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Sunday, 31 August 2014



मैं मुंबई नगरपालिका की चौथी कक्षा के मेरे शिक्षक को ,अभी भी याद करता हूँ, और धोंडू नाम के चपरासी को जो सन १९७० के बाद आज भी मेरे लिए जीवंत व प्रेरणा के स्रोत है... 
मेरे नगरपालिका में एक ही शिक्षक जो सभी विषय पढ़ाते थे , गुरू बनकर.., एक विषय पढ़ाने के लिए १ घंटे से ३ घंटे लेते थे , जब तक उन्हें विश्वास नहीं होता था कि सब बच्चे सीख गए है....
उनका रोज का नियम था , मेंज पर दैनिक अखबार , और पढ़ाते समय ..., बीच –बीच में देश की ताजा खबर हमें सुनाते थे..., और भ्रष्टाचार की खबर सुनकर एकदम भावुक होकर द्रवित हो जाते थे ..., कहते थे अभी देश की आबादी ५० करोड़ है..., देश में भ्रष्टाचार की बहार है..., बढ़ती जनसँख्या एक बड़ी दुविधा है...,और कहते थे...,
बिहार में एक पुल का ठेका फंला-फंला मंत्री ने ५ लाख रूपये (आज के ५० करोड़ रूपये) में लिया और अपने नीचे के मंत्री को ३ लाख रूपये में वह ठेका सौप दिया और बैठे-बैठे २ लाख रूपये कमा गया , नीचे वाले मंत्री ने वह ठेका अपने नीचे के विभाग के मंत्री को १ लाख रूपये देकर वह भी २ लाख रूपये कमा गया .., अब बचे हुए १ लाख में क्या ख़ाक पुल बनेगा ..., उसे तो १ लाख रूपये के निर्माण में भी , आपसी दलाली से.. गिरना ही पडेगा ...,
वह हम सब छात्रों से कहता था ..., देश की चिंता करो...कम से कम सुबह या दोपहर में अखबार के मोटे अक्षरों में लिखे समाचार तो पढों...
तब मैं , सोचता था यह शिक्षक पगला गया है.., हमारे शिक्षा छेत्र के बाहर के विषय को, हम पर क्यों थोप रहा है...
आज उसकी वाणी एक दम सार्थक हो रही है..., और हमारा धोंडू नाम का चपरासी, जिसके मुंह में गुस्सा व दिल में प्यार रहता था , नगरपालिका का कच्चा दूध न पीने से, हम मेंज के नीचे छिपने पर, वह हमारी कमीज खीचकर कहता था ..., यदि ये, भरी बोतले वापस नगरपालिका में जायेंगी तो उसे विद्यार्थी की अनुपस्थिती मानकर शिक्षक पर कारवाई की जायेंगी..
आज मुम्बई में ही नहीं देश में माफियाओं की साठगांठ से जहरीला दूध पीकर, व दोपहर के भोजन में जहरीला खाना खिलने से लाखों बच्चों के मौत हो चुकी है...इसके बावजूद भी सत्त्ताखोरों का दिल नहीं पसीजा है....
काश १९७० के स्वच्छ भ्रष्टाचार मुक्त नगरपालिका ..,साफ़ सुथरा वातावरण, हर देशवासी भले अमीर नहीं था , मेहनती था लेकिन संतोषी था ..., गलत काम करने पर उसकी आत्मा लताड कर कहती थी तुम देश के लिए बनें हो..., देश को बनाओं...
मैं , आज भी भगवान् से कहता हूं , हे भगवान् मुझे ला दे, वह वातावरण .., मैं ही नहीं, हर देशवासी सुखी रहेगा