Wednesday, 5 September 2018

आरक्षण की आग., देश रहा है.., हांफ..., महंगाई निकाल रही है जनता का भाप.., आरक्षण के मसीहा, इस दंश के पाप से, अपने को कह रहें हैं, देश का बाप.., आप ..बाप.., पाप..खाप .., पार्टियों के श्राप से देश लहुलूहान.., फिर भी सत्ताखोरों के अपने “अच्छे दिनों” के झांसे से “मेरा देश महान”..., प्रतिभाओं के कच्छे पहिनने के दिन आ रहें हैं..,








(Teachers day) - आरक्षण की आग., देश रहा है.., हांफ..., महंगाई निकाल रही है जनता का भाप.., आरक्षण के मसीहा, इस दंश के पाप से, अपने को कह रहें हैं, देश का बाप.., आप ..बाप.., पाप..खाप .., पार्टियों के श्राप से देश लहुलूहान.., फिर भी सत्ताखोरों के अपने अच्छे दिनोंके झांसे से मेरा देश महान”..., प्रतिभाओं के कच्छे पहिनने के दिन आ रहें हैं..,
१. छुवा-छुत/आरक्षण को कछुवा बनाकर संविधान की आड़ से हमारे सत्ताखोरों ने १० सालों के 22.५% प्रायोगिक तौर के परप्रयोजन से , इन कछुओं की मोटी खालों को अपना ढाल बनाकर सुरक्षता पूवर्क वोट बैंक से खरगोशी प्रतिभाओं की खाल निकालकर लहूलुहान कर संविधान का गुण गान कर, पंगु बनाकर, देश को विदेशी हाथ विदेशी साथ विदेशी विचार विदेशी संस्कार से देश को कछुआ चाल से चलाकर, विदेशी कर्ज को मर्ज मानकर , देश को गर्त में डालकर, अब भी गर्वित हैं.
२. अब आरक्षण की तलवार से प्रतिभा के भक्षण की , एक नई धार से, नेताओं के वोट बैंक की दांत की चमक के पैने पन की तस्वीर से, आज देश ऊंचाई को छूने की बजाय बौनाहोते जा रहा है..,
३. अब पटेल आरक्षण की आग पुरे देश में पेटने की तैयारी .., क्या..??, सरकार घुटने टेक देगी.., या देश गुर्जर आन्दोलन की तरह सुलगते, गुजरे जमाने में रहेगा.., सत्ताखोरों की रोटी सेकते रहेगा.., देशवासी अब सकते में है..!!!
४. दोस्तों सत्ता परिवर्तन को आजादी कह.., देश को अशिक्षा से अंधापन कर .., अंग्रेजों के संविधान का अनुसरण कर ०.१% अंग्रेजी बाबुओं की औलादें जो विलायती शिक्षा से अंग्रेजों के संविधान में आस्था की प्रतिज्ञा से खाओ अंग्रेजी , पियों अंग्रेजी सोओ अंग्रेजी , जागो अंग्रेजी, थोपो अंग्रेजी ने विदेशी भाषा से गोरे अंग्रेजों के काले बादल की गुलामी को प्रतीक बनाकर, इस बादल से काले धन की बरसात से मालामाल हो गयें और आम हिन्दुस्तानी अवसाद से बेहाल हो गया है.
५. राख तले चिंगारी के प्रतिभा में पानी फेर कर शिक्षा को कीचड़ बनाकर, देश बदबूदार हो गया है
.
६. सत्ता का एक फंडा है, देश में सत्ताखोरों का एक गोरख़ धंधा है ..,५०% आरक्षण से देश की आधी प्रतिभा गायब, और व्यापम के इस नए प्रकार के तड़के से इस आग में हजारों प्रकार के घोटालों के उत्प्रेरकों देश के ऊतक 30-४०% शिक्षा, अकर्मण्य छात्रों को पिछले दरवाजे से प्रवेश.., जो बचे शेष १०-२०% प्रतिभावान छात्र वे देश के इस मकड़जाल से, अपने अगली पीढी का भविष्य संवारने विदेशों में पलायन कर, अपनी प्रतिभा से विश्व को गौरान्वीत कर रहें हैं
.
७. १९४७ में विश्व के 100 से अधिक देश हमसे पिछड़े थे..,लेकिन अपनी मजबूत इच्छा बल से बिना आरक्षण के, घोंघा चाल से एक दृण मंजिल पाने से, उन्नत देशों की कतार में शामिल हो गयें है..
८. देश के खरगोश आज आरक्षण के जहर से, बेहोश होकर मर रहें हैं., देश का मर्ज, आरक्षण व कर्ज से नहीं, देश के १२५ करोड़ जनता को सम्मान व प्रतिभा के आंकलन से, आगे बढ़ने से ही.., देश आगे बढेगा
Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.
कैलाश तिवारी.. कृपया गूगल सर्च में meradeshdoooba टाइप कर ४७४६ पोस्टों व स्वंय निर्मीत कार्टून के लिए वेबस्थल की यात्रा करे





Tuesday, 4 September 2018

देश के शिक्षक तुम्हे सलाम..., देश में जितने राष्ट्रपति बने .. वे राजनीतीज्ञों की कृपा से देश के सर्वोच पद पर बैठे ...और देश के महामहिम पद से निर्वित होकर.., सरकारी सुविधा भोगते हुए , जीवन की लीला समाप्त कर गुमनामी में खो गए..यदि देश के शिक्षक , डॉ. कलम से प्रेरणा लेकर गुरू की भूमिका को सार्थक करें तो “जय जवान से जय किसान “ का नारा यशस्वी से .., देश शक्तिमान से विश्वगुरू बनेगा ...


देश के शिक्षक तुम्हे सलाम..., देश में जितने राष्ट्रपति बने .. वे राजनीतीज्ञों की कृपा से देश के सर्वोच पद पर बैठे ...और देश के महामहिम पद से निर्वित होकर..सरकारी सुविधा भोगते हुए , जीवन की लीला समाप्त कर गुमनामी में खो गए...

देश की पहली  राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जो देश की पहेली बनकर २० ट्रकों में देश के सम्मान में दी गए उपहार भी अपनी माल-मत्ता समझ कर अपने घर ले गयी थी ..., बाद में बेशर्मी से उन्हें वह पुरूस्कार ९ ट्रक भरें लौटाना पड़ा .., और पेंशन व अन्य सुविधाओं से ऐश कर रही है..

पूर्व  राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जो रक्षा व अन्य घोटाले में सम्मलित है... क्या वे निर्वित होने के बाद अब्दुल कलाम के जीवन का अनुसरण कर रहें हैं !!!!!, या भविष्य में करेंगे ..

एक निर्वादित , बिना राजनेताओ की बैसाखी की याचना से महामहीमबने अब्दुल कलाम , अपनी कलम की ताकत व आवाज से, आज भी उनकी आत्मा आवाम को जागृत कर रही  है..., आज भी देश भर के स्कूल में छोटे-छोटे बच्चों के बीच में उनकी फोटो देखकर, .., बच्चों में भी स्फूर्ती आती है..., क्या बात है ..हमारे पूर्व राष्ट्रपति हमारा उत्साह बढ़ाने के लिए , हमारे साथ आज भी घुल मिल कर बात कर रहें है...

आज कलाम साहब का यह कर्म ..., आने वाले कल के बच्चों को नया हिन्दुस्तान के नवनिर्माण की शिलाका आधार बना रही है...

आज भी अब्दुल कलम अपने अनुभव..., जूनून .., दृण संकल्प का सन्देश शिक्षक बन कर, गाँव शहर में दे रहें है...., इसमें कोई शक नहीं है...,

दोस्तों याद रहें .. प्रधानमंत्री मनमोहन के कार्यकाल में अब्दुल कलाम को धमकी मिली थी आपके इस दौरे का राजकीय खर्च जो करींब दिन के ४० हजार रूपये है, भारत गरीब देश होने से यह खर्च वहां नहीं कर सकता है.... इसे बंद करो...

देश के जल-थल- नभ आकाश से कोयला चोर जो अरबों खरबों की लूट के बावजूद देश की अर्थ व्यस्था के शिल्पकार के रूप में सम्मानित किया है...
देश के अच्छे दिंनों से भारत निर्माण व चमकता भारत व मेरा देश महान , गरीबी हटाओं से आराम हराम का नारा झूठा ही साबित होगा
जब तक हमारे शिक्षकों की आधार प्रणाली मोटे वेतन व प्राइवेट कोचिंग से धन बनाने का ध्हेय रहेगा तो देश के शिक्षण संस्थानों के साथ देश भी डूबेगा .
यदि देश के शिक्षक , डॉ. कलम से  प्रेरणा लेकर गुरू की भूमिका को सार्थक करें तो “जय जवान से जय  किसान “ का नारा यशस्वी से .., देश शक्तिमान से विश्वगुरू बनेगा ..

Tuesday, 28 August 2018

तमिलनाडु केरल को बाढ़ का दोषी मान रहा है.., तमिलनाडु व कर्नाटका में आपस में पानी के तोल की लड़ाई हो रही है..., हरियाणा दिल्ली को पानी देने में ना – नुकुर कर रहा है.., आसाम, बिहार के सूखे इलाके मानसून में बाढ़ ग्रस्त हो जाते हैं.., गजराज इंद्र कह रहें है की मैं सनातन हिन्दुस्तान की संतानों को आदि काल से ही तृप्त कर जल वर्षा करता था .., और इस जन वर्षा को माती के माटी के मिश्रण से अन्न से देश में धन वर्षा से यह देश सोने की चिड़िया कहलाता था ...



तमिलनाडु केरल को बाढ़ का दोषी मान रहा है.., तमिलनाडु व कर्नाटका में आपस में पानी के तोल की लड़ाई हो रही है..., हरियाणा दिल्ली को पानी देने में ना – नुकुर कर रहा है.., आसाम, बिहार  के सूखे इलाके मानसून में बाढ़ ग्रस्त हो जाते हैं..,

गजराज  इंद्र कह रहें है की मैं सनातन हिन्दुस्तान की संतानों को आदि काल से ही तृप्त कर जल वर्षा करता था .., और इस जन वर्षा को माती के माटी के मिश्रण से अन्न से देश में धन वर्षा से यह देश सोने की चिड़िया कहलाता था ...

देश को सत्ता परिवर्तन की आड़ में आजादी कह वोट बैंक की राजनीती से देश को भाषावाद से आशावाद दिखाकर , देश को आरक्षण व जातिवाद से घुसपैठ मीठी चासनी में जलेबी की तरह डूबोकर इसका शुरूवात  व अंत की खोज कोई नहीं कर सकता है की देश इस तरह  खंडित होकर डूब कैसे रहा है...

मित्रों लिखने को बहुत है... लेकिन इस समुंद्री नाग का  मंथन कर इसमें से जहर को कैसे साफ़ किया जाय.. ,इसका पर्याय के बारे में कोई नहीं सोचता है...!!!!!! इसके मंथन से ही देश को निजात (कोई जाति नहीं के सिद्धान्त ) मिलेगी... !!!!

Saturday, 25 August 2018

वासुधैव कुटुम्बकम के इस धागे में, धर्म परिवर्तन, जातिवाद, भाषावाद, अलगाववाद व घुसपैठीयों के वोट बैंक के विभिन्न रंगों के लेप से इस हिन्दुस्थानी धागे को तोड़कर , बहुत सारे खंडित धागे बनाने के लिए विदेशी आक्रमणकारीयों..., के बाद विश्व के देशों व अब तो देशी मीडिया भी इस गलिछ्ता से गलीचे वाला जीवन जी कर हिंदुत्व के ठेकेदार से “स्टार चैनल” से विदेशी संस्कृति से देश को “विकृत” कर दलाल बन कर देश को हलाल कर रहें है..,



१.              हिंदुत्व ही बंधुत्व है, पूरा विश्व ही हिन्दू का तत्व है..., अब आरक्षण की तलवार, एक नई धार से, नेताओं के वोट बैंक की दांत की चमक के पैने पन की तस्वीर से, आज देश ऊंचाई को छूने की बजाय बौनाहोते जा रहा है..

२. आजादी के मसीहा कहकर, छद्म पुतलों व सडकों के नाम देखकर.., देश को चौपटनगरीकर, अंधे राजाओं को देखकर , आज भी भारतमाता आहभर.., कराह कर, कह रही है.., ६८ सालों बाद भी..!!!, मेरे १२५ करोड़ बेटों को किस तरह, विदेशी हाथ- विदेशी साथ विदेशी विचार- विदेशी संस्कार , जाति, भाषा व धर्मपरिवर्तन से आपस में, लड़ाकर..., कैसे मेरे कटे अंगो के घाव सहित , पुन: मुझे विदेशी जंजीरों से बांधने का प्रयास किया जा रहा है.

३. कहां गए...!!!!!, मेरे वीर सपूत विनायक सावरकर, भगत सिंग ,राजगुरू, आजाद, सुभाष चन्द्र,रानी लक्ष्मीबाई पुत्री व अन्य लाखों क्रांतीकारी जिनके विचारों को ताबूत में बंद कर दिया.., क्या आज की गुलामों की शिक्षा से, अब अब्दुल कलाम जैसे राष्ट्रवादी प्रतिभाओ का जन्म होगा...

४. वासुधैव कुटुम्बकम के इस धागे में, धर्म परिवर्तन, जातिवाद, भाषावाद, अलगाववाद व घुसपैठीयों के वोट बैंक के विभिन्न रंगों के लेप से इस हिन्दुस्थानी धागे को तोड़कर , बहुत सारे खंडित धागे बनाने के लिए विदेशी आक्रमणकारीयों..., के बाद विश्व के देशों व अब तो देशी मीडिया भी इस गलिछ्ता से गलीचे वाला जीवन जी कर हिंदुत्व के ठेकेदार से स्टार चैनलसे विदेशी संस्कृति से देश को विकृतकर दलाल बन कर देश को हलाल कर रहें है..,

५. विश्व चाहता है कि कैसे हम इन हिंदुस्थानी धागों को तोड़कर , टूटे धागों की गाँठ बांधकर, हम नए गुलामों की जमात बनाकर..., एक मजबूत रस्सी से बाँध कर रखें...,

6. हिंदुत्व तो ..., मातृत्व-माता (वन्देमातरम),/ पितृत्व-पिता (राष्ट्रवाद),/गुरुतत्व-गुरू (वैदिक वैज्ञानिक ज्ञान से गुरू है) व वासुधैव कुटुम्बकम (भाई-बहन चारा ) के असंख्य धागों का योग है... 

हम प्रतिज्ञा ले.. इस राष्ट्रवादी धागे को और मजबूत बनाएं...
Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold. के संकल्प से गरीबी हटकर, भारत निर्माण से, इंडिया शायनिंग से, हमारे LONG – INNING से, “FEEL GOOD FACTOR” से देश के अच्छे दिन आयेंगें..,


राफेल की धार पहुंची सीमा पर , अब नहीं होने दूंगा देश का बंटाधार .., इस कोलाहल से बनाऊँ इन्हें कोल्हू का बैल से राजनीती में ध्वस्त करूं इनके विचारों के चित्र का अस्तित्व ..,,



प्रहार पर प्रहार..,
विरोधियों का चीत्कार, कोलाहल.., कहें मोदी नहीं है चित्रकार  ..,

इस कोलाहल से बनाऊँ इन्हें कोल्हू का बैल से राजनीती में ध्वस्त करूं इनके विचारों के चित्र का अस्तित्व ..,,

राफेल की धार पहुंची सीमा पर ,
अब नहीं होने दूंगा देश का बंटाधार ..


www.meradeshdoooba.com (a mirror of india) स्थापना २६ दिसम्बर २०११ कृपया वेबसाइट की ७०० से अधिक प्रवाष्ठियों की यात्रा करें व E MAIL द्वारा नई पोस्ट के लिए SUBSCRIBE करें - भ्रष्टाचारीयों के महाकुंभ की महान-डायरी

Thursday, 23 August 2018

चेतो मोदी सरकार..., यह अच्छी बात नहीं है...,यह अटल सत्य जो बेबाक है..., मत करो अपना समय बर्बाद.. जगाओ..,जगाओ..., १०० करोड़ से अधिक गरीबों के घरों की राख की चिंगारी से देश में चरागों के उजालों से सूरज भी शर्मायेगा.. “यह अच्छी बात नहीं है...” यह.., राजनीती की गन्दगी से सौगात का भद्दा मजाक है शवों पर राजनीती कर पुतले बना तो ठीक है . इंदिरा गांधी की तरह मेरे राख से खिलवाड़ कर , जनता को गुमराह कर कुर्सी का धेय्य बनाना .., “यह अच्छी बात नहीं है...” – अटल बिहारी वाजपेयी



चेतो मोदी सरकार..., यह अच्छी बात नहीं है...,यह अटल सत्य जो बेबाक है..., मत करो अपना समय बर्बाद..

जगाओ..,जगाओ..., १०० करोड़ से अधिक गरीबों के घरों की राख की चिंगारी से देश में चरागों के उजालों से सूरज भी शर्मायेगा..

“यह अच्छी बात नहीं है...” यह.., राजनीती की गन्दगी से सौगात का भद्दा मजाक है.
 
शवों पर राजनीती कर पुतले बना तो ठीक है . इंदिरा गांधी की तरह मेरे राख से खिलवाड़ कर , जनता को गुमराह कर कुर्सी का धेय्य बनाना .., “यह अच्छी बात नहीं है...” – अटल बिहारी वाजपेयी

१९४७ में देश का लोकतंत्र के जन्म के बाद, १९५०  के संविधान में एक शैशव काल में पहुंचा.., और गांधी के छद्म चरित्र के सत्य, अहिंसा के पुतले की छाँव में इस शैशवी लोकतंत्र ने आज तक उजाला नहीं देखा.., आज भी ७२ सालों बाद इस  लोकतंत्र ने सूरज नहीं देखा और अपनी जवानी खो दी.., अब बुढ़ापे में खो रहा है.., वह भी इसे इंदिरा युग की समाप्ति के बाद मोदी युग की शुरूवात को राखों के ढेर से अब उसे बरगलाया जा रहा है....,    

Wednesday, 15 August 2018

देश के इतिहास में लाल किले से एक शेर ५वीं बार दहाड़ा.., दुनिया को शिखाया राष्ट्रवाद का पहाड़ा..., ७१ सालों की तुष्टीकरण की नीती से देश के सुस्तीकरण से देश को बूढ़ेपन में ढकेलकर..., विदेशी बैसाखी देने वालों को चेताया.., कि हम अभी भी, लूले, लंगड़े नहीं है...




देश के इतिहास में लाल किले से एक शेर ५वीं  बार दहाड़ा..दुनिया को शिखाया राष्ट्रवाद  का पहाड़ा.

विरोधियों का सूपड़ा साफ़ करने बाद..., देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद , अपनी ललकार से ब्रिकस देशों की अपनी मनमानी की ब्रिक (ईट) तोड़कर, व अमेरिका को अपने देश के स्वाभिमान की फटकार से लताड़ कर.. होश उड़ा दिए है ..,
पहली बार विदेशी पट्टे (जंजीर व विदेशी नीती के घुटने टेकू विचार को ध्यान में रख, बनाए गये पिछले नेता
ओं के भाषण.., मोदीजी ने बिना कागज के लेख से.., अपने स्वाभिमानी मौखिक बयान से ) के बिना, और विदेशी इशारों की लगाम तोड़ कर दहाड़ा .., और विश्व के देश द्वारा अपनी नीती बनाकर, हमारे देश को लूटने, व आतंकवादी भी ..., जो देश को आतंकवाद से देश की दरार कर फर्राटे से भागने, में सफल होते थे.., अभी उन्हें.., मोदी द्वारा, भविष्य में अपने पिछड़ने का पहाड़ा समझकर..., अभी से चिंतित हो गए हैं ...,

७१ सालों की तुष्टीकरण की नीती से देश के सुस्तीकरण से देश को बूढ़ेपन में ढकेलकर..., विदेशी बैसाखी देने वालों को चेताया.., कि हम अभी भी, लूले, लंगड़े नहीं है...

अभी भी हममें राष्ट्रवाद का खून मौजूद है..., और हमारे में इतनी शक्ती है कि वोट बैंक की आड़ से , देश में हुआ अन्धकार... जो राष्ट्रवाद का ६७ सालों का जमा कर रखा खून था - व विदेशी कर्ज के खून से देश को दौडाने के खेल से सत्ता की भ्रष्टाचार की सुपर रेल का आनन्द के खेल के, तमाशे से देश वासियों को भारत निर्माण के अफीमी नारों से जनता को भरमा रहें थे..., वह दिन चले गए है 

अब राष्ट्रवाद से ही देशवासियों के अच्छे दिन आने वाले है...,” “यही विश्व के उन्नत देशों का मूल मंत्र है..

लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री के इसी अदभुत सन्देश से , अब हमारे देशवासी, विश्वगुरू की ऊर्जा से,एक नया उजाला देकर, वन्देमातरम (धरती/देश की सेवा का पूजक/सूचक) की दहाड़ से, हमारा देश सुजलाम सुफलाम से विश्व के सर्वोत्तम से श्रेष्ठतम बनेगा –
GOOD FACTOR” से देश के अच्छे दिन आयेंगें..,