Tuesday, 25 August 2015

जब किसी भी देश का झंडा विदेशी हवाओं से लहराए तो वह देश विदेशी ऑक्सीजन से.., ओजोन की परत से देशवासियों की जान में घुटन पैदा करता है...,


जब किसी भी देश का झंडा विदेशी हवाओं से लहराए तो वह देश विदेशी ऑक्सीजन से.., ओजोन की परत से देशवासियों की जान में घुटन पैदा करता है...,
२. चेतो मोदी सरकार, देश के १२५ करोड़ लोगों की सांसों में इतनी फुक है कि वे हमारे ही नहीं विश्व के देशों के झंडों को भी लहलहरा कर चन्द दिनों में बिना विदेशी चन्दों से, हम विश्व गुरु बन सकते हैं
३. यही हाल हमारे देश का है.., हमारे सत्ताखोरों ने अहिंसा को एक भयानक हथियार बनाकर.., भयंकर हिसा से १० लाख नर मुंडों से देश को खंडित कर, पर्दे के पीछे सत्ता परिवर्तन का खेल खेलकर उसे आजादीकी उपमा / अलंकार देकर, एक महात्माशब्द के अलंकरण की आड़ में, देश की स्वदेशी आत्मा को मार दिया है.
४. देशवासियों को आज तक आराम हराम, गरीबी हटाओ,मेरा भारत महान से लेकर अच्छे दिनों के कृत्रिम विकास के बयार मे एक छुपा हुआ जहर समाया है. 
५. शेयर बाजार में तो साल में एक दो बार काली रात आती है.., १९४७ से आजादी की आस में गरीबों को काले बादलों के छटने से देश में नये सवेरे का सूरज का सवेरा, ६९ सालों बाद भी नहीं उगा है.., देश सवरने की बजाय गर्त में जा रहा है.
६. सत्ता परिवर्तन के बाद ०.१% अंग्रेजी बाबुओं की औलादें जो विलायती शिक्षा से अंग्रेजों के संविधान में आस्था की प्रतिज्ञा से खाओ अंग्रेजी , पियों अंग्रेजी सोओ अंग्रेजी , जागो अंग्रेजी, थोपो अंग्रेजी ने विदेशी भाषा से गोरे अंग्रेजों के काले बादल की गुलामी को प्रतीक बनाकर, इस बादल से काले धन की बरसात से मालामाल हो गयें और आम हिन्दुस्तानी अवसाद से बेहाल हो गया है. 
७. राख तले चिंगारी के प्रतिभा में पानी फेर कर शिक्षा को कीचड़ बनाकर, देश बदबूदार हो गया है. विदेशी रूपये पर ६७ हथौड़ा मारकर देशवासियों को लहूलुहान कर रहा है.
८. दोस्तों.., सत्ता का एक फंडा है, देश में सत्ताखोरों का एक धंधा है ..,५०% आरक्षण से देश की आधी प्रतिभा गायब, और व्यापम के प्रकार के हजारों प्रकार के घोटालों से 30-४०% शिक्षा, अकर्मण्य छात्रों को पिछले दरवाजे से प्रवेश.., जो बचे शेष १०-२०% प्रतिभावान छात्र वे देश के इस मकड़जाल से, अपने अगली पीढी का भविष्य बनाने विदेशों में पलायन कर, अपनी प्रतिभा से विश्व को गौरान्वीत कर रहें हैं.
९. गरीबों की प्रतिभा को निखारने के लिए, उनके पास अमानत को गिरवी न होने से, बैंकों से शिक्षा का कर्ज न मिलने से, वे उच्च शिक्षा से मरहूम हो जाते हैं , वही धनाड्य वर्ग, धन बल से कछुवा डिग्रीयों से गरीबों के दिमाग की कुर्की कर रहा है.
१०. लाल बहादुर शास्त्री ने तो ५० करोड़ देशवासियों के मुठ्ठी बलसे सिर्फ १८ महीनोंमें जय जवान जय किसानसे, पकिस्तान के पास हमारे से उन्नत हथियार होने के बावजूद,देश को विजयी बनाकर, “उनके ही देश में उन्हें धूल चटा दी थी...”, हमारा देश तो शक्तीशाली यूरोपीय देशों के कतार में शामिल हो रहा था.., और विश्व गुरू बनने के पहिले, “विदेशी हाथोंने देशी हाथोंसे हाथ मिलाकर उनकी ह्त्या कर ..., भ्रष्टाचार की फसल बोकर , आज देश के किसानों की फसल खा दी है
११. देश की जय करने के लिये ,आज, गरीब से गरीब जवान किसान, विज्ञान से अपनी प्रतिभा दिखाने को आतुर है .., लेकिन वह,भ्रष्टाचारियों से व्यापकता के बोझ तले दबा है..

Deshdoooba Community June 14, 2014 व वेबस्थल की सार्थक post 

मोदी जी, आपके प्रधानमंत्री बनने पर शेयर बाजार विदेशी हवा (निवेश) के गुबार से गुब्बारे से नई ऊँचाई को छू रहा है ,पिछले इतिहास को देखें तो इस गुब्बारे ने रूपये को चव्वनी बनाकर , जब रूपया १८ रूपया प्रति डॉलर था , वह ७२ रूपया प्रति डॉलर तक पहुंच गया था 

शेयर बाजार की मजबूती तो, देशी निवेशक की मजबूती से मजबूत आधार बनती है, विदेशी निवेशक तो देश को लूटने के फिराक से देश की अर्थव्यस्था को पंगु बनाने व आतंकवादियों/माफियाओं के धन का निवेश का सुरक्षित छेत्र बना है...,

आपके नेता नीतिन गडकरी, यूं.पी.ए . १ और २ के कार्यकाल में बार-बार चिल्ला रहे थे commodity exchange (वस्तु विनिमय)

ने महंगाई की comedy (हास्यप्रधान नाटक)

से १५ लाख करोड़ का धन कृत्रिम तेजी बनाकर , महंगाई से जनता के पैसे लुटे है.., औए बार-बार गुहार लगा रहे थे की commodity exchange को बंद किया जाय , क्या आप अब इस जनता के दर्द को समझ कर , इस बाजार को बंद करोगे..

देश बना जुए का अड्डा…? ऊपर से भ्रष्टाचार का गढढ़ा…? महंगाइ से आम लोग के जीवन का बैठा भट्टा…???? कहावत है…, बंबई स्टॉक एक्स्चेंज के टावर के एक-एक सीढ़ी (पायदान) मे, शेयर बाजार मे उजड़े हुए लोगो की कब्र है। डॉलर के ७० रूपये पहुँचने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंग ने बयान दिया था अभी भी देश, 1991 के विदेशी मुद्रा के संकट की तरह नही उजड़ा है यो कहे अभी हमे और इंतजार करना है …??? याद रहे 1991 मे हमारे पास, “मेरा भारत महानके नारे से, खजाना खाली कर, देश मे सिर्फ 40 दिनों का विदेशी मुद्रा भंडार था…?????

1991 मे, जब मनमोहन सिंह, वित्तमंत्री बने तो शेयर बाजार को उछालने के लिए एक तांत्रिक सांड को बुलाया गया। उलट उसने प्रधानमंत्री को 1 करोड़ की रिश्वत देकर, पूरे शेयर बाजार मे जान फूकने का जिम्मा ले लिया…. यही से शुरू हुई छोटे निवेशकों के उजड़ने की बरबादी का खेल.., इस शेयर बाजार मे चारा घोटाले से भ्रष्टाचार से देश का वारा न्यारा करनेवाले काले लोगो की लूटाई कमाई के नाम से, सफ़ेद धन करने के आड़ मे पैसा लगा हुआ था.

देखते ही देखते 15 दिनो मे हर शेयर 5 गुना से 100 गुना बढ़ गए. वित्तमंत्री भी, संसद मे अपने बजट भाषण मे इस सांड के बखान मे शेरो-शायरी से हमारे शेयर बाजार के उछाल से, हमारे देश के प्रगति का पैमाना माप रहे थे। खुद सांड हर्षद मेहता की नीजी कंपनी MAZDA INDUSTRIES, जो, कि 2500 वर्ग फुट की खाली जगह थी, इस शेयर की 8 रुपये की कीमत 2100 रुपये पहूँची, जब यह शेयर लुढ़का तो, निवेशको को इस शेयर को बेचने की अनुमति नहीं थी और शेयर 90 रुपये मे दुबारा बेचने के लिए खुला। यूपीए1-यूपीए2 मे, विदेशी निवेशको को इतनी खुली छूट दे गई कि, वे भागीदारी नोट (P-NOTE= Participatory note) के जरिये, विदेशी निवेशक एक दूसरे को गुप्त रूप से बेचकर, शेयर के उतार-चढ़ाव का खेल खेलकर, निवेशको को चूना लगाकर धन कमा रहे थे। खूफिया विभाग कों बार-बार सूचनाए मिल रही थी कि….., इसमे अंडरवर्ल्ड का भारी धन लगा है और इस धन का उपयोग, देश के आतंकवादियो के प्रक्षिशण व बम धमाके मे निवेश किया जा रहा है। आरबीआई भी, सरकार की शह मे कोई कारवाई नहीं कर रही थी…..????? क्योकि सरकार को दुनिया मे दिखाना था की 20 हजार शेयर बाजार के अंको के आकड़ों से हमारे देश की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है…?, 
विदेशी निवेशक धन कमा कर भाग रहे है…????, झूठ के ढ़ोल की पोल खुल चुकी हे और डॉलर, शेयर बाजार से ध्वस्त अर्थव्यवस्था का कॉलर खीच कर कह रहा है….????, हमारे कर्ज चुकाने का फर्ज निभाओ और दिन प्रतिदिन देश की अर्थव्यवस्थाओ को कुचलने मे लगा हुआ है.

याद रहे यू पी ए 1 के, कार्यकाल मे प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी , कर्मचारियो के प्रोविडेट फंड की कमाई हम शेयर बाजार मे झोंक रहे है…???? यह कम्यूनिस्ट के विरोध से यह फैसला टल गया, और इसी बीच विश्व का नंबर 1, निवेशक लेहमेन ने अपने आप को दिवालीया घोषीत कर, अमेरिका तक को कंगाल कर दिया…??? कम्यूनिस्ट पार्टीयो का ही आभार माने कि , देश के कर्मचारियो का प्रोविडेट फंड का धन डूबने से बच गया…. एक कहावत है, हारा हुआ जुआरी को, जब, घर बार बेचकर पैसा मिलता है, तो भी वह पैसा, पुन: जुए मे लगाकर, वह पतंगे की तरह दीपक की लौ मे अपना जीवन झोक देता हैउसी तरह से हमारे देश के प्रधानमंत्री भी देश को पतंगा बनाकरा विदेशी लौ मे देश को झोक रहे है…. इसका अंजाम का निचोड़ यही है की हमारे प्रधानमंत्री तो सठिया गए हैऔर रूपया भी उनका अनुसरण करा रहा है…61-.62 कर रहा है , और एक नई ऊंचाई का आंकड़ा छूने को बेताब हो रहा है…????? जागो देशवासियों डूबते रूपये के साथ देश को बचाओ ….????