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Saturday, 12 April 2014



दोस्तों बड़े दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है कि हम विदेशी हाथ, विदेशी बात, विदेशी विचार व विदेशी संस्कार को , इन नेताओं द्वारा .. देश के भविष्य की सौगात कह कर.., हमारा देश डूबते जा रहा है...
देश इस भंवर में ऐसा न फंसे को हम डूबते देश को बचा न पायें..., और विदेशी अतिक्रमाणीयों के चुंगल में फिर से गुलामी की बेड़ियाँ न पहन बैठें 
याद रहें... प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में जब देश भुखमरी व अन्य कारणों से हताश था .. देश ताश के पत्ते की तरह ढहने की कगार पर था ..., दुश्मनों को देश हड़पने का सुनहरा अवसर दिख रहा था .. तब कांग्रेस ने विरोध की आवाज में प्रधानमंत्री से कहा विदेशी हाथ को पकड़ों ... प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने राष्ट्रवादी दहाड़ देकर “जय जवान , जय किसान” के नारें से कहा “मैं देश को विदेशियों के बांहों में जकड़ा नहीं देख सकता हूँ...एक गुलामी से निजात पायी है.. दुबारा इस चुंगल में देश को नहीं डालूँगा “
और देश का “एक लाल ... विजयी जवान ...विजयी किसान... ” की विदेशीयों के जहरीले विचारों के रंग से नीले जहर से अपने तन को लाया ...कांग्रेसी तो इसे देश का गम न मानते हुए प्रफुल्लित होकर विदेश में ही अगला प्रधानमंत्री की चर्चा में मशगूल रहें ...
और इसके बाद से ही देश वंशवाद की राजनीती से दंशवाद के जहर के खाद से बर्बाद होते जा रहा है
दुनिया नहीं चाहती है, नरेंद्र मोदी, “राष्ट्रवादी” बनकर राज करें..., सत्ता परिवर्तन के इतिहास से आज तक और विकिलीक्स के बयानों से साफ़ है कि आज तक देश, विदेशी हुकूमत के हुक्के से चल रहा है, (लाल बहादुर शास्त्री को छोड़कर). इसके इंधन (इंधन= IN + धन, विदेशी धन) से माफिया देश देश का धुँआ उड़ाकर , गरीबों की महंगाई से चुन-चुन कर धुनाई कर रही है..,