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Thursday, 2 October 2014



अब महिला मानवाधिकार आयोग भी , मैला –धिक्कार आयोग बनकर फूले नहीं शमा रहा ..जजशाही भी नहीं शर्मा रही है.., घूस खोर शाही के लिए चूस खोर बनकर इस मुद्दे पर आबाद है...क्योंकि देश का संविधान , पश्चिम माफियाओं के गिरफ्त में है...

सत्यमेव जयते का अर्थ से देश की अनर्थाता कर,
सत्ता, मेवा, जयते – सत्ता एक मेवा है, इसकी जय है (सत्यम) (जो, मेरे वेबस्थल का स्लोगन है...), जब भ्रष्टाचार के त्रिशूल से (शिवम है), और भारत निर्माण के मेक अप से देश की सुंदरता का बखान हो रहा है (सुंदरम है ), – दोस्तो... यही डूबते देश की कहानी है, यह देश की, लूट – पानी है...., सत्य की खाल से, माफियाओ की ढाल बनी है , यह देश के बरबादी की मनमानी है .
१९४७ से सत्यमेव जयते से तो नेता .., अब अभिनेता भी उल्लू बनाविंग , करोड़ों रूपये कमाकर TRP बढ़ाविंग, मोदी का प्रखर विरोध कर, प्रधानमंत्री बनने के बाद, अपनी TRP की सी.डी. सौपिंग, इसी आड़ में “नग्न मेव जयते” की जय हो से, विदेशी संस्कृति चोरी कर देश पर थोपिंग व जनता को भरमाविंग

इनकी नग्नता में मीडिया भी भागीदार बनकर, इसकी पीछे की गन्दगी चाटकर , मीडिया भी पेट भरी बन गई है , P.K की देखा देखी में.., क्या अब आमीर खान भी अपनी फिल्म “पीपली लाइव” की तरह गांवों में जाकर,क्या इस पीके फिल्म की पब्लिसिटी के लिए , ट्रांसिस्टर लेकर नग्न होकर जायेंगे/ घूमते नजर आयेंगे.....,
आमिर खान अपनी 'पीके' के हाल में रिलीज हुए पोस्टर में जिस तरह न्यूमड नजर आए थे ठीक उसी तर्ज पर बॉलीवुड निर्देशक कांति शाह ने 'ओके' नाम की अपनी फिल्म का एक पोस्टजर रिलीज किया है। इसमें फिल्म की अभिनेत्री न्यूड नजर आ रही हैं और उनके गले में सिर्फ एक कैमरा लटका हुआ है. 'पीके' के पोस्टर में आमिर खान ने अपने शरीर के निचले हिस्से को एक ट्रांजिस्टर से ढंक रखा था जबकि 'ओके' के पोस्टार में हिरोइन का प्राइवेट पार्ट कैमरे से ढंका है.
'ओके' का पोस्टर....., 'ओके' के पोस्टर में फिल्म की अभिनेत्री पूनम रॉय एक रेलवे ट्रैक पर खड़ी हैं, ठीक उसी तरह जैसे आमिर खान 'पीके' के पोस्टर में दिखाई दिए थे। रॉय ने अपनी गर्दन से एक कैमरा लटका रखा है और इससे उनका प्राइवेट पार्ट ढंका हुआ है। उनके शरीर का बाकी हिस्सा न्यूड है। कांति शाह के इस पोस्टर पर विवाद हो सकता है क्योंकि आमिर का न्यू ड पोस्टर भी जब सामने आया था तो काफी बवाल मचा था। 'ओके' की कहानी देह व्याथपार के धंधे पर आधारित है.
कौन हैं कांति शाह?..., कांति शाह को बॉलीवुड की बी ग्रेड फिल्मों. का डायरेक्टर माना जाता है. उन्होंने कई फिल्में बनाई हैं जिनमें मिथुन चक्रवर्ती की लीड रोल वाली गुंडा प्रमुख है। इसके अलावा उन्होंने अंगूर, गरम, रंगबाज, फूलन हसीना रामकली, बसंती तांगेवाली, गंगा जमुना की ललकार आदि फिल्में बनाई हैं।

यदि, सत्यमेव जयते का हमारे नेता सत्कार करते तो, आज संविधान के जज, वकील और सरकारी बाबूओं की अय्याशीपन की दूकान न चलती .., वकीलों की टोली भूखी मरती...
मेरे वेबस्थल का स्लोगन है, “सत्ता मेवा है..,इसकी जय है” “मेरा संविधान महान..., यहां हर माफिया पहलवान”
१८७२ के पुलिस कानून बनने के पहले, देश में सिर्फ सदाचार से जनता भी समाज में सम्मान खोने के डर से उनकी आत्मा..., दुराचार, दुष्कर्म, बेईमानी करने से उसका हाथ पकड लेती थी
लार्ड मैकाले ने १८३५ में ब्रिटिश संसद में कहा था , मैंने हिन्दुस्तान के ओर –छोर (पाकिस्तान, बर्मा व अन्य हिन्दुस्थान से जुड़ें देश) की यात्रा की , मुझे कोई चोर उच्चका,भिखारी नहीं मिला, यदि इस देश को ब्रिटिश साम्राजय की सैकड़ों सालों की गुलामी के लिए अंग्रेजी भाषा की गुलामी थोपो...,
विदेशी आक्रमणकारियों के हमारे देश इतने हमले होने के बावजूद हमारा समाज , गुरूकुल शिक्षा से देशी, भाषा, विचार,संस्कार से समृद्ध था..
दोस्तों आज इस विदेशी संस्कृति की आड़ में गरीबो की देश शोषण व अमीरों के वहसीकरण से हिन्दुस्तान डूब रहा है...
याद रहे..., २००५ में आमीर खान ने मंगल पांडे फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी , युवा वर्ग कह रहे थे..., आमीर खान ने क्या बेहतरीन भूमिका निभाई है, लेकिन मंगल पांडे की क्रांती व बलिदान की अहम् भूमिका को भूल गए..,
२००७ में, दो साल बाद , मंगल पांडे का १५० वाँ जन्म था, इस फिल्म से करोड़ों रूपये कमाने वाले आमीर खान ने , दुर्लक्ष्य कर , इस दिन कोई उत्सव तो दूर की कौड़ी रही.., देश को कोई सन्देश तक नहीं दिया..., देश के अखबारों के विज्ञापनों भी बुझ गए थे ,
मंगल पांडे तो, इन दिखावेबाजों के धूल के तले आज तक दबें पड़ें हैं..
‘मंगल पांडे’ ने यह अहसास कराया कि जिन आजाद हवाओं में वह सांस ले रहे हैं वह उन्हें मंगल पांडे जैसे सेनानियों के बलिदान की बदौलत मिली है।’’
हमारे देश की गरीबी बेचकर , धनाड्य वर्ग से, फिल्म इंडस्ट्री के लोग और अमीर बनते गए.., १९५०-६० के दशक से “जागते रहो”, दो बीघा जमीन “और हाल की “जय हो “ और सत्यजीत रे जैसे फिल्म निर्माता अंतर्राष्ट्रीय पटल में पुरूस्कार पाकर वाहवाही लूटते रहें, ,देश का तिरस्कार कर, देश की गरीबी की छवी से विश्व में प्रसिद्ध हो गए..,

विदेशी देशों में इन्होनें हमारी ऐसी छवी बना दी थी कि विदेशी कहते थे , इस देश की संस्कृति पाषाण युग की है,,, यह देश सांप की पूजा करने वाला देश है...,
बलात्कार के चमत्कार से “सत्ता का सत्कार..”
वाह क्या सीन है ...
(कलमुंहे मेरी जयंती से “सत्यमेव जयते” का नशा “पी के” मेरी तरह जनता को “बेवकूफ” बना रहा है.
काले कपड़ों में मेरी वकालत नहीं चली..., तो सफ़ेद कपड़ों से असफल रहने से , अर्ध नग्नता से मैंने देश के टुकड़े रोकने के लिए “असत्य” की “रेल की पटरी” पर , खड़े होकर, मेरे शरीर के टुकड़े करने की धमकी दी थी ...)