Sunday, 1 February 2015

कोइ दावा नही – मेरे दोस्तों इस फेस बुक पेज को एक हजार नये लाईक व वेबसाईट के सितम्बर २०१२ से अब तक की १५० पोस्टों के लिए १० हजार लोगों की यात्रा का ध्येय देखना चाहता हूं , ताकि मेरी कलम की स्याही न कहें, देश के वातावरण में धर्मवाद,जातिवाद,अलगाववाद की धुल मेरी तन में जमकर विलीन हो गई है...



 कोइ दावा नही – मेरे दोस्तों इस फेस बुक पेज को एक हजार नये लाईक व वेबसाईट के सितम्बर २०१२ से अब तक की १५० पोस्टों के लिए १० हजार लोगों की यात्रा का ध्येय देखना चाहता हूं , ताकि मेरी कलम की स्याही न कहें, देश के वातावरण में धर्मवाद,जातिवाद,अलगाववाद की धुल मेरी तन में जमकर विलीन हो गई है... 

यह वेब साईट (वेब स्थल) विशुध्द रूप से हिंदुस्तानियों के लिये है, मौजूदा परिपेक्ष्य (हालात) को देख कर मैं हताश हो गया हूँ।
इस हताशा से कही मैं विक्षिप्त ना हो जाऊँ....!!!!, कह्ते है मन की घुटन से आदमी विक्षिप्त हो जाता है और जो बेबाक कह्ता है उसे समाज पागल कह्ता है।
मैं हिंदुस्तान क एक बुद्धूजीवी(बुद्धीजीवी नही) हूँ। कृपया इंडिया के बुद्धीजीवी इसे न पढ़ें। इस वेबसाईट को जो भारतीय, जो , इंडियन बनने की होड़ में दौढ़ रहे हैं,
कृपया वे इसका चिंतन हिंदुस्तानी विचारधारा से जुड़ कर अपने विवेक से सोचें।
यह वेबसाईट मेरी नीजी सम्पत्ति / मेरे नीजी विचार हैं और ना ही , किसी संघटन ने मुझे यह लिखने को प्रेरित किया है। यह किसी व्यक्ति / पार्टी व अन्य लोगों के प्रति राग-द्वेष से नही लिखा गया हैं।
कहते हैं एक की मौत मे करोड़ों लोग आंसू बहाते है, लेकिन देश में करोड़ों लोग, ऐसे होते है, जिनके लिये कोई आँसू बहानेवाला भी नही होता है। वे कफन का जुगाड़ भी नही कर पाते हैं।
यह वेबसाईट उन हिंदुस्तानियों लोगों के लिये है जो देश के सभी पार्टियों के शासक वर्ग, हिंदुस्तानियों को सत्ता की शराब समझ कर नशे मे देश मे राज कर रहे हैं।
इस वेबसाईट के सभी लेख, कार्टून न तो काँपीराइट है , न तो काँपीलेफ्ट है। वे काँपीस्ट्रेट हैं।हिंदुस्तानियों को मेरे विचार पसंद आए तो इसे छाप कर वितरण किजीयेगा।
इस वेबसाईट मे सरल से सरल, आम बोलचाल वाली हिंदी का प्रयोग किया गया है ताकि गैर हिंदी भाषा वर्ग भी इसे आसानी से पढ सके।
मुझे मेरे जान से प्यारे देश मे देशद्रोही बनने का कारण है कि सत्ताधारिओ, विरोधी पक्ष व उनके पिछलग्गू लोगो ने देशप्रेमी का चोला पहनकर सता को शराब समझकर अभी भी लूट के नशे मे है, आज आम हिन्दुस्तानी पर लगभग ५० हजार से ज्यादा का कर्जा है, हमारी नीतीयां हमारे कर्ज देने वाले देशो के इशारे पर बनती है
जब की आम हिन्दुस्तानीयो की पसीने कि कमाई काले धन के रूप मे विदेशी बैको मे जमा हो कर , वही काला धन ,विदेशों से अप्रत्यक्ष रूप से सफेद धन के रूप मे , देश मे कर्ज के रूप मे आता है,आज आम हिन्दुस्तानीयो को इसका खामियाजा भुगतना पड रहा है