Thursday, 30 May 2013

आँखो देखी खबरे...नेताओ शरम करों, देश के गरीबों के गाढी कमाई के धन से, विदेशों की यात्रा मत करो... देश की समस्याओ को वोट बैक मे तब्दील मत करो...????, क्या काँग्रेस मे सुशील कुमार शिन्दे से महा दलित, कोई श्रेष्ठ नेता नही है, देश की आधी बिजली बूझाने के बाद , वोट बैंक की लौ जलाने के लिए, क्या..??, देश का गृहमंत्री बनाया गया है...???? छत्तीसगढ की घटना तो इन मंत्रीयो के लिए नगण्य है...???


आँखो देखी खबरे...नेताओ शरम करों, देश के गरीबों के गाढी कमाई के धन से, विदेशों की यात्रा मत करो... देश की समस्याओ को वोट बैक मे तब्दील मत करो...????, क्या काँग्रेस मे सुशील कुमार शिन्दे से महा दलित, कोई श्रेष्ठ नेता नही है, देश की आधी बिजली बूझाने के बाद , वोट बैंक की लौ जलाने के लिए, क्या..??, देश का गृहमंत्री बनाया गया है...???? छत्तीसगढ की घटना तो इन मंत्रीयो के लिए नगण्य है...???


अभी हाल ही, मे ब्रिटेन मे दो आतंकवादियो ने एक पुलिसवाले का सर काटने पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने अपनी सभी विदेशी यात्राये रद्द कर दी, और कैमरून ने कहा यह ब्रिटेन पर हाल की आतंकवादी हमले और इस्लाम का विश्वासघात' है


पिछले साल, ब्रिटेन दंगो के दौरान, उनकी पार्लियामेट बिना रूकावट के रात भर चली. वही, सितबर 2003 मे इसराईल के प्रधानमंत्री, जो भारत के दौरे के पहले प्रधानमंत्री थे, जब उन्हे प्रेस वार्ता के दौरान , फिलिस्तीनोयो के आक्रमण की खबर मिली, तो वे बीच मे ही, अपनी प्रेस वार्ता ही खत्म कर ईसराईल रवाना हो गये..???


यही, उल्टा हाल हमारे देश का है , महाराष्ट्र के गढचिरौली मे नक्सली हमले मे 60 से ज्यादा जवान मारे जाने पर महाराष्ट्र के गृहराज्य मंत्री ने वहाँ न जाकर दक्षिण अफ्रिका मे मैच देखने मे अपनी भलाई समझी...


 26/11 की आतंकवाद की घटना की बात ही मत पूछो..??? पूरी संसद मे सन्नाटा था, सिर्फ महाराष्ट्र के गृहमंत्री का एक बयान आया, बडे शहरों मे छोटी-छोटी घटनाये होते रहती है..??? 

विज्ञापनो मे हो रहा हैदेश निर्माणहाँ जरूर हो रहा हैविकास के नाम से भ्रष्टाचारअलगाववाद जातिवाद धर्मवाद व घुसपैट से वोट बैक का निर्माण....



मेरा संविधान महान , यहाँ हर माफिया पहलवान......
A.P.L, B.P.L….. से Z.P.L… घोटाला इनके जीवन मे है वरदान ....
आज का कानून. (कान + ऊन = क़ान मे ऊन= कानून बहरा हो गया है), अपराधी की पुस्तिका है, न्यायालय उनकी पाठशाला और जेल उसकी कार्यशाला है
इसमे अपराधी के लिये एक राहत का शब्द है जमानत...... ??????????
यह जमानत शब्द अपराधी के लिये अमानत बन गया है
इसमे एक अग्रिम जमानत भी है, जो अपराधी , अपराध करने से पहले ले लेता है और संविधान मुँह ताकता रहता है ?
अपराधी, जमानत के आड मे देश की अमानत (धरोहर ) बन जाता है
4 बार जमानत ------ अपराध में , प्रायमरी पास ......... ?
10 बार जमानत अपराध में, हाई स्कूल पास ................ ??
12 बार जमानत अपराध में, मिडल हाई स्कूल ..................???
15 बार जमानत.... अपराध में, स्नातक पास ............................ ????
15 से ज्यादा ........ अपराध में, डाँक्टरी पास ........................................................... ?????????????
इस विघ्यालय से एक प्रस्तित प्रमाण पत्र, जिसमे “ माफिया “ कि उपाघि मिलती है
आज “ माफिया “ शब्द कानून के लिये " माफ किया " है
यह शब्द संविधान को धत्ता बताकर कानून का “संरक्षित सदस्य“ बन जाता है
इनके शिक्षा व जनता को डराने व धमकाने की कला के अनुसार हर सत्ता व विपक्षी पक्ष अपने - अपने पक्षो मे शामिल कर अपनी गुणवत्ता बढाते है, और एक समय ऐसा आता है , जज ,पुलीस, नौकरशाही (आइ.ए. एस, आइ. पी एस. जिला अधिकारी...इत्यादी ) के रोजी रोटी व तबादले का अधिकार इन दागी नेताओ के हाथ आ जाता है
इनके एक टेलीफोने से प्रशासन में हडकप मच जाता है , अधिकांश प्रशासनीक अधिकारी
रोजी रोटी व तबादले बचाने के लिये भ्रष्ट नेता के चरणदास बनकर, उनके पद चिन्हो पर चलकर, लूट के भागीदार बनकर , जनता की गाडी कमाई मे डाका डाल रहे है जिससे, जनता गरीबी व भूखमरी के हालत मे जीने को मजबूर है,
इन के 5 साल के बच्चे राणा सागा के औलाद लगते है, और गरीबो के 5 साल के कुपोषीत बच्चे 50 साल जैसे लगते है आधे से ज्यादा तो 5-6 साल के पहिले ही मर जाते है ?
आज का कानून – मेरे विचार ....
इस देश न्याय पांने के लिये किसी भी व्यक्ती को, एक मकडी के जाल मे फसकर, मकडी (कानून) से लडना पडता है, इस जाल से उलझते- उलझते उसकी शारीरिक , मानसिक ताकत व घर बार बिक जा ता है, और क्या मिलता है? तारीख पर तारीख , न्याय पाने के चक्कर मे पीढिया गुजार दी जाती है...?? , घर मे कागजो के पुलीदों का ढेर , कहते है कानून मे कंकाल के अन्दर कंकाल होते है , इसमे उलझते जाते है.
आज न्याय की , “एक बन्दर और दो बिल्ली की कहानी गुजरे जमाने की बात हो गइ है, आज न्याय का बन्दर, अपने साथ दो बन्दर रखकर, न्याय के लिये तडफती बिल्लीयो को कहते है, न्याय के तराजू के पलडे की रोटी खत्म हो गई है, दोनो का पलडा एक समान है. जाओ, आगे न्याय चाहिए तो अपने घर बार बेच कर रोटी का जुगाड करो, “
आज न्याय तो नही मिलता है, हाँ, न्याय के नाम पर गरीबी जरूर मिलती है ?
इंडिया के कानून के शब्द कोश मे एक महत्वपूर्ण शब्द है प्राकृतिक न्याय ,इस शब्द के आड मे वकील बहस कर जज को झक झोर देता , जिसने, जितने ज्यादा व्याख्या (दलील) की क्षमता वह उतना बडा वकील कहलाता है
इस प्राकृतिक न्याय ने देश ने प्राकृतिक सौन्दर्य खो दिया है, भू मफिया जमीन , व दुसरे माफिया जनता व देश को लूट रहे है
आज एक मुकदमे का फैसला आने मे कम से कम 20-40 साल का समय लग जाता है , इस्का अर्थ हुआ के हम जज, पुलिस, वकीलो को बिना न्याय के वेतन दे रहे है
एक जज का कार्यकाल 2-4 साल का होता है, नया जज आने पर उसे मुकदमे का अध्धन करना पडता है, तारीख पर तारीख लगती है, जब तक वह मामले को समझने लगता है तो वह सेवांनृवितहो जाता है
प्रेमचन्द कि कहानी मे लिखा गया है, अदालते मतलब –कागजी घोडे दौडाना, इस कागजी घोडो पर बैठकर जजो वकीलो व पुलीसौ की फौजे आनन्द उठाते हुए अपनी आजीविका के साथ फरियादी को लूट रही है
किसी ने कहा है, “सभी कानून बेकार है अच्छे लोगो को उनकी जरूरत नही होती है और बुरे लोग उससे सुधरते नही है”,
आज के माहौल मे बुरे लोग सिर्फ सुधरते है औए वे अपनी सम्पती व सत्ता का अधिकार कर देश को चला रहे है,
एक ओटो रिक्शा के पीछे के लिखा था “सत्य परेशान होता है, लेकिन पराजित नही होता”
मैकोले का कहना था कि भारत को हमेशा के लिए गुलाम बनाना है तो इसके शिक्षा तंत्र और न्याय व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करना होगा और आपने अभी (आज मुझे कहना....... है ..????) मे Indian Education Act पढ़ा होगा, वो भी मैकोले ने ही बनाया था और उसी मैकोले ने इस IPC की भी ड्राफ्टिंग की थी। ये बनी 1840 में और भारत में लागू हुई 1860 में। ड्राफ्टिंग करते समय मैकोले ने एक पत्र भेजा था ब्रिटिश संसद को जिसमे उसने लिखा था कि::
"मैंने भारत की न्याय व्यवस्था को आधार देने के लिए एक ऐसा कानून बना दिया है जिसके लागू होने पर भारत के किसी आदमी को न्याय नहीं मिल पायेगा। इस कानून की जटिलताएं इतनी है कि भारत का साधारण आदमी तो इसे समझ ही नहीं सकेगा और जिन भारतीयों के लिए ये कानून बनाया गया है उन्हें ही ये सबसे ज्यादा तकलीफ देगी और भारत की जो प्राचीन और परंपरागत न्याय व्यवस्था है उसे जड़मूल से समाप्त कर देगा।“ वो आगे लिखता है कि
"जब भारत के लोगों को न्याय नहीं मिलेगा तभी हमारा राज मजबूती से भारत पर स्थापित होगा।"

आज के मौजुदा हलात मे सत्य इतना परेशान होता है कि पराजित नही होने से पहले आत्महत्या कर लेता है - उदाहरण किसान आत्महत्या,और मध्यम वर्ग की आम जनता, गरीबी व भूखमरी से आत्महत्या के लाखो खबरे अखबारो मे पढने अखबारों मे मिलती है.
दुनिया के जिस देश मे प्रतिशोध वाला कानून है, वहा सबसे कम अपराध होते है. हमारे संविधान से न्याय न मिलने से हजारो फरियादी अपराधी बन चुके है, और परम्परागत अपराधी करोडपती है
अभी हाल मे, इरान मे एक युवति के चेहरे पर एसिड फए फेकने पर उसकी दोनो आँखे चली गई, तो अदालत ने हुक्म दिया कि अप्रराधी की दोनो आँखे फोंड दी जाये उसी तरह से सऊदी अरब का भी कानून है, बचे हुए मध्य पूर्व देशो के कानून, हमारे संविधान से भी बहुत कठोर है
आज देश मे 4 करोड मामले विभिन्न अदालतो मे विचाराधीन है, हमे शुक्रगुजार होना चहिये, देश के पंचायती राज का, वहाँ के निवासी उंनके न्याय का सम्मान करते हुए, राज्य की अदालतो मे नही जाते है, उसी तरह से उन नक्सली शासीत प्रदेश का न्याय, जहाँ, जन अदालत से उन्हे न्याय मिलता है (जिंनका कानून देश के 30-40% हिस्से मे है)
यदि इनके मामले देश की अदालतो मे आते, तो अदालतों मे विचाराधीन मामले 12 करोड से भी ज्यादा होते थे, मतलब,24 करोड से भी ज्यादा से भी ज्यादा लोग, 30% देश की वयस्क आबादी न्याय के चक्कर मे अपने जीवन का समय बरबाद कर रही होती ?
ये हमारी न्याय व्यवस्था अंग्रेजों के इसी IPC के आधार पर चल रही है और आजादी के 65 साल बाद हमारी न्याय व्यवस्था का हाल देखिये कि लगभग 4 करोड़ मुक़दमे अलग-अलग अदालतों में पेंडिंग हैं, उनके फैसले नहीं हो पा रहे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा लोग न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं लेकिन न्याय मिलने की दूर-दूर तक सम्भावना नजर नहीं आ रही है, कारण क्या है? कारण यही IPC है। IPC का आधार ही ऐसा है। विस्तार से पढे

दिल्ली पुलिस द्वारा मुबंई मे पकडने पर क्रिकेट के महासंत ने पुलिस को मोबाइल थमाते हुए कहा लो कर लो बात , मुंबई व केरल के मुख्यमंत्री से, इसके बावजूद, तिहाड जेल मे महासंत को विशेष सुविधाए दी गई है, विशेष गद्दे, मच्छरदानी, पंखे, लज्जे दार भोजन , अब एक देश के लिए एक नई कहावत बन गई है, जो जितना महाचोर वह संविधान का सिरमौर ...




ये है, क्रिकेट के महासंत का तिहाड जेल जाने के पहले का इशारा...., मीडिया कहती है, क्रिकेट देश का राष्ट्रीय धर्मे है, सचिन उसके भगवान हर , उसका शी श्री...,श्रीसंत सट्टे मे अपनी उँगली से अपने कर्मो की विजय बताकर कानून को धत्ता  बता कर कह रहा , तुम मेरा क्या उखाडोगे...,

अब क्रिकेट देश का राष्ट्रीय शर्म बन गया है....

दिल्ली पुलिस द्वारा मुबंई मे पकडने पर क्रिकेट के महासंत ने पुलिस को मोबाइल थमाते हुए कहा लो कर लो बात , मुंबई व केरल के मुख्यमंत्री से, इसके बावजूद, तिहाड जेल मे महासंत को विशेष सुविधाए दी गई है, विशेष गद्दे, मच्छरदानी, पंखे, लज्जे दार भोजन
अब एक देश के लिए एक नई कहावत बन गई है, जो जितना महाचोर वह संविधान का सिरमौर ...

Wednesday, 29 May 2013

ह व्यंग है, देश का गहरा रंग है, नेताओ के रहने का ढंग है, भेड की खाल अब तो जीवन की ढाल है...???? कर्नाटक यह शब्द , भ्रष्टाचार का कर-नाटक सिद्ध हुआ है.........???




ह व्यंग है, देश का गहरा रंग है, नेताओ के रहने का ढंग है, भेड की खाल अब तो जीवन की ढाल है...????

कर्नाटक यह शब्द , भ्रष्टाचार का कर-नाटक सिद्ध हुआ है.........???


यह नाटक, 1947 से शुरु हुआ, जो सत्ता परिवर्तन के रूप मे हुई थी... और जनता को देश की झूठी आजादी के नाम पर ,, हर राज्य के मंत्री वोट अलगाववाद, जातिवाद, धर्मेवादव घुसपैठ से वोट बैक बनाकर, सिर्फे जनता को बताते रहे कि मै सत्तारूढ पार्टी मे, बेहद इमानदार हूँ, और इमानदारी की आड मे भेड का चोला पहनकर (सिर्फ प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री को छोड कर) भ्रष्टाचार के दाँतो से आदमखोर बन गये, भारतीय जनता पार्टी के शासन काल मे प्रधानमंत्री की आड मे प्रमोद महाजन ने दूर संचार घोटाले मे भेड का चोला पहनकर 1 हजार करोड से ज्यादा का घोटाला कर दिया ... जिसे काँग्रेस पार्टी मे उत्प्रेरक का काम किया, छोटे शिकारी के भ्रष्टाचार की विद्दा जान जाने से 2 लाख करोड का घोटाला कर दिया.. और इसके आविष्कारी स्वर्गीय प्रमोद महाजन के चित्र मे बासी माला डलते हुए कहा , ये हमारे गुरू है, पहले उनके भ्रष्टाचार के चाल चरित्र की छान बीन करो , बाद मे हमारी, हमने तो सावेधानिक पद्दति से ही निविदाये मंगवाई है..., याद रहे इस शिकार मे भ्रष्टाचार की पुरियाँ तलने मे मुख्य भूमिका नीरा राडिया को बुलाया गया था... वही हाल भारतीय जनता पार्टी के कर्नाटक मे येदिरूप्पा ने भ्रष्टाचार का हाहाकार मचाया था... भारतीय जनता पार्टी भी दाँवा कर रही थी, केन्द्र सरकार के पैने दाँत से की तुलना मे येदिरूप्पा के तो अभी दुध के दाँत निकले है.. बोल कर अपनी सत्ता खोने के डर से प्रोत्साहित करते रही, रिटायर्ड न्याय मूर्ति हेगडे की जाँच के बाद भी, भारतीय जनता पार्टी , येदिरूप्पा के दाँत पैने करने में लगी थी, जब पानी नाक के नीचे बहने लगा तो आनन फानन मे जगदीश शेट्टार को यह खाल सौंप दी गयी , तब तक पानी सर के ऊपर बहकर , भारतीय जनता पार्टी की सत्ता भी बह गई.
वही हाल 2G के बदनाम मंत्री ए.राजा, डी.एम.के. भेडिये की वजह सरकार को अपनी सत्ता बचाने के लिए, ममता बनर्जी को रेल मंत्री की खाल पहनानी पडी, असल मे ममता बनर्जी की नजर, पशिच्म बंगाल के मुख्यमंत्री पद की थी, बंगाल की मोटी खाल मिलने से , उसने वह खाल, दिनेश त्रिवेदी को पहना दी, अपनी दो खालो की वजह से वह चिट फंड घोटालो का शिकार करने के बाद , पशिच्म बंगाल के घाटे मे होने के दाँवे से केन्द्र सरकार से विशाल वित्त सहायता माँगने लगी, वित्त सहायता न मिलने से दिनेश त्रिवेदी को रेल किराय बढाने के बहाने खाल निकाल दी, और पवन बंसल ने वह खाल पहंकर एक विशाल घोटाले मे बदल दिया.. ममता बनर्जी ने साल मे 12 रसोईगैस के सिलेडरों की धमकी की वजह से समर्थन वापस ले लिया, मुलायम सिग़ ने भी सी.बी.आई , के काटने के डर से अपनी खाल देकर, यु.पी की मजबूत खाल से पुत्र व पिता आनंदित है...

Monday, 27 May 2013

क्या से क्या हो गया ... मेरा देश ..तुम बेवफाओ के देश के प्यार के झाँसे से..????? आज हर गली का छुट भैये नेता भी समाज सेवा के नाम पर, अपने को भ्रष्टाचार की अमानत मानता, है, (M.P. –MONEY POWER- MUSCLE) आज मनी पावर- धन बल, और बाहुबल से बलात्कार,हत्या के आरोप मे फँसे है, राज्यसभा जो रिश्वत सभा से भर्तियो के मामले पकडे गये हैं, कहते है खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है.. तो छुट भैये नेता और नौकरसाही भी, क्यो पीछे रहे... अब तो सेना मे भी खरबूजे पैदा हो गये है... दोस्तों अब यह देश और कितना लूटेगा.. यह भ्रष्टाचार की बयार नही , एक सुनामी से भी खतरनाक बन गया है, इसने देश के 10 लाख से भी कई ज्यादा किसानों , व कितने लोगों को निगल लिया है, देश की आजादी के झूठे झाँसे से....?? क्या आप अब भी देखते रहेगे... डूबते देश को ... जागो और देश के लिए दौड लगाओ....????







क्या से क्या हो गया ... मेरा देश ..तुम बेवफाओ के देश के प्यार के झाँसे से..????? 

आज हर गली का छुट भैये नेता भी समाज सेवा के नाम पर, अपने को भ्रष्टाचार की अमानत मानता, है, (M.P. –MONEY POWER- MUSCLE) आज मनी पावर- धन बल, और बाहुबल से बलात्कार,हत्या के आरोप मे फँसे है, राज्यसभा जो रिश्वत सभा से भर्तियो के मामले पकडे गये हैं, कहते है खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है.. तो छुट भैये नेता और नौकरसाही भी, क्यो पीछे रहे... अब तो सेना मे भी खरबूजे पैदा हो गये है... दोस्तों अब यह देश और कितना लूटेगा.. यह भ्रष्टाचार की बयार नही , एक सुनामी से भी खतरनाक बन गया है, इसने देश के 10 लाख से भी कई ज्यादा किसानों , व कितने लोगों को निगल लिया है, देश की आजादी के झूठे झाँसे से....?? क्या आप अब भी देखते रहेगे... डूबते देश को ... जागो और देश के लिए दौड लगाओ....????

आप मेरे वेब स्थल meradeshdooba.com की 16 अक्टूबर 2012 की पोस्ट के अंश पेश कर रहा हूँ... शिर्षक है...लिखने की प्रेरणा.......
26/11 के घटना के दौरान मै निजि काम से एक हफ्ते के लिये पुना मे था, चार दिन बाद बंम्बई पहुँचा तो फैक्ट्री के रास्ते दोपहर के समय एक रास्ते में लस्सी पीने, एक ठेले के पास पहुचा तो वहाँ, एक अधेड उम्र का व्यक्ती, पुराने कपडें व फटी चप्पल वाला पहनावा, के एक हाथ मे मराठी दैनिक नवा काल अखबार था ( यह अखबार 90 साल से प्रकशित हो रहा है औए उसके संपादकीय विचार बेबाक रहते है)
तब मैने उससे पूछा ? , 26/11 के घटना के बारे मे आपके क्या विचार है?, तो उसने कहा
”हम लोग सत्ता लेने मे घाई (मराठी शब्द = जल्दबाजी) किया है , हमको आजदी 20 साल पहले क्रांतीकारियो के हाथो से मिलती तो हमारा लूटा हुआ सोना व अन्य सामान भी हमें वापस मिलता, यदि हमे आजादी 20 साल बाद मिलती तो आज परिस्तथिति कुछ और होती” , आज अंग्रेजों के पास हमारा कोहिनूर हीरा है, हमे. उसे मांगने की भी, हमारी हिम्मत नही है?
यह तो अभी ट्रेलर (झलक) है देखो आगे आगे हम कैसे बरबाद हो रहे होंगे?
तब मैने उससे पूछा ? आप तो सत्ता कह रहे है , हमे तो आजादी मिली है
उसने कहा यही तो भ्रम है? यह आजादी नही सत्ता का हस्तांतरण है इसलिये तो आज भी हम, हमारे अंग्रेजो के कानून के आगे गुलाम है? उसने आगे कहा, चर्चील ने भी कहा था, इस मुल्क को और हजार साल गुलाम रखेंगे तो भी लोग , सर नही उठाएगे, ये मुल्क गुलामी के लिये बना है, और हम यह सत्ता इन चोर लूटेरो को सौंप रहे है, क्या? ये सत्ता 15 साल भी सम्भाँल पायेंगे? उसकी भविष्यवाणी सच हुई, तुरंत काशमीर का एक हिस्सा हमने खो दिया , 15 साल मे चीन ने हमसे से एक हिस्सा हडप लिया, हमारे लोक सभा सांसदो ने भी उस समय कसमे खाई थी, हम छीना हुआ हिस्सा एक एक इंच लडकर लेंगें, लेकिन आज हममे उसके प्रतिरोध की भी ताकत नही है,
ये लोग सत्ता के नशे मे है. अभी देश के उत्तर पूर्व के भाग भी टूटने के कगार पर है?
तब मैने कहा आप बोलते क्यो नही ?
उसने कहा, देखो मै दिहाडी मजदूर हूँ, अभी मै कंपनी के द्वार पर खडा था, अभी रोजगार मिलेगा -अभी रोजगार मिलेगा, इस आशा मे दोपहर तक खडा था?, तो रोजगार ना मिलने से से मै यहाँ हूँ? मुझे महीने मे मुश्किल से 15 देन का रोजगार मिलता है, घर मे भी पैसे की तंगी है, तुमको तो मालुम है आज हर गली मे हर पार्टी का गुन्डा मौजूद है, और पुलीस, प्रशासन भी उसे शह देता है, अब मै बोलकर, क्या अपना घर उजाडूँ ? , कोइ साथ देने की बात छोडो, मेरे घर वाले भी मुझे प्रताडित करेंगे और कहँगे, हमें भुखे पेट रखकर तुम्हें शासन से पंगा लेने की क्या उतावली थी?
मैने कहा, तुम्हारी यह बात बिल्कुल सही है,
अलीबाबा को धनी बनने के लिये 40 चोर मारने पडे थे ?
आज देश का अलीबाबा (धनी) बनने के लिये
आज एक नगरसेवक (मराठी शब्द – पार्षद- मेरी परिभाषा से नगर भक्षक) को कम से कम 40-400 ? व विधान सभा सेवक को (शहर भक्षक) 400-4000 ?
लोक सभा सेवक को (जिला भक्षक) 4000- 40000? की चोरों, गुडों की फौज चाहिये.
देश मे जीना ............?
मैने अखबार के दूकान पर एक युवक को देखा ,जिसका उदास सा चेहरा , चेहरे पर हल्की सी दाढी,उल्झे बाल , साधारण सा पहनावा पैरौ मे रबर कि चप्पल, वह युवक 5-6 अख्बार व 2-3 पत्रिकाये खरीद रह था , मैने उससे पूछा , आप इतने अखबार पत्रिकाये क़्यो खरीद रहे हो ? तो उसने कहा, लोगो को शराब का नशा होता है मुझे समाचार पढने का नशा है.
तो मैने उससे, देश के बारे मे उसके विचार पूछे, तो उसने कहा
मुझे ऐसा लगता है कि मै इस देश मे क्यो पैदा हुआ ? इस देश मे इतने धर्म है इतनी भाषाए, इतनी जातियाँ, लोगो का अपना अपना समूह है,लोगो मे इतना भेद भाव है,
आज की शिक्षा प्रणाली ऐसी है, आज लोगो से पूछो ? कौन से प्रदेश मे कौन सा जिला कहाँ है?, लोग अटपटा जवाब देते है, आज देश कि समस्याओ के बारे मे जो सोचेगा , अच्छा खासा आदमी भी चिंता से बीमार पड जायेगा.
इस देश मै वही आदमी जी सकता है, जो जांनवर की तरह मस्त रहेता हो अपना पेट भरता हो. और देश से उसका कुछ लेन देना नही हो ,
अखबार से संकलित
चाहे जो हो धर्म तुम्हारा चाहे जो वादी हो ।
नहीं जी रहे अगर देश के लिए तो अपराधी हो ।
जिसके अन्न और पानी का इस काया पर ऋण है
जिस समीर का अतिथि बना यह आवारा जीवन है
जिसकी माटी में खेले, तन दर्पण-सा झलका है
उसी देश के लिए तुम्हारा रक्त नहीं छलका है
तवारीख के न्यायालय में तो तुम प्रतिवादी हो ।
नहीं जी रहे अगर देश के लिए तो अपराधी हो ।



Saturday, 25 May 2013



I.P. L का मकसद तो देश मे लूट का जेहाद....????

कोर्ट को, कितना भी कहो...??? वह सबूत नही मानेगी, वह जाँच का आदेश नही देगी..??? , पाकिस्तानी अंपायर, असर राऊद को तो जाँच की भनक लगते ही.....??? जब तक जाँच ऐजेंसीया के बहस मे ये पैसा पैसा जेहाद का है , मालू
म पडने से पहिले..??? बिना समय गवाँये और पैसे के और लालच का मोह छोडकर , .. , वह जहाज से उड कर पाकिस्तान फुर्र हो गया ... अंतराष्टीय क्रिकेट परिषद ( I.C.C.) ने उसॆ बर्खास्त कर दिया, अब अंपायरिग की जरूरत ही क्या...??? दस पीढी का पैसा जो जमा हो गया है

Thursday, 23 May 2013





जब बिहार को राबडी देवी चला सकती है भ्रष्टाचार के बहार से..??, तो सोने की चिडिया क्यो नही चला सकती है भारत को भारताष्टार (भारत के आठ भ्रष्ट अचारों से) के बयार से..?? 
यह कोई ताज्जुब की बात नही है, बिहार मे जानवरों का चारा डकार जाने के बाद खुले आम लूट से लालू यादव जातिवाद, भाषावाद , अलगाववाद की आड् मे बिहार को लूटते रहा, जो जयप्रकाश के आन्दोलन मे आपात काल मे मीसा कानून के अंतर्गत जेल गया, 
मीसा को लालू ने बिहार का मसीहा समझ कर खुले आम लूट की , 10हजार करोड रूपये की, (आज के 2 लाख करोड रूपये से भी कही ज्यादा) ,लूट की, कागजों पर भारी मात्रा मे झूठे जानवर खरीदे गये थे , चलानों मे गाडियो के मनचाहा नम्बर डाल दिया है, चलानों के नम्बर खँगालने पर सी.बी.आई की जाँच से पता चला कि स्कूटर मे भैस आई है और जानवर लापता है, क्योकि, एक कहावत जो लालू सार्थक समझ बैठे थे... जब सैय्या भये कोतवाल तो डर काहे का...और लालू राजा के पास वोट बैंक का डंक भी था..???, कोर्ट का डंडा पडने पर , राबडी देवी , जिसे घर सँभालने के अलावा कोई अनुभव नही था, वह घर का जलता चूल्हा व जूठे बर्तने छोड कर राजनीति मे आ गई,


लालू ने सत्ता से बाहर रहकर राबडी देवी को रबड देवी समझ कर , भ्रष्टाचार के लूट के नाम से भ्रष्टाचार का रबड इतना ज्यादा खीचा कि, रबड के टूटने से, वह गुलेल की तरह , बिहार से लालू, आलू बनकर भ्रष्टाचार से पिचक गए और छ्टक-कर, बाहर गिर पडे.. और आज तक बिहार मे सत्ता मे आने का मौका नही मिला..??? इसकी हूबहू नकल ( सोनिया ने भी राजनीती मे प्रवेश करते हुए कहा मै, देश की बहू हूँ... हूँ-बहू- देश की- हूबहू) , वंशवाद से राबडी देवी व सोनिया गाँधी के सत्ता का मुखिया बनना, दोनों, एक पारदर्शी दर्पण की प्रतिमा का उदाहरण है,
काँग्रेस को भी वंशवाद की एक आधुनिक खोज के लिए राबडी देवी की तरह एक मोहरे की जरूरत थी जो लालू के राज को मास्टर माँडल मानकर राबडी देवी के रूप मे सोनिया गाँधी की खोज की गई की गई.. और इसके आड मे एक ईमानदार पुतले को बूलेट प्रूफ जैकेट के रूप प्रस्तुत किया गया, जिससे वंशवाद को आँच न पहुँचे, लेकिन इस वंशवाद ने पुतले को फुसलाकर कहा तू देश को विकास की छँवी से से लूटा... और देश इस छँवी से लूट रहा है, काला धन, विदेशी बैकों मे जाकर वही सफेद धन बनकर , विदेशी धन कर्जे के रूप मे आकर आम आदमी अब अपने निवाले से महरूम होने को मजबूर है..?? इतना सब होने के बावजूद , बूलेट प्रूफ पुतले का मुँह ही नही खुलता है..???

काँग्रेस भी जो लालू के राज को भ्रष्टाचार का मास्टर माँडल मानकर को भी वंशवाद की एक आधुनिक खोज के लिए राबडी देवी की तरह एक माँडल की जरूरत थी राबडी देवी के, बोलने मे असमर्थ रूप मे रहकर चुपचाप रहे, और काँग्रेस द्वारा कागज मे लिखा हुआ संदेश हिन्दी मे पढे , और वह भी क्या पढ रही है, उसे भी नही समझे, इसी के बेहतरीन खोज मे, सोनिया गाँधी की खोज, सर्वोत्तम साबित हुई.. और इसके आड मे एक ईमानदार पुतले को विकास का बूलेट प्रूफ जैकेट पहनाकर प्रधानमंत्री के रूप प्रस्तुत किया गया, और गले मे ध्वनि बाँक्स लगाकर सिर्फ विकास के नाम से मुँह खोले, ताकि वंशवाद को आँच न पहुँचे,
काँग्रेस के इस वंशवाद ने, पुतले को फुसलाकर कहा तू देश को विकास की छँवी से से लूट... और देश इस छँवी से लूट रहा है, काला धन, विदेशी बैकों मे जाकर वही सफेद धन बनकर , यही विदेशी धन कर्जे के रूप मे आकर, कर्ज के मर्ज से,महँगाई के दानव के रूप मे आम आदमी अब अपने निवाले से महरूम होने को मजबूर है..?? इतना सब होने के बावजूद , बूलेट प्रूफ पुतले का मुँह ही नही खुलता है..???

यहाँ तक की राजीव गाँधी को भी , देश, प्रदेश व राजनीति का भी ज्ञान नही था, वंशवाद की खाल व संवेदना के लहर से सत्ता पर बैठे (राजीव गाँधी को लोकसभा के 506 मे से 404 सीटे मिली) , , याद रहे, नेहरू जो अपने को अग्रेजो की औलद समझते थे, और देश का मसीहा के रूप मे अपने छँवि को प्रचारित किया उन्हे भी इतनी सीटे नही मिली थी...(लोकसभा के 489 मे से 363 सीटे मिली थी),
राजीव गाँधी मिस्टर क्लीन ( श्री सफेद) की छँवि से सज्ज थे, देश को 20 वी सदी मे ले जाने का दृढ निश्चय का भरोसा दिया... देश का हर वर्ग टक-टकी लगाए बैठा था, वे देश को एक नयी ऊँचाई पर पहुँचाएगे... लकिन राजीव गाँधी भी चंडाल चौकडी के झासे मे देश के कठपुतले प्रधानमंत्री साबित हुए, मेरा भारत महान के नारे के आड मे 100% नेता बैइमान होते गये...., मिस्टर क्लीन ( श्री सफेद) की छँवि को भूनाने के लिए , टी.वी., अखबारो मे देश विदेश घूमने, और जनता के नाम से नेताओ के लिय खाऊ योजनाए बनाई गयी, खजाना खाली होते गया, आज भी काँग्रेस गला फाड-फाड कर चिल्ला रही है , प्रसारित कर रही है कि राजीव गाँधी का सपना 20वी शताब्दी का संदेश ही काँग्रेस की देन है , राजीव गाँधी के बाद प्रधानमंत्री नरसिहाराव प्रधानमंत्री बने तो उन्होने जनता से कहा... देश मे राशन पानी (विदेशी मुद्रा) सिर्फ 40 दिनो के लिए है... यह मेरी मजबूरी है...


देश का खजाना खाली होने पर, आम आदमी को निचोडने के लिए विदेशी हाथों को गुप्त रूप से पंजे के रूप मे देश को लूटने के लिए बुलाया गया, और सिकन्दर ने सही कहा था , जिस देश मे भेडों का राजा शेर है... तो मै उस देश से डरता हूँ, लेकिन जिस शेरों का राजा भेड है तो मेरी जीत अवश्य है... लेकिन विदेशी लूटेरे को मालूम है कि जिस देश की रानी विदेशी है तो लूट मे हिस्सेदारी देकर आसानी से छूट पायी जा सकती है... देशवासियो जागो... क्या आपको सत्ताधारी भ्रष्टाचार से भेड नही बनना चाहते है ..?? अब आप बने दहाड्ते शेर..?? तो इन शेरों मे राष्ट्रवाद का खून डालो...यह हमारी जन्मभूमि है... हम ही इसके मालिक है....???? सोचों.. सोचों...सोचों.. ??? अब इस देश मे कोई भी भ्रष्टाचारी माफिया राज नही करेगा.....जय हिन्द... जय भारतमाता...???
मेरे वेबस्थल के जनवरी 2013 का पोस्ट अवश्य पढे... राष्ट्रवाद- आओ इस भ्रष्टाचार के उल्टे पिरामीड को ढहाये ... और इन शेरों में अपना खून डाले और वे देश के लिये दहाडे
1947 का सत्यमेव जयते .........1948.............. 2013 से अब तक ‘’सत्ता एक मेवा है और इसकी जय है’’ बन गया है