Tuesday, 4 September 2018

देश के शिक्षक तुम्हे सलाम..., देश में जितने राष्ट्रपति बने .. वे राजनीतीज्ञों की कृपा से देश के सर्वोच पद पर बैठे ...और देश के महामहिम पद से निर्वित होकर.., सरकारी सुविधा भोगते हुए , जीवन की लीला समाप्त कर गुमनामी में खो गए..यदि देश के शिक्षक , डॉ. कलम से प्रेरणा लेकर गुरू की भूमिका को सार्थक करें तो “जय जवान से जय किसान “ का नारा यशस्वी से .., देश शक्तिमान से विश्वगुरू बनेगा ...


देश के शिक्षक तुम्हे सलाम..., देश में जितने राष्ट्रपति बने .. वे राजनीतीज्ञों की कृपा से देश के सर्वोच पद पर बैठे ...और देश के महामहिम पद से निर्वित होकर..सरकारी सुविधा भोगते हुए , जीवन की लीला समाप्त कर गुमनामी में खो गए...

देश की पहली  राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जो देश की पहेली बनकर २० ट्रकों में देश के सम्मान में दी गए उपहार भी अपनी माल-मत्ता समझ कर अपने घर ले गयी थी ..., बाद में बेशर्मी से उन्हें वह पुरूस्कार ९ ट्रक भरें लौटाना पड़ा .., और पेंशन व अन्य सुविधाओं से ऐश कर रही है..

पूर्व  राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी जो रक्षा व अन्य घोटाले में सम्मलित है... क्या वे निर्वित होने के बाद अब्दुल कलाम के जीवन का अनुसरण कर रहें हैं !!!!!, या भविष्य में करेंगे ..

एक निर्वादित , बिना राजनेताओ की बैसाखी की याचना से महामहीमबने अब्दुल कलाम , अपनी कलम की ताकत व आवाज से, आज भी उनकी आत्मा आवाम को जागृत कर रही  है..., आज भी देश भर के स्कूल में छोटे-छोटे बच्चों के बीच में उनकी फोटो देखकर, .., बच्चों में भी स्फूर्ती आती है..., क्या बात है ..हमारे पूर्व राष्ट्रपति हमारा उत्साह बढ़ाने के लिए , हमारे साथ आज भी घुल मिल कर बात कर रहें है...

आज कलाम साहब का यह कर्म ..., आने वाले कल के बच्चों को नया हिन्दुस्तान के नवनिर्माण की शिलाका आधार बना रही है...

आज भी अब्दुल कलम अपने अनुभव..., जूनून .., दृण संकल्प का सन्देश शिक्षक बन कर, गाँव शहर में दे रहें है...., इसमें कोई शक नहीं है...,

दोस्तों याद रहें .. प्रधानमंत्री मनमोहन के कार्यकाल में अब्दुल कलाम को धमकी मिली थी आपके इस दौरे का राजकीय खर्च जो करींब दिन के ४० हजार रूपये है, भारत गरीब देश होने से यह खर्च वहां नहीं कर सकता है.... इसे बंद करो...

देश के जल-थल- नभ आकाश से कोयला चोर जो अरबों खरबों की लूट के बावजूद देश की अर्थ व्यस्था के शिल्पकार के रूप में सम्मानित किया है...
देश के अच्छे दिंनों से भारत निर्माण व चमकता भारत व मेरा देश महान , गरीबी हटाओं से आराम हराम का नारा झूठा ही साबित होगा
जब तक हमारे शिक्षकों की आधार प्रणाली मोटे वेतन व प्राइवेट कोचिंग से धन बनाने का ध्हेय रहेगा तो देश के शिक्षण संस्थानों के साथ देश भी डूबेगा .
यदि देश के शिक्षक , डॉ. कलम से  प्रेरणा लेकर गुरू की भूमिका को सार्थक करें तो “जय जवान से जय  किसान “ का नारा यशस्वी से .., देश शक्तिमान से विश्वगुरू बनेगा ..