Friday, 9 August 2013

देश की शान, स्वाभिमान तिरंगा देश मे, लहराता....???? लेकिन बड़े दुख के साथ लिखना पड रहा है.... यह तिरंगा हाथ बांधे व पैरो मे बेड़ी डाले, सेनाओ के निर्दोष शहीद जवानो पर डाला जा रहा है।

देश की शान, स्वाभिमान तिरंगा देश मे, लहराता....???? लेकिन बड़े दुख के साथ लिखना पड रहा है.... यह तिरंगा हाथ बांधे व पैरो मे बेड़ी डाले, सेनाओ के निर्दोष शहीद जवानो पर डाला जा रहा है। काश्मीर की समस्याओ के शहीदो के जवानो की संख्या 1962-1965-1971 के युद्ध मे अपने जज़्बे से लडकर शहीद जवानो से, कई गुना ज्यादा है।
याद रहे... दो साल पहले इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ने, अपने देश के दंगो से, अपना विदेश दौरा रद्द कर इस समस्या का निदान करने के लिए संसद को पूरे दिन व पूरी रात चलाया।
वही॥, हमारे डूबते देश की तस्वीर यह है...?????, रक्षा मंत्री एंटोनी, पाकिस्तानी सेना का बचाव करते हुए... उन्हे स्फूर्ती देते हुए कह रहे है...???? इसमे पाकिस्तानी सेना नहीं, आतंकीभेषी सेना का दोष है। लेकिन हमारा .... सुपर पावर पुतला खामोश है। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद भी कह रहे है प्रधानमंत्री को बयान देने के लिए विपक्षी मजबूर नहीं कर सकता है। संसद की इस टालमटोल बहस का परिणाम कुछ नहीं होगा। आज 66 साल बाद भी सीमा सुरक्षा नीति व खाद्य सुरक्षा बिल नही बना। पक्ष व विपक्ष दोनों इस बहसबाजी से संसद का समय बर्बाद कर इन दोनों बिलों को टालना चाहती है। यह दोनों गंभीरतम समस्याए है...?
तो क्यू नहीं...????? हमारी संसद, इंग्लैंड की तरह 24 घंटे चले। मैंने मेरी पुरानी पोस्ट, फेसबुक व वेबस्थल मे लिखा है (कार्टून के साथ)...... देश मे इतनी समस्याए है कि यदि संसद साल के 365 दिन 24 घंटे भी चले तो भी...???? समस्याए सुलझ नहीं सकती है। देश का सांसद प्रतिदिन 18000 वेतन लेकर ( साल के 62 लाख) व अन्य भरपूर भत्तो की, भरपूर सुविधाएं अलग से लेकर, संसद के भोजनालाय मे, 12-18 रुपये का पेटभर खाना खा कर देश की दुविधाएँ बढ़ा कर देश का समय बर्बाद कर रहा है। यो कंहे... संसद मे सेकी जा रही है, शहीदों के नाम पर रोटिया...?? , सीमाओ पर जवानो को खानी पड़ रही है गोलिया ...???, भ्रष्टा चारी व माफिया... खान, खदान, देश का ईमान बेचकर, व नकली मिड डे भोजन से...???? और मीडिया टी आर पी के चक्कर मे, पेड मीडिया बनकर, पेट भरी बनकर....,मना रही है रंगरेलिया...??????

आजादी के झाँसे से.... हम वोट बैंक के नाम से खिलवाड़ कर सकते है...??? घुसपैठीयों को हम देश मे, 600 रूपये मे घुसाकर...??/, उनके नाम पर विशेष योजना व आधार कार्ड बनाकर, हम सत्ता का बेजोड़ आधार बनाकर, देशवासियों को आतंक का डर दिखा सकते है, हम... जवानो के हाथो को बाँध कर व पाँवो मे बेड़िया डालकर... उनके सर कटा कर दे सकते है लेकिन हम LOC-(LOVE OF COMBINATION-प्रेम के जोड से – देश को तोड़ सकते है...??) पार करने की अनुमति दे सकते नही...???

आजादी के झाँसे से.... हम वोट बैंक के नाम से खिलवाड़ कर सकते है...??? घुसपैठीयों को हम देश मे, 600 रूपये मे घुसाकर...??/, उनके नाम पर विशेष योजना व आधार कार्ड बनाकर, हम सत्ता का बेजोड़ आधार बनाकर, देशवासियों को आतंक का डर दिखा सकते है, हम... जवानो के हाथो को बाँध कर व पाँवो मे बेड़िया डालकर... उनके सर कटा कर दे सकते है लेकिन हम LOC-(LOVE OF COMBINATION-प्रेम के जोड से – देश को तोड़ सकते है...??) पार करने की अनुमति दे सकते नही...???
26/11 हमले के दौरान , सीमा पार से, आतंकवादियो के आँकाओ ने, भारत सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा , हिन्दुस्तान मे हमारे लाखो समर्थक है... रोक सके तो रोको ...?? सरकार ने आंखे मूँद ली और जनता भी यह चुनौती भूल गई है ...???? आज देश मे 10 करोड़ घुसपैठीये है...???????????????????????
आज चीन हमसे दो साल बाद आजाद होने के बावजूद , जनता को राष्ट्रवादीयो का बैंक बनाकर, चीन जो जापान का गुलाम था ...???? ,आज, उसे धमकी दे रहा है... अमेरिका भी उससे थर्रा रहा है, उससे, सीधा पंगा नही लेता है ...????
मेरे वेबस्थल की 3 नवंबर 2012 की प्रवष्टि के अंश... घुसपैठ-इसका ईलाज...????
इसका उदाहरण चीन है, जहाँ एक दम्पति सिर्फ एक संतान पैदा कर सकता है, 6-7 महिने पहले मैने एक खबर पढी थी , सुदूर गाव मे एक महिला को 8 महिने का दूसरा गर्भ था, जब सरकार को पता चला तो उसने, उसका पेट फाड कर संतान को मार डाला और महिला को जेल मे डाल दिया.
क्या आप कल्पना कर सकते है ?, कि चीन कोइ घुसपैठ सहन कर सकता है.
हमारे देश मे तीन प्रकार की घुसपैठ है
1. सीमा पार से घुसपैठ – 10 करोड से ज्यादा – देश मे 30% से ज्यादा की विकास दर है (G.D.P.-घुसपैठीया डेवलपमेट प्रोग्राम – 30% से ज्यादा)
2.देश मे घूस पैठ – रिश्वत की पैठ – देश मे 300% से ज्यादा की विकास दर है
और सरकार, घरेलू विकास दर 5% भी नही पहुँचने पर चितित है
3. इस घरेलू विकास दर को बढाने के लिये सरकार विदेशी धन माफियाओ की घुसपैठ करा रही है , वे सरकार के मिलीभगत से, झूठा विकास दिखाकर, जनता को भरमाकर, लूटेरो के साथ अपनी भगीदारी कर, सत्ता धारी अपने खजाने भर रहे है. इनकी पूजी 300-3000 गुना से ज्यादा बढ रही है और जनता अपने आपको लूटते हुए देख रही है
मेरे 16 अक्टूबर की प्रवष्टि के अंश......आज हम 65 साल बाद भी पीछे क्यो? हम विदेशीयों का मुँह क्यो ताकते है???

1.विदेशी भाषा, विदेशी विचार, विदेशी संस्कार, विदेशी हत्यार, विदेशी हाथ, विदेशी बात.
अभी हाल मे ही हमारी सरकार ने आदेश दिया है कि हिन्दी भाषा मे अंग्रेजी शब्द का प्रयोग मान्य होगा (हिग्लीश भाषा)
2.हमने अमेरिका , रूस व युरोपीय देशो के तलवे चाटने मे ही अपना भविष्य समझा
और हम सुपर पावर का ढोल पीटते रहे , और देश कर्ज मे डूबते गया .
3.हमारी सरकारे , अहिंसा की आड मे देश को लूटते रहीं, और गर्व से कहते गई,हमारे देश ने 5000 सालो से विदेशी आक्रमण नही किया है और हमारा सिद्धांत है कि हम हमारे हत्यार विदेशो मे नही बेचेंगे और विदेशों से हत्यार आयात के घोटाले के नाम से अपनी तिजोरिया भरती गयीं
इडिया……….हमारा देश, डरता है ,,,,,,, डराने वाला चाहिये? ………
चीनी देश का कहना है
दुनिया… झुकती है ?……. झुकाने वाला चाहिये …………….??
चीन हमसे दो साल बाद आजाद होने के बाद ,हमसे पाच गुना से ज्यादा आगे क्यो ??
1.देशी भाषा, देशी विचार, देशी संस्कार, देशी हत्यार, देशी हाथ, देशी बात.
वही चीनी सरकार ने आदेश दिया है कि चीनी भाषा मे अंग्रेजी शब्द का प्रयोग मान्य नही होगा
किसी भी देश की भाषा को तोड्ना – मतलब देश की एकता तोड्ना…???? और हमारे सरकार ने आदेश दे दिया है कि हिन्दी मे अग्रेजी शब्द (हिंग्लीस) मान्य होगा....

Monday, 5 August 2013



हे माँ , तेरा वैभव अमर रहे......., आप घर की नही, देश की भारतमाता हो... वन्देमातरम... तुम्हे शत: शत: प्रणाम........
माँ, तेरा प्यार दिल के आँसुओ से भरा रहता है, तुम्हारा दिल तो वात्सलय से 24 घंटे धडकता.. है... हर दु:ख पहुचाने वाले पति से बच्चे हर सख्श तक को आप माफ कर देती हो.. तकि आप की आँसू से वे अपने गलती का अहसास समझ कर प्रायश्चित (सुधर सके) कर सके, माँ , आप तो, सौ बार अपने आँसुओ से मौका देती है....माँ तेरे आँसु सागर से भी गहरे है. लेकिन तेरे सागर के आँसु तो लोगो को जीवन मे कैसे तैरना है, वह सिखाती है...आज तक तेरे आँसु के सागर कोई भी डूबा नही है...क्यो कि इसमे वात्सलय का नमक है..


चित्र मे...ये जो व्यक्ति खड़ा है अंजाने मे हम इसे भारत भाग्य विधाता कहते है
क्या आप जानते है ?
गुलामी के प्रतीक ! जन गण मन की कहानी ............................... यह है हमारी गुलामी की अब तक की सच्चाई... जन –गण-मन से देश से लूटने का खेल, कैसे लूटने की जड़ मजबूत हो रही है...?? – संकलन- कैलाश तिवारी meradeshdoooba.comद्वारा

क्या किसी ने जन गण मन गाते सोचा की आखिर ये कौन ‘अधिनायक’ और ‘भारत भाग्य विधाता’ हैं जिनके जयघोष से हम अपने राष्ट्रगान की शुरुआत करते हैं?

सन 1911 तक भारत की राजधानी बंगाल हुआ करता था। सन 1905 में जब बंगाल विभाजन को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ बंग-भंग आन्दोलन के विरोध में बंगाल के लोग उठ खड़े हुए तो अंग्रेजो ने अपने आपको बचाने के लिए के कलकत्ता से हटाकर राजधानी को दिल्ली ले गए और 1911 में दिल्ली को राजधानी घोषित कर दिया। पूरे भारत में उस समय लोग विद्रोह से भरे हुए थे तो अंग्रेजो ने अपने इंग्लॅण्ड के राजा को भारत आमंत्रित किया ताकि लोग शांत हो जाये। इंग्लैंड का राजा जोर्ज पंचम 1911 में भारत में आया। रविंद्रनाथ टैगोर पर दबाव बनाया गया कि तुम्हे एक गीत जोर्ज पंचम के स्वागत में लिखना ही होगा।

उस समय टैगोर का परिवार अंग्रेजों के काफी नजदीक हुआ करता था, उनके परिवार के बहुत से लोग ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम किया करते थे, उनके बड़े भाई अवनींद्र नाथ टैगोर बहुत दिनों तक ईस्ट इंडिया कंपनी के कलकत्ता डिविजन के निदेशक (Director) रहे। उनके परिवार का बहुत पैसा ईस्ट इंडिया कंपनी में लगा हुआ था। और खुद रविन्द्र नाथ टैगोर की बहुत सहानुभूति थी अंग्रेजों के लिए। रविंद्रनाथ टैगोर ने मन से या बेमन से जो गीत लिखा उसके बोल है "जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्यविधाता"। इस गीत के सारे के सारे शब्दों में अंग्रेजी राजा जोर्ज पंचम का गुणगान है, जिसका अर्थ समझने पर पता लगेगा कि ये तो हकीक़त में ही अंग्रेजो की खुशामद में लिखा गया था।

इस राष्ट्रगान का अर्थ कुछ इस तरह से होता है "भारत के नागरिक, भारत की जनता अपने मन से आपको भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है। हे अधिनायक (Superhero) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो। तुम्हारी जय हो ! जय हो ! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा मतलब महारास्त्र, द्रविड़ मतलब दक्षिण भारत, उत्कल मतलब उड़ीसा, बंगाल आदि और जितनी भी नदिया जैसे यमुना और गंगा ये सभी हर्षित है, खुश है, प्रसन्न है , तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है। तुम्हारी ही हम गाथा गाते है। हे भारत के भाग्य विधाता (सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो जय हो जय हो। "

जोर्ज पंचम भारत आया 1911 में और उसके स्वागत में ये गीत गाया गया। जब वो इंग्लैंड चला गया तो उसने उस जन गण मन का अंग्रेजी में अनुवाद करवाया। क्योंकि जब भारत में उसका इस गीत से स्वागत हुआ था तब उसके समझ में नहीं आया था कि ये गीत क्यों गाया गया और इसका अर्थ क्या है। जब अंग्रेजी अनुवाद उसने सुना तो वह बोला कि इतना सम्मान और इतनी खुशामद तो मेरी आज तक इंग्लॅण्ड में भी किसी ने नहीं की। वह बहुत खुश हुआ। उसने आदेश दिया कि जिसने भी ये गीत उसके (जोर्ज पंचम के) लिए लिखा है उसे इंग्लैंड बुलाया जाये। रविन्द्र नाथ टैगोर इंग्लैंड गए। जोर्ज पंचम उस समय नोबल पुरस्कार समिति का अध्यक्ष भी था।

उसने रविन्द्र नाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार से सम्मानित करने का फैसला किया। तो रविन्द्र नाथ टैगोर ने इस नोबल पुरस्कार को लेने से मना कर दिया। क्यों कि गाँधी जी ने बहुत बुरी तरह से रविन्द्रनाथ टेगोर को उनके इस गीत के लिए खूब डांटा था। टैगोर ने कहा की आप मुझे नोबल पुरस्कार देना ही चाहते हैं तो मैंने एक गीतांजलि नामक रचना लिखी है उस पर मुझे दे दो लेकिन इस गीत के नाम पर मत दो और यही प्रचारित किया जाये क़ि मुझे जो नोबेल पुरस्कार दिया गया है वो गीतांजलि नामक रचना के ऊपर दिया गया है। जोर्ज पंचम मान गया और रविन्द्र नाथ टैगोर को सन 1913 में गीतांजलि नामक रचना के ऊपर नोबल पुरस्कार दिया गया।

रविन्द्र नाथ टैगोर की ये सहानुभूति ख़त्म हुई 1919 में जब जलिया वाला कांड हुआ और गाँधी जी ने लगभग गाली की भाषा में उनको पत्र लिखा और कहा क़ि अभी भी तुम्हारी आँखों से अंग्रेजियत का पर्दा नहीं उतरेगा तो कब उतरेगा, तुम अंग्रेजों के इतने चाटुकार कैसे हो गए, तुम इनके इतने समर्थक कैसे हो गए ? फिर गाँधी जी स्वयं रविन्द्र नाथ टैगोर से मिलने गए और बहुत जोर से डाटा कि अभी तक तुम अंग्रेजो की अंध भक्ति में डूबे हुए हो ? तब जाकर रविंद्रनाथ टैगोर की नीद खुली। इस काण्ड का टैगोर ने विरोध किया और नोबल पुरस्कार अंग्रेजी हुकूमत को लौटा दिया। सन 1919 से पहले जितना कुछ भी रविन्द्र नाथ टैगोर ने लिखा वो अंग्रेजी सरकार के पक्ष में था और 1919 के बाद उनके लेख कुछ कुछ अंग्रेजो के खिलाफ होने लगे थे।

रविन्द्र नाथ टेगोर के बहनोई, सुरेन्द्र नाथ बनर्जी लन्दन में रहते थे और ICS ऑफिसर थे। अपने बहनोई को उन्होंने एक पत्र लिखा था (ये 1919 के बाद की घटना है) । इसमें उन्होंने लिखा है कि ये गीत 'जन गण मन' अंग्रेजो के द्वारा मुझ पर दबाव डलवाकर लिखवाया गया है। इसके शब्दों का अर्थ अच्छा नहीं है। इस गीत को नहीं गाया जाये तो अच्छा है। लेकिन अंत में उन्होंने लिख दिया कि इस चिठ्ठी को किसी को नहीं दिखाए क्योंकि मैं इसे सिर्फ आप तक सीमित रखना चाहता हूँ लेकिन जब कभी मेरी म्रत्यु हो जाये तो सबको बता दे। 7 अगस्त 1941 को रबिन्द्र नाथ टैगोर की मृत्यु के बाद इस पत्र को सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने ये पत्र सार्वजनिक किया, और सारे देश को ये कहा क़ि ये जन गन मन गीत न गाया जाये।

1941 तक कांग्रेस पार्टी थोड़ी उभर चुकी थी। लेकिन वह दो खेमो में बट गई। जिसमे एक खेमे के समर्थक बाल गंगाधर तिलक थे और दुसरे खेमे में मोती लाल नेहरु थे। मतभेद था सरकार बनाने को लेकर। मोती लाल नेहरु चाहते थे कि स्वतंत्र भारत की सरकार अंग्रेजो के साथ कोई संयोजक सरकार (Coalition Government) बने। जबकि गंगाधर तिलक कहते थे कि अंग्रेजो के साथ मिलकर सरकार बनाना तो भारत के लोगों को धोखा देना है। इस मतभेद के कारण लोकमान्य तिलक कांग्रेस से निकल गए और उन्होंने गरम दल बनाया। कोंग्रेस के दो हिस्से हो गए। एक नरम दल और एक गरम दल।

गरम दल के नेता थे लोकमान्य तिलक जैसे क्रन्तिकारी। वे हर जगह वन्दे मातरम गाया करते थे। और नरम दल के नेता थे मोती लाल नेहरु (यहाँ मैं स्पष्ट कर दूँ कि गांधीजी उस समय तक कांग्रेस की आजीवन सदस्यता से इस्तीफा दे चुके थे, वो किसी तरफ नहीं थे, लेकिन गाँधी जी दोनों पक्ष के लिए आदरणीय थे क्योंकि गाँधी जी देश के लोगों के आदरणीय थे)। लेकिन नरम दल वाले ज्यादातर अंग्रेजो के साथ रहते थे। उनके साथ रहना, उनको सुनना, उनकी बैठकों में शामिल होना। हर समय अंग्रेजो से समझौते में रहते थे। वन्देमातरम से अंग्रेजो को बहुत चिढ होती थी। नरम दल वाले गरम दल को चिढाने के लिए 1911 में लिखा गया गीत "जन गण मन" गाया करते थे और गरम दल वाले "वन्दे मातरम"।

नरम दल वाले अंग्रेजों के समर्थक थे और अंग्रेजों को ये गीत पसंद नहीं था तो अंग्रेजों के कहने पर नरम दल वालों ने उस समय एक हवा उड़ा दी कि मुसलमानों को वन्दे मातरम नहीं गाना चाहिए क्यों कि इसमें बुतपरस्ती (मूर्ति पूजा) है। और आप जानते है कि मुसलमान मूर्ति पूजा के कट्टर विरोधी है। उस समय मुस्लिम लीग भी बन गई थी जिसके प्रमुख मोहम्मद अली जिन्ना थे। उन्होंने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया क्योंकि जिन्ना भी देखने भर को (उस समय तक) भारतीय थे मन,कर्म और वचन से अंग्रेज ही थे उन्होंने भी अंग्रेजों के इशारे पर ये कहना शुरू किया और मुसलमानों को वन्दे मातरम गाने से मना कर दिया। जब भारत सन 1947 में स्वतंत्र हो गया तो जवाहर लाल नेहरु ने इसमें राजनीति कर डाली। संविधान सभा की बहस चली। संविधान सभा के 319 में से 318 सांसद ऐसे थे जिन्होंने बंकिम बाबु द्वारा लिखित वन्देमातरम को राष्ट्र गान स्वीकार करने पर सहमति जताई।

बस एक सांसद ने इस प्रस्ताव को नहीं माना। और उस एक सांसद का नाम था पंडित जवाहर लाल नेहरु। उनका तर्क था कि वन्दे मातरम गीत से मुसलमानों के दिल को चोट पहुचती है इसलिए इसे नहीं गाना चाहिए (दरअसल इस गीत से मुसलमानों को नहीं अंग्रेजों के दिल को चोट पहुंचती थी)। अब इस झगडे का फैसला कौन करे, तो वे पहुचे गाँधी जी के पास। गाँधी जी ने कहा कि जन गन मन के पक्ष में तो मैं भी नहीं हूँ और तुम (नेहरु ) वन्देमातरम के पक्ष में नहीं हो तो कोई तीसरा गीत तैयार किया जाये। तो महात्मा गाँधी ने तीसरा विकल्प झंडा गान के रूप में दिया "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा"। लेकिन नेहरु जी उस पर भी तैयार नहीं हुए।

नेहरु जी का तर्क था कि झंडा गान ओर्केस्ट्रा पर नहीं बज सकता और जन गन मन ओर्केस्ट्रा पर बज सकता है। उस समय बात नहीं बनी तो नेहरु जी ने इस मुद्दे को गाँधी जी की मृत्यु तक टाले रखा और उनकी मृत्यु के बाद नेहरु जी ने जन गण मन को राष्ट्र गान घोषित कर दिया और जबरदस्ती भारतीयों पर इसे थोप दिया गया जबकि इसके जो बोल है उनका अर्थ कुछ और ही कहानी प्रस्तुत करते है, और दूसरा पक्ष नाराज न हो इसलिए वन्दे मातरम को राष्ट्रगीत बना दिया गया लेकिन कभी गया नहीं गया। नेहरु जी कोई ऐसा काम नहीं करना चाहते थे जिससे कि अंग्रेजों के दिल को चोट पहुंचे, मुसलमानों के वो इतने हिमायती कैसे हो सकते थे जिस आदमी ने पाकिस्तान बनवा दिया जब कि इस देश के मुसलमान पाकिस्तान नहीं चाहते थे, जन गण मन को इस लिए तरजीह दी गयी क्योंकि वो अंग्रेजों की भक्ति में गाया गया गीत था और वन्देमातरम इसलिए पीछे रह गया क्योंकि इस गीत से अंगेजों को दर्द होता था।

बीबीसी ने एक सर्वे किया था। उसने पूरे संसार में जितने भी भारत के लोग रहते थे, उनसे पुछा कि आपको दोनों में से कौन सा गीत ज्यादा पसंद है तो 99 % लोगों ने कहा वन्देमातरम। बीबीसी के इस सर्वे से एक बात और साफ़ हुई कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय गीतों में दुसरे नंबर पर वन्देमातरम है। कई देश है जिनके लोगों को इसके बोल समझ में नहीं आते है लेकिन वो कहते है कि इसमें जो लय है उससे एक जज्बा पैदा होता है।

तो ये इतिहास है वन्दे मातरम का और जन गण मन का। अब ये आप को तय करना है कि आपको क्या गाना है ?

Sunday, 4 August 2013




मै…., मेरा हिंन्दुस्थान लूटने नही दूँगी….?? दुर्गा देवी तुम…महान हो … बुझे दिल सत्ताखोरों के टुकड़ो मे पलने वाले नौकरशाही को तमाचा हो…????
यह कार्टून दुर्गा शक्ति को समर्पित है…. , जो माफियाओ के लिए काली देवी बनकर, देश की लक्ष्मी बाई बनकर, माफियाओ व सत्ताखोरों को हूँकार दे कर कह रही है… मै…., मेरा हिंन्दुस्थान लूटने नही दूँगी…?????
और आज के नौकरासाह, जो मुर्गा बनकर , माफियाओ व सत्ताखोरों की आवाज़ मे कूकड़ू – कू …. की आवाज़ मे , देश के लूटेरो के दानो पर पल रहे है….???? उनके लिए यह, एक तमाचा है….???? जिनके जूते तले दबकर, नौक्रर-साही , सत्ताखोरों को झूला, झूला रही है….
इस कार्टून मे आज के टॉप 5 जमाई है…इनमे से कानीमोझी जेल से छूटने के बाद, राज्यसभा की सदस्य बन गई, पवन बंसल चैन की बंसी बजा रहे है, राजा तो अब भी राजा बने है, कलमाड़ी का रूतबा , और मजबूत हुआ है, जेल से छूटने के बाद , बैड, बाजा , बाराती के साथ “भारतमाता की जय” के उद्घोष के साथ ,महाराष्ट्र के पुना मे, इस भ्रष्टाचार के दूल्हे का जश्न के साथ स्वागत हुआ…??? वाड्रा तो देश का राष्ट्रीय जमाई होने से, अभी भी भ्रष्टाचार का मनी मून मना रहा है। व अशोक खेमका का तबादला करा कर, प्रशासन को ठेंगा दिखा रहा है…????
आओ हम भी दुर्गा शक्ति से प्रेरणा लेकर ,हम, प्रतिज्ञा करे…. हम अपना हिंन्दुस्थान , देशी व विदेशी माफियाओ व सत्ताखोरों के हाथ लूटने नही देंगे …???।
मेरी श्रदांजली , उत्तरप्रदेश के जिया उल हक, महाराष्ट्र के सोनावणे व मध्य प्रदेश के आईपी एस आधिकारी नरेन्द्र जी को है ….. जिन्होने,, माफियाओ व सत्ताखोरों की परवाह न करते हुए अपना बलिदान दिया है…
आओ एक संकल्प ले , अब हम इन घटनाओ के देखकर, जमहाई व अंगड़ाई नही लेंगे , और देश के माफियाओ व सत्ताखोरों को देश का जमाई बनने नही देंगे …..
मेरे वेबस्थल के अंश पुन: लिखा रहा हूँ… जागे हुए लोगों से कहता हूँ जमहाई लेते हैं । सोते हुए लोगों से कहता,हूँ….अंगड़ाई लेतेहैं। कब्र के मुर्दे से कहा, मै कुछ….कह पाता,मुझे…भ्रष्टाचार॰का इंजेक्शन लग चुका था…. उसने….मुझसे कहा…,आप देश द्रोही बनकर, देश के लिये पागल होकर,,कुछ तो कहो ताकी मेरी मजार पर आदर्श,नेताओ,माफियाओं की मंजिल न बन सके।
यदि जनता जमहाई लेते रहेगी तो ….????, हर दिन देश के हजारो ,नये लूटेरे, जमाई बनकर देश को लूटते रहेंगे….पिछला उदाहरण 2जी से , जनता के कॉमन वेल्थ से, कोयले से मुँह काला कर , खान , खदान, ईमान बेचकर भी, इनके चेहरे की, चमक बढ़ते ही जा रही है है…???, उपर से, ये,और विपक्षी दल भी इसमे सम्मलित होकर अपने को आर टी आई के दायरे मे न लाने का कानून बना रहे है … जनता को एक खुली चेतावनी देकर कह रहे है, रोक सके तो रोकों …..???????
जागो…..?? जागो…..??? जागो…..???? ….. देशवासियो अब जमहाई लेने का समय नही है….??????????????????

Friday, 2 August 2013





भ्रष्टाचारियो के कुतुबमीनार की जीत...??????????
देश के कारगिल के शहीदो के नाम से, देश के दरिंदों ने भ्रष्टाचार को माखन लगा कर इस 31 मंज़िला कुतुबमीनार को बनाया। इस इमारत का खर्च 100 करोड़ से ज्यादा है लेकिन 125 करोड़ रुपये के कागजी घोड़े (कानून के कागज़) मे खर्च करने के बावजूद न्यायव्यवस्था को धोखा देकर राज्य सरकार के मिली भगत वाले, आयोग ने क्लीन चिट दे दी है।
याद रहे मुंबई हाईकोर्ट ने 14 महीने पहले इस आदर्श भ्रष्टाचार के मंदिर को ढहाने का आदेश दिया था...???, इसके बावजूद अदालत को ठेंगा दिखा कर यह जांच रिपोर्ट तैयार की है।
महाराष्ट्र के दो बार मुख्यमंत्री बने विलास राव देशमुख कही इस आंच से कहीं झूलस न जाए, इसलिए उन्हे केन्द्रीय मंत्री के पद से सुशोभित किया गया। 11 महीने पहले विलास राव देशमुख लिवर(Liver= live + fever भ्रष्ठाचार से जिंदा रहने की बीमारी) की बीमारी का शिकार होगाए। उनकी मृत्यु के बाद सभी मंत्रियो ने आदर्श भ्रष्टाचार का ठीकरा विलास राव (विलासिता + मुख्य) का नाम कहकर फोड़ दिया।

देश के दो सूरमा, एक पूर्व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व केन्द्रीय मंत्री विलासराव देशमुख , और कन्हैयालाल गिड्वानी जो गिरवानी बनकर आदर्श मंजिल से गिरकर शहीद हो गये है? दोस्तों आप ही अपने विवेक से बतायें ये देश के सोसाइटी (SOCIETY – SUCIDEE- आत्महत्या) के शहीद हैं या गरीबों के आत्महत्यारे..????

इस 400 फ्लाटो मे (एक फ्लॅट एक सब्जीवाले को, व कई झूठे नामों से भी आबंटन) किया गया तथा सभी अधिकार राजनेताओ ने अपने नाम रखे। हाल ही मे, महाराष्ट्र सरकार ने 500 करोड़ की योजना से नाशिक मे विलास राव देशमुख के भ्रष्टाचार के आदर्शो को जीवित रखने की लिए 50 एकड़ से ज्यादा की भूमि आबंदित की है। इस घोटाले मे दूसरे टपकने वाले कन्हैयालाल गिडवानी ,जो आदर्शतम बनने के लिए सीबीआई को 2 करोड़ की रिशवत देने के मामले मे पकड़े जाने से जेल गए थे, वह बाद मे जमानत मे रिहा हो गये और हार्ट अटैक (Heart Attack= High+ tech)।
याद रहे आदर्श भ्रष्टाचार के मंजिल के किराए व बिक्री के विज्ञापनो की वैबसाइट. अखबारो व इंटरनेट मे प्रकाशित हो गयी थी। एक कमरे का किराया प्रतिमाह 4 लाख रुपये और बिक्री की कीमत 60 करोड़ से ज्यादा आँकी गयी थी। बड़े दुख के साथ मे लिखना पढ़ रहा है सुशील कुमार शिंदे ,जो इसके मुख्य सूत्रधार है, जिनके केन्द्रीय बिजली मंत्री के कार्यकाल मे देश की आधी बिजली गायब करने के बाद उन्हे, इसी भ्रष्टाचार की गरिमा से सुशोभित करने के लिए देश के गृहमन्त्री पद से सुशोभित किया गया है... जिसके तुरंत बाद उन्होने, पूना की एक सभा मे कहा...???? देश की जनता भेडो से से भी बदतर है, जो बोफोर्स घोटाले तक भूल गई है...????, तो क्या हमारे नए घोटाले को याद करेगी....????, अपने अटपटे बयानो से आज के डूबते देश के आतंकी घटनाओ के बारे मे हँसते हुए कहते है,”मैंने पहले ही कह दिया था आतंकवादी हमले होंगे ”। अपरोक्षय रूप से उनका कहना है इसको रोकने की ज़िम्मेदारी मेरी नहीं है...???।
दोस्तो जब संविधान हो गुलाम, तो नेता बने, बेलगाम व जनता बन रही हे बेजुबान। जब देश मे सांसदो की वेतन की बढोतरी का बिल 5 मिनट मे पास हो जाता है, और आरटीआई मे राजनेताओ को दायरे मे न लाने का बिल, बिना बहस के सभी पक्षो द्वारा सहमति दे दी जाती है, देशवासियों जागो सोचो....? सोचो....?? सोचो...???. क्या से क्या हो रहा हैं ...?????, कैलाश तिवारीmeradeshdoooba.com से
 — with Umesh Joshi Omi Bped, Thakur Shamsher Singh, Ajeet Singh Narwatand 41 others.

  • Umesh Joshi Omi Bped इन कमीनों को clean chit दो और ईमानदार अफसरों को निलम्बित करो। इस देश में अब जंगलराज हो गया है। जब अफसरों की ही कुछ नहीं चल रही है, तो ऐसे में आम जनता की क्या चलेगी! क्या कोई है उसकी तरफ देखने वाला! जिनके पास power है, वो उसका दुरूपयोग कर रहे हैं। जनता का ही खा रहे हैं और उसी को धोखा भी दे रहे हैं। देश में बहुत ही निराशा का माहौल है।
  • Sonu Yadav doston maine bachpan mei eek kahaani padhi thi ye kuch waise hi hai.... kisi ek ke immandarr hone se aur facebook per uss imaandaar ki wah-wah karne se kuch nahi hoga.. iss corrupt samaj se hum sub ko ladna hoga... hum sab unn chuhoon ki terha hai jo ye soch ke kush hogye the ki billi ke gale mei ghanti baandhe ge... per aakhir billi ke gale mein ghanti baandhega kaun ???
    • Mahesh Chndra Varma ||ॐ साई ॐ|| ब्रह्मांड का शक्तिपुंज...........सबका मालिक एक.......
      केवल भारत माता के सच्चे सपूत ही पढ़ें....क्योँकि इसको समझना लुच्चो के बस कि बात नही है.....
      भ्रष्टाचार रिकॉर्ड तोड़ जनता को परेशानी कमरतोड़ .... ये सारे हरामखौर .ना तो ये शराफ़त से मानें
      गे ....ना ही अदालत से मानेंगे.....अगर मानेंगे तो बस जनता कि बगावत से मानेंगे.....
      देश के सभी भ्रष्ट नेताओं और मंत्रियों का भरसक प्रयास है कि उनकी पार्टी के आपराधिक आचरण वाले बलात्कारी,व्यभिचारि,भ्रश्तचरि नेताओं और प्रतिनिधियों को चुनाव लड़ने से रोकने का "सुप्रीम कॉर्ट" को कोई अधिकार नही है....क्या करेगी अदालत ...जब नेता बरपायेगा कयामत....क़ानून सुप्रीम कोर्ट बनायेगा ...देश का भ्रष्ट नेता कानून बदलकर अपनी ताकत दिखायेगा ...ना ही सूचना के अधिकार का कानून ही उस पर लागू हो पायेगा....ना ही अपराधियों को सत्ता से बाहर किया जायेगा.......अदालत और क़ानून आम आदमी के लिए होते है.....देश कि सत्ता तो चोर,डकैत,बैमान और भ्रष्ट नेताओं के बाप कि बपौती है... पुलिस और जज को नेता ही कुर्सी पर बैठता है..देश कि सत्ता कि .कुर्सी पर बैठने वाले को कैसे हताओगे...उस पर लगाम लगाओगे तो पिछवाड़े पर लात खाओगे ही....
      तो जजों के फैसले को ठुकराया गया ...दागियो के दमन को बचाया गया....बंद किए दरवाजे से क़ानून का ताला हटाया गया...और सुप्रीम कोर्ट फैसले पर फैसला सुनाया गाया... अब संसद में विधेयक लायेंगे ...पारित करवायेंगे और संसद में वैथे 27%चोर,डकैत,बैमान और भ्रष्ट नेता और विधान सभाओं में बैठे 21% चोर,डकैत,बैमान और भ्रष्ट नेता ,मुलाजिम से बेदाग करार दिए जायेंगे....देश कि अदालतें भी चोर,डकैत,बैमान और भ्रष्ट नेताओं को सत्ता में घुसने से नही रोक पा रही है ..जनता मजबूर नजर आ रही है...अब इन हराम खोरो से मुक्ति कि एक हूँ सूरत नजर आ रही है...जनता को उग्रवादी और आतंकवादी बनाना पड़ेगा...भगतसिंह ,चंद्रशेखर आज़ाद ,राज गुरु,सुखदेव,सुभाष चंद्र बॉस,रानि लक्ष्मी बाई आदि कि तरह काले अँगरेजों को मार काट कर भागना ही पड़ेगा ...आज़ाद हिंद फौज एक बार फिर बनाना ही पडे़गा ...इंकलाब करना ही पड़ेगा...इंकलाब करना ही पड़ेगा....ये काले अँगरेज हमारी कुल आबादी का 0.0001% भी नही है......
      वंदे मातरम्‌,

भ्रष्टाचारियो के कुतुबमीनार की जीत...??????????
देश के कारगिल के शहीदो के नाम से, देश के दरिंदों ने भ्रष्टाचार को माखन लगा कर इस 31 मंज़िला कुतुबमीनार को बनाया। इस इमारत का खर्च 100 करोड़ से ज्यादा है लेकिन 125 करोड़ रुपये के कागजी घोड़े (कानून के कागज़) मे खर्च करने के बावजूद न्यायव्यवस्था को धोखा देकर राज्य सरकार के मिली भगत वाले, आयोग ने क्लीन चिट दे दी है। 
याद रहे मुंबई हाईकोर्ट ने 14 महीने पहले इस आदर्श भ्रष्टाचार के मंदिर को ढहाने का आदेश दिया था...???, इसके बावजूद अदालत को ठेंगा दिखा कर यह जांच रिपोर्ट तैयार की है।

महाराष्ट्र के दो बार मुख्यमंत्री बने विलास राव देशमुख कही इस आंच से कहीं झूलस न जाए, इसलिए उन्हे केन्द्रीय मंत्री के पद से सुशोभित किया गया। 11 महीने पहले विलास राव देशमुख लिवर(Liver= live + fever भ्रष्ठाचार से जिंदा रहने की बीमारी) की बीमारी का शिकार होगाए। उनकी मृत्यु के बाद सभी मंत्रियो ने आदर्श भ्रष्टाचार का ठीकरा विलास राव (विलासिता + मुख्य) का नाम कहकर फोड़ दिया।

देश के दो सूरमा, एक पूर्व महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व केन्द्रीय मंत्री विलासराव देशमुख , और कन्हैयालाल गिड्वानी जो गिरवानी बनकर आदर्श मंजिल से गिरकर शहीद हो गये है? दोस्तों आप ही अपने विवेक से बतायें ये देश के सोसाइटी (SOCIETY – SUCIDEE- आत्महत्या) के शहीद हैं या गरीबों के आत्महत्यारे..????



इस 400 फ्लाटो मे (एक फ्लॅट एक सब्जीवाले को, व कई झूठे नामों से भी आबंटन) किया गया तथा सभी अधिकार राजनेताओ ने अपने नाम रखे। हाल ही मे, महाराष्ट्र सरकार ने 500 करोड़ की योजना से नाशिक मे विलास राव देशमुख के भ्रष्टाचार के आदर्शो को जीवित रखने की लिए 50 एकड़ से ज्यादा की भूमि आबंदित की है। इस घोटाले मे दूसरे टपकने वाले कन्हैयालाल गिडवानी ,जो आदर्शतम बनने के लिए सीबीआई को 2 करोड़ की रिशवत देने के मामले मे पकड़े जाने से जेल गए थे, वह बाद मे जमानत मे रिहा हो गये और हार्ट अटैक (Heart Attack= High+ tech)।
याद रहे आदर्श भ्रष्टाचार के मंजिल के किराए व बिक्री के विज्ञापनो की वैबसाइट. अखबारो व इंटरनेट मे प्रकाशित हो गयी थी। एक कमरे का किराया प्रतिमाह 4 लाख रुपये और बिक्री की कीमत 60 करोड़ से ज्यादा आँकी गयी थी। बड़े दुख के साथ मे लिखना पढ़ रहा है सुशील कुमार शिंदे ,जो इसके मुख्य सूत्रधार है, जिनके केन्द्रीय बिजली मंत्री के कार्यकाल मे देश की आधी बिजली गायब करने के बाद उन्हे, इसी भ्रष्टाचार की गरिमा से सुशोभित करने के लिए देश के गृहमन्त्री पद से सुशोभित किया गया है... जिसके तुरंत बाद उन्होने, पूना की एक सभा मे कहा...???? देश की जनता भेडो से से भी बदतर है, जो बोफोर्स घोटाले तक भूल गई है...????, तो क्या हमारे नए घोटाले को याद करेगी....????, अपने अटपटे बयानो से आज के डूबते देश के आतंकी घटनाओ के बारे मे हँसते हुए कहते है,”मैंने पहले ही कह दिया था आतंकवादी हमले होंगे ”। अपरोक्षय रूप से उनका कहना है इसको रोकने की ज़िम्मेदारी मेरी नहीं है...???।
दोस्तो जब संविधान हो गुलाम, तो नेता बने, बेलगाम व जनता बन रही हे बेजुबान। जब देश मे सांसदो की वेतन की बढोतरी का बिल 5 मिनट मे पास हो जाता है, और आरटीआई मे राजनेताओ को दायरे मे न लाने का बिल, बिना बहस के सभी पक्षो द्वारा सहमति दे दी जाती है, देशवासियों जागो सोचो....? सोचो....?? सोचो...???. क्या से क्या हो रहा हैं ...?????,