिखाई दिए थे। रॉय ने अपनी गर्दन से एक कैमरा लटका रखा है और इससे उनका प्राइवेट पार्ट ढंका हुआ है। उनके शरीर का बाकी हिस्सा न्यूड है। कांति शाह के इस पोस्टर पर विवाद हो सकता है क्योंकि आमिर का न्यू ड पोस्टर भी जब सामने आया था तो काफी बवाल मचा था। 'ओके' की कहानी देह व्याथपार के धंधे पर आधारित है.
कौन हैं कांति शाह?..., कांति शाह को बॉलीवुड की बी ग्रेड फिल्मों. का डायरेक्टर माना जाता है. उन्होंने कई फिल्में बनाई हैं जिनमें मिथुन चक्रवर्ती की लीड रोल वाली गुंडा प्रमुख है। इसके अलावा उन्होंने अंगूर, गरम, रंगबाज, फूलन हसीना रामकली, बसंती तांगेवाली, गंगा जमुना की ललकार आदि फिल्में बनाई हैं।

यदि, सत्यमेव जयते का हमारे नेता सत्कार करते तो, आज संविधान के जज, वकील और सरकारी बाबूओं की अय्याशीपन की दूकान न चलती .., वकीलों की टोली भूखी मरती...
मेरे वेबस्थल का स्लोगन है, “सत्ता मेवा है..,इसकी जय है” “मेरा संविधान महान..., यहां हर माफिया पहलवान”
१८७२ के पुलिस कानून बनने के पहले, देश में सिर्फ सदाचार से जनता भी समाज में सम्मान खोने के डर से उनकी आत्मा..., दुराचार, दुष्कर्म, बेईमानी करने से उसका हाथ पकड लेती थी
लार्ड मैकाले ने १८३५ में ब्रिटिश संसद में कहा था , मैंने हिन्दुस्तान के ओर –छोर (पाकिस्तान, बर्मा व अन्य हिन्दुस्थान से जुड़ें देश) की यात्रा की , मुझे कोई चोर उच्चका,भिखारी नहीं मिला, यदि इस देश को ब्रिटिश साम्राजय की सैकड़ों सालों की गुलामी के लिए अंग्रेजी भाषा की गुलामी थोपो...,
विदेशी आक्रमणकारियों के हमारे देश इतने हमले होने के बावजूद हमारा समाज , गुरूकुल शिक्षा से देशी, भाषा, विचार,संस्कार से समृद्ध था..
दोस्तों आज इस विदेशी संस्कृति की आड़ में गरीबो की देश शोषण व अमीरों के वहसीकरण से हिन्दुस्तान डूब रहा है...
याद रहे..., २००५ में आमीर खान ने मंगल पांडे फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी , युवा वर्ग कह रहे थे..., आमीर खान ने क्या बेहतरीन भूमिका निभाई है, लेकिन मंगल पांडे की क्रांती व बलिदान की अहम् भूमिका को भूल गए..,
२००७ में, दो साल बाद , मंगल पांडे का १५० वाँ जन्म था, इस फिल्म से करोड़ों रूपये कमाने वाले आमीर खान ने , दुर्लक्ष्य कर , इस दिन कोई उत्सव तो दूर की कौड़ी रही.., देश को कोई सन्देश तक नहीं दिया..., देश के अखबारों के विज्ञापनों भी बुझ गए थे ,
मंगल पांडे तो, इन दिखावेबाजों के धूल के तले आज तक दबें पड़ें हैं..
‘मंगल पांडे’ ने यह अहसास कराया कि जिन आजाद हवाओं में वह सांस ले रहे हैं वह उन्हें मंगल पांडे जैसे सेनानियों के बलिदान की बदौलत मिली है।’’
हमारे देश की गरीबी बेचकर , धनाड्य वर्ग से, फिल्म इंडस्ट्री के लोग और अमीर बनते गए.., १९५०-६० के दशक से “जागते रहो”, दो बीघा जमीन “और हाल की “जय हो “ और सत्यजीत रे जैसे फिल्म निर्माता अंतर्राष्ट्रीय पटल में पुरूस्कार पाकर वाहवाही लूटते रहें, ,देश का तिरस्कार कर, देश की गरीबी की छवी से विश्व में प्रसिद्ध हो गए..,

विदेशी देशों में इन्होनें हमारी ऐसी छवी बना दी थी कि विदेशी कहते थे , इस देश की संस्कृति पाषाण युग की है,,, यह देश सांप की पूजा करने वाला देश है...,
बलात्कार के चमत्कार से “सत्ता का सत्कार..”
वाह क्या सीन है ...
(कलमुंहे मेरी जयंती से “सत्यमेव जयते” का नशा “पी के” मेरी तरह जनता को “बेवकूफ” बना रहा है.
काले कपड़ों में मेरी वकालत नहीं चली..., तो सफ़ेद कपड़ों से असफल रहने से , अर्ध नग्नता से मैंने देश के टुकड़े रोकने के लिए “असत्य” की “रेल की पटरी” पर , खड़े होकर, मेरे शरीर के टुकड़े करने की धमकी दी थी ...)