Monday, 31 July 2017

मेरा संविधान महान , यहां हर माफिया पहलवान सत्ता मेवा है , इसकी जय है , सत्य आत्महत्या कर रहा है .. “अदालत – अदा नहीं किया तो लात ..., इसी लात से गरीबों की मौत.., देश के जजशाही, नौकरशाही सत्ताशाही को रिश्वत से धन के नशे की लत “


मेरा संविधान महान , यहां हर माफिया पहलवान 

सत्ता मेवा है , इसकी जय है , सत्य आत्महत्या कर रहा है 

..
अदालत अदा नहीं किया तो लात ..., इसी लात से गरीबों की मौत.., देश के जजशाही, नौकरशाही सत्ताशाही को रिश्वत से धन के नशे की लत “ 

याद रहे एक साल पहिले क़ानून से अति पीड़ित व्यक्ति ने खुली चुनौती देकर मुंबई हाईकोर्ट को एक याचिका देकर पूछा था कि आपके अदालत में मुझे सुनवाई के लिए १५ मिनट खरीदने है उसकी कीमत कितनी होगी .., और अदालत ने उसे लताड़ते हुए गिरफ्तारी की धमकी के बाद याचिका वापस लेने को मजबूर किया .

वही सलमान खान की जमानत याचिका को सम्मान देते हुए देश के अदालत ने अपने इतिहास में मुंबई हाईकोर्ट रात १० बजे तक खुली रही और सलमान के अब्बा जान ने कहा मैंने अपने धन के डब्बा से २३ करोड़ रूपये खर्च कर यह सफलता पाई है 

दोस्तों , दाँतों  तले ऊंगली दबाने का सवाल नहीं है .., यह वेबस्थल www.meradeshdoooba.com का स्लोगन है .., देश के ७० सालों का राजनेताओं का भोजन है ..,

ससुर/ससुरी , भ्रष्टाचार के सु-स्वर/स्वरी व दामाद - दाम से आबाद...



राजनेताओ का बेटा.., बना सोने का लोटा.., बेटी बनी धन की पेटी .., जहां घोटालों की बाढ़ से देश के सब्र का बाँध भी टूट गया है .

इस देश में १९४७ से आज तक डकारे गए रकम में दांत में फंसे भोजन को भी अदालत बरामद नहीं कर सकी है..., लालू के १००० करोड़ रूपये के घोटालों एवज २५ साल बाद, ब्याज की रकम जो ४० हजार करोड़ बनती थी और इसे मात्र ५ करोड़ का दंड व चार साल की LUXURY जेल में LUX साबुन के चाँद सितारों के साबुन से साबूत, बिना सबूत नहलाई से जीवन में एक नई चमक आई है .. 

दोस्तों.., मार्मिक स्तिथी है.., पाकिस्तान जैसे तानाशाह देश ने तो पनामा लिक घोटालों में प्रधानमंत्री की गद्दी


छीन गई.., हमारे देश के २० वीं व २१ वीं सदी के नायकों /महानायकों को इन ७० सालों के घोटालों से आज तक कोई खरोच नहीं आई है क्योंकि नौकरशाही जजशाही इसमें कॉकरोच बनकर क़ानून से जनता में कर्क रोग फैला कर .., तिलचट्टे से भ्रष्टाचार के चट्टे बट्टे बनकर देश की साख को बट्टा लगाकर देश का भत्ता डकारकर देश का भट्टा बिठा रहें हैं ..

हम बना चारा घोटाले से राष्ट्रीय ससुराव हमारा दामाद शैलेन्द्र यादव ८००० करोड़ के हवाले घोटाले से पछाड़कर बना राष्ट्रीय दामाद”.., कौन कहता है कि उस ससुरी का वाड्रा राष्ट्रीय दामाद है 




वेबस्थल व फेसबुक की ८ अप्रैल २०१६ की सार्थक पोस्ट

देश तो वहां डूबा, जहां पानी नहीं था .., बालवाड़ी के छोटे बच्चों को कविता पढ़ाई जाती है .., मछली जल की रानी है , जीवन उसका पानी है , हाथ लगाओ डर जाती है , बाहर निकालो मर जाती है..,
चाणक्य की हजारों उक्तियां १००० सालों बाद भी सार्थक है ...

राजनेता..... एक मछली की तरह है” , तालाब से समुन्द्र तक की मछली मुंह तो हिलाती है, लेकिन वह कितना पानी पीती है, किसी को पता नहीं चलता है
आज की.., सत्ताखोर से नौकरशाही बड़ी मछ्ली से, जल (संसाधनों) के राजा /रानी है.., जीवन में भ्रष्टाचार से देश का पानी पीने का अधिकार से, देश में गरीबी व भुखमरी का अन्धकार है , उन्हें हाथ लागाओ तो जनता के हाथ खा जाते हैं , बाहर निकालों तो पुलिस से जज भी डर से भाग जाते हैं कि कहीं हमारी रोजी रोटी का अधिकार जीवन से न छीन लें.

देश ७० सालों से कर्ज के गर्त में डूबा है.., हम मूलधन चुकाने के बजाय ,इस धन के ब्याज को चुकाने के लिए विदेशी निवेशकों को बुलाकर कर्ज का पहाड़ बना रहें हैं ..

देश का पानी सूख चुका है.., १९४७ में देश का १ रूपया = १ डॉलर से विदेशी देशों को कड़ी टक्कर देकर, देश का सम्मान था ...,

आज तक इन सत्ताखोरों ने मछली के रूप से बहुरूपिया बनकर .., बहुत रूपया.., देशी बैंकों को चूना लगाकर , विदेशी से देशी बैंकों व देश में भी अकूत संपती संपत्ति के मालिक बन बैठें हैं..,


देश की राख तले की चिंगारी की प्रतिभा को में सत्ताखोर, आरक्षण, जातिवाद, भाषावाद , अलगाव वाद का पानी डाल कर..., झूठी योजनाओं से अपने पिए हुए पानी के बुलबुले से , आराम हराम है, गरीबी हटाओ , मेरा भारत महान से इण्डिया शाइनिंग , भारत निर्माण से अच्छे दिनों के अफीमी नारों से , अब मीडिया माफिया राजनेताओं के गठबंधन से देशद्रोहियों की एक नई फ़ौज बनकर देश को कीचड़ से लीचड़ बनाकर .., देश गर्त में जा रहा है...

दुश्मन देश भी कंधे से कंधा मिलाकर.., देश के भीतरीघात से लोकतंत्र से लूटतंत्र के खेल से प्रसन्न हैं .., वे मान रहें है कि हमारा देश भीतरीघात से अपने आप कमजोर हो जाए ताकि आक्रमण करने में आसानी हो ..

दोस्तों लिखने को तो बहुत-बहुत है.., यदि काले धन को राष्टीय सम्पत्ती बनाने का क़ानून व विशेष राष्टीय सुरक्षा क़ानून (रासुका) व विशेष त्तीव्र गति के बुलेट ट्रेन जैसे अदालत नहीं बनेंगें .., जनता इन काले धने के मसीहाओं के बुलेट से घायल होकर उनके आंसू बहते रहेंगे..,
आज देश कि बिंडवना.., व सच्चाई यह है कि ७० सालों में गरीबों के बहने वालों आंसुओं की ताकत, देश की नदियों के पानी से ज्यादा है..,
रासुकासे ही गरीबों के और आंसू नहीं बहेंगें .., कौन बनेगा करोडपति के उद्घोष से .., विदेशों में करोड़ों का धन जमा करने वालों को भी वही दंड मिलेगा जो एक सामान्य अपराधी व पाकेटमार के अनुपात में मिलता है..,

रासुकाके बिना गरीबों के आसूं का कोई मोल नहीं होगा ..,और अच्छे दिनोंका नारा भी ७० वर्षो के इतिहास का अफीमी नारों का आयाम बनकर.., मीडिया-माफिया- नौकरशाही
जजशाही- सत्ताशाही के शाही सम्पन्नता का जो देश की आबादी के ०.५ % से भी कम लोगों की वैभवता से देश को गर्त में डालने का खेल बदस्तूर जरी जारी रहकर.., देश की तस्वीर और बदसूरत होते रहेगी

१.                        कृपया जरूर पढ़ें., मेरा संविधान महान , यहाँ हर माफिया पहलवान......,
जब जज थिरकेमाफियाओं की मुरली के धुन.., नौकरशाही से फिल्मशाही भी दबंग.., तो.,क्यों न नोंचे संविधान का अंग... जब माफियाओं की नग्नता को, गरीबों के कपड़ों से पहनाए, जामा तब क्यों न लगे, कानून में जंग.., यह है .., ६९ सालों से, देश के गरीबी का इस भूखा नंगा हिन्दुस्तान का यह है. छुपा रंग..

२. अदालत अदा नहीं किया तो लात ..., इसी लात से गरीबों की मौत.., देश के जजशाही, नौकरशाही सत्ताशाही को धन के नशे की लत
A.P.L, B.P.L….. से Z.P.L… घोटाला इनके जीवन मे है वरदान .... जज भी बनें धन से भाग्यवान 

३. आज का कानून. (कान + ऊन = क़ान मे ऊन= कानून बहरा हो गया है), अपराधी की पुस्तिका है, न्यायालय उनकी पाठशाला और जेल उसकी कार्यशाला है
इसमे अपराधी के लिये एक राहत का शब्द है जमानत...... ??????????
यह जमानत शब्द अपराधी के लिये अमानत बन गया है
इसमे एक अग्रिम जमानत भी है, जो अपराधी , अपराध करने से पहले ले लेता है और संविधान मुँह ताकता रहता है ?

४. अपराधी, जमानत के आड मे देश की अमानत (धरोहर ) बन जाता है
4 बार जमानत ------ अपराध में , प्रायमरी पास ......... ?
10 बार जमानत अपराध में, हाई स्कूल पास ................ ??
12 बार जमानत अपराध में, मिडल हाई स्कूल ..................???
15 बार जमानत.... अपराध में, स्नातक पास ............................ ????
15 से ज्यादा ........ अपराध में, डाँक्टरी पास ........................................................... ?????????????
इस विघ्यालय से एक प्रस्तित प्रमाण पत्र, जिसमे माफिया कि उपाघि मिलती है

५. आज माफिया शब्द कानून के लिये " माफ किया " है
यह शब्द संविधान को धत्ता बताकर कानून का संरक्षित सदस्यबन जाता है
इनके शिक्षा व जनता को डराने व धमकाने की कला के अनुसार हर सत्ता व विपक्षी पक्ष अपने - अपने पक्षो मे शामिल कर अपनी गुणवत्ता बढाते है, और एक समय ऐसा आता है , जज ,पुलीस, नौकरशाही (आइ.ए. एस, आइ. पी एस. जिला अधिकारी...इत्यादी ) के रोजी रोटी व तबादले का अधिकार इन दागी नेताओ के हाथ आ जाता है
इनके एक टेलीफोने से प्रशासन में हडकप मच जाता है , अधिकांश प्रशासनीक अधिकारी
रोजी रोटी व तबादले बचाने के लिये भ्रष्ट नेता के चरणदास बनकर, उनके पद चिन्हो पर चलकर, लूट के भागीदार बनकर , जनता की गाडी कमाई मे डाका डाल रहे है जिससे, जनता गरीबी व भूखमरी के हालत मे जीने को मजबूर है.

६. इन के 5 साल के बच्चे राणा सागा के औलाद लगते है, और गरीबो के 5 साल के कुपोषीत बच्चे 50 साल जैसे लगते है आधे से ज्यादा तो 5-6 साल के पहिले ही मर जाते है ?

७. आज का कानून मेरे विचार ....
इस देश न्याय पांने के लिये किसी भी व्यक्ती को, एक मकडी के जाल मे फसकर, मकडी (कानून) से लडना पडता है, इस जाल से उलझते- उलझते उसकी शारीरिक , मानसिक ताकत व घर बार बिक जा ता है, और क्या मिलता है? तारीख पर तारीख , न्याय पाने के चक्कर मे पीढिया गुजार दी जाती है...?? , घर मे कागजो के पुलीदों का ढेर , कहते है कानून मे कंकाल के अन्दर कंकाल होते है , इसमे उलझते जाते है.

८. आज न्याय की , “एक बन्दर और दो बिल्ली की कहानी गुजरे जमाने की बात हो गइ है, आज न्याय का बन्दर, अपने साथ दो बन्दर रखकर, न्याय के लिये तडफती बिल्लीयो को कहते है, न्याय के तराजू के पलडे की रोटी खत्म हो गई है, दोनो का पलडा एक समान है. जाओ, आगे न्याय चाहिए तो अपने घर बार बेच कर रोटी का जुगाड करो, “

९. यहां न्याय तो नही मिलता है, हाँ, न्याय के नाम पर गरीबी जरूर मिलती है ?

१०. इंडिया के कानून के शब्द कोश मे एक महत्वपूर्ण शब्द है प्राकृतिक न्याय ,इस शब्द के आड मे वकील बहस कर जज को झक झोर देता , जिसने, जितने ज्यादा व्याख्या (दलील) की क्षमता वह उतना बडा वकील कहलाता है,
इस प्राकृतिक न्याय ने देश ने प्राकृतिक सौन्दर्य खो दिया है, भू मफिया जमीन , व दुसरे माफिया जनता व देश को लूट रहे है.

११. आज एक मुकदमे का फैसला आने मे कम से कम 20-40 साल का समय लग जाता है , इस्का अर्थ हुआ के हम जज, पुलिस, वकीलो को बिना न्याय के वेतन दे रहे है
एक जज का कार्यकाल 2-4 साल का होता है, नया जज आने पर उसे मुकदमे का अध्धन करना पडता है, तारीख पर तारीख लगती है, जब तक वह मामले को समझने लगता है तो वह सेवांनृवितहो जाता है,

प्रेमचन्द कि कहानी मे लिखा गया है, अदालते मतलब कागजी घोडे दौडाना, इस कागजी घोडो पर बैठकर जजो वकीलो व पुलीसौ की फौजे आनन्द उठाते हुए अपनी आजीविका के साथ फरियादी को लूट रही है,

किसी ने कहा है, “सभी कानून बेकार है अच्छे लोगो को उनकी जरूरत नही होती है और बुरे लोग उससे सुधरते नही है”,
आज के माहौल मे बुरे लोग सिर्फ सुधरते है और वे अपनी सम्पती व सत्ता का अधिकार कर देश को चला रहे है,

१२. मैकोले का कहना था कि भारत को हमेशा के लिए गुलाम बनाना है तो इसके शिक्षा तंत्र और न्याय व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करना होगा और आपने Indian Education Act पढ़ा होगा, वो भी मैकोले ने ही बनाया था और उसी मैकोले ने इस IPC की भी ड्राफ्टिंग की थी। ये बनी 1840 में और भारत में लागू हुई 1860 में। ड्राफ्टिंग करते समय मैकोले ने एक पत्र भेजा था ब्रिटिश संसद को जिसमे उसने लिखा था कि::
"मैंने भारत की न्याय व्यवस्था को आधार देने के लिए एक ऐसा कानून बना दिया है जिसके लागू होने पर भारत के किसी आदमी को न्याय नहीं मिल पायेगा। इस कानून की जटिलताएं इतनी है कि भारत का साधारण आदमी तो इसे समझ ही नहीं सकेगा और जिन भारतीयों के लिए ये कानून बनाया गया है उन्हें ही ये सबसे ज्यादा तकलीफ देगी और भारत की जो प्राचीन और परंपरागत न्याय व्यवस्था है उसे जड़मूल से समाप्त कर देगा।वो आगे लिखता है कि
"जब भारत के लोगों को न्याय नहीं मिलेगा तभी हमारा राज मजबूती से भारत पर स्थापित होगा।" 

१३. एक ओटो रिक्शा के पीछे के लिखा था सत्य परेशान होता है, लेकिन पराजित नही होता
आज के मौजुदा हलात मे सत्य इतना परेशान होता है कि पराजित नही होने से पहले आत्महत्या कर लेता है - उदाहरण किसान आत्महत्या,और मध्यम वर्ग की आम जनता, गरीबी व भूखमरी से आत्महत्या के लाखो खबरे अखबारो मे पढने अखबारों मे मिलती है.
दुनिया के जिस देश मे प्रतिशोध वाला कानून है, वहा सबसे कम अपराध होते है. हमारे संविधान से न्याय न मिलने से हजारो फरियादी अपराधी बन चुके है, और परम्परागत अपराधी करोडपती है
१४. याद रहे २ साल पहिले.., , इरान मे एक युवति के चेहरे पर एसिड फए फेकने पर उसकी दोनो आँखे चली गई, तो अदालत ने हुक्म दिया कि अप्रराधी की दोनो आँखे फोंड दी जाये उसी तरह से सऊदी अरब का भी कानून है, बचे हुए मध्य पूर्व देशो के कानून, हमारे संविधान से भी बहुत कठोर है
आज देश मे 4 करोड मामले विभिन्न अदालतो मे विचाराधीन है, हमे शुक्रगुजार होना चहिये, देश के पंचायती राज का, वहाँ के निवासी उंनके न्याय का सम्मान करते हुए, राज्य की अदालतो मे नही जाते है, उसी तरह से उन नक्सली शासीत प्रदेश का न्याय, जहाँ, जन अदालत से उन्हे न्याय मिलता है (जिंनका कानून देश के 30-40% हिस्से मे है)

१५. यदि इनके मामले देश की अदालतो मे आते, तो अदालतों मे विचाराधीन मामले 12 करोड से भी ज्यादा होते थे, मतलब, 24 करोड से भी ज्यादा से भी ज्यादा लोग, 30% देश की वयस्क आबादी न्याय के चक्कर मे अपने जीवन का समय बरबाद कर रही होती ?

१६. ये हमारी न्याय व्यवस्था अंग्रेजों के इसी IPC के आधार पर चल रही है और आजादी के 65 साल बाद हमारी न्याय व्यवस्था का हाल देखिये कि लगभग 4 करोड़ मुक़दमे अलग-अलग अदालतों में पेंडिंग हैं, उनके फैसले नहीं हो पा रहे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा लोग न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं लेकिन न्याय मिलने की दूर-दूर तक सम्भावना नजर नहीं आ रही है, कारण क्या है? कारण यही IPC है। IPC का आधार ही ऐसा है.

कहते हैं.., “शराब से समुन्द्र से ज्यादा लोगों को डूबोया है.., और हमारा देश भी भ्रष्टाचार के शराब से कानूनी को डूबा कर ..., देशवासियों को पस्त कर, त्रस्त कर, इस, एक् अंग्रेजो के अस्त्रसे देशवासीयो को मारकर..,पीटकर..., बीमारी , तनाव व अवसाद. (DEPRESSION) से अपने दबंगी के DEEP- IMPRESSION से देश के मसीहा बनकर, छायें हैं..., दोस्तों डूबते देश की यही कहानी है