Sunday, 13 May 2018

मित्रों..., वंदेमातरम तो अंतराष्ट्रीय गीत है, इसमे भूमि की प्रशंसा की गई है, और माँ की उपाधि दी गई है, भूमि की जितनी मेहनत करो तो उतनी ही ज्यादा उपजाऊ होकर , देश की पैदावार बढा कर , सुजलाम , सुफलाम बनाया जा सकता है, यह प्रकृति की अनुशंसा है, न कि विशेष धर्म का प्रतिक है, 1857 की क्रांति के समय यही एक मंत्र था, जिसने देशभक्ति के जस्बे से हर धर्म के लोगों मे एक नई उर्जा का संचार किया था. आनंद मठ फिल्म मे वंदेमातरम के गाने से अंग्रेजो के होश उडा दिये थे...

मातृ दिवस - Mother/s  (M-Other/s), Mom is different than other/s on Universe. Our day is blessed because of her/s  Mercy (दया, करूणा) and Love (वात्सल्य).. हमारा हर दिन..,  मां के आशीर्वाद रूपी सागरमयी तरंगों से जीवन में एक नया रंग है.. 



देश्वासिओ..,  जागो भारतमाता.... तुम्हे पुकार रही है..........?????
माँ, तेरा प्यार दिल के आँसुओ से भरा रहता है, तुम्हारा दिल तो वात्सलय से 24 घंटे धडकता.. है... हर दु:ख पहुचाने वाले पति से बच्चे हर सख्श तक को आप माफ कर देती हो.. तकि आप की आँसू से वे अपने गलती का अहसास समझ कर प्रायश्चित (सुधर सके) कर सके, माँ , आप तो, सौ बार अपने आँसुओ से मौका देती है....माँ तेरे आँसु सागर से भी गहरे है. लेकिन तेरे सागर के आँसु तो लोगो को जीवन मे कैसे तैरना है, वह सिखाती है...आज तक तेरे आँसु के सागर कोई भी डूबा नही है...क्यो कि इसमे वात्सलय का नमक है...



हे माँ , तेरा वैभव अमर रहे.......
हर नेता को यह संदेश दे, ताकि देश का नागरिक सुजलाम सुफलाम से अपना जीवन सँवारे, शीतलाम से जीवन जी सके.... देशवाशीयों का हर दिन तेरी प्रेरणा का रहे...माँ, तेरी वात्सलय ,ममता, स्नेह , करूणा के सागर के भंडार के सामने हर चीज फीकी है.....तेरा कर्ज तो हम तुम्हारे फर्ज का पालन कर ही चुका सकते है..??? माँ तुझे शत.. शत.. प्रणाम

हे माँ, इन आदमखोर नेताओ ने अलगाववाद , भाषावाद, धर्मवाद से लोगो को मच्छर बनाकर , तुम्हे डस रहे है, और विदेशी घुसपैठीओ के विषैले मच्छर के लिए वोट बैक की पृष्ट्भूमि मे देश की भूमि के टुकडे करने के ताक मै है.... और विदेशी विकास के जहर से तुम्हे दंश कर जनता को भरमा रहे है.... माँ इन देश्वासियो को समझाओ ... वंदेमातरम का अर्थे क्या है.... 

मित्रों..., वंदेमातरम तो अंतराष्ट्रीय गीत है, इसमे भूमि की प्रशंसा की गई है, और माँ की उपाधि दी गई है, भूमि की जितनी मेहनत करो तो उतनी ही ज्यादा उपजाऊ होकर , देश की पैदावार बढा कर , सुजलाम , सुफलाम बनाया जा सकता है, यह प्रकृति की अनुशंसा है, न कि विशेष धर्म का प्रतिक है, 1857 की क्रांति के समय यही एक मंत्र था, जिसने देशभक्ति के जस्बे से हर धर्म के लोगों मे एक नई उर्जा का संचार किया था.

आनंद मठ फिल्म मे वंदेमातरम के गाने से अंग्रेजो के होश उडा दिये थे...

गाँधी द्वारा कट्टर पंथी मुस्लिम लीग के इस विरोध के सामने घुटने टेकने पर इसकी परिभाषा बदल कर , मुस्लिम लोगों को दिग्भ्रमित किया, और वोट बैंक के चक्कर मे हर सरकार ने इसे , प्रोसाहित कर देशप्रेम की भावना खत्म कर, देश को खंडित करने का षडयंत्र रचा जा रहा है...???, 

जन - गण - मन तो हमारी गुलामी के समय के राजा जाँर्ज पंचम के आगमन की स्तुति मे अनुशंसा (चमचगिरी) करने के लिए , रविद्रनाथ टैगोर ने लिखा , जिन्हे अंग्रेजों के शासनकाल मे साहित्य का नोबल पुरस्कार भी मिला
इस वेबस्थल का मुख्य उद्धेश्य है...

Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold.....
www.meradeshdoooba.com (a mirror of india) स्थापना २६ दिसम्बर २०११
- भ्रष्टाचारीयों के महाकुंभ की महान-डायरी