Sunday, 8 June 2014



हमें आगे बढ़ना है तो…. चीन से सिखना पड़ेगा 
एक साल पुरानी पोस्ट ..इन्द्रधनुष के तो सात रंग होते है, आज मोहल्ले, शहर से देश तक लाखों रंग रूप के भ्रष्टाचारी धनुष तानकर जनता को लूट रहें है , हर योजना में तारीख पर तारीख से देश लूट रहा है और जनता भी न्याय में तारीख पर तारीख से उजड़ रही है, भ्रष्टाचारी तो …. तारीख को, तारीफ़ समझकर अपने हौसले बुलंद कर रहा है
यह ११ कि.मी का सेतु (ब्रिज), आज तक १०० से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है, बीच में ३ बार सेतु के हिस्से ढह चुके थे , २ साल की योजना में, ६ साल लगाने के बाद , जुलाई २०१३ की तारीख दी गई थी , अभी भी कार्य ३०% अधूरा, न इस योजना का कोइ रखवाला है, जनता भी अपने को असहाय समझ कर चुप बैठी है , यह मेट्रो जैसे पढ़े लिखे नागरिको का है… तो दूर दराज के लोग तो सरकार के लिए गाजर मूली है ….उनकी तो जुबान चुप करा दी जाती है…???.
दूसरी योजना, मुंबई की मोनो रेल्वे की हे , जो समय के साथ भी, दुगनी लागत से ज्यादा लगा चुका है, कई बार मजदूरों की बलि लेकर ढह चुका, सेतु… कही मौत का हेतु न बन जाए , इसलिए इसका ६ महीनों से परिक्षण चल रहा है , वह अब अपने अंतिम चरण में है
वही हाल, देश का गर्व माने जाने वाले….. वर्ली समुन्द्र सेतु योजना का था, ३७५ करोड़ की योजना जो ४ साल में साल में पूरी होनी थी, वह १५ सालों में १८०० करोडी की लागत लग गई
चीन का चिंगदाओ-हाइवान समुद्र सेतु – इस पुल को बनने में मात्र चार वर्षों का समय लगा, यह सेतु 30 जून 2011 को खोला गया इस सेतु की लम्बाई ४२.५ किमी है जो इसे विश्व का सबसे लम्बा समुद्री सेतु बनता है और इसके निर्माण में कुल १०,००० लोग लगे हुए थे। इस पुल का डिज़ाइन शान्दोंग गाओसू समूह ने बनाया था और इस पुल पर कुल ४,५०,००० टन इस्पात और २३ लाख घन मीटर कांक्रीट का उपयोग किया गया,अब चीन अपनी योजना भावी योजना से यूरोप तक मार्ग बनाकर बुलेट ट्रैन का खाका तैयार कर रहा है? दूनिया को अचम्भित कर दिया , हमें आगे बढ़ना है तो…. चीन से सिखना पड़ेगा.