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Friday, 12 December 2014


 शिवसेना नेता और अब मंत्री बन चुके दिवाकर रावते ने मार्च में विधानपरिषद में कहा था, 'एमआईएम पर ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगाया था। एमआईएम प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी पर औरंगाबाद में पाबंदी लगा दी गई है। अब इस दल पर पूरे महाराष्ट्र में प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। नांदेड़ में कांग्रेस ने हाल ही हुए महानगरपालिका चुनाव में एमआईएम के साथ गठजोड़ किया। हाल ही में आजाद मैदान दंगे और धुले दंगे जैसी कईघटनाएं हुई और उनसे पुलिस का मनोबल गिरा है। कुछ नेता अल्पसंख्यकों का वोट पाने के लिए उनका तुष्टीकरण करते हैं।'

शिवसेना के प्रत्यक्ष समर्थन और परोक्ष मदद से मालेगांव में दो कट्टर मुस्लिम पार्टियों के महापौर और उपमहापौर चुने गए हैं. शिवसेना ने 'तीसरा महाज' के हाजी इब्राहिम को सीधा समर्थन दिया और वह विपक्ष के 32 मतों के मुकाबले 46 वोटों से महापौर चुने गए.

उपमहापौर के चुनाव की वोटिंग में शिवसेना ने हिस्सा नहीं लिया और तटस्थ रही। इसी का नतीजा यह हुआ कि असदउद्दीन ओवौसी की पार्टी एमआईएम के उम्मीदवार शेख यूनुस उपमहापौर चुन लिए गए। एमआईएम उम्मीदवार ने उपमहापौर पद के लिए खड़े मालेगांव विकास अधाड़ी के सुनील गायकवाड़ को 34-32 के मामूली अंतर से हराया.

महापौर और उपमहापौर चुनाव के लिए मालेगांव के नगरसेवकों में दो गुट बन गए थे। तीसरा महाज, शिवसेना और मित्र दल एक तरफ इकट्ठा हुए. दूसरी तरफ, कांग्रेस, जनता दल और मालेगांव विकास आघाड़ी ने दूसरा गुट बना लिया था. हाल में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनसीपी के आठ नगरसेवक एमआईएम में शामिल हो गए थे.

राज्यमंत्री बने दादा भुसे को पिछले चुनाव में मालेगांव विकास आघाड़ी के सुनील गायकवाड़ ने कड़ी टक्कर दी थी। इसलिए शिवसेना ने गायकवाड़ को हराने में अपनी शक्ति लगा दी। शिवसेना चाहती तो एमआईएम का उपमहापौर बनने से रोक सकती थी। मगर ऐन समय तटस्थ रहकर उपमहापौर चुनाव में मतदान ही नहीं किया. केवल दो वोटों के अंतर से एमआईएम का उपमहापौर चुन लिया गया.

ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवार को उपमहापौर बनने में शिवसेना की 'मदद' पार्टी के रुख में बड़ा बदलाव है या स्थानीय सियासत की मजबूरी, यह तो बाद में ही पता चलेगा. शिवसेना लगातार एमआईएम और ओवैसी भाइयों पर हमले बोलती रही है। नवंबर में भी 'सामना' के संपादकीय में लिखा गया था, 'ओवैसी बंधु की कट्टरपंथी विचार व्यक्त करने और उनका प्रचार प्रसार करने की आदत है। दोनों ने देश में मुस्लिमों के दिमाग में जहर भरा.'

क्या अब भी...,ओवैसी को .., देश के लिए 100 करोड़ हिन्दुओ को खत्म करने के लिए 15 मिनट चाहिए...!!!,

इस खबर से बौखलाए उद्दव ठाकरे का १० अगस्त २०१३ का अपने को, अपने पिता की छवि बनकर.., उग्र बयान..., अब सत्ता के लालच में दोनों ही रख रहें है..., तलवार एक ही म्यान में....

सत्ता की कहावत “सत्ता में दुश्मन...दोस्त हो कर दावत खाते हैं... और जनता पर धर्म के मोहरे से, आफत लाते हैं...”

अब तो असदुद्दीन ओवैसी, खुले आम, अपने को इस्लाम का स्वंभू मसीहा मानकर, फरमान सुना दिया है..कि यदि हिन्दुस्तान , पाकिस्तान का युध्ह होता है तो देश के मुसलबान, पाकिस्तान के तरफ से बाण चलाएंगे ,

बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रह़ा है कि, हमारा संविधान भी असारुद्दीन ओवैसी को “देशप्रेमी” मानकर अब भी चुप है..., मीडिया ने भी इस बयान से पल्ला झाड़कर एक छोटी खबर कहा है.........

याद रहे जब असदुद्दीन ओवैसी को जेल की हवा खानी पड़ी , तो कोर्ट ने भी उन्हे जमानत देते समय कहा था कि... राम का विरोध करते हो...., परंतु, देखो तुम्हें जमानत दिलवा कर जेल से बाहर निकालने के लिए भी एडवोकेट राम आये है... बड़े दुख के साथ लिखना पड़ रहा है, मनमोहन सरकार के कार्यकाल में.., इसी ताजा घटना के समय, संसद को हंगामाबाजी से स्थगित करने के लिए, संसद मे, असादुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन जो सांसद थे , उन्हे, सोनिया गांधी ने इशारा कर, उकसाने का प्रयत्न किया..कि हुडदंग से संसद की कार्यवाही स्थगित करा दो .???. संसद के समय की बरबादी से ...देश की बरबादी का खेल तो अब भी विपक्षी दलों द्वारा बदस्तूर जारी है.. ...

क्या अपने को “हिंदु हिर्दय सम्राट” व सत्ता से दूर रहने वाले बाल ठाकरे, के सपूत से साबूत बनाकर, अपनी पार्टी को ताबूत बनाकर, कील ठोकने की यारी से तैय्यारी , अब.., उद्धव ठाकरे अपनी राजनीती का धर्म बदलने जा रहें हैं.., याद रहें ओवैसी ने महाराष्ट्र में भतीजे राज ठाकरे को धुल चटाकर २ सींटें जीती थी.., महाराष्ट्र की सत्ता में, मुख्यमंत्री बनने के चक्कर में अपने को हिंदुत्व के शेर के चोले में लोमड़ी के खेल से बेन काब तो पहले ही, हो गये थे.. (१० अगस्त २०१३ की दूसरी खबर)