Tuesday, 7 April 2015

लालू..., बना लूला और नितीश कुमार..., बना लंगड़ा .., बिहार में जातिवाद,भाषावाद,अलगाववाद के झुण्ड बढ़ते गए..,सिर्फ नेताओं के मुंड बदलते रहे..,



लालू..., बना लूला और नितीश कुमार..., बना लंगड़ा ..,
बिहार में जातिवाद,भाषावाद,अलगाववाद के झुण्ड बढ़ते गए..,सिर्फ नेताओं के मुंड बदलते रहे.., 
अब तो इस राजनीती के मकड़जाल में , विलय से, नए विलेन बन, एक नई वायलिन के धुन की हुंकार है, जनता भी इस लचर खेल को देखकर लाचार है, अब यह चारा घोटालों की बिहार में बहार की बयार का खेल है... 
लालू..., बना लूला और नितीश कुमार..., बना लंगड़ा और अब दोनों आँख में मुस्लिम(M) यादव(Y) की पट्टी बांधकर, सत्ता के नाव में, बड़ी मुश्किल से, मांझी के नाव से, भंवर के चुंगल से निकल कर..., अब नितीश्लाल (नीतीश +लालू) की नीती से भाजपा के खून से अलग होकर, अब महादलित के खून से अपनी फजियत बचाने के लिए, क्या...???, बेचारा नीतीश कुमार अब बेनकाब होकर, लालू के खून का चारा से.., बिहार की सत्ता की आस से प्यास मिटाने का खवाब पूरा करने के मंसूबों में सफल होंगें...
AUGUST 15, 2014 के फेसबुक की सार्थक फेस बुक पोस्ट
-मोदी लहर का असर..., लालू..., बना लूला और नितीश कुमार..., बना लंगड़ा और अब दोनों आँख में मुस्लिम(M) यादव(Y) की पट्टी बांधकर, नितीश्लाल की नीती से , MY बिहार से चुनाव जीतने का दोनों अंधे ख्वाब देख रहे हैं.
१. कुर्सी के लिए राजनीति में कोई दुश्मन नहीं होता यह कहावत आज तक हर दल के नेता ने कहा हैं
यदि राजनीतिक में अपने दुश्मन से समझौता नहीं होता है, तो राष्ट्रनीति से समझौता किया जाता है..,.राष्ट्रवाद को डुबो कर, वोट बैंक को सत्ता की नाव से जीवन की नैया बना कर, हर नेता, हर दिन अखबारो में सुर्खिया बना कर उन्नत होते जा रहा है.., और इस आड़ में देश की सूरत-सीरत-सेहत ६७ सालो से सूख गई है...
२. अभी इस दो-मुंहा नितीश्लाल के मिलन समारोह में २ दिन पहले भारी भीड़ जमाने के जुगाड़ का दावा करने के लिए मीडिया को बुलाया गया..., सिर्फ १५०० लोगों की भीड़ ने नितीश्लाल के चेहरे की हवाई उड़ा दी.., और भीड़ के बीच नीतीश कुमार को भावी मुख्यमंत्री घोषित करने पर अभी से सर फुटव्वल शुरू हो गयी है...
३. जयप्रकाश नारायण ने तो कहा था, देश में सबसे अधिक खनिज होने के बावजूद बिहार गरीब क्यों.???, इस जीत का रहस्य तो..., खनिज से ज्यादा बिहार में नेताओं के लिए जातिवाद,धर्मवाद के उत्प्रेरक खनिज से.., बिहार भ्रष्टाचार के बहार से गाय भैसों व अन्य जानवरों के चारे से, मुस्लिम यादव के भाई चारे नारे के आड़ २५ सालों तक चारे को डकारकर , प्रदेश के गरीबों को बहाकर.., एकछत्र राज्य करते रहे...,
४. दिवंगत महान व्यंगकार लेखक श्री हरीशंकर परसाई के १० हजार से अधिक राजनितिक लेख आज भी जीवंत हैं. १९६० के दशक में.., उन्होंने बिहार के बारे में लिखा था, श्रीकृष्ण भगवान् मुझे मिले थे. उन्होंने, कहा मैं बिहार में चुनाव लडूंगा और लोगो को कहूँगा में श्रीकृष्ण भगवान् हूं , मैं आसानी से जीत जाऊंगा .., तब मैंने उनसे कहा आप जब तक यह नहीं कहोगे मैं श्रीकृष्ण “यादव” हूँ , तब तक आप चुनाव नहीं जीत सकोगे. भगवान् और मेरी शर्त लगी भगवान् श्री कृष्णा के विरोध में यादव नाम का उम्मीदवार खड़ा था और वह जीत गया और भगवान् श्री कृष्ण हार गए.
५. फ़कीर प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री को छोड़कर, जिन्होने “जय जवान जय किसान” की लकीर से देश की एक नई राष्ट्रवादी तकदरी लिखी थी , उनकी ह्त्या कर, देश की राष्ट्रवाद की लकीर/ राष्ट्र-धन को वोट बैंक में परिवर्तित कर इसे गरीबी हटाओ के इमारत से “मेरा भारत महान” से “भारत निर्माण” के महलों में रहकर एक छत्र राज किया...,
६. नेहरू के एक मुंहा वंशवाद ने वोट बैंक की राजनीती से इस देश में गरीबी को बढाकर विदेशी हाथों के कर्ज से मर्ज का अधिकार देकर डॉलर ने रूपये को सठीया दिया, मेरा भारत महान से, माफियाओं की नयी पीढी के पौधों का निर्माण को “भारत निर्माण” का नारा दे दिया, बीच-बीच में विरोधी दलों को जो सत्ता प्राप्त हुई, तो बहुमुखा सत्ताखोरों ने अपनी वंश के साम्राज्य को जमाने के राज के ख्वाब से देश को लूटा...
७. “आराम हराम” के नारे की आड़ में नेहरू ने धर्मवाद,जातिवाद, भाषावाद के गद्दे से ऐय्याशी का जीवन जीया. गरीबी हटाओ के आड़ में इंदिरा गाँधी ने आपातकाल लगाकर, बनाया संविधान हटाओ और राज करो.
अगले चुनाव में “न जात पर न पात पर इंदिराजी की बात पर मुहर लगाओ हाथ पर...,” जनता ने तो इस राष्ट्रवादी नारा समझकर..., इंदिरा गांधी को जीता तो दिया लेकिन जात पात की राजनीति से.., सत्ता की इस मधुमख्खी ने हर फूलो (गरीबो) को डंक मारकर, सत्ता का शहद पी लिया तो - सत्ता जाने के डर से इंदिरा गाँधी ने आतंकवादियों के हाथ में मुहर मारकर , हाथ से हाथ मिला दिया ताकि वह बाहुबल से सत्ता पर मजबूती से काबिज हो.
८. इंदिरा गाँधी के शासन में गृहमंत्री रहे, ज्ञानी जैलसिंह ने इंदिरा के आदेश पर खालिस्तान (खाली स्थान) के आतंकवादियों से कहा तुम अपनी सेना बनाओ..., इस आवाज़ के टेप आज भी हमारे ख़ुफ़िया विभाग (“रॉ – RAW”) के पास जीवंत हैं.., .देश की बिंडवना थी कि ज्ञानी जैलसिंह सर्वोच्च पद्द के महामहीम बने जो आतंकवाद के महामुहीम के नेता .., राष्ट्रपति बन बैठे और इंदिरा गाँधी के इस अंधसमर्थक ने, राजीव गाँधी जिन्हें देश का ज्ञान तक नहीं था को प्रधानमन्त्री बना दिया.
९. राजीव गाँधी ने देश को बीसवी सदी में ले जाने के झांसे से “मेरा भारत महान” के नारे को “मेरा देश का माफिया महान” के कर्मो को सार्थक कर दिया. बोफोर्स घोटाले के श्रेय लेने से पहले वी पी सिंह ने इंदिरा की अग्नि चिता में जब इंदिरा समर्थक नारे लगा रहे थे..., “जब तक सूरज चाँद रहेगा.., इंदिरा तेरा नाम रहेगा..” तब शमशान भूमि में इस राजीव के चाटुकार ने, झांसे में यह कहा कि है मैं नया नारा देता हूँ “जब तक इंदिरा तेरा नाम रहेगा.. सूरज चाँद रहेगा..” और वे राजीव गाँधी के दुसरे श्रेणी के नेताओं में सर्वोच्च रहे.
१०. राजीव गांधी के राजनीति में पकड़ कमजोर ख़तम होने पर वी पी सिंह ने अपने को मिस्टर क्लीन बनाकर बोफोर्स घोटाले को उजागर करने के अपने ईमानदार छवि से अपने को राजीव गाँधी से ज्यादा क्लीन दिखा कर भा जा पा के सहयोग से प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने अपनी सत्ता २५ सालो तक सुरक्षित रखने के लिए दलित कार्ड खेला और बोफोर्स घोटाला कूड़े में दान कर मसीहा बनने के चक्कर में प्रधानमंत्री पद से हाथ धो बैठे....
दोस्तों लिखने को तो १०० से अधिक पेज हैं लेकिन फेसबुक पर,लम्बा लेख पढने वाले और लाईक करने वाले बहुत कम हैं.- 

Sunday, 5 April 2015

हर सरकारों ने , जनता को गुमराह है..., जनता जातिवाद भाषावाद,अलगाववाद, धर्मवाद से संक्रमित है.., इसकी एक ही अमृती दवा है.., “राष्ट्रवाद..,”..., नहीं तो इस संक्रमण से देश डूबते ही रहेगा



बोलू: एक राजा ने अपनी सुरक्षा हेतु बन्दर को नियुक्त किया और बन्दर ने सुरक्षा करते करते, एक मक्खी के चक्कर में तलवार से राजा की नाक काट दी! कुछ ऐसे मूल्य और संस्कार जिनका आजकल के ज़माने में कोई काम नहीं है अब जनता भी सोच रही है.., हमने, उन्हें तलवार पकड़ा दी है और वो हर रोज ही हमारी नाक काटते रहते हैं!
देखू:: चार साल पहिले.., इस नौटंकीवाल ने भी अन्ना आन्दोलन में कहा था, अब यह “जन लोकपाल आन्दोलन” बलि मांगता है.., तब अन्ना के कान खड़े हो गए थे ..., मेरी बलि लेकर .., यह कैसे मेरा दुरूपयोग कर, अपना सत्ता का योग बना रहा है..,
सुनू: हां केजेरीवाल ने चुनावी शपथ में कहा था.., हमें भारी जीत से अहंकार नहीं करना चाहिए, और “'इंसान का इंसान से हो भाईचार..,यही पैगाम हमारा..,,का नारा, अब स्टिंग ऑपरेशन में पकड़े जाने पर, मीडिया से बात करने से, नकार कर कह रहा है.., मुझे दिल्ली की सेवा में व्यस्त रहने से, आप से बात नहीं करनी है.
देखू: दिल्ली में, कचरा ही कचरा.., से दिल्ली के दिलवालों की नगरी को कचरावाला शहर बना दिया है
सूनू: जन लोकपाल के नारों से जनता को भरमाया था, और राष्ट्रीय गद्दी पाने की ललक से, सत्ता छोड़ने के मलाल से.., इस उल्टी गुलांटी मारने के लिए जनता की अदालत में माफी माँगी थी.. और जनता ने माफ़ भी कर दिया था , अब, इस चुनाव में भारी बहुमत से जीतने के बाद, अपनी बंदरचाल से ,अपने पार्टी के संस्थापकों व संविधान के निर्माताओं को हल्का करने के लिए.., अब अपने को ,सुप्रीम बंदर जज कह, पार्टी की अदालत में ही “लोकपाल” नीती को नकार कर ...ठोकपाल नीती से, अब यह कह रहा है “मैं भी नही किसी भी बन्दर से कम, अब अपने सुप्रीमों की नाक काट कर..., बनू राजा.., अब नहीं है.... मेरा कोई भाईचार...,मेरा और केवल मेरा.., “सर्वोसर्वा सत्ता” का नारा..,
बोलू: इसने तो बंदर बनकर अब तलवार पकड़ ली है.., पार्टी के आतंरिक लोकपाल को काट लिया है , अपने से योग्य लोगों की नाक काटने का खेल से सत्ता पर “एकछत्र राज “ करने.., अब तो अपनी पार्टी में ही बड़े लोगों की नाक काटने में आमाद होकर.., अब १४ अप्रैल को इस बंदर शक्ति परिक्षण का मिशायाली इम्तिहान भी है..
देखू: हां, मीडिया भी TRP की ताक में अपने कैमरे को दुरूस्त कर रहें है कही समय पर खराब होने से कमाई में फटका न लगे..
बोलू: मैं ,६८ सालों से ..यही देख ..., सून ... बोलना चाहता हूं कि हर सरकारों ने , जनता को गुमराह है..., जनता जातिवाद भाषावाद,अलगाववाद, धर्मवाद से संक्रमित है.., इसकी एक ही अमृती दवा है.., “राष्ट्रवाद..,”..., नहीं तो इस संक्रमण से देश डूबते ही रहेगा 

Saturday, 4 April 2015

साइमन पेरिओट, कुसुमजीत सिद्धू जिन्होंने अपने कार्यकाल में ५० के लगभग तबादले झेलने के बाद भी, राष्ट्रीय गर्व से अपना दिल ५६ इंच का बनाया है ..,

 बापू के तीन बंदर, अब बन गये है मस्त कलन्दर http___meradeshdoooba.com

बोलू: अरे देखू , आज के ताजा हाल-चाल क्या देख रहा है... कुछ तो बता
देखू: हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर अब सत्ता बचाने के लिए कट्टर बन गएँ है..
बोलू: क्या हिंदुत्व के, कट्टरवाद के, कट्टे से खट्टर.., अपनी कुर्सी चमकाने का खेल , खेल रहा है...
देखू: नहीं, बोलू ., तू गलत कह रहा है.., एक आई.ए.एस.अधिकारी अशोक खेमका, जिन्होंने अपने नाम स्वरुप.., अपने जीवन में, देश के अशोक स्तभ का खम्भा बरकरार रखने के लिए, राजनेताओं के भ्रष्टाचार के खेमे को ध्वस्त कर ,राष्ट्र को स्वस्थ बनाने के लिए अपने पद को कुर्बान बना रखा है.., भले वह २२ सालों से, ४६ बार तबादले का दंड भुगत चुका है.., अब खट्टर को तो उसे, अपने मुख्यमंत्री पद के गुमान से खट्टा बना दिया है  ...अब खट्टर को अपना खूंटा उखड़ने का भय हो गया है .., इसलिए अब उनका तबादला म्यूजियम में तबादला कर , खेमका को.., देश की धरोहर बताकर, जनता को..,भरमा कर “अच्छे दिनों” की इनकी हुंकार , अभी भी कम नहीं हुई है    
सूनू: जनता भी कह रही है.., ये रोग तो सत्ता परिवर्तन के बाद से ही गोरे अंग्रेजों के नक़्शे कदम चलकर अब,  ये, काले अंग्रेज बनकर ६८ साल से माफिया-मीडिया-कॉर्पोरेट-नौकरशाही-कुर्सीखोर लोगों के गठबंधन से.., भ्रष्टाचार से.., विदेशी कर्ज से.., देश को डूबोकर.., महंगाई के बंधन से हम पर फंदा डाल दिया है...
देखू: यही फंडा ..., मैं भी बापू के राज से आज तक देख रहा हूं ..!!!
बोलू: हाँ , खेमका ने अपने  जज्बे से उन्होंने 100 से ज्यादा भ्रष्टाचारियों की पैंट उतारी है ..., उनका तो यही सिद्धांत है कि देश की सेवा, भ्रष्ट धन पचाकर नही, स्वस्थ मन से ही , भ्रष्टाचारियों को पिचकाकर, और अपना सीना तान कर ही भारतमाता की शान बढ़ाई जा सकती है 
देखू: मैं देखता हूं कि देश के भ्रष्ट सत्ताखोर नेताओं को तो सार्वजनिक सभाओं में तो शाल पहनाकर, इनकी भ्रष्टाचार  के मस्ती की पाठशाला में गर्वीत किया जाता है,और देशवासियों को  देश का मसीहा बताकर, देश का भट्टा बिठाया जा रहा है..., और तो और शहरों के चौक पर पुतले से मुहल्ले, नगर तक का नामानकरण कर अमर कर दिया जाता है  
बोलू: हाँ , खेमका ने मल खंभ से, देश के राष्ट्रीय दामाद.., रोबर्ट (ROBERT WADRA = ROBBERY + EXPERT)  वाड्रा (WIDE + ERA = विशाल धरती) जो हरियाणा,  में  विशाल भूमि कौड़ी के भाव ले कर, सत्ताधारियों  की छावं से आमाद हो गया था.., धन से आबाद हो कर, भ्रष्टाचार के शबाब का खवाब पूरा हो गया था, लेकिन अशोक खेमका को  उसके मंसूबों को उस मट्टी में दफ़न करने की सजा के तौर पर... पुरातत्व विभाग के सचिव पद पर तबादला कर दिया था
सूनू: हाँ मैं  भी सून रहा था कि प्रधानमंत्री ने खेमका को कांग्रेस के दाग को चमकाने के लिए पुन: नियुक्त कर “न तो मे खाता हूं , न खाने देता हूं...” के “खता” को खेमका ने भी “यथार्थ” करने का प्रण कर  लिया था, अपने प्राण दांव पर लगाकर, डम्पर, भू-माफियाओं, परिवहन विभाग के भ्रष्टाचार के मैल  को निकालने के लिए जब सत्ताखोरों के पिल्लुओं की गरदन दबोचने लगा तो उसे आभाष हो गया कि यह मैल तो रोबर्ट वाड्रा से भी भयानक कीचड़पना से भी ज्यादा   गंदा है.., हरियाणा प्रशासन से मुख्यमंत्री ने भी अपनी सत्ता पर प्रश्न लगने के पहिले.., कहीं  यह चिंगारी, शोले से.., देश में एक अग्नी मशाल के रूप में प्रज्ज्वलित न हो जाए..., इसे रफा-दफा करने के लिए खेमका को संग्रहालय/म्यूजियम में रफा कर दिया था... , कांग्रेस के नक्शे कदम पर चलकर..,अब भाजपा ने भी ‘भ्रष्टाचार की चाल’  बदल ली है..
बोलू:   हाँ ..ये सब  सत्ता के म्यूजिशियन है..., कैसे भ्रष्टाचार के संगीत की धुन के शोर से.., I.A.S. / I.P.S.  का तबादला कर, जनता की आँखों में धुल झोंककर..., जनता को कब लूट लिया है , इस खेल का जनता को ही पता नहीं चलता है..
देखू: हाँ मे भी देख रहा हूँ.., कड़ी मेहनत के बाद I.A.S. / I.P.S.  परीक्षा पास करने के बाद वह अधिकारी करने के बाद, राजनेताओं की गुलामी का शिकार हो जाता है..., वह अपनी जीवन की सफलता.., सत्ताखोरों द्व्रारा माफिया गठबंधन से देश को लूटने वालों.., लोमड़ीराज के विरोध में अपने पद  को देश के लिए कुर्बानी देने से बेहतर उनके तलुवे चाटकर अपने व परिवार के उन्नत भरण पोषण से अपना कार्यकाल पूरा करने में ही अपनी भलाई समझता है..
सूनू: हाँ.., अब तो देश में व्यापम घोटालों से लोक सेवा आयोग व अन्य परीक्षाओं में भारी घोटालों से, लूटेरों की एक नई फौज का निर्माण हो रहा है.., क्या ऐसे में देश के “अच्छे दिन’ आने वालें है..???..!!!.
बोलू: हाँ.., देश में कुछ I.A.S. / I.P.S.  अधिकारी जैसे दुर्गा नागपाल ने प्रसाशन के दांत खट्टे किए थे .., व  साइमन पेरिओट, कुसुमजीत सिद्धू जिन्होंने अपने कार्यकाल में ५० के लगभग तबादले झेलने के बाद भी, राष्ट्रीय गर्व से अपने अपना दिल ५६ इंच का बनाया है .., उतारू प्रदेश में मंजुनाथ, मध्य प्रदेश में नरेन्द्र सिंग व महाराष्ट्र में सोनावणे ने तेल व खनन माफियाओं की सत्ताखोरों की मिलीभगत के संगठन को ख़त्म करने की ठान लेने की प्रतिज्ञा / प्रण से अपने प्राण दे दिए है... और उनका नाम नेपथ्य में चला गया है..., देश की जनता भी इन राष्ट्र वीरों को भूल चुकी है     
सूनू: हाँ , मे भी सुन रहा था, नौटंकी वाल से, भा.जा.पा से देश की अन्य पार्टियों के नेताओं ने इसे चुनावी नारा देकर, सत्ता हासिल की 100 दिनों  में काले धन पर कार्यवाही से जन लोकपाल व अन्य वादों की बरसाती  मुद्दों की आड़ में काले अंग्रेजों की औलादों को आबाद कर , देश को बर्बादी पर पहुंचाने का घिनौने खेल का अध्यापक बनकर, एक नए अध्याय का आधुनिक भविष्य के सुनहरे सपने दिखाने का खेल अब भी बदस्तूर खेला जा रहा  है...
देखू: आजकल  बंगलुरू में भाजपा के गुरुओं की बैठक चल रही है.., वे भी अपनी सदस्यता अभिमान के गुमान/मद  से जनता को भ्रमित कर रहें है.., इनके खेमे में खेमका के तबादले का मुद्दा गायब है.., नरेन्द्र मोदी को भी जैसे सांप सूंघ गया है...
बोलू: असल में तबादला तो भ्रष्टाचारियों के तबेले में किसी भी ईमानदार अधिकारी द्वारा छापा मारने पर, भ्रष्टाचारियों के खेल को रफा-दफा करने के लिए होता है. ..देखू , अब देश का क्या होगा..???,  मैं तो, इस भयंकरता  से  चिंतीत हूं  
देखू:   मैं देख रहा हूं ,जब तक भ्रष्ट सत्ताखोर, लोमड़ी बनकर.., देश के नौकरशाहों को पंगु बनाते रहेंगे.., देश डूबते रहेगा, इसका एक ही पर्याय है .., जनता राष्ट्रवादी बनकर , इन शेरो में अपना खून कर  देश के लिए दहाड़ कर.., देश व विदेश के दुश्मनों के लिए  पहाड़ बनकर एक मजबूत बुलंदी से  देश के तिरंगे को बदरंगा करने वालो को सबक सिखा सकते है....    

Wednesday, 1 April 2015

अब मैं यह सब नौटंकी देखकर...., यही कहना चाहता हूं कि आज तक चुनावी नारों में लोगों ने जनता पर जितने अफीमी फूल फेंके है.., वह उतना सफल हुआ है...,


बोलू: अरे देखू, आज अप्रैल फूल दिवस है, क्या देख रहा है...

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देखू: हाँ ,असल में आज देश के नेताओं का APRON (चोला) बदल कर, जनता को FOOL (बेवकूफ) बनाने का दिवस है, दिल्ली में भगत सिंग सेना का पोस्टर वार चालू है..., वह उसे APRON (चोला) ARVIND (अरविंद) PARTY (पार्टी) –AAP कह रही है . 
सोनू: हाँ ,चुनाव के पहिले नौटंकीवाल ने नारा दिया था “'इंसान का इंसान से हो भाईचार..,यही पैगाम हमारा..,,का नारा की शराफतका खेल से जनता को भरमा रहा था और सफल भी हो गया, अब उसने अपना APRON (चोला) फेंक कह रहा..., मुझे सिर्फ सत्ता है प्यारा, और मैं ही खाऊँ इसका चारा,
बोलू : इस अंदरूनी झगड़े में , सफाई कर्मचारियों के वेतन ने मिलने पर , अपना पल्ला झाड़कर .., केजरीवाल ...कचरावाल बनकर, अपनी दबंगी से दिल्ली को गन्दगी का बढ़ावा दे रहा है..
देखू: हाँ.., मैं देख रहा था , चुनाव के पहिले वह अपनी पार्टी में व्यवस्ता परिवर्तने से भगत सिंग के नारे में युवकों में एक नए खून के संचार का दावा कर.., देश में एक क्रांती का दंभ भर रहा था
बोलू: चोले का बेवकूफ दिवस तो १९४७ से ही मनाया जा रहा था “आराम हराम है” से नेहरू ने अय्यासी दिवस से अपने को शांती के मसीहा से विदेशी विचारों से.., कश्मीर की समस्या जो देश आज भी भुगत रहा है.., उसके बाद उनको भारत रत्न का पुरूस्कार देकर, जनता को भरमाया गया , चीन ने भारतमाता के अंग को काट डाला..., जबभी संसद में उनका कांग्रेसियों द्वारा विरोध होता था तो वे कहते थे.., मैं राजीनामा दे दूंगा,, सभी सांसद.., सांसत में पड़ जाते थे कि लोकसभा के सदस्यता को लाटरी का टिकट मानकर खोना नहीं चाहते थे
सुनू : हाँ , मैं भी सुन रहा हूं.., अब वह गिरगिट वाल की तरह रंग बदल कर कह रहा है..., मैं ६७ विधायक लेकर नई पार्टी बनाऊंगा.., और मेरे दल के विरोधी देखते रह जायेंगे...,इसी तरह “आप” पार्टी के विधानसभा सदस्य भी, जिसमें कई सदस्यों ने टिकट खरीद कर, भरमाए नारों से चुनाव जीता है.., उन्हें भी सत्ता से मंत्री पद व सदस्यता खोने से भारी वित्तीय नुकसान का भय लगा हुआ है
बोलू: हाँ, नौटंकी वाल ने तो जो रंग बदला उससे तो गिरगिट भी दंग है.., वह इस रंग से अब वह अपने को पार्टी का दबंग कहता है.., ADMIRAL रामदास को लोकपाल बनाकर, जनता को भरमाकर, नौटंकी वाल अपने को ADMIRABLE कर, इस बल से जनता में अपने जीवन को समर्पित कर, सड़क का आम आदमी के जीवन से देश में एक लहर लाऊंगा के झासें से अब अपने पार्टी के नेताओं को फांसे का खेल , खेल रहा है
देखू: मे देख रहा हूँ कि अब नौटंकी वाल कह रहा है कि मेरी मर्जी.., मैं जो करू.., अब पार्टी में लोकपाल को ठोकपाल बनाऊ..., अभी ३० से ज्यादा लोगों को मंत्री का दर्जा देकर , खुद व अपने बाए हाथ के मंत्रियों ने भारी संपत्ती से कर व बंगलों से मालामाल बन गए हैं.., और जनता इस द्व्यंद युद्द से अपने को ठगी पा रही है...
सुनू : मे अभी सुन रहा हूं कि एक नेता कहा रहा है कि “आप” का यह विरोध अब आप के बेड रूम में जाएगा..,
देखू: हाँ , पार्टी के एक नेता ने लोकसभा चुनाव में अपना ध्यान चुनाव छेत्र में न लगाकर.., किसी युवती के साथ बेड रूम में बेड तोड़ी थी.., अब वह भी नौटंकी वाल के चरणदास बनकर, आप पार्टी के बचाव में अपनी पूरी ऊर्जा झोंक रहा है..
सूनू: अभी मैं सून रहा हूं.., पार्टी के बचे ,संस्थापक सदस्यों में भारी विरोध चल रहा है..., वे अब नौटंकीवाल को नई चुनौती दे रहें है...
बोलू : जनता भी “फेकू” के अच्छे दिन व “पप्पू के गायब” होने की चर्चा कर रही है , नौटंकी वाल के इस नवीनतम चर्चे से, दूसरे दलों के चर्चों की आवाज नेपथ्य में चली गई है..,
देखू: अब मैं यह सब नौटंकी देखकर...., यही कहना चाहता हूं कि आज तक चुनावी नारों में लोगों ने जनता पर जितने अफीमी फूल फेंके है.., वह उतना सफल हुआ है..., यदि जनता में राष्ट्रवादी भावना जागृत होगी..तो इस अफीमी फूल के ईट का जबाब , जनता पत्थर मारकर , सत्ताखोरों को थर्रा सकती है...

Sunday, 29 March 2015

इस स्वतंत्रता संग्राम में तो ‘वन्देमातरम ‘ की लय से हिंदु –मुस्लिम एकता से अंग्रेजों का साम्राज्य थर्रा गया था.., उनका एक ही लक्ष्य था .., अन्रेजों का साम्राज्य उखड फेंकना.



बोलू: देखू,आज २९ मार्च है.., तू क्या देख रहा है..




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देखू: आज १८५७ के क्रातिकारी दिवस की ११४ वी साल गिरह है , देश में मुर्दानगी व सदमा का माहौल है 
बोलू: हाँ क्रिकेट के वर्ल्ड कप के स्पर्धा से बाहर हो जाने से मीडिया भी TRP की नुकसान से सदमा में है.., और राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास को जानने में देश में मुर्दानगी छाई है 
सुनू : हाँ एक खबर मैं भी सुन रहा हूं ..., एक नौटंकीवाल की जो जिसे पहले दमा की खांसी से लोकसभा चुनाव हारने पर सदमा लगा था, बाद में “ व्यस्था परिवर्तन के खांसी के नारे से “ भारी बहुमत प्राप्त कर अपने खांसी के इलाज का दावा कर, अब अपने वरिष्ठ गुरूओं को लात मार कर .., दमा के फार्मूले से दम लगाकर, कार्यकताओं से पार्टी के अंगों की दबान जुबाकर उनकों सदमा लगा दिया है...
देखू: हाँ में देख रहा था , २३ मार्च को 30 सालों बाद “तीन देश रत्नों” के बलिदान दिवस को प्रधानमंत्री से सभी पार्टियों के छुटभैये नेता श्रेय ले रहे थे..., जैसे हममें ही.. सरदार भगत सिंग का ही खून दौड़ रहा है...
बोलू : आज का दिन तो TRP वाला मीडिया भी भूल चुका है.., सोशल मीडिया को भी इसकी भनक नहीं लगी है
देखू: वर्ष 2005 में आमिर खान ने देश के 1857 का पहले स्वतंत्रता संग्राम और इसके नायक बनकर मंगल पांडे पर फिल्म बनाई.., नई पीढी ने मल्टीप्लेक्स में २०० रूपये के टिकट खरीदकर कहा, आमीर खान ने मंगल पांडे की क्या शानदार एक्टिंग की है, युवा पीढी ने मंगल पांडे के आदर्शो से ज्यादा आमीर खान तारीफ से उन्हें अरब पति बन दिया .., जबकि आज भी , मंगल पांडे के वंशज की परिस्थिती व घर जर्जर अवस्था में है.
बोलू: हां , २ साल बाद ही मंगल पांडे की १५० वीं पुण्य तिथी थी , देश वासियों को तो छोड़ों , आमीर खान ने भी ये जयन्ती कूड़ेदान में डाल दी.. , कोई प्रतिक्रया नहीं हुई
बोलू: यह तो देशवासियों को, वीर सावरकर का अहसान मानना चाहिए .., जिन्होंने प्रमाण सहित सिद्ध किया कि १८५७ का यह एक स्वातंत्रय समर था, जिनकी प्रेरणा से सरदार भगत सिंग,आजाद, सुभाषचन्द्र बोस जैसे लाखों क्रांतीकारियों को जन्म दिया
देखू : मैं साफ़-साफ़ देख रहा हूँ कि इसमे राजनीती के वोट बैंक है, सभी पार्टियों को गौ-ह्त्या प्रतिबन्ध से देश को विदेशी मुद्रा की आवक के साथ..., पार्टीयों को अपने, वोट बैंक का आधार कमजोर होने का डर लग रहा है , क्योंकी १८५७ की भारयीय आजादी के प्रथम बगुल का कारण था ''गाय'' !!
१८५७ में जब प्रथम बार भारत की आजादी के लिए बागी बलिया के अमर शहीद मंगल पाण्डेय बगुल फुकी थी ! उसका एक मात्र कारण था ...कारतूस में ''गाय'' की चर्बी !
जब इस महानायक को पता चला तो इस बात को लेकर 29 मार्च 1857 को मंगल पाण्डेय ने परेड ग्राउंड में ही अपने साथियों को विद्रोह के लिए ललकारा ! और अंग्रेज सार्जेंट मेजर ह्यूसन को गोली मारकर ढेर कर दिया ! इसके बाद सामने आए लेफ्टिनेंट बॉब को भी मंगल पाण्डेय ने गोली से उड़ा दिया ! इस दौरान जब मंगल पाण्डेय अपनी बंदूक में कारतूस भर रहे थे, तो एक अंग्रेज अफसर ने उन पर गोली चलाई ! निशाना चूकने पर मंगल ने उसे भी तलवार से मौत के घाट उतार दिया !
इसके बाद अंग्रेज अफसर कर्नल वीलर ने उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया, लेकिन कोई सैनिक आगे नहीं आया ! अंत में कर्नल हिअर्सी के दबाव में मंगल पाण्डेय ने खुद को गोली मार ली ! घायल मंगल को अस्पताल भेजा गया ! इसके बाद उनका कोर्ट मार्शल हुआ और फांसी की सजा मुकर्रर की गई ! आठ अप्रैल 1857 को मंगल पाण्डेय को फांसी दे दी गई !
बोलू: आज ''गाय'' और इस महानायक के वंशज दोनों को स्तिथि बहुत ही दयनीय हैं ! जो गाय भारतीय आजादी की नीव बनी ! जिसके कारण आजादी की लड़ाई की बिगुल फुकी गयी ! आज उसी ''गाय'' की रक्षा करने वाला कोई नहीं हैं !
देखू: यह कैसा देश हैं ? कैसी हैं यहाँ की कानून व्यवस्था ? कैसे हैं यहाँ के लोग ?
हमें आजादी की लड़ाई की बुनियाद बनी ''गौ' माता की हत्या पर पूरे भारत वर्ष में रोक ..और इस महानायक के जन्म दिन को राष्ट्रीय क्रन्तिकारी दिवस घोषित करने की मांग को लेकर ..अपने अपने स्थानीय क्षेत्रो में कमेटी बनाकर ..जन चेतना के जरिए जन आंदोलन करने की जरूरत हैं, साथ में ...अदालत में इस मांग की लेकर याचिका दायर करने की जरूरत हैं !
देखू: हाँ इस स्वतंत्रता संग्राम में तो ‘वन्देमातरम ‘ की लय से हिंदु –मुस्लिम एकता से अंग्रेजों का साम्राज्य थर्रा गया था.., उनका एक ही लक्ष्य था .., अन्रेजों का साम्राज्य उखड फेंकना..
बोलू: मैं इन कुछ क्रांतीकारियों के नाम जनता को बताता हूँ ... नाना साहब पेशवा 2. तात्या टोपे 3. बाबु कुंवर सिंह 4. बहादुर शाह जफ़र
5. मंगल पाण्डेय 6. मौंलवी अहमद शाह 7. अजीमुल्ला खाँ 8. फ़कीरचंद जैन
9. लाला हुकुमचंद जैन 10. अमरचंद बांठिया 11. झवेर भाई पटेल
12. जोधा माणेक 13. बापू माणेक 14. भोजा माणेक 15. रेवा माणेक
16. रणमल माणेक 17. दीपा माणेक 18. सैयद अली 19. ठाकुर सूरजमल
20. गरबड़दास 21. मगनदास वाणिया 22. जेठा माधव 23. बापूगायकवाड़ 24. निहालचंद जवेरी25. तोरदान खान26. उदमीराम27. ठाकुर किशोर सिंह, रघुनाथ राव28. तिलका माँझी 29. देवी सिंह, सरजू प्रसाद सिंह
30. नरपति सिंह 31. वीर नारायण सिंह 32. नाहर सिंह 33. सआदत खाँ
34. सुरेन्द्र साय35. जगत सेठ राम जी दास गुड वाला36. ठाकुर रणमतसिंह
37. रंगो बापू जी38. भास्कर राव बाबा साहब नरगंुदकर39. वासुदेव बलवंत फड़कें 40. मौलवी अहमदुल्ला
41. लाल जयदयाल 42. ठाकुर कुशाल सिंह 43. लाला मटोलचन्द44. रिचर्ड विलियम्स 45. पीर अली 46. वलीदाद खाँ 47. वारिस अली 48. अमर सिंह
49. बंसुरिया बाबा 50. गौड़ राजा शंकर शाह 51. जौधारा सिंह
52. राणा बेनी माधोसिंह 53. राजस्थान के क्रांतिकारी 54. वृन्दावन तिवारी
55 महाराणा बख्तावर सिंह 56 ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव
सुनू : मैं , तो जनता का छुपा दर्द सुन रहा हूँ..,
देखू : मैं तो देख रहा हूं , जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी , भारतवर्ष में व्यापार करने के बहाने , धन बल, साम-दाम- दंड –भेद , जातिवाद, धर्मवाद, अलगाववाद से देश को अपने प्रभुत्व से २०० सालों तक गुलाम रखा ...वैसे ही विदेशी कंपनियों ने ६८ साल से आज तक , अपनी नीती से, देशी माफिया, नेताओं से देश में राज कर, देश को कर्ज से गर्त में डाल दिया है
देखू : यह सब देख कर मेरे रोंगटे खड़े हो रहे है..., यह हमारा वार्तालाप सुनकर मैं आशा करता हूँ कि देशवासियों के रगों  में एक नए खून का संचार होगा
२९ मार्च १८५७ हुई कल की बात.., १९४७ के बाद के पुतले बने वोट बैंक से की सौगात से, सत्ता की बारात से..., देश में आज भी छाई है..विदेशी हाथ,साथ,विचार संस्कार के छतरी से काली रात.

Tuesday, 24 March 2015

“सत्ता एक मेवा है , उसकी जय है और सत्य आत्महत्या कर रहा है “ और “मेरा संविधान महान, यहाँ हर माफिया पहलवान “ खादी की आड़ में गरीबों को. अफीमी नारों के खंजर से मारा जा रहा है...


“सत्ता एक मेवा है , उसकी जय है और सत्य आत्महत्या कर रहा है “ और “मेरा संविधान महान, यहाँ हर माफिया पहलवान “ खादी की आड़ में गरीबों को. अफीमी नारों के खंजर से मारा जा रहा है...
बापू को आधार बना कर आम जनता (देखू) उससे सवाल पर सवाल किये जा रही है , देश की बदहाल स्थिती पर उसे रोना आ रहा है, पर क्या करे वह मजबूर है।
बापू के तीन बंदर भी मस्ती मे चूर है वे भी बदले हालातो का पूरा आनन्द उठा रहे है। सौ मे नब्बे बैइमान फिर भी मेरा भारत महान के कहावत लोगो की रग रग मे ऐसे बस गइ है कि बापू के तीन बंदर बुरा मत देखो, बुरा मत कहो, बुर मत सुनो कि मुख्य भूमिका मे आ गये है, बेचारे बन्दर करे तो क्या करे उन्हे बापू ने ही तो आदेश दिया था इसलिये वे बापू के कहे अनुसार चल रहे है, बापू के तीन बंदरो ने उनके आदेशों को सुना तभी तो देश की हालत इतनी बिगड गइ है।
बापू के तीन बंदर अब मस्त कलंदर बन गये है, उनके बीच देश के बदहाल के बारे मे चर्चाए तो होती है पर व इच्छा होने के बावजूद देश के परिस्थिती बदल नही सकते , देश की इस बदली हालत पर एक संवादात्मक रिपोर्ट ... ।
इस संवादात्मक कथानक के माध्यम से यहाँ उन कारणो का भी उल्लेख किया गया है, जिसमे कभी सोने की चिडिया कहा जाने वाला देश आज आज भ्रष्टाचारियों के हाथ की कठपुतली बंनकर रह गया है। वैसे यह देश का दुर्भाग्य ही रहा है जिसे राष्ट्रपिता पिता की झूठी उपाधि से नवाजते रहे है, उसने अहिसा के नाम पर देश के साथ छल किया, महात्मा गाधी ने अहिसा शब्द भ्रामक अर्थ कर... देश्वासियोको गुमराह किया। उन्होने शांति को हिंसा का पर्याय मानकर देशभक्त युवावो को कुंठित कर दिया । हत्यारो के समक्ष आत्मसमर्पण को उन्होने अहिसा के रूप मे महिमा-मंडित कर अपने नाम के आगे महात्मा शब्द लिखवा लिया , पर हकीकत यह है कि महात्मा गाधी ने भारत को एक “बुझदिल“ लोगो का देश बनाने का काम किया और यही उसी का नतीजा है आज देश मे भ्रष्टाचार, आतकवाद सिर चढ कर बोल रहा है.. और इसी देश का श्लोग्न बन गया है “मेरा संविधान महान, यहाँ हर माफिया पहलवान “ और सत्यमेव जयते की आड़ में , सत्ताखोर , चुनाव में धर्मवाद, अलगाववाद,जातिवाद, व घुसपैठीयों के आड़ में सट्टा लगाकर चूनाव जीतने पर... भ्रष्टाचार से चूना लगाकर
दूसरा श्लोगन बन गया है ... “सत्ता एक मेवा है , उसकी जय है और सत्य आत्महत्या कर रहा है
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आओं, पार्टी नहीं देश का पार्ट बने, “मैं देश के लिए बना हूँ””, देश की माटी बिकने नहीं दूंगा , “राष्ट्रवाद की खाद” से भारतमाता के वैभव से, हम देश को गौरव से भव्यशाली बनाएं...
इन., ‘बन्दरों” के कहने का सार यही है........????
चाहे जो हो धर्म तुम्हारा चाहे जो वादी हो । नहीं जी रहे अगर देश के लिए तो अपराधी हो ।
जिसके अन्न और पानी का इस काया पर ऋण है । . जिस समीर का अतिथि बना यह आवारा जीवन है ।
जिसकी माटी में खेले, तन दर्पण-सा झलका है । उसी देश के लिए तुम्हारा रक्त नहीं छलका है ।
तवारीख के न्यायालय में तो तुम प्रतिवादी हो । नहीं जी रहे अगर देश के लिए तो अपराधी हो ।
क्या आप अब भी इन बन्दरो को देखकर मूक दर्शक बनकर डूबते हुए देश को, अब भी देखते रहोगे...

Monday, 23 March 2015

देश गर्त में जाएगा, जब तक देशवासी में.., यह सोच रहेगी कि.., भगत सिंग मेरे पडोस में पैदा हो..., यदि देशवासी.., “सोच बदले तो देश बदलेगा...,” “राष्ट्रवाद.., राष्ट्रवाद..., राष्ट्रवाद..,”



बोलू: अरे देखू.., आज, तू क्या देख रहा है,

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देखू : आज देश के नेता तीन शहीदों का बलिदान दिवस... ८४ सालों के बाद जोर शोर से मना रहें है,,
बोलू: लेकिन इन्हें तो आज तक देश के क्रान्तीकरियों को शहीद का दर्जा नहीं मिला.., इनके घर तो जर्जर अवस्था में हैं..और आज के सत्ताखोरों के स्वतंत्रता सेनानी के तमगे से इन क्रांतीकारियों की जमीनें हड़प कर उनका अस्तित्व समाप्त कर रहें हैं..
सूनू: हाँ आज की वर्तमान सरकारें भी इनकी ह्त्या के रहस्य की फाईलों को गुप्त रख, कह रहीं है..जनता को राज बताने पर विदेशी ताकतों से हमारे सम्बन्ध खराब होने से विदेशी सहायता न मिलने से देश की अर्थ व्यवस्था.., चौपट हो जायेगी
बोलू: हाँ..., यही ६८ सालों से सभी सरकारों की व्यथा है..
देखू: हाँ, मैं देख रहा हूँ, जहां खुदीराम बोस का मुजफ्‌फरपुर के बर्निंगघाट पर अंतिम संस्कार किया गया था लेकिन उस स्थल पर शौचालय बना दिया गया है. इसी तरह किंग्सफोर्ड को जिस स्थल पर बम मारा गया था उस स्थल पर मुर्गा काटने और बेचने का धंधा हो रहा है.
बोलू :यह शहीदों के प्रति घोर अपमान और अपराध है? देश के स्वाभिमान का घोर अपमान है...
अगर सरदार भगत सिह को तुम कब्र से उठाओं तो तुम उसे दुखी पाओगे, क्योंकि जिस आजादी के लिए बेचारे ने जान गवाई , वह आजादी दो कौड़ी की साबित हुई , तुम शहीदों को उठाओं कब्रों से और “पूछों”. क्या इसी आजादी के लिए तुम मरे थे , इतने प्रसन्न हुए थे ...??, इन राजनीतिज्ञों के हाथ में ताकत देने के लिए तुमने कुरबानी दी थी ..?????, तो भगत सिह छाती पीट-पीट कर रोयेगा कि हमें क्या पता था , जिंदगी का..., गांधी तो ज़िंदा थे – आजादी आई और आजादी आने के बाद गांधी छाती पीटने लगे थे , गांधी बार-बार कहते थे मेरी कोई सुनता नहीं , मैं खोटा सिक्का हो गया हूँ , मेरा कोई चलन नही है गांधी दुखी है, गांधी सोचते थे : एक सौ पच्चीस साल जीऊंगा , लेकिन आजादी के नौ महीने बाद उन्होंने कहा अब मेरी एक सौ पच्चीस साल जीने की कोइ इच्छा नहीं है , यह बड़ी हैरानी की बात है , शहीदों की चिताओं पर भले मेले भर रहे हों , लेकिन शहीदों के चिताओं के भीतर आंसू बह रहें हैं
सूनू: बात तूने पते की कही है,,,, जनता भी यही कह रही है,,,
बोलू: देश के शहीदो के अपमान से बने , गाँधी के नाम से, नेता, अपनी नंगई से बनें बेईमान, सत्ता को सट्टा के नाम से देश को भ्रष्टाचार से खोखला कर दिया, आज भी हमारे क्रंतिकारी शहीद भगतसिग, सुभाषचन्द्र बोस , चन्द्रशेखर से वीर सावरकर को भी देश्द्रोहीयों की काली सूची मे है...आज शहीदो के चिताओ पर राजनेता अपनी भ्रष्टाचार की, रोटी सेंककर, अपने को शहीदों से महान बनाने की हौड मे है.. देश का शहद चाटकर , आज देश के गली , मुहल्ले ,नगर , शहर, शिक्षा व अन्य संस्थानों पर ऐसे करोड़ों नाम हैं...,जिसे अपने नाम कर लिए है...??
देखू: हाँ.., ३० साल बाद, नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इस स्वाभिमान को जगाने, उनके स्मारक में जाकर जोशीला भाषण मैंने सूना
देखू: हाँ , सवेरे से प्रधानमंत्री की दौड़ में होड़ लगाने के लिए, सभी पार्टियों के छुटभैये नेता श्रेय ले रहे थे..., जैसे हममें ही.. सरदार भगत सिंग का ही खून दौड़ रहा है..., और तो और श्रदांजली देते समय अन्ना हजारे के आंसू छलक गए थे..
बोलू: लेकिन अन्ना हजारे तो गांधी वादी नेता है...., और गांधी ने तो अहिसा के भ्रामक प्रचार से देश के लोगों को गुलाम मानकर, जलियांवाला बाग़ के भीषण हत्याकांड निर्दोष लोगों की ह्त्या के प्रतिकार न करने से ही, जबकि लाला लाजपत राय की इस प्रतिरोध में मौत होने से..., क्रांतीकारियों में इस शासन को उखाड़ फेंकने का जूनून पैदा हो गया
सूनू: हाँ गांधीजी को तो अंग्रेजों से जलपान मिल रहा था.., इसलिए जलियांवाला बाग़ के भीषण हत्याकांड का विरोध नहीं किया था.., उन्होंने तो इन क्रांतीकारियों के कार्य की निंदा कर, अंग्रेजों को एक नया शक्तिबल देकर देशवासियों का दमन करने का पुख्ता इंतजाम कर दिया था
बोलू: हां.., वे तो.., अंग्रेजों के सेफ्टी वाल के लिए अंग्रेजों के सुरक्षा कवच बने.., जब भी क्रांतीकारियों का आन्दोलन, ज्वलंत होने लगता था.., तब गांधीजी से अहिंसा की बारिश करवाकर.., उनके मंसूबों पर पानी फेर देते थे
देखू: हाँ.., अब तो मैं देख रहा हूं ..., सेना की जमीन भी हड़प कर, सत्ता की बंदरबांट से आदर्श महलों व घोटालों के मकडजाल से जनता इसमें फंस कर ६८ सालों से उसका खून चूसा जा रहा है.., हमारी गांधी के स्वराज के पुतले की “स्वराज” का ढिंढोरा पीटकर, विदेशी हाथ, विदेशी, विदेशी साथ विदेशी संस्कार से देश में बेतहासा लूट पर छूट मिल रही है..
बोलू: देश के क्रांतीकारी तो खाते पीते घर के थे, उन्हें सत्ता का लोभ नहीं.., भारतमाता की गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराना था.., और इसे राष्ट्रीय धर्म मानकर देश के लिए कुर्बानी से देश के उज्जवल भविष्य की कामना की अपेक्षाओं को, ६८ सालों से सत्ताखोरों ने देश को विदेशी कर्ज से देश को डुबो दिया है...
सूनू: अभी नेता तो भगत सिंग व अन्य क्रांतीकारियों से अपनी सत्ता की पुरी तल कर, जनता में जोश भरने का खेल, खेल रहे हैं..
देखू : देश की हालत देखकर मैं तो गंभीर हो गया हूँ, मेरे रोये खड़े हो गए हैं.., अब देश का क्या होगा
बोलू: देश गर्त में जाएगा, जब तक देशवासी में.., यह सोच रहेगी कि.., भगत सिंग मेरे पडोस में पैदा हो..., यदि देशवासी.., “सोच बदले तो देश बदलेगा...,” “राष्ट्रवाद.., राष्ट्रवाद..., राष्ट्रवाद..,” सावरकर, सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद व अनन्य क्रांतीकारी जैसों से ...