Saturday, 21 March 2015

बापू के तीन बंदर, अब बन गये है मस्त कलन्दर... देशवासियों.., हमें देश का दर्द कहकर.. खांसी आने वाली है..., कही जनता भी हमें खांसीवाल का बन्दर न समझे ...इसलिए कुछ समय रुके.., हम और बहुत कुछ आपसे कहेंगें...



बोलू: अबे देखू , तू क्या देख रहा है,,,
देखू : अरे दिल्ली में बड़ा “केमिकल लोचा चल रहा है..., इन बन्दरों ने हमें भी पछाड़ दिया है.., सत्ता की बेशर्मी में, बापू की ह्त्या कर दी है.. 
बोलू : अरे, बापू की ह्त्या तो नथूराम गोडसे ने १९४८ में ही कर दी थी..??. 
देखू : नहीं, बापू के विचारों की ह्त्या हो गयी है .., पहिले यह “आपू” बन्दर, अपने को बापू का बन्दर कहता था..., अब लंगूर बनकर अपने विरोधी बंदरों को भगा रहा है...
बोलू : ये बन्दर, असल में बन्दर हैं ही, नहीं हैं..., राष्ट्रवादी भी नही हैं..., इनमे सत्ता के भोगवाद का जूनून है..
ये सत्ता हथियाने के खेल में, बापू के बन्दर के खेल में, बापू के साथ हमें भी बदनाम कर रहें हैं..., इनमे विदेशी धन के खून से बन्दरबाज के खेल से.., देश, विदेश के विभिन्न विचारों के लोगों का समूह है..., इन्होने, इस खेल में रंग भरने के लिए, महाराष्ट्र के ईमानदार गांधीवादी अन्ना को मदारी के रूप में हाजिर कर.., बंदरों की “आपू” नीती से “अनशन” सीरियल की फिल्म से, मीडिया भी TRP से मालामाल हो गयी.., मदारी के साथ बन्दर भी अंतर्राष्ट्रीय पटल पर छा गये थे .., विदेशी शक्तियाँ भी देश की जनता को भरमाकर अपना धन झोंक कर, इस नीती से “जोंक” बनकर देश का खून चूसने का खेल, खेल रही थी
सूनू: हाँ मैंने सूना था, जब मदारी बने, अन्ना के अनशन में , ये बन्दर उत्पात मचाते हुए कहने लगे “ अब यह आन्दोलन (खेल), मदारी का बलिदान माँगता है.., ताकि इन बंदरों को अपने कृत्य में बल मिले
बोलू: हाँ तब यह मदारी भी, अपना खेल छोड़कर कहने लगा, मेरे नाम से इन बंदरों ने अपना खेल.., खेल लिया है...,
सूनू: हाँ, मैं सून रहा था.., इसके बाद, अन्ना इन बंदरों से कह रहें थे, मुझे मुक्त कर.., आप गाँव –गाँव घूम के अहिंसा की विचारधारा से जनता में स्वदेशी जागरण से एक क्रांती लाओ...
बोलू: लेकिने इनका मकसद तो शोर्ट कट से, विदेशी बटन से, सत्ता की शर्ट पहनने की उतावली से अन्ना को दरकिनार कर .., राजनीती में “बाप” बनने के खेल में अपने “आप” घुस गये
बोलू: हाँ. “आपू बंदरों” में तो, पहिले चुनाव से ही “सापू खेल” तो चल रहा था. सत्ता की बन्दरबाँट में पहिले चुनाव में सर्प युद्ध चल रहा था.., अपने को बंदरों का बन्ना बनने के लिए बिन्नी के जहर से वे सब घायल हो गये थे ..., बाद में “आपू बंदरों ने, जिनके आश्रय से उन्हें मैदान मिला था.., वह कूद मार रहें थे था.., उन पर धौस जमाने के धाँसू बनने के खेल से मैदान को रोदने के रूद्र रूप से .., कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को यह खेल रास न आने से.., वे तो बापू की छवी बिगड़ने के डर से इस बन्दर पार्टी को छोड़कर चले गये
सुनूँ: हाँ मैं भी सून रहा हूँ, हाल के चुनाव जीतने के बाद एक वरिष्ठ बन्दर जो बार-बार, चुनाव के पहिले व शपथ ग्रहण के समय, और बंगलूरू में भी कह रहा था “'इंसान का इंसान से हो भाईचार..,यही पैगाम हमारा..,,का नारा की शराफत का खेल से जनता को भरमा रहा था
बोलू: लेकिन यह तो लंगूर निकला , अब सत्ता के अंगूर खाने में आबाद होने से, लोमड़ी के खेल को भी पछाड़ दिया है..., पहिले कहता था हमें सत्ता के अंगूर नही.., हम जनता को भ्रष्टाचार के जंजीर से मुक्त करेंगे.., सभी को मुफ्त बिजली पानी वाई-फाई.. देंगें
सूनू : हाँ लोग कह रहे थे पहिले जन लोकपाल के नारों से जनता को भरमाया था, और राष्ट्रीय गद्दी पाने की ललक से, सत्ता छोड़ने के मलाल से.., इस उल्टी गुलांटी मारने के लिए जनता की अदालत में माफी माँगी थी.. और जनता ने माफ़ भी कर दिया था , अब चुनाव जीतने के बाद, अपनी बंदरों की अदालत में ही “लोकपाल” नीती को नकार कर ...ठोकपाल नीती से, अब लंगूर बना.., अब कह रहा है मुझे किसी भी बन्दर से नहीं है, भाईचारा...मेरा और केवल, मेरा “सर्वोसर्वा सत्ता” का नारा
सूनू: लोग कह रहे बंदरों में उत्पात है.., अभी तो इस आहट से जनता आहत है..,
देखू: हाँ, दुबारा सत्ता में आने के बाद तुरंत अन्ना ने आशीर्वाद तो दे दिया.., भूमी अधिग्रहण बिल के नए खेल में को शुरू करने में, दुबारा मदारी बनने के चक्कर में , “आप के साथ” हाथ मिलाया ..., लेकिन अब एक महीने के भीतर सत्ता को अंगूरी से लंगूरी के असली रंग से अन्ना भी समझ रहे है कि मेरे इस पिछले खेल से मेरी क़द्र इस “आपू...सापू...पार्टी” अपने को मेरा बापू बनकर अब मेरी एक आना क़द्र भी नहीं रह गयी है.., अब दिल्ली की राजनीती देखकर अन्ना का दिल दहल गया है.., जनता भी दिल थाम्बे बैठी है..., कि, क्या यह नौटंकी के कुर्सी के चार खम्बे सही साबित ५ साल तक रहेंगे.
बोलू: देशवासियों.., हमें देश का दर्द कहकर.. खांसी आने वाली है..., कही जनता भी हमें खांसीवाल का बन्दर न समझे ...इसलिए कुछ समय रुके.., हम और बहुत कुछ आपसे कहेंगें...