Saturday, 21 February 2015



देश के मंत्रालयों में .., जासूसों ने अपने मंत्र से बनाया जासूसालय..का एक लय !!!! 
क्या..,अब फिर से, महाराष्ट्र का मंत्रालय बना मूत्रालय, सचिवालय बना शौचालय, अब बना दलालों का अड्डा, फिर खुद रहा.., भ्रष्टाचार का गड्डा, सत्ता के इस चक्के से, आम आदमी भौचक्का...!!! 
दलालों से जनता हलाल.. शिवसेना के समर्थन हटाने की गीदड़ धमकी से शरद पवार का चेहरा लाल, नरेंद्र मोदी भी खेले एक चाल, कहे शरद पवार मेरे मित्र.., भविष्य में महाराष्ट्र की मेरे सत्ता को देंगें, प्रेम पत्र.., विकास के मुद्दे छूटे पीछे, एक दूसरे को पटखनी देने में छोड़ रहें है, पसीने,
इसी आड़ में सरकारी कर्मचारी से अधिकारियों व दलालों की बहार..,

१.आधे से ज्यादा अधिकारी चार बजे से पहले बहाना बनाकर घर भाग जातें हैं तो कुछ अन्य विभागों में जाकर गप्पे मारते हैं
२. चाय के कप और गप्पों के रंगत में रंग सचिवालय में राज्य के कोने कोने से काम करने आये आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं होती है.., लंच टाइम के बाद भी घंटों तक अधिकारी..., भोजन के बाद, आपसी भजन से गायब रहतें हैं..
३. नई सरकार आने के बाद मंत्रालय में, मंत्रियों ने.., चक्कर लगाकर अपने-अपने कार्यालय पसंद किये लेकिन फर्नीचर का कलर पसंद न आने की वजह से अधिकांश मंत्री अपने बंगले से ही काम काज चला रहें हैं
४. कई मंत्री तो सोमवार से शुक्रवार तक बाहर के कार्यक्रम में व्यस्त हैं, जिसकी वजह से प्रशासनिक अधिकारियों पर किसी का डर नहीं है.
५. मंत्रियों की लापरवाही और आपसी तालमेल न होने से आम जनता की सुनवाई नहीं हो रही है.
६. राज्य का मंत्रालय आम जनता के लिए पहेली सा बन गया है, आम आदमी से वादा कर, एकमुश्त युवाओं का वोट देने से युवाओं को एक्टिव मुख्यमंत्री देने के वादे से.., अपने को ठगा महसूस कर रह़ा है,
७. अधिकारी स्तर पर फाईलें एक टेबल से दूसरे तक जाते-जाते गायब हो जाती हैं ..,जिस व्यक्ती का काम होता है,उसका पूरा काम फाइल खोजने में ही बीत जता है..
८. सरकार ने सेवा अधिकार कानून का आदेश देने के बावजूद कार्यालय के बाहर सूचना बोर्ड का वजूद न होने से विभागों के कार्य की जानकारी नदारद है
९. विभागों के नये व पुराने मंत्रिओं के बीच बांटे जाने से,सूचना न होने से आम आदमी स्थान्तरित कार्यालय को नहीं खोज पाता है, कुल मिलाकर मंत्रालय में आने वाला एक आदमी यदि कोई विभाग ढूंढ लेता है तो उसे लगता है कि जंग जीत लिया है.
१०. पल्लवी दराडे के पति मुख्यमंत्री के सचिव है, जब से पल्लवी दराडे ने अतिरिक्त महानगर पालिका का आयुक्त का पद संभाला है, उसे अहंकार हो गया है , और जनता से संवाद बंद कर दिया है...
११. भाजपा के माधव भंडारी ने शिवसेना के परिवहन मंत्री को पत्र लिखकर पेट्रोल,डीजल के भाव कम होने के बावजूद परिवहन शुल्क कम करने की मांग पर आपसी कलह से जूझ रही सरकार से जनता का भरोसा उठाता जा रहा है..
फेस बुक October 24, 2013 की पोस्ट ·
जरूर पढ़े ...., देश का मंत्रालय बना मूत्रालय, (PMO –प्रधानमंत्री कार्यालय ) बना.... पॉकेट मनी ऑफिस और देश का चोरालय....से देश को बना रहे है भ्रष्टाचार का शौचालय..????????????,
दोस्तों , सत्ता के यह मंत्र है.... भूख, फूख, फूंख ,थूक, थूककर, चाटकर ,चुनाव के पहिले.... जनता को भारत का भाग्य विधाता बताकर, चुनाव के बाद..... जनता से कहते है.... “तेरा मेरा क्या है.. नाता ??? क्योंकि भ्रष्टाचार, हमे है भाता ...” इस सिद्धांत से संविधान की दुहाई देते कहते है , हमारे सब “माफिया, अलगाववादी ,घुसपैठी, धर्मवादी, हैं ... सत्ता के लूट के भ्राता {भाई-भाई}...”
प्रधानमंत्री की, आज के फूक को उड़ाने की इतनी शक्ति है ...वे देश को भी उड़ा सकते है (आतंकवाद से – देश की सीमा पर जवानों के हाथ बांधकर, सिर कटवाकर, विदेशी धन की भीख मांगकर , देश के टुकड़े करने का गंभीर ख़तरा बना है) .
अभी सिचाई घोटाले के भ्रष्टाचार में, भ्रष्टाचार के महाभीम शरद पवार के भतीजे, जो महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार से छोटा भीम मंत्री... अजीत पवार के नाम से जो, जाने जाते है.. ने विदर्भ के सूखा पीड़ित श्रेत्र के दौरे के दौरान किसानों का उपहास उपहास उड़ाते हुए कहा था , यदि मेरे पेशाब करने से सूखा गायब होता है तो.... मै पेशाब करने के लिए तैयार हूँ.....,
महाराष्ट्र में २० लाख करोड़ के अधिक घोटालो से , जब मंत्रालय में मूत्रालय की असहनीय बदबू आने लगी तो, इसे अचानक लगी आग कहकर, जनता को भरमाकर, महाराष्ट्र के घोटाले से सभी मंत्रियों के पाप जल गए , इसमें ८० हजार करोड़ का सिचाई घोटाला , लवासा में गैर कानूनी निर्माण का २ लाख करोड़ व , गरीबों के घर देने के माफिया व सत्ताखोरों के मिली भगत के कागजाद भस्म हो गए, मंत्रालय में लगे संविधान के शेर की उभरती मूर्ती भी इस आग में झुलस गयी , यह तो नेताओं को अक्ल आयी कि, आग के दौरान तिरंगा झंडा उतार लिया
आज सत्ताखोर, जनता को अपनी पैरों की जूती समझते हुए , गरीबों के जीवन को आम जनता के नाम से, उनके जीवन को रौदते हुए, अपने शरीर में शक्ति का संचार कर , आज गली, मोहल्ले, शहर , जिले से प्रदेश व देश का मुस्टंडा नेता जनता को चुनौती देते हुए कहता है ..इस खेल में हमें .रोक सके तो रोक लो...तुम तो अनेक हों...????
जनता अपने को अकेला समझकर सोचती है कि, मै तो... घास का तिनका हूँ, ये सत्ताधारी, तो जानवरों से भी गए गुजरे , भ्रष्टाचार के विशालकाय प्राणी है, कहीं मै और मेरा परिवार को इनके पैरों तले रौदा न जाऊ , इससे वह अपने को, बचाने में लगा है.
१. *****भूख ... सत्ताखोर , पेपर पर योंजनाओं को भोजनायें, बनाकर उस पेपर को चाट कर अपनी भ्रष्टाचार की भूख मिटाता है, और जनता को पता भी नहीं चलता है
२. *****फूख ....***** पेपर चाटने के बाद सताखोर, योजनाओं के पेपर, फूख मारकर उड़ा देता है
३. *****फूंख...... सत्ताखोरों के फूक से , जब भ्रष्टाचार के चाट कर उड़े हुए पेपर जनता के पास पहुँचते है , भ्रष्टाचार को चाटने के बाद कुछ चिन्ह उन पेपरों में जनता को मिलते है , तो जनता के बवाल के पहिले ही, इस पेपर को सत्ताखोरों द्वारा फूंख / जला, दिये जाते है.
३. *****थूक ... जनता द्वारा प्रश्न उठाने पर, सत्ताखोर... जनता पर थूकते हुए कहता है – तुम्हें तो अनेक हो.... जो करना है करों , हमारे पास , नौकरशाही , जज शाही व डंडे वाले पुलिस की भारी भरकम फ़ौज है
४. *****चुनाव के पहले... वही नेता जनता पर लगे अपने थूक के दाग, जनता के घर-घर जाकर चाटता है , उनके प्रशंसित कर कहता है , आप ही देश के भाग्य विधाता हो , मुझे सत्ता में चुनकर भेजो , मै तुम्हारी हर समस्याओं का निदान कर, एक ऐसा हिंदुस्थान बनाऊगा..??? जहां गम नहीं.. खुशी के फूल लगाऊँगा, कहकर जनता की आँखों में धुल झोककर, अपने १०० पीढी के भ्रष्टाचार के बाग़ बनाता है.
५. *****चुनाव के बाद ....नेता..., नगर, जिला से शहर, प्रदेश, व देश तक का सेवक कहलवा कर ..., अपनी पद पर रहते हुये , भक्षक बन कर, वह न तो संवैधानिक भवन में उपस्थित होटा है , और न तो जनता के बीच होता है... (नगर निगम ,विधान भवन व संसद से गायब होकर).. वह तो भ्रष्टाचार के भव सागर में गोते लगाकर भ्रष्टाचार का पानी पी जाता है... अपनी १०० पीढी के लिए अय्याशी के बाग़ बनाटा है
६. *****चाणक्य ने कहा था , “राजनेता..... एक मछली की तरह है , तालाब से समुन्द्र तक की मछली मुंह तो हिलाती है, लेकिन वह कितना पानी पीती है, किसी को पता नहीं चलता है”
७.*****जनता द्वारा शोर मचाने पर वह कहता है “तेरा मेरा क्या है नाता...?? , हमें तो है... भ्रष्टाचार भाता , देशवासियों यह डूबते देश की कहानी है, यह सताखोरों की जनता के लिए एक लोरी है...??? ताकि जनता गहरी नींद में सोये रहें...जागो देशवासियों ....डूबते देश को राष्ट्रवाद की धारा से... देश को बचाओ