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Saturday, 28 February 2015



बजट...!!!, चेतो मोदी सरकार.., 
गरीबों के लिए बाजू हट…, अभी तक..., सभी सत्ताधारियों का एक और एक ही ध्येय, यों कहें...,   PET –ROLE प्रिय खेल, और DIESEL के भाव बढ़ा कर जनता का दिल जला रहा रहें  है..., अभी तो तेल कंपनियो ने इस खेल को देखकर, बजट की घोषणा  के दिन ही,डीजल पेट्रोल के ३.२० रूपये बढ़ाकर, इस खेल में ताल मारकर, सुर में सुर मिलाने की शुरूवात कर दी है...
देश के  बर्बादी की..,  बढ़ती कहानी कोई नहीं रोक सकता है, जब तक जनता, राष्ट्रवादी बनकर, देश की मिट्टी, माफियाओं द्वारा  बिकने नहीं, देने का प्रण करें...
हर  सत्ताधारी, कहता है.., पिछली सरकार थी बेकार, बनाया घोटालों का पहाड. और अपने पहाड़े से जनता को अच्छे दिन का पहाड़ा पढ़ाकर , चुनाव में दहाड़ लगाकर, चौकीदार बनकर, अमीरों के चौकट में बैठकर, उन्हें विकास का विधाता बताकर, देश का बन्ना (दुल्हा) बनाकर, इस बारात से ५ वर्षों के बराती बनकर...,      
अमीरों के लिए, BIG – HUT बड़ा महल.

MANGO BUDGET – अमीर MAN –GROW बजट , गरीब का मन – रो ( MAN – RO ) बजट का खेल आज भी बदस्तूर जारी है...
 यह CORPORATE-उद्धोग घरानों के लिये CARPET (कालीन/गलीचे) वाला बजट होता है, जमाखोरो के लिये जुबली (आनंदोत्सव का अवसर ) बजट होता है, और गरीबो के लिये गला घोटने वाला बजट और् वह मानसिक तौर पर बीमार होते जाता है, अभी एक रिपोर्ट आइ कि इस साल देश मे मधुमेह और दिल की बीमारी से दवा कपनी की बिक्री मे 39% की वृद्धि हुई है ( अभी सरकार एक और महाघोटाले की योजना बना रही है, मनमोहन सरकार ने तो अपने कार्यकाल  103 सालों के लिये जनता के लिये दवा खरीदने व मधुमेह रोग के जाँच की योजना भी बना ली थी, सिर्फ उद्घाटन करने के पहिले बलि हो गई...
आज हर सत्ताधारी , जनता को भरमाकर कहता है की पिछड़ा शासक लुटेरा था..., नया शासक भी जनता को हटाकर , गरीबों को लात मारकर अमीरों के बंगलों की सौगात लाता है....,
आज मौजूदा सरकार ने हर तबके को विकास के नाम से निचोड दिया है, दवा से दारू, गैस सिलिडर से केरोसिन, पेट्रोल, डीजल से बस किराया. मुंबई मे तो नगर पालिका ने संपति कर भी बडा दिया है, जितनी महगाई बढ रही है , उतनी ही नागरिक सुविधाये कम होते जा रही है, और मुंबई जैसे महानगर मे , जो देश के आर्थिक राजधानी है, जो मध्यम वर्ग का पढा लिखा परिवार , इस प्रतिरोरोध करने मे लाचार होकर, प्रशासन से पूछ्ने मे भी लाचार है कि प्रशासन से पगा क्यो ले ?
एक अंग्रेजी अखबार मे मैने पढा कि नये इमारतो के निर्माण मे बिल्डर शहर के नगरपालिका को भवन निर्माण मे 40-45% रिश्वत देता है, क्योकि भवन निर्माण मे 42 से ज्यादा अनापत्ति प्रमाणपत्र की जरूरत होती है, बिल्डर इस पंगे से बचने के लिये रिश्वत देता है, व इसकी वसूली वह घर खरीदने वाले से वसूल करता है, यदि किसी ने यह घर बैक कर्ज से लेता है तो वह व्याज सहित 15 सालों मे वह रिश्वत के रकम 3 गुना चुकाता है?
यह काला धन राजनैतिक माफियाओ द्वारा वसूल कर , इस काले धन को देश विदेश मे गुणा कर अकूत संपत्ति बना रहे है, इनके उपर प्रशासन की शह होने से कानून भी डंडा चलाने से भी घबराते है, क्योकि उसके रखवालों के भी पापी पेट का सवाल है?
चीन मे भी शघाई जैसे शहरों मे, भवनों की किमत बेतहाशा बढ रही थी , तो सरकार ने एक नया नियम बनाया कि एक परिवार का देश के शहर मे एक घर होगा, क्योकि अतिरिक्त भवन , काला धन छुपाने का मुख्य स्रोत होता है.
अब आगे आगे देखिये होता है क्या? अब आम निचोडी हुई जनता को और निचोडने के क्या-क्या योजनाये बनती है……???
चाणक्य एक अतुल्य अर्थशास्त्री थे.
सफल बजट् के बारे मे उन्होने कहा था.
जैसे बरसात के पहले बादल समुद्र से अपार मात्रा मे पानी खीचता है , नदी व छोटो श्रोतों से उंनकी क्षमता के अनुसार पानी खीचता है,
लकिन जब बादल बरसता है ,तो वह पृथ्वी मे सबको समान प्रकार से बरसाता है, भेदभाव नही करता है. सुखी जमीन जिसने उसे पानी नही दिया, उसे भी बिना भेदभाव के उस भुमी को भी संचित कर हर क्षेत्र मे हरियाली फैला देता है.
यदि बाढ का प्रकोप फैलाता है तो वह यह नही देखता है कि यह अमीरो की बस्ती है या गरीबों की?
स्कूल मे मैने एक चुटकुला पढा था, शिक्षक , छात्रो से से पूछता है, बच्चो, बताओ बरसात होने के बाद बिजली क्यो चमकती है, बच्चा कहता, मास्टरजी, बादल देखना चाहता है कि कोइ खेत सूखा तो नही रह गया है?
लेकिन इस देश का दुर्भाग्य है कि इस देश का पानी भी अमीरों की मालकियत बन गया है,
अभी 7 महिने पहिले पूना के पास किसाने के खेतो मे जाने वाला पानी रोककर उध्धोगो को दे दिया गया , और जब किसाने ने पानी का हक माँगने के लिये सडकों पर उतरे तो अपने सीने मे गोली खाकर अपना खून दे आये, आज पानी के साथ-साथ उन्के झोपडे भी अमीरों के मालकियत हो जाते है. आज इनके महलो की चमक, गरीबों की आह से होती है.
सुभाषचन्द्र बोस ने कहा था, तुम मुझे खून दो , मै तुम्हे आजादी दूँगा ?
आज की अर्थशास्त्री सरकार कहती है, यदि तुम पानी माँगोगे, तो हम तुम्हारा खून माँगेगें ?


पिछले कार्यकाल में –
हमारे विदेशी अध्यनरत अर्थशास्त्री से प्रधानमत्री बने , जो अनर्थशास्त्री बनकर उनका व्यर्थ शास्त्र उल्टा कहता है की अमीरो का पेट भरकर देश की तोद बाहर आती है,लेकिन देश के राजनैतिक व उन्के शह मे पलने वाले बडे माफियाओ की तोद बाहर आ रही है और वे, कही अपनी तोद फट न जाये ,इस डर से वे अपना धन विदेशी बैको मे जमा कर रहे है, और छोटे माफियाओ जिनकी तोद कम बाहर आ रही है वे उस कालेधन से हर क्षेत्रो मे कृत्रिम तेजी लाकर अपनी तोद बडाने की हौड मे है? और पिछले 10 सालो खाद्दान बाजार से सटोरियो ने 8 लाख करोड कमाये है, और इस धन की भरपाइ देश की आम जनता ने महँगाई के रूप मे की है, और वही किसानो को फसल का उचित किमत न मिलने से 6 लाख से ज्यादा किसानो ने आत्महत्या की है. और सरकार भी इन माफियाओ को संरक्षण दे रही है,
राष्ट्रपति बनने के एक साल पहिले वित्त मत्री, प्रणव मुखर्जी ने बंगाल मे दुर्गा पुजा के दौरान कहा मैने दुर्गा माता से प्रार्थना की कि देश मे मँहगाई कम हो जाय ? दुर्गा माता भी क्या करे, हमारे देश के नेताओ को भगवान से ज्यादा तो देश के माफियाओ से प्यार है?
३, साल पहिले माँरिसस से काले धन पर संधी का प्रारूप बनने की खबर से शेयर बाजार 700 अको तक गिर गया था ,
तब वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बाजार को आवहान करते हुए कहा इसे लागू होने मे 6 महिने लगगे इस घोषणा के बाद शेयर बाजार मे 400 की गिरावट कम हो गई, और आज तक माँरिसस से काले धन पर संधी का नतीजा नही आया है?, जब-जब शेयर बाजार मे साल मे काला सोमवार से शुक्रवार आता है तो वित्त मत्री चिंता मे नयी घोषणा कर शेयर बाजार मे जान फूँक देते है.
४.महँगाई के वजह से गरीबो के जीवन मे तो 365 दिनो का काला दिन होता, और प्रधानमत्री और वित्त मंत्री बारबार बयान देते है की हमारे पास महँगाई दूर करने कि जादुई छडी नही है?, लेकिन , हाँ हमारे पास महँगाई का चाबुक है, इसकी मार खाते जाओ?
पिछली  सरकार की  देश के रक्षा बजट मे 14 हजार करोड के कटौती की जा रही थी , वही हमारा सुपर पावर पडोसी देश चीन अपने रक्षा बजट मे 20% अधिक खर्च कर रहा है.
५.अभी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही मे लताड लगाकर कर कहा देश की पुलिस जो जनता की सुरक्षा के लिये है, वही पुलिस की भारी भरकम फौज देश के नेताओ की सुरक्षा मे क्यो? ऐसे भी देश मे मौजूदा जनसख्या के अनुसार पुलिस बल मे 40% भर्ती के स्थान रिक्त है
याद रहे देश मे 25-30% पुलिस राजनैतिक नेताओ की सुरक्षा मे लगी रहती है, जो हमारे टैक्स के पैसे का दुरूपयोग हो रहा है? और नेताओ की सुरक्षा मे कोई कटौती नही की जा रही है और देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड किया जा रहा है. और विदेशी रक्षा सौदो से मोटी रकम , दलाली के रूप मे कमाई जा रही है?
६.इन राजनैतिक व माफियाओ के वजह से हमारे देश के लघु घरेलू उद्योगो के कुशल कारीगीरों (1992-2014) के हाथ कट जाने के वजह से , सरकार वापस से लघु घरेलू उद्योगो के कुशल कारीगीरों की फौज बनाने की 6 साल की विशाल योजना बना रही है ? (इस योजना मे भी घोटाला होने वाला है..,) वही चीन मे कुशल कारीगीरों की सख्या लगातार बढते जा रही है.
७.याद रहे चीन ने हमारे लघु घरेलू उद्योगो के कुशल कारीगीरों के उत्पाद को आधे से कम किमत से निर्यात कर कुशल कारीगीरों को बेरोजगार कर उनकी कुशलता को खत्म कर दिया, हमारे देश मे कच्चे माल पर स्थानीय, व सरकारी कर, अधिक होने से लघु घरेलू उद्योग दम तोडते गये. आज भी दिवाली, होली व हर धर्मों के त्यौहारे के उत्पाद चीन से ही बनकर आ रहे है?
८. चीन ने आर्थिक उदारीकरण का भरपूर उपयोग का भरपूर फायदा उठाया, कम्यूनिस्ट देश होने के वजह से, विदेशी निवेशकों को विश्वास था कि उनकी नीती नही बदलती है, वही हमारे देश मे नई सरकार आने से पुरानी नीती का भरोसा नही रहता है, 1995 मे , मै एयर इडिया विमान के देर रात की उडान से दिल्ली से बम्बई आ रहा था, तो मेरे बगल के यात्री ने मुझे बताया कि भारत मे जितना विदेशी निवेश हुआ है, उससे कई गुना ज्यादा निवेश तो सिर्फ शंघाई शहर मे हुआ है, और चीन के विकास से मै बहुत प्रभावित हुआ हूँ, अभी दो साल पहले जनरल मोटर्स के मालिक ने कहा था , मै हर महिने जब चीन जाता हूँ , तो मुझे वहा एक नया ढाँचा दिखाई देता है.
९. आज चीन की विकास के बारे मे इंडियन बुद्दीजीवी कहते है कि वहा मजदूरो का शोषण हो रहा है, उनसे काम ज्यादा करवाया जाता है और उन्हे मेहताना कम मिल रहा है, लेकिन हमारे देश मे बेरोजगारी व मेहनत के बावजूद देश का गरीब तबका 20 रूपये भी नही कमा पा रहा है, इंडियन बुद्दीजीवी को हमारे देश के गरीबो का शोषण नही दिखाई दे रहा है.
11. ध्यान रहे चीन ने मजदूरो का शोषण कर दुनिया मे सुपर पावर की अपनी इबादत लिख दी है जबकि हम सुपर पावर के ढोल नगाडे बजाने मे अपना समय बर्बाद करते रहे.
१२. हम घरेलू विकास दर बढाने के चक्कर मे अपने खदाने व भौगोलिक संपदा बिचौलिये माफियाओ द्वारा बेचते गये और देश के राजस्व को चूना लगते गया. देश के घरेलू विकास दर की आड से कई गुना ज्यादा विदेशी बैको की विकास दर बढते गई?
आज यही खदाने व भौगोलिक संपदा देश मे कच्चे माल के तौर पर उपयोग कर नये कारखाने का निर्माण कर हम नये उत्पाद निर्यात कर देश की बेरोजगारी दूर कर अकूत विदेशी मुद्रा कमा सकते है ?
आज दुनिया के देशों की नजरे हमारे खदाने व भौगोलिक संपदा पर लगी हुइ है,उन देशो ने अपनी खदाने व भौगोलिक संपदा अपनी भावी योजनाओ के लिये सुरक्षित रखी है
चीन के सुपर पावर बनने का कारण:
1.
निम्न मुनाफे से दुनिया के बाजारो मे अपनी धाक जमाओ, और विदेशी मुद्रा व देशी रोजगारो का निर्माण करो,और दुनिया के मजदूरो के हाथ काटो.
2.
देश के जनख्या पर नियत्रण, सीमा पर चौकसी, ताकि देश मे कोइ घुसपैठीया, घुसपैठ का साहस न करे
3.
योजनाओ को अपने लक्ष्य से पहिले पूरा करो
4.
योजनाओ से मिला लाभ को निम्न समय मे योजनाओ को शून्य खर्च से लाभ मे परिवर्तित करो., इसका ताजा उदाहरण है कि ओलपिक आयोजन का लक्ष्य वे 3 साल पहिले पूरा करने वाले थे , तब सरकार ने आदेश दिया कि अब काम की गति धीरे करो
चीन के ओलपिक आयोजन को देखकर दुनिया की आखे चकाचौंध हो गई,आज तक इतना भव्य आयोजन दुनिया के किसी देश ने नही किया है.
(
वही हमारे देश ने 5000 करोड के कामन वेल्थ गेम मे 1 लाख करोड खर्च करने के बावजूद ,अफरा तफरी मे खेल का आयोजन हुआ, 15 दिन पहले गिरा मुख्य पुल सेना ने 8 दिनो मे पुन: निर्माण किया, खेलगाँव के मकानो के घरो मे कुत्त्तो का बसेरा था,निर्माण कार्य अधूरा होने से खिलाडियो को पाँच सितारा होटलों में ठहराया गया, दर्शको को खेल का टिकट नही बेचा गया ताकि आयोजको को डर था, स्टेडियमो के खचाखच भरने से कहीं स्टेडियम न ढह जाये?)
दोस्तो..लिखने तो बहुत कुछ है....,