Saturday, 8 August 2015

आओं मनायें .., आजादी “वीर सावरकर” “डॉ. एपीजे कलाम” “लाल बहादुर शास्त्री” व “राजीव दीक्षित” के देशी विचार,संस्कार संग...., भरें जीवन में एक नया रंग.., तिरंगा न हो बदरंग

“भारत रत्न” कलाम भी “वीर सावरकर” के कलमा के कायल थे, उन्होंने भी माना.., “मेरी  ऊंची उड़ान में  “वीर सावरकर” की जान व प्रेरणा थी..
आओं मनायें ..,  आजादी “वीर सावरकर” “डॉ. एपीजे कलाम” “लाल बहादुर शास्त्री” व “राजीव दीक्षित” के देशी विचार,संस्कार संग...., भरें जीवन में एक नया रंग..,  तिरंगा न हो बदरंग
“वीर सावरकर” से अभिभूत भारत रत्न सम्मान से मंडित देश के वरिष्ठ वैज्ञानिक “डॉ. एपीजे कलाम” ने अपने उद्‌बोधन में बडे ही मुक्त ह्रदय से यह रहस्योद्‌घाटन किया था कि आपने अपनी रचना 'इंडिया 2020 ए विजन फॉर द न्यू मिलिनियम" ग्रंथ में 'स्ट्रैंग्थ रिस्पेक्ट्‌स स्ट्रैंग्थ" (शक्ति ही शक्ति का सम्मान करती है) यह जो दार्शनिक वाक्य प्रस्तुत किया था, वह मूलतः “वीर सावरकर “का दिया हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी तरुणाई के दिनों में “वीर सावरकर” के त्याग एवं विचारों को पढ़कर वे अभिभूत थे और उन्होंने सावरकर साहित्य को पढ़ा है
याद रहे.., पुणे के 'ऋण विमोचन ट्रस्ट" द्वारा युद्धनीति तथा रक्षा तैयारियों से संबद्ध अनुसंधान के क्षेत्र में मौलिक अनुदान देनेवाली राष्ट्रीय व्यक्ति या संस्था को दिए जानेवाले 'वीर सावरकर पुरस्कार" से वर्ष 1998 में डॉ एपीजे कलाम को सम्मानित किया गया था.
“वीर सावरकर” को देशद्रोही कह ललकारने वालों को राष्ट्रपति  डॉ. एपीजे कलाम ने फटकार लगाई.., भले विपक्ष “वोट बैंक” के प्रतिशोध की राजनीती से संसद में गैर हाजिर था.., इसकी परवाह न करते हुए “वीर सावरकर” के तैल चित्र का अनावरण किया व भूरी-भूरी प्रशंसा की..,

याद रहें.., इससे  पूर्व, के.के.नारायण  जातिवाद की राजनीती से राष्ट्रपति बने थे. इसे वोट बैंक की राजनीती बरकरार रखते हुए.., उन्होंने “वीर सावरकर” के तैल चित्र लगाने का कड़ा विरोध किया,  क्यों कि  “वीर सावरकर” जातिवाद के महा कट्टर विरोधी थे

कलाम व वीर सावरकर में समानताएं ..
१.  दोनों, देश के पिछले बेंच (सूदूर ग्रामीण से ) के राष्ट्रवादी विद्यार्थी ..., बचपन से अलौकिक प्रतिभा.. देश व विश्व में अग्रीणतम की कतार में अव्वल.
{भले आज भी देश में .., जातिवाद,भाषावाद, भ्रष्टाचार से जनता से नेता तक में.., नशे की आड़ में आतंकवाद से हो रही सर फुटव्वल की जंग में, लोक तंत्र में  लूट तंत्र का भर रहें रंग.., बदरंगों सियारों की बहार से, एक नयी बयार है.., अफीमी नारों की बोली की आड़ में, छद्म राष्ट्रवाद के . बोली की होली है..., भक्त प्रहलाद मारा जा रहा है.., होलिका  WHOLE देश में HOLE कर रही है. }
२.  एक ने देश की गुलामी को विश्व पटल में लाकर क्रांतीकारियों” को सन्देश दिया कि “गुलामी” देश व जनता का कलंक” है, इसी मंत्र से  विश्व के क्रांतीकारियों को संगठीत किया .., वहीं “डॉ. एपीजे कलाम” ने दुनिया को सन्देश दिया कि हमारा ज्ञान विज्ञान का कोई सानी नहीं है...
३.  दोनों का सन्देश , “राष्ट्रवाद”  के विचारों से ही हम सार्थक होंगें..., न कि सत्ताखोरों की बंदर बाट योजनाओं से..    
४.  दोनों ने अपने जीवन का 100% समय राष्ट्र को समर्पित किया ,कोई व्यक्तिगत सम्पती नहीं बनाई
५.  शास्त्री को रूस न जाने की  चेतावनी की भविष्यवाणी  से  ह्त्या का समाचार सुन, वीर सावरकर ने इच्छा मृत्यु से भारतमाता को अपनी अंतिम सांस समर्पीत की वही लोकतंत्र को तडफा-तड़फा कर घुटन से मारने के सांसदों के खेल व आतंकवाद से देश को रंगने के खेल से चिंता में डॉ. एपीजे कलाम अपनी अंतिम सांस ली
६.  दोनों सपूतों की  मृत्यू  ८३ साल की आयु में
देश का दुर्भाग्य...!!!!, आज सत्ता परिवर्तन के ६८ सालों बाद भी देश की जनता जातिवाद, भाषावाद,धर्मवाद व वोट बैंक से घुसपैठीयों की नीती से विदेशी आतंकवाद व देश में अलगाव वाद से भयभीत है


अंग्रेजों ने सत्तापरिवर्तन के समय जिन्ना,नेहरू व  गांधी की तिकड़ी को सौगात दे दी थी ..., अखंड भारत की धरा- धारा से “जनमत” के बावजूद देशवासियों  को बड़ा धोखा मिला.., कांग्रेसियों ने जवाहरलाल नेहरू को नकार कर , सरदार पटेल को प्रधानमंत्री के रूप में चुनने के बावजूद , गांधी ने नेहरू को प्रधानमंत्री पद “उपहार” में दे दिया

देश को “छद्म अहिसा” से १९४७ की खूनी होली से १० लाख हिन्दुस्तानियों  की ह्त्या से, देश तो खंडित हो गया.., इसके बावजूद हमने  “वीर सावरकर” की ४० से अधिक भविष्य वाणियों की ओर ध्यान दिया होता तो आज देश ६८ साल पहिले ही “विश्व गुरू” बन जाता.

आज का इजराईल “वीर सावरकर” की विचारधारा को सिरोधार्य कर देश का  सैन्यीकरण कर विज्ञान के संग “राष्ट्रवादी” विचारों से देश के उन्नत व सुरक्षित देशों में शुमार है.., जबकि हम आतंक वाद में चूहा मार से  भी भीरू हैं

कही एक आतकवाद का चूहा पकड़  भी लिया तो देश का मानवाधिकार सजा  देने में, देश को धिक्कारता है.., इसकी आड़ में मीडिया –माफिया-सत्ताखोरों की टोली के जबानी बोली से वे T.R.P.से और  मालामाल हो रहें हैं,,,

क्या..??, “छद्म, गांधीवादी अहिंसा” से देश ६८ सालों से, भीरू रहेगा ...!!!

राष्टवाद का सार..., देशी विचार..,
Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold. के संकल्प से गरीबी हटकर, भारत निर्माण से, इंडिया शायनिंग से, हमारे LONG – INNING से, “FEEL GOOD FACTOR” से देश के अच्छे दिन आयेंगें..,
साभार


Friday, 7 August 2015

चेतो..मोदी सरकार ... मैं लालबहादुर शास्त्री बोल मेरे “मन की बात” कह रहा हूं ..,रेल मंत्री के कार्यकाल में , मेरे इस्तीफे के बारे में.., कहना चाहता हूं ...,



चेतो..मोदी सरकार ...
मैं लालबहादुर शास्त्री बोल मेरे मन की बातकह रहा हूं ..,रेल मंत्री के कार्यकाल में , मेरे इस्तीफे के बारे में.., कहना चाहता हूं ...,
आज की संसद में हुडदंग की सनसनीव हाल के आतंकी हमलों व रेल भीषण दुर्घनाओ के बारे, मेरे नाम का उदाहरण देकर, हर पार्टी ने सत्ता में रहते हुए..., अपनी रोटी सकने वालों से भी, मैं कहना चाहता हूं ...
रेलवे मंत्री के इस्तीफे की मेरी घोषणा के समय.., अन्य मंत्रियों ने मुझसे कहा, आप,इस पद का आनंद लो..,आपकी कोई गलती नहीं है वह तो रेल कर्मचारी की गलती है ,जो उसने हरी झंडी दिखा दी.., तब मैंने संसद में उत्तर दिया कि इसमें गलती मेरी है कि वह कर्मचारी मेरे मंत्री पद से देश का गौरव न कर .., सरकारी नौकर की तरह लुंज पुंजकाम करता रहा.., जब तक आम जनता को मंत्री पर भरोसा न हो तो.., तो मंत्री पद पर बने रहना, देश की जनता के साथ धोखा है.
मेरे जीवन में अटूट विश्वास था.., देश ५० करोड़ देशवासियों के मुट्ठी बल से ही चलेगा .., देश विदेशी हाथ , साथ , विचार संस्कार व विदेशी कटोरे से नहीं
मेरा जीवन तो राष्ट्रवाद से भरा था.., मैंने जिन्दगी में गरीबी को अपना मित्र मानकर, मरते दम तक देश की गरीबी देखकर, उन गरीबों के उत्थान में मेरा राजनैतिक जीवन समर्पित कर दिया.., नेहरू की :अय्याशीसे आराम हराम है की उद्दंडता से देश को विदेशी हाथों बेचकर.., किसान का बर्बाद होकर विचलित था ..., लेकिन उनकी चंडाल चौकड़ी की फ़ौज के सामने मेरी आवाज नेपथ्य में चले जाती ..,
काश मैंने वीर सावरकरजी की बात मानी होती ..., ताशकंद जाने से पहले वीर सावरकरजी ने मुझे चेताया और कहा शास्त्रीजी हम जीते हुए राष्ट्र है , रूस के प्रधानमंत्री को हमारे देश मे बुलाओ, यदि आप ताशकंद जाओगे तो वापस नही आओगे.. और हमारे द्वारा जीता भाग भी लुटाआओगे..
उनकी यह भविष्यवाणी सच हुई, इसका मलाल मुझे आज तक है.
(भाग-२)
मोदी सरकार.., अब कश्मीर को शेख अब्दुल्ला युग के सरकार मत बनाओं.., मैं लाल बहादुर शास्त्री बोल रहा हूँ , (आओं सुने राष्ट्रवाद की स्वदेशी बोली .., लालबहादुर शास्त्री और वीर सावरकर के विचारों के संग-
१. मोदीजी आपने तो ५६ इंच का सीना दिखाकर, चुनाव जीता.., जबकि मेरे शरीर की लम्बाई भी ५६ इंच नहीं थी..., आप तो चाय बेचकर.., अपने जीवन की गरीबी दिखाकर, प्रधानमंत्री बने.., मेरी गरीबी को, मैं हिन्दुस्तान की गरीबी से देखता था.., मेरे पास तो चाय पीने के भी पैसे नहीं थे.., और प्रधानमंत्री बनने के बाद मेरा एक ध्येय था.., देश के गरीबों में विदेशी खून के बजाय, “जय जवान-जय किसानके स्वाभिमानी देशी खून से देश में श्वेत क्रांती से, दूध की नदियाँ बहाकर देशवासियों को रिष्ट पुष्ट बनाकर.., जवानों व किसानों के जज्बे से हमारा देश अंतर्राष्टीय पटल पर छा गया ...
२. मुझे तो पकिस्तान के चंगेज खान.., जनरल अयूब खान ने, हमारे देश में आक्रमण करते हुए कहा था.., यह चार फूट कद का , बच्चे की तरह दिखने व बच्चे की आवाज वाला, प्रधानमंत्री क्या यह लड़ाई लड़ पाएगा..., तब इस युद्ध की चुनौती स्वीकारते हुए मैंने कहा मेरी काया की लम्बाई से उसकी नींव, जमीन में कई गुना गहरी है
३. मोदीजी आप तो अपना ५६ इंच का सीना कह कर दंभ भरते हो..., मैंने जब से मैंने, होश संभाला. मैं तो हर देशवासियों में ५६ इंच का दिलदेखता था.., और इस दिल में २०० सालों से , विदेशी खून का विष डाला दिखता है..., सत्ता परिवर्तन के बाद में भी इसी खून के खेल से, देश के टुकड़े कर, विदेशी खून में संविधान से जातिवाद, भाषावाद, धर्मवाद का खून डालकर, आज भी राष्ट्र इसी खून से त्रस्त है.., और यह देशवासियों के दिमाग में इतने गहन रूप से भर दिया कि आज भी विदेशी भाषा.., आचार .., विचार.. के बिना देशवासी रोटी नहीं खा सकता है..
४. प्रधानमंत्री बनने के बाद, देश की नेहरू की गन्दगी दूर किए बिना.., देश में राष्ट्रवादी धारा का प्रवाह नहीं होगा यह मेरा प्रबल मत था.., शेख अब्दुल्ला द्वारा द्विराष्ट्रवाद के नेहरू खेलका मुझे अच्छी तरह आभान था.., इसलिए,शेख अब्दुल्ला की शेखी मैंने उनको गद्दी से उतारकर.., कांग्रेसी SNAKE को SHAKE कर उन्हें भी अपनी हड्डियों की श्रंखला के टूटने का भीषण आभाष हो गया था .., आज जो धारा ३७० की आड़ में जो खून का तांडव खेला जा रहा है.., उसके निदान के प्रयास के पहिले ही ताशकंद में मेरी ह्त्या कर, देशी ताकतों ने विदेशी हाथों से मेरे देश के स्वर्णीम युग का स्वप्न छीन लिया.
५. मोदीजी मेरा जीवन की शुरुवात तो गरीबी से हुई.., और मेरी ह्त्या तो सत्ता में भ्रष्टाचार निकालने व देश को उन्नत से ५० करोड़ देशवासियों के मुट्ठी बल को स्वर्णिम युग से देदिव्यमान करने के लिए सत्त्तालोलूप्तों ने देश की प्रतिभाओं की जागृत होने के खौफ से..., माफिया जो, विदेशी हाथ, विदेशी साथ, विदेशी भाषा, विदेशी विचार से देश को २०० साल लूटने के खेल के बाद भी एक समानांतर गुलामी का जाल बुन रहें थे..., इसकी बू.., मुझे जवाहरलाल नेहरू के काल से ही आ रही थी.
६. मैंने तो अपने जीवन के ध्येय को .., इमानदारी से राष्ट्र की सेवा को समर्पीत कर .., मैंने इमानदारी के जूनून से ही पार्टी के व सरकार पदों में काम किया.., मेरे जीवन में, नेहरू काल में लाखों कार्यकर्ताओं. राजनेताओं ने.., गांधीवाद की आड़ में साधुवादी बनकर, देश को लूटा.., इस माहौल को देखकर भी मैंने उनकी छाया से जीवन में छांव लेने की कल्पना तक नहीं की थी.
७. मुझे, मेरे जीवन में जितने भी पद मिले उसे मैंने भारतमाता का गौरव बढ़ाने के लिए समर्पित रहा, मैं बहुत गहनता से जुटा रहा.., कई बार नेहरू की नौकरशाही की लुंज-पुंजता से, वे भ्रष्टाचार से पूंजी बना गए..., इसका दुःख मुझे बहुत होता था.., क्योंकि उस वृक्ष के (जड़ का) राजा देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे..., मैंने कठोर मेहनत के बावजूद, असफलताओं के लिये कभी अफ़सोस नहीं किया, और राजीनामा देता रहा.
८. इसका लाभ, मेरे प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लिया.., मुझे तो वे मोहरा बनाकर अपनी सत्ता चमकाते रहें.. और देशवासियों को मेरे राजीनामा से राजी कर .., शांती के मसीहा बनकर, नोबल पुरूस्कार जीतने के फेर में सेना को नो-बल कर दिया था
९. हमारे आयुद्ध कारखाने में, हथियार बनाने के बजाय चूड़ी का कारखाना लगाकर दुश्मनों को देश में आकर -युद्धकी प्रेरणा से देशवासियों को चूड़ी पहनाने का जामा/खेल खेल रहे थे...,
१०. नेहरू की मृत्यू के बाद मैं तो प्रधानमंत्री पद का काबिल भी नहीं था.., दिग्गजों के आपसी बंदरबांट की लड़ाई मे, मुझे प्रधानमंत्री पद दिया गया .., तब मुझे लगा, “अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे.., अब इन नेताओं राजनैतिक जीवन को रेगिस्तान की मरूस्थली बनाओं..
११. मैं कायल था तो सिर्फ और सिर्फ, “वीर सावरकरजीकी विचारधारा से, जिन्होंने १९५४ में नेहरू को चेताया था कि चीन हम पर आक्रमण करने वाला है..., देश की सुरक्षा के लिए अणुबम के साथ हाइड्रोजन बम बनाने व स्कूलों में सैनिक शिक्षा अनिवार्य कने का मंत्र दिया था.., उलट १९६२ में चीन द्वारा एकतरफा जीत से नेहरू, वीर सावरकर से बौखालागाये थे..इस चेतावनी का अनुसरण न करने की अपनी गलती छुपाने के बजाय, उनहें उनके घर सावरकर सदनमें नजरबन्द कर दिया और उनके पत्रों की भी जांच शुरू कर दी.. अंत में थल सेना के हारे हुए जनरल करिअप्पाने अपना पद त्यागते हुए कहा था.., यदि हमने वीर सावरकर की बात मानी होती तो चीन आक्रमण के बारे में भी नहीं सोचता था.... इस राष्ट्रवादी की आर्थिक गरीबी की परिस्तिथी व उनके अतुल्य देशभक्ति से प्रेरित होकर, मैंने पेंशन के रूप में आर्थिक सहायता प्रदान करने से मेरी पार्टी में खलबली मच गई थी.
१२. मेरे इर्द गिर्द सत्ताखोरों की भेड़िया फ़ौज भी .., इसी भ्रम मे थी कि मैं पाकिस्तान से युद्ध हार जाऊंगा.., और मैं जल्द ही इस्तीफा दे दूंगा.., मेरी राष्ट्रवादी विचारधारा से पकिस्तान तो बह गया था, और मेरे दिग्गज साथियों को अपना राजनैतिक जीवन, बहने का खतरा मंढरा रहा था...
१३. माफियाओं की दूकान बंद हो रही थी..., मैंने कभी नेहरू के, गांधी - नेहरू द्वारा समृद्ध टाटा बिड़ला बजाज के मिजाज को देखकर उनके तलुवे नहीं चाटे, मुझे तो ५० करोड़ गरीबों के तलुओ की मजबूती का इतना अभिमान व विश्वास था कि देश की कटींली राह में, चलकर भी उनके तलुओं को काँटों की चुभन नहीं होगी..., मुझे कांग्रेस से भारी उद्योग न लगाने का भारी विरोध करने पर कहना पड़ा, जैसे नेहरू को गांधी के विचार पसंद नहीं थे उसी तरह, मुझे गांधी के स्वदेशी विचारसे लघु व ग्रामीण उद्योग से गरीबों को अमीरी रेखा तक पहुँचाना है.., देश का तन-मन धन गरीबों के उत्थान से ही, मजबूत भारत का निर्माण होगा
१४. मुझे तो कांग्रेस सरकार ने १८ महीने ही दिए और देश के स्वर्णीम काल के भविष्य देख पाने के पहिले ही..., मेरी ह्त्या कर दी.., मेरी कांग्रेसी पार्टी ही नहीं विश्व को भी भयानक डर था कि जो मेरा दृण निश्चय था .., देश, विदेशी हाथ, विदेशी बात, विदेशी साथ, विदेशी विचार, विदेशी संस्कार के लगाम का पूर्ण सफाया करने का संकल्प..., जो चंद वर्ष में मेरे कार्यकाल में ही पूरा कामयाब होना था , और देश की खान खदान, ईमान देशी-विदेशी माफियाओं हाथों से निकलने का डर ही मेरे ह्त्या का कारण बना .
१५. आज ४९ सालों बाद मैं भी.., रूस के ताशकंद में बंद कमरे में रात में १ बजे दूध पीने के बाद में विदेशी रसोईये का धोखे से जहर पिलाने के बाद की घुटन. को.., आज मेरे, देशवासियों में महसूस कर रहा हूँ, फर्क इतना है कि मैं घुटन से मारा गया, और देशवासी घूट घूट के जी रहा है.. कैसे विदेशी हाथ वाले, देशी उद्योगपतियों की आड़ में देश में माफियाराज से देश को गर्त में डालकर आज प्रति व्यक्ती ५० हजार रूपये का कर्ज करने व जवानों व किसानों का पसीना विदेशी बैंकों में कैद कर रखा है .
१६. चेतो मोदी सरकार.., राष्ट्र तो देशवासिओं के १२५ करोड़ मुठ्ठी बल से उन्नत होगा, विदेशी धन से देश की अवनीती होगी, इस नीती से महंगाई के जूते से जनता की दुर्गती होगी..
कर लो राजनेताओं को मुठ्ठी मेंके माफियाओं के नारों ने देश को कर्ज से डूबाकर, उजाड़ दिया है. किसानों की भूमि छीनकर,, उसे विकासके बहाने देश का बेगानाबना दिया है.., किसान आज कैसा इंसान बन गया है.., आत्महत्या ही उसका धर्म बन गया है ....
१७. मेरी जीवन की गाथा तो बहुत लम्बी है.... चेतो मोदीजी यह देश सावरकर की धारा से ही आगे बढेगा..,
आपके १४ महीने भले विदेशी दुश्मनों के लिए खौफ हो.., लेकिने तुम्हारे बजरबट्टू नेताओं के घोटालों से आप की चुप्पीसे, आप व देश पर बट्टा लगा दिया .., तुम्हारी चुप्पी से देश निराश है.., महंगाई के दावानल से माफिया प्रफ्फुलित व जनता चिंतित है.... कि अच्छे दिनों से अब कही कच्छे पहिननेके दिन न आ जाएं
१८. चेतो मोदी सरकार.., कैसे रेल मंत्री की,मेरी असफलता से मैंने पद की बलि देकर.., प्रधान मंत्री पद से मैंने १८ महीनों में ही,देश के ५० करोड़ जवान किसानकी आभा बल से देश को विजयी बनाकर.., हरित इ श्वेत क्रांती से देश को लबालब से लाजवाब कर दिया था..,काश मेरी ह्त्या न होती.. मेरी भटकती आत्मा की आवाज, अब बहुत कुछ कहना चाहती है...
Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold. के संकल्प से गरीबी हटकर, भारत निर्माण से, इंडिया शायनिंग से, हमारे LONG – INNING से, “FEEL GOOD FACTOR” से देश के अच्छे दिन आयेंगें..,

Wednesday, 5 August 2015

दोस्तों ..., हम, आप देश के ५ साल के मोहरों हो...,देश के रोते हुए चहरे हो...,देश के ६८ सालों से, संसद के समय की बर्बादी से राष्ट्र की बर्बादी है ... डूबते देश की कहानी है...,


पुरानी खबर  में नया कवर.., या  पुरानी बोतल में नई शराब.., सत्ता का ख्वाब..., यह सत्ता-विपक्ष (अच्छे दिनों V /s भारत निर्माण) की अहंकार की लड़ाई नही.., देश के अंधकार की कहानी है..., सुषमा के  इस्तीफे, के  इस तोहफे से कांग्रेस के २५ सांसद बर्खास्त .., सत्ताधारी  भाजपा का रास्ता साफ़ ..., क्यों नहीं इन  मुद्दों पर होती खुलकर बात .., हर, राजनैतिक दलों  का कीचड़ क्यों नहीं होता साफ़...!!!!, कमल की जगह कमाल की राजनीती है उदयमान.., जनता हैरान..., सीमा पर जवान परेशान ..., दे रहा अपनी जान..!!!!!!!!!!!!!!!.

संसद १० दिनों से ठप्प ..., मीडिया की TRP से गप्प..,, यही है जनता को दिखाने का लोली-पॉप से, बने देश के बाप से ,  लोकतंत्र का बना पाप  

राष्ट्रवाद.. बेहाल .., क्या यही है, राजनीती का कमाल..... ,
पंजाब में आतंकी हमला.., फिर भी सांसद का दिल नहीं पिघला ...


देश के ६८ सालों से, संसद के समय की बर्बादी से राष्ट्र की बर्बादी है ... डूबते देश की कहानी है...,


संसद के हुड्दंड से सत्ता हुई बदरंग .., देशवासी दंग.., देश का दाग बने, दबंग..,


संसद में रंगमंच .., सीमा पर लड़ रहे है, हमारे जवान, बहाकर अपना खूनी रंग.., भारतमाता बेहाल ..., माफिया,सत्ता के लाल  मालामाल.., राजनीती दल  अब  दल-दल की लड़ाई के रंग में दबंग ..,


दोस्तों ..., हम, आप देश के ५ साल के मोहरों हो...,देश के रोते हुए चहरे हो...,


  
Deshdoooba Community
  व वेबस्थल की  August 8, 2013 · की पुरानी सार्थक post देश की बर्बादी की पुरानी कहानी

देश का रक्षा मंत्री लूला है...?, विदेश मंत्री गूंगा है...?, गृहमंत्री मज़ाकिया है......?,  वित्तमंत्री माफियाओ की हरकतों को देखकर, अंधा है...? प्रधानमंत्री पुतले के नाम पर कलंक है...??????.


दोस्तो.., यह है देश की एक अति मार्मिक तस्वीर है, और डूबते देश की कहानी है...????



देश की शान, स्वाभिमान तिरंगा देश मे, लहराता....???? लेकिन बड़े दुख के साथ लिखना पड रहा है.... यह तिरंगा हाथ बांधे व पैरो मे बेड़ी डाले, सेनाओ के निर्दोष शहीद जवानो पर डाला जा रहा है.

 काश्मीर की समस्याओ के शहीदो के जवानो की संख्या 1962-1965-1971 के युद्ध मे अपने जज़्बे से लडकर शहीद जवानो से, कई गुना ज्यादा है.


याद रहे... दो साल पहले इंग्लैंड के प्रधानमंत्री ने, अपने देश के दंगो से, अपना विदेश दौरा रद्द कर इस समस्या का निदान करने के लिए संसद को पूरे दिन व पूरी रात चलाया.


वहीं, हमारे डूबते देश की तस्वीर यह है...?????, रक्षा मंत्री एंटोनी, पाकिस्तानी सेना का बचाव करते हुए... उन्हे स्फूर्ती देते हुए कह रहे है...???? इसमे पाकिस्तानी सेना नहीं, आतंकी भेषी सेना का दोष है। लेकिन हमारा .... सुपर पावर पुतला खामोश है. विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद भी कह रहे है प्रधानमंत्री को बयान देने के लिए विपक्षी मजबूर नहीं कर सकता है। संसद की इस टालमटोल बहस का परिणाम कुछ नहीं होगा। आज 66 साल बाद भी सीमा सुरक्षा नीति व खाद्य सुरक्षा बिल नही बना. पक्ष व विपक्ष दोनों इस बहसबाजी से संसद का समय बर्बाद कर इन दोनों बिलों को टालना चाहती है। यह दोनों गंभीरतम समस्याए है...?


तो क्यू नहीं...????? हमारी संसद, इंग्लैंड की तरह 24 घंटे चले। मैंने मेरी पुरानी पोस्ट, फेसबुक व वेबस्थल मे लिखा है (कार्टून के साथ)...... देश मे इतनी समस्याए है कि यदि संसद साल के 365 दिन 24 घंटे भी चले तो भी...???? समस्याए सुलझ नहीं सकती है। देश का सांसद प्रतिदिन 18000 वेतन लेकर ( साल के 62 लाख) व अन्य भरपूर भत्तो की, भरपूर सुविधाएं अलग से लेकर, संसद के भोजनालाय मे, 12-18 रुपये का पेटभर खाना खा कर देश की दुविधाएँ बढ़ा कर देश का समय बर्बाद कर रहा है.


 यो कहें ... संसद मे सेकी जा रही है, शहीदों के नाम पर रोटिया...?? , सीमाओ पर जवानो को खानी पड़ रही है गोलिया ...???, भ्रष्टा चारी व माफिया... खान, खदान, देश का ईमान बेचकर, व नकली मिड डे भोजन से...???? और मीडिया टी आर पी के चक्कर मे, पेड मीडिया बनकर, पेट भरी बनकर....,मना रही है रंगरेलिया...??????

Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold. के संकल्प से गरीबी हटकर, भारत निर्माण से, इंडिया शायनिंग से, हमारे LONG – INNING से, “FEEL GOOD FACTOR” से देश के अच्छे दिन आयेंगें..,

Friday, 31 July 2015

क्या..? मोदी सरकार इस विश्व गुरू के, कब्र में गढ़े इतिहास को जिन्दा कर.., देशवासियों में जिंदगानी लाकर.., इस “विश्व गुरू” की प्रेरणा देंगे.., क्या...??, २६ फरवरी २०१६ को “परमवीर सावरकर” की “५० वी पूण्य तिथी”, धूम-धाम से मनाकर “राष्ट्रवाद” की अलख जगायेंगें .........!!!!!!!!!!!!!!!!


आजादी के मसीहा कहकर,  छद्म पुतलों व सडकों के नाम देखकर.., देश को “चौपटनगरी”  कर, अंधे राजाओं को देखकर , आज भी भारतमाता आहभर.., कराह कर, कह रही है.., ६८ सालों बाद भी..!!!,  मेरे १२५ करोड़ बेटों को किस तरह, विदेशी हाथ- विदेशी साथ – विदेशी विचार- विदेशी संस्कार , जाति, भाषा व धर्मपरिवर्तन से आपस में, लड़ाकर..., कैसे मेरे कटे अंगो के घाव सहित , पुन: मुझे विदेशी जंजीरों से बांधने का प्रयास किया जा रहा है..

क्या..? मोदी सरकार इस विश्व गुरू के, कब्र में  गढ़े इतिहास को जिन्दा कर.., देशवासियों में जिंदगानी लाकर.., इस   “विश्व गुरू” की प्रेरणा देंगे.., क्या...??, २६ फरवरी २०१६ को “परमवीर सावरकर” की “५० वी पूण्य तिथी”,  धूम-धाम से मनाकर “राष्ट्रवाद”  की अलख जगायेंगें .........!!!!!!!!!!!!!!!!

विश्व गुरू:
१.   जिन्होंने विश्व के क्रांतीकारियों में एक मंत्र भरा “जीवन में गुलामी” एक बडा “कलंक” है
२.   सुभाष चन्द्र बोस, सरदार भगत सिंग, चंद्रशेखर आजाद  व लाखों  क्रांतीकरियों को, “१८५७ एक “स्वातंत्र्य –युद्ध”” जो  हिन्दू-मुस्लिम एकता से लड़ा गया, एक राष्ट्रवादी  जीत थी .., हम ५ महीने स्वतंत्र थे , बाद में अंग्रेजों ने दुबारा कूटनीती से  पटियाला व ग्वालियर  के राजाओं ने नेपाल की सेना की मदद से इस   “स्वातंत्र्य –युद्ध” को कुचल डाला.
३.   भारत का संघर्ष पूर्वक जीत का “गौरव शाली  इतिहास” प्रमाण सहित लिख कर सिद्ध किया कि हम बुजदिल कौम नहीं “हमारा,ज्ञान विज्ञान, मस्तिष्क बल  “बाहुबली से गौरवशाली” था  
४.   “हिन्दुत्व”  पुस्तक में राष्ट्र की महत्ता को संबोधित कर कहा “हिंदुत्व” की जीवन शैली से ही विश्व का कल्याण होगा .
  
५.   सावरकर का जीवन परिचय:
१. बाल्यकाल के सातवें वर्ष से ही.., ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेकने का जूनून.. 
२. १६ साल की आयु में, भवानी माता के मंदिर में, छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह प्रतिज्ञा लेकर, मौत से न डरने वाले वीर सावरकर.., अन्तत: अपने कार्यों में सफल रहे.
३. वीर सावरकर का सम्पूर्ण जीवन,व्यभिचार मुक्त 100% शुद्ध रहा .., गुलाम भारत के समय, इंग्लैंड में उन्होंने अपनी विदेशी मित्र महिला साथियों द्वारा प्यार का इजहार करने पर कहा था.., मैं सिर्फ भारतमाता से प्यार करता हूं.., विवाह के बाद, मैं अपनी पत्नी से प्यार करूंगा..  अपनी जवानी के १३ मार्च १९१० से लेकर १० मई १९३७ तक २७ वर्षो की अमानवीय पीडा भोग कर उच्च मनोबल, ज्ञान और शक्ति साथ.., जब वह जेल से बाहर निकले जैसे अंधेरा चीर कर सूर्य निकलता है.
६.   . दुनिया में एकमात्र वीर सावरकर. जिन्होंने अपने परिवार को देश के बलिदान में झोंक दिया, अपना सम्पूर्ण जीवन, सम्पती.., 100% ज्ञान राष्ट्र के लिए समर्पीत करने के बावजूद, कभी सत्तालोलुप नहीं रहें..
६. १९६० में देश की लुंज-पुंज स्तिथी देखकर.., वीर सावरकर ने, प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को चुनौती देते हुए कहा था.., “मैं सत्तालोलुप नहीं हूं..., यदि आप मुझे २ साल के लिए सत्ता दें. तो मैं देशवासियों के राष्ट्रबल से देश को बलशाली बनाऊंगा, ताकि कोई दुश्मन हमारी तरफ आँख उठाकर न देखें... 
७. दोस्तों, वीर सावरकर का कितना भी बखान किया जाय कम हैं , वे तो, गुणों के खान थे..., देश के प्रति “राष्ट्रभक्ति” से आज भी राष्ट्र उनका  ऋणी है..,

विश्व के इस क्रांती कारी वीर,वीर,वीर ..., ही नहीं “परमवीर सावरकर” को गुरु पूर्णिमा के दिन ..,  अनंत,अनंत .. नमन...
आप हो गुणों के खान.., आपका बखान  ही.., भारतमाता की शान  
Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold. के संकल्प से गरीबी हटकर, भारत निर्माण से, इंडिया शायनिंग से, हमारे LONG – INNING से, “FEEL GOOD FACTOR” से देश के अच्छे दिन आयेंगें..,

Wednesday, 29 July 2015

कलाम का सन्देश कि पिछली बेंच (गरीब) का छात्र भी पंखों की जान से ऊंची उड़ान भर सकता है...कलाम, तुम्हें १२५ देशवासियों के तोपी रूपी आँखों के आंसू से सलाम..,


कलाम, तुम्हें १२५ करोड़  देशवासियों के तोपी रूपी आँखों  के आंसू से सलाम..,


आपके  जीवन ने दी “सादगी की बानगी” से कैसे शीर्ष में पहुंचा  जाता है..., आपकी शिखरता से हिमालय भी आपको प्रणाम कर रहा है.., भारतमाता को “सत्ता परिवर्तन” के बाद लाल बहादुर शास्त्री, वीर सावरकर व आप जैसे कोहिनूरी रत्न से आज भारतमाता के चेहरे में मुस्कान से मुकुट में आज एक तीसरा हीरा जड़ित होकर भव्य होकर गर्वित हुई है.


“कलाम” आपको आख़री सलाम...देश आपके विचारों से रहेगा सलामत ..,


“कलाम...”...,  आपने सम्भाली राष्ट्रवाद की कमान, देश को बनाया बलवान ....,


देश के राख तले चिंगारी की चमक को भारत रत्न की चमक  से देशवासियों को दिया सन्देश कि पिछली बेंच (गरीब) का छात्र भी पंखों की जान से ऊंची उड़ान भर सकता है...



दोस्तों देश की मार्मिक स्तिथी है.., आरक्षण.., धन-बल व व्यापम घोटालों के भ्रष्टाचार से, शिक्षा की वेश्यावृती से गरीबों की शिक्षा की योजनाओं को भोजनाएं  से धन डकार, उनके पंख कतर कर उन्हें भूखमरी की कतार में खडा कर दिया जाता है....



शिक्षा मानव का ऐसा अस्त्र है कि अंधा पुरूष भी देखने लगता है..,देश की अंधियारी गली की डूबते देश के ६८ सालों की “सत्ता परिवर्तन” से “आजादी” के नाम से विशेष वर्ग के चंद  लोगों के हाथ “कर लो देश को मुठ्ठी में” से   भ्रष्टाचार,जातिवाद,अलगाववाद धर्मवाद  की आग की  राख़ से अपने महलों के बर्तन घिसकर चमकाओ ...,   और दबा तो इन चिंगारियों को, इन  राख़ से  .... महामहिम कलाम की आवाज  इस दीवार को तोड़ने का प्रयास, अपनी अंतिम सांस तक करते रहे..., एक महापुरूष.., महाप्रयाण चला गया ...

उड़नखटोले का यह गीत कलाम की राष्ट्रवादी विचार, संस्कार की कलम को समर्पित ...


A sweet song by Lata Mangeshkar composed by Naushad for the film Udan Khatola. This was a film produced by Naushad himself. This is from 1955 and Lata's voice is nearly at its best. The film had an unusal story - about a remote city ruled by women. The film had Naushad's favorite star - Dilip Kumar in the lead role along with Nimmi. Lyrics are by Shakeel Badayuni.
अहाहहा अहा ह हा हा
अहा ह हा ह हा मेरा सलाम ले जा
मेरा सलाम ले जा, दिल का पयाम ले जा, उल्फ़त का जाम ले जा
(उड़न खटोले वाले आ रे)-२
को: मेरा सलाम ले जा, दिल का पयाम ले जा, उल्फ़त का जाम ले जा
(उड़न खटोले वाले आ रे)-२

ल ल ल ला ल ला ला ल हो~

ल ल ल ला ल ला ला ल हो~
ल: उड़ता हवाओं में, बादल के छाँव में, कौन से गाँव में जायेगा तू
उड़ता हवाओं में, बादल के छाँव में, कौन से गाँव में जायेगा तू
ल: नीचे ज़मीन है, दुनिया हसीन है, दिल को यकीन है आयेगा तू
नीचे ज़मीन है, दुनिया हसीन है, दिल को यकीन है आयेगा तू
होय, मेरा सलाम ले जा, दिल का पयाम ले जा, उल्फ़त का जाम ले जा
(उड़न खटोले वाले आ रे)-२
उल्फ़त का मतलब इक़रार नहीँ होता । सिर्फ किसी को देखना प्यार नहीँ होता । यूँ तो मिलते हैँ जिन्दगी मे कई पैग़ाम- ए- मुहब्बत , मोहब्बत है...

कलाम के कहने का सार है..,
Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.
के संकल्प से गरीबी हटकर, भारत निर्माण से, इंडिया शायनिंग से, हमारे LONG – INNING से, “FEEL GOOD FACTOR” से देश के अच्छे दिन आयेंगें..