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Monday, 16 March 2015



एक पुतले ने…??? दूसरे पुतले को माला डाली…??????????? – दूसरा पुतला जागा और पहला पुतला, उल्टे पाँव, सरपट दौडा… ???
१ देश तो राष्ट्रवाद की भावना भूलकर , पुतले की आड़ में, देश में मुर्दानगी छायी है...,जिन्दा पुतला.., मरे पुतले की आड़ में भ्रष्टाचारी बनकर देश की खान खदान,ईमान बेच खाता है...,
२. जनता को पता चलने पर, इन नौकरशाही ,सत्ताशाहीयों पर कार्यवाही करने के लिए कानूनशाही भी अपने पुतला चाल से फाईलों को हिलाने में, न्याय पर, तारीख पर, तारीख देकर.. इनकी तारीफ़ कर,इनके कसीदे पढ़कर, , इनके फाईलों में धूल फांखकर..., क़ानून के दीमक (वकील), अपना दिमाग लगाकर, इन फाइलों को चट कर , क़ानून को फेल कर देते हैं,, और जीवंत पुतला ताल ठोककर, भ्रष्टाचार का एक नया किला बनाकर..., आगे वे, अपना ही पुतला, गली गली चौराहे पर लगाकर..., देश का गौरव कह ..., इतिहास में अमर हो जाता हैं..., और इस लुंज-पूंज शाही से, देश के भविष्य के गर्भ में और भी भीमकाय पुतलों का निर्माण होकर, देश के संसाधनों पर अतिक्रमण होते रहेगा
क्योंकि १९४७ से आज तक इनके लिए हथकड़ी से लेकर जेल नहीं बनी है.., और साबूत छूटकर, जीते जी लोकतंत्र के ताबूत में एक नई कील ठोककर, देश के वर्तमान को इतिहास बना देते हैं...,
३. मेरे देशवासियों, देश की हर योजनाओ पर ध्यान रखना… , आगे योजनाओ के पाठयक्रम से क्या-क्या नये घोटालो का उदघाटन होगा…??? भ्रष्टाचार से योजनाए, शिलान्यास से सत्यानास की ओर जा रही है, हजारो योजनाए धूल चाट रही है..?? छोटी योजनाए कागज पर कब आयी .. कब गयी.. जनता को पता भी नही चलता है..???, योजनाओ के नाम से, यह सिर्फ भ्रष्टाचार का पाठयक्रम बन गया है..?? इसमे अच्छे नम्बर पाने वालो के लिए, राजनिती की उँची मंजिल की एक नई सीढी अपने आप तैयार होती है…???
४ आज, गाँधी शब्द और इमानदार पुतले (मुन्ना मोहन), की आड मे, नीव में, बैइमान व विदेशी बैंक, धनवान बन रहे हैं..???
५. राजीव गाँधी कहते थे गरीबों की योजनाओ का पैसा 15% तक, जनता तक पहुँचता है, राहुल गाँधी कहते है.. 5% तक ..???
अभी हाल मे सुप्रीम कोर्ट ने ताल ठोक कर कहा कहा है कि गरीब लोगों के नाम से बनी योजनाओ सिर्फ 1% गरीबों तक पहुँचती है..???
क्या मेरा देश…?? भ्रष्टाचार से लूटा…. या मेरा देश डूबा…???

६. दोस्तों गांधी जयन्ती तो इनके लिए प्रेरक दिवस की आड़ में, लूट दिवस की, भ्रष्टाचार से लूट की होली, दिवाली है क्योंकि इसी दिन ही तो गांधी की तूती बोली है......
गांधी के आदर्श से, अपने को गांधी के उपनाम (इंदिरा से राहुल गांधी) से, अपना भाग्य कह, उनका वंश वादी कहकर , वंशवाद के दंश से...., लूट का अधिकृत लाइसेंस मानकर, देश को, एक पुतले की आड़ में नेता, कैसे भ्रष्टाचार से देश को २१वी शताब्दी में ले जाने के नारों से, लूट के महासमंदर से,कर्ज से देश को १८ वी शताब्दी से भी बेकार स्तिथी में धकेल दिया है......कि वर्तमान सरकार को विदेशी झोलियों के सामने हाथ फैलाना पड़ रहा है..