Friday, 11 April 2014



सत्ता की अंतिम आस है... इसलिए बयानों की आग है...समाजवादी पार्टी में तो अब, वोट बैक की झाँक है.. चुनावी साबुन के झाग से अपने को धोने की साख है... , कांग्रेस अब बेबस है..., इस वाक् यद्ध के बारात में तो ...बाराती कम, दुल्हे ज्यादा है... अब यह बारात ... बाकायदा रात के अंधेरे के में खोने के खौफ में हैं