Sunday, 2 October 2016

२ अक्टूबर का जन्म दिवस, देश के भाग्य विधाता लाल बहादुर शास्त्री का जन्म दिन ह्त्या दिवस से शोकांकित हो गया गांधी जवाहर के जहर, जिन्नाह के जिन्न व गांधी की गंदी राजनीति से देश खंडित हुआ


शास्त्रीजी..आप रूस मत जाओ..हम जीते हुए राष्ट्र हैविदेशी राष्ट्राध्यक्षों को हमारे देश बुलाओं आप रूस जाओगे तो वापस नहीं आओगें और हमारे द्वारा जीता भाग भी लुटा आओगे..

२ अक्टूबर का जन्म दिवस,  देश के भाग्य विधाता लाल बहादुर शास्त्री का जन्म दिन ह्त्या दिवस से शोकांकित हो गया गांधी जवाहर के जहरजिन्नाह के जिन्न व गांधी की गंदी राजनीति से देश खंडित हुआ था , मात्र १८  महिने में नेहरू की दुर्बल शाही की अय्यासी चीन से हार व  नेहरू के सोच की  शौच को साफकर व  देश के जवानों व किसानो की जय की राष्ट्रवादी सोच से देश की काया पलट कर देश विश्व गुरु की दहलीज में पहुँच कर अमेरिका के TIME पत्रिका ने भी शास्त्री का लोहा माना 
१. ताशकंद जाने से पहले वीर सावरकर ने लालबहादुर शास्त्री को चेताया और कहा शास्त्रीजी हम जीते हुए राष्ट्र है रूस के प्रधान्मत्री को हमारे देश मे बुलाओयदि आप ताशकंद जाओगे तो वापस नही आओगे.. और हमारे द्वारा जीता भाग भी लुटा आओगे..
उनकी यह भविष्यवाणी सच हुई,
२. ९ जनवरी १९६६ की रात लालबहादुर शास्त्री ने ताशकंद से अपनी पत्नी ललिता शास्त्री को फोन कर कहा मैं हिन्दुस्तान आना चाहता हूँयहांमुझ पर हस्ताक्षर करने के लिए दवाब डाल रहें है...मुझे यहां घुटन हो रही है...
देश के सत्ता की राजनयिक फौजे बार-बारशास्त्रीजी से कह रही थी...भले हम युद्ध जीत गये हैंयदि आप हस्ताक्षर नहीं करोगे तो आगे अन्तराष्ट्रीय बिरादरी एकजुट होकर देश की आर्थिक स्तिथी बिगाड़ देगी...
३. इसके बाद उनके कड़े मंसूबेहमारे देश के सत्ता की राजनयिक फौजे तोड़ने में कामयाब हो गयी..१० जनवरी १९६६ के शाम ४.३० बजे शास्त्रीजी ने जीती हुई जमीन वापस लौटाने व शांती समझौते पर हस्ताक्षर करने के बादउनके पुत्र अनिल शास्त्री को कहा गया ...वे देश के प्रधानमंत्री हैंउनकी सुरक्षा के लिए उन्हें विशेष आवास में अकेले में सुरक्षित रखना होगा प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के ताशकंद समझौते के बाद ८ घंटे के बाद ११ जनवरी तड़के १ बजे,पाकिस्तानी रसोईये द्वारा रात को दूध पीने के बाद उनकी मौत हो गईमौत के समय उनके कमरे मे टेलिफोन नही थाजबकिउनके बगल के कमरे के राजनयिकों के कमरों मे टेलिफोन थाउनकी मौत की पुष्टी होने पर राजनयिकों की फौज दिल्ली मे फोन लगा कर चर्चा कर रहे थे कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा ?
४. अंत तक ललिता शास्त्री गुहार लगाती रहीमेरे पति की मौत की जाँच होआज तक सभी सरकारों द्वाराकोइ कारवाई नही हुई?,
५. इस रहस्य को जानने के लियेआर.टी.आई. कार्यकर्ता अनुज धर ने एडी चोटी का जोर लगाने के बादसरकार की तरफ से जवाब मिला कि यदि हम इस बात का खुलासा करेगें तो हमारे संबध दूसरे देशों से खराब हो जायेगें ?
६. और एक राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री बेमौतमौत् का शिकार हो गया.और…..? अपने परिवार के पीछे छोड गया……, सिर्फ और सिर्फ……?????, कर्ज का बोझ?.
७. देश का एक लाललाल बहादुर शास्त्रीजब प्रधानमंत्री बनेतब देश मे विकट परिस्थीतिया थीदेश भुखमरी के कगार मे पहुँच रहा थासीमा पर दुशमनो की तोपें आग उगलने की तैयारी मे थी. जिन्होने जय जवान – जय किसान” के नारे से दुश्मनों को सबक सीखाकर देश मे हरित क्रति के साथ-साथ श्वेत क्रांति कीप्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 19 महिने के प्रधानमंत्री के कार्यकाल की कामयाबी से नेहरू द्वारा किया गया भ्रष्टाचार का शौच साफ कर दिया था…., नेहरू के चमचे नेताओ की अय्याशी खत्म करउन्हे आम नेता बना दिया था…???
८. देश की जनता उनकी कायल थीउनके आवाहन को जनतासर आँखो मे रखकर उन्हें देश का भाग्य – विधाता मानती थी,
९. उनकी साफ सुथरी छवि के कारण ही उन्हें 1964 में देश का प्रधानमन्त्री बनाया गया। उन्होंने अपने प्रथम संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उनकी शीर्ष प्राथमिकता खाद्यान्न मूल्यों को बढ़ने से रोकना है और वे ऐसा करने में सफल भी रहे। उनके क्रियाकलाप सैद्धान्तिक न होकर पूर्णत: व्यावहारिक और जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप थे।
१०. निष्पक्ष रूप से यदि देखा जाये तो शास्त्रीजी का शासन काल बेहद कठिन रहा। पूँजीपति देश पर हावी होना चाहते थे और दुश्मन देश हम पर आक्रमण करने की फिराक में थे।
1965 
में अचानक पाकिस्तान ने भारत पर सायं 7.30 बजे हवाई हमला कर दिया। परम्परानुसार राष्ट्रपति ने आपात बैठक बुला ली जिसमें तीनों रक्षा अंगों के प्रमुख व मन्त्रिमण्डल के सदस्य शामिल थे। संयोग से प्रधानमन्त्री उस बैठक में कुछ देर से पहुँचे। उनके आते ही विचार-विमर्श प्रारम्भ हुआ। तीनों प्रमुखों ने उनसे सारी वस्तुस्थिति समझाते हुए पूछा: "सर! क्या हुक्म है?" शास्त्रीजी ने एक वाक्य में तत्काल उत्तर दिया: "आप देश की रक्षा कीजिये और मुझे बताइये कि हमें क्या करना है?"
११. शास्त्रीजी ने इस युद्ध में नेहरू के मुकाबले राष्ट्र को उत्तम नेतृत्व प्रदान किया और जय जवान-जय किसान का नारा दिया। इससे भारत की जनता का मनोबल बढ़ा और सारा देश एकजुट हो गया। इसकी कल्पना पाकिस्तान ने कभी सपने में भी नहीं की थी।
१२. लाल बहादुर शास्त्री के आगे प्रधानमंत्री पद पर रहनादुनिया के देशों को इतना डर नही था..जितना इंडियन काग्रेसीयों कोवे इस डर को पचा नही पा रहे थेउन्हे डर था कि राजनीती अब नेताओ की मजदूरी हो जायेगीसादगी की वजह से उनकी अगली पीढी भी मजदूर बनना पसंद नही करेगीऔर वंशवाद खत्म हो जायेगा. और उन्होने इंदिरा गाधी को ब्रिटेन मे भारत का उच्चायुक्त बनाने का संकेत दे दिया था.
१३. आखिरकार रूस और अमरिका की मिलीभगत से शास्त्रीजी पर जोर डाला गया। उन्हें एक सोची समझी साजिश के तहत रूस बुलवाया गया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लियाहमेशा उनके साथ जाने वाली उनकी पत्नी ललिता शास्त्री को बहला फुसलाकर इस बात के लिये मनाया गया कि वे शास्त्रीजी के साथ रूस की राजधानी ताशकन्द न जायें और वे भी मान गयींअपनी इस भूल का श्रीमती ललिता शास्त्री को मृत्युपर्यन्त पछतावा रहा.
१४. जब समझौता वार्ता चली तो शास्त्रीजी की एक ही जिद थी कि उन्हें बाकी सब शर्तें मंजूर हैं परन्तु जीती हुई जमीन पाकिस्तान को लौटाना हरगिज़ मंजूर नहीं. काफी जद्दोजहेद के बाद शास्त्रीजी पर अन्तर्राष्ट्रीय दबाव बनाकर ताशकन्द समझौते के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करा लिये गये.
उन्होंने यह कहते हुए हस्ताक्षर किये थे कि वे हस्ताक्षर जरूर कर रहे हैं पर यह जमीन कोई दूसरा प्रधान मन्त्री ही लौटायेगावे नहीं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब ख़ान के साथ युद्धविराम के समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ घण्टे बाद 11 जनवरी 1966 की रात में ही उनकी मृत्यु हो गयी। यह आज तक रहस्य बना हुआ है कि क्या वाकई शास्त्रीजी की मौत हृदयाघात के कारण हुई थीकई लोग उनकी मौत की वजह जहर को ही मानते हैं।
१५. प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के ताशकंद समझौते के बाद रात को दूध पीने के बाद उनकी मौत हो गइमौत के समय उनके कमरे मे टेलिफोन नही थाजबकिउनके बगल के कमरे के राजनयिकों के कमरों मे टेलिफोन थाउनकी मौत की पुष्टी होने पर राजनयिकों की फौज दिल्ली मे फोन लगा कर चर्चा कर रहे थे कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा ?
यही हाल वीर सावरकर के जीवन के साथ भीलालबहादुर शास्त्री के मौत के सदमे के बाद,वीर सावरकर बिमार होते गये ,उन्होने कहा अब देश गर्त मे चला गयाअब मुझे इस देश मे जीना नही है” वीर सावरकर ने दवा लेने से इंकार कर दियाएक बार डाक्टर ने उन्हे चाय मे दवा मिला कर दीतो वीर सावरकर को पता चलने पर उन्होने चाय पीना भी बंद कर दिया और एक राष्ट्र का महानायक इच्छा मृत्यु (कहे तो आत्महत्या) से चला गया.
वीर सावरकर की यह भविष्यवाणी भी सही निकली ……?????
शास्त्रीजी को उनकी सादगीदेशभक्ति और ईमानदारी के लिये आज भी पूरा भारत श्रद्धापूर्वक याद करता है
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आओ शास्त्रीजीताशकंद में तुम्हारी विजय पताका को ताश के महल के पत्तों की तरह ढ़हा करतुम्हारा काम तमाम करता हूं...
मेरे पति का शरीर जहर से नीला पड़ गया है..इनके शव-विच्छेदन से जांच की जाए...