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Thursday, 1 October 2015

देश के वर्तमान माफियाओं को माफ़ कर, वर्तमान सरकार..., इनकी कर्ज से मुक्ती के लिए और कर्ज देकर, देश को डूबों रहें हैं



बोलू; अरे देखू ,तू .., मुम्बई के श्मशान की तरफ, टुकुर टुकुर देखकर .., अपनी शान क्यों समझ रहा है..., क्या..!!!, माफियाओं के भारत निर्माणके बाद अच्छे दिनआ गए हैं 

देख़ू : अरे देख रहा हूं ..., मुर्दे को फूंकने के लिए ३०० किलों लकड़ी मुफ्त.., २०० किलों की लकड़ी तो, 100  किलों के मुर्द्र के लिए काफी ..., और इसमें भी बड़ा घोटाला.., बची लकड़ी को काले बाजार में बेचने से..., देश में लूटों इंडिया के माफियाखोरों की लूट में छूट की कांग्रेस राज में भी भाजपा की कड़ाई में भी वही लूट की बंदरबाट की योजना की महाभोजनाए की राज भोग व गलता पिघलते गूंगी जनता की तेल निकालने कहानी है,

बोलू: आज के सत्ताखोरों की एक पुरानी घटना है, जिसकी पुनरावृत्ति से सत्ता हथियाने की की एक ज्वलंत कहानी.., मैं बताता हूं..,

एक शहर में, अकाल की शुरूवात होती है.., तो वहां का व्यापारी करोड़ीमल शहर का अंनाज खरीदते रहता है ..., जब अकाल चरम सीमा पर पहुंचता है तो वह सीना खोलकर कहता है .., बाजार का अनाज १०० गुना से मुंह बोली कीमत में भी खरीद लो ,तब वह अन्न का संचय कर शहर को भूख मरी से मार देता है..., शहर के अमीरपति , करोड़ीमल के मुंह मांगे दाम की बोली से खरीदकर, खा कर जी जाते हैं .., लेकिन शहर के ९५ % से अधिक जनता गरीब भुखमरी का शिकार होने पर, काल के गाल समाने पर .., करोड़ीमल घोषणा करता है कि मैं गरीबों की मट्टी बर्बाद नहीं होने दूंगा.., और वह मुर्दों को मुफ्त लकड़ी मुहैया कराकर.., 

लोग उसे, शहर का धर्मात्मा कहकर ,बचे हुए.., लोगों का मसीहा बनकर पूजनीय बन जाता है..,,,,


देखू: हाँ ,प्रधानमंत्री की भी यही योजना है..,  जीते  जी  गरीबों को खाने के लिए अन्न नहीं है और मरने के बाद एक लाख रूपये  बीमा की योजना से देने की बात कर, अपने को गरीबों का मसीहा माँ बैठें हैं    

सूनू: हाँ लोग भी, कह रहें है..., भयंकर महंगाई से झूझते लोगों की मरने वालों, लोगों से अंतिम क्रिया में मुफ्त का सामान.., मुम्बई वासी,सत्ताखोरों के अरमान की दुहाई दे रहें हैं.

देखू: लेकिन मैं देख रहा हूं कि यह मुम्बई शहर के पेड़ों में ACID डालकर जीतेजी उन्हें सुखाकर कहतें है कि इस पेड़ की काल अपनी मृत्यु से हुई है .., और शहर की जनता की अकाल मृत्यु से, वह वाही लूट रहें हैं 

बोलू: आज जीवन बीमा निगम.., LIC ने ही देश को डूबोया है..., LIC के ५० लाख कर्मचारियों ने बीमा के नाम से देश को घुन लगा दिया है..., देश के बड़े अधिकारियों के मोटे वेतन के बावजूद घोटालों से LIC के चुना अधिकारियों के, जांच के नाम से निर्दोष मुक्त कर सरकार की मेहरबानी से CBI ने निर्दोष मुक्त कह पुनरचुनाव कर भ्रष्टाचार के दरवाजे खोल दिए है 

सूनू: हाँ ...,अधिकारीयों की मोटी तनख्वाह व एजेंटो का इतना भारी कमिशन है कि गरीबों की प्रीमियम भरने से लाचारी से उनके पैसे ऐसे भी डूब जाते हैं .., यूं कहें..., LIC डकार जाता है., 

देखूं: मैं देख रहा हूं .., उद्योगपतियों के 22 लाख करोड़ के टैक्स व 30 लाख करोड़ के डूबे कर्ज के ब्याज होने की बावजूद.., चुनावी फंड के लालच में डूबे हुए अडानी को बिना अड़ंगे से ६४ हजार के कर्ज को मात्र ४% व्याज देकर ..., देश का मर्ज दूर करने का दावा के, दानवता के खेल से देश की दवा का मर्ज कहा जा रहा है...

बोलू: देश के वर्तमान माफियाओं को माफ़ कर, वर्तमान सरकार..., इनकी कर्ज से मुक्ती के लिए और कर्ज देकर, देश को डूबों रहें हैं
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सूनू: किसान कर्ज से बेहाल है.., मौसम ने उसे धोखा दिया.., किसान द्वारा बेची गई ५ रूपये की फसल ..., ५० रूपये से अधिक मूल्य में, खुले बाजार में बेचकर माफिया मालामाल है.., सरकार अंकुश की बजाय माफियाओं की दुहाही देते हुए निरंकुश से निरंतर - खुश है...

देखू: अब, मैं चिंतित हूं..., देश तो माफियाओं के , महंगाई की आड़ में धनाड्य होते जा रहें है,,,, अब देश डूबने से कैसे बचेगा ..

बोलू: देश का असली धन तो ,,,. गरीबों की शक्ती है..., यदि उनके हाथ बाधने के बजाय उन्हें कम ब्याज पर बिना किसी बंधन के धन दिया जाय तो.., यदि इनका ५०% डूबा धन मान भी लिया जाय तो, इसके बावजूद देश मैं बचे ५०% प्रतिशत धन की उन्मुक्त प्रगति से देश ५००% प्रगति करेगा .., जय जवान जय किसान से देशवासियों के जीवन की फसल लहलहरायेगी...