Monday, 2 June 2014



मोदी ने अपने साथियों से कह दिया है..., अब भाई – भतीजावाज के चालबाज, व लालबत्ती के दिखावाबाज , मेरे मंत्रीमंडल में नहीं टिकेंगे ..., सत्ता को मोदक समझनेवाले..????.,
मोदीवाद जो राष्ट्रवाद का पर्याय बन चुका है ... अब देश की समस्याओं को निपटाने के लिए राष्ट्रवादी रथ के घोड़ों को १८ घंटे दौड़ना पडेगा, कही ये घोड़े देश का चना न खा जाए, इनकी निगरानी के लिए एक निगरानी दल भी लगा दिया है ताकि उनकारथ कमल की सुन्दरता आड़ से राजनीती के कीचड़ में न धंस जाये...
मोदी की चाय की केतली से जेटली व इरानी की प्यास भी बुझ गई है....
सुषमा स्वराज के लिए तो...., मन्त्री पद सुराज है..., मनचाहा पद न मिलने से सुस्वर में कह रही थी ..., मैं पद नहीं सम्भालूँगी

अब प्रश्न यह है कि ..., ये चार घोड़े १०० दिनों में मोदी रथ को कितना दौडाते है...., यदि half में हांफने लगे तो इनके बदले २७२+ घोड़ों से भी बदली हो सकती है....
मोदीजी, जय जवान .., जय किसान .., जय विज्ञान ..., के राष्ट्रवादी विचारों के दृढ निश्चय से आये है..., उनकी कामना करे..., उनकी सफलता के साथ , देश व देश वासीयों को भी सफलता मिले
मोदीजी ने १२ सालों में एक भी छुट्टी नहीं ली, वही
सरकारी विभाग में तो छुट्टीयों के अम्बार के साथ , कर्मचारियों के कछूआ चाल से काम करने व , जम्हाई लेकर अपने को देश का जमाई समझकर, भ्रष्टाचार की नई-नई केचुली पहनकर अपना जीवन चमका रहें है..., इस देश में में तो चपरासी भी चप –चप कर करोड़ों की दौलत के साथ पकड़े गए हैं.. ,, तो ऊपर वालों के साम्राज्य की आप कल्पना कर सकते ... आम जनता भी सकते में है...,
आज तक,सभी पार्टियों के अधिकांश मंत्री से संत्रीयों ने विदेशी दौरों व फर्जी चिकित्सा से आनन्द लिया , यदिदेश के १७ करोड़ सरकारी नौकरशाही /कर्मचारी, पहल कर, यह सोचें कि .., मैंने राष्ट्र को क्या दिया , तो देश की गरीबी अपने आप दूर हो जायेगी
इस अय्याशी की लत आज देश के अधिकांश से ज्यादा नेताओं को नेहरू काल से उद् भव होकर , इसकी कुरूपता वंशवाद से धनबल,माफियाबल में परिवर्तीत होकर , लोकतंत्र जनता के लिए लाठी तंत्र , लूट तंत्र, धर्मतंत्र , अलगाव तंत्र की आड़ में देश को आज तक हर सरकार ने देश को पीछे सरकाकर , जनता का आम जीवन १९४७ के पहले से भी बदतर कर दिया है...,
हर साख पर लुटेरा है, पेड़ में पत्ते से ज्यादा भ्रष्टाचार के दीमक ...जातिवाद, भाषावाद, अलगाववाद के दिमाग से पेड़ (देश) को खोखला बना रहें है,
आओ..., राष्ट्रवाद को जीवन की धारा बनाये..... , और हम सब ...नदियों के रूप मे मिलकर, देश को, सुख - संपन्न्ता व वैभव का एक महासागर बनायें ....
फेस बुक की September 18, 2013 पोस्ट
राष्ट्रवाद.... सत्य का बडा भाई है... जो नागरिक राष्ट्रवादी है, वो देशवासियों को अपना परिवार मानता है, देश को पिता और भारत माता (जन्म भूमि) को अपनी माता. इसी कारण वह, लूट्वाद, जातिवाद, भाषावाद, अलगाववाद को अपना दुश्मन व वोट बैंक को... , देश के चोट बैंक का पत्थर मानता है, वह भ्रष्ट नेताओं के अफीमी नारो से....., देश को डूबाने से वारे-न्यारे की भनक लगाकर उसका मुकाबला कर उसका निदान करता है.
सत्य मेव जयते…., अब बना , सत्ता मेवा जयते ....????, सत्ता एक मेवा है, इसकी जय है (जो, मेरे वेबस्थल का स्लोगन है...), और , इसी की आड मे सत्यम शिवम सुंदरम.... सत्ता एक मेवा है (सत्यम), जो भ्रष्टाचार के त्रिशूल से (शिवम है), और “ भारत निर्माण” के मेक अप से देश की सुंदरता के बखान से (सुंदरम है ),
एक ओटो रिक्शा के पीछे लिखा था सत्य परेशान होता है... लेकिन पराजित नही होता..??. आज के माहौल मे सत्य इतना परेशान होता है कि असत्य के हमले से आत्महत्या कर लेता है., (किसान आत्महत्या/ भूखमरी योजनाओं को, सत्ताखोरों के डकारने से, गरीबी से मौत )....
(आज के कानून की परिभाषा = कान+ऊन = कान मे ऊन = गरीबों के न्याय मे, कानून बहरा है, और भ्रष्ट अमीरों व माफियाओं के लिए कानून ... सेहरा बनकर, उनके गलत कृत्यों को सरताज कहकर, उन्हे, एक – एक , नये - नये ताज पहना रहा है….????) यही, आज का कानून, जो... गरीबों की गुहार सुनने के बजाय, कान मे ऊन डाल कर, तारीख पर तारीख देकर उसे प्रताडित करते रह्ता है. भ्रष्ट सत्ताखोरो, नौकरशाहों व माफियाओ के डर से जजशाही भी, कही अपना निवाला ना छिन जाये, इसलिए इनके चरण दास बन कर..... सत्य की परेशानी को और बढावा दे रही है. मेरे वेब स्थल का दूसरा स्लोगन है मेरा संविधान महान.... यहा हर माफिया पहलवान.... क्योंकि.... कानून से ज्यादा, आज पैसा है, बलवान... तो, क्यों ना डूबे हिंदुस्थान... भ्रष्टाचारी बने राजा... तो, क्यों ना बजे देश का बैंड बाजा....? और हर योजनायें, भोजनाये बन के खाजा , तो भी नही होगा बाल बॉका ...
–दोस्तो... जिस देश मे राष्ट्रवाद नही है, वहां, कर्ज की महामारी है, सत्ता खोरो मे लूट की खुमारी है, जनता के शोषण से राष्ट्र को बीमारी है... यही डूबते देश की कहानी है, राष्ट्रवाद की पुकार से ही.. हो , राष्ट्र की ललकार...???? हर दहाड़ , दुश्मनों के लिए बने पहाड़