Saturday, 10 October 2015

जातिवाद के नरमुंडों के समीकरण का यह खेल है.., कही दलित , मुस्लिम व यादव के झोल से इनके वोट अपने झोले में डालने की प्रतिस्पर्धा है..


१. क्या मोदी के बिहार विकासके अश्वमेघ घोड़े को.., जब लोकसभा चुनाव में ..., मोदी लहर के असर से ..., लालू..., बना लूला और नितीश कुमार..., बना लंगड़ा और अब दोनों आँख में मुस्लिम(M) यादव(Y) की पट्टी बांधे घोड़े से , नितीशलाल की नीती से , MY बिहार से चुनाव जीतने का दोनों के अंधे ख्वाब, मोदी तोड़ देंगे.
२. लालू के अंधे बयान से, जो खुद चारा के साथ पेपर पर गाय भैस खाकर.., अब हिंदुओं को गाय खाने वाला कहकर..., इस लांछन से, भीगी बिल्ली के म्याऊं की आवाज से अपने MY के दांत की धार तेज कर रहें हैं .
२. क्या...??, अब केजरीवाल की नौटंकी से MY लालू के नीती के लव ट्रेंगल से..., क्या अब होगी.., इन तीनों की होगी टिंगल.., पटखनी से राजनीती के चिटखनी से एक दल, दूसरे दल को कैद करने का खेल है
३. अभी इस दो-मुंहा नितीश लाल के साथ अपने को दिल्ली का सरताज कहने वाले टिंगलवाल.., लालू के मिलन समारोह में शिरकत देने उन्हें अपनी तरह इमानदार कह.., खुली हवा में नीतीश कुमार के धनुष से हवा में तीर चलाकर तारीफ़ कर दी..,
४. जातिवाद के नरमुंडों के समीकरण का यह खेल है.., कही दलित , मुस्लिम व यादव के झोल से इनके वोट अपने झोले में डालने की प्रतिस्पर्धा है..
सितम्बर १३, २०१४ की वेबस्थल व फेस बुक की post
कहते है रस्सी जल गयी.. बल नहीं गया , MY के समीकरण से अब नीतीश की पार्टी भी लोकसभा में धुल चाट गयी.., अब नितीश व लालू का गठबंधन (NITI + LAL = नीती के लाल ) से नीतीश व लालू अपनी धुल से विकास के पुतले का जातिवाद, भाषावाद, घुसपैठीयों के लेप से अपनी राजनैतिक आत्महत्या के अंतिम चरण में है...,
यह कोई ताज्जुब की बात नही है, बिहार मे जानवरों का चारा डकार जाने के बाद खुले आम लूट से लालू यादव जातिवाद, भाषावाद , अलगाववाद की आड् मे बिहार को लूटते
रहा, जो जयप्रकाश के आन्दोलन मे आपात काल मे मीसा कानून के अंतर्गत जेल गया,
मीसा को लालू ने बिहार का मसीहा समझ कर खुले आम लूट की , 10हजार करोड रूपये की, (आज के 2 लाख करोड रूपये से भी कही ज्यादा) ,लूट की, कागजों पर भारी मात्रा मे झूठे जानवर खरीदे गये थे , चलानों मे गाडियो के मनचाहा नम्बर डाल दिया है, चलानों के नम्बर खँगालने पर सी.बी.आई की जाँच से पता चला कि स्कूटर मे भैस आई है और जानवर लापता है, लालू राजनिती मे जानवर बनकर चारा खा गया , बिहारा को , भ्रष्टाचार के गोबर से बिहार को गोबर गणेश बना दिया, क्योकि, एक कहावत है... जो लालू सार्थक समझ बैठे थे... जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का...और लालू राजा के पास वोट बैंक का डंक भी था..???, कोर्ट का डंडा पडने पर , राबडी देवी , जिसे घर सँभालने के अलावा कोई अनुभव नही था, वह घर का जलता चूल्हा व जूठे बर्तने छोड कर राजनीति मे आ गई,
लालू ने सत्ता से बाहर रहकर राबडी देवी को रबड देवी समझ कर , भ्रष्टाचार के लूट के नाम से भ्रष्टाचार का रबड इतना ज्यादा खीचा कि, रबड के टूटने से, वह गुलेल की तरह , बिहार से लालू, आलू बनकर भ्रष्टाचार से पिचक गए और छ्टक-कर, बाहर गिर पडे.. और आज तक बिहार मे सत्ता मे आने का मौका नही मिला..??? इसकी हूबहू नकल ( सोनिया ने भी राजनीती मे प्रवेश करते हुए कहा मै, देश की बहू हूँ... हूँ-बहू- देश की- हूबहू) , वंशवाद से राबडी देवी व सोनिया गाँधी के सत्ता का मुखिया बनना, दोनों, एक पारदर्शी दर्पण की प्रतिमा का उदाहरण है,
काँग्रेस भी जो लालू के राज को भ्रष्टाचार का मास्टर माँडल मानकर , वंशवाद की एक आधुनिक खोज के लिए राबडी देवी की तरह एक माँडल की जरूरत थी राबडी देवी के, जो बोलने मे असमर्थ थी, चुपचाप रही, उसी तरह चुपचाप रहने, और काँग्रेस द्वारा कागज मे लिखा हुआ संदेश हिन्दी मे पढने वाली सोनिया गाँधी की खोज की गई , और वह भी क्या पढ रही है, उसे भी नही समझे, इसी के बेहतरीन खोज के नतीजे से , सोनिया गाँधी की खोज, सर्वोत्तम साबित हुई.. और इसके आड मे एक ईमानदार पुतले को बूलेट प्रूफ जैकेट के रूप प्रस्तुत किया गया, जिससे वंशवाद को आँच न पहुँचे, लेकिन इस वंशवाद ने पुतले को फुसलाकर कहा, तू देश को विकास की छँवी से भरपूर लूटा...??? हम तेरे गले मे विकास का ध्वनि बाँक्स लगा देते है. और देश का पुतला , इसी छँवी से देश को लूट रहा है, काला धन, विदेशी बैकों मे जाकर वही सफेद धन बनकर , विदेशी धन कर्जे के रूप मे आकर आम आदमी अब अपने निवाले से महरूम होने को मजबूर है..?? इतना सब होने के बावजूद , बूलेट प्रूफ पुतले का मुँह ही नही खुलता है..???
यहाँ तक की राजीव गाँधी को भी , देश, प्रदेश व राजनीति का भी ज्ञान नही था, वंशवाद की खाल व संवेदना के लहर से सत्ता पर बैठे (राजीव गाँधी को लोकसभा के 506 मे से 404 सीटे मिली) , , याद रहे, नेहरू जो अपने को अग्रेजो की औलद समझते थे, और देश का मसीहा के रूप मे अपने छँवि को प्रचारित किया उन्हे भी इतनी सीटे नही मिली थी...(लोकसभा के 489 मे से 363 सीटे मिली थी),
राजीव गाँधी मिस्टर क्लीन ( श्री सफेद) की छँवि से सज्ज थे, देश को 20 वी सदी मे ले जाने का दृढ निश्चय का भरोसा दिया... देश का हर वर्ग टक-टकी लगाए बैठा था, वे देश को एक नयी ऊँचाई पर पहुँचाएगे... लकिन राजीव गाँधी भी चंडाल चौकडी के झासे मे देश के कठपुतले प्रधानमंत्री साबित हुए, मेरा भारत महान के नारे के आड मे 100% नेता बैइमान होते गये...., मिस्टर क्लीन ( श्री सफेद) की छँवि को भूनाने के लिए , टी.वी., अखबारो मे देश विदेश घूमने, और जनता के नाम से नेताओ के लिय खाऊ योजनाए बनाई गयी, खजाना खाली होते गया, आज भी काँग्रेस गला फाड-फाड कर चिल्ला रही है , प्रसारित कर रही है कि राजीव गाँधी का सपना 20वी शताब्दी का संदेश ही काँग्रेस की देन है ,
राजीव गाँधी के मौत के बाद , जब, काँग्रेस के प्रधानमंत्री नरसिहाराव प्रधानमंत्री बने तो उन्होने जनता से कहा... देश मे राशन पानी (विदेशी मुद्रा) सिर्फ 40 दिनो के लिए है... यह मेरी मजबूरी है...
देश का खजाना खाली होने पर, आम आदमी को निचोडने के लिए विदेशी हाथों को गुप्त रूप से पंजे के रूप मे देश को लूटने के लिए बुलाया गया, और सिकन्दर ने सही कहा था , जिस देश मे भेडों का राजा शेर है... तो मै उस देश से डरता हूँ, लेकिन जिस शेरों का राजा भेड है तो मेरी जीत अवश्य है... लेकिन विदेशी लूटेरे को मालूम है कि जिस देश की रानी विदेशी है तो लूट मे हिस्सेदारी देकर आसानी से छूट पायी जा सकती है...
देशवासियो जागो... एक आर.ती .आई कार्यकर्ता की जानकारी से खुलासा हुआ कि सोनिया के विदेश ईलाज मे 1800 करोड रूपये खर्च हुए है... क्या यह ईलाज देश के अस्पतालों मे संभव नही थी... यह जानने का अधिकार हर देश्वासिओ को है या नही..., एक विदेशी पत्रिका ने रहस्योघाटन किया है कि सोनिया गाँधी की विदेशो मे 50 हजार करोड से भी ज्यादा की संपत्ती है...??? विपक्षी पार्टीयाँ भी इस मामले मे मौन बैठी है .. लेकिन क्यों, क्या विपक्षी पार्टीयाँ के पैंट का नाडा काँग्रेस के हाथ मे है...??? क्या आपको सत्ताधारी भ्रष्टाचार से भेड नही बनना चाहते है ..?? अब आप बने दहाड्ते शेर..?? तो इन शेरों मे राष्ट्रवाद का खून डालो...यह हमारी जन्मभूमि है... हम ही इसके मालिक है....???? सोचों.. सोचों...सोचों.. ??? अब इस देश मे कोई भी भ्रष्टाचारी माफिया राज नही करेगा.....जय हिन्द... जय भारतमाता...???

1947 का सत्यमेव जयते .........1948.............. 2015  से अब तक ‘’सत्ता एक मेवा है और इसकी जय है’’ बन गया है