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Tuesday, 19 May 2015

एक महान वीर ..परम वीर ..., वीर..वीर..विनायक...एक मात्र भारत माता का नायक, दामोदर.. , दमदार नायक.. , भारत माता का कर्ज चुका गया.., देश के स्वर्णिम इतिहास में अपना नाम दर्ज कराकर,

एक महान वीर ..परम वीर ..., वीर..वीर..विनायक...एक मात्र भारत माता का नायक, दामोदर.. , दमदार नायक.. , भारत माता का कर्ज चुका गया.., देश के स्वर्णिम इतिहास में अपना नाम दर्ज कराकर, वीर सावरकर ने भारतमाता को संवारने के अदम्य साहस से अपने बलबूते पर पंजाब के अमृतसर व कलकत्ता को हिन्दुस्तान का अंग बनाकर भारतमाता की शान को बढाया...  



एक महान वीर ..परम वीर ..., वीर..वीर..विनायक...एक मात्र भारत माता का नायक, दामोदर.. , दमदार नायक.. , भारत माता का कर्ज चुका गया.., देश के स्वर्णिम इतिहास में अपना नाम दर्ज कराकर, वीर सावरकर ने भारतमाता को संवारने के अदम्य साहस से अपने बलबूते पर पंजाब के अमृतसर व कलकत्ता को हिन्दुस्तान का अंग बनाकर भारतमाता की शान को बढाया...  (वीर सावरकर के  २८ मई २०१५  को  जन्म दिवस पर समर्पित )

यदि अमृतसर आज पकिस्तान में होता तो...,मौजूदा आतंकवादियों के माहौल में “अमृतसर मंदिर का सोना बिक गया होता ..., देश “वीर सावरकर के शौर्य” का कर्जा कभी नही चुका सकता है..., कैसे एक आदमी की सेना में भीम की तरह ५० हजार हाथी का बल..,  वीर सावरकर में था.., इस राष्ट्रवादी के ताप से अंग्रेजों के न डूबने वाले सूरज को  पसीना आ जाता था  

सावरकर को पतंजली शक्ती थी..., वे अप्रतिम दूरदर्शी थी.., दूरदर्शीती में मैकाले के बाप थे.., उन्होंने मैकाले नीती को भांप लिया था.., अंग्रेजों की समाज को बांटों और राज करो की नीती को टक्कर देने वाले एकमात्र सावरकर ही थे

देश के दलितों के लिए उनके अप्रतिम कार्य व आसाम में घुसपैठीयों की समस्या की भविष्य वाणी उन्होंने १९३५ में ही कर दी थी .., अब भी हम नहीं चेतें हैं...

सिक्खों के लोहड़ी त्योंहार के दिन.., सावरकर के कार्यों की लहर...,
१.दुश्मन के घर (इंग्लैंड) में, गुरु गोविन्द सिंग.... का महोत्सव मनाने वाले.., 

२. इंग्लैंड में, सिक्खों का इतिहास लिखने वाले वीर सावरकर.... 

३. सावरकर पहले हिन्दु , जिनका सम्मान स्वर्ण मंदिर गुरुद्वारा प्रबंधक समिती ने किया, और तब के अध्यक्ष मास्टर तारा सिंग ने उन्हें चांदी के मुठ की तलवार भेट की 

३. अखबारों के लेखों को झुठलाकर चुनौती देते हुए .., इंग्लैंड में १८५७.., एक स्वतन्त्रता संग्रामको सच बतलाकर, ५०वी जयंती का जज्बे पूर्वक आयोजन करने वाले एकमात्र वीर सावरकर 

४. इंग्लैंड में हिन्दुस्तान के सभी धर्मों (हिंदु,मुस्लिम,सिख,ईसाई) को एकजुट कर दशहरा समारोह करने पर, गांधी द्वारा आश्चर्य व्यक्त कर , इस कार्य का अभिनन्दन करने वाले मोहनदास करम चंद गांधी द्वारा सराहना 

५. श्यामजी वर्मा ने इंग्लैण्ड में वीर सावरकर को छात्रवृति दी , ऐसे सैकड़ों लोग “इंडिया हाऊस” में थे.., लेकिन श्यामजी वर्मा के विचारों को सार्थक करने वाले “एकमात्र वीर सावरकर” थे जिन्होंने इंडिया हाउस को “क्रांतीकारी हाउस” में तब्दील कर दुश्मन को उनके घर में खुले aam चुनौती देकर हतप्रभ कर दिया था..

६, वीर स्वर के इंग्लैंड में रहते...,  पत्रकार सावरकर के विचारों के कायल थे..., भारी भीड़ में वे लोगों को कहते थे हमें गुलामी में  रहने का कारण क्यों..., उनके भाषण में एक समां बन जाता  था और तो और विश्व के देशों ने सावरकर के स्वर का भी लोहा माना

दोस्तों बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है..., सत्ता के पिछलग्गू व इतिहासकारों ने इस सत्य को छुपाकर...यों कहे..!!!,  हमारे गौरवशाली अतीत को सत्ताखोरों के अतिथी बनकर..., देश के पत्रकार, पुकार कार बनने की बजाय.., देश के पतनकार बनकर.., इस इतिहास को कब्र की गहने गहराई में दफ़न कर दिया है...

क्या मोदी सरकार इस व अन्य राष्ट्रवादी शूरों का इतिहास आम जनता में लाकर उन्हें पाठ्यक्रम में शामिल कर..., देश को राष्ट्रवादी धारा से, देश को स्वदेशी विचारधारा से उन्नत बनायेंगें,,,