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Friday, 31 July 2015

क्या..? मोदी सरकार इस विश्व गुरू के, कब्र में गढ़े इतिहास को जिन्दा कर.., देशवासियों में जिंदगानी लाकर.., इस “विश्व गुरू” की प्रेरणा देंगे.., क्या...??, २६ फरवरी २०१६ को “परमवीर सावरकर” की “५० वी पूण्य तिथी”, धूम-धाम से मनाकर “राष्ट्रवाद” की अलख जगायेंगें .........!!!!!!!!!!!!!!!!


आजादी के मसीहा कहकर,  छद्म पुतलों व सडकों के नाम देखकर.., देश को “चौपटनगरी”  कर, अंधे राजाओं को देखकर , आज भी भारतमाता आहभर.., कराह कर, कह रही है.., ६८ सालों बाद भी..!!!,  मेरे १२५ करोड़ बेटों को किस तरह, विदेशी हाथ- विदेशी साथ – विदेशी विचार- विदेशी संस्कार , जाति, भाषा व धर्मपरिवर्तन से आपस में, लड़ाकर..., कैसे मेरे कटे अंगो के घाव सहित , पुन: मुझे विदेशी जंजीरों से बांधने का प्रयास किया जा रहा है..

क्या..? मोदी सरकार इस विश्व गुरू के, कब्र में  गढ़े इतिहास को जिन्दा कर.., देशवासियों में जिंदगानी लाकर.., इस   “विश्व गुरू” की प्रेरणा देंगे.., क्या...??, २६ फरवरी २०१६ को “परमवीर सावरकर” की “५० वी पूण्य तिथी”,  धूम-धाम से मनाकर “राष्ट्रवाद”  की अलख जगायेंगें .........!!!!!!!!!!!!!!!!

विश्व गुरू:
१.   जिन्होंने विश्व के क्रांतीकारियों में एक मंत्र भरा “जीवन में गुलामी” एक बडा “कलंक” है
२.   सुभाष चन्द्र बोस, सरदार भगत सिंग, चंद्रशेखर आजाद  व लाखों  क्रांतीकरियों को, “१८५७ एक “स्वातंत्र्य –युद्ध”” जो  हिन्दू-मुस्लिम एकता से लड़ा गया, एक राष्ट्रवादी  जीत थी .., हम ५ महीने स्वतंत्र थे , बाद में अंग्रेजों ने दुबारा कूटनीती से  पटियाला व ग्वालियर  के राजाओं ने नेपाल की सेना की मदद से इस   “स्वातंत्र्य –युद्ध” को कुचल डाला.
३.   भारत का संघर्ष पूर्वक जीत का “गौरव शाली  इतिहास” प्रमाण सहित लिख कर सिद्ध किया कि हम बुजदिल कौम नहीं “हमारा,ज्ञान विज्ञान, मस्तिष्क बल  “बाहुबली से गौरवशाली” था  
४.   “हिन्दुत्व”  पुस्तक में राष्ट्र की महत्ता को संबोधित कर कहा “हिंदुत्व” की जीवन शैली से ही विश्व का कल्याण होगा .
  
५.   सावरकर का जीवन परिचय:
१. बाल्यकाल के सातवें वर्ष से ही.., ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेकने का जूनून.. 
२. १६ साल की आयु में, भवानी माता के मंदिर में, छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह प्रतिज्ञा लेकर, मौत से न डरने वाले वीर सावरकर.., अन्तत: अपने कार्यों में सफल रहे.
३. वीर सावरकर का सम्पूर्ण जीवन,व्यभिचार मुक्त 100% शुद्ध रहा .., गुलाम भारत के समय, इंग्लैंड में उन्होंने अपनी विदेशी मित्र महिला साथियों द्वारा प्यार का इजहार करने पर कहा था.., मैं सिर्फ भारतमाता से प्यार करता हूं.., विवाह के बाद, मैं अपनी पत्नी से प्यार करूंगा..  अपनी जवानी के १३ मार्च १९१० से लेकर १० मई १९३७ तक २७ वर्षो की अमानवीय पीडा भोग कर उच्च मनोबल, ज्ञान और शक्ति साथ.., जब वह जेल से बाहर निकले जैसे अंधेरा चीर कर सूर्य निकलता है.
६.   . दुनिया में एकमात्र वीर सावरकर. जिन्होंने अपने परिवार को देश के बलिदान में झोंक दिया, अपना सम्पूर्ण जीवन, सम्पती.., 100% ज्ञान राष्ट्र के लिए समर्पीत करने के बावजूद, कभी सत्तालोलुप नहीं रहें..
६. १९६० में देश की लुंज-पुंज स्तिथी देखकर.., वीर सावरकर ने, प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को चुनौती देते हुए कहा था.., “मैं सत्तालोलुप नहीं हूं..., यदि आप मुझे २ साल के लिए सत्ता दें. तो मैं देशवासियों के राष्ट्रबल से देश को बलशाली बनाऊंगा, ताकि कोई दुश्मन हमारी तरफ आँख उठाकर न देखें... 
७. दोस्तों, वीर सावरकर का कितना भी बखान किया जाय कम हैं , वे तो, गुणों के खान थे..., देश के प्रति “राष्ट्रभक्ति” से आज भी राष्ट्र उनका  ऋणी है..,

विश्व के इस क्रांती कारी वीर,वीर,वीर ..., ही नहीं “परमवीर सावरकर” को गुरु पूर्णिमा के दिन ..,  अनंत,अनंत .. नमन...
आप हो गुणों के खान.., आपका बखान  ही.., भारतमाता की शान  
Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold. के संकल्प से गरीबी हटकर, भारत निर्माण से, इंडिया शायनिंग से, हमारे LONG – INNING से, “FEEL GOOD FACTOR” से देश के अच्छे दिन आयेंगें..,