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Monday, 18 August 2014



15 अगस्त को लाल किले से लाल –पीले होकर.., प्रधानमंत्री ने कृष्ण के भूमिका में अपने गोपियों को लताड़ते हुए कहा , देश की माखन हांडी में गरीबों की मेहनत का माखन है..., उसे मत चुराओ.., “मैं न तो खाता हूँ , न खाने देता देता हूँ...”

अपने पार्टी के मंत्री, सरकारी अधिकारी, कर्मचारियों, व चुनावी कार्यकर्ताओं , जो इस हांडी को भ्रष्टाचार की मंडी बनाकर, अर्जुन बन कर , माखन को मछली की आँख समझकर पिछले ६७ सालों से इस हांडी में छेद कर , अपने हिस्से जुगाड़ कर रहें थे..,

लाल किले से दहाड़ते हुए.., देश के सरकारी तंत्र को लताड़ते हुए कहा.., मेंरा क्या..??, (माखन में हिस्सा)..., तो मैं क्यों करूं... (हिस्सा नहीं मिला तो ),.??? ...”, इस भावना के तीर से देश को बर्बाद मत करों ..

यदि देश के २० करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी , यह सोचे कि “मैंने देश को अपने कर्मफल, परिश्रम से देश को क्या दिया...??? , मैं देश को और कितना दे सकता हूँ..,”

और अपने अर्जुनों को चेताया कि यदि, आप १२...१३..१४...१५ घंटे काम करें... , तो आज जो देश ६७ सालों के बूढ़ेपन में चला गया है..., उसकी उम्र घटकर, देश के जवानों की उम्र से , देश एक नए स्फूर्ती से जवान हिन्दुस्तान बनकर, .., विश्वगुरू की प्रतिभा से निखार ला सकता है..,
दोस्तों ..., मोदीजी को तो पिछले दस सालों के, कांग्रेस के राज की फूटी हुई, माखन हांडी मिली है...,
जमीन में गिरा हुआ माखन से अब किण्वन fermentation, खमीर yeast, की खुमारी से देश के हर गली , मुहल्ले, शहर से देश मैं , भ्रष्टाचार के मच्छर पैदा हो गए हैं , जो मरेलिया (नेता द्वारा फैला हुआ वायरस) नाम के विषाणु से पिछले १० सालों में ५ लाल से अधिक किसानों व नवजात शिशु से जवान तक काल के गाल समा गएँ हैं...
इसीलिए प्रधानमंत्री ने इसकी शुरूवात अपने कार्यालय से की है..., सफाई से..., ताकि “मरेलिया” के इस वायरस से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय से सफाया हो...,

पिछले १० साल के इस१०० लाख करोड़ से ज्यादा देशी मुद्रा के महाघोटालों के बावजूद, आज भी जनता में संवेदना कायम है, कि मंदबुद्धी मोहन बेहद इमानदार है..., उन्हें तो प्रधानमंत्री पद का इनाम इसीलिए मिला था, मंदबुद्धी मोहन भी देशवासियों से कह रहें हैं कि मैंने माखन नहीं खायो..., मेरे हाथ में कांग्रेस ने भारत निर्माण का एक छुपा हतौडा दे दिया था ..,

आज तक, इस हांडी को फोड़ने वाले हाथ का दोषी कौन है..., हमारा कानून भी संशयित है..,
“आम आदमी” के नारों के हाथों से, सामंतवादी जहर से, पंजावाद के बल से, भ्रष्टाचार के दल-दल से, “देश लुट चुका है,” अब तो देश का माखन, माफियाओं ने विदेशी हांडीयों (बैंक) में सुरक्षित रखा है..., अब प्रश्न यह उठता है कि यह हांडीयां देश में आ पायेगी...!!!!!
दोस्तों बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है...,
इस खेल के, बचावदार, महामुनीम प्रणव मुखर्जी को राजनेताओं की दिलदारी से वित्तमंत्री पद से राष्ट्रपति पद की उन्नती के इनाम से महामहीम से सुशोभित कर.., देश के उच्चतम नागरिक का गर्व मिला है...,