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Tuesday, 23 February 2016

यदि JNU का नाम VEER SAVARKAR UNIVERSITYरख दिया जाय तो.., राष्ट्रवाद से देश में क्रांती आकर देश ३ सालों में ही विश्वगुरू बन जायेगा..


यदि JNU का नाम  VEER SAVARKAR UNIVERSITYरख दिया जाय तो.., राष्ट्रवाद से देश में क्रांती आकर देश ३ सालों में ही विश्वगुरू बन जायेगा.. (२६ फरवरी को वीर सावरकर की ५० वीं पूण्य तिथी पर विशेष )
JNU V/S VEER SAVARKAR UNIVESAL CITY- VICINITY
दुनिया के जिन देशों ने वीर सावरकर की विचारधारा को अपनाया आज वें विश्व के उन्नत देशों की कतार में हैं .., स्कूल में सेना के प्रशिक्षण के माध्यम से देश का सैनिकिकरण ..व शक्ति ही “शक्ती का सम्मान करती है” सावरकर के उदगार को पुस्तक बनाकर महान वैज्ञानिक व भारत रत्न,पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर ए.पी.जे अब्दुल कलाम की कलम भी सावरकर की  कायल थे   
इजराईल इसका बड़ा उदाहरण व विश्व में ५-१०  करोड़ से कम आबादी वाले देश उन्नतता की कतार में है.
हमारे अय्याश सत्ताखोरों ने १९४७ से ही हमारे देश को खंडित कर ..., इस खेल को पश्चिमी विचारों की शिक्षा व दक्षिण पंथी पार्टियों के साथ कांग्रेस भी कदम ताल कर रही है
. जवाहर लाल नेहरू  V/s  सावरकर के विचार

१, सावरकर बचपन से हे कुशाग्र बुद्ध व वीर थे  .., गाँव के स्कूल में प्राथमिक शिक्षा से ही भारतमाता की बेड़ियां तोड़ने के लिए बाल्यकाल से अपने गाँव के बच्चों की सेना बनाकर १० वर्ष की आयु में अख़बारों  में कविता लिखने वाले, जबकि   जवाहरलाल नेहरू अपने काल में स्कूल नहीं गए.

२ वीर सावरकर ने इंग्लैंड में अध्ययन कर सप्रमाण सिध्ह किया कि किम ह्यूम द्वारा स्थापित कांग्रेस का मंच क्रांतीकारियों की आवाज दबाने का एक सेफ्टी वाल्व है.. जो हिन्दू-मुस्लिम एकता को  तोड़ेगा .., यह एक दगा व दागदार पार्टी है  

२. गुलामी का संविधान अस्वीकार करने पर बैरिस्टर की डिग्री छीने जाने के बावजूद कोई पश्चाताप नहीं किया जबकि मोतीलाल नेहरू द्वारा अंग्रेजो के राज में  राजा-रजवाड़ों की वकालात कर अकूत धन कमाकर.., अय्याशी कर कांग्रेस को अर्थ सहाय करते रहे .., उनके व्यभिचार से काश्मिरी पंडितों ने उन्हें अपने समाज से निकाल डाला था .., १९४७ के बाद नेहरू के प्रधानमंत्री काल में नेहरू की जनता को आय प्रतिदिन १६  आना कहने को चुनौती देकर राम मनोहर लोहिया ने कहा था.., तुम्हारा दिन का खर्च २५ हजार व देश की जनता की आय २ आना से भी कम है .., इसी अय्याशी से कश्मीर के टुकड़े से हम चीन के साथ युद्ध में हार गए,,,

३. नेहरू की वंशवाद की बेल ने देश को घोटालों से देश में भ्रष्टाचार के बरगदी पेड़  से देश पर राज किया .., वहीं सवारकर द्वारा अपना सम्पूर्ण जीवन का हर पल  देश को समर्पीत किया.., अपने बच्चों के लिए भी कोई सम्पती नहीं देकर देश को दान कर  इच्छा मृत्यु को प्राप्त हुए
४. अंग्रेजो द्वारा १९१० में  भिन्गूर का उनका घर जब्त करने के बाद , १९47 में उन्हें नेहरू द्वारा इनकार करने पर सावरकर ने कहा मैंने तो अपना सम्पूर्ण  जीवन भारतमाता की बेड़ियों से मुक्ती के लिए न्योछावर किया .., भले मुझे खंडित भारत मिला लेकिन हिमालय की चोटी .., ऊंचे पर्वत .., नदियों व समुन्दर तो मिला .., इसका मुझे संतोष है.., मेरे जब्त घर के  बारे में गोरे अंग्रेजों से नहीं लड़ा तो काले अंग्रेजों से क्या लड़ना.... 
  
५. याद रहे नेहरू ने अपनी पुस्तक “विश्व इतिहास की झलक” में शिवाजी का कद बौना कर दिया , इसी प्रकार ‘भारत एक खोज’ में महाराणा प्रताप के कार्यों की आलोचना व जयचंद की प्रशंसा की जबकि वीर सावरकर द्वारा १८५७ का गौरवशाली स्वतंत्रता का इतिहास को अंग्रेजों ने वीर सावरकर का लोहा माना.

६. जब तक वीर सावरकर जिन्दा थे देश के १००० सालों का हमारे गौरवशाली अतीत की व्याख्या से लिखने पर,  किसी इतिहासकार में हिम्मत नहीं .., उनकी मृत्यु के बाद कुकुरमुते की तरह इतिहासकारों से मीडिया ने इस सच की इति कर आज कार बंगलों के मालिक बनकर देश को दुर्बल कर रहें हैं




विशुद्ध रूप से वीर सावरकर की प्रवाष्ठियों का फेस बुक पेज  https://www.facebook.com/Veer-Paramveer-Savarkar-Shining-Star-of-Nationalism-wwwmeradeshdooobacom-941778989210314/