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Tuesday, 25 March 2014



किसान आत्महत्या, सीमा पर जवानों की ह्त्या, जानवरों की ह्त्या, महंगाई व विदेशी कंपनियों,माफियाओं के मुनाफे व सत्ताखोरों के फास्ट भ्रष्टाचार व फास्ट फ़ूड, बंद डब्बों में धीमा जहर, ऊपर से महंगाई के जादुई छडी के कोड़े से जनता पर मार , और धौस दिखाकर जनता को १५ अगस्त को लाल किले से करें ललकार..., देशी व विदेशी माफियाओं को देकर दुलार .. कहें “हमारे पास कोई काडू जादू की छड़ी नहीं हैं कि... महंगाई दूर हो जाये”
दोस्तों एक बात पर गौर करें ,१९४७ में अंग्रेजों से सत्ता परिवर्तन का सौदा कर, इसे आजादी का नाम देकर, आज तक गांवों में गरीबों के पेट में भूख की आग को बुझाने के लिए पानी की भी सुविधा नहीं है... , आज भी उसे पानी लाने के लिए जितनी ऊर्जा चाहिए , उससे ज्यादा उर्जा तो उसकी भूख पानी लाने से पैदा होती है...
मुंबई के ५० किलोमीटर परिधी में पिछले ५ साल में कुंए व आदिवासी विकास में ५० हजार करोड़ रूपये के घोटाले पकड़े गये है... मामले अदालत में विचाराधीन है..., हालात इतने मार्मिक है कि, दूर दराज से पानी की ढुलाई में मासूम बच्चों को अपना स्कूल की पढाई से मरहूम रहना पड़ता है... यह चकाचौंध माया नगरी मुम्बई के दीपक तले, घोर अन्धेरा है..,
अर्थशास्त्र का नियम है... मुनाफ़ा कमाना है कि , जमाखोरों द्वारा बाजार का पूरा माल खरीद कर कृत्रिम तेजी करों,
इसको कुंजी बनाकर हमारे दुधारू पशुओं को काटकर, विदेश में मांस के निर्यात की नीति से दूध का अभाव कर, दुग्ध माफियाओं से सांठ – गांठ कर , केमिकल दूध के व्यापार से दवा माफियाओं का अटूट बंधन है, अभी ६ माह पहिले ही रिपोर्ट आयी थी देश भर में ५०% दूध.., स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है..
हाल ही में हरियाणा के रेल्वे स्टेशनों पर दुग्ध व्यापारियों पर छापा मारने पर, सभी व्यापारी सिंथेटिक दूध से भरे सभी व्यापारी दूध के हंडे छोड़कर भाग गए.. खाध्ह विभाग ने भी, अपना माल पानी लेकर मामला दबा दिया
१९४७ के २० सालों तक भी देशवासी देशी संसाधनों की निर्भरता से , गरीब जरूर था लेकिन मानसिक व शारीरिक रूप से संतुष्ट था , १९७१ में बांग्लादेश के युध्ह में देश को झोककर, ”गरीबी हटाओं” के नारे से देश में महंगाई की शुरूवात हुई ..., “मेरा भारत महान” के नारे के चोले में बेईमानों से इस देश को लूटने की शुरूवात की ... अब ‘भारत निर्माण’ का नारा तो सत्ताखोरों से देशी व विदेशी माफियाओं में भ्रष्टाचार का बिगुल फुक कर..., अब देश को फूंकने की तैयारी है...
गुलाम हिन्दुस्तान में १९४७ तक ३० करोड़ की जनता में १०० करोड़ दुधारू जानवर थे, आज १२५ जनता में ३० करोड़ जानवर हैं,,, कत्ल खानों को विशेष रियायत, निर्यात से विदेशी मुद्रा के खेल में यह सब्सिडी नहीं..!!!, भ्रष्ट जहरीले सत्ता खोरों का सांप सीढ़ी से देश को सड़ाने का तंत्र का जादुई मंत्र के मंत्रियों का खेल है मेला से देश में मैलापन है