Monday, 12 May 2014



सोने की चिडिया के मोहन प्यारे..., अब १४ मई २०१४ को आपके बोतल की शराब ख़त्म हो रही है..., प्रधानमंत्री तो, वृक्षारोपण से देश की हरियाला के दिखावे से सुर्खिया बटोरता है..., लेकिन आपने तो हर गली व मुहल्ले में भ्रष्टाचार के १० साल से बरगदी पेड लगाकर ,देश के माफियाओं को भ्रष्टाचार के सुखद छांव में लूटने का आनन्द दिया 
..., यह सच कहा आपने पैसे पेड़ पर नहीं उगते है..., लकिन देश के बरगदी पेड़ में माफिया व भ्रष्टाचारी ने हर टहनी को आनन्द का झूला बनाएं और आप फूले नहीं समाये...,
अब समय आ गया है... कांग्रेस के इस नये व १३०साल तक के पुराने भ्रष्टाचारी बरगदी पेड़ को ढहाने का जिसमे नेहरू से आज तक के नेताओं ने इस सुखद छांव के आनन्द से देश में अंधियारा डाल रखा है

Posted on 26 January 2013. की पोस्ट ....जागो मोहन प्यारे, अब तो गरीबो के जीवन मे उजियारा डालो…?????
उन्हे 20 रू से ज्यादा, दिहाडी तो कमाने दो…??????? तुम्हारे विकास के उजियारे के छाँव मे गरीबो के जीवन मे अंधियारा मत डालो….??? जागो, हे मेरे देश के मन, मौनी बाबा बनकर नही….??? अब सत्ता के बोतल का नशा तो छोडो..????
अभी राहुल गाधी ने काँग्रेस का उपाध्यक्ष बनने के बाद कहा कि सोनिया गाँधी ने मुझसे कहा था , राजनीती मे सत्ता एक नशा होता है, इससे कोई अछूता रहना नही चाहता है?
एक आम कार्यकर्ता भी प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देखता है, यहाँ तक कि, वह अपने मोहल्ले का नेता होने पर भी , वह अपने आप को एक छोटे प्रधानमंत्री के रूप मानकर, जनता को बरगलाकर अपना सुख भोगता है.
एक दुल्हा एक दिन का राजा होता है, उसका स्वागत समारोह समाप्त होने के बाद वह आम युवक बन जाता है और अपने नीजी जीवन मे रोटी कमांने के लिये खेतो, कारखानो, व कार्यालय मे व्यस्त हो जाता है
वही प्रधानमंत्री पद मे हर नई सुबह की शुरूवात दुल्हे के रूप मे होती है, गाडियों का काँरवा, झूठे बरातियों की देश को लूटने वालों की भीड, दुल्हे की यात्रा मे 10 कि.मी.तक रास्ते, , आम लोगो के लिये बंद, शहर के नौकरशाहों की फौज , प्रधानमंत्री की सेवा मे लामबंद, शहर के गरीब लोगो के जिदगी मे ब्रेक,लोगो के समय व धन की बर्बादी, प्रधानमंत्री के अगल बगल मे कैमरो का जुमला, प्रधानमंत्री , इसके बाद यदि किसी वृक्षा रोपण समारोह मे जाते है, तो वहाँ रोपण से पहले गड्ढा खुदा रहता है, प्रधानमंत्री, सिर्फ एक फावडा से मिट्टी डाल कर , राष्ट्र को हरित क्राती का नारा देकर, देश को तन्दुरूस्त रखने का दावा करते है, टी.वी. अखबारो मे प्रधानमंत्री की वाहवाही होती है और देश को 22 वी शताब्दी मे ले जाने की, दूरदर्शीता की बात होती है. वह इस चकाचौध के नशे मे इतना डूब जाता है कि अपने होशो-हवाश खोकर अपने कर्तव्य पथ को भूल कर पद भ्रष्ट हो जाता है.
इस एक वृक्षारोपण का खर्च करोडों रुपये आता है, उसका कोइ माली नही होने से वह पेड भी अपना जीवन, देश के आम आदमी के जीवन की तरह भगवान भरोसे छोड देता है?

जागो देशवासियों हम राष्ट्रवाद की धारा मे आकर.., डूबते देश को बचायें ॥ सीमा पार दुश्मन भी चाह रहे है हम आपसी लड़ाई से कमजोर हो जाये ताकि हमे सफलता आसानी से प्राप्त हो..