Saturday, 1 April 2017

आज १ अप्रैल है .., क्या हमारे क्रांतिकारियों की आत्माओं को सगून मिलेगा .., जिनका बलिदान आज कौड़ी भर का भी नहीं रहा और देश की तिजोरी को कड़ाई बनाकर ७ ० सालों से पकौड़े खा कर प्रशासन के भगोड़े अब भी डटे बने है.., क्या.? अब अप्रैल फूल या FULL PROOF या APPRANT FULL या COLOUR FULL रहेगा

बोलू: आज १ अप्रैल है .., क्या हमारे क्रांतिकारियों की आत्माओं को सगून मिलेगा .., जिनका बलिदान आज कौड़ी भर का भी नहीं रहा और देश की तिजोरी को कड़ाई बनाकर ७ ० सालों से पकौड़े खा कर प्रशासन के भगोड़े अब भी डटे बने है.., 

 बोलू.., देखू...,सुनू...?, क्या देख व सून रहा रहा है.. क्या.? अब अप्रैल फूल या FULL PROOF या APPRANT FULL या COLOUR FULL रहेगा

देखू : हाँ मोदीजी के सन्देश को देश के भारी माफियाओं ने ३१ मार्च २०१७ को हल्के – फुल्के में लिया था.
अब उनकी हवा निकल रही है ..., खून सूख रहा है.., देश में माफियाओं के २५०० से अधिक ठिकानों पर छापामारी से .., धड़ा धड छापे से पाप के घड़े पकड़े जाने से माफियाओं की धड़कने बढ़ते ही जा रही

सुनू :मैं भी सौं सुन रहा हूँ कि जनता कह रही है कि ७० सैलून सालों से माफियाओं ने कागजी घोड़ो.को दौड़ाकर गरीबों की आवास , व जल थल नभ पाताल तक की लूट कर देश की हर यौजनाओं को भोजनाएं बनाकर जजशाही-नौकरशाही – सत्ताशाही के गठजोड़ से अकूत दौलत को देश की अमानत को रोड़े बनाकर ..,गरीबों का जीना दुर्भर कर दिया था

बोलू: अब मुझे मोदी सरकार व उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के ताबडतोब फैसले से अब नये सवेरे की आस दिखाई दे रही..,लकिन इअका इनका काम तमाम त्रीव गति के कोर्ट से ही इसका निदान है.
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फेस बुक व वेबसाइट के March 30, 2015 की पुरानी पोस्ट Allowed on Timeline
बोलू: आज २९ मार्च है.., तू क्या देख रहा है.
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देखू: आज १८५७ के क्रातिकारी दिवस की ११४ वी साल गिरह है , देश में मुर्दानगी व सदमा का माहौल है
बोलू: हाँ क्रिकेट के वर्ल्ड कप के स्पर्धा से बाहर हो जाने से मीडिया भी TRP की नुकसान से सदमा में है.., और राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास को जानने में देश में मुर्दानगी छाई है
सुनू : हाँ एक खबर मैं भी सुन रहा हूं ..., एक नौटंकीवाल की जो जिसे पहले दमा की खांसी से लोकसभा चुनाव हारने पर सदमा लगा था, बाद में “ व्यस्था परिवर्तन के खांसी के नारे से “ भारी बहुमत प्राप्त कर अपने खांसी के इलाज का दावा कर, अब अपने वरिष्ठ गुरूओं को लात मार कर .., दमा के फार्मूले से दम लगाकर, कार्यकताओं से पार्टी के अंगों की दबान जुबाकर उनकों सदमा लगा दिया है...
देखू: हाँ में देख रहा था , २३ मार्च को 30 सालों बाद “तीन देश रत्नों” के बलिदान दिवस को प्रधानमंत्री से सभी पार्टियों के छुटभैये नेता श्रेय ले रहे थे..., जैसे हममें ही.. सरदार भगत सिंग का ही खून दौड़ रहा है.
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बोलू : आज का दिन तो TRP वाला मीडिया भी भूल चुका है.., सोशल मीडिया को भी इसकी भनक नहीं लगी है
देखू: वर्ष 2005 में आमिर खान ने देश के 1857 का पहले स्वतंत्रता संग्राम और इसके नायक बनकर मंगल पांडे पर फिल्म बनाई.., नई पीढी ने मल्टीप्लेक्स में २०० रूपये के टिकट खरीदकर कहा, आमीर खान ने मंगल पांडे की क्या शानदार एक्टिंग की है, युवा पीढी ने मंगल पांडे के आदर्शो से ज्यादा आमीर खान तारीफ से उन्हें अरब पति बन दिया .., जबकि आज भी , मंगल पांडे के वंशज की परिस्थिती व घर जर्जर अवस्था में है.
बोलू: हां , २ साल बाद ही मंगल पांडे की १५० वीं पुण्य तिथी थी , देश वासियों को तो छोड़ों , आमीर खान ने भी ये जयन्ती कूड़ेदान में डाल दी.. , कोई प्रतिक्रया नहीं हुई
बोलू: यह तो देशवासियों को, वीर सावरकर का अहसान मानना चाहिए .., जिन्होंने प्रमाण सहित सिद्ध किया कि १८५७ का यह एक स्वातंत्रय समर था, जिनकी प्रेरणा से सरदार भगत सिंग,आजाद, सुभाषचन्द्र बोस जैसे लाखों क्रांतीकारियों को जन्म दिया
देखू : मैं साफ़-साफ़ देख रहा हूँ कि इसमे राजनीती के वोट बैंक है, सभी पार्टियों को गौ-ह्त्या प्रतिबन्ध से देश को विदेशी मुद्रा की आवक के साथ..., पार्टीयों को अपने, वोट बैंक का आधार कमजोर होने का डर लग रहा है , क्योंकी १८५७ की भारयीय आजादी के प्रथम बगुल का कारण था ''गाय'' !!
१८५७ में जब प्रथम बार भारत की आजादी के लिए बागी बलिया के अमर शहीद मंगल पाण्डेय बगुल फुकी थी ! उसका एक मात्र कारण था ...कारतूस में ''गाय'' की चर्बी !
जब इस महानायक को पता चला तो इस बात को लेकर 29 मार्च 1857 को मंगल पाण्डेय ने परेड ग्राउंड में ही अपने साथियों को विद्रोह के लिए ललकारा ! और अंग्रेज सार्जेंट मेजर ह्यूसन को गोली मारकर ढेर कर दिया ! इसके बाद सामने आए लेफ्टिनेंट बॉब को भी मंगल पाण्डेय ने गोली से उड़ा दिया ! इस दौरान जब मंगल पाण्डेय अपनी बंदूक में कारतूस भर रहे थे, तो एक अंग्रेज अफसर ने उन पर गोली चलाई ! निशाना चूकने पर मंगल ने उसे भी तलवार से मौत के घाट उतार दिया !
इसके बाद अंग्रेज अफसर कर्नल वीलर ने उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया, लेकिन कोई सैनिक आगे नहीं आया ! अंत में कर्नल हिअर्सी के दबाव में मंगल पाण्डेय ने खुद को गोली मार ली ! घायल मंगल को अस्पताल भेजा गया ! इसके बाद उनका कोर्ट मार्शल हुआ और फांसी की सजा मुकर्रर की गई ! आठ अप्रैल 1857 को मंगल पाण्डेय को फांसी दे दी गई !
बोलू: आज ''गाय'' और इस महानायक के वंशज दोनों को स्तिथि बहुत ही दयनीय हैं ! जो गाय भारतीय आजादी की नीव बनी ! जिसके कारण आजादी की लड़ाई की बिगुल फुकी गयी ! आज उसी ''गाय'' की रक्षा करने वाला कोई नहीं हैं !
देखू: यह कैसा देश हैं ? कैसी हैं यहाँ की कानून व्यवस्था ? कैसे हैं यहाँ के लोग ?
हमें आजादी की लड़ाई की बुनियाद बनी ''गौ' माता की हत्या पर पूरे भारत वर्ष में रोक ..और इस महानायक के जन्म दिन को राष्ट्रीय क्रन्तिकारी दिवस घोषित करने की मांग को लेकर ..अपने अपने स्थानीय क्षेत्रो में कमेटी बनाकर ..जन चेतना के जरिए जन आंदोलन करने की जरूरत हैं, साथ में ...अदालत में इस मांग की लेकर याचिका दायर करने की जरूरत हैं !
देखू: हाँ इस स्वतंत्रता संग्राम में तो ‘वन्देमातरम ‘ की लय से हिंदु –मुस्लिम एकता से अंग्रेजों का साम्राज्य थर्रा गया था.., उनका एक ही लक्ष्य था .., अन्रेजों का साम्राज्य उखड फेंकना
बोलू: मैं इन कुछ क्रांतीकारियों के नाम जनता को बताता हूँ ... नाना साहब पेशवा 2. तात्या टोपे 3. बाबु कुंवर सिंह 4. बहादुर शाह जफ़र
5. मंगल पाण्डेय 6. मौंलवी अहमद शाह 7. अजीमुल्ला खाँ 8. फ़कीरचंद जैन
9. लाला हुकुमचंद जैन 10. अमरचंद बांठिया 11. झवेर भाई पटेल
12. जोधा माणेक 13. बापू माणेक 14. भोजा माणेक 15. रेवा माणेक
16. रणमल माणेक 17. दीपा माणेक 18. सैयद अली 19. ठाकुर सूरजमल
20. गरबड़दास 21. मगनदास वाणिया 22. जेठा माधव 23. बापूगायकवाड़ 24. निहालचंद जवेरी25. तोरदान खान26. उदमीराम27. ठाकुर किशोर सिंह, रघुनाथ राव28. तिलका माँझी 29. देवी सिंह, सरजू प्रसाद सिंह
30. नरपति सिंह 31. वीर नारायण सिंह 32. नाहर सिंह 33. सआदत खाँ
34. सुरेन्द्र साय35. जगत सेठ राम जी दास गुड वाला36. ठाकुर रणमतसिंह
37. रंगो बापू जी38. भास्कर राव बाबा साहब नरगंुदकर39. वासुदेव बलवंत फड़कें 40. मौलवी अहमदुल्ला
41. लाल जयदयाल 42. ठाकुर कुशाल सिंह 43. लाला मटोलचन्द44. रिचर्ड विलियम्स 45. पीर अली 46. वलीदाद खाँ 47. वारिस अली 48. अमर सिंह
49. बंसुरिया बाबा 50. गौड़ राजा शंकर शाह 51. जौधारा सिंह
52. राणा बेनी माधोसिंह 53. राजस्थान के क्रांतिकारी 54. वृन्दावन तिवारी
55 महाराणा बख्तावर सिंह 56 ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव
सुनू : मैं , तो जनता का छुपा दर्द सुन रहा हूँ..,
देखू : मैं तो देख रहा हूं , जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी , भारतवर्ष में व्यापार करने के बहाने , धन बल, साम-दाम- दंड –भेद , जातिवाद, धर्मवाद, अलगाववाद से देश को अपने प्रभुत्व से २०० सालों तक गुलाम रखा ...वैसे ही विदेशी कंपनियों ने ६८ साल से आज तक , अपनी नीती से, देशी माफिया, नेताओं से देश में राज कर, देश को कर्ज से गर्त में डाल दिया है
देखू : यह सब देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो रहे है..., यह हमारा वार्तालाप सुनकर मैं आशा करता हूँ कि देशवासियों के राग में एक नए खून का संचार होगा
२९ मार्च १८५७ हुई कल की बात.., १९४७ के बाद के पुतले बने वोट बैंक से की सौगात से, सत्ता की बारात से..., देश में आज भी छाई है..विदेशी हाथ,साथ,विचार संस्कार के छतरी से काली रात..



१९४७ में ३० करोड़ जनता में १०० करोड़ दुधारू जानवर थे..,आज १२५ करोड़
१९४७ में ३० करोड़ जनता में १०० करोड़ दुधारू जानवर थे..,आज १२५ करोड़
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बोलू: नाथूराम गोडसे द्वारा गांधी के ह्त्या ने खोले नेहरू के छद्म धर्मनिरपेक्षता के द्वार , गांधी के चेहरे से, सरकार के हर विभाग में चित्र से, गली मोहल्ले से शहर में गांधी के नाम व मूर्तियों से गांधी के स्वदेशीविचारों की मृत्यु कर, विदेशी विचारों की वैसाखी से अपने अय्याशीको आराम हराम हैके नारों से अपना जीवन चमकाया, (भाग-८ , २० भागों में ) सुनू: हां, गौ-हत्या पर प्रतिबन्ध लगाने से नेहरु ने इनकार कर दिया था.., भारत के तानाशाह नेहरु ने हमेशा हिन्दुस्थान के हिन्दुओं की भावना की उपेक्षा की. उन्होंने अनमोल पशु-संपत्ति की भी उपेक्षा करते हुए गौ-हत्या पर प्रतिबन्ध लगाने से साफ़ इनकार कर दिया. उन्होंने तर्क यह दिया की वे मुसलमानों की भावना की उपेक्षा नहीं कर सकते और यह कि भारत एक मिलाजुला देश है, हिन्दू-देश नहीं है. देखू: मैं देख रहा था, १९४७ में ३० करोड़ जनता में १०० करोड़ दुधारू जानवर थे..,आज १२५ करोड़ जनता में ३० करोड़ दुधारू जानवर है बोलू: यह तो अब खेल बन गया है, एक विशेष साजिस से, सभी मांस के निर्यात करने वाले कत्लखानों को विशेष रियायत देकर, विदेशी धन के खेल से, देश में दुधारू जानवर की कमी कर , दूध की कृत्रिम तेजी के खेल का निष्कृष्टता से घिनौने काले बाजार के खेल से, देश के बच्चों को कुपोषित कर, आज के नेता, माफिया काले धन से पौष्टीक होकर संविधान को धत्ता बताकर मुस्टंडे हो गए हैं.. सुनू: नेहरू ने धार्मिक शिक्षा पर प्रतिबन्ध लगाया था और पंडित नेहरु के नेतृत्व में सत्ताधारी कांग्रेसियों ने जानबूझ कर संविधान में धारा २७ तथा २८ का समावेश किया. इनमे उन्होंने सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हिन्दुओ द्वारा धार्मिक शिक्षा देने पर रोक लगा दी. दूसरी और धरा ३०(१) के अंतर्गत मुसलमानों और इसाइयों को अपने सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और कालिजो में धार्मिक शिक्षा देने की अनुमति दी गई. बोलू: हिन्दू-विरोधी धर्मनिरपेक्षतावाद के दावे को झूठलाया जब , पंडित नेहरु ने धर्म-निरपेक्ष राज्य के राष्ट्रपति द्वारा सोमनाथ मंदिर का स्थापना समारोह संपन्न होने का कड़ा विरोध किया. परन्तु डॉ.. राजेन्द्रप्रसाद ने उनके विरोध की परवाह न की और इस उद्घाटन समारोह को संपन्न किया. देखू: हिन्दू संस्कृति नेहरु की आँख का काँटा था, १० दिसंबर १९४९ को धर्मनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक मोर्चे के तत्वाधान में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए तथाकथित धर्म-निर्पेक्षतावादी नेहरु ने कहा, “हिन्दू संस्कृतिकी बात से भारत के हितों को हानि पहुंचेगी और उसका अर्थ द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत को मानना होगा, जिसका जी-जान से विरोध कांग्रेस ने किया है.बोलू: कांग्रेस को तो हिन्दूशब्द की अपेक्षा गैर-मुस्लिमशब्द पसंद था. कांग्रेसियों को स्वयं को हिन्दूकहते शर्म आती थी ही. वे हिन्दूके स्थान पर भारतीय (इंडियन) शब्द-प्रयोग अधिक पसंद करते थे. वे मुसलमानों को मुस्लिम कहते हुए गर्व अनुभव करते थे,परन्तु हिन्दू को हिन्दूकहते हुए वे हिचकिचाते थे. वे प्राय: औपचारिक पत्र-व्यवहार ,आलेखों और वृतों में हिन्दूके स्थान पर गैर-मुस्लिम शब्द का प्रयोग करते थे. हिन्दू शब्द उनकी आँखों में खटकता था और गले में अटकता था.
देखू”: हाँ , गांधी के भी यही विचार थे, उन्होंने खुले भी यही शब्द खुले आम कहे थे सुनू: नेहरु का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य था... जवाहर लाल नेहरु बहुत बार कहा करते थे की मैं जन्म के संयोग से हिन्दू हूँ,संस्कृति से मुसलमान और शिक्षा से अंग्रेज हूँ.उन्हें हिन्दुओ की भावना की रत्ती भर भी परवाह नहीं होती थी,जिनके वोटो के बल पर उन्होंने सत्ता प्राप्त की थी. देखू: वही हाल, एक तरफ तो पंडित नेहरु के नाती, राजीव गाँधी का हिन्दू-विरोधी वक्तव्य दिया.., राजीव गांधी ने हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री होते हुए भी सन्डे टाइम लन्दन को एक साक्षात्कार में नि:संकोच कहा की मेरे नाना जवाहरलाल नेहरु एक नास्तिक (एग्नास्टिक) थे. मेरे पिता पारसी (गैर हिंदू) थे, मेरी पत्नी इसाई है, और मैं किसी धर्म में विश्वास नहीं करता.बोलू: लेकिन दूसरी तरफ राजीव गां धी ने हिन्दुस्थान का प्रधानमंत्री होते हुए. हिन्दू वोट की सेंध में बाबरी मस्जिदका ताला खुलवाकर, वोट बैंक की राजनीती के ताल का बांवरा बना सुनू: नेहरू के हिन्दुओ का धर्मान्तरण को उकसावा से कांग्रेस के छद्म धर्मनिरपेक्षतावाद सत्ताधारियों ने हिन्दुओ के धर्मांतरण द्वारा मुसलमान या इसाई होने पर कोई रोक लगाने से इंकार कर दिया. दूसरी ओर उन्होंने जान-बूझकर भारतीय संविधान की धरा २५ के अंतर्गत अल्पसंख्यको को अपने मजहबों का प्रचार-प्रसार करने की छूट दी. बोलू: नेहरू ने छद्म धर्मनिरपेक्षतावाद को सांप्रयवाद का जहर घोलकर अल्पसंख्यको को अपने मजहब के प्रचार-प्रसार की सांविधानिक छूट दी थी, जिसके बीज अंग्रेजों के फूट डालो और राज करो की नीती को प्रज्जवलित किया.. जब,१९५० में पंडित नेहरु और उनके हमजोलियों ने अल्पसंख्यको को धारा २५(१) के अंतर्गत अपने मजहब के पालन, अभिव्यक्ति, प्रचार और प्रसार की खुली सांविधानिक गांरंटी दी. इसी मिशनरियो ने संविधान के शब्दों का धर्मांतरण करने की खुली छूट ( लाइसेंस) लगाया. न्यायमूर्ति डा.एम.बी. नियोगी ने आग्रह पूर्वक सरकार से सिफारिश की कि संविधान की संगत धारा के अनुच्छेद में तनिक भी संदेहास्पद नहीं रहने देना चाहिए और उचित संशोधन किया जाना चाहिए कि प्रचार-प्रसार की खुली छूटमें धर्मांतरणशामिल नहीं है. परन्तु खेद है कि छद्म-निरपेक्षतावादी सरकार ने आज तक डा. नियोगी की १९५६ में की सिफारिश को क्रियान्वित नहीं किया है. सुनू: नेहरू ने गांधी की पाकिस्तान को ५५ करोड़ रूपये के उपहार की गंदी राजनीति से भी आगे बढ़कर , गांधी को महात्मा व बापू बनाकर , अपनी १.शांति,२ पंचशील, ३. अनाक्रमण ४. निष्पक्षता की भ्रामिक नीति...., ५. हिन्दुओ का धर्मान्तरण, ६.तुष्टीकरण ७. विदेशी भाषा के शतरंगी चाल के शतरंज को बनाया सत्ता के ढाल से हिन्दुस्थान के रंज का सप्तरंगी इन्द्रधनुष के निशाने, से देश के काश्मीर के टुकडे व चीन को दिया उपहार से हुआ, भारत रत्न का सत्कार देखू: पंडित नेहरु का पूर्वत:सचेत ही पूर्वत:शास्त्र सिद्ध हैके सिद्धांत में विश्वास नहीं था. वे अपने सपनो और कल्पनाओं के संसार में रहते थे. इसलिए उन्होंने देश की सुरक्षा को शांति, पंचशील, अनाक्रमण और निष्पक्षता के भ्रामक स्तंभों पर खड़ा किया. विश्वशांति निर्माता और निष्पक्षता आन्दोलन के जनक की उनकी प्रतिमा तब टूक-टूक हो कर भग्न हो गई जब चीन ने भारत पर १९६२ में आक्रमण किया और हमारी भूमि के ४६ ,००० वर्ग किलोमीटर पर अवैध बलात अधिकार कर लिया. यदि उन्होंने हमारे वैज्ञानिको को खुली छोट दी होती तो वे चीन से पहले अणुबम बना लेते और परमाणु परिक्षण कर लेते थे.चीन तिब्बत को हड़प करने से पहले और हमारे ४६,००० वर्ग किलोमीटर भूमि पर अधिकार करने से पहले १० बार सोचता.
सुनू : सत्ता परिवर्तन के बाद, सावरकर ने तो शुरू से देश को चेताया था..., देश का शस्त्रीकरण के साथ परमाणु बम से अपनी रक्षा सुसज्जित करों, लेकिन उन्हें देशद्रोही कहकर नजरअंदाज कर सावरकर को जेल में डाला बोलू: जब चीन ने हमारे देश को युद्ध में हराकर, १९६४ में अपना पहला परमाणु विस्फोट किया तो हमारे देश के वैज्ञानिको और बुद्धिजीवियों ने परमाणु सत्य के महत्व को गंभीरता से समझा. हिन्दुस्थान के बुद्धिजीवी लोग बढ़ी चिंता के साथ पुछते थे परमाणु-शक्ति संपन्न चीन की सुरक्षा के कार्यक्षमता की..., तब हमारे वैज्ञानिकों को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में पोखरण परमाणु परिक्षण में सफलता मिली, बाद में प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने इसे आगे बढाया सुनू: हाँ, अभी हाल ही में भारतरत्न से नवाजे गए वैज्ञानिक प्रोफेसर सी.एन.आर. राव ने खुले आम कहा की देश के देश के घोटालों का १% धन भी, यदि देश की सुरक्षा में लगता तो हम उन्नत हथियारों का निर्माण कर से देश का नया गौरव हासिल करते , और विदेशी हथियार घोटालों से देश को निजात मिलती