गांधी की आड़ में कांग्रेस में एक बड़ा खेल खेला , हिन्दू राज्य को ठुकराकर, जब गांधीजी और नेहरु ने देश का विभाजन मजहब के आधार पर स्वीकार किया, पाकिस्तान मुसलमानों के लिए और शेष बचा हिंदुस्थान हिंदूओ के लिए, तो उन्हें हिंदूओं को तर्कश: :द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत के अनुसार अपना हिन्दूराज्य स्थापित करने के अधिकार से वंचित नहीं करना चाहिए था .यह पंडित नेहरु ही थे जिन्होंने स्वेच्छाचारी तानाशाह के समान अगस्त १९४७ में घोषणा की थी कि जब तक वे देश की सरकार के सूत्रधार है,भारत “हिंदू राज्य” नहीं हो सकेगा. कांग्रेस के सभी हिंदू सदस्य इतने दब्बू थे कि इस स्वेच्छाचारी घोषणा के विरुद्ध एक शब्द भी बोलने की भी उनमें हिम्मत नहीं थी.

  https://www.facebook.com/BapuKeTinaBandaraAbaBanaGayeHaiMa…/   फेस बुक व वेबस्थल की १७ जनवरी २०१४ की पुरानी व आज भी सार्थक पोस्ट   बो...

भारतेंदु हरिश्चंद्र मात्र 34 साल जीवन जीने वाले जो साहित्यकार, पत्रकार, कवि और नाटककार थे 1850 के आसपास के भारत में भ्रष्टाचार, प्रांतवाद, अलगाववाद, जातिवाद और छुआछूत जैसी समस्याएं अपने चरम पर थीं. तब उन्होने देश भर में अपने नाट्य मंचों को हिन्दी व क्षेत्रीय भाषाओं से समाज की आँखें खोलने मेँ एक अहम भूमिका निभाई जिन्होने विश्व को यही सार्थक उक्ति कही थी संदेश दिया था कि मातृभाषा से ही देश की उन्नती है “ निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।। विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार। सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।। ” निज यानी अपनी भाषा से ही उन्नति संभव है, क्योंकि यही सारी उन्नतियों का मूलाधार है। मातृभाषा के ज्ञान के बिना हृदय की पीड़ा का निवारण संभव नहीं है। विभिन्न प्रकार की कलाएँ, असीमित शिक्षा तथा अनेक प्रकार का ज्ञान, सभी देशों से जरूर लेने चाहिये, परन्तु उनका प्रचार मातृभाषा के द्वारा ही करना चाहिये।

यह चित्र मोदीजी , भारतमाता व राष्ट्र को समर्पित अब अंग्रेजी नही बनेगी राष्ट्र के युवाओं को रोटी देने वाली भ्रम की भाषा ..., देश को जकड़ने...
Saturday, 24 July 2021

मणिपुर की बेटी ने देश को मणि लाकर दी , चानू ने चांदी का पदक लाकर देश में चाँदनी से दिखा दिया की प्रतिभा शहरों से ज्यादा गांवों में बसती है, देश के दूर सुदूर का आज का आदिवासी जो उपेक्षित है उसने दिखा दिया है कि वह देश की प्रतिभा में जान डालकर देश की शान से हम विश्व में प्रज्जवलित रहेंगे... बधाई हो प्रधानमंत्री मोदीजी को जिन्होने टोक्यो ओलिम्पिक जाने से पहले हमारे खिलाड़ियों का हौसला बुलंद कराते हुये प्रेरणा दी की...., “मेरे प्रिय खिलाड़ियों अलिम्पिक में दबाव में नही रहना अपनी १००% प्रतिभा झोंक देना पदक तुम्हारे चरण चूमेंगीं”

मणिपुर की बेटी ने देश को मणि लाकर दी , चानू ने चांदी का पदक लाकर देश में चाँदनी से दिखा दिया की प्रतिभा शहरों से ज्यादा गांवों में बसती है ...