Thursday, 6 March 2014



“भारत निर्माण “ के वायदों की बारात है... चुनावी बिसात में, गरीबों को चुन-चुन कर चुनावों की बरसात में डुबाने की तैय्यारी है... PETROL बना , भ्रष्टाचारियों का PET+ ROLE … DISEL बना DIL से गरीबों को जलाने का खेल..और माफियाओं की इसी आड़ में चल पड़ी रेल.. आज देश इन माफियाओं के इस काले धन के धुएं की रेल से ही..., देश में अंधियारा छाया हुआ है... 
देशवासियों इस चुनावी वायदों की बरसात में देश तो डूब रहा है.. किसानों को कर्ज माफी से भरमाने की सौगात ... से देश के किसानों को मारने की १०० लात का खेल है...याद रहे बुलबुले पानी के अंदर ही सुंदर लगते है... प्रकृति की हवा में आने पर फूट कर गायब हो जाते है...., हर चुनावी बुलबुले सत्ताधारियों के सत्ता के लिए चुलबुले होते हैं... जनता के चूल्हे की आग भी बूझ जाती है....
आओं हम राष्ट्रवाद की ऐसी मसाल जलाए ... देश की रोशनी के साथ जनता के दिलों में भी एक नई रोशनी जागे.