Wednesday, 12 February 2014



आजम खां की भैंस खो गई है, सत्ता के राजा ने उसे ब्यूटी क्वीन कह कर अपने होश खो दिए है, पुलिस प्रशासन पर पड़ी भैसे भारी, अब सस्पेंड कर.. पहनी.., अपनी सत्ता की नई सौं – सौं पैंटें ,बनी सत्ता की हज ...
!!!!!...आजम खां की भैंस खो गयी...!!!!!!!
बोलू: नयी खबर हैं बापू, दुनिया कंहा सो गयी
मुस्लिम नेता आजम खां की भैंस खो गयी
सारे नेता, पुलिस, कुत्ते, भैंस को खोज रहे है
अब तक ये, सारे भारत में बोझ रहे हैं

विक्टोरिया क्वीन से सुन्दर बता रहा है
ये कामुक सौन्दर्य स.पा. का जगा रहा है
सभी मिडिया आज भैंस की चर्चे में हैं
क्या सारे चैनल आजम खां के खर्चे में हैं

बापू सारे खोजी कुत्ते, फेल हो गये
अब चारा खाने वाले नेता खेल हो गये
आजम खां की भैंस, कैस को लुटवाती है
माया के खेमे में शक की सुई जाती हैं

बापू, भैंसों के चक्कर में नंगे मार खायेंगे?
क्या भैंसे पर यमराज , यू.पी. आयेंगे
कौंन मजहब, भैंसे खाता है, जांच कराओ
बापू, इनकी खबर लोहिया तक पहुँचाओ
यू. पी. में तो हिन्दू, मुस्लिम झगड़ रहे रहें हैं
डांस - बार बाला को , नेता पकड़ रहे हैं
पिता, पुत्र दोनो ने मिल कर लुफ्त उठाया
ये किस्सा, टी.वी. चैनल ने खूब दिखलाया

लाल बहादुर, गोविन्द भी यू.पी. से आयें
भगत सिह,सुभाष,सावरकर आज देश में हुये पराये
राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध की ये धरती हैं
आजम खां की भैंस, यंहा पर क्यों चरती है

खुद बापू देखो नेता, जानवरों से बदतर
राजनीति में आज सियासी खसम हैं सत्तर
गाय सडक में पन्नी, कागज चाब रही है
आजम खां की भैंस, पंजीरी दाब रही है

ये आज की खबर थी बापू, जो बतलायी
ये सब गांधीवादी हैं, कुछ समझ में आयी
हमारी बातों को सुनकर, गांधी भी चकराया
बोले, बेटा बंदरों ‘आग’ के शोले से बोलों तुम...., मैं फिर आया..!!

साभार: meradeshdoooba.com के लिए,
राजेन्द्र बहुगुणा उर्फ़ कवि “आग”, आज के “काका हाथरसी”, जो बताए देश के नेताओं के पैजामों के नाडा खींची की रस्सी के हनुमानी पुंछ की ज़ुबानी
 

  • माकांत शर्मा लालू को "वोट" दिया तो भी सरकार "कांग्रेस" की.
    मुलायम को "वोट" दिया तो भी सरकार"कांग्रेस" की
    मायावती को "वोट" दिया तो भी सरकार "कांग्रेस" की
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  • Amit Dhawan बूझो तो जाने ...
    मुकेश अम्बानी को थप्पड़ मारो तो नकवी के गाल लाल क्यों ?
    शीला के खिलाफ जांच बोलो तो हर्षवर्धन का बुरा हाल क्यों.?.

    वीरप्पा मोइली के पिछवाड़े लात पड़े तो विजेंद्र गुप्ता कि टेडी चाल क्यों.?
    कांग्रेस अम्बानी कि दूकान तो मोदी के घर माल क्यों.?
    राहुल के खिलाफ विश्वाश लड़े तो बी जे पी में बवाल क्यों.?
    गरीबी अगर हट गयी तो गरीब बढ़ते हर साल क्यों.?.
    सिस्टम बिलकुल ठीक है तो हर शहर में हड़ताल क्यों.?
    आम आदमी के हमदर्द हैं सब तो उसकी खींचती खाल क्यों.?
    लोकतंत्र के मंदिर में बैठे लोकतंत्र के दलाल क्यों ?
    गौ माता के पुजारियों कि आँख में सुवर का बाल क्यों ?
    भ्रस्टाचार के सारे दुश्मन फिर भ्रस्टाचार का जाल क्यों.?
    कांग्रेस बी जे पी दोनों अच्छे फिर देश का बुरा हाल क्यों ?
    लकी येड़ा
  • Rockey Bhadra modi laao desh bachaaooo
  • Rajendra Bahuguna बे-षर्मी
    वाह रे ,भारत की स!सद तू लूटि कमीनो के हाथो!
    ये भारत हैे,कोई केक नही,मत काटो हे ,सहजादो!
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  • Rajendra Bahuguna न!गी राजनीति
    हम राजनीति के न!गे पन को झेल रहे हैं
    प्रजातन्त्र मे! देख,लफ!गे खेल रहे हैं

    ओछे भद्दे षब्दों की कैसी भाशा है
    भ्रश्ट आचरण लोकतन्त्र की परिभाशा है

    अषिश्ट षब्द भी षिश्टाचारी बन जाते हैं
    छल ,बल ,कपटी नेता जनता को भाते हैं
    एक राश्ट्र मे! राजनीति के कितने दल हैं
    जनता की ताकत से नेता आज सफल हैं

    जनमानस की ताकत जन केा काट रही है
    राजनीति डबरो!मे! सागर बा!ट रही है
    छोटे- छोटे मजहब मालिक बन जाते हैं
    आड़ धरम की लेकर मानव को खाते हैं

    गुनाहगार हम हैं जो सब कुछ भूल रहे ह!ै
    ये आमलेट से अण्डे , नेता फूल रहे ह!ै
    बलात्कार, व्यभिचार देष को भा जाता है
    आज राश्ट्र को नरभक्षी नेता खाता है

    राम कृश्ण के भजन भाव मे!घाव हरे! हैं
    धर्मो में आडम्बर देखो आज खरे हैं
    आड़मे अल्ला ईष्वर की मत मिलजाते है!
    आज दरिन्दे दानव बन, मानव खाते है!

    इस राजनीति मे! नये-नये अ!कुर बोराये
    क्षेत्र ,जाति जन-मत के सबने ढेर बनाये
    ठाकुर,पण्डित,वैेष्य, षुद्र के तालाबो!मे!
    हिन्दू, मुस्लिम आडम्बर काषी काबा मे!

    देष के टुकडे़ करने मे! सब लगे हुये हे!ै
    सभी विरोधी देखो कितने सगे हुये हे!ै
    हम मालिक है! हमको कुछ भी पता नही है
    प्रजा-तन्त्र न!गा होता है!,कोइ खता नही है

    भीडो! से अच्छा चुनकर के कब आता हेै
    अच्छा भी मजबूर, भ्रश्ट बन ही जाता हेै
    लावारिस है हरा - भरा मरूधान य!हा पर
    डेढ़ अरब के कीडे़ है!,कब कौन क!हा पर

    प्रजातन्त्र की बन्जर धरती है झा!सो मे!
    फसल नही बस, नेता है गाजर घासो! मे!
    नश्ट करो फिर दुगनी होकर उग आती हैे!
    कवि‘आग’ की कलम व्यर्थ मे! ही गाती है।।
  • Rajendra Bahuguna न!गी राजनीति
  • Rajendra Bahuguna न!गी राजनीति
  • Rajendra Bahuguna दिल्ली का लोकपाल
    ना पास हुआ ना फेल हुआ, देखो ये कैसा खेल हुआ
    तर्को और कू-तर्को मे!षब्दो! का ठेलम-ठेल हुआ
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