Videos

Loading...

Friday, 24 April 2015

जब तक सरकार किसानों का दर्द नहीं समझेगी..खेती से भारतमाता की धरती सिंचन से सिकुड़ते रहेगी, देश कुपोषित होकर ...विदेशी हाथों में गुलाम हो जाएगा




बापू के तीन बंदर, अब बन गये है मस्त कलन्दर http://meradeshdoooba.com
देखू: बड़ी विचित्र तस्वीर देख रहा हूं, किसान आत्महत्या पर राजनीत , झाड़ू के साथ पेड़ पर चड़े एक किसान गजेन्द्र सिंह जो, मोदी वसुंधरा के विरोध में नारे से “खाप पार्टी” अति प्रफुल्लित हो रही थी..., वह आत्महत्या की धमकी दे रहा था ...,लोग इसे शोले फिल्म के वीरू का स्टंट समझ रहे थे, और केजरी वाल सत्ता के बसंत से किसानों के रहनुमा बन “संत” बनाने का दावा कर रहे थे ...
बोलू: जो तू देख रहा है, मे  एक बात जनता से कहना चाहता हूं.., देश का ४०% हिस्सा नक्सलवाद से ग्रस्त है..., इनकी लड़ाई ६० के दशक से सत्ताखोरों को उनकी भूमि छीनने का अधिकार से , एक छोटा सा नक्सलबारी आन्दोलन की आज  एक विकराल रूप से लड़ाई लड़ी जा रही है, जहां पर वोट बैंक की राजनीती नहीं होती है...,किसानों की आत्मह्त्या कम और किसान अपनी भूमी बचाने के लिए जन्म भूमि का रक्षक बन, जवानों की भी भूमिका निभा रहा है..., जबकि ६०% सरकारी प्रतिनिधत्व वाले हिन्दुस्तान में ६८ सालों में ५० लाख से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है,वो चाहता है कि आत्महत्या करने की बजाय मेरी मातृभूमि को छीनने वाले से प्रतिरोध कर.., भले अपनी जान दे दूं , आज सरकार इन्हें भगाकर या कौड़ी के दाम देकर उनकी भूमि छें लेती है फिर उन्ही खदानों की जमीन को उद्योग पतियों को 100 गुना से ज्यादा में बेचकर, इस मुनाफे के खेल में चुनावी फंड के साथ अपने जी जीवन में भ्रष्टाचार का फंडा बना लेती है.. वहां अब इतनी विकट स्तिथी आ गयी है कि सरकार द्वारा अर्ध सैनिक बालों द्वारा कारवाई करने पर वे चीन के माओवाद से प्रेरित होकर, सहायता लेकर इस युद्ध को लड़ने की तैयारी कर रही है  
सूनू: अब मे “खाप पार्टी” के लोगों की बात सुन रहा हूं.., लोग ऐसा कह रहें है कि उसे इस आन्दोलन में अहम् भूमिका निभाने के लिए राजस्थान  के दौसा से बुलाया गया था..., और उसे लम्बे डंडे के साथ छोटा झाडू देकर “धौसा” देकर सत्ता पक्ष व अपने विपक्षीयों को घूसा मारने के खेल में एक नए दांव से राष्ट्रीय राजनीती का एक्का बनाने का खेल खेला जा रहा था
देखू: तब, वह  अपनी पगड़ी के फंदे में वह किसान लटक गया...,नौटंकी वाल भी देखता रहा कि फंदा झूल रहा है , वह भी समझ रहा था कि किसान गजेन्द्र सिंह को स्टंट की नौटंकी में मेरे जैसे महारथ हासिल है..., उसके भाषण का जोश बढ़ते गया.., जब कार्यकर्ताओं ने बताया कि किसान गजेन्द्र सिंह के फंदे ने झूलना बंद कर दिया तो इसका आरोप पुलिस पर जड़ कर अपनी राजनीती की जड़ मजबूत करने की नौटंकी करने लगा ..., इस किसान की मौत का सदमा तो दूर यह बदनुमा बन डेढ़ घंटे तक किसानों का मसीहा बनाने की शेखी झाड़ , उस झाड़ की तरफ जाने की भी जुरुरत नहीं समझी और तो और इसे किसान का उपहास बनाकर, अब सभी दल इसमे रोटी सकने का खेल व मीडिया भी तर्प से मालामाल हो रही है...
बोलू: १९६० के दशक में बिहार में नक्सलवाद परवान पर था , सर्वोदयी नेता जयप्रकाश नारायण , नक्सलियों की हित लिस्ट में न १ पर थे, उन्हें ह्त्या की धमकी दी जा रही थी , तब वे निडर होकर नक्सलवादियों से मिले, नक्सवादियों को भी अचम्भा हुआ, उन्होंने नक्सलवादियों की समस्या भी सुनी बल्कि उनके साथ ६ महीनों तक  जंगलों में रहकर, कुछ समस्याओं का भी निदान किया ,,
देखू: अभी हाल ही में ही देखा चुनावी होड़ के चक्कर में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के चुनावी स्पर्धा  अजीत जोगी का विद्याचरन सुक्ल से ३६ का आंकड़ा होने से नक्सलवादियों को सूचना देकर land ब्लास्ट से मरवा दिया

बोलू: जब तक किसानों की अमानत से खिलवाड़ होगा ,  भ्रष्टवाद से नक्सलवाद को खाद मिलते रहेगी..., जब तक सरकार किसानों का दर्द नहीं समझेगी..खेती से भारतमाता की धरती सिंचन से सिकुड़ते रहेगी, देश कुपोषित होकर ...विदेशी हाथों में गुलाम हो जाएगा