Friday, 2 October 2020

यदि आज २ अक्टूबर (देश का शोक दिवस) को गांधी का जन्म नहीं होता तो देश प्रथम विश्व युध्ह के पूर्व आजाद हो जाता.., गाँधी की गन्दी राजनीती जवाहर के जहर व जिन्ना के जिन से प्रधानमंत्री के दौड़ व बापू के संत बनने की अभिलाषा ने देश को खंडित करने का दंश आज भी देश भुगत रहा है प्रथम विश्व युद्ध में १ लाख से अधिक , द्वितीय में २ लाख से अधिक सेना के जवान व देश के बटवारे में २५ लाख से अधिक हिन्दुस्तानी गाँधी के छद्म अहिंसा के खड़ग से गाजर मूली की तरह काटे / मारे गए. हमें खंडित भारत आजादी के बजाय सत्ता परिवर्तन के रूप में मिला

 


यदि आज २ अक्टूबर (देश का शोक दिवस) को गांधी का जन्म नहीं होता तो देश प्रथम विश्व युध्ह के पूर्व आजाद हो जाता..,



गाँधी की गन्दी राजनीती जवाहर के जहर व जिन्ना के जिन से प्रधानमंत्री के दौड़ व बापू के संत बनने की अभिलाषा ने देश को खंडित करने का  दंश आज भी देश भुगत रहा है



प्रथम विश्व युद्ध में १ लाख से अधिक , द्वितीय में २ लाख से अधिक सेना के जवान व देश के बटवारे में २५ लाख से अधिक हिन्दुस्तानी गाँधी के छद्म अहिंसा के  खड़ग से  गाजर मूली की तरह काटे / मारे गए.  



हमें खंडित भारत आजादी के बजाय सत्ता परिवर्तन के रूप में मिला


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